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समुद्र में चीन की ‘युद्ध’ की तैयारी? मछली पकड़ने वाली नावों के असामान्य पैटर्न से दुनिया हैरान…

नई दिल्ली। पूर्वी चीन सागर से आई सैटेलाइट तस्वीरों और समुद्री डेटा ने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के बीच हलचल पैदा कर दी है। हाल ही में हुए एक जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि हजारों मछली पकड़ने वाली नावें चीनी समुद्र में बेहद सटीक और जटिल ज्यामितीय आकार बना रही हैं, जो आम तौर पर मछली पकड़ने की गतिविधियों से बिलकुल अलग लगता है।
दिसंबर के अंत से जनवरी की शुरुआत के बीच, चीनी बेड़े ने तीन अलग-अलग मौकों पर अपनी संगठित शक्ति का प्रदर्शन किया है। समुद्री डेटा फर्म ‘ingeniSPACE’ के मुख्य परिचालन अधिकारी जेसन वांग ने AFP को बताया कि ये पैटर्न बेहद असामान्य लग रहे थे।

चीन ने कब-कब किया शक्ति का प्रदर्शन
25 दिसंबर को लगभग 2,000 चीनी जहाजों ने ताइवान के उत्तर-पूर्व में ‘L’ आकार की दो विशाल समानांतर कतारें बनाई। ये कतारें करीब 300 किलोमीटर तक फैली थी।

इसके बाद जनवरी की शुरुआत लगभग 1,000 चीनी जहाजों ने लगभग 400 किलोमीटर कर फैली एक विशाल आयताकार (Rectangle) आकृति बनाई। विशेष बात यह थी कि इसमें वही जहाज शामिल थे जो दिसंबर की घटना में देखे गए थे।

वहीं कुछ सप्ताह बाद 1,200 चीनी जहाजों ने फिर से समानांतर रेखाएं बनाई और करीब 30 घंटों तक अपनी स्थिति पर डटे रहे।

विशेषज्ञों ने कहा ‘मछली पकड़ना’ उद्देश्य नहीं
समुद्री सुरक्षा विश्लेषकों का तर्क है कि ये गतिविधियां किसी भी तरह से व्यावसायिक नहीं लग रही थी। खराब मौसम और तेज हवाओं के बीच हजारों जहाजों का एक-दूसरे से मात्र 500 मीटर की दूरी पर सटीक रेखा में रहना बिना किसी केंद्रीय कमान के संभव नहीं है। आमतौर पर मछुआरे अधिक शिकार करने के लिए फैल जाते हैं, न कि एक-दूसरे के करीब आकर कतारें बनाते हैं।

तैयारी का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन द्वारा अपने नागरिक बेड़े को रणनीतिक उद्देश्यों, जैसे कि नाकाबंदी या संकट के समय सैन्य सहयोग के लिए उपयोग करने का एक परीक्षण हो सकता है। पूर्व नौसैनिक अधिकारियों का कहना है कि पहले खराब मौसम में ये नावें बंदरगाह लौट जाती थीं, लेकिन अब इनका समुद्र में डटे रहना एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।

बड़ी खबर: अंबिकापुर ‘दवा घोटाले’ में प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी, जांच रिपोर्ट के बावजूद SDM शिवानी जायसवाल के पति डॉ आयुष जायसवाल पर मेहरबानी क्यों?

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : सरगुजा जिले के नवापारा शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुए करोड़ों के दवा घोटाले में एक नया मोड़ आ गया है। जांच समिति द्वारा भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत पेश किए जाने के महीनों बाद भी अब तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं होना, जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
दस्तावेज ‘खाक’, जांच ‘साफ’, फिर भी कार्रवाई ‘हाफ’
हैरानी की बात यह है कि जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड ‘आग’ के हवाले कर दिए गए। इसके बावजूद, वर्तमान में उपलब्ध 2024-25 के दस्तावेजों में ही करोड़ों की धांधली पकड़ी गई है। लेकिन विडंबना देखिए कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने और भ्रष्टाचार सिद्ध होने के बाद भी आज तक न तो किसी पर FIR हुई है और न ही किसी को निलंबित किया गया है।
रसूख के आगे नतमस्तक सिस्टम?
स्थानीय गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी डॉ. आयुष जायसवाल को उनके रसूख का लाभ मिल रहा है। डॉ. आयुष वर्तमान में सूरजपुर में पदस्थ SDM शिवानी जायसवाल के पति हैं। क्या यही कारण है कि सरकारी खजाने में करोड़ों की सेंध लगाने वालों के खिलाफ फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं?


जांच रिपोर्ट के वो अहम खुलासे जिन पर नहीं हुआ एक्शन:मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को सौंपी गई जांच समिति की रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को सौंपी गई जांच समिति की रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

दस्तावेज जलाने की साजिश: जब जांच समिति ने साल 2019 से 2024 के बीच की खरीदी के रिकॉर्ड मांगे, तो केंद्र द्वारा यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि ‘कार्यालय में आग लगने के कारण पुराने दस्तावेज जल गए हैं’। इसे सबूतों को मिटाने की एक बड़ी साजिश के रूप में देखा जा रहा है।

नियमों की धज्जियां (सिंगल टेंडर घोटाला): नियमों के मुताबिक दवा खरीदी के लिए प्रतिस्पर्धात्मक कोटेशन मंगाने थे, लेकिन जांच में पाया गया कि साठगांठ कर केवल एक ही फर्म (सिंगल टेंडर) को 50-50 हजार रुपये के कई ऑर्डर एक ही दिन में थमा दिए गए।

बिना रेट के ‘अंधी’ खरीदी: वित्तीय वर्ष 2024-25 की फाइलों में दवाओं और उपकरणों की दर (Rate) का उल्लेख ही नहीं है। बिना दाम तय किए ही लाखों रुपये के ऑर्डर जारी कर दिए गए।

कीमोथेरेपी दवाओं में फर्जीवाड़ा: डॉ. आयुष जायसवाल और अन्य संबंधितों पर आरोप है कि उन्होंने कीमोथेरेपी की दवाओं के लिए CGMSCL से अनिवार्य NOC तक नहीं ली। खुद ही डिमांड लेटर लिखा और खुद ही अपने नाम पर दवाएं इश्यू करवाकर खर्च दिखा दिया।

गायब स्टॉक: रजिस्टर में दवाओं की एंट्री और वार्डों में दवाओं की असल सप्लाई के बीच कोई मेल नहीं मिल रहा है।

रसूख के रक्षण में दबा भ्रष्टाचार?
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से डॉ. आयुष जायसवाल (तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा अधिकारी) और डॉ. हिमांशु गुप्ता के कार्यकाल के दौरान हुई धांधली का जिक्र है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि SDM पति होने के नाते डॉ. आयुष को बचाने की कोशिशें की जा सकती हैं।
अधिकारियों पर लटकी तलवार
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि लिपिकीय वर्ग से स्टोरकीपर का काम लेना और नियमों के विरुद्ध जाकर चहेती फर्मों को उपकृत करना सीधे तौर पर गबन की श्रेणी में आता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने ही ‘पावरफुल’ अधिकारी के परिवार पर कार्रवाई करता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

आरटीआई कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर आरोपी कोई आम कर्मचारी होता, तो अब तक जेल की सलाखों के पीछे होता। लेकिन यहाँ ‘साहब’ के पति पर मेहरबानी समझ से परे है। क्या CMHO और जिला प्रशासन राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में इस बड़े घोटाले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं?

“रिश्तेदारी के आगे झुका कानून? सूरजपुर जमीन घोटाले में नया मोड़! चाचा को बचाने SDM भतीजी ने की ‘सेटिंग’?

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : लटोरी तहसील में हुए बहुचर्चित जमीन घोटाले में अब एक ऐसा पारिवारिक मोड़ आ गया है, जिसने एसडीएम शिवानी जायसवाल की पूरी जांच रिपोर्ट को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। ‘हिंद स्वराष्ट्र’ समाचार पत्र में प्रकाशित कड़ियों (पार्ट 1, 2, 3) के बाद जिस जांच का जिम्मा एसडीएम को सौंपा गया था, उसमें उन्होंने ‘चुन-चुन कर’ केवल उन्हीं मामलों को संज्ञान में लिया जो अभी लंबित थे। लेकिन असली खेल उन तीन मामलों में हुआ जिन्हें एसडीएम ने अपनी जांच की परिधि से बाहर रखा।
जांच में ‘पिक एंड चूज’ का खेल: तीन मामले गायब क्यों?
दस्तावेजों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ‘हिंद स्वराष्ट्र’ ने लटोरी तहसीलदार के कई कारनामों का खुलासा किया था। लेकिन एसडीएम शिवानी जायसवाल ने केवल उन 3 खबरों पर नोटिस जारी किया जिनमें नामांतरण (Mutation) की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी या विवादित थी। 
सबसे बड़ा सवाल: उन बाकी 3 गंभीर मामलों को जांच में क्यों नहीं जोड़ा गया जिनमें नामांतरण की प्रक्रिया गुपचुप तरीके से पूर्ण कर ली गई थी? क्या उन फाइलों में दबे सफेदपोश चेहरों को बचाना एसडीएम की प्राथमिकता थी?
भतीजी बनी जज, तो ‘चाचा’ को मिली क्लीन चिट!
इस पूरे मामले की तह तक जाने पर जो सच सामने आया है, वह जिला प्रशासन की जड़ें हिला देने वाला है। चर्चा है कि जिन जमीनों की खरीद-बिक्री में नियमों को ताक पर रखा गया, उनमें से एक प्रमुख क्रेता (खरीददार) स्वयं एसडीएम शिवानी जायसवाल के चाचा बताए जा रहे हैं।
राजस्व विभाग के गलियारों में अब यह सवाल गूंज रहा है: “जब भतीजी ही जांच अधिकारी हो, तो चाचा पर कार्यवाही की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”
हितों का टकराव (Conflict of Interest) और कानून की अवहेलना
कानूनी तौर पर यदि किसी जांच में अधिकारी का सगा संबंधी शामिल हो, तो उस अधिकारी को स्वयं को जांच से अलग कर लेना चाहिए। लेकिन यहाँ एसडीएम ने न केवल जांच की, बल्कि तहसीलदार को “सद्भाविक त्रुटि” का प्रमाण पत्र देकर मामले को रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की। 
तहसीलदार का बचाव: एसडीएम ने रिपोर्ट में लिखा कि तहसीलदार ने जानबूझकर गलती नहीं की। 

