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सरगुजा संभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के नकारेपन के कारण संभाग बन रहा अपराधियों का गढ़…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा संभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के नकारेपन के कारण सरगुजा संभाग अपराधियों का गढ़ बनते जा रहा हैं। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि बेधड़क अपराध हो रहे हैं, बेगुनाह पीस रहे हैं, कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं और यह दोनों मलाई चाटने में व्यस्त है। अपराधियों का मनोबल इतना तेज हो गया है कि उनका कहना है कि जेब में है अगर पैसे तो हो जाएगा सब काम ना होगी कोई कार्यवाही ना भुगतना होगा अंजाम।

बूझो तो जाने हम हैं कौन..??

जांच की जा रही है जांच के बाद जो भी सामने आएगा उस पर आगे की कार्यवाही की जाएगी…. यह इनका रटा हुआ डायलॉग है जो डायलॉग यह महानुभाव हर पीड़ित को देते हैं और पीड़ित के आवेदन आते ही दूसरे पक्ष से सेटलमेंट कर लेते हैं और मामले की जांच सालों साल चलते रह जाती है, लेकिन मामले का कोई निष्कर्ष नहीं निकलता और न ही जांच रिपोर्ट सामने आती हैं। यही नहीं अगर इनको कोई पत्रकार माइक सटा दें तो अपने कनिष्ठ किसी अधिकारी को फंसा देते हैं और कहते हैं कि “अरे तुमने तो गलती कर दिया तुम्हें ऐसा करना था वैसा करना था।” आगे उनका लाइन होता है देखिए हमने जांच रिपोर्ट मंगा ली है जांच रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे और आगे की कार्रवाई करेंगे। दोषियों को बक्सा नहीं जाएगा दोषियों के विरुद्ध अवश्य ही कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दे लेकिन कार्रवाई के नाम पर होता है नील बटा सन्नाटा….

एक दूसरे महानुभाव है जो हमेशा व्यस्त रहते हैं आम लोगों से मिलना इनकी फितरत में ही नहीं है अधिकारी बन गए हैं लेकिन अधिकारी से ज्यादा अपने आप को बादशाह समझते हैं। उनके यहां आवेदन जाना मतलब अनावेदक के पास जानकारी का पहुंचना सबसे पहले अनावेदक से बातें होगी सेटलमेंट होगा उसके बाद आगे की कार्रवाई तो आपको पता ही है बस जांच जारी है जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

इन दोनों ने मिलकर बना रखा है जंगल राज

यह दोनों ऐसे महानुभाव हैं जिनको अपने इज्जत की कोई फिक्र नहीं है इनका बस पैसे से मतलब है सिर्फ और सिर्फ पैसा आपको बता दे की एक और जांच रिपोर्ट आती है दूसरी और पैसे आते हैं तो यह महानुभाव जाच रिपोर्ट को दरकिनार करके पैसे को चुनते हैं और बस वही अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता। इन दोनों ने संभाग को जंगल राज बना दिया है जहां अपराधियों के हौसले काफी बुलंद है और कोई भी अपराधी अपराध करने से पहले तनिक मात्र भी नहीं डरता है। अपराधियों को खुला संरक्षण इन दोनों के द्वारा दिया गया है अपराधियों पर कार्यवाही ना होना और इन दोनों के संरक्षण के कारण अन्य लोग भी अपराधों की ओर बढ़ रहे हैं और दिन दोगुनी रात चौगुनी अपराध की घटनाओं में वृद्धि हो रही है।

तबादले का इंतजार तभी बदलेगी संभाग की तस्वीर

ज्यादा लंबा समय तो नहीं हुआ इन दोनों भ्रष्ट अधिकारियों को संभाग में आए हुए लेकिन जितने भी समय से आए हैं कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रही बल्कि सिर्फ और सिर्फ उनके जेब भर रहे हैं लंबे समय से पीड़ित इनके तबादलों का इंतजार कर रहे हैं लेकिन सरकार पता नहीं कब उनके तबादले करेंगे और तबादले के बाद ही शायद संभाग की तस्वीर बदलेगी और दोनों विभागों में कसावट आएगी शायद उसके बाद कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कुछ अपराधी मानसिकता के लोगों पर कार्रवाई हो पाएगी।

भगवान से प्रार्थना जल्द इन्हें सद्बुद्धि दें… पुरानी कहावत चूस का धन मूस खाता है… हो सकता है संभवत इनके मामलों में भी यही हो और एक दिन ऐसा आए कि जनता को चूस चूस कर इकट्ठा किया जा रहा यह धन उनके किसी काम ना आए।

शासन मेहरबान! जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में तबादला नीति बेअसर…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनने के बाद जनता को उम्मीद थी कि वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों और बाबुओं पर कार्रवाई होगी और व्यापक तबादले किए जाएंगे। लेकिन जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ की स्थिति इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यहां कर्मचारी से लेकर बाबू तक बरसों से एक ही जगह जमे हुए हैं, जबकि शासन की तबादला नीति केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।
स्थानीय आम नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों के कारण कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। विकास कार्यों में देरी, पारदर्शिता की कमी और शिकायतों का अंबार इसी का परिणाम बताया जा रहा है। बावजूद इसके अब तक किसी ठोस कार्रवाई या बड़े तबादले की पहल नहीं की गई।
सूत्रों की मानें तो कई कर्मचारी वर्षों से प्रभाव और पहुंच के चलते अपने पद पर टिके हुए हैं। शासन-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर तबादला नीति लागू क्यों नहीं हो पा रही है। जनता पूछ रही है—क्या शासन जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में मेहमान बनकर रह गया है
अब देखना होगा कि शासन इस ओर कब ध्यान देता है और कब तक जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में जमे अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई होती है, या फिर जनता की उम्मीदें यूं ही टूटती रहेगी।

किसानों की मांग पर बढ़ी धान खरीदी केंद्रों की लिमिट, विधायक मरावी व भाजपा जिला अध्यक्ष सोनी की संयुक्त पहल लाई रंग…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : जिले के विभिन्न धान खरीदी केंद्रों में धान खरीदी की लिमिट नहीं बढ़ने से किसान लंबे समय से परेशान थे। लिमिट के अभाव में किसान समय पर अपना धान नहीं बेच पा रहे थे, जिससे खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था और किसानों में असंतोष की स्थिति बनी हुई थी।

किसानों की परेशानी को देखते हुए प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी ने न केवल धान खरीदी केंद्रों का लगातार दौरा कर किसानों से सीधा संवाद किया, बल्कि विधानसभा सत्र के दौरान विभागीय मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री से मुलाकात कर धान खरीदी केंद्रों की लिमिट बढ़ाने की मांग भी मजबूती से रखी।

विधायक मरावी की मांग पर प्रभारी मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिले के  कलेक्टर को धान खरीदी केंद्रों की लिमिट तत्काल बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही विधायक मरावी ने जिला प्रशासन से निरंतर संपर्क बनाए रखते हुए किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान होगा।

इधर भाजपा जिला अध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी ने भी किसानों की समस्या को लेकर जिला कलेक्टर एवं प्रभारी मंत्री से मोबाइल के माध्यम से संपर्क किया और लिमिट बढ़ाने का आग्रह किया। जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयासों के बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए संबंधित धान खरीदी केंद्रों की लिमिट बढ़ा दी।

लिमिट बढ़ने के बाद धान खरीदी की प्रक्रिया में तेजी आई है और अब किसान बिना किसी बाधा के अपना धान बेच पा रहे हैं। व्यवस्था में सुधार से जिले के किसानों में संतोष का माहौल है। किसानों ने प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी एवं भाजपा जिला अध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका से उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान संभव हो सका।

देव कुमार गुप्ता बने भारतीय जनता युवा मोर्चा, जिला अध्यक्ष…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : भारतीय जनता पार्टी के युवा संगठन को मजबूती प्रदान करते हुए संगठन ने देव कुमार गुप्ता को भारतीय जनता युवा मोर्चा, जिला सूरजपुर का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। नियुक्ति की सूचना मिलते ही जिलेभर के युवा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। नगर में विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर खुशियां मनाईं तथा एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। देव कुमार गुप्ता लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। वे वर्ष 2020 से अब तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला मंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनके कार्यकाल के दौरान संगठनात्मक गतिविधियों को गति मिली तथा युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ी।

पूर्व संगठनात्मक दायित्व
देव कुमार गुप्ता ने वर्ष 2012 से 2016 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा, सूरजपुर शहर मंडल में प्रचार-प्रसार मंत्री के रूप में दायित्व निभाया। इसके पश्चात वर्ष 2016 से 2020 तक वे सूरजपुर शहर मंडल अध्यक्ष रहे। इन दायित्वों के दौरान उन्होंने संगठन विस्तार एवं युवाओं को जोड़ने का कार्य किया।

नवनियुक्त जिला अध्यक्ष देव कुमार गुप्ता ने अपनी नियुक्ति पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन की नीतियों एवं विचारधारा को युवाओं तक पहुंचाने के साथ-साथ पार्टी को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक मंडल एवं बूथ स्तर तक युवाओं को जोड़कर संगठन को मजबूत किया जाएगा। उनकी नियुक्ति पर भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में युवा मोर्चा जिले में नई ऊर्जा के साथ कार्य करेगा।

पत्रकार जितेंद्र का चिट्ठी बम!! और ‘मग्गू भाई’ का ऐसा ‘भौकाल’ कि सिस्टम भी शरमा जाए!!

रायपुर / बलरामपुर / विशेष व्यंग्यात्मक रिपोर्ट : अरे भाई साहब! क्या गदर मचा है बलरामपुर में! एक चिट्ठी से बम फटा है और उसके छर्रे सीधे राष्ट्रपति भवन तक उड़े हैं। मामला अपने विनोद अग्रवाल उर्फ ‘मग्गू सेठ’ का है। पत्रकार ने जो ‘लपेटे में लिया है’, कसम से पढ़ के जिगर खुश हो जाएगा।
यह कोई आम शिकायत नहीं है, यह ‘व्यंग्य का परमाणु बम’ है! पढ़िए मग्गू भाई की कई ऐसी ‘कतई जहर’ लीलाएं जो पुलिस-प्रशासन की ‘पैंट गीली’ करने के लिए काफी हैं।

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार जितेन्द्र ने सेठ जी को जिस अंदाज़ में लपेटा है, उसे पढ़कर लगता है— सच अगर व्यंग्य बन जाए, तो सत्ता को भी आईना दिखा देता है।

क्रशर कांड: मौत नहीं, मोक्ष है गुरु!

