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समुद्र में चीन की ‘युद्ध’ की तैयारी? मछली पकड़ने वाली नावों के असामान्य पैटर्न से दुनिया हैरान…

नई दिल्ली। पूर्वी चीन सागर से आई सैटेलाइट तस्वीरों और समुद्री डेटा ने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के बीच हलचल पैदा कर दी है। हाल ही में हुए एक जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि हजारों मछली पकड़ने वाली नावें चीनी समुद्र में बेहद सटीक और जटिल ज्यामितीय आकार बना रही हैं, जो आम तौर पर मछली पकड़ने की गतिविधियों से बिलकुल अलग लगता है।
दिसंबर के अंत से जनवरी की शुरुआत के बीच, चीनी बेड़े ने तीन अलग-अलग मौकों पर अपनी संगठित शक्ति का प्रदर्शन किया है। समुद्री डेटा फर्म ‘ingeniSPACE’ के मुख्य परिचालन अधिकारी जेसन वांग ने AFP को बताया कि ये पैटर्न बेहद असामान्य लग रहे थे।

चीन ने कब-कब किया शक्ति का प्रदर्शन
25 दिसंबर को लगभग 2,000 चीनी जहाजों ने ताइवान के उत्तर-पूर्व में ‘L’ आकार की दो विशाल समानांतर कतारें बनाई। ये कतारें करीब 300 किलोमीटर तक फैली थी।

इसके बाद जनवरी की शुरुआत लगभग 1,000 चीनी जहाजों ने लगभग 400 किलोमीटर कर फैली एक विशाल आयताकार (Rectangle) आकृति बनाई। विशेष बात यह थी कि इसमें वही जहाज शामिल थे जो दिसंबर की घटना में देखे गए थे।

वहीं कुछ सप्ताह बाद 1,200 चीनी जहाजों ने फिर से समानांतर रेखाएं बनाई और करीब 30 घंटों तक अपनी स्थिति पर डटे रहे।

विशेषज्ञों ने कहा ‘मछली पकड़ना’ उद्देश्य नहीं
समुद्री सुरक्षा विश्लेषकों का तर्क है कि ये गतिविधियां किसी भी तरह से व्यावसायिक नहीं लग रही थी। खराब मौसम और तेज हवाओं के बीच हजारों जहाजों का एक-दूसरे से मात्र 500 मीटर की दूरी पर सटीक रेखा में रहना बिना किसी केंद्रीय कमान के संभव नहीं है। आमतौर पर मछुआरे अधिक शिकार करने के लिए फैल जाते हैं, न कि एक-दूसरे के करीब आकर कतारें बनाते हैं।

तैयारी का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन द्वारा अपने नागरिक बेड़े को रणनीतिक उद्देश्यों, जैसे कि नाकाबंदी या संकट के समय सैन्य सहयोग के लिए उपयोग करने का एक परीक्षण हो सकता है। पूर्व नौसैनिक अधिकारियों का कहना है कि पहले खराब मौसम में ये नावें बंदरगाह लौट जाती थीं, लेकिन अब इनका समुद्र में डटे रहना एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।

बड़ी खबर: अंबिकापुर ‘दवा घोटाले’ में प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी, जांच रिपोर्ट के बावजूद SDM शिवानी जायसवाल के पति डॉ आयुष जायसवाल पर मेहरबानी क्यों?

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : सरगुजा जिले के नवापारा शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुए करोड़ों के दवा घोटाले में एक नया मोड़ आ गया है। जांच समिति द्वारा भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत पेश किए जाने के महीनों बाद भी अब तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं होना, जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
दस्तावेज ‘खाक’, जांच ‘साफ’, फिर भी कार्रवाई ‘हाफ’
हैरानी की बात यह है कि जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड ‘आग’ के हवाले कर दिए गए। इसके बावजूद, वर्तमान में उपलब्ध 2024-25 के दस्तावेजों में ही करोड़ों की धांधली पकड़ी गई है। लेकिन विडंबना देखिए कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने और भ्रष्टाचार सिद्ध होने के बाद भी आज तक न तो किसी पर FIR हुई है और न ही किसी को निलंबित किया गया है।
रसूख के आगे नतमस्तक सिस्टम?
स्थानीय गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी डॉ. आयुष जायसवाल को उनके रसूख का लाभ मिल रहा है। डॉ. आयुष वर्तमान में सूरजपुर में पदस्थ SDM शिवानी जायसवाल के पति हैं। क्या यही कारण है कि सरकारी खजाने में करोड़ों की सेंध लगाने वालों के खिलाफ फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं?


जांच रिपोर्ट के वो अहम खुलासे जिन पर नहीं हुआ एक्शन:मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को सौंपी गई जांच समिति की रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को सौंपी गई जांच समिति की रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

दस्तावेज जलाने की साजिश: जब जांच समिति ने साल 2019 से 2024 के बीच की खरीदी के रिकॉर्ड मांगे, तो केंद्र द्वारा यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि ‘कार्यालय में आग लगने के कारण पुराने दस्तावेज जल गए हैं’। इसे सबूतों को मिटाने की एक बड़ी साजिश के रूप में देखा जा रहा है।

नियमों की धज्जियां (सिंगल टेंडर घोटाला): नियमों के मुताबिक दवा खरीदी के लिए प्रतिस्पर्धात्मक कोटेशन मंगाने थे, लेकिन जांच में पाया गया कि साठगांठ कर केवल एक ही फर्म (सिंगल टेंडर) को 50-50 हजार रुपये के कई ऑर्डर एक ही दिन में थमा दिए गए।

बिना रेट के ‘अंधी’ खरीदी: वित्तीय वर्ष 2024-25 की फाइलों में दवाओं और उपकरणों की दर (Rate) का उल्लेख ही नहीं है। बिना दाम तय किए ही लाखों रुपये के ऑर्डर जारी कर दिए गए।

कीमोथेरेपी दवाओं में फर्जीवाड़ा: डॉ. आयुष जायसवाल और अन्य संबंधितों पर आरोप है कि उन्होंने कीमोथेरेपी की दवाओं के लिए CGMSCL से अनिवार्य NOC तक नहीं ली। खुद ही डिमांड लेटर लिखा और खुद ही अपने नाम पर दवाएं इश्यू करवाकर खर्च दिखा दिया।

गायब स्टॉक: रजिस्टर में दवाओं की एंट्री और वार्डों में दवाओं की असल सप्लाई के बीच कोई मेल नहीं मिल रहा है।

रसूख के रक्षण में दबा भ्रष्टाचार?
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से डॉ. आयुष जायसवाल (तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा अधिकारी) और डॉ. हिमांशु गुप्ता के कार्यकाल के दौरान हुई धांधली का जिक्र है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि SDM पति होने के नाते डॉ. आयुष को बचाने की कोशिशें की जा सकती हैं।
अधिकारियों पर लटकी तलवार
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि लिपिकीय वर्ग से स्टोरकीपर का काम लेना और नियमों के विरुद्ध जाकर चहेती फर्मों को उपकृत करना सीधे तौर पर गबन की श्रेणी में आता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने ही ‘पावरफुल’ अधिकारी के परिवार पर कार्रवाई करता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

आरटीआई कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर आरोपी कोई आम कर्मचारी होता, तो अब तक जेल की सलाखों के पीछे होता। लेकिन यहाँ ‘साहब’ के पति पर मेहरबानी समझ से परे है। क्या CMHO और जिला प्रशासन राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में इस बड़े घोटाले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं?

“रिश्तेदारी के आगे झुका कानून? सूरजपुर जमीन घोटाले में नया मोड़! चाचा को बचाने SDM भतीजी ने की ‘सेटिंग’?