सीमित जांच:

केवल खसरा नंबर 213/2, 421/2 और 114/1 तक ही जांच को सीमित रखा गया ताकि बाकी बड़े चेहरों तक आंच न पहुंचे। 
पत्रकार को बनाया निशाना, चाचा को बनाया सुरक्षित
हैरानी की बात है कि जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार पर बात करने के बजाय, तहसीलदार के उस बयान को तवज्जो दी गई जिसमें उन्होंने पत्रकार की नियत पर सवाल उठाए थे। यह स्पष्ट करता है कि प्रशासन का उद्देश्य सच का पता लगाना नहीं, बल्कि सच दिखाने वालों का मुंह बंद करना और अपने परिजनों को लाभ पहुंचाना था। 
अब गेंद कलेक्टर सूरजपुर के पाले में है: क्या एक ऐसी एसडीएम की जांच रिपोर्ट को स्वीकार किया जाएगा जिसका सीधा संबंध आरोपियों या लाभार्थियों से है? क्या इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होगी?

बढ़ती मधुमेह की बीमारी—जागरूकता, सावधानी और स्वस्थ जीवनशैली ही बचाव का रास्ता…

हिंद स्वराष्ट्र : आज के आधुनिक जीवन में बदलती खान-पान की आदतों और भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण मधुमेह (डायबिटीज) तेजी से फैलने वाली बीमारियों में शामिल हो गई है। पहले यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के युवाओं और बच्चों में भी इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते इस बीमारी के प्रति जागरूकता न बढ़ाई गई तो यह आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। इसके पीछे असंतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, तनाव और आनुवंशिक कारण प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इस बीमारी के लक्षणों में बार-बार प्यास लगना, जल्दी थकान होना, बार-बार पेशाब आना, घाव का देर से भरना और अचानक वजन कम होना शामिल हैं।

बचाव के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है। इसके लिए लोगों को संतुलित आहार लेना चाहिए, जिसमें हरी सब्जियां, फल और रेशेदार खाद्य पदार्थ अधिक हों। मीठे पदार्थों और जंक फूड का सेवन कम करना चाहिए। रोजाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम या पैदल चलना भी बहुत जरूरी है। इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना और शरीर के वजन को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।

मधुमेह होने पर कैसी हो जीवनशैली

यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह हो जाए तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सही जीवनशैली अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। मरीज को नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेनी चाहिए और समय-समय पर शुगर की जांच करवानी चाहिए। भोजन में कम चीनी, कम तेल और अधिक पौष्टिक आहार लेना चाहिए। नियमित योग और हल्का व्यायाम करना भी बहुत लाभदायक होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाकर मधुमेह जैसी बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि समाज का हर व्यक्ति इस बीमारी के प्रति जागरूक हो और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखे।

TI, SI समेत 11 पुलिस अधिकारियों के तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र जशपुर : जशपुर जिले के पुलिस उप महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह द्वारा प्रशासनिक दृष्टिकोण से 11 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए हैं। जारी आदेश में 4 निरीक्षक, 4  उप निरीक्षक और तीन सहायक उपनिरीक्षकों  के नाम शामिल हैं।

देखें आदेश :

सांसद चिंतामणि महराज ने अंबिकापुर रेलवे स्टेशन के 2 नए प्लेटफार्म सहित विकास कार्यों की रखी आधारशिला,10 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में आज सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज द्वारा आज लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से किए जाने वाले विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया।

सांसद चिंतामणि महराज ने अंबिकापुर रेलवे स्टेशन परिसर में 2 नए प्लेटफार्म, नया लूप लाइन, पैदल पथ पार (फुट क्रॉसिंग) तथा प्लेटफार्म क्रमांक 1 के लंबाई विस्तार सहित अन्य आवश्यक अधोसंरचना कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया।

भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद चिंतामणि महराज ने कहा कि अंबिकापुर रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आवागमन करते हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या और उनकी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड द्वारा स्टेशन में विभिन्न विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों के पूर्ण होने से यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं मिलेंगी तथा ट्रेनों के संचालन में भी सुगमता आएगी।

सांसद ने कहा कि नए प्लेटफार्म के निर्माण और लूप लाइन के विस्तार से ट्रेनों के आवागमन की क्षमता बढ़ेगी, जिससे यात्रियों को ट्रेन पकड़ने और उतरने में अधिक सुविधा होगी। वहीं पैदल पथ पार (फुट क्रॉसिंग) के निर्माण से यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक सुरक्षित आवाजाही का बेहतर विकल्प मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए रेल सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अंबिकापुर रेलवे स्टेशन में इन कार्यों के पूर्ण होने से सरगुजा संभाग के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह, नगर पंचायत सभापति हरिमंदिर सिंह टिन्नी, रेलवे बोर्ड के एएनआई अजय कुमार, स्टेशन प्रबंधक सुधांशु रंजन, जोनल रेलवे बोर्ड के सदस्य मुकेश तिवारी सहित पार्षदगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग करने वाले होटलों पर कार्रवाई, सूरजपुर से 10 वहीं प्रतापपुर से 14 सिलेंडर जब्त…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : विगत दिवस जिले में घरेलू गैस सिलेंडर के व्यावसायिक उपयोग के विरुद्ध राजस्व एवं खाद्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा गुरुवार को कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान कई होटलों का निरीक्षण कर घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए गए। राजस्व एवं खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने ओडगी रोड स्थित यादव होटल में जांच के दौरान 03 नग घरेलू गैस सिलेंडर (कुल 14.2 किलोग्राम) जब्त किए। जब्त किए गए सिलेंडरों को इंडेन गैस एजेंसी भैयाथान को सुपुर्द किया गया। इसके अलावा घरेलू गैस के व्यावसायिक उपयोग की शिकायतों के आधार पर टीम ने सूरजपुर के गोलू स्वीट्स, पंडित स्वीट्स, होटल मद्रासी तथा आनंद रिहंदम का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गोलू होटल से 06 नग उपयोग किए गए घरेलू गैस सिलेंडर तथा आनंद रिहंदम के किचन कक्ष से 01 नग उपयोग किया हुआ घरेलू गैस सिलेंडर बरामद किया गया, जिन्हें टीम द्वारा जब्त कर लिया गया।
             

घरेलू गैस सिलेंडर के अवैध उपयोग पर कार्रवाई प्रतापपुर में 14 सिलेंडर जब्त

प्रतापपुर क्षेत्र में होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग किए जाने की शिकायत पर खाद्य एवं राजस्व विभाग के संयुक्त दल ने बुधवार को कई प्रतिष्ठानों में जांच की। जांच के दौरान कुल 14 घरेलू गैस सिलेंडर – 10 नग 14.2 किलोग्राम और 04 नग 5 किलोग्राम – जब्त किए गए। जब्त सिलेंडर इंडेन एजेंसी प्रतापपुर को सौंप दिए गए। तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और खाद्य निरीक्षक प्रतापपुर की इस टीम ने पांच प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की। नया बस स्टैंड स्थित रोशन डेली नीड्स से सबसे ज्यादा 10 सिलेंडर जब्त हुए। इसके अलावा पुराना बस स्टैंड के शुभम होटल और जायसवाल होटल तथा नया बस स्टैंड के मंगलेश डेली नीड्स और परवेज कुमार के प्रतिष्ठान से एक-एक सिलेंडर जब्त किए गए।

देवगढ़ में उप तहसील की घोषणा, अब ग्रामीणों को राजस्व कार्यों के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूर…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज सरगुजा जिले के उदयपुर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विधानसभा में देवगढ़ में उप तहसील स्थापित किए जाने की घोषणा की। यह निर्णय उदयपुर क्षेत्र सहित देवगढ़ और आसपास के ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि लंबे समय से उदयपुर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा देवगढ़ में उप तहसील की स्थापना की मांग उठाई जा रही थी। अब इस मांग के पूरा होने से क्षेत्र के हजारों लोगों को राजस्व और प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर-दराज के कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पडेगा।

देवगढ़ में उप तहसील बनने से क्षेत्र के ग्रामीणों को नामांतरण, सीमांकन, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, भू-अभिलेख संबंधी कार्यों सहित अन्य राजस्व सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी। इससे न केवल आम लोगों का समय और खर्च बचेगा, बल्कि प्रशासनिक कामकाज भी अधिक सुगम और प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेगा।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे उदयपुर क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीणों को शासन की सेवाओं का लाभ और अधिक सहजता से प्राप्त हो सकेगा।

देवगढ़ में उप तहसील की स्थापना को उदयपुर क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे क्षेत्र में प्रशासनिक पहुंच बढ़ेगी और विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी।