पब्लिक सोचती है कि बरियों वाले आदिवासी शिव नारायण की मौत क्रशर में दबने से हुई। अरे हटाओ यार! चिट्ठी में साफ लिखा है कि यह तो बंदे का ‘सौभाग्य’ था। 
उसने मरने के लिए मग्गू सेठ का ही क्रशर चुना, इसे ‘आत्महत्या’ या हादसा बोलना पुलिस की नासमझी है।
भाई के क्रशर में जान देना मतलब सीधा स्वर्ग का टिकट! पुलिस फालतू में केस-वेस का लोड ले रही है।

सबूतों का क्या? अरे, पूरा ऑफिस ही ‘फूंक’ डाला!

भाई का गेम देखो, एकदम ओपी (OP) लेवल! खनिज विभाग में करोड़ों का घोटाला हुआ तो टेंशन नहीं ली।
सबूत छुपाने के लिए फाइल-वाइल नहीं गायब की, सीधे बलरामपुर खनिज ऑफिस में ही आग लगवा दी। 
पत्रकार लिखता है कि सरकारी फाइलों को ‘अग्नि को समर्पित’ करना अपराध नहीं, बल्कि एक पवित्र ‘यज्ञ’ है। सबूतों का ऐसा हवन किया कि राख भी नहीं मिली!

पुलिस ‘लुका-छिपी’ खेल रही, सेठ जी घर में ‘पार्टी’ कर रहे!
इसे कहते हैं असली स्वैग (Swag)! पुलिस का कहना है कि मग्गू सेठ और उनका भाई प्रवीण अग्रवाल ‘फरार’ हैं।
लेकिन अंदर की खबर यह है कि ये दोनों ‘वांटेड’ मुजरिम जून/जुलाई 2025 में अपने ही घर में शादी की सालगिरह मना रहे थे और दावत उड़ा रहे थे। 
पुलिस बेचारी देश-विदेश में ढूंढ रही है और भाई घर पर बिरयानी पेल रहे हैं। इसे कहते हैं पुलिस और अपराधी का ‘अटूट लव’।

मुफ्त ‘मुक्ति धाम’ (मौत का कुआं)

भाई की समाजसेवा तो देखिए— मवेशियों और इंसानों दोनों के लिए गहरे कुएं खुदवाए गए हैं, जिनकी गहराई इंची टेप भी न नाप सके।
मवेशी गिरकर मर जाएं, इंसान फांसी लगाकर आत्महत्या कर लें—तो इसे हादसा मत कहिए, यह सेठ जी द्वारा दी गई निःशुल्क अंतिम यात्रा सुविधा है। कितने महान विचार हैं गुरु!

आदिवासियों का ‘कल्याण’ — जमीन हड़प योजना!
भाई ने आदिवासियों की जमीन हड़पकर ऐसा पुण्य कमाया है कि धर्मराज भी कन्फ्यूज हों जाए!
कमला देवी (पति रीझन) जैसी कई आदिवासी महिला-पुरुष के नाम पर बेनामी संपत्ति— ताकि उनका नाम इतिहास में दर्ज हो जाए।
पहाड़ी कोरवाओं की जमीन छीनी जा रही है ताकि उन्हें “वापस जंगल भेजा जा सके”— क्योंकि शहर की गंदी हवा उन्हें सूट नहीं करती।
वाह! विकास हो तो ऐसा।

पत्रकारिता का ‘शुद्धिकरण’

77 साल की आज़ादी के बाद भी पत्रकार सुरक्षा कानून नहीं बना— और इसी कमी का सबसे सुंदर उपयोग मग्गू सेठ जैसे लोग कर रहे हैं।
जो पत्रकार सेठ जी की महिमा नहीं गाता, उसे भाई साहब अपने नेटवर्क और स्थानीय पुलिस के सहयोग से झूठे केस में जेल भिजवा देते हैं।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को तिजोरी के नीचे दबाकर रखना उनका शौक है— और पुलिस का सराहनीय सहयोग। भाई का स्वैग ही अलग है।

रोज़गार सृजन का ‘अद्वितीय मॉडल’

भाई द्वारा संचालित सरगुजा संभाग का सबसे बड़ा खनन संस्थान— महामाया स्टोन क्रशर—
सेठ जी के फरार होने पर सील हुआ, लेकिन कलेक्टर और खनिज विभाग की दूरगामी दया दृष्टि से फिर चालू हो गया।
यह है कानून-मुक्त रोज़गार मॉडल।
पत्रकार ने तो निवेदन किया है ऐसे क्रशर पूरे छत्तीसगढ़ में खोले जाएं ताकि युवाओं को नियमों से मुक्त रोजगार मिले और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना साकार हो।

क्राइम कुंडली ऐसी कि यमराज भी कन्फ्यूज

2009 से 2025 तक थाना राजपुर और बरियों में मुकदमों की कतार—

2020: गैर-इरादतन हत्या (304-II)
2015: अपहरण (365, 342)
बलवा, मारपीट, गाली-गलौज — रोज़ का नाश्ता

सिस्टम का ‘मोय-मोय’

पत्र का सार बिल्कुल साफ है—
“राजा राज करेगा और जुल्म बार-बार करेगा।”
इसलिए जनहित (यानी सेठ-हित) में निवेदन है कि:
राजस्व, खनिज और प्रशासन के सभी अधिकारियों को राष्ट्रीय सम्मान दिया जाए, वेतन 100% बढ़ाया जाए।
मग्गू सेठ और प्रवीण अग्रवाल पर लगे सभी आरोप तत्काल खारिज किए जाएं।
उल्टा, शिकायत करने वाले आदिवासियों और पत्रकारों को गिरफ्तार किया जाए।

जो पुलिसकर्मी गलती से भी सेठ जी पर कार्रवाई सोचें, उन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाए— ताकि ‘सुविधा शुल्क’ निर्बाध चलता रहे।
और अंत में पत्रकार ने भारत के राष्ट्रपति जी से निवेदन किया है कि महोदया, आप इस “व्यंग्यात्मक सत्य” को समझेंगी।

अब देखना यह है कि दिल्ली वाला सिस्टम इस लोकल डॉन की हेकड़ी निकालता है, या फिर यह फाइल भी ठंडे बस्ते में मोक्ष पा जाती है।

सूरजपुर: बाघ की मौत पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर सरकार और वन विभाग को जारी किया नोटिस…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में स्थित तमोर पिंगला अभयारण्य में एक बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब कानूनी तूल पकड़ लिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और वन विभाग के आला अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायालय ने जताई गहरी चिंता
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि प्रदेश में राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा में चूक एक गंभीर विषय है। कोर्ट ने इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज करते हुए निम्नलिखित पक्षों से जवाब मांगा है:
* प्रमुख सचिव (वन विभाग)
* प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF – वन्यजीव)
* सूरजपुर वन मंडल के संबंधित अधिकारी


क्या है पूरा मामला?
दो दिन पूर्व 15 दिसंबर को सूरजपुर के तमोर पिंगला अभयारण्य क्षेत्र में एक बाघ का शव बरामद हुआ था। शुरुआती जांच में बाघ के अंगों के साथ छेड़छाड़ और संदिग्ध परिस्थितियों ने शिकार की ओर इशारा किया था। हालांकि वन विभाग ने जांच की बात कही थी, लेकिन कोर्ट ने विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए हैं।


जारी नोटिस के मुख्य बिंदु:


* पोस्टमार्टम रिपोर्ट : कोर्ट ने बाघ की मौत का सटीक कारण और विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
* सुरक्षा ऑडिट: अभयारण्य में तैनात कर्मचारियों की संख्या और गश्त (Patrolling) की मॉनिटरिंग कैसे की जा रही है, इसका ब्यौरा मांगा गया है।
* लापरवाही पर कार्रवाई: घटना के समय तैनात जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।


“वन्यजीवों का संरक्षण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि संरक्षित क्षेत्रों में भी बाघ सुरक्षित नहीं हैं, तो यह तंत्र की विफलता है।” – हाइकोर्ट की मौखिक टिप्पणी



आगे क्या होगा?

वन विभाग को अब एक निश्चित समय सीमा के भीतर कोर्ट में अपना शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट बाघों के संरक्षण के लिए कुछ कड़े दिशा-निर्देश भी जारी कर सकता है।

भालू तो पकड़ा गया, मगर अब सवाल डीएफओ पर कार्यवाही कब…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : तीन महीने तक मनेंद्रगढ़ शहर के क्षेत्रों में दहशत का कारण बने भालू को आखिरकार पकड़ लिया गया लेकिन इस पूरी घटना के बाद    वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि भालू तो पकड़ में आ गया, मगर अब इससे भी बड़ी जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
आरोप है कि पिछले तीन महीनों तक डीएफओ द्वारा न तो कोई ठोस पहल की गई और न ही भालू को पकड़ने के लिए प्रभावी रणनीति बनाई गई। न विभागीय बैठक बुलाई गई, न ही कर्मचारियों-अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए। परिणामस्वरूप आम जनता भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर रही।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित नहीं हुईं, तब तक वन विभाग सक्रिय नहीं हुआ। हिंद स्वराज पेपर में खबर प्रकाशित होने के बाद 24 घंटे के भीतर भालू को पकड़ लिया गया, जिससे विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं
  और डीएफओ के तबादले की मांग । प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है, जिसकी कीमत जनता ने डर और असुविधा झेलकर चुकाई।
जनता और सामाजिक संगठनों की मांग है कि शासन अब इस मामले को गंभीरता से ले और डीएफओ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही समय पर निर्णय न लेने वाले अधिकारियों का तबादला किया जाए, ताकि भविष्य में वन्यजीवों से जुड़ी ऐसी घटनाएं “तमाशा” न बनें।
लोगों का कहना है कि शासन को दो साल होने जा रहे हैं, अब वास्तविक बदलाव नजर आना चाहिए। जिम्मेदारी तय होगी तभी व्यवस्था सुधरेगी और आगे से किसी भालू या अन्य वन्यजीव को लेकर जनता को इस तरह परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

