हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम कांतिप्रकाशपुर में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के साथ काफी अन्याय किया जा रहा है। कुछ जमीन दलाल और राजस्व के अधिकारी मिलकर इन भोले भाले गरीब कोरवा जनजाति के लोगों को लूटने का काम कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला पिछले दो– तीन वर्षो से हमारे द्वारा लगातार उठाया जाता रहा है, जहां कुछ जमीन दलालों द्वारा एक पहाड़ी कोरवा सुग्गी आत्मज सोमार साय कोरवा की जमीन खसरा नंबर 527 रकबा 0.1700 पर कब्जा कर लिया गया था और उस जमीन पर अवैध तरीके से मकान का निर्माण कराया जा रहा था। हिंद स्वराष्ट्र के दखल के बाद उस जमीन पर स्टे लगा दिया गया और एसडीएम कोर्ट में 170(ख) के तहत प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की गई, लेकिन स्थगन आदेश के बावजूद अनावेदक अब्दुल जली मिरकली द्वारा उक्त मकान के निर्माण कार्य को लगातार जारी रखा गया जिसकी शिकायत पहाड़ी कोरवा द्वारा कलेक्टर से लेकर पुलिस तक की गई लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की और मकान का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया और अनावेदक बड़े गर्व के साथ उस मकान में आज पर्यंत निवासरत हैं। आश्चर्य की बात यह है कि आज वह जमीन जो कभी कोरवा की हुई करती थी आज अनावेदक भुनेश्वर प्रसाद आत्मज मुरलीधर जाति गोंड और धरम साय बखला उरांव जाति के लोगों की हो गई है। यह चमत्कार कैसे हुआ यह तो प्रशासन ही बता पाएगा..?
देखें स्थगन आदेश :
अब सवाल यह उठता है कि जब राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को सरगुजा प्रशासन मदद ही नहीं दे सकता है, बार-बार आवेदन के बावजूद अगर उनकी गुहार नहीं सुन सकता है तो फिर राष्ट्रपति के स्वागत और जनजातीय लोगों के विकास के झूठे दावे क्यों करता हैं..? झूठे दिखावे भी जिला प्रशासन को बंद कर देनी चाहिए क्योंकि क्रांतिप्रकाशपुर में हो रहे जमीन घोटाले किसी से भी छुपे हुए नहीं है। कोरबा की जमीन पर अवैध तरीके से अतिक्रमण कर बड़े-बड़े बिल्डिंग ठोक दिए गए हैं और इस मामले में राजस्व के कई अधिकारियों द्वारा अपने हाथ भी रंग लिए गए हैं, लेकिन वहां से गुजरने वाले नेता, मंत्री और जनजातीय लोगों के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लोग कभी इनकी मदद के लिए सामने नहीं आते हैं। बस यह छोटे-मोटे और कभी-कभी बड़े आयोजन कर कुछ एक जनजातीय लोगों को सम्मानित कर वाहवाही लूटने का काम करते हैं।
आपको बता दें कि कांतिप्रकाशपुर में कोरवा जनजाति के लोगों की जमीन को हड़पने का यह कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि यहां बड़े स्तर पर जमीन घोटाला हो रहा है और बेचारे गरीबों की जमीन लूटकर धड़ल्ले से जमीन की खरीदी बिक्री का कार्य किया जा रहा हैं।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : आज दिनांक 16-11-2025 को ग्राम झूमरपारा में मां कुदरगढ़ी सरगुजा झण्डा मानस सेवा समिति(पंजी.) के तत्वाधान में प्रति वर्ष होने वाले माघ पूर्णिमा को राम चरित मानस गायन वादन प्रतियोगिता इस वर्ष आगामी एक फरवरी 2026 से ग्राम झूमरपारा में होना तय हुआ है । इसी संबंध में संयुक्त रुप से केन्द्रीय समिति एवं आयोजन की बैठक सम्पन्न हुई,बैठक में आयोजन को दिव्य व भव्य बनाने के संबंध में विस्तृत चर्चा हुआ । 1. कार्यक्रम में प्रति दिन का अलग अलग पुरुस्कार दिए जाने । 2. द्वीतीय दिवस को विशेष बनाने के लिए बाल /बालिका एवं महिला मंडलियों का आयोजन किया जाएगा जिससे आकर्षण का केन्द्र बना रहे। 3. तृतीय दिवस में यदि चालिस से अधिक मंडली हुए तो चौथे दिन भी कार्यक्रम हो सकता है। 4. प्रत्येक स्तर का अलग अलग पुरुस्कार होगा। जैसे बाल/ बालिका महिला/पुरुष। 5. विशेष प्रतिभा खोज के अंतर्गत – 6. – गायकी में पुरुष/ महिला 7. वादन में उत्कृष्ट तबला/ ढोलक वादन। 8. वादन में ही उत्कृष्ट बैंजो वादन। 9. वादन में ही उत्कृष्ट बांसुरी वादन । 10. भावार्थ में उत्कृष्ट व्याख्याकार को भी पुरस्कृत किए जाने पर चर्चा हुआ। इसके अलावा विशेष प्रतिभा खोज में भोजनावकाश में व्याख्यान माला का आयोजन किया जाएगा। जहां व्याख्याकार को स्मृति चिन्ह एवं प्रस्शति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। बैठक में मुख्य रुप से – केन्द्रीय समिति के मार्गदर्शक एवं संरक्षक ददई राम कुशवाहा, संरक्षक- सुखदेव पटेल, अध्यक्ष- रामभरोस देवांगन, उपाध्यक्ष- रामप्रताप राजवाड़े, उपाध्यक्ष कोरिया- विजेन्द्र अहिर, सचिव -दुबे , कोशाध्क्ष- भजनलाल राजवाड़े, प्रवक्ता – निवास चंद कुशवाहा, मिडिया प्रभारी- गणेश राजवाड़े, सक्रिय सदस्य- रुद्रप्रताप राजवाड़े, सुखलाल यादव तथा आयोजन समिति से – रामानंद जायसवाल,लक्ष्मीनारायण जायसवाल, वेद प्रकाश प्रजापति , शंकर प्रजापति, कमलेश जायसवाल, ग्राम प्रजापति, रामदेव प्रजापति , तुला राम यादव, शिव कुमार प्रजापति आदि बहुत संख्या में उपस्थित थे।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की संभाग स्तरीय बैठक खोपा धाम में प्रदेश कार्य समिति सदस्य अशोक कुमार सोनवानी के नेतृत्व में आयोजित की गई बैठक में सरगुजा संभाग के प्रत्येक जिले से लगभग 15- 15 पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में बताया गया कि संभाग में अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी 8.7 प्रतिशत है और 743 गांव में उनकी उल्लेखनीय बाहुलयता है। बावजूद इसके 14 विधानसभा और तीन लोकसभा क्षेत्र में एक भी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट नहीं है। साथ ही आयोग निगम मंडल में समाज को प्रतिनिधित्व न मिलने से मोर्चा कार्यकर्ताओं ने असंतोष भी व्यक्त किया मुख्य वक्ता अशोक कुमार सोनवानी ने आर्थिक शैक्षणिक व राजनीतिक उन्नति पर विस्तृत मार्गदर्शन देते हुए कहा कि अजा मोर्चा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना होगा बैठक में प्रस्ताव पारित कर उन्हें सर्वसम्मति से अनुसूचित जाति वर्ग के नेतृत्वकर्ता के रूप में चुना गया तथा संगठन से उन्हें अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने की मांग की गई बैठक को फोन के माध्यम से विधायक एवं अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डोमनलाल कोसेवाड़ा ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरगुजा संभाग के अनुसूचित जाति समाज के समग्र विकास के लिए वे सदैव प्रतिबद्ध हैं। बैठक में सुखदेव चौधरी गनपत पाटील और भोला रवि एवं भूषण बघेल ने अतिथियों का स्वागत किया। विभिन्न जिलों के प्रमुख पदाधिकारी ने भी अपने विचार रखें बैठक में रामदेव, पवन, देवेंद्र, सुनीता लहरे, जीव बंधन सोनवानी, धीरन, लालजीवन, मुन्ना रवि, दीपक, मोरे लाल शिवलाल, आनंद लहरे, दिलराज रवि, मनोज, भंवरलाल, शोबरन, जनकधारी, सुदर्शन चौधरी, सुनील सहित अजा मोर्चा के पदाधिकारी एवं कार्यक्रम में उपस्थित रहे इस दौरान कार्यक्रम का आभार भूषण बघेल ने किया।
हिंद स्वराष्ट्र रायपुर/सुकमा: छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश सीमा के घने जंगलों में चलाए गए एक बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन में सुरक्षाबलों को ऐतिहासिक सफलता मिली है। देश के सबसे वांछित और कुख्यात माओवादी कमांडर माडवी हिड़मा को एक भीषण मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया है। इस कार्रवाई में हिड़मा की पत्नी राजे उर्फ राजक्का समेत कुल छह नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
कहाँ हुआ एनकाउंटर?
मुठभेड़ आज (मंगलवार) सुबह आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामाराजू जिले के मारेडुमिली क्षेत्र में हुई।
यह इलाका छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमाओं से सटा हुआ है और माओवादियों का एक मजबूत ठिकाना माना जाता था।
आंध्र प्रदेश की ग्रेहाउंड्स कमांडो टीम और अन्य सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से यह ऑपरेशन चलाया।
कौन था हिड़मा?
असली नाम: संतोष
पद : सीपीआई (माओवादी) की सबसे घातक हमलावर यूनिट, पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन नंबर 1 का प्रमुख। वह केंद्रीय कमेटी का सबसे युवा सदस्य भी था।
इनाम: उसके सिर पर 1 करोड़ रुपये (कुछ स्रोतों के अनुसार 50 लाख) का इनाम घोषित था।
अपराध: 43 वर्षीय हिड़मा 26 से अधिक बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड था, जिनमें शामिल हैं:
2010 दंतेवाड़ा हमला (76 सीआरपीएफ जवान शहीद)
2013 झीरम घाटी नरसंहार (कई शीर्ष कांग्रेसी नेताओं सहित 27 लोग मारे गए)
2021 सुकमा-बीजापुर मुठभेड़ (22 सुरक्षाकर्मी शहीद)
सुरक्षाबलों की बड़ी जीत
सुरक्षा एजेंसियों ने हिड़मा की मौत को नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ और माओवादी आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका करार दिया है। हिड़मा बस्तर क्षेत्र में माओवादियों का चेहरा और सैन्य रणनीति का केंद्र था। उसकी मौत से नक्सली संगठन की कमर टूटनी तय मानी जा रही है।
ऑपरेशन जारी
अधिकारियों के मुताबिक, मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं। इलाके में अभी भी व्यापक कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अन्य नक्सली छिपा न हो। क्या आप इस विषय पर और अधिक जानकारी चाहते हैं, जैसे कि हिड़मा के मारे जाने पर राजनेताओं की प्रतिक्रिया?