छत्तीसगढ़ के शिमला मैनपाट में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल बनाएगा सर्वसुविधायुक्त पर्यटन–आवासीय परिसर…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ के ‘शिमला’ नाम से प्रसिद्ध मैनपाट में पर्यटन सुविधाओं और आवासीय विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार द्वारा मैनपाट में 4.80 हेक्टर (12 एकड़) भूमि अटल विहार योजना हेतु छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को आवंटित की गई है।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि इस भूमि पर आधुनिक एवं बहुउपयोगी पर्यटन–आवासीय परिसर का निर्माण शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप विकसित होने वाली यह परियोजना मैनपाट आने वाले पर्यटकों को बेहतर, सुरक्षित और किफायती ठहराव उपलब्ध कराएगी।

श्री सिंह देव ने कहा कि यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के सक्रिय प्रयासों से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि मैनपाट में लगातार बढ़ते पर्यटक आगमन को देखते हुए इस तरह की सुविधाओं की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

प्रस्तावित परिसर में आधुनिक वेलनेस एवं मनोरंजन सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। सिंह देव ने बताया कि परियोजना में केरल मॉडल पर आधारित वेलनेस सेंटर, प्राकृतिक पंचकर्म चिकित्सा, हर्बल स्पा और आयुष सेवाएं प्रस्तावित हैं। साथ ही 24×7 क्लब हाउस, मिलेट्स कैफे, जिम, स्विमिंग पूल, किड्स प्ले एरिया, स्टीम बाथ और एंटरटेनमेंट ज़ोन विकसित किए जाएंगे। पर्यावरण अनुकूल विकास के तहत ट्री हाउस, कॉटेज और स्थानीय जीवन एवं संस्कृति का अनुभव कराने वाला सांस्कृतिक क्षेत्र भी शामिल होगा।

उन्होंने कहा कि परियोजना से मैनपाट में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होंगे और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नई संभावनाएं खुलेंगी। गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधा उपलब्ध होने से पर्यटकों का ठहराव समय बढ़ेगा, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मैनपाट छत्तीसगढ़ का विशिष्ट एवं उभरता हुआ पर्यटन गंतव्य है। तेजी से बढ़ रही पर्यटक संख्या को देखते हुए यहाँ आधुनिक सुविधाओं का विकास अत्यावश्यक है। हाउसिंग बोर्ड की यह पहल पर्यटन, आवास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी तथा मैनपाट को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित करेगी।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना को छत्तीसगढ़ के पर्यटन विस्तार के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के विकास से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा और राज्य का हॉस्पिटैलिटी सेक्टर मजबूत होगा।

सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने इसे मैनपाट के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह परियोजना स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं व्यापार के अवसर उपलब्ध कराएगी और क्षेत्र की पहचान को नई ऊँचाई देगी।

अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि यह पहल छत्तीसगढ़ में पर्यटन–आवास विकास के क्षेत्र में गृह निर्माण मंडल की ऐतिहासिक भूमिका को मजबूत करेगी और भविष्य में मैनपाट को एक प्रमुख राष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने का आधार बनेगी।

सूरजपुर ग्राउंड रिपोर्ट: SDM का ‘चाचा’ वाले खुलासे पर आधिकारिक खंडन, लेकिन सवालों के घेरे में अधूरी जांच!

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर:  लटोरी जमीन घोटाले में ‘हिंद स्वराष्ट्र’ की खबर के बाद प्रशासन में मचे हड़कंप के बीच एक नया मोड़ आया है। एसडीएम शिवानी जायसवाल ने एक आधिकारिक ज्ञापन (दिनांक 12.03.2026) जारी कर उस खबर का खंडन किया है जिनमें एक खरीददार को उनका ‘चाचा’ बताया गया था। एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि जांच या ग्राम लटोरी से संबंधित किसी भी शिकायत से जुड़ा कोई भी व्यक्ति उनका रिश्तेदार नहीं है।
हालांकि, इस खंडन के बाद भी घोटाले की परतें कम होने के बजाय और उलझती नजर आ रही हैं। जनता और मीडिया अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि यदि रिश्तेदारी नहीं है, तो जांच में ‘कंजूसी’ क्यों बरती गई?

एसडीएम मैडम की कथित चाचा और उनके कारनामे

एसडीएम मैडम जरा इस मामले में भी प्रकाश डाल देती तो अच्छा होता कि यह शख्स कौन है और शासन से प्राप्त भूमि का नामांतरण बिना कलेक्टर परमिशन के कैसे हो गया?


SDM का पक्ष: “खबर असत्य और भ्रामक”
एसडीएम कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, समाचार पत्र में प्रकाशित “रिश्तेदारी के आगे झुका कानून” शीर्षक वाली खबर पूर्णतः असत्य, भ्रामक और तथ्यहीन है। एसडीएम का दावा है कि उनके द्वारा की गई पूरी जांच तत्कालीन उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष रूप से और नियमानुसार की गई है।
लेकिन… अनुत्तरित सवाल अब भी बरकरार!
एसडीएम के खंडन ने व्यक्तिगत आरोपों पर तो सफाई दे दी, लेकिन जांच की प्रक्रिया पर उठ रहे बड़े सवालों का जवाब अब भी गायब है। सवाल यह हैं कि मैडम द्वारा जांच में गड़बड़ी की गई इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी और उन समाचारों का खंडन क्यों नहीं किया..? आपको बता दे की इससे पहले भी हमारे द्वारा कई खबरें चलाई गई थी लेकिन मैडम के कान में जू तक नहीं रेंगा, लेकिन जब चाचा–भतीजी वाली बात उजागर हो गई तो उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया दे दी। इतनी ही तत्परता से अगर मैडम बाकी मुद्दों में भी ध्यान दे देती तो शायद हमें इतनी खबरें चलाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती और उनकी इतनी किरकिरी नहीं होती। मैडम शिवानी इन सवालों का भी जवाब दें:


चुनिंदा जांच क्यों?

यदि कोई रिश्तेदारी नहीं थी, तो ‘हिंद स्वराष्ट्र’ द्वारा उठाए गए उन अन्य 3 मामलों को जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया गया जिनमें नामांतरण की प्रक्रिया पहले ही पूर्ण हो चुकी थी?

नामांतरण पर चुप्पी:

जिन 3 मामलों (खसरा नं. 213/2, 421/2, 114/1) का जिक्र एसडीएम ने अपनी पहली रिपोर्ट में किया था, उनमें से खसरा नं. 213/2 का नामांतरण नियम विरुद्ध (बिना कलेक्टर अनुमति) होने के बावजूद तहसीलदार को “सद्भाविक त्रुटि” का कवच क्यों दिया गया?

दस्तावेजों का विरोधाभास

एक तरफ एसडीएम मानती हैं कि धारा 165 7(ख) का उल्लंघन हुआ है, दूसरी तरफ इसे जानबूझकर की गई गलती नहीं मानतीं। क्या यह निष्पक्ष जांच का पैमाना है?

रिश्तेदारी की चर्चा बनाम प्रशासनिक पारदर्शिता

भले ही एसडीएम ने पारिवारिक संबंधों से इनकार कर दिया है, लेकिन जमीन घोटाले की गंभीरता इस बात से कम नहीं होती। लटोरी में पट्टे की जमीनों की जिस तरह से बंदरबांट हुई, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। चर्चा अब इस बात की है कि क्या जिला कलेक्टर इस मामले की किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या किसी दूसरे अनुविभाग के अधिकारी से दोबारा जांच कराएंगे?

निष्कर्ष:
प्रशासनिक खंडन अपनी जगह है, लेकिन लटोरी तहसीलदार के ‘कारनामों’ की फाइल अब भी अधूरी है। जब तक सभी 6 संदिग्ध मामलों की पारदर्शी जांच नहीं होती, तब तक “सद्भावना” और “निष्पक्षता” जैसे शब्द केवल कागजी नजर आएंगे।

विशेष स्वास्थ्य खबर: बढ़ता हुआ Uric Acid – कारण, लक्षण, बचाव और घरेलू उपाय…

हिंद स्वराष्ट्र : आजकल बदलती जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों के कारण लोगों में यूरिक एसिड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले यह बीमारी अधिकतर बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। अगर समय रहते इसका ध्यान न दिया जाए तो यह आगे चलकर Gout (गठिया) जैसी समस्या पैदा कर सकती है।


यूरिक एसिड क्या है?

यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक केमिकल होता है जो प्यूरिन (Purine) नामक पदार्थ के टूटने से बनता है।
यह पदार्थ कई खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। सामान्य स्थिति में किडनी यूरिक एसिड को पेशाब के माध्यम से बाहर निकाल देती है, लेकिन जब शरीर में इसकी मात्रा ज्यादा हो जाती है या किडनी इसे ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तब यह खून में बढ़ जाता है।


यूरिक एसिड बढ़ने के मुख्य कारण

ज्यादा प्रोटीन और प्यूरिन वाले भोजन का सेवन

ज्यादा रेड मीट और समुद्री भोजन

शराब या बीयर का सेवन

मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि

ज्यादा मीठे और प्रोसेस्ड फूड

किडनी की समस्या

कम पानी पीना


यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण

यूरिक एसिड बढ़ने पर शरीर में कई संकेत दिखाई देते हैं:

जोड़ों में तेज दर्द (खासकर पैर के अंगूठे में)

सूजन और लालिमा

चलने-फिरने में परेशानी

सुबह के समय जोड़ों में अकड़न

बार-बार दर्द का दौरा पड़ना


अगर यह समस्या ज्यादा बढ़ जाए तो यह गठिया (गाउट) का रूप ले सकती है।


यूरिक एसिड में क्या खाना चाहिए

यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने के लिए सही खान-पान बहुत जरूरी है।

✔ हरी सब्जियां
✔ फल (सेब, केला, पपीता)
✔ लो-फैट दूध और दही
✔ साबुत अनाज
✔ ज्यादा पानी


❌ किन चीजों से बचना चाहिए

रेड मीट

शराब और बीयर

ज्यादा दालें (सीमित मात्रा में)

तली-भुनी चीजें

ज्यादा चीनी वाले पेय



🏠 यूरिक एसिड के घरेलू उपाय

कुछ घरेलू उपाय यूरिक एसिड को कम करने में मदद कर सकते हैं:

1️⃣ नींबू पानी
सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीने से शरीर में यूरिक एसिड कम होने में मदद मिलती है।

2️⃣ सेब का सिरका
एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पी सकते हैं।

3️⃣ अजवाइन और मेथी
रात में मेथी के दाने भिगोकर सुबह खाने से फायदा मिलता है।

4️⃣ ज्यादा पानी पीना
दिन में 8-10 गिलास पानी पीने से शरीर से यूरिक एसिड बाहर निकलने में मदद मिलती है।


🏃‍♂️ बचाव के उपाय

रोजाना हल्की व्यायाम या वॉक करें

वजन नियंत्रित रखें

ज्यादा पानी पिएं

संतुलित भोजन करें

समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाएं


यूरिक एसिड एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। सही खान-पान, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

सावधान: हिंद स्वराष्ट्र के प्रतिनिधि पद से भूषण बघेल पदमुक्त, संस्थान ने जारी की सूचना…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर: ‘हिंद स्वराष्ट्र’ समाचारपत्र की संपादक मृण्मयी पाण्डेय ने सूरजपुर विकासखंड क्षेत्र के अपने प्रतिनिधि भूषण बघेल को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है। संस्थान द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बघेल को उनके कार्यों में पाई गई अनियमितता और गलत आचरण के चलते निष्कासित किया गया है।
संस्थान से अब कोई संबंध नहीं
हिंद स्वराष्ट्र प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि 3 मार्च 2026 से भूषण बघेल का संस्थान के साथ किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं रह गया है। उनके द्वारा किए गए किसी भी कार्य या व्यवहार के लिए संस्थान जिम्मेदार नहीं होगा।
आमजन और अधिकारियों के लिए अपील
संस्थान ने क्षेत्र के नागरिकों, सरकारी विभागों और विज्ञापनदाताओं के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
1. हिंद स्वराष्ट्र से संबंधित किसी भी खबर, विज्ञापन या आधिकारिक कार्य के लिए भूषण बघेल से कोई संपर्क न रखें।
2.यदि भूषण बघेल हिंद स्वराष्ट्र के नाम का उपयोग करते हैं, तो वह पूर्णतः अवैध माना जाएगा।
3.संस्थान से जुड़ी किसी भी जानकारी या समाचार के लिए अब केवल अधिकृत प्रतिनिधियों या मुख्य कार्यालय से ही संपर्क करें।
नोट: यह निर्णय संस्थान की साख बनाए रखने और पत्रकारिता की सुचिता को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से लिया गया है।

अहमदाबाद में इतिहास: भारत तीसरी बार टी20 वर्ल्ड चैंपियन, न्यूजीलैंड को 96 रनों से रौंदा…

हिंद स्वराष्ट्र नई दिल्ली/अहमदाबाद : भारतीय क्रिकेट टीम ने एक बार फिर दुनिया पर अपना परचम लहरा दिया है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों के विशाल अंतर से शिकस्त देकर तीसरी बार खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया ने बैक-टू-बैक (2024 और 2026) ट्रॉफी जीतने वाली पहली टीम बनकर इतिहास रच दिया है।
संजू और अभिषेक का तूफान
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 5 विकेट खोकर 255 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया। यह टी20 वर्ल्ड कप फाइनल के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर है। सलामी जोड़ी संजू सैमसन (89 रन) और अभिषेक शर्मा (52 रन) ने कीवी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए पावरप्ले में रिकॉर्ड 92 रन जोड़ दिए। इसके बाद ईशान किशन ने भी 54 रनों की तेजतर्रार पारी खेलकर रन गति को कम नहीं होने दिया।
ताश के पत्तों की तरह ढही कीवी टीम
256 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के अनुशासन के आगे टिक नहीं सकी। जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल की धारदार गेंदबाजी के सामने न्यूजीलैंड की पूरी टीम 19 ओवरों में मात्र 159 रनों पर सिमट गई। भारत की ओर से गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और न्यूजीलैंड को कभी भी मैच में वापसी का मौका नहीं दिया।
मुख्य आंकड़े और रिकॉर्ड्स विवरण आंकड़े भारत का स्कोर 255/5 (20 ओवर) न्यूजीलैंड का स्कोर 159/10 (19 ओवर) मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी संजू सैमसन (89 रन) जीत का अंतर 96 रन (फाइनल की सबसे बड़ी जीत) जीत के साथ बदला लिया इस जीत ने न केवल भारत की झोली में एक और ट्रॉफी डाली, बल्कि 2023 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में इसी मैदान पर मिली हार का जख्म भी भर दिया। पूरे देश में दिवाली जैसा माहौल है और सड़कों पर तिरंगा लहराते हुए फैंस अपनी टीम की इस अभूतपूर्व उपलब्धि का जश्न मना रहे हैं।

सरपंच की सील से वन भूमि का अवैध सौदा: कानून को ठेंगा दिखाकर रची गई वन भूमि खरीदी–बिक्री की साजिश…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/बिहारपुर : सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोल्हुआ में भ्रष्टाचार और कानून के उल्लंघन का एक बड़ा मामला सामने आया है। जहां सरपंच राम लाल पण्डो द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वन विभाग की तीन एकड़ जमीन की बिक्री डेढ़ लाख रुपयों में कर दी। सरपंच द्वारा जमीन खरीदी बिक्री के लिए एक पंचनामा भी बनाया गया हैं जिसमें सरपंच की सील और हस्ताक्षर का उपयोग इस अवैध प्रक्रिया को “सरकारी मान्यता” देने के लिए किया गया हैं।

वन भूमि बिक्री हेतु निर्मित पंचनामा
वन भूमि बिक्री और पैसे लेने का वीडियो

गलती नहीं अपराध

सरपंच द्वारा केवल अपने पद का दुरुपयोग नहीं किया गया हैं बल्कि उनका यह कृत्य कानूनन अपराध की श्रेणी में भी आता हैं। सरपंच द्वारा वन भूमि का अवैध हस्तांतरण किया गया हैं। पंचनामा में भी स्पष्ट लिखा गया है कि जमीन “वन भूमि” है। वन भूमि सरकार (वन विभाग) की संपत्ति होती है। कोई भी व्यक्ति इसे निजी तौर पर बेच या खरीद नहीं सकता। वन संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत वन भूमि का गैर-वानिकी कार्यों या निजी कब्जे के लिए हस्तांतरण दंडनीय अपराध है। वन भूमि पर कब्जा हस्तांतरित करना न केवल वन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि यह सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति की हेराफेरी का मामला है और इस कारनामे में शामिल सभी पक्षकारों और प्रमाणित करने वाले अधिकारियों पर जालसाजी और पद के दुरुपयोग की कार्यवाही की जा सकती हैं।

वन विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल

वन भूमि की खरीदी बिक्री का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है लेकिन वन विभाग मूकदर्शक बनकर मामले में छुपी साधे बैठा है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आपको बता दे कि चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में कई रसूखदार लोगों द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य और खेती-बाड़ी की जारी है और कई ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जहां इन जमीनों का खरीद फरोख्त भी किया जा रहा है लेकिन वन विभाग इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है जिससे वन विभाग द्वारा इन अवैध कृत्यों को मौन सहमति दिए जाने की सुगबुगाहट तेज हैं।

लग्जरी कार में नशीली दवाएं बेचता ‘सरकारी चपरासी’ गिरफ्तार, आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सरगुजा आबकारी उड़नदस्ता टीम ने नशे के सौदागरों के खिलाफ अभियान चलाते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने विश्रामपुर तहसील में पदस्थ एक सरकारी चपरासी को उसकी लग्जरी कार में नशीली टैबलेट की तस्करी करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं जब्त की गई हैं।
मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी
जानकारी के अनुसार, कल शाम (01 मार्च 2026) सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता को सूचना मिली कि तिलसिवा ग्राउंड के पास एक निसान मैग्नाइट कार (CG29 AG 1098) में नशीली दवाओं की सप्लाई होने वाली है। सूचना मिलते ही टीम ने तत्काल ग्राउंड के चारों ओर घेराबंदी की और संदिग्ध कार को रोक लिया।
कार के डैशबोर्ड से मिला नशे का जखीरा
कार की तलाशी लेने पर डैशबोर्ड में रखे एक काले बैग से निम्नलिखित प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुईं:
* ALPRAZOLAM TABLET: 560 नग
* SPASMO PROXYVON PLUS CAPSULE: 48 नग
आरोपी के पास से 608 नग नशीली दवाएं एवं लग्जरी कार जप्त की गई हैं।
तहसील का कर्मचारी निकला नशे का सौदागर
पकड़े गए व्यक्ति ने अपनी पहचान अभिषेक साहू (निवासी गोविंदपुर, सूरजपुर) के रूप में दी है। उसने खुलासा किया कि वह पूर्व में कलेक्ट्रेट सूरजपुर में चपरासी था और वर्तमान में तहसील कार्यालय विश्रामपुर में पदस्थ है।
आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 22(C) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आज (02 मार्च 2026) आरोपी को सूरजपुर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है।
कार्रवाई में शामिल टीम
इस सफल कार्रवाई का नेतृत्व सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता ने किया। टीम में मुख्य आरक्षक रमेश दुबे, अशोक सोनी, नगर सैनिक रणविजय सिंह, ओम प्रकाश गुप्ता और नीरज चौहान की विशेष भूमिका रही।

16 राजस्व निरीक्षकों के तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा कलेक्टर द्वारा प्रशासनिक दृष्टिकोण से एक स्थान पर लंबे समय से जमें कई राजस्व निरीक्षकों के तबादले किए हैं। जारी आदेश में 16 राजस्व निरीक्षकों के तबादले किए गए हैं।

देखें आदेश :

मनेंद्रगढ़ जिला कोतवाली में शांति समिति की बैठक सम्पन्न, शांतिपूर्ण होली मनाने की अपील..

हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर किशन शाह : होली पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने के उद्देश्य से जिला कोतवाली परिसर में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगर के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक की अध्यक्षता अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) द्वारा की गई। इस दौरान थाना प्रभारी ने उपस्थित लोगों से अपील की कि होली के अवसर पर किसी भी प्रकार की अफवाह, हुड़दंग या आपसी विवाद से दूर रहें और भाईचारे के साथ पर्व मनाएं।
एसडीएम ने कहा कि होली आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक एकता का प्रतीक है। सभी नागरिक प्रशासन का सहयोग करें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि नशे की हालत में वाहन न चलाएं और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचें।
थाना प्रभारी ने बताया कि पर्व के दौरान नगर के प्रमुख चौक-चौराहों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहेगा। साथ ही सोशल मीडिया पर भ्रामक या आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में नगर के पार्षदगण, जनप्रतिनिधि, व्यापारी संघ के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शांतिपूर्ण होली मनाने और प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
अंत में नगरवासियों से अपील की गई कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

खड़गवां में किसानों को होली से पहले 64.31 करोड़ की सौगात

हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर किशन शाह: होली पर्व से पहले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। एमसीबी जिले के 15,852 कृषकों को कृषक उन्नति योजना अंतर्गत 64 करोड़ 31 लाख 69 हजार 326 रुपये 60 पैसे की आदान सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है।
खड़गवां विकासखंड में आयोजित किसान सम्मेलन सह राशि वितरण समारोह में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसके अन्नदाता किसान हैं और उनकी समृद्धि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि होली से पहले खातों में राशि अंतरित कर सरकार ने अपना वादा निभाया है।
राज्य स्तर से 10,324 करोड़ की सहायता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड स्थित रहंगी खेल मैदान से राज्य के 25 लाख 28 हजार किसानों के खातों में 10,324 करोड़ रुपये की आदान सहायता राशि जारी की। इसी क्रम में मनेन्द्रगढ़, भरतपुर और खड़गवां विकासखंडों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए।
खड़गवां को 18.50 करोड़ से अधिक
खड़गवां विकासखंड के 2,987 किसानों को 11 करोड़ 84 लाख 31 हजार 941 रुपये 60 पैसे तथा कोड़ा क्षेत्र के 1,862 किसानों को 6 करोड़ 66 लाख 56 हजार 966 रुपये की राशि अंतरित की गई। कुल मिलाकर खड़गवां क्षेत्र को 18 करोड़ 50 लाख 88 हजार 907 रुपये 60 पैसे की सहायता प्रदान की गई।
जिले में लगभग 49 हजार किसान करीब 46 हजार हेक्टेयर में खेती करते हैं, जिनमें 33,840 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है। समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले पंजीकृत किसानों को 731 रुपये प्रति क्विंटल की अंतर राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में भेजी गई है।
सरकार की योजनाओं पर जोर
मंत्री जायसवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान की खरीदी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की है। पूर्व में 2,369 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा चुका था, जबकि शेष 731 रुपये की अंतर राशि अब जारी की गई है।
उन्होंने कहा कि डीबीटी प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास, वनाधिकार पट्टा वितरण और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
खड़गवां में विकास कार्य
मंत्री ने बताया कि खड़गवां में कृषि महाविद्यालय का निर्माण प्रारंभ हो चुका है। बरदर–गिद्धमुड़ी मार्ग विकास, उधनापुर नहर संचालन, रतनपुर एवं करवा अंजलि जलाशय से जल आपूर्ति जैसी योजनाओं पर कार्य जारी है। साथ ही खड़गवां में ही रजिस्ट्री सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य प्रिया मसराम, जनपद सदस्य श्याम बाई मरकाम सहित कई जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। समारोह स्थल पर उत्साह और उमंग का वातावरण देखने को मिला।

सरगवां में 20 करोड़ से बैराज और 10 करोड़ से बनेगी रिंग रोड..

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर: मंगलवार को विधानसभा में प्रस्तुत राज्य बजट में सरगुजा संभाग के लिए सौगातों की झड़ी लगा दी गई है। राज्य सरकार ने सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, कोरिया और जशपुर सहित पूरे संभाग के लिए करोड़ों रुपए का प्रावधान किया है।

सड़क, सिंचाई और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों के बजट में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी। यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए बजट में घोषणाएं की गई हैं। बलरामपुर-रामानुजगंज शहर के भीतर भारी वाहनों के दबाव को कम करने के लिए रिंग रोड निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। कोरिया से चिरमिरी मार्ग के उन्नयन के लिए 10 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान है, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।
भैयाथान के तेलगांव से बुंदिया चौक तक सड़क निर्माण के लिए 7 करोड़ रुपए से अधिक की राशि दी गई है। कृषि और भू-जल स्तर में सुधार के लिए दो प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। सरगवां बैराज (अंबिकापुर) निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया है। गज डैम (बैकुंठपुर) के उन्नयन के लिए 10 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं से हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। सरगुजा के लोगों को अब इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी होगी।

अंबिकापुर में 220 बिस्तर क्षमता वाले जिला चिकित्सालय के नए भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस अस्पताल के बनने से संभाग के मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा। क्षेत्रीय विकास को रफ्तार देने के लिए सरकार ने सरगुजा-जशपुर विकास प्राधिकरण की राशि 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ कर दी है। इसी तरह बस्तर विकास प्राधिकरण के लिए भी 75 करोड़ का प्रावधान है।

पीएम श्री शासकीय प्राथमिक विद्यालय चनवारीडांड का विभागीय निरीक्षण, अधिकारियों ने दिए आवश्यक निर्देश…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन शाह : जिले के पीएम श्री शासकीय प्राथमिक विद्यालय चनवारीडांड में आज विभागीय अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में माननीय एसडीएम लिंगराज सिदार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी विपिन पाण्डेय, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी वीरेन्द्र पाण्डेय तथा डीपीओ सुशील शर्मा शामिल रहे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पीएम श्री विद्यालय के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं एवं आवश्यक कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। शैक्षणिक गतिविधियों, छात्र उपस्थिति, शिक्षण गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं एवं अभिलेखों का बारीकी से अवलोकन किया गया।
अधिकारियों ने अकादमिक गतिविधियों की समीक्षा करते हुए शिक्षकों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करने, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर संकुल समन्वयक सुरेश मिश्रा एवं विद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विद्यालय की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया।

भ्रष्टाचार का ‘रेशमी’ खेल: भैयाथान के सिरसी में मनरेगा और रेशम विभाग की मिलीभगत से करोड़ों को चूना!

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/भैयाथान मुकेश गुप्ता : जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम सिरसी से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शासन की पारदर्शी व्यवस्था और डिजिटल हाजिरी (NMMS) की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। यहाँ रेशम विभाग के कार्यों में वृक्षारोपण के नाम पर स्वीकृत राशि को ‘पुताई’ के खेल में ठिकाने लगाया जा रहा है।
बेवक्त की पुताई और फर्जीवाड़े का ‘कलर’
हैरानी की बात यह है कि रेशम विभाग के अर्जुन वृक्षों में पुताई का कार्य अमूमन अगस्त से नवंबर के बीच किया जाता है, लेकिन वर्तमान में नियम-कायदों को ताक पर रखकर यह कार्य केवल बजट खपाने के उद्देश्य से कराया जा रहा है। वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण कार्य की आड़ में सिर्फ चूना-पुताई कर खानापूर्ति की जा रही है।
डिजिटल अटेंडेंस में ‘फोटोशॉप’ का खेल
भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गई जब मनरेगा के तहत हो रहे इस कार्य में मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज करने के लिए तकनीक का सहारा लिया गया।
एक ही फोटो, हर दिन हाजिरी: ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम को ठगने के लिए एक ही तस्वीर का इस्तेमाल रोजाना किया जा रहा है।
बढ़ता ग्राफ: कुछ दिनों पहले तक 3 मजदूरों की फर्जी हाजिरी लग रही थी, लेकिन अब हौसले इतने बुलंद हैं कि 7 मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर सरकारी खजाने पर डाका डाला जा रहा है।
बिना पद के ‘चौकीदार’ और फील्ड ऑफिसर पर आरोप
शिकायत के अनुसार, सिरसी में अर्जुन पेड़ों की रखवाली के लिए एक चौकीदार की नियुक्ति की गई है, जबकि विभाग में ऐसा कोई पद स्वीकृत ही नहीं है। बिना पद स्वीकृति के नियुक्ति और भुगतान अपने आप में एक बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रहा है। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का सीधा आरोप फील्ड ऑफिसर तिलक श्रीवास्तव पर है, जिनके संरक्षण में यह पूरा ‘फर्जीवाड़ा नेटवर्क’ फल-फूल रहा है।
जब सरकार मनरेगा में पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य कर चुकी है, तो एक ही फोटो से बार-बार अटेंडेंस कैसे स्वीकार हो रही है? क्या इसमें उच्च अधिकारियों की भी मौन सहमति है?
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस ‘सफेद हाथी’ बन चुके प्रोजेक्ट और फील्ड ऑफिसर की कारगुजारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

