हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : वन मंडल मनेंद्रगढ़ में डीएफओ और संबंधित रेंजर को हटाने के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों ने हर संभव प्रयास किए, लेकिन अब तक शासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है। इससे यह सवाल लगातार गहराता जा रहा है कि आखिर डीएफओ और रेंजर के ऊपर किसका संरक्षण है, जो इतने बड़े जनआक्रोश के बावजूद वे अपने पद पर बने हुए हैं।
बताया जा रहा है कि बीते तीन महीनों से मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में भालू का आतंक बना हुआ है। गांवों और आसपास के इलाकों में भालू के हमलों से दहशत का माहौल है। इस दौरान कई नगर के वार्डों में भालू ने हमला किया, जिनमें अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से न तो समय पर ठोस कदम उठाए गए और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई।
हालात तब और बिगड़ गए जब सत्ता पक्ष की चुप्पी के बाद विपक्ष ने मोर्चा संभाला। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
डीएफओ कार्यालय का घेराव
रेंजर कार्यालय का घेराव
थाने में धरना-प्रदर्शन
जैसी कई बड़ी कार्रवाइयाँ की गईं।
इसके बावजूद भी शासन स्तर पर डीएफओ और रेंजर को हटाने में विफलता सामने आई है। स्थानीय जनता और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि जब इतने लंबे समय से भालू के हमले जारी हैं और प्रशासनिक लापरवाही स्पष्ट है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
नगर वीडियोका कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग ने प्रभावी कदम उठाए होते, तो इतने हमले नहीं होते। अब जनता में रोष बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