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : सरगुजा संभागीय आबकारी उड़नदस्ता की टीम ने नशे के विरुद्ध अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। चंद्रेली निवासी रामबरत रवि को नशीले इंजेक्शन की अवैध बिक्री करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। उसके कब्जे से कुल 200 नग मादक इंजेक्शन जप्त किए गए, जिसमें 100-100 नग दर्द निवारक एवं एलर्जीरोधी इंजेक्शन शामिल थे। रविवार को सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी अपने घर में भारी मात्रा में नशीले इंजेक्शन छिपाकर अवैध रूप से बेच रहा है। सूचना पर टीम ने तत्काल दबिश दी। टीम को देखते ही आरोपी एक झोला लेकर भागने लगा, जिसे दौड़ाकर पकड़ा गया। झोले की तलाशी में अवैध मादक इंजेक्शन की भारी मात्रा बरामद हुई। आरोपी को मादक पदार्थ नियंत्रण कानून (एनडीपीएस) की धारा 22(सी) के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय प्रतापपुर में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे जेल भेजने के आदेश जारी हुए। सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में नशे के सौदागरों पर लगातार हो रही कार्रवाई से पूरे सरगुजा संभाग में दहशत फैल गई है। यह पिछले कुछ महीनों में नशीले इंजेक्शन कारोबारियों पर की गई 26वीं बड़ी कार्रवाई है। कार्रवाई में आबकारी उपनिरीक्षक तेजराम केहरी, मुख्य आरक्षक कुमारु राम, रमेश दुबे, अशोक सोनी, नगर सैनिक गणेश पांडे, रणविजय सिंह तथा महिला सैनिक अंजू एक्का , शामिल रहे।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/ भैयाथान : सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड के तत्कालीन तहसीलदार संजय राठौर द्वारा अपने चेहते जमीन दलालों के साथ मिलकर सरकारी जमीन की अफरातफरी का मामला सामने आया है। आपको बता दे कि भैयाथान क्षेत्र में कुख्यात जमीन तस्करों के साथ संजय राठौर की दोस्ती किसी से छिपी हुई नहीं हैं। भैयाथान क्षेत्र में जमीन की अफरातफरी का यह मामला भी कोई नया मामला नहीं है, तहसीलदार संजय राठौर के कार्यकाल में ऐसे कई कारनामे किए गए हैं जो सिविल सेवा आचरण का सीधे तौर पर उल्लंघन हैं। संजय राठौर द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने का कार्य किया जाता रहा हैं।
तत्कालीन तहसीलदार के मिलीभगत से बड़े झाड़ की जंगल का पट्टा जारी कर दिया गया हैं और इस जमीन की खरीदी–बिक्री का कार्य किया गया। बता दें कि हम जिस जमीन की बात कर रहे हैं वह जमीन 1994– 95 के राजस्व अभिलेख रिकॉर्ड में बड़े झाड़ के जंगल के नाम पर दर्ज और सबसे खास बात यह है कि इस जमीन से संबंधित दस्तावेज संबंधित पटवारी रिकॉर्ड से गायब कर दिए गए हैं। इस जमीन के संबंध में पटवारी रिकॉर्ड में कोई भी रिकार्ड मौजूद नहीं है इस जमीन के मामले में रिकॉर्ड के लिए भू अभिलेख शाखा से ही जानकारी प्राप्त की जा सकती है। हमारे द्वारा जब इस जमीन के संबंध में जानकारी इकट्ठी की गई तो पता चला कि इस जमीन की बिक्री भी कई बार की जा चुकी है इस खसरा नंबर के चार हिस्से हो चुके हैं इस जमीन में तहसीलदार के अलावा पटवारी और राजस्व निरीक्षक(RI) भी बराबर के साझेदार हैं और उनके द्वारा भी इस जमीन घोटाले में अपने हाथ रंग लिए गए हैं।
जिन जमीन दलालों के द्वारा इस जमीन का पट्टा बनवाया गया हैं उस पर तहसीलदार संजय राठौर की विशेष मेहरबानी बनी हुई हैं और कई शासकीय जमीनों का फर्जी तरीके से उनके नाम नामांतरण किया गया हैं। इस जमीन में एक अन्य जमीन दलाल का नाम शामिल हैं जिसके द्वारा इस जमीन की खरीदी बिक्री का कार्य किया गया हैं उनके नाम पर भैयाथान क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों में कई शासकीय जमीनों के फर्जीवाड़े किए गए हैं।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : तहसीलदार लटोरी सुरेंद्र साय पैंकरा अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं पहले तो उन्होंने नियम विरुद्ध तरीके से शासकीय मद से प्राप्त जमीन की रजिस्ट्री करवा दी, अब उन्होंने अपनी चोरी छुपाने नामांतरण का कार्य भी पूर्ण कर दिया है। आपको बता दे कि इससे पहले उन्होंने हमें वैधानिक नोटिस भेजा था और हमने उनसे सवाल पूछा था कि यदि वह गलत नहीं है तो उन्होंने नामांतरण की प्रक्रिया को पूर्ण क्यों नहीं किया तो उसके जवाब में अब तहसीलदार द्वारा नामांतरण की प्रक्रिया को पूर्ण कर दिया गया हैं लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि रजिस्ट्री कर वे पहले ही इतनी बड़ी गलती कर चुके हैं और अब पुनः उस जमीन का नामांतरण कर गलतियां सुधारने की वजह गलतियां दोहराने का काम कर रहे हैं।
दरअसल मामला लटोरी तहसील के ग्राम पंचायत लटोरी का हैं जहां शासन से प्राप्त भूमि खसरा नंबर 211/2 सुमन प्रसाद सिंह द्वारा संतोष कुमार सिंह को बिना कलेक्टर परमिशन के ही बेच दी गई। इस जमीन की रजिस्ट्री 28 मई 2025 को हुई थी और कुछ दिन पूर्व तक इस जमीन का नामांतरण नहीं किया गया था लेकिन अब इस जमीन के नामांतरण का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है।
शासन से प्राप्त भूमि – अहस्तांतरणीय नामांतरण का कार्य हुआ पूर्ण
हालांकि नियमविरुद्ध तरीके से हुई इस रजिस्ट्री की शिकायत संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा से की गई हैं लेकिन अब तक तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है जिससे उन्हें सबूत से छेड़छाड़ करने का पर्याप्त समय मिल जा रहा है और वह इन सबूत के साथ छेड़छाड़ कर अपने बचने का रास्ता बना रहे हैं।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/भैयाथान मुकेश गुप्ता : सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत अनरोखा मे फिर एक बार प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आप को बता दे कि जनपद पंचायत भैयाथान के ग्राम पंचायत अनरोखा में आवास निर्माण कार्य मे भारी गड़बड़ी हुई है। अपूर्ण आवासों को भी पूर्ण बताया गया है। इन अपूर्ण आवासों में अधिकांश आवासों का निर्माण सरपंच और सचिव के मिलीभगत से सरकारी जमीन पर करवाया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार अनरोखा पंचायत की सरपंच सोनकुंवर, ग्राम सचिव लक्ष्मी प्रसाद कनेडिया एवं रोजगार सहायक रेणु कुशवाहा के द्वारा हितग्राहियों को निजी लाभ प्रदान किया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि किसी हितग्राही को पहला किस्त प्राप्त होते ही और किसी हितग्राही को दूसरा किस्त मिलते ही उनका आवास पोर्टल पर पूर्ण बतला दिया गया हैं।
हिंद स्वराष्ट्र की टीम द्वारा जब ग्राम पंचायत में जाकर वास्तविक स्थिति को जानने का प्रयास किया गया तो 17 आवास ऐसे मिले जिन्हें 1 से 2 किस्त प्राप्त होने के बाद सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक और तकनीकी सहायक नवीन जायसवाल द्वारा मिलीभगत कर इन आवासों को पूर्ण बतला दिया गया हैं। यह तो जांच का विषय है कि ऐसा करके हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया गया हैं या स्वयं को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है..??
जिन 17 आवासों की जांच हमारे द्वारा की गई उसकी जानकारी :
1. बजरंग को 95000 रुपयों का भुगतान किया गया हैं और इनका निर्माण कार्य पूर्ण बताया गया हैं।
बजरंग के आवास की स्थिति
2. बोधन को 40000 रुपयों का भुगतान किया गया हैं और इनके द्वारा शासकीय जमीन पर मकान का निर्माण कराया जा रहा हैं।
3. सहेश 95000 रुपयों का भुगतान किया गया हैं और इनके द्वारा शासकीय जमीन पर मकान का निर्माण कराया जा रहा हैं।
सहेश के आवास की वास्तविक स्थिति
4. राम शरण 40000 रुपयों का भुगतान किया गया हैं और इनके द्वारा शासकीय जमीन पर मकान का निर्माण कराया जा रहा हैं।
5. रामाधार 95000 रुपयों का भुगतान किया गया हैं और इनके द्वारा शासकीय जमीन पर मकान का निर्माण कराया जा रहा हैं। 6. परमेश्वर 100000 रुपयों का भुगतान किया गया हैं और इनके द्वारा शासकीय जमीन पर मकान का निर्माण कराया जा रहा हैं। 7. समयलाल 95000 रुपयों का भुगतान किया गया हैं और इनके द्वारा शासकीय जमीन पर मकान का निर्माण कराया जा रहा हैं।
8. संतराम 95000 रुपयों का भुगतान किया गया हैं और इनके द्वारा शासकीय जमीन पर मकान का निर्माण कराया जा रहा हैं।
9. सुजाता तिवारी 40000 रुपयों का भुगतान किया गया है और इनके मकान को पूर्ण बताया गया है।
10. दीनू 40000 रुपयों का भुगतान किया गया है और इनके मकान को पूर्ण बताया गया है। 11. गणेश 40000 रुपयों का भुगतान किया गया है और इनके मकान को पूर्ण बताया गया है।
12.शांतिबाई 95000 का भुगतान किया गया हैं और इनके आवास को पूर्ण बताया गया हैं।
13. कयासों/प्यारी राम 95000 का भुगतान किया गया हैं और इनके आवास को पूर्ण बताया गया हैं।
14. मनी/जगजीत 95000 का भुगतान किया गया हैं और इनके आवास को पूर्ण बताया गया हैं।
15. कौशल्या 40000 का भुगतान किया गया हैं और इनके आवास को पूर्ण बताया गया हैं।
16. पूनमचंद को 120000 का भुगतान किया गया हैं इनके निवास को भी पूर्ण बताया गया हैं।
पूनमचंद का आवास
जिनके कार्य प्रगति पर (bilow foundation level) दिख रहे हैं लेकिन प्रदान की गई राशि में काफी भिन्नता हैं :
एक बेनामी इंसान को भी कर दिया गया 40000 का भुगतान ना नाम का पता ना बाप का पता… ना किया गया जिओटेक.?? हो गया 40000 का भुगतान
उल्लेखनीय की कुछ दिन पूर्व हमारे द्वारा ग्राम पंचायत सिरसी में आवास योजना ग्रामीण में हुए घोटाले की खबर प्रकाशित की गई थी, जिसके बाद प्रशासन द्वारा मामले की जांच करवाई गई थी और मामले में दोषी पाए गए रोजगार सहायक नईम अंसारी को बर्खास्त कर दिया था, वही सरपंच,सचिव और टेक्निकल असिस्टेंट नवीन जायसवाल को भी अंतिम चेतावनी दी थी। लेकिन नवीन जायसवाल के ऊपर इस अंतिम चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ है और वह निरंतर घोटाले पर घोटाले किए जा रहा है।
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले के पंजीकृत किसानों से 15 नवम्बर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जाएगी। धान खरीदी कार्य को सुचारू एवं पारदर्शी रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारी पूरी कर ली गई है।
वर्तमान में समिति प्रबंधक एवं कंप्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल को ध्यान में रखते हुए जिले के सभी 54 धान उपार्जन केन्द्रों हेतु नवीन धान खरीदी प्रभारी एवं कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति पूर्ण कर ली गई है। आगामी 13 नवम्बर 2025 को सभी उपार्जन केन्द्रों में ट्रायल रन आयोजित किया जाएगा, ताकि खरीदी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी या व्यवस्थागत समस्या न हो।
जिले में 1 अतिसंवेदनशील एवं 23 संवेदनशील उपार्जन केन्द्र चिन्हांकित किए गए हैं। सुरक्षा एवं निगरानी के दृष्टिकोण से उड़न दस्ता दल तथा निगरानी दलों का गठन भी पूर्ण कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक उपार्जन केन्द्र में मापक यंत्र, तौल कांटा, बारदाने, कंप्यूटर प्रणाली एवं इंटरनेट कनेक्टिविटी सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं। इस वर्ष जिले को 39,02,190 क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य प्राप्त हुआ है।
कलेक्टर विलास भोसकर ने जिले किसानों से अपील की है कि वे अपने निर्धारित धान उपार्जन केन्द्रों में ही धान विक्रय करें तथा धान विक्रय हेतु अपने पंजीयन एवं टोकन की जानकारी पूर्व में सत्यापित कर लें। शासन द्वारा किसानों के हित में सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं, अतः किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और निर्धारित तिथियों पर सुव्यवस्थित ढंग से अपना धान विक्रय करें।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : जिले के प्रेमनगर में आरईएस विभाग में पदस्थ एक एसडीओ को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। एसडीओ ने एक किसान से रिश्वत की डिमांड की थी। इसकी शिकायत किसान ने एसीबी अम्बिकापुर से की थी। मामले की पुष्टि के बाद योजना बनाकर एसीबी की टीम ने छापा मारकर एसडीओ को रिश्वत की रकम के साथ गिरफ़्तार कर लिया हैं।