इस मामले में जब तिलक श्रीवास्तव से चौकीदार के फोन के माध्यम से बात की गई तब उनके द्वारा इस मामले को स्वीकार किया गया और बयान देने की बात भी कही गई लेकिन कई दिनों तक बयान के लिए घुमाने के बावजूद उनके द्वारा बयान नहीं दिया गया। बयान न मिलने के कारण अंतत उनके बयान के बिना ही इस न्यूज़ को प्रकाशित कर दिया गया है, लेकिन इस मामले में चौकीदार द्वारा अपना पक्ष रखा गया है और चौकीदार ने हो रहे सारे घोटाले की पोल खोल कर रख दी है। अगले अंक में हमारे द्वारा उनके द्वारा दिए गए बयान के साथ एक विस्तृत न्यूज़ चलाई जाएगी।

बड़ी खबर: छत्तीसगढ़ वन विभाग में पदोन्नति के बाद 45 अधिकारियों की नई नियुक्तियाँ…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने राज्य में प्रशासनिक फेरबदल की एक और सूची जारी की है। इस आदेश के तहत पदोन्नत हुए 15 वनक्षेत्रपालों को अस्थायी रूप से नवीन पदस्थापना दी गई है। विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक ESTB-102(2)/145/2025-FOREST के अनुसार, अधिकारियों को उनके नाम के सम्मुख दर्शाए गए नए स्थानों पर पदस्थ किया गया है।
प्रमुख नियुक्तियाँ और नवीन प्रभार:

छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल: 124 वनक्षेत्रपालों के नवीन पदस्थापना आदेश जारी…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग (मंत्रालय) ने राज्य प्रशासनिक सेवा में बड़ा बदलाव करते हुए 124 वनक्षेत्रपालों (Range Officers) का प्रशिक्षण उपरांत अस्थायी रूप से नवीन पदस्थापना आदेश जारी किया है। महानदी भवन से जारी इस आधिकारिक सूची में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रभार बदले गए हैं।

वन परिक्षेत्र अधिकारियों के तबादले देख सूची :

बिछिया टोला की केवई नदी में अवैध रेत उत्खनन: मशीनों से दिन-दहाड़े खनन, प्रशासन पर उठे सवाल…

हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर किशन शाह : केल्हारी से लगभग 3 किलोमीटर दूर बिछिया टोला अंतर्गत बहने वाली केवई (ओला) नदी में अवैध रेत उत्खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि नदी के बीचों-बीच पोकलेन और जेसीबी मशीनों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है, जिससे नदी की धारा और प्राकृतिक संरचना को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
अंतरराज्यीय सीमा पर खुला खेल
केवई नदी छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की अंतरराज्यीय सीमा बनाती है। नदी का एक किनारा छत्तीसगढ़ में तो दूसरा मध्य प्रदेश में स्थित है। रेत माफिया छत्तीसगढ़ सीमा से अवैध रूप से रेत निकालकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में ऊंचे दामों पर खपा रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन 20 से 25 ट्रैक्टर रेत की ढुलाई खुलेआम हो रही है।
एनजीटी नियमों की अनदेखी
नदी किनारे अस्थायी सड़क बनाकर मशीनों से खुदाई की जा रही है। आरोप है कि (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर नदी के भीतर भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।इस तरह का उत्खनन नदी के जलस्तर को तेजी से गिरा सकता है और पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ सकता है।
पर्यावरणीय खतरे की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक रेत निकासी से—
जलस्तर में गिरावट
नदी किनारों का कटाव
जलीय जीवों व जैव विविधता को नुकसान
भविष्य में जल संकट की संभावना
जैसे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
एमसीबी जिले के अंतर्गत तहसील केल्हारी में चल रहे इस अवैध कारोबार पर प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खनिज विभाग के संरक्षण से इतनी बड़ी मात्रा में उत्खनन हो रहा है। यह प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
देखने वाली बात यह है की शासन इस पर क्या ठोस कार्रवाई करती है या फिर रेत माफियाओं का हौसला ऐसे ही होता रहेगा बुलंद।

हफ्ते भर के भीतर दुबारा पटवारियों का जारी हुआ तबादला लिस्ट,कलेक्टर ने 58 पटवारियों का स्थानांतरण आदेश किया जारी…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : जिले के विभिन्न तहसीलों में लंबे समय से पदस्थ हल्का पटवारियों के कार्यों में प्रभावशीलता, प्रशासनिक दक्षता एवं लोकहित को दृष्टिगत रखते हुए 58 पटवारियों का स्थानांतरण आदेश कलेक्टर अजीत वसंत द्वारा जारी किया गया है।

देखें आदेश :

सरगुजा जिले में पटवारियों के थोक में तबादले, 83 पटवारियों का किया गया तबादला…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : लंबे समय से एक ही स्थान पर पड़ा स्थल का पटवारी को प्रशासनिक दक्षता एवं कार्यों के बेहतर संपादन एवं लोकहित की दृष्टिकोण से सरगुजा जिले के 83 पटवारियों के तबादले किए गए हैं।

देखें आदेश :

छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई, कस्टोडियल डेथ मामले में SDM करुण डहरिया निलंबित; हत्या का केस दर्ज…

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर-रामानुजगंज: छत्तीसगढ़ शासन ने बलरामपुर जिले के कुसमी में पदस्थ एसडीएम (डिप्टी कलेक्टर) करुण डहरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अवैध बॉक्साइट परिवहन की जांच के दौरान हुई एक व्यक्ति की मौत और एसडीएम की गिरफ्तारी के बाद की गई है।


क्या है पूरा मामला?
सरकारी आदेश के मुताबिक, 16 फरवरी 2026 को एसडीएम करुण डहरिया के नेतृत्व में एक टीम ग्राम हंसपुर (थाना कोरंधा) में अवैध बॉक्साइट परिवहन की सूचना पर जांच करने गई थी। आरोप है कि इस दौरान टीम द्वारा तीन ग्रामीणों—राम उर्फ रामनरेश (62 वर्ष), अजीत राम (60 वर्ष) और आकाश अगरिया (20 वर्ष)—के साथ मारपीट की गई।
इस मारपीट के गंभीर परिणाम स्वरूप 62 वर्षीय राम उर्फ रामनरेश की मृत्यु हो गई। घटना के बाद जिला कलेक्टर की रिपोर्ट और पुलिस जांच में एसडीएम की संलिप्तता पाए जाने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
कोरंधा थाने में इस मामले को लेकर अपराध क्रमांक 03/2026 दर्ज किया गया है। एसडीएम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत मामला दर्ज है:
* धारा 103 (1): हत्या (Murder)
* धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुँचाना
* धारा 3(5): सामान्य आशय (Common Intention)
एसडीएम करुण डहरिया को 16 फरवरी 2026 को ही गिरफ्तार कर लिया गया था और वर्तमान में वे न्यायिक रिमांड पर जिला जेल रामानुजगंज में निरुद्ध हैं।
शासन का निलंबन आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेश के अनुसार:
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9(2)(क) के तहत श्री करुण डहरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, सरगुजा संभाग (अंबिकापुर) निर्धारित किया गया है।उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

यह आदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से उप सचिव क्लेमेन्टीना लकड़ा द्वारा जारी किया गया है।

बंद कमरे में कोयला जलाकर सोना पड़ा भारी, दम घुटने से पति-पत्नी और मासूम बच्ची की मौत…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर :  जिले के ग्राम चंदरपुर (तलवापारा) में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ कोयले के धुएं से दम घुटने के कारण एक ही परिवार के तीन सदस्यों की अकाल मृत्यु हो गई। मृतकों में पति, पत्नी और उनकी 4 वर्षीय मासूम बेटी शामिल है। इस घटना के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम चंदरपुर निवासी कवल साय (30 वर्ष), उनकी पत्नी कुन्ती बाई (25 वर्ष) और उनकी 4 साल की बेटी बीती रात ठंड से बचने के लिए कमरे में कोयला (अंगीठी) जलाकर सोए थे।
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने इस मकान में रोशनदान (Ventilation) की कमी थी। कमरा पूरी तरह बंद होने के कारण कोयले से निकलने वाली जहरीली गैस (कार्बन मोनोऑक्साइड) कमरे में भर गई, जिससे सोते समय ही तीनों का दम घुट गया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
ग्रामीणों में शोक की लहर
सुबह जब घर के अन्य सदस्यों ने काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर अंदर देखा, तो उनके होश उड़ गए। तीनों के शव बिस्तर पर ही मिले। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में इस दुखद घटना के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है।
पुलिस जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक तौर पर मौत का कारण दम घुटना ही लग रहा है, लेकिन मामले की हर पहलू से गहन जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बंद कमरे में कोयला या लकड़ी जलाकर सोना जानलेवा हो सकता है। जलते हुए कोयले से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस निकलती है, जिसका कोई रंग या गंध नहीं होती, और यह चुपचाप इंसान को मौत की नींद सुला देती है।

सूरजपुर महाघोटाला: क्या ‘सद्भावना’ के नाम पर जमीनों की बंदरबांट को रफा-दफा कर रही हैं SDM शिवानी जायसवाल?