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : लटोरी तहसील में हुए बहुचर्चित जमीन घोटाले में अब एक ऐसा पारिवारिक मोड़ आ गया है, जिसने एसडीएम शिवानी जायसवाल की पूरी जांच रिपोर्ट को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। ‘हिंद स्वराष्ट्र’ समाचार पत्र में प्रकाशित कड़ियों (पार्ट 1, 2, 3) के बाद जिस जांच का जिम्मा एसडीएम को सौंपा गया था, उसमें उन्होंने ‘चुन-चुन कर’ केवल उन्हीं मामलों को संज्ञान में लिया जो अभी लंबित थे। लेकिन असली खेल उन तीन मामलों में हुआ जिन्हें एसडीएम ने अपनी जांच की परिधि से बाहर रखा।
जांच में ‘पिक एंड चूज’ का खेल: तीन मामले गायब क्यों?
दस्तावेजों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ‘हिंद स्वराष्ट्र’ ने लटोरी तहसीलदार के कई कारनामों का खुलासा किया था। लेकिन एसडीएम शिवानी जायसवाल ने केवल उन 3 खबरों पर नोटिस जारी किया जिनमें नामांतरण (Mutation) की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी या विवादित थी। 
सबसे बड़ा सवाल: उन बाकी 3 गंभीर मामलों को जांच में क्यों नहीं जोड़ा गया जिनमें नामांतरण की प्रक्रिया गुपचुप तरीके से पूर्ण कर ली गई थी? क्या उन फाइलों में दबे सफेदपोश चेहरों को बचाना एसडीएम की प्राथमिकता थी?
भतीजी बनी जज, तो ‘चाचा’ को मिली क्लीन चिट!
इस पूरे मामले की तह तक जाने पर जो सच सामने आया है, वह जिला प्रशासन की जड़ें हिला देने वाला है। चर्चा है कि जिन जमीनों की खरीद-बिक्री में नियमों को ताक पर रखा गया, उनमें से एक प्रमुख क्रेता (खरीददार) स्वयं एसडीएम शिवानी जायसवाल के चाचा बताए जा रहे हैं।
राजस्व विभाग के गलियारों में अब यह सवाल गूंज रहा है: “जब भतीजी ही जांच अधिकारी हो, तो चाचा पर कार्यवाही की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”
हितों का टकराव (Conflict of Interest) और कानून की अवहेलना
कानूनी तौर पर यदि किसी जांच में अधिकारी का सगा संबंधी शामिल हो, तो उस अधिकारी को स्वयं को जांच से अलग कर लेना चाहिए। लेकिन यहाँ एसडीएम ने न केवल जांच की, बल्कि तहसीलदार को “सद्भाविक त्रुटि” का प्रमाण पत्र देकर मामले को रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की। 
तहसीलदार का बचाव: एसडीएम ने रिपोर्ट में लिखा कि तहसीलदार ने जानबूझकर गलती नहीं की। 

सीमित जांच:

केवल खसरा नंबर 213/2, 421/2 और 114/1 तक ही जांच को सीमित रखा गया ताकि बाकी बड़े चेहरों तक आंच न पहुंचे। 
पत्रकार को बनाया निशाना, चाचा को बनाया सुरक्षित
हैरानी की बात है कि जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार पर बात करने के बजाय, तहसीलदार के उस बयान को तवज्जो दी गई जिसमें उन्होंने पत्रकार की नियत पर सवाल उठाए थे। यह स्पष्ट करता है कि प्रशासन का उद्देश्य सच का पता लगाना नहीं, बल्कि सच दिखाने वालों का मुंह बंद करना और अपने परिजनों को लाभ पहुंचाना था। 
अब गेंद कलेक्टर सूरजपुर के पाले में है: क्या एक ऐसी एसडीएम की जांच रिपोर्ट को स्वीकार किया जाएगा जिसका सीधा संबंध आरोपियों या लाभार्थियों से है? क्या इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होगी?

बढ़ती मधुमेह की बीमारी—जागरूकता, सावधानी और स्वस्थ जीवनशैली ही बचाव का रास्ता…

हिंद स्वराष्ट्र : आज के आधुनिक जीवन में बदलती खान-पान की आदतों और भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण मधुमेह (डायबिटीज) तेजी से फैलने वाली बीमारियों में शामिल हो गई है। पहले यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के युवाओं और बच्चों में भी इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते इस बीमारी के प्रति जागरूकता न बढ़ाई गई तो यह आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। इसके पीछे असंतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, तनाव और आनुवंशिक कारण प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इस बीमारी के लक्षणों में बार-बार प्यास लगना, जल्दी थकान होना, बार-बार पेशाब आना, घाव का देर से भरना और अचानक वजन कम होना शामिल हैं।

बचाव के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है। इसके लिए लोगों को संतुलित आहार लेना चाहिए, जिसमें हरी सब्जियां, फल और रेशेदार खाद्य पदार्थ अधिक हों। मीठे पदार्थों और जंक फूड का सेवन कम करना चाहिए। रोजाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम या पैदल चलना भी बहुत जरूरी है। इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना और शरीर के वजन को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।

मधुमेह होने पर कैसी हो जीवनशैली

यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह हो जाए तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सही जीवनशैली अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। मरीज को नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेनी चाहिए और समय-समय पर शुगर की जांच करवानी चाहिए। भोजन में कम चीनी, कम तेल और अधिक पौष्टिक आहार लेना चाहिए। नियमित योग और हल्का व्यायाम करना भी बहुत लाभदायक होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाकर मधुमेह जैसी बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि समाज का हर व्यक्ति इस बीमारी के प्रति जागरूक हो और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखे।

सूरजपुर डबल मर्डर केस में ऐतिहासिक फैसला: मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत 3 को फांसी, चौथे को मरते दम तक उम्रकैद…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने न्याय की मिसाल पेश करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की भयावहता और नृशंसता को देखते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) करार दिया है। कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू सहित तीन दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है, जबकि चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास (मरते दम तक जेल) की सजा से दंडित किया है।
इस फैसले के बाद कोर्ट परिसर के बाहर पीड़िता के परिजनों और स्थानीय लोगों में संतोष देखा गया, वहीं पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
इस मामले में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।
   1. कुलदीप साहू (मुख्य साजिशकर्ता एवं हत्यारा)
   2. चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके
   3. फूल सिंह उर्फ रिंकू

इन तीनों को फांसी की सजा सुनाई गई हैं वहीं आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को अंतिम सांस तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई हैं।
  
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी थी कि जिस प्रकार प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ बर्बरता, दुष्कर्म और हत्या की घटना को अंजाम दिया गया, वह समाज और इंसानियत के मुंह पर तमाचा है। इसमें दोषियों के लिए अधिकतम यानी फांसी की सजा से कम कुछ भी न्यायसंगत नहीं होगा।
क्या था पूरा मामला?
यह खौफनाक वारदात 13-14 अक्टूबर 2024 की रात घटी थी। सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) से मुख्य आरोपी कुलदीप साहू की पुरानी रंजिश थी। घटना वाली रात पुलिस बल कुलदीप की तलाश में था, क्योंकि उसने एक आरक्षक पर खौलता तेल फेंकने और गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया था। रंजिश में अंधे होकर कुलदीप साहू अपने साथियों के साथ प्रधान आरक्षक के शासकीय मकान में घुस गया। घर में प्रधान आरक्षक मौजूद नहीं थे। आरोपियों ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 साल की मासूम बेटी पर तलवार और धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जांच के दौरान उनके साथ दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) से जुड़े जघन्य अपराधों की भी पुष्टि हुई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी दोनों के शवों को कार में लादकर ले गए और शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर पीढ़ा गांव के पास खेतों में अर्धनग्न अवस्था में फेंककर फरार हो गए थे।
जनाक्रोश और आगजनी से दहला था सूरजपुर
वारदात का पता चलते ही पूरे सूरजपुर में हाहाकार मच गया था। उग्र भीड़ ने आरोपी कुलदीप साहू के घर और कबाड़ गोदाम को आग के हवाले कर दिया था। पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल उठे थे।
घटना के बाद पुलिस की कई टीमों ने घेराबंदी कर मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को बस से झारखंड भागते समय बलरामपुर जिले से दबोचा था। जांच और साक्ष्यों को तेजी से पूरा करते हुए मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट के सुपुर्द किया गया, जहां आखिरकार न्याय की जीत हुई।