मिली जानकारी के अनुसार प्रेमनगर विकासखंड के ग्राम नवापारा खुर्द निवासी दिगंबर सिंह ने मछली पालन के लिए तालाब बनवाने मत्स्य विभाग में आवेदन किया था। उसे तालाब निर्माण की स्वीकृति मिल गई थी। तालाब निर्माण कराने के बाद उसका बिल 1 लाख 82 हजार रुपए पास का काम आरईएस विभाग में पदस्थ एसडीओ ऋषिकांत तिवारी को करना था।मूल्यांकन के बदले एसडीओ ने किसान से 15 हजार रुपए के रिश्वत की मांग की गई थी। इसकी शिकायत किसान ने एसीबी अंबिकापुर की टीम से की थी। जिसकी पुष्टि के बाद एसीबी की टीम ने प्रार्थी दिगंबर से कहकर एसडीओ को आज शाम अपने घर बुलवाया। इधर एसीबी की टीम ने उसे केमिकल लगे 15 हजार रुपए उसे देने के लिए दिए थे। शाम करीब 7 बजे एसडीओ दिगंबर के घर पहुंचा, जैसे ही उसने पैसे लिए, वहां पहले से तैनात एसीबी की टीम ने उसे रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा जिले के अंबिकापुर में आज हत्या के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ हैं। जहां एक नाबालिक प्रेमी द्वारा शादी के दबाव से तंग आकर अपनी नाबालिक प्रेमिका की हत्या कर दी और हत्याकर उसकी लाश को नाले के नीचे दफना दिया। लड़की पिछले 3 महीने से लापता थी और परिजनों द्वारा उसके लापता होने की शिकायत गांधीनगर थाने में दर्ज कराई गई थी पुलिस द्वारा गुमशुदा की की रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जारी थी इसी बीच लड़की का मोबाइल ऑन होने पर पुलिस द्वारा मामले की जांच की गई और नाबालिक प्रेमी को हिरासत में लेकर उससे कड़ाई से पूछताछ की गई पूछताछ में प्रेमी द्वारा हत्या की बात को स्वीकार कर ली गई और पुलिस द्वारा उसकी निशानदेही पर नाबालिक लड़की के कंकाल को बरामद कर लिया है।
दरअसल नाबालिग लड़की गांधीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक किराये के मकान में अपनी एक सहेली के साथ रहती थी उसका प्रेम प्रसंग एक नाबालिग से था नाबालिग प्रेमिका अक्सर अपने प्रेमी पर शादी करने तथा साथ रहने का दबाव बनाती थी तीन माह पूर्व नाबालिग लड़की की सहेली अपने गांव गई हुई थी जिसपर नाबालिग अपने प्रेमी के साथ घुमने के लिए बतौली थाना क्षेत्र के ग्राम चिरगा की ओर गई थी। यहां प्रेमी ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और उसके शव को नाले के पास बने खोह में दफनाकर उसपर बड़ा पत्थर रख दिया तथा उसका मोबाईल अपने साथ ले गया। परिजनों द्वारा लड़की के गुम होने की शिकायत गांधीनगर थाने में की गई घटना के तीन माह बाद जब नाबालिग का मोबाईल ऑन हुआ तो पुलिस द्वारा संदेह के आधार पर नाबालिग प्रेमी को पकड़कर उससे पूछताछ की गई तो हत्या का यह सनसनीखेज मामला उजागर हुआ। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर लड़की के कंकाल को बरामद कर लिया हैं।
द्वारा हत्या का प्रथम संक्षिप्त कर लिया गया है और मामले की अग्रिम कार्रवाई में लग गई है।
हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के दहेजवार चौक स्थित धनंजय ज्वेलर्स चोरी मामले में पुलिस हिरासत में लिए गए एक आरोपी उमेश सिंह की कथित तौर पर अस्पताल में मौत होने के बाद सोमवार को बलरामपुर में जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर पिटाई से मौत का गंभीर आरोप लगाया है, जबकि पुलिस इसे बीमारी से हुई मौत बता रही है।
क्या है मामला? पुलिस ने धनंजय ज्वेलर्स चोरी मामले में 9 आरोपियों को पकड़ा था, जिनमें से 8 को रविवार को जेल भेज दिया गया। इसी मामले में हिरासत में लिए गए उमेश सिंह की रविवार सुबह 4.30 बजे अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि उमेश को सिकलसेल की बीमारी थी और गिरफ्तारी के बाद तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप और हंगामा मृतक उमेश की मां और अन्य परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उमेश को 7 नवंबर को घर से उठाया था और अंबिकापुर व बलरामपुर थाने में उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई, जिससे उसकी मौत हुई। साथ ही जब पुलिस ने उमेश सिंह के बीमार होने और बलरामपुर अस्पताल में भर्ती होने की सूचना दी, तब परिजन उससे मिलने के लिए बलरामपुर आ रहे थे। तब परिजनों का आरोप है कि उन्हें रास्ते में पस्ता थाने में रोक लिया गया। उन्हें लगभग 2 घंटे तक पस्ता थाने में रोके रखा गया। इसके बाद बलरामपुर से एक महिला पुलिस अधिकारी पस्ता थाना पहुंचीं, जिसके बाद उन्हें बलरामपुर जाने दिया गया।
परिजनों को बलरामपुर जाने से रोका गया था, जिसके कारण वे समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाए और उनके पहुँचने से पहले ही उमेश का पोस्टमार्टम शुरू हो चुका था। यह घटनाक्रम परिजनों के इस आरोप को बल देता है कि पुलिस मामले को छिपाने और कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थी।
शव लेने से इनकार
परिजनों को रास्ते में रोका गया और उनके अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृतक का पोस्टमार्टम कर दिया गया जिससे परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने शव लेने से इंकार कर दिया। परिजन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर अड़े रहे और शव लेने से इनकार कर दिया।
सड़क पर प्रदर्शन
परिजनों ने थाने के सामने सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। विवाद और प्रदर्शन के बीच, सोमवार दोपहर को पुलिस ने कथित तौर पर परिजनों की सहमति के बिना, जबरन एंबुलेंस से उमेश का शव उसके गांव भिजवा दिया। जब परिजनों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए थाने के सामने प्रदर्शन किया, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए उन पर लाठीचार्ज किया। खबर है कि इस दौरान मृतक के कुछ परिजनों को पुलिस ने अस्पताल परिसर में बंधक भी बना लिया था।
पुलिस द्वारा मृतक के शव को जबरन उसके गृह ग्राम में भेजने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि जब मृतक के परिजन बलरामपुर में थे तो पुलिस ने शव को जबरन क्यों भेजा..? सबसे बड़ा सवाल जब परिजन थे ही नहीं तब शव को मृतक के गृह ग्राम में किसके पास भेजा गया था..? पुलिस प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन एएसपी विश्व दीपक त्रिपाठी ने मृतक को बीमार बताया है। यह मामला अब क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर रहा है और पुलिस हिरासत में हुई मौत ने पुलिस विभाग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। पुलिस की यह कार्य प्रणाली कई सवाल खड़े कर रही हैं। पुलिस का काम कानून की रखवाली करना है तो पुलिस कानून को अपने हाथ में लेकर क्यों काम कर रही है..?
पुलिस की अब तक के कार्यवाही जो सवालों के घेरे में है:
1. पुलिस द्वारा नौ आरोपियों की गिरफ्तारी करना और केवल आठ आरोपियों के गिरफ्तारी की प्रेस विज्ञप्ति जारी करना।
2. युवक की तबीयत खराब होने की जानकारी देना और बलरामपुर आते हुए परिजनों को पस्ता थाने में 2 घंटे बैठाना।
3. परिजनों की अनुपस्थिति में मृतक का पोस्टमार्टम करवाना।
4. दोबारा पोस्टमार्टम और दोषियों के विरुद्ध FIR की मांग कर रहे परिजनों पर लाठी चार्ज करना।
5. परिजनों के विरोध के बावजूद जबरन परिजनों की अनुपस्थिति में मृतक के शव को उसके गृह ग्राम भिजवाना।
एक के बाद एक पुलिस द्वारा की जा रही है नियम विरुद्ध कार्यवाही पुलिस पर ही सवालिया निशान लगा रही हैं। सूत्रों की माने तो पुलिस किसी बात को छुपाने की कोशिश कर रही है यह मामला सिर्फ एक जगह हुई चोरी की घटना का मामला नहीं था। सूत्र बताते हैं कि चोरों का यह समूह चोरों का बहुत बड़ा गिरोह हैं और इसमें कई बड़े ज्वेलर्स भी शामिल हैं और इस गिरोह का मास्टरमाइंड अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस द्वारा उस मास्टरमाइंड को ही बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : रायपुर एसएसपी डॉक्टर लाल उमेद सिंह द्वारा आज सिंधी और अग्रवाल समाज के आराध्य देवताओं और महापुरुषों के खिलाफ विवादित टिप्पणी के आरोपी और छत्तीसगढ़ क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल को फरार आरोपी घोषित कर दिया है। SSP द्वारा अमित बघेल पर 5 हजार रुपए इनाम की घोषणा भी की गई है।
आपको बता दे की सिंधी और अग्रवाल समाज के आराध्य देवताओं और महापुरुषों के खिलाफ विवादित टिप्पणी को लेकर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सहित देश भर में कई स्थानों पर अमित बघेल के खिलाफ FIR दर्ज की गई हैं। साथ ही विभिन्न समाजों द्वारा उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
हिंद स्वराष्ट्र बिलासपुर : राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी की घटना कोई नई बात नहीं है, आए दिन राजस्व विभाग में कोई ना कोई अधिकारी कर्मचारी रिश्वत लेते हुए एसीबी के चंगुल में आ ही जाता है। ऐसा ही एक मामला आज बिलासपुर से निकलकर सामने आया है जहां पैतृक जमीन में नाम चढ़ाने के एवज में ₹50000 की रिश्वत लेते हुए एसीबी की टीम में एक नायाब तहसीलदार को गिरफ्तार किया है। नायब तहसीलदार का नाम देश कुमार कुर्रे हैं और यह मामला सीपत तहसील का हैं।
दरअसल बिलासपुर ग्राम बिटकुला निवासी प्रवीण पाटनवार ने 30 अक्टूबर को शिकायत की थी कि उसकी दिवंगत मां के नाम पर 21 एकड़ कृषि भूमि है। फौती दर्ज कर रिकॉर्ड में उसका और भाई-बहनों का नाम जोड़ना था। इसके लिए उन्होंने नायब तहसीलदार देश कुमार कुर्रे से संपर्क किया। इस दौरान कुर्रे ने काम के एवज में 1.50 लाख की मांग की थी। शिकायत सत्यापन के दौरान मोलभाव कर 1,20,000 रूपये लेने के लिये आरोपी सहमत हुआ। पीड़ित रूपये नहीं देना चाहता था, बल्कि आरोपी नायब तहसीलदार को रंगे हाथ पकड़वाना चाहता था। उसने इसकी शिकायत बिलासपुर एसीबी से की। शिकायत की जांच करवाई गई, जिसके बाद एसीबी ने ट्रैप आयोजित कर आज 10 नवंबर को पीड़ित से पहली क़िस्त 50 हजार की रिश्वत लेते नायब तहसीलदार को पकड़ा गया।
आरोपी नायब तहसीलदार देश कुमार कुर्रे को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध धारा 7 पीसीएक्ट 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के प्रावधानों के तहत् अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर-रामानुजगंज : जिले के बलरामपुर मुख्यालय से लगे ग्राम दहेजवार में स्थित धनंजय ज्वेलर्स में बीते 30 अक्टूबर की रात 2 बाइक सवार 6 चोरों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। चोर अपने साथ लाखों रुपए के सोने-चांदी के जेवर व नकद ले गए थे। इस मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए 5 चोर व 4 खरीदार समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक आरोपी की पुलिस हिरासत में रविवार की सुबह 4.30 बजे मौत हो गई हैं। इस मामले में पुलिस का कहना है कि आरोपी को सिकलसेल की बीमारी थी। जबकि परिजनों ने आरोप हैं कि पुलिस की पिटाई से उसकी मौत हुई है।
दरअसल बलरामपुर के ग्राम दहेजवार चौक में स्थित धनंजय ज्वेलर्स में 30 अक्टूबर की रात लाखों रुपए की चोरी हुई थी। इस चोरी की घटना में लाखों रुपए के गहने व साढ़े 3 लाख रुपए चोरी हुए थे। वहीं सीसीटीवी कैमरे में 6 आरोपी कैद हुए थे, जो 2 बाइक पर सवार होकर आए थे। इस मामले में बलरामपुर पुलिस ने सीतापुर के ग्राम नकना निवासी उमेश सिंह समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं उनकी निशानदेही पर अंबिकापुर के एक ज्वेलरी शॉप के संचालक को चोरी के गहने खरीदने के आरोप तथा चोरी के सहयोग के आरोप में 3 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से आरोपी उमेश सिंह को लेकर बलरामपुर पुलिस चोरी के गहने बरामद करने सीतापुर गई थी। वहां से लौटने के दौरान उसकी तबियत बिगड़ी तो उसे बलरामपुर अस्पताल में रविवार की सुबह 4 बजे भर्ती कराया गया, यहां आधे घंटे बाद उसकी मौत हो गई।
9 आरोपियों की हुई थी गिरफ्तारी लेकिन मृतक के नाम का नहीं किया गया जिक्र
आश्चर्य की बात यह हैं कि इस मामले की लीपापोती के उद्देश्य से पुलिस ने जारी अपने प्रेस विज्ञप्ति में मृतक उमेश सिंह के नाम का जिक्र नहीं किया। पुलिस इस मामले में अपने बचाव में उमेश सिंह की मौत को सिकलसेल की बीमारी से जोड़ रही हैं। और इस वजह से उसकी तबियत रास्ते में बिगड़ने और इलाज के दौरान अस्पताल में उसकी मौत होने की बात कहती नजर आ रही हैं। नर्सरी के बाद यह है कि जब युवक की गिरफ्तारी की गई थी तो पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में उसके नाम का जिक्र क्यों नहीं किया गया..?