खबर का असर: हिंद स्वराष्ट्र में खबर छपते ही 24 घंटे के भीतर पकड़ा गया भालू…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : मनेंद्रगढ़ शहर में पिछले तीन महीनों से भालू की दहशत से लोग भयभीत थे। शहर के विभिन्न वार्डों में भालू की लगातार आवाजाही से आमजन में डर का माहौल बना हुआ था। इस दौरान वन विभाग की टीमें भालू को पकड़ने के प्रयास में लगी रहीं, अन्य अखबारों में भी लगातार खबरें प्रकाशित होती रहीं, लेकिन न तो भालू पकड़ा जा सका और न ही जिम्मेदार अधिकारियों डीएफओ व रेंजर पर कोई कार्रवाई या तबादला हुआ।
स्थानीय नागरिकों द्वारा कई बार धरना-प्रदर्शन किए गए। बताया गया कि भालू को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उचित स्थान पर छोड़ने के लिए वन विभाग के पांच डिवीजन तक सक्रिय थे, फिर भी लंबे समय तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली।
आखिरकार हिंद स्वराष्ट्र समाचार पत्र में मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया। खबर प्रकाशित होने के महज 24 घंटे के भीतर वन विभाग की टीम ने भालू को पकड़ लिया। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली और शहर में सामान्य स्थिति बहाल हुई।


स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पहले ही गंभीरता दिखाई जाती, तो महीनों तक लोगों को भय में नहीं रहना पड़ता। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मीडिया की भूमिका प्रशासन को जवाबदेह बनाने में अहम है और समय पर उठाई गई आवाज से ही परिणाम सामने आते हैं।

सरगुजा कलेक्टर समेत 11 IAS अधिकारियों के तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर :सरगुजा जिले के कलेक्टर भोसकर विलास संदीपान समेत 11 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। अजीत बंसल को सरगुजा जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया हैं।

देखें आदेश :

भालू के आतंक पर सियासत गरम, फिर भी नहीं हटें डीएफओ–रेंजर,, मनेंद्रगढ़ वन मंडल को किसका  संरक्षण? उठ रहे गंभीर सवाल….

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : वन मंडल मनेंद्रगढ़ में डीएफओ और संबंधित रेंजर को हटाने के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों ने हर संभव प्रयास किए, लेकिन अब तक शासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है। इससे यह सवाल लगातार गहराता जा रहा है कि आखिर डीएफओ और रेंजर के ऊपर किसका संरक्षण है, जो इतने बड़े जनआक्रोश के बावजूद वे अपने पद पर बने हुए हैं।
बताया जा रहा है कि बीते तीन महीनों से मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में भालू का आतंक बना हुआ है। गांवों और आसपास के इलाकों में भालू के हमलों से दहशत का माहौल है। इस दौरान कई नगर के वार्डों में  भालू ने हमला किया, जिनमें अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से न तो समय पर ठोस कदम उठाए गए और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई।
हालात तब और बिगड़ गए जब सत्ता पक्ष की चुप्पी के बाद विपक्ष ने मोर्चा संभाला। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
डीएफओ कार्यालय का घेराव
रेंजर कार्यालय का घेराव
थाने में धरना-प्रदर्शन
जैसी कई बड़ी कार्रवाइयाँ की गईं।
इसके बावजूद भी शासन स्तर पर डीएफओ और रेंजर को हटाने में विफलता सामने आई है। स्थानीय जनता और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि जब इतने लंबे समय से भालू के हमले जारी हैं और प्रशासनिक लापरवाही स्पष्ट है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
नगर वीडियोका कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग ने प्रभावी कदम उठाए होते, तो इतने हमले नहीं होते। अब जनता में रोष बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

घुई रेंज में बाघ का मिला शव, दांत और नाखून गायब, बाघ की मौजूदगी को ट्रेस करने में भी नाकाम रही वन विभाग की टीम…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सूरजपुर जिले के घुई रेंज में एक बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई हैं। बाघ के शरीर पर चोटों के निशान मिले हैं। बाघ के शव से दांत और नाखून गायब हैं। आशंका जताई जा रही है कि बाघ शिकारियों द्वारा फैलाए गए जाल में फंस गया होगा। टाइगर रिजर्व में टाइगर की मौत और उसकी उपस्थिति की जानकारी वन विभाग को ना होना लापरवाही को उजागर करता है और वन विभाग के कार्य प्रणाली पर पड़े प्रश्न चिन्ह खड़े कर रहा है।


दरअसल गुरु घासीदास-तमोर-पिंगला टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले घुई रेंज में आज सुबह एक बाघ का शव ग्रामीणों ने देखा और इसकी सूचना वन विभाग को दी। बाघ के दांत और नाखून मौके से गायब मिले हैं। आशंका है कि ग्रामीणों द्वारा शिकार के लिए लगाए गए फंदे में बाघ फंस गया था, जिससे उसकी मौत हो गई होगी और मौत के बाद शिकारियों ने उसके दांत और नाखून निकाल लिए होंगे। हालांकि इस मामले में वन विभाग के अधिकारी अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इस मामले में अब तक आधिकारिक रूप से कोई भी बयान सामने  नहीं आया है। इससे पूर्व भी वन परिक्षेत्र अधिकारी पर रेंज से बाहर रहने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन विभाग द्वारा इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया जिसका खामियाजा भारत के राष्ट्रीय पशु बाघ की मौत से चुकाना पड़ रहा है।

बाघ की मौजूदगी की खबर शिकारी को तो हुई पर वन विभाग को नहीं मिली

उल्लेखनीय हैं कि घुई वन परिक्षेत्र का एक बड़ा इलाका गुरु घासीदास-तमोर-पिंगला टाइगर रिजर्व में शामिल किया गया है। यहां बाघों की आवाजाही पहले भी होती रही है। जिस बाघ की मौत हुई है, वह वन विभाग द्वारा ट्रेस नहीं किया गया था। वन परिक्षेत्र में बाघ दिनदहाड़े घूम रहा था इसकी जानकारी वन विभाग को ना होना बहुत बड़ी लापरवाही को उजागर कर रही है।  कयास लग रहे हैं कि बाघ वाड्रफनगर या बिहारपुर वन परिक्षेत्र से होकर घुई रेंज में पहुंचा था। बाघ की उपस्थिति और बाघ कहां से कैसे और कब इस क्षेत्र में पहुंचा इसकी जानकारी वन विभाग को नहीं है। टाइगर रिजर्व में टाइगर की मौत काफी बड़े लापरवाही को दर्शा रही हैं।

फिलहाल वनविभाग के अधिकारियों द्वारा बाघ का पोस्टमॉर्टम पशु चिकित्सकों की टीम से कराया हैं और पोस्टमॉर्टम के बाद बाघ के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया हैं।

जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में वर्षों से जमे अधिकारी–कर्मचारी, तबादलों की उम्मीद पर फिरता पानी…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक आज भी अपनी कुर्सियों पर जमे हुए हैं। स्थानीय जनता में यह चर्चा आम है कि कुछ बाबू और अधिकारी “अजगर की तरह” वर्षों से एक ही जगह कुंडली मारकर बैठे हैं, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है।
छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद आम जनता को उम्मीद थी कि विभागों में लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला किया जाएगा, ताकि नई कार्यसंस्कृति और निष्पक्ष प्रशासन स्थापित हो सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, जनपद पंचायत में कई ऐसे कर्मचारी और अधिकारी हैं जो बरसों से एक ही जगह पदस्थ हैं। इससे न केवल भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ती हैं, बल्कि आम नागरिकों के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “पुराने चेहरे” ही फैसले लेते हैं और आम जनता की समस्याएं वहीं की वहीं रह जाती हैं।
जनता अब शासन और जिला प्रशासन से मांग कर रही है कि जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची बनाकर शीघ्र तबादला किया जाए, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता आए और विकास कार्यों को गति मिल सके।
अब देखना यह होगा कि जनता की इस आवाज़ पर शासन–प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है, या फिर ये अधिकारी–कर्मचारी यूं ही वर्षों तक एक ही जगह जमे रहेंगे।

प्राइवेट गाड़ियों में ‘छत्तीसगढ़ शासन’ लिखकर अधिकारी-कर्मचारी कर रहे पद का दुरुपयोग…!

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : जिले में सरकारी रौब दिखाने के लिए कुछ अधिकारी और कर्मचारी प्राइवेट वाहनों पर “छत्तीसगढ़ शासन” लिखकर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह न केवल मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता और प्रशासन दोनों को भ्रमित करने वाला गंभीर मामला भी है।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि कई बार ऐसे वाहन सड़क पर बेतरतीब तरीके से चलते हैं, ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते और “सरकारी” लिखे होने का फायदा उठाकर जांच से बचने की कोशिश करते हैं।
जनता का कहना है कि “सरकारी दर्जा लेने के लिए या दबाव बनाने के लिए अधिकारी-कर्मचारी निजी गाड़ियों पर शासन लिखाते हैं, जो सीधा-सीधा पद का दुरुपयोग है।”
प्रशासन से सख्ती की मांग
स्थानीय सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने जिला प्रशासन से ऐसे वाहनों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