चिरमिरी में युवक की हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास, घटना के 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार हुआ था आरोपी 21 माह बाद आया फैसला…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी/चिरमिरी किशन शाह : जिले के 20 नंबर डोमनहिल में युवक की हत्या के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चिरमिरी निरंजन लाल चौहान ने आरोपी राजेश कुमार पिता अशोक कुमार (35 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर 100 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला 31 दिसंबर 2024 की रात करीब 10 से 10:30 बजे का है। 20 नंबर डोमनहिल मेन रोड पर सलीम के घर के सामने सिगरेट लेने की बात को लेकर मृतक शाहिद अहमद और आरोपी राजेश कुमार के बीच विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने पर आरोपी ने लकड़ी के डंडे से शाहिद के सिर पर कई वार किए, जिससे उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलने के बाद चिरमिरी पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 1 जनवरी 2025 को अपराध दर्ज किया और आरोपी राजेश कुमार को घटना के 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया था। मामले की विवेचना तत्कालीन थाना चिरमिरी के सहायक उप निरीक्षक शेष नारायण सिंह द्वारा की गई।
करीब 21 माह चली न्यायालयीन कार्यवाही के बाद न्यायालय ने आरोपी को धारा 103(1) बीएनएस के तहत हत्या का दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ भी नहीं दिया।
साथ ही न्यायालय ने पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मृतक के परिजनों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से तीन माह के भीतर प्रतिकर दिलाने के निर्देश दिए हैं। आरोपी द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।

अंबिकापुर में गैरेज कर्मी की कुल्हाड़ी मारकर निर्मम हत्या, करमा नाच के दौरान हुआ था विवाद; पुलिस ने दो आरोपियों को लिया हिरासत में..

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : शहर से लगे ग्राम खैरबार में एक गैरेज में काम करने वाले 27 वर्षीय युवक की उसके ही दो साथियों ने कुल्हाड़ी से गर्दन पर वार कर निर्मम हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए थे। पुलिस ने दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, कोरिया जिले के पटना निवासी मृतक विश्वजीत कुल्हाड़े उर्फ राजा (27 वर्ष), थाना चौक (मायापुर) निवासी रमेश सोनी के साथ खैरबार स्थित गैरेज में काम करता था और गैरेज के पास बने एक कमरे में ही रहता था। शनिवार की रात विश्वजीत अपने तीन साथियों—शनि, आकाश उर्फ चिंटू और एक अन्य आकाश के साथ गांव में करमा खेलने गया था। इस दौरान किसी बात को लेकर चारों के बीच कहासुनी और मारपीट हो गई। विवाद के बाद विश्वजीत अपने साथी शनि के साथ कमरे पर लौट आया। लेकिन देर रात करीब दोनों आरोपी (आकाश उर्फ चिंटू और आकाश) कुल्हाड़ी लेकर कमरे में पहुंच गए। वहां उन्होंने पहले विश्वजीत के साथ मारपीट की और फिर कुल्हाड़ी से उसकी गर्दन पर घातक प्रहार कर दिया। अत्यधिक खून बहने के कारण विश्वजीत की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने आरोपियों को किया राउंडअप
घटना के समय कमरे में मौजूद तीसरे साथी शनि ने मामले की जानकारी गैरेज मालिक रमेश सोनी को दी, जिसके बाद रविवार सुबह पुलिस को सूचित किया गया। कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया।
पुलिस ने प्रत्यक्षदर्शी शनि के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर दोनों आरोपी आकाश उर्फ चिंटू और आकाश को हिरासत में ले लिया है। फिलहाल हत्या के सटीक कारणों का खुलासा नहीं हो सका है, पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय का 19वां स्थापना दिवस समारोह सांसद चिंतामणि महाराज के मुख्य आतिथ्य में संपन्न…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर :  संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अम्बिकापुर का 19वां स्थापना दिवस समारोह रविवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, प्रशासनिक भवन परिसर, दर्रीपारा में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, विकास कार्यों, नवाचारों तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले ने की। नगर निगम अम्बिकापुर की महापौर मंजूषा भगत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती एवं संत गहिरा गुरु जी के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर राज्यगीत एवं विश्वविद्यालय के कुलगीत का गायन किया गया। विश्वविद्यालय की ओर से अतिथियों का राजकीय पट्टा, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।

संत गहिरा गुरु जी के आदर्शों को आत्मसात कर आगे बढ़े विश्वविद्यालय-सांसद चिंतामणि महाराज
मुख्य अतिथि सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि संत गहिरा गुरु जी के आदर्शों, विचारों एवं समाज सुधार के संदेशों को आत्मसात करते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति तथा शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम महान संत एवं समाज सुधारक संत गहिरा गुरु जी के नाम पर होना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय को उनके आदर्शों के अनुरूप शिक्षा, संस्कार, सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देना चाहिए।

सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने संत गहिरा गुरु जी एवं गुरु माता से जुड़े अनेक प्रेरणादायी एवं स्मरणीय प्रसंग साझा करते हुए उनके जीवन दर्शन, आध्यात्मिक विचारों तथा समाज में नैतिकता, सेवा, सद्भाव और संस्कारों की स्थापना के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया।

युवा नशे से दूर रहकर समाज को भी करें जागरूक
सांसद चिंतामणि महाराज ने युवाओं से नशामुक्त समाज के निर्माण में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र और समाज की सबसे बड़ी शक्ति हैं। युवा नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर शिक्षा, सकारात्मक सोच, अनुशासन एवं रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ेंगे तो समाज और राष्ट्र का भविष्य और अधिक उज्ज्वल होगा।

उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने के साथ अपने मित्रों एवं आसपास के लोगों को जागरूक करने और नशामुक्ति अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, जागरूक एवं संस्कारवान नागरिक का निर्माण करना भी है।

गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा विश्वविद्यालय की प्राथमिकता-कुलपति प्रो. लाकपाले
कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले ने अपने उद्बोधन में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा, उपलब्धियों, वर्तमान गतिविधियों एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ शोध, नवाचार, कौशल विकास और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका को लगातार सशक्त कर रहा है।

विशिष्ट अतिथि महापौर मंजूषा भगत ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की भूमिका एवं क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर विचार रखे। उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं विकास कार्यों की सराहना करते हुए नगर निगम की ओर से आवश्यक सहयोग प्रदान किए जाने का आश्वासन दिया।

शिक्षा, शोध एवं नवाचार के नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान’
19वें स्थापना दिवस समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में शामिल हुए। समारोह विश्वविद्यालय की अब तक की शैक्षणिक यात्रा और उपलब्धियों को स्मरण करने के साथ भविष्य की प्राथमिकताओं एवं नए संकल्पों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर बना।

कार्यक्रम के अंत में उप-कुलसचिव प्रवीण कुमार अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके पश्चात ‘वंदे मातरम्’ के गायन के साथ समारोह का समापन हुआ। स्थापना दिवस समारोह की रूपरेखा समारोह के संयोजक एवं फार्मेसी शिक्षण विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रोहितास देशमुख के निर्देशन में तैयार की गई।

स्थापना दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय ने गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार, कौशल विकास एवं सरगुजा संभाग के शैक्षणिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त किया।

ग्राम पंचायत राधाकृष्णनगर में भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: “सचिव पर गाज, तो सरपंच पर मेहरबानी क्यों?”