यदि पुलिस द्वारा युवक की गिरफ्तारी नहीं की गई थी तो युवक पुलिस की कस्टडी में क्यों था..??
सिकलसेल की बीमारी की वजह से अगर युवक की तबीयत बिगड़ी थी तो इसकी जानकारी उसके परिजनों को क्यों नहीं दी गई..?
परिजनों ने लगाया पुलिस पर मारपीट का आरोप
युवक की मौत के बाद पुलिस द्वारा इस मामले की सूचना युवक के परिजनों को दी गई। सूचना पर परिजन बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल जाकर उन्हें उमेश की मृत्यु की जानकारी मिली। अचानक हुए इस मौत की घटना से परिजन काफी आक्रोशित है और मृतक उमेश सिंह की मां अगरमती सिंह, बहन व भाभी का कहना है कि उसे कोई बीमारी नहीं थी। पुलिसकर्मियों ने हाथ बांधकर उसकी काफी पिटाई की थी, मुंह से खून भी निकल रहा था। उन्हें उमेश से मिलने भी नहीं दिया गया था। फोन पर उन्हें सूचना दी गई कि वह काफी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है, यहां आकर उन्हें उसकी मौत की जानकारी हुई।
मृतक की बहन द्वारा मीडिया को दिया गया बयान
अचानक हुए युवक की इस मौत से परिजन काफी आक्रोशित हैं और इंसाफ की मांग कर रहे हैं। इधर किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए बलरामपुर कोतवाली में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।
ये 9 आरोपी हुए थे गिरफ्तार धनंजय ज्वेलर्स में चोरी के मामले में पुलिस ने चोर व खरीददार समेत 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें सरगुजा जिले के सीतापुर थाना अंतर्गत ग्राम नकना निवासी शिवकुमार पिता लांजा राम 18 वर्ष, सूरज सिंह पिता हीरू सिंह 19 वर्ष, वेद सिंह पिता धर्मदेव सिंह 21 वर्ष, उमेश सिंह 19 वर्ष व ग्राम बिशुनपुर निवासी सूर्या गिरी पिता मिलन गिरी 19 वर्ष के अलावा खरीदार अंबिकापुर के महुआपारा गोधनपुर निवासी रोशन सोनी पिता चुन्नू सोनी 24 वर्ष, और चोरी के गहनों की बिक्री में सहयोगी सीतापुर के ग्राम बालमपुर निवासी अजीत पिता शंभूनाथ 25 वर्ष, जशपुर जिले के ग्राम सन्ना निवासी बादल दास पिता प्रमोद दास 22 वर्ष व सीतापुर के ग्राम बनेया निवासी राजेश अग्रवाल पिता रामअवतार अग्रवाल 40 वर्ष शामिल हैं। वहीं चोरी में शामिल एक आरोपी अब भी फरार है। पुलिस ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में मृतक उमेश सिंह के नाम का जिक्र नहीं किया है।
हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : बलरामपुर जिले के राजपुर थाना अंतर्गत आने वाले बरियों पुलिस चौकी क्षेत्र के भिलाईखुर्द में संचालित क्रेशर प्लांट में डीजल चोरी करने के शक में क्रेशर प्लांट में काम करने वाले दो कर्मचारियों के साथ अमानवीय तरीके से मारपीट करने का वीडियो वायरल होने के बाद 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया हैं। उक्त घटना से आहत परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने घटना को अंजाम देने वाले कुल 04 आरोपियों को गिरफ्तार कर अपराध कमांक 250/2025 धारा 127 (2), 296, 351 (2), 191(2), 191 (3) बीएनएस 3(2) वी. क,3-1, द, थ एसी/एसटी एक्ट के तहत कार्यवाही कर आरोपी रविशंकर यादव पिता दलगर यादव, उम्र 22 वर्ष, नि. कल्याणपुर, लटोरी, जिला सूरजपुर। 2. आनंद बिसी पिता पाण्डव बिसी, उम्र 35 वर्ष, नि. भिलाईखुर्द, बरियों, जिला बलरामपुर मनोज यादव पिता रामलखन, उम्र 38 वर्ष, निवासी बादा, चौकी बरियों, जिला बलरामपुर अनिल कुमार पिता गोविन्द राम, निवासी ग्राम नवापारा, पड़ौली, धौरपुर,जिला सरगुजा भेजा सलाखों के पीछे। जानकारी के अनुसार प्रार्थी बिनोद सारथी पिता बलदेव सारथी,उम्र 25 वर्ष, निवासी बधिमा, चौकी बरियों एवं वरूण शर्मा पिता बाबूलाल शर्मा,उस 30 वर्ष, हाल मुकाम ग्राम भिलाईखुर्द के द्वारा दिनांक 07/11/2025 को चौकी उपस्थित होकर एक लिखित आवेदन पत्र पेश कर रिपोर्ट दर्ज कराया कि दिनांक 04/11/2025 को सुबह करीब 08ः00 बजे प्रार्थी विनोद सारथी एवं वरूण शर्मा गाड़ी चलाने के लिए लालू के क्रेशर ग्राम भिलाईखुर्द गया था, उसी समय करीब 10-11 बजे ग्राम भिलाईखुर्द के सिंघल क्रेशर का मुंशी संजय प्रधान व उसके साथी डॉक्टर, रविशंकर, जे.पी. यादव, मोनू दास, रामलाल, दीपक अग्रवाल व अन्य साथियों के साथ आए और प्रार्थी बिनोद सारथी एवं वरूण शर्मा दोनों के साथ मारपीट किए। पुलिस ने प्रार्थी की रिपोर्ट पर बरियों चौकी में अपराध क्रमांक 250/2025 धारा 127(2), 296, 351 (2), 191(2), 191(3) बीएनएस 3 (2) वी. क, 3-1, द, घ एससी/एसटी एक्ट का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। विवेचना के दौरान चौकी प्रभारी द्वारा प्रार्थी व गवाहों का बयान लिया गया तथा घटनास्थल निरीक्षण किया गया, पुलिस ने विवेचना में पाया आरोपियों ने प्रार्थीगण के साथ मारपीट करना पाया गया है, जिससे प्रार्थीगण मानसिक रूप से आहत हुए हैं। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध धारा सदर का अपराध घटित करना पाये जाने से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों का पालन करते हुए विधिवत आरोपियों को नोटिस दिया गया। जिस पर आरोपियों के उपस्थित नहीं होने तथा विवेचना में सहयोग नहीं करने पर उन्हें हिरासत में लेकर आरोपी रविशंकर यादव पिता दलगर राम यादव, उम्र 22 वर्ष, जाति बरगाह, निवासी ग्राम कल्याणपुर, चौकी लटौरी, थाना जयनगर, जिला सूरजपुर 02. आनंद बिसी पिता पाण्डव बिसी, उम्र 35 वर्ष, जाति कोलता, निवासी भिलाईखुर्द, चौकी बरियों, थाना राजपुर, जिला बलरामपुर रा.गंज 03. मनोज यादव पिता रामलखन यादव, उम्र 38 वर्ष, जाति अहीर, निवासी बादा, चौकी बरियों, थाना राजपुर 04. अनिल कुमार पिता गोविन्द राम, निवासी नवापारा, पड़ौली, थाना धौरपुर, सरगुजा से घटना के संबंध में पुछताछ किया गया पूछताछ पर आरोपियों के विरूद्ध धारा सदर का अपराध सबूत पाये जाने पर आरोपियों को दिनांक 08/11/2025 को विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। प्रकरण के अन्य सभी पहलुओं पर विवेचना जारी है। कार्यवाही में एसडीओपी इमानुएल लकड़ा, उपनिरीक्षक रविन्द्र प्रताप सिह चौकी प्रभारी बरियों, प्र.आर. प्रदीप यादव, विजय गुप्ता, आर. जगनाथ केराम, सुरेन्द्र रवि, ईश्वर मरावी, अजय टोप्पो का सराहनीय योगदान रहा।
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के महामंत्री एवं सरगुजा संभाग के प्रभारी अधिवक्ता राजेश दुबे ने दिनांक सात नवंबर को कलेक्टर सरगुजा, जिला न्यायाधीश अंबिकापुर को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि माननीय छग उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार अंबिकापुर में नवीन न्यायालय भवन के निर्माण के लिए भूमि चयन के संबंध में सन 2020 में माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति जो अंबिकापुर न्यायालय के पाल्य अधिकारी थे उनके अंबिकापुर प्रवास पर उनके साथ तत्कालीन जिला न्यायाधीश महोदय, तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला अधिवक्ता संघ सरगुजा के उपस्थिति में सर्वसम्मति से यह तय हुआ कि वर्तमान न्यायालय भवन से सटे हुए आयु पूर्ण शासकीय भवन गुलाब कॉलोनी एवं आसपास के अतिक्रमित शासकीय भूमि का चयन किया गया था जिसका भूखंड क्रमांक 505/13 रकबा 2.59 एकड़ है पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त करने पर रकबा लगभग चार एकड़ होगा। उक्त भूमि के चयन होने के बाद भूमि का नक्शा, स्टीमेट, प्राक्कलन मंजूरी हेतु छत्तीसगढ़ शासन के पास भेजा गया जहाँ से 46,025,2000 रू राशि स्वीकृत हो चुकी है। राजेश दुबे ने आगे कहा कि हैरानी की बात तब हो गई जब कलेक्टर सरगुजा द्वारा पूर्व भूमि चयन एवं स्वीकृति के बावजूद अंबिकापुर शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर सूरजपुर जिले के सरहदी ग्राम चठिरमा में केंद्र सरकार के पुनर्वास मद की भूमि जिसका भूखंड क्रमांक क्रमशः 344,345 है को शासकीय मद में घोषित कर नवीन न्यायालय भवन निर्माण हेतु भूमि के आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई जबकि राजस्व पुस्तक परिपत्र एवं केंद्र सरकार के पुनर्वास नीति एवं नियम के अनुसार कलेक्टर को केंद्र सरकार की पुनर्वास की भूमि जो एक विशेष प्रयोजन की भूमि है उसके मद को परिवर्तित करने का कोई अधिकार नहीं है उक्त मद की भूमि को राज्य सरकार केंद्र सरकार से अनुमति लेने के बाद ही भूमि के मद में परिवर्तन कर सकता है । ग्राम चठीरमा में पुनर्वास भूमि आवंटन नहीं रोके जाने के स्थिति में विधानसभा एवं लोकसभा में इसकी गूंज सुनाई देगी जिसकी जवाबदेही कलेक्टर सरगुजा एवं राज्य सरकार की होगी। सरगुजा तत्कालीन कलेक्टर जी एस धनंजय के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर पुनर्वास की भूमि विक्रय की अनुमति दी गई थी मेरे पहल करने पर विधानसभा में इसकी गूंज उठी थी परिणाम स्वरूप सभी अनुमति निरस्त किए गए थे और कलेक्टर साहब का तत्काल तबादला हो गया था। राजेश दुबे ने कहा कि वर्तमान जिला न्यायालय के नजदीक ही समस्त राजस्व न्यायालय है, उपभोक्ता फोरम, परिवार न्यायालय है ऐसी स्थिति में अधिवक्ता एवं पक्षकारों को प्रकरणों में उपस्थिति सुविधाजनक होता है। ज्ञापन सौंपने में कांग्रेस विधि विभाग के जिलाध्यक्ष देवकांत त्रिवेदी,विनय पांडेय,इशरत सिद्दकी, के के मिस्त्री, प्यारेलाल यादव, मृत्युंजय जायसवाल, निखत कलीम, रेशमा परवीन सहित भारी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : कोयला मंत्रालय द्वारा कमर्शियल कोल माइनिंग के तहत कोयला खदानों के नीलामी की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। इसमें सात राज्यों के 41 खदानें शामिल है, यह 14वे दौर के नीलामी की प्रक्रिया है। इस दौर में छत्तीसगढ़ की 15 कोयला खदानें सूचीबद्ध है। छत्तीसगढ़ की कोल ब्लॉक जिनकी नीलामी होनी है, वे निम्नलिखित हैं –
गोरही महलोई-बिजना
गोरही महलोई-देवगांव
गोरही महलोई-अमलीढोंडा
गोरही महलोई -कसडोल
रेवंती इस्ट
तेरम
विजयनगर नॉर्थ
विजयनगर साउथ
भटगांव 2
भटगांव एक्सटेंशन (बोझा)
बटाटी कोलगा वेस्ट
कलगामार
मडवानी
करतला साउथ
तौलीपाली
वाणिज्यिक खनन को बढ़ावा