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : जिला सूरजपुर में भू-राजस्व नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। लटोरी तहसील में शासकीय पट्टे की जमीनों को बिना कलेक्टर की अनुमति के खुर्द-बुर्द करने के मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शिवानी जायसवाल की भूमिका संदिग्ध घेरे में है। ताजा दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि एसडीएम महोदया ने गंभीर वित्तीय और कानूनी अनियमितताओं के बावजूद आरोपी तहसीलदार को क्लीन चिट देने की पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर ली है।
‘कारनामा’ उजागर हुआ तो बचाव में उतरा प्रशासन
बता दें कि समाचार पत्र हिंद स्वराष्ट्र और सिंधु स्वाभिमान में “लटोरी तहसीलदार कारनामा” शीर्षक से प्रकाशित खबरों के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था। मामले की जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि ग्राम लटोरी के खसरा नंबर 213/2, 421/2 और 114/1 की भूमि, जो कि मूल रूप से शासकीय पट्टे की जमीन थी, उसे बिना कलेक्टर की अनिवार्य अनुमति के बेचा गया। यह सीधे तौर पर भू-राजस्व संहिता की धारा 165 7 (ख) का खुला उल्लंघन है।
SDM की अजीबोगरीब दलील: “गलती तो हुई, पर नीयत साफ थी”
सबसे चौंकाने वाला पहलू एसडीएम सूरजपुर द्वारा कलेक्टर को भेजी गई रिपोर्ट है। एक तरफ एसडीएम स्वीकार करती हैं कि तहसीलदार ने पट्टे की जमीन पर चौहद्दी (Boundary) जारी की और बिना अनुमति रजिस्ट्री होने दी, लेकिन दूसरी तरफ वे इसे “सद्भाविक त्रुटि” (Good faith error) बताकर ढाल बन रही हैं।
तर्क 1: एसडीएम का कहना है कि तहसीलदार ने जानकारी होने के बाद नामांतरण (Mutation) नहीं किया, इसलिए यह केवल एक छोटी सी गलती है।
  तर्क 2: खसरा नंबर 213/2 के मामले में एसडीएम ने सारा ठीकरा राजस्व निरीक्षक (RI) पर फोड़ दिया कि उसने रिपोर्ट में पट्टे की जमीन का जिक्र नहीं किया था, इसलिए तहसीलदार ने नामांतरण कर दिया।
सवाल यह उठता है कि क्या एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी इतना अनजान हो सकता है कि उसे पट्टे की जमीन और सामान्य जमीन का फर्क समझ न आए? या फिर यह ‘सद्भावना’ किसी बड़े लेनदेन का हिस्सा है?
पत्रकार पर ही मढ़ दिया दोष
जब तहसीलदार से इस भ्रष्टाचार पर जवाब मांगा गया, तो उन्होंने अपनी गलती मानने के बजाय शिकायतकर्ता पत्रकार पर ही निशाना साधा। तहसीलदार ने अपने लिखित जवाब में आरोप लगाया कि “पत्रकार का उद्देश्य कुछ और है और उद्देश्य पूरा नहीं होने पर मुझे बदनाम किया जा रहा है।” अब इस मामले में तहसीलदार ही बता पाएंगे कि पत्रकार का उद्देश्य क्या था??हैरानी की बात यह है कि एसडीएम ने तहसीलदार के इस बचकाने और गैर-जिम्मेदाराना तर्क को भी अपनी जांच का आधार बनाया है, जो उनके पक्षपाती रवैये को दर्शाता है।
मुख्य सवाल जो एसडीएम की कार्यप्रणाली पर पर्दा उठाते हैं:
1. जब नियम स्पष्ट है कि पट्टे की जमीन बिना कलेक्टर की अनुमति के नहीं बिक सकती, तो तहसीलदार ने चौहद्दी क्यों जारी की?
2. क्या धारा 165 का उल्लंघन करने पर केवल ‘नोटिस-नोटिस’ का खेल खेलना ही एसडीएम की जिम्मेदारी है?
3.  पट्टे की जमीन की रजिस्ट्री हो जाना ही अपने आप में एक अपराध है, फिर तहसीलदार को “जानबूझकर त्रुटि नहीं करना” कहकर बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है?
 
क्या प्रशासन की नजर में “भूलवश” किया गया अपराध, अपराध नहीं होता? सूरजपुर जिले के लटोरी तहसील में हुए ताजा जमीन घोटाले और उस पर एसडीएम शिवानी जायसवाल द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट इसी ओर इशारा कर रही है। पट्टे की शासकीय जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री के मामले में एसडीएम ने जिस तरह तहसीलदार को बचाने के लिए ‘शब्दों की बाजीगरी’ की है, उससे साफ है कि यह मामला केवल एक ‘त्रुटि’ नहीं, बल्कि गहरी मिलीभगत है।
कानून की धज्जियां: धारा 165 (7-ख) का खुला उल्लंघन
दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम लटोरी के खसरा नंबर 213/2, 421/2 और 114/1 की भूमि मूलतः शासकीय पट्टे की है। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 165 (7-ख) स्पष्ट रूप से कहती है कि शासन द्वारा आवंटित पट्टे की भूमि को बिना जिला कलेक्टर की पूर्व अनुमति के हस्तांतरित (बेचा) नहीं जा सकता।
बावजूद इसके:
  तहसीलदार लटोरी ने इन पट्टे की जमीनों पर बिक्री हेतु चौहद्दी (Boundary) जारी कर दी।
खसरा नंबर 213/2 का तो बाकायदा नामांतरण (Mutation) भी कर दिया गया।
एसडीएम ने स्वयं स्वीकार किया है कि यह धारा 165 (7-ख) का सीधा उल्लंघन है।
SDM की रिपोर्ट: न्याय का गला घोंटने की कोशिश?
हैरानी की बात यह है कि जब कार्रवाई की बारी आई, तो एसडीएम शिवानी जायसवाल ने कलेक्टर को भेजी अपनी रिपोर्ट में तहसीलदार को यह कहते हुए बचा लिया कि:
“तहसीलदार द्वारा जानबूझकर त्रुटि कारित करना प्रतीत नहीं होता है… यह त्रुटि सद्भाविक प्रतीत होती है।”

सवाल यह है:
* सद्भावना या मिलीभगत?: एक राजस्व अधिकारी (तहसीलदार), जिसके पास जमीन के सारे रिकॉर्ड (मिसल बंदोबस्त, अधिकार अभिलेख) होते हैं, वह कैसे “अनजाने” में पट्टे की जमीन की चौहद्दी जारी कर सकता है?
* नामांतरण का खेल: खसरा नंबर 213/2 के मामले में तहसीलदार ने पट्टे की जमीन का नामांतरण आदेश 23.04.2024 को पारित कर दिया। क्या एक तहसीलदार को इतना भी ज्ञान नहीं कि पट्टे की जमीन पर कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य है?
 
क्या है असली सच?
एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि तहसीलदार ने “त्रुटि” की है, लेकिन उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने के बजाय मामले को केवल सिविल कोर्ट या कलेक्टर न्यायालय की ओर भेजने की खानापूर्ति की है। यह सीधे तौर पर आरोपी अधिकारी को ‘सेफ पैसेज’ देने की कोशिश है ताकि भविष्य में यह कहकर बचा जा सके कि “जांच में कुछ गलत इरादा नहीं पाया गया”।


जनता का सवाल: क्या आम आदमी भी “सद्भावना” के नाम पर पट्टे की जमीन बेच सकता है? अगर नहीं, तो लटोरी तहसीलदार पर मेहरबानी क्यों?

यह पूरा घटनाक्रम इशारा करता है कि सूरजपुर प्रशासन के भीतर एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जो सरकारी जमीनों को निजी हाथों में सौंपने के लिए कागजी हेराफेरी को ‘सद्भावना’ का नाम दे रहा है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर सूरजपुर इस ‘मैनेज्ड’ जांच रिपोर्ट पर क्या एक्शन लेते हैं या फिर भ्रष्टाचार की यह फाइल भी धूल फांकने के लिए छोड़ दी जाएगी।

विष्णु देव साय ने एमसीबी को दी 127 करोड़ की ऐतिहासिक सौगात…

हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर किशन शाह : चिरमिरी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती पर आज विकास, आस्था और जनविश्वास का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एमसीबी जिले को 127 करोड़ रुपये से अधिक की विकास सौगात प्रदान करते हुए 141 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री राम विचार नेतामऔर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल उपस्थित रहे।
मालवीय नगर, पोड़ी स्थित मंगल भवन में आयोजित समारोह में पारंपरिक स्वागत, दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री ने 3,879.85 लाख रुपये की लागत से पूर्ण 82 कार्यों का लोकार्पण तथा 8,824.78 लाख रुपये की लागत से बनने वाले 59 कार्यों का भूमिपूजन किया।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में बड़ी पहल
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि जिले में मेडिकल कॉलेज, एग्रीकल्चर कॉलेज, हॉर्टिकल्चर कॉलेज, पॉलिटेक्निक और फिजियोथैरेपी कॉलेज की स्थापना से युवाओं को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।
मनेंद्रगढ़ में 220 बिस्तरों वाले अस्पताल की स्वीकृति और चिरमिरी में नर्सिंग कॉलेज स्थापना से स्वास्थ्य सुविधाएं सशक्त होंगी।
659 करोड़ रुपये की नागपुर–चिरमिरी रेलवे लाइन परियोजना तथा 43 करोड़ रुपये की साजा पहाड़ सड़क परियोजना से आवागमन सुगम होगा।
जनजातीय और ग्रामीण विकास पर विशेष फोकस
प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि पीएम जनमन योजना के तहत भरतपुर–सोनहत क्षेत्र के बैगा परिवारों को आवास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। बिरसा मुंडा धरती आबा योजना के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं।
किसानों के लिए 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी और महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता जारी है।
‘मोदी की गारंटी’ पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि ‘मोदी की गारंटी’ का अर्थ हर वादा पूरा करना है। 18 लाख प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति, 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी, महिलाओं को आर्थिक सहायता और भूमिहीन मजदूरों को वार्षिक 10 हजार रुपये की सहायता सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है।
उन्होंने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का संकल्प दोहराया और पारदर्शी ई-गवर्नेंस प्रणाली की जानकारी दी।
Shri Jagannath Temple, Chirmiri में मुख्यमंत्री का दर्शन
कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री ने श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। शंखनाद, घंटों की ध्वनि और “जय जगन्नाथ” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
मुख्यमंत्री ने यज्ञशाला में हवन-पूजन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की तथा मंदिर परिसर के विकास हेतु हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। आनंद बाजार में आमजन के साथ प्रसाद ग्रहण कर उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
ऐतिहासिक दिन बना एमसीबी के लिए
127 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम इस आयोजन को ऐतिहासिक बना गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय उत्थान के क्षेत्र में घोषित योजनाएं एमसीबी जिले को विकास की नई दिशा देंगी।
यह दिन न केवल विकास की दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता के दृष्टिकोण से भी जिले के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया।