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : जनपद पंचायत बलरामपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत राधाकृष्णनगर में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए उप सरपंच, पंचों और ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा पंचायत सचिव ललित सिंह को तो निलंबित कर दिया गया है, लेकिन भ्रष्टाचार में बराबर की भागीदार सरपंच बबली को बचाने की कोशिश की जा रही है।
लगभग 14.73 लाख रुपये की गड़बड़ी का आरोप
उप सरपंच विशाखा मंडल, पंच सविता, राजकुमारी, सरस्वती, सचिन विश्वास एवं लगभग 46 ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व पंचायत विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सरपंच और सचिव की साठगांठ से ग्राम पंचायत के खातों से करीब 14,73,472 रुपये का गबन किया गया है।
आरोप हैं कि
1. सफाई व मुरमीकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा : झाड़ी और फील्ड सफाई के नाम पर ₹1,40,000, तथा बिना कोई निर्माण किए पुलिया निर्माण के नाम पर ₹50,000 का फर्जी आहरण किया गया।
2. सड़क और तालाब जीर्णोद्धार में बंदरबांट: सड़कों पर नाममात्र का मुरम डालकर और छोटे तालाब जीर्णोद्धार के नाम पर बिना उचित सत्यापन और माप (MB Measurement) के लाखों रुपये का भुगतान वेंडर के नाम से निकाल लिया गया।
3. स्टेशनरी व बैंक ब्याज में अनियमितता: स्टेशनरी व फोटोकॉपी के नाम पर ₹49,975 का फर्जी बिल लगाया गया। इसके अलावा पंचायत खातों में जमा राशि के ब्याज और पुराने बैलेंस में लाखों रुपये का गबन किया गया है।
सचिव पर निलंबन की कार्रवाई, सरपंच पर लीपापोती से आक्रोश
मामले की जांच के लिए जिला पंचायत बलरामपुर द्वारा जांच समिति का गठन किया गया था। जांच टीम द्वारा मांगे गए आवश्यक दस्तावेज (कैशबुक, निर्माण कार्य नस्ती आदि) जमा न करने और असहयोग करने के कारण जिला पंचायत सीईओ द्वारा पंचायत सचिव ललित सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ सचिव पर कार्रवाई करके मामले को शांत करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि किसी भी वित्तीय आहरण में सरपंच की बराबरी की भूमिका होती है, फिर भी सरपंच बबली के खिलाफ कार्रवाई करने में ढिलाई बरती जा रही है।
धारा 40 के तहत सरपंच को पद से हटाने की मांग
उप सरपंच, पंचों और ग्रामीणों ने कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और जनपद सीईओ से गुहार लगाते हुए मांग तेज कर दी है। उनकी मांग है कि सरपंच बबली के खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाए तथा गबन की गई पूरी राशि (₹14.73 लाख) की वसूली सरपंच और संबंधितों से की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच कर सरपंच पर कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन और प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।

सेमीघोघरा के जंगल में 6 फीट तक खुदा गड्ढा, नहीं मिला कुछ,सफेद कपड़ा और बोलेरो से आए दो युवकों को देख ग्रामीणों में फैली थी दहशत; तहसीलदार की मौजूदगी में हुई खुदाई से समाप्त हुआ सस्पेंस…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर :  सरगुजा जिले के उदयपुर थाना क्षेत्र (ग्राम पंचायत सानीबर्रा) स्थित सेमीघोघरा के जंगल में दो दिनों से बना रहस्यमयी सस्पेंस आखिरकार समाप्त हो गया हैं। जंगल में किसी व्यक्ति या संदिग्ध वस्तु को दफन किए जाने की आशंका के बाद रविवार को कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस और प्रशासन की टीम ने गड्ढे की खुदाई करवाई। करीब 6 फीट गहरा गड्ढा खोदने के बाद भी जब अंदर कुछ नहीं मिला, तब प्रशासन और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
क्या था पूरा मामला?
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब जंगल में मवेशी चराने गए ग्रामीणों ने एक सफेद बोलेरो देखी। उसमें से फावड़ा लेकर उतरे दो युवकों ने जंगल में एक जगह खुदाई की। शुरुआत में ग्रामीणों ने इसे सामान्य समझा और लगा कि वे छुही मिट्टी निकालने आए होंगे। हालांकि, युवकों के जाने के बाद जब ग्रामीणों ने देखा तो वहां ताजी मिट्टी से ढका गड्ढा मिला, जिसके बाहर एक सफेद कपड़ा दिखाई दे रहा था। इससे इलाके में मर्डर या किसी संदिग्ध वस्तु को दफनाने की अफवाहें फैल गईं।
रातभर पहरेदारी के बाद सुबह हुई खुदाई
सूचना मिलते ही उदयपुर थाना पुलिस शनिवार शाम मौके पर पहुंची। अंधेरा होने के कारण पुलिस ने रात में खुदाई कराने के बजाय गड्ढे की सुरक्षा के लिए रातभर मौके पर पहरा दिया, ताकि कोई साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न कर सके।
अगले दिन रविवार को तहसीलदार तारा सिदार और पुलिस टीम की मौजूदगी में ग्रामीणों के सामने गड्ढे की खुदाई शुरू की गई। जैसे-जैसे मिट्टी हटाई जा रही थी, ग्रामीणों और अधिकारियों की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी। हालांकि, 6 फीट तक खुदाई के बाद भी अंदर कोई शव या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।
पुलिस और प्रशासन की अपील
गड्ढे से कुछ न मिलने पर सभी प्रकार की अटकलों पर विराम लग गया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी घटनाओं को लेकर बिना पुष्टि के अफवाहें न फैलाएं। साथ ही, सुनसान इलाकों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की सलाह दी गई है।

वडनगर से वाराणसी जा रही बाइक यात्रा का छत्तीसगढ़ की सीमा में स्वागत…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी/मनेंद्रगढ़ किशन शाह: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष की जनसेवा पूर्ण होने के अवसर पर चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वडनगर (गुजरात) से वाराणसी (उत्तरप्रदेश) तक निकाली जा रही बाइक यात्रा का छत्तीसगढ़ की सीमा में आत्मीय स्वागत किया गया।
मनेंद्रगढ़ से जिला कोरिया की ओर बढ़ रहे बाइक यात्रियों से कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, एमसीबी जिला भाजपा अध्यक्ष  चंपा देवी पावले एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भेंट की। इस दौरान उन्होंने बाइक यात्रियों से यात्रा के संबंध में जानकारी ली और उनकी आगामी यात्रा के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।


बताया गया कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ का उद्देश्य सेवा, जनभागीदारी और सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाना है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बाइक रैली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मस्थान गुजरात के वडनगर से उनकी कर्मभूमि वाराणसी तक निकाली जा रही है।
बाइक यात्रा के छत्तीसगढ़ प्रवेश द्वार पहुंचने पर कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, एमसीबी जिला अध्यक्ष चंपा देवी पावले एवं पार्टी के पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं ने यात्रियों का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा को कोरिया जिले की सीमा तक पहुंचाया गया।
इस अवसर पर पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित रहे। बाइक यात्रियों के उत्साह और समर्पण को अभियान के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया।

महावीर हॉस्पिटल के खिलाफ प्रशासन का बड़ा एक्शन: बिना लाइसेंस चल रही महावीर अस्पताल की ‘लार्ज लैब’ सील, निजी अस्पतालों में हड़कंप…

कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर 4 सदस्यीय टीम की औचक छापेमारी; गायत्री और लाइफ लाइन अस्पताल के दस्तावेज भी खंगाले गए।
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : जिले में बिना वैध लाइसेंस और नियमों की अनदेखी कर धड़ल्ले से चल रहे निजी अस्पतालों व पैथोलॉजी लैबों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कलेक्टर अजीत वसंत के कड़े रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों में अचानक दबिश देकर पैथोलॉजी लैबों की जांच की। इस दौरान महावीर अस्पताल में गंभीर लापरवाही उजागर होने पर मौके पर ही कड़ी कार्रवाई की गई।
महावीर अस्पताल में पकड़ी गई बड़ी गड़बड़ी, मशीन सील
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जे.एस. सरूता के मार्गदर्शन में गठित जांच टीम जब महावीर अस्पताल पहुंची, तो वहां लार्ज लैब का लाइसेंस ही नहीं मिला। अस्पताल प्रबंधन के पास सिर्फ ‘स्माल लैब’ चलाने की अनुमति थी, जबकि वहां नियमों को ताक पर रखकर ‘लार्ज लैब’ का संचालन किया जा रहा था।