अम्बिकापुर में भूमि की नई गाइडलाइन दरें लागू : वैज्ञानिक युक्तिकरण से बाजार मूल्य के अनुरूप निर्धारण, किसानों और आमजन को होगा लाभ…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ में भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य को प्रतिबिंबित करने और वर्षों से चली आ रही विसंगतियों को दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 की नई गाइडलाइन दरें लागू कर दी गई हैं। “छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000” के प्रावधानों के तहत उप जिला एवं जिला मूल्यांकन समितियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर स्थावर संपत्तियों के बाजार मूल्य निर्धारण से संबंधित इन दरों को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड, छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। नई गाइडलाइन दरें दिनांक 20 नवंबर 2025 से पूरे राज्य में प्रभावशील हो चुकी हैं।
वर्ष 2019-20 के बाद लगभग छह वर्षों के अंतराल पर गाइडलाइन दरों का यह व्यापक पुनरीक्षण किया गया है। इस अवधि में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों के बीच उल्लेखनीय अंतर उत्पन्न हो गया था। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए वैज्ञानिक, तथ्यपरक और तुलनात्मक पद्धति अपनाते हुए नई दरें निर्धारित की गई हैं। इसका उद्देश्य भूमि के वास्तविक मूल्य को सामने लाना, संपत्ति लेन-देन को पारदर्शी बनाना तथा किसानों और आम नागरिकों को उनकी संपत्ति का उचित मूल्य सुनिश्चित कराना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2025-26 की गाइडलाइन दरों में मुख्य मार्ग पर औसतन 108 प्रतिशत तथा मुख्य मार्ग से अंदर स्थित भूमि पर औसतन 120 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरगुजा जिले में ऐसे 16 ग्राम हैं, जहां मुख्य मार्ग की हेक्टेयर दर में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि परिलक्षित हो रही है। इसका मुख्य कारण एक ही मार्ग से जुड़े समीपस्थ ग्रामों की दरों का युक्तियुक्तकरण है। जिन ग्रामों की पूर्व दरें अत्यंत कम थीं, वहां संतुलन स्थापित करने के कारण अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि दिखाई दे रही है।
उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2019-20 की गाइडलाइन के अनुसार सरगुजा जिले के ग्राम झिरमिटी में मुख्य मार्ग की दर 11 लाख 67 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर थी, जबकि समीप स्थित ग्राम उदयपुर में यह दर 20 लाख 19 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित थी। दोनों ग्राम राष्ट्रीय राजमार्ग-143 के आमने-सामने स्थित हैं। दरों के युक्तियुक्तकरण के बाद झिरमिटी का मुख्य मार्ग दर 20 लाख 19 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तय किया गया, जिससे वहां 587 प्रतिशत की वृद्धि परिलक्षित हुई, जबकि उदयपुर में 297 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि अधिक वृद्धि का कारण कम आधार दरों को समान स्तर पर लाना है।
इसी तरह ग्राम सायरराई में मुख्य मार्ग की दर में 824 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह ग्राम विकसित क्षेत्र में स्थित है और विशेष ग्राम रघुनाथपुर से लगा हुआ है। पूर्व में यहां वर्गमीटर दर लागू होने के कारण राजस्व की हानि हो रही थी। हेक्टेयर दर लागू किए जाने और अधिक क्रय-विक्रय गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए दरों का युक्तियुक्तकरण आवश्यक हो गया था। ग्राम किशुननगर के उदाहरण से यह भी स्पष्ट होता है कि नई गाइडलाइन लागू होने के बाद भी शासन को अपेक्षाकृत कम राजस्व प्राप्त हो रहा है, जिससे यह सिद्ध होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में की गई वृद्धि तार्किक और न्यायसंगत है।
शहरी क्षेत्रों में भी गाइडलाइन दरों का व्यापक पुनरीक्षण किया गया है। नगर निगम अंबिकापुर के 48 वार्डों में मुख्य मार्ग पर औसतन 26 प्रतिशत तथा मुख्य मार्ग से अंदर औसतन 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पिछले पांच वर्षों में जनसंख्या वृद्धि, आवासीय भूखंडों की बढ़ती मांग और विकास कार्यों के विस्तार के कारण नगर निगम क्षेत्र में बाजार मूल्य में स्वाभाविक बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2019-20 की गाइडलाइन में कई क्षेत्रों को अन्य श्रेणी में दर्शाया गया था, जो वर्तमान में पूर्णतः आवासीय क्षेत्रों में परिवर्तित हो चुके हैं। इन्हें समाप्त कर संबंधित वार्डों की दरों से युक्तियुक्तकरण किया गया है, जिससे कुछ वार्डों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि वर्तमान दरें अभी भी सर्वे आधारित बाजार दरों से कम बनी हुई हैं।
नगर निगम अंबिकापुर के वार्ड क्रमांक 02 गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर वार्ड की एक कंडिका में 69 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, क्योंकि पूर्व गाइडलाइन में यहां की दर अत्यंत कम थी। वर्ष 2025-26 की गाइडलाइन में इसे बढ़ाकर 560 रुपये प्रति वर्गफुट किया गया है। इसी प्रकार कुछ अन्य वार्डों में 40 से 70 प्रतिशत तक की वृद्धि कंडिकाओं के सरलीकरण, दरों के युक्तियुक्तकरण तथा क्षेत्रों के विकसित और व्यवसायिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए की गई है।
नगर निगम क्षेत्र में शामिल ग्राम गंगापुर, नवागढ़ और बिशुनपुर की पूर्व हेक्टेयर दरें आसपास के ग्रामों की तुलना में काफी कम थीं। वर्ष 2025-26 की गाइडलाइन में इन्हें बढ़ाकर 1 करोड़ 10 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर किया गया है, जो लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इसके साथ ही पेरी-अर्बन ग्रामों में वर्गमीटर दर समाप्त कर हेक्टेयर दर लागू की गई है। निर्देशानुसार नगर निगम क्षेत्र से लगे ग्रामों की हेक्टेयर दर पेरी-अर्बन ग्रामों से कम नहीं होनी चाहिए, इसी कारण कुछ ग्रामों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
नई गाइडलाइन दरें पंजीयन अधिकारियों द्वारा विस्तृत परीक्षण, विश्लेषण और तुलनात्मक अध्ययन के बाद निर्धारित की गई हैं। इनका उद्देश्य किसानों और आम जनता को उनकी भूमि एवं संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य दिलाना, भूमि लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना तथा बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों के बीच लंबे समय से बने अंतर को कम करना है। शासन का विश्वास है कि यह नई व्यवस्था आम जनता के हित में है और राज्य के संतुलित तथा समावेशी विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान करेगी।

लांजित में मिनी फुटबॉल टूर्नामेंट का भव्य समापन, कोढापुरूवा ने खिताब जीता…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/ओढ़गी : ग्राम पंचायत लांजित में पिछले एक सप्ताह से आयोजित ग्राम स्तरीय मिनी फुटबॉल टूर्नामेंट का आज रोमांचक समापन हुआ। फाइनल मुकाबला लांजित खोहपारा और कोढापुरूवा की टीमों के बीच खेला गया, जिसमें कोढापुरूवा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 1–0 से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया।

फाइनल मैच के अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच धरम सिंह आयम ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि
“खेल हमें अनुशासन, टीमवर्क और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का संदेश देता है। गांव के युवा खेल के माध्यम से आगे बढ़ें, यह हम सबकी जिम्मेदारी है।”

इस आयोजन में गांव के युवाओं और ग्राम प्रतिनिधि ग्रामवासियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा जिससे पुरे मैच में आदेश्वर गुर्जर लेफरी का  महत्वपूर्ण भुमिका रहा युवाओं की मेहनत, अनुशासन और लगन से टूर्नामेंट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पूरे सप्ताह खिलाड़ियों और दर्शकों में खेल के प्रति खास उत्साह देखने को मिला।

अंत में विजेता टीम को ट्रॉफी प्रदान की गई और रनर-अप टीम को भी सम्मानित किया गया। ग्रामवासियों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे खेल आयोजन गांव में ऊर्जा और एकता को मजबूत करते हैं।

मित्तल कोल्ड स्टोरेज के लापरवाही ने ले ली तीन मजदूरों की जान स्टोरेज की दीवार गिरने से हुई मौत…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : जिले के नैनपुर स्थित मित्तल राइस मिल (एवं कोल्ड स्टोरेज) में आज सुबह करीब 10 बजे एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया। मिल परिसर में अचानक दीवार गिरने से तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया।
इस हादसे में मृतकों की पहचान
होल सिंह (30 वर्ष),
माने राजवाड़े (28 वर्ष) तथा
वेद सिंह (45 वर्ष) के रूप में हुई है।
वहीं सुरेंद्र सिंह (25 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है। तीनों मृतक एवं घायल मजदूर सूरजपुर जिले के निवासी हैं।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ हैं। मिल में मौजूद अन्य कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने घायलों को मलबे से बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मृतकों के शवों को परिजनों की उपस्थिति में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

इसी बीच राइस मिल के अन्य कर्मचारियों से मिली जानकारी ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि राइस मिल में शासन द्वारा निर्धारित किसी भी सुरक्षा गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा था।

यह भी बताया गया कि राइस मिल संचालक की ओर से मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए थे, जिसके चलते यह हादसा और भी गंभीर बन गया।

घटना के बाद मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा हैं। स्थिति को नियंत्रित रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस बल मौके पर मुस्तैद हैं।

सूरजपुर जिले के सभी थानों और चौकियों का पुलिस बल घटनास्थल पर तैनात किया गया हैं।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर, कलेक्टर एस. जयवर्धन, साथ ही सूरजपुर एसडीएम शिवानी जायसवाल, तहसीलदार सूर्यकांत साय एवं अन्य जिला प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे।

वही स्थानीय सरपंच पति (सुखल सिंह) एवं परिवार जनों का कहना है कि इस मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जानी चाहिए तथा जो भी इस घटना का जिम्मेदार होता है उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, वही परिवारजन उचित मुआवजे की मांग करते हुए यह भी कहा कि अगर मुआवजे की राशि समय पर उन्हें नहीं दिया जाता है तो वह उग्र आंदोलन करने को बाधित होंगे।

प्रशासन की प्रारंभिक जांच में दीवार के जर्जर और कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं अब यह भी जांच का विषय है कि राइस मिल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई या नहीं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद यदि राइस मिल संचालक की लापरवाही पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मूक बधिर विद्यालय का मामला फिर गरमाया, जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाकर शिवसेना ने दिया ज्ञापन…             

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : ज्ञानोदय मुखबधिर विद्यालय विश्रामपुर का मामला थमने का नाम नही ले रहा है।पहले जहां इस विद्यायल के प्रबंधन पर विद्यालय परिसर में दिव्यांगों बच्चों से मजदूरी कराने के साथ कई आरोप लग चूके है और बच्चों से काम कराने का वीडियो भी वारयल हुआ था जिसपर कई विभागों की जांच जारी है। वहीं अब विद्यायल के संचालक पर धमकी देने सहित गुंडागर्दी कराने के गम्भीर आरोप लगे है। दरअसल बिते दिनों जिले के बिश्रामपुर क्षेत्र में संचालित ज्ञानोदय मुकबधिर विद्यालय में मुकबधिर बच्चों का काम करते व पेड़ काटने का कार्य करते हुए विडियो वायरल हुआ था। जिसको लेकर कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा श्रम व बाल संरक्षण विभाग के द्वारा मामले में जांच कि जा रही है। वही बच्चों से श्रम कराये जाने के मामले में जांच व मुकबधिर स्कूल के संचालन के संबंध में जांच हेतु शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) गुट के द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन सौंप मामले में जांच व कार्यवाही की मांग की गई थी।जिसके बाद आज शिवसेना के जिला अध्यक्ष विष्णु वैष्णव अपने समर्थकों के साथ आज पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे और उन्होंने ज्ञानोदय मुकबधिर विद्यालय के संचालक विजयराज अग्रवाल के ऊपर उनकी अनुपस्थिति में घर पर गुर्गों को भेज उनकी पत्नी को धमकाने सहित मामले से दुर रहने नसीहत देने के गम्भीर आरोप लगाए है। जिससे नाराज सैकड़ों की संख्या में शिव सैनिक उग्र रूप दिखाते हुए आज सँयुक्त कार्यालय पहुँचे और उन्होंने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंप मामले में कार्यवाही करने की मांग की साथ ही उन्होंने किसी शिव सैनिक के उपर कुछ भी घटना घटित होने पर  ज्ञानोदय मुकबधिर विद्यालय के संचालक विजयराज अग्रवाल से जोड़ने की बात कही और यदि 15 दिवस में संबंधित पर कार्यवाही नहीं होने पर आंदोलन और धरना प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है। वहीं  पुलिस शिकायत के बाद अब  मामले में जांच कर उचित कार्यवाही करने की बात कर रही है। 

