हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा संभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के नकारेपन के कारण सरगुजा संभाग अपराधियों का गढ़ बनते जा रहा हैं। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि बेधड़क अपराध हो रहे हैं, बेगुनाह पीस रहे हैं, कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं और यह दोनों मलाई चाटने में व्यस्त है। अपराधियों का मनोबल इतना तेज हो गया है कि उनका कहना है कि जेब में है अगर पैसे तो हो जाएगा सब काम ना होगी कोई कार्यवाही ना भुगतना होगा अंजाम।
बूझो तो जाने हम हैं कौन..??
जांच की जा रही है जांच के बाद जो भी सामने आएगा उस पर आगे की कार्यवाही की जाएगी…. यह इनका रटा हुआ डायलॉग है जो डायलॉग यह महानुभाव हर पीड़ित को देते हैं और पीड़ित के आवेदन आते ही दूसरे पक्ष से सेटलमेंट कर लेते हैं और मामले की जांच सालों साल चलते रह जाती है, लेकिन मामले का कोई निष्कर्ष नहीं निकलता और न ही जांच रिपोर्ट सामने आती हैं। यही नहीं अगर इनको कोई पत्रकार माइक सटा दें तो अपने कनिष्ठ किसी अधिकारी को फंसा देते हैं और कहते हैं कि “अरे तुमने तो गलती कर दिया तुम्हें ऐसा करना था वैसा करना था।” आगे उनका लाइन होता है देखिए हमने जांच रिपोर्ट मंगा ली है जांच रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे और आगे की कार्रवाई करेंगे। दोषियों को बक्सा नहीं जाएगा दोषियों के विरुद्ध अवश्य ही कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।
आपको बता दे लेकिन कार्रवाई के नाम पर होता है नील बटा सन्नाटा….
एक दूसरे महानुभाव है जो हमेशा व्यस्त रहते हैं आम लोगों से मिलना इनकी फितरत में ही नहीं है अधिकारी बन गए हैं लेकिन अधिकारी से ज्यादा अपने आप को बादशाह समझते हैं। उनके यहां आवेदन जाना मतलब अनावेदक के पास जानकारी का पहुंचना सबसे पहले अनावेदक से बातें होगी सेटलमेंट होगा उसके बाद आगे की कार्रवाई तो आपको पता ही है बस जांच जारी है जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
इन दोनों ने मिलकर बना रखा है जंगल राज
यह दोनों ऐसे महानुभाव हैं जिनको अपने इज्जत की कोई फिक्र नहीं है इनका बस पैसे से मतलब है सिर्फ और सिर्फ पैसा आपको बता दे की एक और जांच रिपोर्ट आती है दूसरी और पैसे आते हैं तो यह महानुभाव जाच रिपोर्ट को दरकिनार करके पैसे को चुनते हैं और बस वही अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता। इन दोनों ने संभाग को जंगल राज बना दिया है जहां अपराधियों के हौसले काफी बुलंद है और कोई भी अपराधी अपराध करने से पहले तनिक मात्र भी नहीं डरता है। अपराधियों को खुला संरक्षण इन दोनों के द्वारा दिया गया है अपराधियों पर कार्यवाही ना होना और इन दोनों के संरक्षण के कारण अन्य लोग भी अपराधों की ओर बढ़ रहे हैं और दिन दोगुनी रात चौगुनी अपराध की घटनाओं में वृद्धि हो रही है।
तबादले का इंतजार तभी बदलेगी संभाग की तस्वीर
ज्यादा लंबा समय तो नहीं हुआ इन दोनों भ्रष्ट अधिकारियों को संभाग में आए हुए लेकिन जितने भी समय से आए हैं कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रही बल्कि सिर्फ और सिर्फ उनके जेब भर रहे हैं लंबे समय से पीड़ित इनके तबादलों का इंतजार कर रहे हैं लेकिन सरकार पता नहीं कब उनके तबादले करेंगे और तबादले के बाद ही शायद संभाग की तस्वीर बदलेगी और दोनों विभागों में कसावट आएगी शायद उसके बाद कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कुछ अपराधी मानसिकता के लोगों पर कार्रवाई हो पाएगी।
भगवान से प्रार्थना जल्द इन्हें सद्बुद्धि दें… पुरानी कहावत चूस का धन मूस खाता है… हो सकता है संभवत इनके मामलों में भी यही हो और एक दिन ऐसा आए कि जनता को चूस चूस कर इकट्ठा किया जा रहा यह धन उनके किसी काम ना आए।