निरीक्षण को गई जांच टीम


गंभीर अनियमितता पाते ही टीम ने तत्काल प्रभाव से लार्ज लैब में इस्तेमाल हो रही मशीन को सील कर दिया। अस्पताल प्रबंधन को सख्त ताकीद की गई है कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर जब तक वैध अनुज्ञा पत्र प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक लार्ज लैब का संचालन पूरी तरह ठप्प रहेगा।
गायत्री और लाइफ लाइन अस्पताल का भी खंगाला गया रिकॉर्ड
जांच दल ने गायत्री अस्पताल और लाइफ लाइन अस्पताल में भी औचक निरीक्षण कर लार्ज लैब के पंजीयन, लाइसेंस और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के दस्तावेजों की गहराई से जांच की। जांच के दौरान लाइफ लाइन अस्पताल के पास लार्ज लैब का वैध लाइसेंस उपलब्ध पाया गया, जबकि गायत्री अस्पताल के दस्तावेजों और व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
बिना अनुमति लैब चलाई तो सीधे होगी कानूनी कार्रवाई: कलेक्टर
कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के सभी निजी अस्पतालों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि शासन द्वारा निर्धारित मानकों का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि लार्ज लैब संचालन के लिए जरूरी पंजीयन और अनुज्ञा पत्र के बिना किसी को भी काम करने की छूट नहीं दी जाएगी। यदि भविष्य में कोई भी अस्पताल बिना अनुमति के अवैध रूप से लैब संचालित करता पाया गया, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच दल में ये अधिकारी रहे मौजूद
कार्रवाई को अंजाम देने पहुंची 4 सदस्यीय विशेष टीम में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा, पैथोलॉजिस्ट डॉ. दीपक गुप्ता, टीम सदस्य शिवेंद्र सिंह और नर्सिंग होम एक्ट शाखा प्रभारी संजय पांडे शामिल रहे। स्वास्थ्य विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से शहर के अन्य निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप का माहौल है।

इलाज में भारी लापरवाही आशुतोष की मौत के बाद श्री महावीर अस्पताल पर उठे गंभीर सवाल, देखें सबूत कैसे झूठ बोल लोगो को गुमराह कर रहा महावीर हॉस्पिटल…Part 1

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : दिनांक 30 अगस्त 2026 को उम्मीद और सांसों की आस में अस्पताल दाखिल हुए 23 वर्षीय युवक आशुतोष दास की 04 सितंबर 2026 की सुबह हुई दर्दनाक मौत ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र और अस्पताल की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। परिजनों का सीधा आरोप है कि यह मौत किसी स्वाभाविक बीमारी से नहीं, बल्कि डॉक्टरों की घोर लापरवाही, आईसीयू में निगरानी की कमी और समय पर सही निर्णय न लेने के कारण हुई है।

डॉ सुधांशु किरण द्वारा मरीज आशुतोष दास के इलाज की पर्ची


क्या है पूरा मामला?
आशुतोष को 30 अगस्त को ट्रेकियोस्टमी की जांच के लिए श्री महावीर हॉस्पिटल ले जाया गया था, जहां हॉस्पिटल द्वारा मरीज को 4 घंटे स्ट्रेचर पर ही डॉक्टर का इंतजार करवाया गया। 4 घंटे बाद हॉस्पिटल के डॉक्टर सुधांशु किरण द्वारा मरीज को हल्के इन्फेक्शन की आशंका जताते हुए आईसीयू (ICU) में भर्ती कर लिया गया था। उल्लेखनीय हैं कि मरीज की श्री महावीर हॉस्पिटल में 13 जून को ब्रेन सर्जरी हुई थी और हॉस्पिटल की लापरवाही से उसे फंगल निमोनिया हो चुका था जिसके बाद लंबे इलाज के बाद उसे 11 अगस्त को डिस्चार्ज कर घर भेजा गया था।

लापरवाही का घटनाक्रम: जहां से बिगड़ी बात
1. बिना तैयारी के निकाली गई सांस की नली (02 सितंबर)
मरीज के फेफड़ों में फंगल निमोनिया का गंभीर संक्रमण था। इसके बावजूद 02 सितंबर को उसकी ट्रैकियोस्टॉमी ट्यूब (Tracheostomy Tube – सांस की नली) निकाल दी गई और स्टोमा बंद कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि मरीज का कफ रिफ्लेक्स (बलगम बाहर फेंकने की क्षमता) जांचे बिना यह कदम जल्दबाजी में उठाया गया।
2. आईसीयू में सक्शनिंग की कमी और फेफड़ों में जमा बलगम
नली निकालने के बाद मरीज के सांस की नली में गाढ़ा बलगम (Thick Secretions) जमा होने लगा। आईसीयू स्टाफ द्वारा नियमित चेस्ट फिजियोथेरेपी और सक्शनिंग में बरती गई लापरवाही के कारण मरीज का दम घुटने लगा।

अस्पताल के डॉक्टर की नोट से समझिए मरीज की स्थिति क्या थी


3. आपातकालीन स्थिति में 7 घंटे का जानलेवा विलंब (03 सितंबर)
3 सितंबर को दोपहर 04:00 बजे आई एबीजी (ABG) जांच रिपोर्ट में मरीज के शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड (Hypercapnia) का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ पाया गया था। शाम 06:00 बजे मरीज का ब्लड प्रेशर गिरकर शॉक की स्थिति (90/60 mmHg) में पहुंच गया और सांस की गति 42 तक पहुंच गई। इसके बावजूद डॉक्टरों ने मरीज को दोबारा वेंटिलेटर नली (Re-intubation) डालने में 7 घंटे का जानलेवा विलंब किया गया। रात 11:00 बजे जब मरीज ‘रेस्पिरेटरी फेलियर’ (Respiratory Failure) में चला गया, तब हड़बड़ी में नली डाली गई, उस समय सांस की नली में भारी बलगम फंसा हुआ मिला।
4. सुविधाओं का अभाव और देर से रेफर करना
अस्पताल में पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों के विशेषज्ञ) की अनुपस्थिति के बावजूद मरीज को सही समय पर उच्च केंद्र (Higher Center) स्थानांतरित नहीं किया गया। जब मरीज की स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई, तब 04 सितंबर को 6:00 बजे उसे अत्यंत गंभीर स्थिति में रेफर किया गया, जहां रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों की मांग: सख्त कार्रवाई और लाइसेंस रद्द हो
मृतक आशुतोष के परिजनों का कहना है कि 23 साल के युवा की जान अस्पताल के कुप्रबंधन और लापरवाह रवैये की वजह से गई है। परिजनों ने राज्य मेडिकल काउंसिल (State Medical Council) से मांग की है कि:
1. मामले की जांच के लिए निष्पक्ष मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए।
2. आईसीयू के सीसीटीवी फुटेज और सक्शनिंग चार्ट्स की गहन जांच हो।
3. दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उनके मेडिकल लाइसेंस रद्द किए जाएं।

श्री महावीर हॉस्पिटल द्वारा कैसे झूठ का सहारा लेकर लोगों को किया जा रहा गुमराह

कल महावीर हॉस्पिटल द्वारा एक वीडियो जारी कर मरीज के परिजनों पर आरोप लगाए गए थे कि अस्पताल द्वारा मरीज को रेफर कर दिया गया था इसके बावजूद परिजनों की लेटलतीफी थी के कारण मरीज की मौत हुई जबकि मरीज को सुबह 5 से 6 बजे के बीच रेफर किया गया था जबकि रात 10:45 बजे डॉक्टर के नोट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया था कि मरीज का रेस्पिरेट्री फैलियर हो चुका हैं। दूसरी और वीडियो में यह भी कहा गया था कि मरीज का इलाज डॉ सुधांशु किरण द्वारा नहीं किया गया जबकि मरीज को अस्पताल में भर्ती डॉ सुधांशु किरण द्वारा ही किया गया था जिसका प्रमाण भी हमारे द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। जब मरीज के फेफड़ों में फंगल निमोनिया का गंभीर संक्रमण था तो फिर ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब क्यों निकाली गई और परिजनों से ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब खरीदवाने के बाद भी उस ट्यूब को स्थिति बिगड़ने से पूर्व फिर से लगा क्यों नहीं दिया गया??