ज्ञापन सौपनें वालों में शिवसेना जिला प्रमुख विष्णु वैष्णव, महिला जिलाध्यक्ष पिंकी पटेल, प्रेमनगर ग्रामीण जिला प्रमुख हेमंत महंत, जिला सचिव डॉ.आर एस , नगर प्रमुख सूरजपुर साहिल, ब्लॉक प्रमुख सूरजपुर मोहन सिंह टेकाम, जिला प्रवक्ता मनेश दिवेदी, गौतम कुमार, रजनी सिंह, कौशल्या राजवाड़े, बालकुंवर, कलावती, अनिता अन्य शिवसैनिकगण शामिल रहे।

जनपद पंचायत सीईओ निलेश सोनी पर मनमानी व अवैध वसूली के गंभीर आरोप, सरपंच संघ ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : ओडगी जनपद पंचायत के प्रभारी सीईओ निलेश सोनी पर फिर गंभीर आरोप लगे हैं। सरपंच संघ का कहना है कि जनपद सीईओ सचिवों पर दबाव बनाकर फर्जी बिलों के नाम पर प्रत्येक पंचायत से 5800 रुपये की अनिवार्य वसूली कर रहे हैं। न प्रस्ताव, न ग्रामसभा, न अनुमोदन—सीधे फरमान और पैसा न देने पर कार्रवाई की धमकी।


5%–10% कमीशन की मांग से विकास कार्य ठप, भय का माहौल

संघ के अनुसार जनपद स्तर पर स्वीकृत होने वाले कार्यों में 5% से 10% तक कमीशन की मांग की जा रही है। इससे पंचायतों में विकास कार्य बंद हो गए हैं, शासन की योजनाएँ जमीन पर लागू नहीं हो पा रही हैं और ग्राम पंचायतों में भय, असंतोष और दबाव का वातावरण बन गया है।


पंचायतों के अधिकारों को कुचलने का आरोप – सरपंचों की शक्ति पर हमला

सरपंचों ने कहा कि पहले ही पंचायतों को पर्याप्त बजट नहीं मिल रहा। ऊपर से इस तरह की वसूली और तुगलकी आदेशों ने व्यवस्था चरमराकर रख दी है। पंचायत राज अधिनियम के अनुसार ग्राम सरकार का प्रमुख सरपंच होता है, लेकिन सीईओ द्वारा जारी आदेशों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नगण्य किया जा रहा है।


सरपंच संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा निष्पक्ष जांच की मांग

सरपंच संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर मांग की है कि कमीशन मांग, वसूली और दबाव की सभी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए। बजट का समय पर वितरण और पंचायत कार्यों में सरपंचों की सहमति अनिवार्य की जाए। संघ ने उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच की मांग की है।


पुराने विवाद फिर उभरे प्रेमनगर रीपा घोटाले का जिक्र

जनपद सीईओ निलेश सोनी पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। प्रेमनगर जनपद में पदस्थ रहने के दौरान रीपा योजना में भारी गड़बड़ी, गांव वृंदावन का कार्य छीनकर राजनीतिक संरक्षण में दूसरे व्यक्ति को दिलाना और लगभग 15 लाख रुपये का अधिक भुगतान कराने का आरोप आज भी चर्चाओं में है। मुख्य सचिव ने जांच का आदेश दिया था, परंतु जांच अधिकारी ने लीपापोती कर दी। बाद में कलेक्टर ने सरपंच, सचिव, ठेकेदार पर अपराध दर्ज कराया, लेकिन सीईओ सोनी पर कार्रवाई नहीं हुई। करीब एक वर्ष तक इन्हें जिला पंचायत में अटैच रखा गया था।


ओडगी आते ही नया तुगलकी आदेश  बैंक से राशि आहरण के लिए सीईओ अनुमति अनिवार्य

ओडगी विकासखंड का प्रभार मिलते ही श्री सोनी ने एक नया विवादित आदेश जारी कर दिया। इसमें ग्राम पंचायतों के बैंक खाते से राशि निकालने के लिए सीईओ की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। पंचायत राज में यह आदेश सीधे-सीधे ग्राम सरकार की स्वायत्तता पर हमला माना जा रहा है और इसे भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप देने की कोशिश बताया जा रहा है।


हमर उत्थान सेवा समिति की कड़ी आपत्ति भ्रष्टाचार को वैध बनाने की कोशिश अस्वीकार्य

हमर उत्थान सेवा समिति ने इस पूरे प्रकरण को लोकतांत्रिक पंचायत व्यवस्था पर सीधा प्रहार बताया है। समिति ने तीखी आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त स्थानीय सरकार हैं, और किसी भी अधिकारी को उनके अधिकार व बजट पर अवैध कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
समिति ने कहा कि 5800 रुपये की जबरन वसूली, कमीशन मांग, फर्जी बिल, और बैंक अनुमति आदेश ये सब गंभीर भ्रष्टाचार के संकेत हैं, जिनकी तत्काल उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।

प्रशासन की चुप्पी भी सवालों में जनपद में स्थिति विस्फोटक

लगातार बढ़ते आरोप, सरपंचों का रोष, सीईओ के पिछले रिकॉर्ड और तुगलकी आदेश इन सबके बाद भी प्रशासन की चुप्पी जनपद में सवालों का बड़ा विषय बन गई है। पंचायतों ने पूछा है कि आखिर कब तक जनपद पंचायत का संचालन मनमानी और अवैध वसूली से चलता रहेगा।

एक साथ अचानक बेहोश हुई स्कूल की 11 छात्राएं, आनन–फानन में अस्पताल में कराया गया भर्ती…

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : बलरामपुर–रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत शासकीय हाईस्कूल में परीक्षा के बाद निकलीं 11 छात्राएं अचानक बेहोश हो कर गिर गईं। इनमें से 8 छात्राओं की हालत गंभीर बताई जा रही है। इन्हें वाड्रफनगर सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। जांच में छात्राओं के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी पाई गई है। उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। उन्हें रातभर डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

मिली जानकारी के अनुसार वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत शासकीय हाईस्कूल मनबासा में इन दिनों परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। गुरुवार को हाईस्कूल की छात्राओं ने परीक्षा दी। परीक्षा के बाद अचानक 11 छात्राएं चक्कर खाकर स्कूल परिसर में ही जमीन पर गिर पड़ीं और बेहोश हो गईं। इसके बाद आनन-फानन में शिक्षकों व ग्रामीणों द्वारा उन्हें वाड्रफनगर अस्पताल में लाकर भर्ती कराया गया। इनमें से 8 छात्राओं की हालत गंभीर बताई जा रही है। हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद देर शाम को उनकी हालत में सुधार की बात कही जा रही है। फिलहाल भर्ती सभी छात्राओं को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

इस मामले में वाड्रफनगर बीएमओ डॉ. हेमंत दीक्षित का कहना है कि 8 छात्राओं को स्कूल से लाकर भर्ती कराया गया है। जांच में छात्राओं में हीमोग्लोबिन की कमी पाई गई है। इसी वजह से एग्जाम के दौरान उन्हें चक्कर आ गया था। सभी को रातभर डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा। सभी की हालत खतरे से बाहर है।

पुलिस आरक्षक भर्ती में चौथा स्थान प्राप्त कर संजय पैकरा ने बढ़ाया क्षेत्र का मान…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/ दतिमा भूषण बघेल : छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग ने पुलिस आरक्षक भर्ती का रिजल्ट 9 दिसंबर को जारी कर दिया है। जिसमे पुलिस बल आरक्षक भर्ती में संजय पैकरा उर्फ भोला ने सफलता प्राप्त कर क्षेत्र में गर्व का माहौल बना दिया है। सीमित संसाधनों और आर्थिक रूप से साधारण परिवार से आने के बावजूद कठिन परिश्रम से यह मुकाम हासिल किया है। चयनित उम्मीदवारो में पुलिस बल चयन परीक्षा 2023-24 अनारक्षित वर्ग में सरगुजा जिले में दूसरा रैंक, बलरामपुर से आठवा, सूरजपुर में चौथे स्थान पर संजय पैकरा का नाम दर्ज हैं। शारीरिक दक्षता और लिखित परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए तीन जिलो के चयन सूची में अपना स्थान सुरक्षित किया है। इस बीच ग्राम राई के सरपंच-उपसरपंच व वार्ड पंचो ने सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा संजय ने पूरे गाँव का नाम रोशन किया है। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद इनकी मेहनत और लगन प्रेरणादायक है। हमें गर्व है कि हमारे गाँव के युवा अब जिला पुलिस बल का हिस्सा बनकर समाज की सेवा करेगा। चयनित संजय ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता–पिता, परिवार और शिक्षकों के सहयोग को दिया। सफलता ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यह उपलब्धि स्थानीय युवाओं में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार कर रही है। बात दे कि वे स्वामी विवेकानंद फोर्स अकादमी कवर्धा में चार वर्षों से ट्रेनिंग कर रहे थे। इतनी कठिन और लंबी ट्रेनिंग के बावजूद वह कभी हार नही माने क्योंकि उनका लक्ष्य, इरादा मजबूत था। आज तक के इतिहास में ग्राम राई पंचायत से पहला युवक संजय पैकरा होने जा रहे है जो कि पुलिस विभाग में अपनी जगह बनाएंगे।

राज्य प्रशासनिक सेवा और सचिवालय सेवा के 38 अधिकारियों के तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज राज्य प्रशासनिक सेवा और सचिवालय सेवा के 38 अधिकारियों के तबादले किए हैं।

देखें आदेश :