कुसमी एसडीएम समेत 4 पर हत्या का मुकदमा दर्ज, प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप…

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर-रामानुजगंज : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ कुसमी में पदस्थ एसडीएम (SDM) करुण डहरिया समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। 60 वर्षीय ग्रामीण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद पुलिस ने यह कड़ी कार्रवाई की है। किसी राजपत्रित अधिकारी पर सीधे हत्या का मामला दर्ज होने से पूरे प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है।

क्या हैं मामला

बलरामपुर जिले के हंसपुर में अवैध बॉक्साइट खनन की सूचना मिलने के बाद मौके पर कुसमी एसडीएम पहुंचे थे, इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों के साथ विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने के बाद अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ रॉड और डंडों से मारपीट की। इस मारपीट में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, वहीं अस्पताल में इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

SDM समेत 4 के विरुद्ध अपराध दर्ज

बलरामपुर जिले के करोंधा थाना क्षेत्र के हंसपुर में ग्रामीण की हत्या के मामले में कुसमी एसडीएम करुण डहरिया समेत तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने ग्रामीण की हत्या और मारपीट के मामले में एसडीएम करुण डहरिया और उसके सहयोगी विक्की सिंह, मंजीत यादव और सुदीप यादव के खिलाफ नामजद हत्या का अपराध दर्ज किया है।

ग्रामीण की मौत से तनाव
दरअसल, इस मामले को लेकर कुसमी में आज जमकर बवाल मचा। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने जमकर प्रदर्शन और चक्का जाम कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि दोपहर 3:30 बजे के बाद शॉर्ट पीएम रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस की टीम ने एफआईआर दर्ज कर ली हैं और आरोपियों को जेल भेजने की तैयारी में लग गई हैं।

विवादों से घिरा। रहा है इनका करियर

करुण डहरिया का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है। इससे पहले भी कुसमी में SDM के पद पर रहते हुए उन पर छह लाख रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। वहीं 2022 में गरियाबंद जिले में जनपद सीईओ के पद पर रहते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा उन्हें ₹20000 रिश्वत लेते हुए भी गिरफ्तार किया था। 2019 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी करुण डहरिया हमेशा ही विवादों से घिरे रहे हैं, विवाद के बाद अब हत्या मामले में FIR ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

अवैध खनन की जांच के दौरान भारी बवाल; SDM पर बर्बरतापूर्वक पिटाई कर आदिवासी बुजुर्ग की हत्या का आरोप…

बलरामपुर/कुसमी: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। कुसमी ब्लॉक के हंसपुर में अवैध बॉक्साइट खनन की जांच करने गए एसडीएम (SDM) करूँण डहरिया और उनके साथ आए निजी लोगों पर ग्रामीणों के साथ बेरहमी से मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। इस हमले में एक 60 वर्षीय आदिवासी ग्रामीण की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
सिंचाई कर लौट रहे थे ग्रामीण’
जानकारी के मुताबिक, रविवार की रात करीब 8 बजे जब ग्रामीण अपने खेतों में गेहूं की सिंचाई कर लौट रहे थे, तभी सरना के पास थार कार सवार एसडीएम और उनके अन्य साथी 6-7 लोगों ने उन्हें रोका।
घायल पीड़ितों—अजीत उरांव (60 वर्ष) और आकाश अगरिया (20 वर्ष)—ने बताया कि उनसे पूछताछ की गई और फिर बिना किसी ठोस कारण के उन पर रॉड, डंडों और लातों से हमला कर दिया गया। मारपीट इतनी भीषण थी कि राम नरेश राम (60 वर्ष) मौके पर ही बेहोश हो गए। तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमी ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान राम नरेश राम ने दम तोड़ दिया।
उठते गंभीर सवाल: प्रशासन या ‘गुंडागर्दी’?
इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
निजी वाहन का इस्तेमाल: जांच के लिए एसडीएम सरकारी गाड़ी के बजाय एक निजी ‘थार’ गाड़ी में क्यों गए थे?
प्राइवेट लोग साथ क्यों?: राजस्व विभाग के आधिकारिक कर्मचारियों के स्थान पर एसडीएम के साथ ‘निजी गुर्गे’ क्या कर रहे थे?
साक्ष्य मिटाने की कोशिश?: सूत्रों का दावा है कि घटना के बाद मामले को दबाने के लिए नायब तहसीलदार को फोन कर बुलाया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि पूरी टीम राजस्व अमले के साथ थी।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल क्षेत्र में तनाव का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी पर लगे हत्या और मारपीट के इन आरोपों ने सरकार और सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

“हम तो बस पानी चलाकर लौट रहे थे, हमें क्या पता था कि सरकारी अधिकारी ही हमारी जान के दुश्मन बन जाएंगे।” अजीत उरांव (घायल ग्रामीण)

अमृत धारा महोत्सव में हंगामा: नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा यादव और विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव कार्यक्रम छोड़कर लौटे..

हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर किशन शाह : अमृत धारा महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित   महोत्सव में उस समय विवाद की स्थिति बन गई जब नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा यादव और विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव कार्यक्रम स्थल से नाराज होकर लौट गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमृत धारा में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के अवसर पर जिला स्तरीय महोत्सव आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा यादव और विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव भी शामिल थे।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश के दौरान उनकी गाड़ी को पुलिस द्वारा रोक दिया गया। इसी बात को लेकर नाराजगी सामने आई और प्रोटोकॉल व्यवस्था को लेकर भी असंतोष जताया गया। इसी दौरान कथित तौर पर वाहन की नेम प्लेट हटाकर फेंकने की बात भी सामने आई और यह कहा गया कि “हमने अपने दम पर नाम कमाया है।”
घटना के बाद दोनों जनप्रतिनिधि कार्यक्रम छोड़कर वापस लौट गए। 
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। अमृत धारा महोत्सव क्षेत्र में हर वर्ष महाशिवरात्रि पर विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन होते हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर क्या स्पष्टीकरण देता है और भविष्य में प्रोटोकॉल व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

बड़ी खबर: सलाखों के पीछे पहुंचे हरिपुर सरपंच, क्या अब छिन जाएगी ‘सरपंची’ की कुर्सी?

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/लटोरी : गांव की सरकार चलाने वाले मुखिया जी अब खुद ‘हवालात’ की सरकार देख रहे हैं। हरिपुर ग्राम पंचायत के सरपंच, जिन पर गांव के ही एक रिटायर्ड शिक्षक और उनके पुत्रों पर जानलेवा हमला करने का संगीन आरोप है, फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में हैं। हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं के तहत हुई इस गिरफ्तारी ने पूरे जिले के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, पुरानी रंजिश के चलते सरपंच और उनके साथियों ने बीते 24 जनवरी की सुबह रिटायर्ड शिक्षक के परिवार पर जानलेवा हमला किया था। इस हमले में पीड़ित पक्ष को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सरपंच को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

सवाल: जेल से चलेगी सरकार या कुर्सी होगी खाली?
जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरपंच जेल से ही पंचायत की जिम्मेदारी निभाएंगे? कानून के विशेषज्ञों और पंचायती राज अधिनियम के मुताबिक स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • निलंबन (Suspension) की तलवार: नियमानुसार, यदि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को गंभीर आपराधिक मामले में 48 घंटे से अधिक की न्यायिक हिरासत (Jail) में भेजा जाता है, तो जिला कलेक्टर या संबंधित विभाग उन्हें पद से निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
  • प्रभार का हस्तांतरण: सरपंच के जेल जाने की स्थिति में ग्राम पंचायत का कामकाज ठप नहीं होता। ऐसी सूरत में ‘उप-सरपंच’ को कार्यवाहक सरपंच का प्रभार सौंपा जा सकता है, ताकि विकास कार्य बाधित न हों।
  • पद से बर्खास्तगी: यदि कोर्ट में आरोप सिद्ध हो जाते हैं और सरपंच को दोषी करार दिया जाता है, तो उनकी सदस्यता स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी और उस वार्ड/पंचायत में उपचुनाव की स्थिति बनेगी।
    प्रशासनिक रुख
    फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी मामले की फाइल और कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामले में सरपंच का पद पर बने रहना मुश्किल नजर आ रहा है।

“कानून सबके लिए बराबर है। यदि कोई जनप्रतिनिधि हिंसा में शामिल पाया जाता है, तो पंचायती राज नियमों के तहत उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।” — विभागीय सूत्र

अब देखना यह होगा कि हरिपुर की जनता को नया मुखिया कब मिलता है या फिर कानूनी दांव-पेच सरपंच की कुर्सी बचा पाते हैं।

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