फिलहाल इस मामले में स्वास्थ्य विभाग को शिकायत दे दी गई है मिली जानकारी के अनुसार इस मामले की जांच के लिए जांच टीम का गठन भी हो गया है, जल्द ही  इस मामले में जांच टीम द्वारा अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और मामले की सच्चाई सबके सामने होगी।

RDA की नगर विकास योजना में भूखंड आवंटन पर सवाल,,
मंत्री की पत्नी से जुड़ी कंपनी को करोड़ों की जमीन देने का आरोप, मुख्य सचिव से जांच की मांग…

रायपुर। रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना में भूखंडों के पुनर्गठन और आवंटन को लेकर विवाद सामने आया है। कांग्रेस नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता ने आरोप लगाया है कि वन मंत्री केदार कश्यप की पत्नी शांति कश्यप से जुड़ी कंपनी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को कचना स्थित जमीन के बदले सड्डू में ऐसा भूखंड प्रस्तावित किया गया है, जिसकी संभावित बाजार कीमत उनके आकलन के अनुसार करीब 20 करोड़ रुपये हो सकती है।
डॉ. गुप्ता ने इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर नगर विकास योजना को निरस्त करने तथा भूखंडों के पुनर्गठन और आवंटन की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।

23,327 वर्गफीट के प्लॉट को लेकर सवाल

डॉ. गुप्ता के मुताबिक राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को सड्डू में प्लॉट नंबर 25 दिए जाने का प्रस्ताव है। इसका क्षेत्रफल करीब 2,168 वर्गमीटर यानी 23,327 वर्गफीट बताया गया है। उनका दावा है कि यह भूखंड प्रस्तावित 150 फीट चौड़ी MR-43 सड़क के पास स्थित है।
डॉ. गुप्ता ने अनुमान लगाया है कि सड़क विकसित होने के बाद इस क्षेत्र में जमीन की कीमत करीब 10 हजार रुपये प्रति वर्गफीट तक पहुंच सकती है। इसी अनुमान के आधार पर उन्होंने भूखंड की संभावित कीमत करीब 20 करोड़ रुपये बताई है। यह आंकड़ा उनका अनुमान है, RDA द्वारा निर्धारित बाजार मूल्य नहीं।

कचना में 1.33 एकड़ जमीन, सड्डू में प्लॉट देने का दावा

डॉ. गुप्ता के अनुसार राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड के पास कचना के नालापारा क्षेत्र में करीब 1.33 एकड़ जमीन है। उनका कहना है कि इस जमीन तक पहुंचने का रास्ता अपेक्षाकृत संकरा है।
उनका आरोप है कि नगर विकास योजना में कचना की इस जमीन को शामिल किए जाने के बाद कंपनी की मूल जमीन को योजना में प्लॉट नंबर 71 के रूप में दर्शाया गया है, जिसे सार्वजनिक सुविधा के लिए आरक्षित बताया गया है। इसके बदले कंपनी को कचना से अलग सड्डू में प्लॉट नंबर 25 दिए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं।

मूल जमीन से करीब एक किलोमीटर दूर प्लॉट पर आपत्ति

डॉ. गुप्ता ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50 के प्रावधानों का हवाला देते हुए भूखंडों के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि पुनर्गठन के बाद अंतिम भूखंड मूल भूमि या उससे लगे क्षेत्र में दिए जाने से संबंधित प्रावधान हैं।
डॉ. गुप्ता का दावा है कि कचना स्थित मूल जमीन के बदले प्रस्तावित प्लॉट सड्डू में है, जो मूल भूमि से करीब एक किलोमीटर दूर है। इसी स्थानांतरण को लेकर उन्होंने पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

मंत्री की पत्नी की कंपनी में हिस्सेदारी का भी उल्लेख

डॉ. गुप्ता ने राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड में मंत्री केदार कश्यप की पत्नी शांति कश्यप की भूमिका का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि शांति कश्यप कंपनी की निदेशक हैं और उनके नाम कंपनी में 80 हजार रुपये के शेयर हैं। इसके लिए उन्होंने वर्ष 2023 के चुनावी शपथपत्र का भी हवाला दिया है।

अन्य भू-स्वामियों के आवंटन पर भी सवाल

डॉ. गुप्ता ने योजना में अन्य भू-स्वामियों को दिए जा रहे भूखंडों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ भू-स्वामियों को प्रमुख सड़क के आसपास के बजाय योजना के अंदरूनी हिस्सों में भूखंड दिए गए हैं। उन्होंने सभी आवंटनों और पुनर्गठन की प्रक्रिया की जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भूखंड आवंटन में किन नियमों और मानकों का पालन किया गया।

RDA ने दावा-आपत्ति के बाद जांच की बात कही

मामले में RDA की ओर से कहा गया है कि नगर विकास योजना के तहत भूखंडों का पुनर्गठन और आवंटन निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, RDA की ओर से दावा-आपत्ति की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है और आपत्ति प्राप्त होने पर संबंधित कमेटी द्वारा उसका परीक्षण किया जाएगा।

फिलहाल आरोपों और आपत्तियों के स्तर पर मामला

फिलहाल यह मामला आरोप, दावे और प्रस्तावित आवंटन पर आपत्तियों के स्तर पर है। डॉ. राकेश गुप्ता ने मुख्य सचिव से योजना और पूरी आवंटन प्रक्रिया की जांच की मांग की है। वहीं RDA की ओर से दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद नियमानुसार परीक्षण की बात कही गई है।

22 हजार रुपये की रिश्वत लेते नान के जिला प्रबंधक गिरफ्तार, एसीबी ने रंगे हाथों दबोचा…

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर-रामानुजगंज :  बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के जिला प्रबंधक विद्यासागर गोपाल को 22 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। कार्रवाई मंगलवार दोपहर नान कार्यालय, बलरामपुर में की गई।
जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर निवासी शिवराज सिंह ने एसीबी अंबिकापुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि नान के जिला प्रबंधक विद्यासागर गोपाल द्वारा उनके काम के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के बाद एसीबी की टीम ने मामले का सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने के बाद अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए योजना तैयार की गई।
योजना के तहत एसीबी ने शिकायतकर्ता को केमिकल लगे 22 हजार रुपये दिए। मंगलवार दोपहर शिकायतकर्ता ने जैसे ही नान कार्यालय में जिला प्रबंधक को रकम सौंपी, आसपास पहले से मौजूद एसीबी की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया।
न्यायालय में किया जाएगा पेश
कार्रवाई के बाद एसीबी टीम ने जिला प्रबंधक विद्यासागर गोपाल को हिरासत में लेकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। एसीबी अधिकारियों के अनुसार, आरोपी अधिकारी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया की जा रही है।
एसीबी टीआई शरद सिंह ने बताया कि शिकायतकर्ता ने नान अधिकारी के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। शिकायत का सत्यापन कराने के बाद नियोजित तरीके से कार्रवाई की गई, जिसमें अधिकारी को 22 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया।

सूरजपुर राजस्व विभाग हुआ भ्रष्टाचार मुक्त भ्रष्टाचार की देवी का हुआ तबादला!! राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए हैं। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश में अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारियों को प्रशासनिक आधार पर नई पदस्थापना दी गई है।

देखें आदेश :

सूरजपुर दोहरा हत्याकांड: मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत 4 आरोपी दोषी करार, 8 अक्टूबर को होगा सजा का ऐलान…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर:  छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत चार आरोपियों को हत्या का दोषी पाया है, जबकि मामले के दो अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।
यह फैसला जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत द्वारा सुनाया गया। अदालत ने दोषियों की सजा पर बहस और निर्धारण के लिए 8 अक्टूबर की तिथि तय की है।
इन्हें ठहराया गया दोषी
न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए निम्नलिखित आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है:
कुलदीप साहू (मुख्य आरोपी), फूलसिंह उर्फ रिंकू, आर्यन विश्वकर्मा,चंद्रकांत चौधरी।
पुलिस जवान पर गाड़ी चढ़ाने के मामले में पहले ही मिल चुकी है 10 साल की सजा
मुख्य आरोपी कुलदीप साहू का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। इससे पहले, पुलिस प्रधान आरक्षक पर गाड़ी चढ़ाकर जानलेवा हमला करने के एक अन्य पृथक मामले में अदालत कुलदीप साहू को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुना चुकी है।
पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाली नृशंस घटना
यह दिल दहला देने वाला मामला सूरजपुर में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 12 वर्षीय मासूम बेटी की बेरहमी से की गई नृशंस हत्या से जुड़ा हुआ है। इस वारदात के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। Fast Track Court द्वारा आए इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार और आम जनता की नजरें अब 8 अक्टूबर को होने वाले सजा के ऐलान पर टिकी हैं।