गैंगरेप और आत्महत्या मामले में लापरवाही, ASI सस्पेंड, थानेदार लाइन हाज़िर…

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर :  बलरामपुर– रामानुजगंज जिले के सनावल थाना क्षेत्र में डबल गैंगरेप और महिला के आत्महत्या के मामले में लापरवाही बरतने पर सनावल थाना प्रभारी उप निरीक्षक गजपति मिर्रे को आईजी दीपक झा ने लाइन अटैच कर दिया हैं, वही विवेचना करने वाले एएसआई रोशन लकड़ा को निलंबित कर दिया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार झारखंड के गढ़वा की एक महिला शादी करके सनावल थाना अंतर्गत एक गांव में आई थी, महिला का पति राजस्थान में काम करने गया हुआ था। इसी दौरान महिला का अपने मायके के पास के गांव में रहने वाले एक युवक से बातचीत शुरू हो गया। दोनों फोन पर बातचीत करते थे और दोनों के मध्य प्रेम प्रसंग भी शुरू हो गया। दूसरे युवक से फोन पर बात करने की जानकारी मिलने पर महिला के पति ने उसे फोन कर डांटा भी था और पराए पुरुष से बात करने से इंकार किया था पर महिला नहीं मानी। इसी बीच तीन सितंबर को महिला का कथित प्रेमी उससे मिलने झारखंड से सनावल थाना क्षेत्र आया था। उसने महिला को गांव के बाहर के जंगल में मिलने बुलाया। महिला अपनी 16 वर्षीया नाबालिग भतीजी के साथ अपने प्रेमी से मिलने गई थी। जहां महिला का प्रेमी अकेले नहीं आया था बल्कि अपने साथ अपने दो और साथियों को लाया था। जंगल में जब महिला अपने प्रेमी से मिलने पहुंची तो महिला के प्रेमी और उसके दोनों साथियों ने महिला और उसकी भतीजी से गैंगरेप किया और उन्हें घायल अवस्था में जंगल में छोड़कर भाग निकले। बताया जा रहा है कि नाबालिग लड़की से सिर्फ एक आरोपी ने गैंगरेप किया और इस दौरान महिला को दो आरोपियों ने पकड़ रखा था और वह घटना को देखते रहे। जिसके बाद तीनों आरोपियों ने मिलकर महिला से गैंगरेप किया था। घायल अवस्था में महिला ने मोबाइल से फोन कर अपने परिचित ग्रामीण को जंगल में गिरने से चोट लगने की बात कह बुलाया और घर ले जाने की बात कही। महिला ने घर पहुंचने के चार दिनों बाद सात सितंबर को गैंगरेप की घटना से दुखी होकर आत्महत्या कर ली थी।

इस मामले में सनावल पुलिस द्वारा सिर्फ मर्ग कायम कर घटना की सामान्य तरीके से जांच की गई। घटना की मुख्य गवाह नाबालिग पीड़िता का भी कथन नहीं लिया गया। यदि उसी दिन कथन लिया जाता तो गैंगरेप की बात उसी समय सामने आ जाती और उसी हिसाब से फिर एफआईआर और पीएम की कार्यवाही की जा सकती थी। पर पुलिसकर्मियों की लापरवाही के चलते सामान्य तरीके से पोस्टमार्टम भी हो गया। आत्महत्या करने वाली महिला के पिता ने झारखंड के अपने गृहग्राम से आकर थाने में अपनी बेटी की रेप के बाद हत्या किए जाने का आवेदन भी देने का प्रयास किया गया पर थाना प्रभारी ने उनका आवेदन नहीं लिया। इसके बाद 10 अक्टूबर को मृतका के पिता ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई।

जिसके बाद यह मामला सरगुजा रेंज आईजी दीपक झा के संज्ञान में आया। उन्होंने मामले का परीक्षण किया जिसमें जानकारी मिली की घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध दर्ज नहीं हुआ है और नहीं गैंगरेप का मामला दर्ज हुआ है। मामले की मुख्य गवाह नाबालिक बच्ची का कथन भी नहीं लिया गया है जिसके चलते मामले की सच्चाई सामने नहीं आ सकी हैं। पोस्टमार्टम भी रूटिन प्रक्रिया से निपटा दिया गया हैं। घटना के तीन माह विलंब से नाबालिग पीड़िता का कथन दर्ज हुआ तो सच्चाई सामने आई और मामले में अपराध दर्ज किया गया।

जिसे गंभीर लापरवाही मानते हुए आईजी दीपक झा ने बलरामपुर– रामानुजगंज जिले के सनावल थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर गजपति मिर्रे को अपने पदीय कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करने और लापरवाहीपूर्ण कृत्य के लिए लाइन अटैच कर दिया है। वही मामले की विवेचना कर रहे एएसआई रौशन लकड़ा को निलंबित कर दिया है।

बवाल के बाद सीतापुर थाना प्रभारी लाइन अटैच, पांच अन्य के भी हुए तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सीतापुर में हुए बवाल के बाद सीतापुर थाना प्रभारी निरीक्षक सी. आर. चंद्रा को रक्षित केंद्र भेज दिया गया है, वही उप निरीक्षक अखिलेश सिंह को सीतापुर थाने का प्रभार सौंपा गया है। इसके साथ ही एसएसपी सरगुजा द्वारा दो अन्य पुलिस निरीक्षकों के तबादले किए गए हैं जिसमें अश्वनी सिंह को प्रभारी जिविशा अंबिकापुर और निरीक्षक विवेक सेंगर को थाना प्रभारी बतौली बनाया गया है। वहीं उप निरीक्षक सी.पी.तिवारी को थाना प्रभारी मणिपुर तो उप निरीक्षक दिलीप दुबे को चौकी प्रभारी रघुनाथपुर बनाया गया है।

देखें आदेश :

मीडिया से अच्छे संबंध बनाने पर मिलेंगे नंबर!’ सरकार ने सचिवों और कलेक्टरों के लिए जारी किया आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने सचिवों और कलेक्टरों के लिए नया आदेश जारी किया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। जारी आदेश के अनुसार मीडिया मैनेजमेंट, सोशल मीडिया एक्टिविटी और खबरों में बने रहने को अब परफॉर्मेंस से जोड़ा जाएगा। इस आदेश के बाद अफसरों पर तय टारगेट पूरा करने का दबाव भी बढ़ गया है।

सरकार के इस आदेश का उद्देश्य
छत्तीसगढ़ सरकार ने सचिवों और जिला कलेक्टरों के लिए एक नया निर्देश जारी किया है, जिसमें मीडिया से बेहतर संबंध बनाए रखने और लगातार खबरों में बने रहने को परफॉर्मेंस मार्किंग से जोड़ा गया है। जनसंपर्क विभाग ने इसके लिए 47 विभागों की सूची भी जारी की है। सरकार का कहना है कि जो विभाग अच्छा काम करेगा, उसी की खबरें प्रमुखता से दिखाई देंगी।

सोशल मीडिया एक्टिविटी पर भी होगी नजर
आदेश के मुताबिक फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर नियमित पोस्ट करना भी अब अफसरों की परफॉर्मेंस का हिस्सा होगा। कौन कितना सक्रिय है, यह पोस्ट की संख्या से तय होगा, यानी अफसरों को अब ज़मीनी काम के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहना होगा।

सोनमणी बोरा को मिला साप्ताहिक लक्ष्य
टारगेट सूची में प्रमुख सचिव, ट्राइबल विभाग सोनमणी बोरा का नाम सबसे ऊपर है, उन्हें हर हफ्ते तीन प्रेस रिलीज, दो सक्सेस स्टोरी, सात फेसबुक पोस्ट और सात एक्स पोस्ट करने का लक्ष्य दिया गया है।  यह पहली बार है जब प्रशासनिक अधिकारियों के लिए इस तरह की डिजिटल एक्टिविटी को अनिवार्य किया गया है।

कलेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव
रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के कलेक्टरों को बेहद बड़ा मासिक लक्ष्य दिया गया है। 

इनमें शामिल है…

150 प्रेस रिलीज
15 सक्सेस स्टोरी
4 राष्ट्रीय स्तर की खबरें
4 राज्य स्तरीय खबरें
30 फेसबुक पोस्ट
15 एक्स पोस्ट
1 प्रेस कॉन्फ्रेंस

इतने बड़े टारगेट के चलते कलेक्टरों की टीमों पर अब अतिरिक्त जिम्मेदारी बढ़ जाएगी।

परफॉर्मेंस मार्किंग का पूरा सिस्टम
सरकार ने काम के अनुसार कुल 100 नंबर का मूल्यांकन तय किया है। इसमें शामिल हैं…

प्रेस रिलीज़: 15 मार्क्स
सक्सेस स्टोरी: 15 मार्क्स
राष्ट्रीय मीडिया में खबर प्रकाशित: 10 मार्क्स
राज्य स्तरीय फ्रंट पेज खबर: 10 मार्क्स
फेसबुक पोस्ट: 15 मार्क्स
एक्स पोस्ट: 15 मार्क्स
भ्रामक खबरों के खंडन पर: 20 मार्क्स
इस तरह मीडिया में मौजूदगी और सक्रियता अब सीधे अफसरों की कार्यक्षमता से जुड़ गई है।

अफसरों पर बढ़ेगा दबाव, बढ़ेगी सक्रियता
इस आदेश के बाद अफसरों में चर्चा है कि अब फील्ड वर्क के साथ मीडिया मैनेजमेंट भी जरूरी हो गया है। टारगेट को पूरा न करने पर परफॉर्मेंस मार्क्स प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, सरकार का दावा है कि इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक काम जनता तक बेहतर तरीके से पहुंचेगा।

मैनपाट में बाक्साइट खदान विस्तार को लेकर मचा बवाल : जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों ने उखाड़ा पंडाल, प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ के पहाड़ी पर्यटन स्थल मैनपाट में कंडराजा और उरगा क्षेत्र में प्रस्तावित बाक्साइट खदान विस्तार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध रविवार को उस समय उग्र रूप ले लिया, जब नर्मदापुर मिनी स्टेडियम में आयोजित प्रशासनिक जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने पंडाल उखाड़ दिया। प्रशासनिक तैयारी और पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद विरोधी ग्रामीणों के आक्रोश के आगे व्यवस्था ध्वस्त हो गई।