देश में घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ावा देने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, कोयला मंत्रालय ने हाल ही में वाणिज्यिक कोयला खनन (Commercial Coal Mining) के तहत खदानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की है। नवीनतम दौर की नीलामी में देश के सात राज्यों की कुल 41 खदानों को सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें से छत्तीसगढ़ की 15 कोयला खदानें शामिल हैं।
नीलामी का उद्देश्य
भारत में कोयला उत्पादन बढ़ाना, कोयले के आयात पर निर्भरता कम करना और राजस्व सृजन करना।
राज्य की खदानें
नीलामी के लिए सूचीबद्ध 41 खदानों में से 15 छत्तीसगढ़ राज्य की हैं। आरक्षित भंडार: इन खदानों में 12,725 मिलियन टन से अधिक का विशाल कोयला भंडार अनुमानित है।
आर्थिक और राजस्व प्रभाव
कोयला मंत्रालय इस नीलामी को राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मान रहा है। वाणिज्यिक कोयला खनन के माध्यम से राज्य सरकार को राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद है, साथ ही खनन क्षेत्रों के आसपास के समुदायों के लिए रोजगार सृजन के अवसर भी बढ़ेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इन खदानों के संचालन से राज्य की जीएसडीपी (GSDP) में खनिज क्षेत्र की हिस्सेदारी और बढ़ेगी।
पर्यावरणीय और सामाजिक चिंताएं
खदानों की नीलामी पर पर्यावरण और वन्यजीव से संबंधित चिंताएं भी सामने आई हैं। कई कोयला ब्लॉक वन क्षेत्रों में स्थित हैं, जिनमें हाथी और अन्य वन्यजीवों का आवास है। कुछ खदानों में वन भूमि का प्रतिशत 15% से 40% तक है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने इन खदानों के खनन से वनों की कटाई और पर्यावरण पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के प्रति आशंका व्यक्त की है। राज्य सरकार को स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुरोध पर कुछ खदानों (जैसे रायगढ़ जिले में स्थित ‘बारा’ कोयला ब्लॉक) को अधिक मानव बस्ती के कारण नीलामी से छूट देनी पड़ी है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ की 15 कोयला खदानों की नीलामी देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसके साथ ही पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी जुड़ी हुई है।
हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : राज्य शासन ने गुरुवार को रतन लाल डांगी, निदेशक नेताजी सुभाषचंद्र बोस, राज्य पुलिस अकादमी चंदखुरी, रायपुर को अस्थाई रूप से आगामी आदेश पर्यन्त पुलिस मुख्यालय, छत्तीसगढ़ नवा रायपुर में पदस्थ किया है। उनके स्थान पर निदेशक नेताजी सुभाषचंद्र बोस, राज्य पुलिस अकादमी चंदखुरी, रायपुर के पद पर अजय कुमार यादव को पदस्थ किया गया हैं।
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : भाग दौर भरी जिंदगी, रोज घट रही सैंकड़ों घटनाएं… गंभीर रूप से घायल संभाग भर के मरीजों को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किया जाता है रेफर, बावजूद इसके संभाग भर की जिम्मेदारी ढोने वाले अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में न्यूरोसर्जन की हैं कमी। यह कमी मरीजों और उनके परिजनों के लिए आफत का सबब बनी हुई हैं। गंभीर रूप से घायल मरीजों को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा रायपुर रेफर किया जाता हैं। अंबिकापुर से रायपुर की दूरी 340 किलोमीटर हैं। इतनी दूरी का सफर तय करते वक्त कई मरीजों की मौत हो जाती हैं वही कई गरीब तबके के मरीज एम्बुलेंस और हॉस्पिटल और इतने दूर जाने पर होने वाले खर्चे के अभाव में जिंदगी से जंग हार जाते हैं।
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जन का संकट: मरीजों का इलाज रामभरोसे!
सरगुजा संभाग के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र, राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज अस्पताल) अंबिकापुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी बनी हुई है, जिसमें न्यूरोसर्जन का पद सबसे महत्वपूर्ण है। अस्पताल में एक भी न्यूरोसर्जन मौजूद नहीं है, जिसके कारण सिर और रीढ़ की गंभीर चोटों (Head and Spinal Injuries) से जूझ रहे मरीजों को या तो निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, या उन्हें जान जोखिम में डालकर दूर के शहरों में रेफर किया जा रहा है। गंभीर समस्या, शून्य विशेषज्ञ अस्पताल में न्यूरोसर्जन की कमी लंबे समय से एक गंभीर मुद्दा रहा है। सड़क दुर्घटनाओं और अन्य कारणों से सिर में चोट लगने के मामलों में न्यूरोसर्जन की तत्काल आवश्यकता होती है, लेकिन विशेषज्ञ की गैरमौजूदगी में गंभीर मरीजों का इलाज सिर्फ प्राथमिक उपचार तक सिमट कर रह जाता है। इस क्षेत्र के गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए, जो निजी अस्पतालों का महंगा खर्च वहन नहीं कर सकते, यह स्थिति जानलेवा साबित हो रही है। प्रशासन की पहल, परिणाम शून्य अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग लगातार इस कमी को दूर करने के लिए विज्ञापन जारी कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक यहां जॉइन करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हाल ही में, स्वास्थ्य मंत्री ने भी स्वीकार किया था कि प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है और इस समस्या के समाधान के लिए कलेक्टरों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए ‘फ्री हैंड’ दिया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर प्रयास किए जा सकें। हालांकि, जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। अन्य विशेषज्ञ भी नदारद न्यूरोसर्जन के अलावा, अस्पताल में नेफ्रो सर्जन, गैस्ट्रोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण विभागों के डॉक्टरों के पद भी खाली पड़े हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की यह कमी न केवल मरीजों को प्रभावित कर रही है, बल्कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों को भी पूरा करने में बाधा डाल रही है। क्षेत्र की जनता ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर स्वास्थ्य संकट को देखते हुए तत्काल प्रभाव से विशेषज्ञ न्यूरोसर्जन की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके।
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संभावित आगमन को लेकर अम्बिकापुर में प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं। इसी सिलसिले में आज आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया।
श्री बोरा ने सबसे पहले गांधी स्टेडियम पहुंचकर राष्ट्रपति के आगमन हेतु तैयार किए जा रहे हेलीपैड स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, आगमन एवं निर्गमन मार्ग, हेलीपैड की मजबूती तथा आसपास की साफ-सफाई का बारीकी से जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके पश्चात् उन्होंने पी.जी. कॉलेज मैदान पहुंचकर मुख्य कार्यक्रम स्थल की तैयारियों की समीक्षा की। प्रमुख सचिव ने पीजी कॉलेज मैदान में बनने वाले डोम पंडाल, बैठक व्यवस्था, वीआईपी गेट, यातायात बेरिकेडिंग, प्रवेश एवं निकास द्वार, स्टॉल्स की साज-सज्जा, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, पार्किंग व्यवस्था, बिजली व्यवस्था एवं सांस्कृतिक मंच का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राष्ट्रपति के आगमन से पूर्व सभी व्यवस्थाएं मानक के अनुरूप और सौंदर्यपूर्ण ढंग से पूरी होनी चाहिए।
श्री बोरा ने पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाली संगोष्ठी कार्यक्रम की तैयारियों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम सुव्यवस्थित, समयबद्ध रहे।
निरीक्षण के दौरान सरगुजा संभागायुक्त नरेन्द्र दुग्गा, कलेक्टर विलास भोसकर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार अग्रवाल, अपर कलेक्टर सुनील नायक, एएसपी अमोलक सिंह ढिल्लों, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ललित शुक्ला सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : तहसीलदार लटोरी सुरेंद्र साय पैंकरा द्वारा अपने पद का दुरुपयोग अपने व्यक्तिगत लाभ हेतु करते हुए शासन की छवि धूमिल की गई हैं। शासन से प्राप्त जमीनों (शासकीय मद की भूमि) की रजिस्ट्री उनके द्वारा करवा दी गई है, जबकि शासन के नियमानुसार इन जमीनों की रजिस्ट्री के पूर्व शासकीय मद से प्राप्त भूमि की बिक्री के लिए कलेक्टर से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इस संबंध में हिंद स्वराष्ट्र समाचार पत्र की संपादक मृण्मयी पाण्डेय द्वारा संभाग आयुक्त से शिकायत की गई हैं। उल्लेखनीय हैं कि तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा द्वारा भू–राजस्व की धारा 165/7 (ख) का साफ तौर पर उल्लंघन किया गया हैं, जिस संबंध में तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा से बयान लिए जाने पर उनके द्वारा इसकी पुष्टि भी की गई थी साथ ही त्रुटिवश हस्ताक्षर होने की बात स्वतंत्र रूप से स्वीकारी गई थी।
इनके द्वारा एक नहीं बल्कि 6 जमीन की रजिस्ट्री नियंविरुद्ध तरीके से करवा दी गई हैं और कुछ के नामांतरण भी कर दिए गए हैं।
उनके द्वारा जिन जमीनों की रजिस्ट्री बिना कलेक्टर परमिशन के कर दी गई हैं :
1.दिनांक 29/03/2024 को उक्त अधिकारी द्वारा लटोरी तहसील अंतर्गत ग्राम लटोरी के विक्रेता कृष्ण कुमार तिवारी आत्मज बद्री विशाल तिवारी के जमीन खसरा नंबर 421/2 की चौहद्दी निर्माण कर क्रेता सरिता राजवाड़े आत्मज अरविंद राम के नाम रजिस्ट्री करवा दी गई।
2.दिनांक 28/03/2024 को उक्त अधिकारी द्वारा लटोरी तहसील अंतर्गत ग्राम लटोरी के विक्रेता गीता सिंह पति राघवेंद्र सिंह के जमीन खसरा नंबर 114 की चौहद्दी निर्माण कर क्रेता त्र्यंबक गुप्ता आत्मज उदयचंद्र गुप्ता के नाम रजिस्ट्री करवा दी गई।
3.दिनांक 21/04/2023 को उक्त अधिकारी द्वारा लटोरी तहसील अंतर्गत ग्राम लटोरी के विक्रेता नूरुल हसन आत्मज एम.आर. अंसारी के जमीन खसरा नंबर 213/2 की चौहद्दी निर्माण कर क्रेता सविता कुंडू पति शंभू कुंडू के नाम रजिस्ट्री करवा दी गई। इस जमीन के नामांतरण का कार्य भी पूर्ण कर दिया गया हैं।