अंबिकापुर वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी: हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस अब सप्ताह में 2 दिन चलेगी, रेलवे ने जारी किया आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने उत्तर छत्तीसगढ़ के यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए अंबिकापुर और दिल्ली (हजरत निजामुद्दीन) के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन के फेरों में बढ़ोतरी की है। अब यह ट्रेन सप्ताह में एक दिन के बजाय सप्ताह में दो दिन चलेगी। प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक कार्यालय, बिलासपुर द्वारा 28 सितंबर 2026 को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।
गाड़ी संख्या 22408 (हजरत निजामुद्दीन – अंबिकापुर एक्सप्रेस) 04 अक्टूबर 2026 (रविवार) से हर रविवार और मंगलवार को चलेगी (पहले केवल मंगलवार को चलती थी)।
गाड़ी संख्या 22407 (अंबिकापुर – हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस) 06 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) से अब यह ट्रेन हर मंगलवार और गुरुवार को चलेगी (पहले केवल गुरुवार को चलती थी)।
रूट और समय में कोई बदलाव नहीं
रेलवे प्रशासन के अनुसार, ट्रेन के रूट, समय-सारिणी (Timings), कोच कंपोजिशन और ठहराव (Stoppages) में कोई बदलाव नहीं किया गया है, वे पहले की तरह ही रहेंगे। फेरों में वृद्धि से राजधानी दिल्ली और मध्य प्रदेश की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त बर्थ उपलब्ध होंगी और लंबी वेटिंग लिस्ट से राहत मिलेगी।

4.51 करोड़ के घपले के आरोपों के बीच बलरामपुर DEO मनीराम यादव पर गिरी गाज, पद से हटाकर भेजा गया स्कूल…

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए बलरामपुर-रामानुजगंज के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मनीराम यादव को उनके पद से हटा दिया है। 4.51 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के गंभीर आरोपों और कलेक्टर स्तर पर चल रही जांच के बीच राज्य शासन ने उनका डिमोशन करते हुए उन्हें वापस प्राचार्य के पद पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसा (विकासखंड अंबिकापुर, जिला सरगुजा) में पदस्थ कर दिया है।
स्कूल शिक्षा विभाग (मंत्रालय, महानदी भवन) द्वारा 28 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, प्रशासनिक आधार पर यह बदलाव किया गया है।
नरेंद्र कुमार निरापुरे बने नए प्रभारी DEO
जारी आदेश के तहत, शासकीय हाई स्कूल कोराचा (विकासखंड मानपुर, जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी) के प्राचार्य नरेन्द्र कुमार निरापुरे को बलरामपुर-रामानुजगंज का नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है।
घोटाले के आरोपों के बाद हुई कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि मनीराम यादव पर 4.51 करोड़ रुपये के वित्तीय घपले के गंभीर आरोप लगे थे, जिसकी जांच कलेक्टर स्तर पर चल रही थी। जांच के बीच ही शासन द्वारा यह कड़ा कदम उठाया गया है, जिससे शिक्षा विभाग के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। यह आदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार उप सचिव रमेशवार प्रसाद वर्मा द्वारा जारी किया गया है।

आयुष्मान कार्ड के बावजूद मरीज के परिजनों से अवैध वसूली: अम्बिकापुर के श्री महावीर अस्पताल को सीएमएचओ ने जारी किया कारण बताओ नोटिस…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज के प्रावधानों का उल्लंघन कर मरीज के परिजनों से लाखों रुपये ऐंठने के गंभीर मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), सरगुजा ने श्री महावीर अस्पताल, अम्बिकापुर को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

दरअसल सुभाषनगर निवासी शिकायतकर्ता मृण्मयी पाण्डेय ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई अपनी लिखित शिकायत में बताया कि उनके भाई स्व. आशुतोष दास को सड़क हादसे में घायल होने के बाद 13 जून 2026 को श्री महावीर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत था, जिसके नियमानुसार उसका संपूर्ण इलाज कैशलेस (निःशुल्क) होना अनिवार्य था।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने मरीज की गंभीर स्थिति का अनुचित फायदा उठाते हुए उनसे जबरन ₹6 से ₹7 लाख तक की राशि नगद (कैश) और ऑनलाइन (PhonePe) माध्यम से वसूल की। इलाज के दौरान स्थिति बिगड़ने पर मरीज को रायपुर रेफर किया गया, जहां ले जाते समय 4 सितंबर 2026 को मरीज की मृत्यु हो गई।

अधिकारियों से की गई कड़ी कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की रसीदें, अस्पताल बिल और अन्य दस्तावेज संलग्न कर उच्च अधिकारियों को सौंपे हैं। उन्होंने मांग की है कि:

  1. अस्पताल के खिलाफ निष्पक्ष जांच समिति का गठन कर कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
  2. अस्पताल का पंजीयन एवं आयुष्मान एम्पैनलमेंट तत्काल रद्द किया जाए।
  3. परिजनों से अवैध रूप से वसूली गई पूरी राशि वापस दिलवाई जाए।

अवैध वसूली का एक वीडियो भी शिकायतकर्ता द्वारा जारी किया गया हैं

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, अम्बिकापुर ने 25 सितंबर 2026 को पत्र क्रमांक 7981 जारी करते हुए श्री महावीर अस्पताल के प्रबंधक को नोटिस थमाया है। नोटिस में अस्पताल प्रबंधन से मरीज के समस्त मेडिकल दस्तावेजों के साथ तत्काल अपना स्पष्टीकरण कार्यालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इस कार्रवाई की प्रतिलिपि संचालक स्वास्थ्य सेवाएं (नवा रायपुर) और कलेक्टर सरगुजा को भी सूचनार्थ भेजी गई है।

रिफ्रेशर कोर्स के द्वितीय सत्र में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा ने प्रशिक्षणार्थियों को ई-साक्ष्य, डिजिटल फॉरेंसिक एवं सीसीटीएनएस प्रणालियों का दिया विशेष प्रशिक्षण…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में वरिष्ठ आरक्षक से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर तक के विवेचको कों दिया जा रहा प्रशिक्षण।
अधिकारियों एवं जवानों को नवीन आपराधिक कानूनों के तहत गंभीर अपराधों में तकनीकी व डिजिटल साक्ष्यों के संकलन और अनुप्रयोग की दी गई जानकारी।
पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के परिपालन में, पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा (भा.पु.से.) के नेतृत्व एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के सतत् मार्गदर्शन में रक्षित केंद्र, अंबिकापुर में आयोजित 03-दिवसीय विशेष रिफ्रेशर कोर्स के प्रशिक्षण सत्र का दूसरा बैच लगातार जारी है।
प्रशिक्षण के क्रम में आज अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा रितेश चौधरी ने प्रशिक्षण सत्र में उपस्थित होकर वरिष्ठ आरक्षक से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों एवं जवानों को नवीन आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुरूप गंभीर अपराधों में तकनीकी व डिजिटल साक्ष्यों के संकलन और अनुप्रयोग की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा ने विवेचकों को ई-साक्ष्य संकलन, डिजिटल एवं फॉरेंसिक साक्ष्य प्रक्रिया, फिंगरप्रिंट तकनीक, ई-एफआईआर प्रणाली तथा क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) एवं साइबर अपराधों से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।