जनसुनवाई का आयोजन खदान विस्तार प्रस्ताव पर ग्रामीणों की राय लेने के लिए किया गया था लेकिन कार्यक्रम की शुरुआत से पहले ही असंतुष्ट ग्रामीण भारी संख्या में एकत्र हो गए। उनका कहना था कि पहले से संचालित बक्साइट खदानों ने मैनपाट के प्राकृतिक संतुलन को गहरा नुकसान पहुँचाया है—जमीन की उर्वरता में गिरावट, जलस्रोतों का सूखना, भूजल स्तर में कमी और वनों में कमी जैसी समस्याएँ लगातार बढ़ रही हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि खदान का विस्तार उनके जल, जंगल और जमीन पर सीधा हमला है। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि खदान कंपनी और कुछ प्रशासनिक कर्मचारियों ने जनसुनवाई से पहले प्रभावित ग्रामीणों को शराब पिलाकर उनकी राय बदलने की कोशिश की, ताकि वे विस्तार परियोजना के पक्ष में दिखाई दें। रतनी नाग ने इस कृत्य को “लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को ध्वस्त करने वाली साजिश” बताया।

मैनपाट को ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ कहा जाता है। इसकी हरियाली, वादियाँ और ठंडी जलवायु इसे प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल बनाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खदान विस्तार से पर्यावरणीय क्षरण बढ़ेगा और पर्यटन पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी करारा झटका लगेगा। इसके अलावा इस क्षेत्र में हाथियों का बसेरा है और खनन क्षेत्र के विस्तार से हाथियों के विचरण क्षेत्र प्रभावित होने का खतरा है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है।

जनसुनवाई स्थल पर मौजूद पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने पंडाल उखाड़ते हुए कार्यक्रम को बाधित कर दिया। माहौल तनावपूर्ण हो गया और प्रशासन को कार्यक्रम बीच में ही रोकना पड़ा।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि खदान विस्तार पर प्रशासन या कंपनी आगे बढ़ने की कोशिश करती है, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। फिलहाल प्रशासन ने आगे की कार्रवाई पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है, वहीं विरोधी ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे “मैनपाट की मिट्टी और पर्यावरण की रक्षा” के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आकर बाइक सवार की मौत…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : बनारस-अंबिकापुर मुख्य मार्ग पर जरही स्थित शिव मंदिर के पास शुक्रवार की शाम करीब 5.30 बजे तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार को टक्कर मार दी। इस हादसे में बाइक सवार एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद ट्रक ड्राइवर मौके पर ही ट्रक छोड़कर फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को बरामद कर पीएम के लिए अस्पताल भेज दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार सूरजपुर जिले के चंदौरा निवासी रंजनम विश्वकर्मा पिता बैजनाथ विश्वकर्मा 45 वर्ष अपने गांव से बाइक पर सवार होकर जरही की तरफ जा रहा था। वह जरही स्थित शिव मंदिर के पास पहुंचा ही था कि अंबिकापुर की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक क्रमांक यूपी 64 एटी 7863 ने उसे टक्कर मार दी। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। इधर सिर पर गंभीर चोट लगने से रंजनम विश्वकर्मा की मौके पर मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही भटगांव पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया हैं। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर फरार चालक की तलाश शुरु कर दी है और आगे की कार्यवाही कर रही हैं।

भाजपा जिला अध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी ने स्वयं भरा एसआईआर फॉर्म, जनता को भी आगे आने की अपील
गुरुवार को किया व्यापक क्षेत्र भ्रमण, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसा…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : भाजपा जिला अध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी ने गुरुवार को स्वयं अपना एसआईआर फॉर्म भरकर जनता के बीच अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि “एसआईआर फॉर्म भरना सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि हर नागरिक की समस्या को व्यवस्थित रूप से दर्ज कराने का प्रभावी माध्यम है। जब हम खुद आगे आते हैं, तब ही लोग प्रेरित होते हैं।” जिला अध्यक्ष श्री सोनी ने गुरुवार को प्रेमनगर, रामानुजनगर सहित कई क्षेत्रों का निरंतर भ्रमण किया। क्षेत्र निरीक्षण के दौरान उन्होंने आम नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएँ सुनीं और भरोसा दिलाया कि हर मुद्दे को तुरंत अधिकारियों तक पहुँचाकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं और नागरिकों से आग्रह किया कि वे स्वयं एसआईआर फॉर्म भरें और दूसरों को भी प्रोत्साहित करें, ताकि किसी भी व्यक्ति की समस्या छूट न जाए और हर जनसुनवाई का प्रभाव जमीन पर दिखे। श्री सोनी के इस पहल की क्षेत्र में खूब सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि जिला अध्यक्ष का सक्रिय प्रयास और लगातार क्षेत्र में मौजूद रहना उनकी जनसेवा के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

हत्या के आरोपी विचाराधीन बंदी की जिला जेल में हुई संदिग्ध मौत…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : जिला जेल में निरुद्ध एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतक हत्या के आरोप में पिछले लगभग 11 महीने से जेल में बंद था। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मृत्यु हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 50 वर्षीय बिहारी के रूप में हुई है। वह हत्या के एक मामले में आरोपी था और न्यायालय में उसका मामला विचाराधीन था। बताया जा रहा है कि जेल में रहते हुए उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई। स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुँचाया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

प्रशासनिक कार्यवाही

जेल में बंदी की मौत की खबर मिलते ही पुलिस और जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (न्यायिक दंडाधिकारी) की उपस्थिति में कराया गया है।

फिलहाल, मौत के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस और जेल प्रशासन का कहना है कि विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह का खुलासा हो पाएगा
मृतक: बिहारी (50 वर्ष), विचाराधीन बंदी
आरोप: हत्या (धारा 302 के तहत संभावित), 11 माह से जेल में।
घटना स्थल: जिला जेल सूरजपुर से जिला अस्पताल के बीच।

आखिर जेल के प्रहरी क्यों देते हैं धमकी या दबाव
जेल से छुटे कैदियों से बातचीत में पता चला कि कोई भी मजिस्ट्रेट या अधिकारी जेल का निरीक्षण करने आते हैं तो जेल के प्रहरी कैदियों के ऊपर दबाव बनाते हैं और बोलते हैं कि कोई भी यहां की कमियों को बताया तो उसका अंजाम बुरा होगा इसी डर से कैदी भी अपना समस्या मजिस्ट्रेट या अधिकारियों से बोल नहीं पाते हैं। क्योंकि अधिकारी घंटे 2 घंटे के लिए ही आते हैं और चले जाते हैं लेकिन जेल का प्रहरी और वहां के कर्मचारी जेल में हमेशा उपस्थित रहते हैं अगर उन्होंने मुंह खोला तो वहां के कर्मचारी और प्रहरी उनका इलाज पानी तत्काल कर देंगे।
इसी डर से कैदी भी अपना मुंह बंद रखते हैं।
बाहर निकले कैदियों का यह भी कहना था कि जेल की व्यवस्था काफी बुरी स्थिति में है यहां जो चावल आता है खाने के लिए उसमें झिल्लियां पड़ी रहती हैं और कीड़े भी लगे हुए होते हैं उसे जेल के कैदियों से ही सफाई कराया जाता है और तो और जिस दिन जेल में निरीक्षण के लिए उच्च अधिकारी या मजिस्ट्रेट आते हैं उसे दिन ही चावल दाल सब्जी अच्छा मिलता है बाकी दिन सिर्फ दाल में सिर्फ पानी पानी सब्जी भी पानी पानी मिलता है
जमानत में बाहर निकले कैदियों का यह भी कहना है कि हम तो दोष मुक्त हो गए हैं लेकिन जिसका दोष सिद्ध नहीं हुआ है उसे इस तरह का प्रताड़ना सहना कहीं ना कहीं अंदर से उसे तोड़ देता है।

अवैध धान भंडारण पर कार्यवाही, 120 क्विंटल धान जप्त…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/ भैयाथान मुकेश गुप्ता : 15 नवंबर से प्रदेशभर में धान खरीदी का कार्य चालू हो गया हैं। धान खरीदी चालू होने के साथ ही मंडी में धान खपाने के उद्देश्य से अवैध धान के भंडारण भी किए जा रहे हैं, जिनपर प्रशासन द्वारा समय समय पर उचित कार्यवाही की जा रही हैं। इसी तर्ज पर SDM चांदनी कंवर भैयाथान के नेतृत्व में ग्राम रजबहर स्थित एक व्यापारी के गोदाम में छापामार कार्रवाई की गई। वैध दस्तावेज़ नहीं पाए जाने पर 220 बोरा (88 क्विंटल) धान को जप्त कर गोदाम को सील किया गया। साथ ही ग्राम भांडी, तहसील ओड़गी के किसान द्वारा उक्त व्यापारी से धान क्रय कर ले जाए जा रहे 80 बोरा (32 क्विंटल) धान एवं ट्रैक्टर को भी जप्त कर थाना झिलमिली के सुपुर्द किया गया हैं।

ग्राम पंचायत लांजित में धूमधाम से मनाया गया मितानिन दिवस…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : जिले के ओढ़गी विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत लांजित में आज मितानिन दिवस बड़े ही हर्ष और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी की विधि-विधान से पूजा–पाठ कर की गई, जिसमें ग्रामवासियों ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अनुरूप माँ का आशीष प्राप्त किया गया। इसके बाद ग्राम पंचायत की सभी मितानिन बहनों का सम्मान किया गया। प्रत्येक मितानिन को साड़ी व श्रीफल भेंट कर सम्मान–सत्कार किया गया। मितानिन बहनों के स्वास्थ्य, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा को गांव के लोगों ने सराहा।

कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सरपंच  धरम सिंह आयम ने उद्बोधन देते हुए कहा—

“मितानिन बहनें हमारे गाँव की असली स्वास्थ्य दूत हैं। गाँव के हर घर तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में इनका योगदान अतुलनीय है। आपने कोरोना से लेकर हर कठिन समय में जो सेवा की है, वह गाँव कभी नहीं भूल सकता। पंचायत हमेशा मितानिनों के सम्मान और सहयोग के लिए तत्पर है।”

सरपंच ने आगे कहा कि मितानिन दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी स्वास्थ्य प्रहरी बहनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है।

कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने भी मितानिनों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। अंत में सभी ने मिलकर छत्तीसगढ़ महतारी की जय–जयकार के साथ कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम में उपस्थित रहे उपसरपंच अमर सिंह पोया पंच धीरेन्द्र सिंह विशाल सिंह सोनकुवर अगरिया अमरसाय पण्डो  पंच प्रतिनिधि राम किशुन कुर्रे विमलेश गुर्जर उमेश्वर गुर्जर ओमिश जयसवाल अजेन्र्द गुर्जर पवन सिंह महादेव सिंह आदि सैकड़ों में ग्रामवासियों एवं मितानिन उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में 18 ठिकानों पर ACB और EOW की रेड : अंबिकापुर में डॉक्टर तनवीर अहमद और अमित अग्रवाल के घर भी पड़े छापे…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : करोड़ों रुपए के जिला खनिज न्यास निधि  (DMF) और आबकारी घोटाले के मामले में ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) और EOW (आर्थिक अपराध शाखा) की टीम ने छत्तीसगढ़ में करीब 18 ठिकानों पर छापेमारी की हैं। ACB और EOW की टीम ने रविवार तड़के रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोंडागांव और अंबिकापुर समेत कई जगहों पर एक साथ दबिश दी हैं। घोटाले से जुड़े जांच को लेकर अधिकारियों और कारोबारियों के यहां छापेमारी चल रही है। ACB और EOW की टीम द्वारा राजधानी रायपुर में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के कई ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां अधिकारी आवश्यक दस्तावेजों की पड़ताल कर रहे हैं। इसके साथ ही कारोबारी और सप्लायर हरपाल अरोरा के निवास पर भी कार्रवाई चल रही है। करोड़ों रुपए के डीएमएफ घोटाले में लेनदेन लेकर दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।

सरगुजा में EOW-ACB की टीम ने पशु चिकित्सक डॉ तनवीर अहमद और सत्तीपारा निवासी सप्लायर अमित अग्रवाल, बलरामपुर जिले के राजपुर में मनोज अग्रवाल के ठिकानों पर छापेमारी की है। रायपुर में टीम ने पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के ठिकानों पर भी छापे मारे हैं। इसके साथ ही बलरामपुर में व्यवसायी मनोज अग्रवाल के निवास पर भी कार्रवाई जारी है। जहां अधिकारियों की टीम सभी से पूछताछ कर रही है. टीम यहां वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।


कोंडागांव में कारोबारी के घर रेड
कोंडागांव में कारोबारी कोणार्क जैन के घर और अन्य ठिकानों पर भी टीम ने रेड की। कोणार्क जैन साल 2019-20 में DMF सप्लाई कार्यों से जुड़े रहे थे। टीम यहां दस्तावेजों और लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

मुख्यमंत्री के गांव बगिया में पंचों ने दिया सामूहिक इस्तीफा, मुख्यमंत्री की सरपंच बहू पर मनमानी का लगाया आरोप…

हिंद स्वराष्ट्र जशपुर : मुख्यमंत्री के गांव बगिया में पंचों द्वारा सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया गया है। पंचों ने दिए गए अपने त्यागपत्र में सरपंच पर मनमानी का आरोप लगाया है, उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के भाई की पत्नी इस ग्राम पंचायत की सरपंच है। पंचों ने अपने त्यागपत्र में लिखा है कि सभी वार्ड के पंचों को किसी भी कार्य में ना तो पूछा जा रहा है और नहीं बताया जा रहा है अपनी मनमानी से सरपंच कार्य करवा रहा है, हम पंचों के होने या ना होने पर पंचायत को कोई फर्क नहीं पड़ता है इसलिए सभी वार्ड के पंच अपने स्वेच्छा से त्यागपत्र दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री के ग्राम पंचायत में इस तरह की घटना होने और मुख्यमंत्री की बहू का नाम सामने आने के कारण राजनीतिक गलियारे में चर्चा तेज हो गई है और सभी विपक्षी पार्टियां इस मामले में बीजेपी को आरे हाथों ले रही है।

खराब पड़ी ट्रेलर में युवक का संदिग्ध अवस्था में फांसी पर लटकता मिला शव…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : सूरजपुर जिले के करंजी साइडिंग में एक युवक का पिछले सप्ताह भर से खराब स्थिती पर खड़ी ट्रेलर पर संदिग्ध अवस्था में लाश फंदे पर लटका मिला है। यह घटना करंजी चौकी इलाके के झुमरपारा से करंजी स्टेशन मार्ग साइडिंग के समीप की बताई जा रही है। मृतक की पहचान सावन कुमार सोनवानी आ.रामलाल सोनवानी उम्र 32 वर्ष चिरमिरी हल्दीबॉडी के रूप में हुई है। इस अनोखी और दर्दनाक घटना ने राहगीरों और पुलिस दोनों को स्तब्ध कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, मृतक बीते दिनों करंजी अपने ससुराल आया था और घटना दिवस की रात्रि दतिमा में रिश्तेदार के यहाँ चन्दनपान में शामिल होने आया था औऱ शनिवार की सुबह चार बजे शौच के लिए अपने पत्नी को बताकर बाहर निकला था और सुबह करीब 6 बजे खड़ी ट्रेलर वाहन क्रमांक सीजी 15 डीपी 3499 साइडिंग के समीप सड़क किनारे खड़ी ट्रेलर में मफलर को फंदा बनाकर झूला हुआ देखा गया। घटना की जानकारी साइडिंग में लगे ट्रेलर के वाहन चालक के द्वारा साइडिंग गार्ड को बताया गया और गार्ड ने स्थानीय लोगों को सूचना दी। मौके पर पहुंची करंजी पुलिस ने शव को ट्रेलर के ट्राला के सपोटिंग पाइप से लटकता हुआ पाया। पुलिस ने शव को फांसी के फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिससे कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है। चौकी प्रभारी संतोष सिंह ने बताया कि मृतक प्राथमिक जांच में यह प्रतीत होता है कि मानसिक तनाव या व्यक्तिगत कारणों के चलते यह कदम उठाया होगा। वहीं पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है।

परिजनों ने लगाया हत्या कर शव को ट्रेलर के सपोटिंग पाइप में लटका देने का आरोप

परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। टेलर के निचले हिस्से में शव लटका था उसकी ऊंचाई पांच फिट से कम थी। आशंका जताई कि गला घोंट कर हत्या के बाद उसी के शव फंदे पर टांग दिया गया। परिजनों का कहना है कि वह कभी आत्महत्या नहीं कर सकता था।

पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का है। घटना के बाद गांव में मातम का माहौल है वहीं स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

बनारस रोड जाम ब्रेकिंग : राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब संजोग फार्म एक तरफ बज रही पार्टी की धुन दूसरी ओर राहगीर फंसे जाम में…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर: बनारस रोड में गांधीनगर मुख्य बाजार से लेकर होटल बंधन तक वाहनों की लंबी कतार लगी हुई है संजोग फॉर्म में शादी की वजह से सड़कों के किनारे वाहनों की  बेढ़ंगे तरीके से पार्किंग की गई है जिससे यह जाम की स्थिति उत्पन्न हुई है जिससे राजगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 1 घंटे से लगी यह जाम धीरे धीरे बढ़ती जा रही हैं। उल्लेखनीय हैं कि इन दिनों शादियों का सीजन चल रहा है और मुख्य मार्गों के किनारे मौजूद कुछ शादी घरों में पार्किंग की व्यवस्था भी नहीं है जिससे राहगीरों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पुलिस कंट्रोल रूम और अंबिकापुर SDM और गांधीनगर थाने को पत्रकारों द्वारा सूचना देने के बाद पुलिस फिलहाल जाम को खाली कराने की कोशिश कर रही है लेकिन अभी भी 2 किलोमीटर लंबी जाम लगी हुई है। 

जाति प्रमाण पत्र सत्यापन मामला: विधायक शकुन्तला सिंह को छानबीन समिति के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश…

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर-रामानुजगंज : कलेक्टर कार्यालय (आदिवासी विकास), मुख्यालय बलरामपुर-रामानुजगंज (छ.ग.) से दिनांक 17 नवंबर 2025 को जारी एक महत्वपूर्ण पत्र के माध्यम से, शकुन्तला सिंह पोर्ते, विधायक विधानसभा-प्रतापपुर को उनके जाति प्रमाण पत्र के सत्यापन के संबंध में जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

मुख्य निर्देश और पृष्ठभूमि

कार्यालय कलेक्टर एवं अध्यक्ष, जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति, बलरामपुर-रामानुजगंज द्वारा जारी यह पत्र शकुन्तला सिंह को संबोधित है, जो ग्राम मुड़ियाडीह पोस्ट जनकपुर, तहसील रघुनाथनगर की निवासी हैं।

• उपस्थिति की तिथि और समय: उन्हें दिनांक 27 नवंबर 2025 को समय प्रातः 11:00 बजे जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष स्वयं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होकर अपने समस्त सुसंगत अभिलेख उपलब्ध कराने को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

• सत्यापन का कारण: सत्यापन की कार्यवाही आवेदक धन सिंह धुर्वे एवं पोस्ट नवागढ़ तथा आवेदक जयश्री सिंह पुसाम पोर्ते द्वारा प्रस्तुत शिकायत आवेदन के आधार पर की जा रही है।
• उच्च न्यायालय का संदर्भ: इसमें यह भी उल्लेख है कि आवेदक जयश्री सिंह पुसाम पोर्ते द्वारा माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका क्रमांक WPC No. 2966/2025 दायर किया गया है, और माननीय न्यायालय द्वारा उक्त प्रकरण पर यथाशीघ्र आवश्यक कार्यवाही किए जाने हेतु निर्देश दिए गए हैं।

जांच का आधार

समिति ने बताया है कि आवेदक के आधार पर जारी उनके स्थायी जाति प्रमाण-पत्र की जांच की जा रही है। इसके लिए, जयश्री सिंह पुसाम पोर्ते द्वारा प्रस्तुत निम्नलिखित अभिलेखों की मूल प्रति एवं सभी सुसंगत अभिलेखों को समिति के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है:
1. जन्म-मृत्यु संबंधी पंजीयन।
2. शालेय दाखिल खारिज पंजी।
3. निवास संबंधी अभिलेख।
यह आदेश कलेक्टर महोदय द्वारा अनुमोदित किया गया है और इसका पालन करना अनिवार्य है।

प्रतिलिपि प्रेषित

इस कार्यालयीन पत्र की प्रतिलिपि आवश्यक सूचनार्थ और कार्यार्थ निम्नलिखित अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों को भी भेजी गई है:
• कलेक्टर जिला बलरामपुर-रामानुजगंज
• अपर कलेक्टर (एटीडी शाखा)
• अनुविभागीय अधिकारी (रा.) अनुविभाग-वाड्रफनगर
• तहसीलदार-वाड्रफनगर
• नोडल संयोजक-वाड्रफनगर (सूचनार्थ)
• थाना व तहसील रघुनाथनगर के आवेदक धन सिंह धुर्वे एवं पोस्ट नवागढ़
• आवेदक जयश्री सिंह पुसाम पिता देवन सिंह ग्राम गोरमाटी, महेया, वाड्रफनगर
इस मामले पर जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति की कार्यवाही 27 नवंबर 2025 को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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