4.दिनांक 27/05/2025 को उक्त अधिकारी द्वारा लटोरी तहसील अंतर्गत ग्राम लटोरी के विक्रेता सुमन प्रसाद सिंह आत्मज आनंद राम के जमीन खसरा नंबर 211/2 की चौहद्दी निर्माण कर क्रेता संतोष कुमार सिंह आत्मज अंकेश्वर सिंह के नाम रजिस्ट्री करवा दी गई।
5.दिनांक 30/05/2024 को उक्त अधिकारी द्वारा लटोरी तहसील अंतर्गत ग्राम लटोरी के विक्रेता रवि रंजन श्रीवास्तव आत्मज विजय कुमार श्रीवास्तव के जमीन खसरा नंबर 1129/3 की चौहद्दी निर्माण कर क्रेता डिम्पल राजवाड़े पति राकेश राजवाड़े और एक अन्य क्रेता मोहर लाल चेरवा आत्मज रामसुंदर चेरवा के नाम रजिस्ट्री करवा दी गई।
आपको बता दें कि इन 6 रजिस्ट्रियों में से कुछ के नामांतरण के कार्य भी पूर्ण कर लिए गए हैं।
खबर प्रकाशन के बाद अपनी चोरी छिपाने भेजा गया था वैधानिक नोटिस
इससे पहले आपको बता दे कि तहसीलदार लटोरी द्वारा हिंद स्वराष्ट्र की संपादक को वैधानिक नोटिस भी भेजा गया था जिसमें उनके द्वारा झूठी खबर प्रकाशित करने के आरोप लगाते हुए 10 लाख रुपए की मांग की की गई थी, लेकिन आपको बता दे कि हमारे द्वारा कोई भी झूठी खबर प्रकाशित नहीं की गई थी ना ही कोई खबर बिना साक्ष्य के प्रकाशित की गई थी। कमिश्नर सरगुजा को दिए गए आवेदन में भी हमारे द्वारा रजिस्ट्री के कागजों समेत उक्त जमीनों के शासकीय मद के होने के भी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं।
भ्रष्टाचार की देवी की संरक्षण में फल फूल रहे थे तहसीलदार देखने का विषय होगा अब की क्या सरगुजा कमिश्नर से शिकायत के बाद इन पर हो सकेगी कोई कार्रवाई..? या मुख्यमंत्री के करीबी होने का ट्रंप कार्ड उन्हें इस जांच/कार्यवाही से भी रखेगा मुक्त..??
हिंद स्वराष्ट्र बिलासपुर : बिलासपुर रेलवे डिवीजन अंतर्गत लालखदान क्षेत्र में शाम करीब 4 बजे एक दिल दहला देने वाला ट्रेन हादसा हो गया। जहां हावड़ा रूट पर चल रही एक पैसेंजर मेमू ट्रेन का एक डिब्बा अचानक मालगाड़ी से आमने-सामने टकरा गया। यह टक्कर इतनी जोरदार थी कि मेमू ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई. प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हादसे में कम से कम 5 यात्रियों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में कुछ की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। हादसा बिलासपुर स्टेशन से महज कुछ किलोमीटर दूर लालखदान के पास हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मेमू ट्रेन हावड़ा की ओर जा रही थी, तभी विपरीत दिशा से आ रही मालगाड़ी से उसकी भिड़ंत हो गई। टक्कर के बाद मेमू ट्रेन का आगे का डिब्बा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि मालगाड़ी के इंजन में भी गंभीर नुकसान पहुंचा। हादसे के बाद यात्रियों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें और धुएं का गुबार पूरे इलाके में फैल गया। कई यात्री डिब्बों में फंस गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मियों ने किसी तरह बाहर निकाला।
रेलवे प्रशासन ने तुरंत हादसे की सूचना मिलते ही आपातकालीन टीमों को रवाना कर दिया। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, घायलों के इलाज के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं। बिलासपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में विशेष वार्ड तैयार किए गए हैं, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों की देखभाल कर रही है। रेलवे ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, ताकि परिजन अपने यात्रियों की जानकारी प्राप्त कर सकें. इसके अलावा, एनडीआरएफ और स्थानीय रेस्क्यू टीम्स मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटी हुई हैं। पटरी से उतरे डिब्बों को हटाने और क्षतिग्रस्त ट्रैक की मरम्मत के लिए क्रेन और मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हादसे के कारण हावड़ा रूट पर ट्रेन परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है। कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जबकि कुछ को वैकल्पिक रूटों से डायवर्ट किया जा रहा है। रेलवे ने यात्रियों से धैर्य बनाए रखने और अपडेट्स के लिए आधिकारिक वेबसाइट या ऐप चेक करने की अपील की है। प्रारंभिक जांच में सिग्नल फेलियर या मानवीय भूल को हादसे का कारण माना जा रहा है, लेकिन विस्तृत जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमिटी गठित की गई है। रेल मंत्री ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा की है।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : जंगली जानवरों से ज्यादा कुछ लोग बदत्तर होते हैं और ये इंसानरूपी दरिंदे अपनी दरिंदगी के सामने अपनी इंसानियत भूल कर किसी भी हद तक गुजर जाते हैं। ऐसे ही एक दरिंदे द्वारा अपनी इंसानियत को भूलते हुए कल शाम एक छोटी सी बच्ची से हैवानियत कर दी गई, जिसके बाद खून से लथपथ बच्ची दर्द से कराहती रही लेकिन दरिंदे को उसे पर दया नहीं आई और वह पास में बैठकर बच्ची को दर्द से कराहते देखता रहा।
दरअसल मामला सूरजपुर जिले के प्रतापपुर थाना क्षेत्र का हैं।जहां कल शाम एक युवक द्वारा पड़ोस की एक 5 साल की बच्ची को घर के बाहर खेलते देखकर उसे अपने साथ अपने घर ले जाकर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया। बच्ची के साथ दुष्कर्म के वक्त बच्ची को दर्द होने की वजह से वह चिल्लाने लगी जिस पर युवक द्वारा उसका मुंह दबाकर उसके साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया गया, इस घटना के बाद बच्ची के प्राइवेट पार्ट से खून निकलने लगा और तेज दर्द के कारण बच्ची जोर-जोर से कराहने लगी लेकिन युवक को बच्ची पर दया नहीं आया और वह बच्ची के पास ही बैठा रहा। युवक के घर से बच्ची के कराहने की आवाज सुनकर आसपास के लोग उसके घर पहुंचे जहां का नजारा देखकर सब आश्चर्य में पड़ गए जिसके बाद मौके पर बच्ची के माता पिता पहुंचे और बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे जहां बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल अम्बिकापुर रेफर कर दिया गया। बच्ची का इलाज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जारी हैं जहां बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई हैं। वहीं इस हादसे के बाद ग्रामीणों द्वारा आरोपी युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया हैं।
पुलिस द्वारा आरोपी युवक रोशन टोप्पो पिता राम किशुन टोप्पो 21 वर्ष मूल निवास जगन्नाथपुर, वर्तमान निवास शांतिनगर के विरुद्ध बीएनएस 65(2) और पाक्सो एक्ट की धारा 4, 6 के तहत अपराध दर्ज कर लिया हैं।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर विशेष रिपोर्ट : छत्तीसगढ़ के प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का जाति प्रमाणपत्र कथित रूप से फर्जी व कुट–रचित बताते हुए क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक विवाद गहराता जा रहा है। आदिवासी समाज ने प्रमाणपत्र रद्द करने की मांग उठाई है और प्रशासन पर कार्रवाई के लिए दबाव बना दिया है।
जाति प्रमाणपत्र पर गंभीर आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोप है कि विधायक पोर्ते का जाति प्रमाणपत्र उनके पिता के दस्तावेजों के आधार पर नहीं, बल्कि बिना वैधानिक आधार के जारी किया गया है। आरोपपत्र में कहा गया है कि विधायक और उनके पति में से किसी के भी मूल जातीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, फिर भी उन्हें प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
आवेदन के बाद प्रशासनिक जांच में ‘दस्तावेजों की कमी’ सामने आई
इस मामले की जांच के लिए स्थानीय स्तर पर आवेदन दिया गया था। बताया गया कि जांच में किसी भी वैध दस्तावेज के आधार के बिना प्रमाणपत्र जारी होने की पुष्टि हुई। अनुविभागीय अधिकारी अम्बिकापुर एवं अम्बिकापुर परियोजना कार्यालय द्वारा भी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न होने का उल्लेख किया गया।
मामला हाईकोर्ट में — आदेश के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
आदिवासी समाज ने इस मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। मामले पर 17 जून 2025 को बिलासपुर हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए जिला स्तरीय और उच्च स्तरीय छानबीन समिति को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। आरोप है कि चार महीने बीतने के बाद भी जाति प्रमाणपत्र निरस्त नहीं किया गया, जिसके बाद समाजिक प्रतिनिधियों में नाराज़गी बढ़ गई है।
जिला स्तरीय सत्यापन समिति की कार्यवाही
जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति द्वारा 28 अगस्त, 15 सितंबर व 29 सितंबर 2025 को नोटिस जारी किए गए और विधायक को दस्तावेज प्रस्तुत करने कहा गया। समिति की सुनवाई में विधायक के अनुपस्थित रहने की बात सामने आई, जिसके चलते समाज ने इसे जांच प्रक्रिया से बचने की कोशिश बताया है।
‘फर्जी आदिवासी बनकर चुनाव लड़ने’ का आरोप
आदिवासी समुदाय का कहना है कि कथित रूप से गलत प्रमाणपत्र के आधार पर अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट से विधायक बनना सच्चे आदिवासियों के अधिकारों का हनन है। समाज ने इसे राजनीतिक धोखाधड़ी बताते हुए कहा कि इससे पूरे आदिवासी समाज की भावनाएँ आहत हुई हैं।
आदिवासी समाज का अल्टीमेटम
आदिवासी समाज ने प्रशासन को 7 दिनों का समय दिया है। समाज ने घोषणा की है कि यदि निर्धारित समय में जाति प्रमाणपत्र निरस्त नहीं होता है, तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे। समाज ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान यदि कोई अप्रिय स्थिति बनती है, तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
जन–प्रतिक्रिया और राजनीतिक तापमान
इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर गहमागहमी बढ़ गई है। आदिवासी समुदाय के नेताओं एवं क्षेत्रीय संगठनों ने कहा है कि यह मामला केवल जाति प्रमाणपत्र का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न है। दूसरी ओर विधायक पक्ष की ओर से अभी तक इस प्रकरण पर औपचारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
क्या है अगला चरण?