कौशल संवर्द्धन एवं तकनीकी दक्षता:
रिफ्रेशर कोर्स का मुख्य उद्देश्य आई.सी.जे.एस. (ICJS) प्रणाली के तहत नवीन कानूनों के मैदानी स्तर पर सुगम एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विवेचकों की कार्यकुशलता में सुधार करना है।
विशेषज्ञ फैकल्टी का मार्गदर्शन : प्रशिक्षण में जिला मास्टर ट्रेनर्स, लोक अभियोजन अधिकारी, फॉरेंसिक एवं फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ, तथा साइबर एवं CCTNS एक्सपर्ट्स द्वारा अधिकारियों को आधुनिक विवेचना तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है।
वर्तमान बैच में सरगुजा रेंज के विभिन्न जिला इकाइयों से 173 पुलिस अधिकारी/कर्मचारी भाग ले रहे हैं। रेंज के शेष विवेचकों का प्रशिक्षण 7 नवंबर तक चरणबद्ध तरीके से पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान नोडल अधिकारी/अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा रितेश चौधरी, उप पुलिस अधीक्षक सुरेश भगत, समन्वयक/रक्षित निरीक्षक तृप्ती सिंह राजपूत, एफएसएल एवं साइबर टीम के अधिकारियों सहित प्रशिक्षु सूबेदार गुलशन चंद्रा, प्रशिक्षु सूबेदार पेमिन वर्मा एवं रेंज से आए प्रशिक्षणार्थी पुलिस अधिकारी व जवान उपस्थित रहे।

साइबर ठगी: मोबाइल हैक कर एसईसीएल लिपिक के बैंक खाते से उड़ाए 1 लाख से अधिक रुपये, जांच में जुटी पुलिस…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/विश्रामपुर: साइबर ठगों ने अब सीधे बैंक खातों में सेंध लगाने के लिए लोगों के मोबाइल फोन को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ऐसा ही एक मामला विश्रामपुर क्षेत्र से सामने आया है, जहां एसईसीएल (SECL) की अमेरा परियोजना में पदस्थ एक लिपिक का मोबाइल फोन हैक कर अज्ञात साइबर ठगों ने खाते से 1 लाख रुपये से अधिक की राशि पार कर दी।
मिली जानकारी के अनुसार अमेरा परियोजना में लिपिक के पद पर कार्यरत नंद किशोर वर्मा का मोबाइल फोन किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर हैक कर लिया गया। इसके बाद शातिर ठगों ने उनके मोबाइल के जरिए बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल कर ली और खाते से 1 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली। पीड़ित लिपिक को इस ठगी का पता तब चला जब उन्हें बैंक खाते से रकम आहरित (निकलने) होने की जानकारी मिली।
थाने में शिकायत दर्ज, जांच शुरू
घटना के बाद पीड़ित लिपिक नंद किशोर वर्मा ने विश्रामपुर थाने पहुंचकर अज्ञात ठग के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस हरकत में आई और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
विश्रामपुर पुलिस अब बैंक खाते से हुए लेनदेन की विस्तृत जानकारी जुटा रही है। पुलिस मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर जांच कर रही है:
रकम किस माध्यम से निकाली गई।
राशि किस अन्य खाते में या किस डिजिटल माध्यम (UPI/ई-वॉलेट) में ट्रांसफर हुई है।
इस साइबर धोखाधड़ी के पीछे कौन-कौन से लोग या गिरोह शामिल हैं।

नागपुर चौकी की बड़ी कार्रवाई, 9 क्विंटल 19 किलो गांजा जब्त 6 आरोपी  गिरफ्तार…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी/ मनेंद्रगढ़ किशन शाह : जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नागपुर चौकी पुलिस ने एनएच-43 पर कार्रवाई करते हुए दो पिकअप वाहनों से 9 क्विंटल 19 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। पुलिस ने मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर दो पिकअप वाहन जब्त किए हैं।
पुलिस के अनुसार, पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक झा और पुलिस अधीक्षक एमसीबी रत्ना सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में नागपुर चौकी क्षेत्र में संदिग्ध वाहनों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान दो संदिग्ध पिकअप वाहनों को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ।
पुलिस ने अपराध क्रमांक 147/2026 में धारा 20(बी), 2(सी) एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की है। जब्त गांजे की अनुमानित कीमत 4 करोड़ 59 लाख 50 हजार रुपये तथा दोनों वाहनों की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है। कुल जब्ती करीब 4 करोड़ 69 लाख 50 हजार रुपये की है।
प्रारंभिक पूछताछ में गांजा ओड़िशा से मध्यप्रदेश ले जाए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब गांजे के स्रोत, सप्लायर, परिवहनकर्ता और अंतिम गंतव्य की जानकारी जुटाने के साथ तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
मामले में ओड़िशा और मध्यप्रदेश के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रकरण की End-to-End विवेचना जारी है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
कार्रवाई में नागपुर चौकी प्रभारी शेषनारायण सिंह, एएसआई रामकृपाल सिंह सहित पुलिस टीम के अन्य अधिकारी-कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अंबिकापुर में इलाज के नाम पर ‘सौदा’ और जान से खिलवाड़: श्री महावीर हॉस्पिटल पर 7 लाख की अवैध वसूली और मौत का आरोप!



आयुष्मान कार्ड दरकिनार, ऐंठे लाखों रुपये; फेफड़े सड़ाने और साक्ष्य मिटाने का सनसनीखेज आरोप

कलेक्टर, SP और CMHO के पास पहुंची शिकायत; विशेष मेडिकल बोर्ड जांच और FIR की मांग

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित श्री महावीर हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर विवादों और आरोपों के घेरे में है। इलाज में घोर लापरवाही, आयुष्मान योजना के बावजूद मरीजों के परिजनों से लाखों की अवैध वसूली, और मरीज की मौत के बाद साक्ष्य (मेडिकल रिकॉर्ड) छिपाने का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। मामले की शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।


सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ ‘वसूली’ और लापरवाही का खेल

सुभाषनगर निवासी 24 वर्षीय युवक आशुतोष दास को 13 जून 2026 को सड़क दुर्घटना के बाद श्री महावीर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का सीधा आरोप है कि उनके पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने दबाव बनाकर नगद और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए 6 से 7 लाख रुपये की अवैध वसूली की।

गलत इलाज से सड़े फेफड़े (Lung Abscess), तड़प-तड़पकर हुई मौत

11 अगस्त को डिस्चार्ज के बाद 30 अगस्त को मरीज को चेकअप के लिए ले जाया गया अस्पताल। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही और घटिया देखभाल की वजह से मरीज के फेफड़ों में भयंकर संक्रमण फैल गया और फेफड़ों में फोड़े (Lung Abscess) बन गए।

परिजनों के मिन्नतों के बाद भी डॉक्टर शैलेन्द्र गुप्ता को हॉस्पिटल प्रबंधन ने नहीं बुलाया।

2 सितंबर को बिना स्थिति का सही आंकलन किए ट्रैकियोस्टमी ट्यूब (Tracheostomy Tube) निकाल दी गई, जिससे मरीज सांस के लिए तड़पने लगा।

3 सितंबर की देर रात 11 बजे अचानक रायपुर रेफर करने की बात कही गई, लेकिन कागजी खानापूर्ति और सीटी स्कैन और बकाया भुगतान के नाम पर सुबह 5:30 बजे तक वक्त बर्बाद किया गया। मरणासन्न हालत में रेफर किए गए आशुतोष ने रायपुर पहुंचने से पहले रास्ते में ही दम तोड़ दिया।


साक्ष्य मिटाने में जुटा अस्पताल प्रबंधन?

युवक की मौत के बाद जब परिजनों ने सीटी स्कैन की सीडी/फिल्म, एक्स-रे और ट्रांसफर/डेथ समरी मांगी, तो अस्पताल प्रशासन ने साफ इनकार कर दिया और केवल अधूरी केस शीट थमा दी। परिजनों का आरोप है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अस्पताल अपनी आपराधिक लापरवाही को छिपाने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड्स में हेरफेर कर रहा है।

परिजनों की जिला प्रशासन से सीधी मांग:

1. मेडिकल बोर्ड का गठन: मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेषज्ञों का निष्पक्ष मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए।

2. रिकॉर्ड्स की जब्ती: साक्ष्य मिटाने से रोकने के लिए श्री महावीर हॉस्पिटल से सीटी स्कैन, एक्स-रे और डेथ समरी के मूल दस्तावेज तुरंत जप्त किए जाएं।

3. डॉक्टरों पर आपराधिक मुकदमा: जान से खिलवाड़ करने, अवैध वसूली और साक्ष्य छिपाने के आरोप में दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर कड़ी कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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