अब सबकी नज़रें जिला प्रशासन और समिति की आगे की कार्यवाही पर टिकी हैं। यदि प्रमाणपत्र निरस्त होता है, तो मामले का असर विधानसभा सदस्यता तक पड़ सकता है। अगर प्रमाणपत्र वैध माना गया, तो विरोधी पक्ष आगे कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : राज्य भर में राज्य शासन द्वारा राशन कार्डों की फिजिकल वेरिफिकेशन का कार्य पूरा कर लिया गया है, इसके लिए शासन द्वारा 30 जून तक का समय दिया गया था हालांकि इस समयावधि को 1 माह के लिए बढ़ा दिया गया था, लेकिन बावजूद इसके सूरजपुर में राशन कार्ड में जमकर घोटाला किया जा रहा है और राशन कार्डों के फिजिकल वेरिफिकेशन के कार्य में गड़बड़ी करते हुए राशन की अपरातफरी की जा रही है। आपको बता दे कि जिले में अविवाहित युवकों के भी राशन कार्ड बन गए हैं तो कुछ ऐसे भी मामले हैं जहां मुर्दों को भी राशन मिल रहा है। जिले में शासकीय कर्मचारियों के भी गरीबी रेखा के कार्ड बन गए हैं और उन्हें राशन मिल रहा है।
दरअसल मामला सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड का हैं जहां हिंद स्वराष्ट्र की टीम ने जांच पड़ताल में पाया कि विकासखंड में कई ऐसे राशन कार्ड बने हुए हैं जिनका बनना निगम संगत नहीं हैं, वहीं नियम विरुद्ध तरीके से इन राशन कार्डों से खाद्यान्न का उठाव भी किया जा रहा हैं। आश्चर्य की बात यह हैं कि एक ऐसा पंचायत भी हैं जहां राशन वितरण का कार्य पंचायत के पंच द्वारा किया जा रहा हैं, जो कि पंचायत का एक जिम्मेदार नागरिक हैं जिसे इस बात की पूरी जानकारी हैं कि किन राशन कार्डों के मुखिया की मृत्यु हो गई हैं, उन कार्डों में भी उसके द्वारा मृतकों के नाम से लगातार राशन का वितरण किया जा रहा हैं।
खाद्य अधिकारी के पास नहीं हैं फोन उठाने का समय
आज के समय में अगर कोई पत्रकार निष्पक्ष होकर स्वतंत्र पत्रकारिता करते हैं और भ्रष्टाचारियों की पोल खोलते हैं, तो उनकी पत्रकारिता से भ्रष्ट, कामचोर अधिकारियों को काफी तकलीफ होती है और वे उन्हें अपना दुश्मन समझ बैठते हैं। सूरजपुर जिले में कई ऐसे भ्रष्ट अधिकारी है जिनको काम करना बिल्कुल पसंद नहीं आता है और यदि आप उनके विभाग के किसी मामले को उजागर करते हैं तो वे मामले की जांच और कार्यवाही करने की बजाए पत्रकार से ही उलझ जाते हैं और दो चार अपने खास चमचों से अपनी वाहवाही करवा कर खुश हो जाते हैं। खैर बात करे सूरजपुर जिले के खाद्य अधिकारी संदीप कुमार भगत की तो वे इतने व्यस्त रहते हैं कि उनके पास किसी का फोन उठाने का भी समय नहीं रहता हैं और न ही कॉल बैक करना उनके स्वभाव में शामिल हैं। केवल कुछ चुनिंदा लोगों के कॉल उठाने वाले खाद्य अधिकारी आम जनता के लिए भी अधिकारी हैं या केवल चुनिंदा लोगों के लिए यह तो समझ से पड़े हैं।
जानकारी देने के बावजूद नहीं ले रहे मामले में कोई इंट्रेस्ट
16 अक्टूबर को हमारे द्वारा संदीप भगत को मामले की जानकारी दी गई थी लेकिन 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनके द्वारा मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई और न ही यह जानने का प्रयत्न किया गया कि आखिर यह मामला कौन से ब्लॉक का हैं।
हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : अंबिकापुर ACB की टीम ने आज एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के सब इंजीनियर को 21,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। सूत्रों के अनुसार, यह रकम अंकित मिश्रा नामक व्यक्ति से मांगी गई थी। टीम ने जाल बिछाकर मनेंद्रगढ़ में सब इंजीनियर को रिश्वत लेते ही गिरफ्तार कर लिया हैं। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है।
हिंद स्वराष्ट्र बिश्रामपुर : सूरजपुर जिले के बिश्रामपुर से सटे ग्राम रामनगर में बुधवार सुबह तड़के एक कॉलरीकर्मी द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान सियाराम राजवाड़े के रूप में हुई है, जो एसईसीएल बलरामपुर खदान में प्यून के पद पर कार्यरत था। बताया जा रहा है कि सियाराम ने अपने घर के समीप दुर्गा पंडाल ग्राउंड रामनगर के स्टेज पर फांसी लगाकर जान दे दी। घटना की जानकारी मिलते ही बिश्रामपुर थाना प्रभारी प्रकाश राठौर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों ने प्रारंभिक बयान में बताया कि सियाराम कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान था और घर में जमीन को लेकर पारिवारिक रंजिश चल रही थी, जो उसकी मौत का कारण हो सकती है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। इस दुखद घटना से गांव में शोक की लहर है। स्थानीय लोग मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के अध्यक्ष अमित बघेल द्वारा महाराजा अग्रसेन, भगवान झूलेलाल और राष्ट्रनायकों के प्रति दिए गए आपत्तिजनक बयान के विरोध में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोमवार को अग्रवाल समाज द्वारा भारी संख्या में उपस्थित होकर थाने का घेराव कर अमित बघेल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। जिसके बाद पुलिस ने अग्रवाल समाज के पदाधिकारियों की शिकायत पर क्रांति सेना अध्यक्ष अमित बघेल के खिलाफ धारा 299 बीएनएस 2023 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हिंद स्वराष्ट्र बिलासपुर : बिलासपुर जिले के मस्तूरी जनपद कार्यालय परिसर में मंगलवार की शाम उस समय अफरातफरी मच गई, जब तीन नकाबपोश हमलावरों ने उपाध्यक्ष नीतेश सिंह के ऑफिस में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां दोनों की हालत नाजुक बताई जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार घटना शाम करीब 5:30 बजे की है, जब तीन हमलावर एक वाहन से उतरकर सीधे जनपद उपाध्यक्ष के ऑफिस परिसर में पहुंचे। अंदर घुसते ही उन्होंने बिना कुछ बोले फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि उनके द्वारा 10 से 12 राउंड गोलियां चलाई गईं, जिससे पूरे कार्यालय परिसर में भगदड़ मच गई। बताया जा रहा हैं कि घटना के समय उपाध्यक्ष नीतेश सिंह भी अपने कक्ष में मौजूद थे, हालांकि उन्हें कोई चोट नहीं आई है। फायरिंग के बाद हमलावर वारदात स्थल से वाहन में सवार होकर तेजी से बिलासपुर की ओर भाग निकले।
घटना की सूचना मिलते ही मस्तूरी थाने की पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह मौके पर पहुंच गए। उन्होंने पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाने और सभी थाना क्षेत्रों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। तोरवा और मस्तूरी के प्रमुख मार्गों पर नाकेबंदी कर दी गई है तथा वाहनों की सघन जांच की जा रही है। पुलिस ने घटना स्थल से कई खोखे और खाली कारतूस बरामद किए हैं। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है।
हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के वाड्रफनगर से कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला वीडियो सामने आया है। यहां बलंगी चौकी क्षेत्र में पुलिस चौकी के ठीक सामने एक ASI नंदराम और आरक्षक सुरेंद्र की खुलेआम पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दोनों पुलिसकर्मी शराब के नशे में बुरी तरह लड़खड़ाते हुए नज़र आ रहे हैं। इसी दौरान कुछ स्थानीय लोग उन पर टूट पड़ते हैं और पुलिस चौकी के ठीक सामने उनकी जमकर पिटाई कर देते हैं। इस दौरान मौके पर मौजूद कुछ ग्रामीणों ने पूरा घटनाक्रम अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष की मौजूदगी में घटी। स्थानीय दबंगों ने शराब के नशे में धुत्त पुलिसकर्मियों को पीटा। इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस पूरे मामले में कार्रवाई किस पर होगी — नशे में धुत पुलिसकर्मियों पर या फिर उन दबंगों पर जिन्होंने कानून को अपने हाथ में लेकर पुलिसकर्मियों की पिटाई कर दी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन यह घटना छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। जब पुलिसकर्मी ही चौकी के सामने सुरक्षित नहीं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा?
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : आदिम जाति सेवा सहकारी कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर कल सूरजपुर जिले के सहकारी समिति कर्मचारियों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर 3 नवंबर 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में कर्मचारियों ने कलेक्टर और उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं सूरजपुर को ज्ञापन सौंपा हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं हैं, तो इस वर्ष धान खरीदी कार्य का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। संघ का कहना हैं कि लंबे समय से शासन-प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं निकाला गया, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है।
संघ ने कलेक्टर और उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं सूरजपुर को अपनी चार सूत्रीय मांग का ज्ञापन सौंपा है जिसमें उनकी ये मांगे हैं :
1. धान खरीदी वर्ष 2024-25 की कंडिका 1.10 के अनुसार परिवहन का 50 प्रतिशत कार्य संपूर्ण रूप से सुखद समिति को दिया जाए अथवा प्रत्येक सप्ताह संपूर्ण परिवहन सुनिश्चित किया जाए।
2. कलेक्टर द्वारा नामित धान खरीदी अधिकारी प्रभारी को खरीदी से लेकर अंतिम मिलान तक की संपूर्ण जिम्मेदारी लिखित में दी जाए।
3. धान खरीदी नीति वर्ष 2025-26 में आउटसोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति समाप्त कर विभागीय नियोजन कर नियमितीकरण किया जाए।
4. प्रदेश की 2058 सहकारी समितियों के कर्मचारियों को वेतनमान देने हेतु प्रत्येक समिति को प्रतिवर्ष 3-3 लाख रुपए प्रबंधकीय अनुदान राशि दी जाए, जैसा मध्यप्रदेश में प्रावधान है।
संघ ने कहा कि जब तक सरकार उनकी जायज मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत कहावत तो आपने सुना ही होगा जिसका सीधा अर्थ होता हैं कि किसी भी काम को समय बीत जाने के बाद करने से कोई फायदा नहीं होता। उसी तरह अब जब समय बीत चुका है इसके बाद लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा के पछताने और नोटिस भेजने से उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला है। पत्रकारों को डराने, धमकाने, मारने सब का प्रयास कर विफल होने के बाद अब उनके द्वारा अपने बचाव के लिए वैधानिक नोटिस भेजने का जो हथकंडा अपनाया गया है उससे पत्रकार डरने वाले नहीं हैं। आपको बता दें कि साहब द्वारा हिंद स्वराष्ट्र की संपादक को नोटिस भेज कर उनके द्वारा प्रकाशित खबरों से उनके मान प्रतिष्ठा पर प्रभाव पड़ने और उनकी मानहानि होने की बात लिखते हुए 10 लाख रुपयों की मांग की गई हैं।
आश्चर्य की बात यह हैं कि वैधानिक नोटिस में भी तहसीलदार द्वारा अपनी किरकिरी करवाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ा है। बता दें कि उनके द्वारा भेजे गए नोटिस में इस बात का जिक्र है कि वे मानसिक अवसाद से ग्रस्त हो गए है और इसी शायद इस अवसाद में आकर उनके द्वारा नोटिस में ऐसी ऐसी बातें लिखी गई हैं जो उनके लिए ही समस्या खड़ी करने के लिए काफी है।
चलिए जानते हैं उनके द्वारा नोटिस में क्या लिखा गया है और हम उन्हें उनके उन सवालों का क्या जवाब देना चाहते हैं :
1. अपनी नोटिस के प्रथम बिंदु में उन्होंने लिखा है कि वह काफी निष्ठा और ईमानदारी से विधि के प्रावधानों नियमों प्रक्रिया के अधीन रहकर कार्य करते आ रहे हैं और आज तिथि तक ऐसा कोई भी कार्य नहीं किया है जो कि उनकी पदीय कर्तव्यों व गरीमा के विपरीत हो। इतना ही नहीं इनके द्वारा किसी भी व्यक्ति या संस्था के दबाव में अपने पदीय कर्तव्यों व गरिमा के विपरीत जाकर कोई भी कार्य नहीं किया गया हैं और नहीं अपने पदीय कार्य में कोई अनियमितता या लापरवाही बरती गई हैं। उन्होंने लिखा है कि उनके विरुद्ध किसी सक्षम न्यायालय में या उचित फोरम में कहीं पर भी किसी पक्षकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं।
उत्तर :तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा द्वारा हमें दिए गए बयान में स्वयं अपनी गलती स्वीकारते हुए कहा गया था कि “शासन से प्राप्त पट्टा था चूंकि त्रुटिवश मुझसे साइन हो गया था उसमें चौहद्दी में” जब तहसीलदार साहब खुद अपनी गलती स्वीकार चुके हैं फिर नोटिस के प्रथम बिंदु को तो साफ तौर पर उनकेद्वारा ही नकार दिया गया है।दूसरा मुख्य बिंदु यह है कि उनके द्वारा यह लिखना की उनके विरुद्ध किसी सक्षम न्यायालय या उचित फोरम में किसी पक्षकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है पूर्णतया झूठी है क्योंकि उनके विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में माननीय उच्च न्यायालय की ही अवमानना का केस चल रहा है। आपको बता दे कि लटोरी निवासी साधुराम रजक द्वारा तहसीलदार के विरुद्ध हाईकोर्ट में परिवाद दायर किया गया है क्योंकि तहसीलदार द्वारा हाई कोर्ट के स्टे आर्डर को ठेंगा दिखाते हुए साधुराम के घर को तोड़ दिया था। मिली जानकारी के अनुसार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तहसीलदार साहब इस मामले में कोर्ट की समक्ष प्रस्तुत भी हो चुके हैं, तो ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब वे कोर्ट में प्रस्तुत भी हो चुके हैं फिर वे इस बात को कैसे भूल गए कि उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई हुई है या नहीं??
तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा द्वारा दिया गया बयान
2. दूसरे बिंदु में उनके द्वारा हमारे समाचार पत्र के RNI (समाचार पत्र की पंजीयन संख्या) नंबर को लिखते हुए आगे लिखा हैं कि हमारे पास पत्रकारिता करने की कोई विधिक अधिकारिता नहीं है. परंतु हमारे द्वारा बिना किसी विधिक अधिकार या हैसियत के पत्रकारिता किया जा रहा है।
उत्तर : आज के आधुनिक युग में जब सारी जानकारियां मोबाइल से ही मिल जाती है, तो थोड़ी सी मेहनत अगर तहसीलदार साहब या उनके वकील कर लेते तो शायद उनके द्वारा इस तरह की बेबुनियाद और हास्यास्पद बातें नोटिस में नहीं लिखी जाती। जब आपको हमारा रजिस्ट्रेशन नंबर मालूम था तो गूगल में सर्च कर लेते आपको सारी जानकारी मिल जाती कि हमें पत्रकारिता करने का अधिकार है या नहीं। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जब हमें यह सर्टिफिकेट दिया गया है तो पत्रकारिता का अधिकार भी तो होगा ही न।RNI नंबर के साथ यह लिखना कि हमें पत्रकारिता का अधिकार नहीं है उनके द्वारा स्वयं के गाल पर मारा गया एक तमाचा हैं।
3. तीसरे बिंदु में तहसीलदार द्वारा हमारे द्वारा प्रकाशित खबरों की कुछ पंक्तियों को लिखते हुए उन्हें असत्य, निराधार और झूठा बताया हैं।
उत्तर : हमारे द्वारा प्रकाशित सभी खबरों को पूरे सबूत के साथ लगाया गया था किसी भी खबर में ऐसा कोई भी बात नहीं लिखा गया था जिसका हमारे पास कोई साक्ष्य न हो। अब तक हमारे द्वारा पांच जमीन रजिस्ट्री के मामले सामने लाए गए हैं जिसमें बिना कलेक्टर परमिशन के ही शासकीय मद से प्राप्त जमीन की रजिस्ट्री हुई है और ये सारी रजिस्ट्रियां तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा के दस्तख़त के आधार पर ही हुई हैं।
4. चौथे बिंदु में उन्होंने लिखा है कि हमारी खबरों से उनकी साफ सुथरी छवि पर प्रभाव पड़ा है और उनकी मान सम्मान धूमिल हुई है और उन्हें मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है और वह मानसिक अवसाद से ग्रस्त हो गए हैं। आगे उन्होंने यह भी लिखा है कि उनके विरुद्ध खबर प्रकाशित करने का हमारा उद्देश्य उनको भयभीत कर अनुचित राशि प्राप्त करना हैं।
उत्तर : माननीय तहसीलदार साहब को कौन समझाएं की हर कोई उनकी तरह भ्रष्ट नहीं होता और पत्रकार के लिए खबर प्रकाशन का कोई उद्देश्य नहीं होता, अगर कोई उद्देश्य होता है तो केवल भ्रष्टाचार की पोल खोल समाज को साफ सुथरा करना और भ्रष्टाचारियों को उनके किए की सजा दिलवाना होता है। यदि हमारे द्वारा माननीय न्यायपालिक मजिस्ट्रेट महोदय से धन उगाही की कोशिश की गई थी तो उनके द्वारा हम पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया?? जब हमारे द्वारा उनके और उनके सहयोगियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध करने के लिए माननीय पुलिस महानिरीक्षक को आवेदन दिया गया है तभी उन्हें यह बात क्यों याद आ रही है???
5. अंतिम बिंदु में उनके द्वारा हमें धूर्त और चालक किस्म के व्यक्ति बताया गया हैं और हमारे खबरों के प्रकाशन से हुए उनके मानहानि एवं मानसिक और शारीरिक क्षति के लिए 10-10 लाख की मानहानि एवं क्षतिपूर्ति के लिए सक्षम न्यायालय में वाद योजित करने के लिए यह नोटिस प्रेषित करने की बात लिखी हैं।
उत्तर : हिंद स्वराष्ट्र समाचार पत्र की प्रधान संपादक एक महिला हैं और एक महिला को नोटिस प्रेषित कर धूर्त और चालाक लिखना कही न कही उनकी मानसिक दिवालियापन को ही दर्शा रहा हैं। हम भी यह मानने के लिए मजबूर हो जा रहे हैं कि सचमुच हमारे खबरों से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ा है और वे धीरे-धीरे मानसिक अपंगता की ओर अग्रसर हो जा रहे हैं।
नोटिस के अंत में उनके द्वारा हमें 30 दिन के भीतर 10-10 लाख रुपए उन्हें भुगतान कर पावती प्राप्त करने और लिखित में क्षमा याचना की बात लिखी हैं।
तहसीलदार द्वारा भेजे गए नोटिस ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं :
क्या उन्हें अपने बचाव का यही एकमात्र उपाय नजर आ रहा है..??
क्या वे नोटिस भेज कर पत्रकारों को डराने की कोशिश कर रहे हैं??
अगर वह सही थे तो उनके द्वारा अपनी गलती माइक में अब दिए गए अपने बयान में क्यों स्वीकार की गई..??
क्या अपने विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध हो जाने के डर से तहसीलदार ने पत्रकारों को नोटिस भेजा है..?
पुलिस द्वारा अब तक उनके विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध नहीं करने के कारण क्या इनके हौसले इतने बुलंद हो गए हैं जो पत्रकार पर दबाव डालने नोटिस का सहारा ले रहे हैं.??
हमारे द्वारा अब तक तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा के विरुद्ध जितनी भी खबरें प्रकाशित की गई है सभी खबरों में पूरे साक्ष्य पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। अब सिर्फ हम ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की जनता ऐसे भ्रष्ट अधिकारी पर कब कार्यवाही होती है इसका इंतजार कर रहे हैं। सीएम कांटेक्ट के कारण अब तक हर जगह से बचते आ रहे तहसीलदार कब तक ऐसे बचते रहते हैं यह तो देखने की बात है, लेकिन जब बात पत्रकार और पत्रकारिता की अस्मत पर आए तो पीछे हटने की या डरने की तो कोई बात ही नहीं हो सकती है। ना हम डरे हैं ना हम डरेंगे बल्कि जल्द ही हम इनके कारनामों के कुछ और खुलासे कर उनके उच्च अधिकारियों तक जानकारी पहुंचाएंगे ताकि देर– सबेर ही सही लेकिन इन पर कार्रवाई हो यह हम सुनिश्चित करेंगे।
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : जिले के मैनपाट कालीघाट में आज शाम गोवर्धन पूजा से लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी पिकअप पलट गई। इस हादसे में 25 लोग घायल हो गए हैं, वहीं पांच की हालत गंभीर बताई जा रही है। यह हादसा अंबिकापुर–मैनपाट मार्ग में नवानगर के पास हुई। बताया जा रहा है कि वाहन में दुर्घटना के वक्त 40 लोग सवार थे। सभी सवार गोवर्धन पूजा उसने शामिल होकर वापस लौट रहे थे इसी दौरान घाट में पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे ये हादसा हो गया।
मिली जानकारी के अनुसार सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज भी गोवर्धन पूजा में शामिल होने के बाद लौट रहे थे इस दौरान उन्होंने देखा कि एक पिकअप पलट गया है और ग्रामीण घायल अवस्था में वहीं पड़े हुए हैं और एंबुलेंस को सूचना देने के बाद घटनास्थल पर नहीं पहुंची है तो उन्होंने इसे लेकर नाराजगी जताई और अपनी गाड़ी में घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने के निर्देश दिए। इसके बाद भाई लोग को अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है।
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : शहरी स्वास्थ्य केंद्र नवापारा में दवा खरीदी के नाम पर लगभग 30 लाख रुपयों की हुई घोटालेबाजी की खबर आज हर अखबार और न्यूज चैनलों की सुर्खियां बनी हुई है। लेकिन आपको बता दे कि हिंद स्वराष्ट्र द्वारा इस मामले का खुलासा आज से लगभग 6 माह पूर्व ही कर दिया गया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कुछ कामचोर आलाधिकारी जो केवल जांच टीम गठित की जा रही है और दोषियों को बक्सा नहीं जाएगा जैसी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं उनके द्वारा अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। आपको बता दे की स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक अनिल शुक्ला द्वारा मीडिया को भी दिए बयान में इस बात का जिक्र किया गया है कि यह मामला 6 महीना पूर्व ही उनके संज्ञान में आया था। अब सवाल यह उठता है कि 6 माह बीत जाने के बावजूद अब तक उनके हाथ खाली क्यों है और इस मामले की जांच पूरी क्यों नहीं हो पाई है..?
यह कोई पहला मामला नहीं है जब जांच जारी है… दोषियों पर कार्रवाई होगी…जैसी बातों के तर्ज पर मामले को दबाने की कोशिश की गई है। आश्चर्य की बात यह है कि हर मामले में संयुक्त संचालक द्वारा एक जांच टीम गठित की जाती है लेकिन जांच टीम कभी भी जांच पूरी नहीं कर पाते हैं, उससे पहले ही जांच टीम को बदलना पड़ता है और दुबारा जांच टीम गठित की जाती हैं और इसी प्रक्रिया में एक लंबा समय बीत जाता है और धीरे-धीरे वह मामला गर्त पर चला जाता है।
ऐसे में स्वास्थ्य विभाग इस मामले की जांच पूरी करवा पाएगा? दोषियों पर कार्रवाई होगी या नहीं..? इन सभी बातों को लेकर लोगों के मन में संशय बरकरार है। अब यह तो देखने का विषय होगा कि इस मामले की जांच संयुक्त संचालक कब तक करवा पाते हैं, करवा पाते हैं या नहीं और अगर जांच हो भी जाती है तो दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है….?