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लटोरी नायब तहसीलदार शैलेंद्र दिवाकर के विरुद्ध दुष्कर्म का मामला दर्ज, FIR के बाद से फरार…

हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : राजधानी रायपुर के गंज थाना क्षेत्र में सूरजपुर जिले के लटोरी तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार शैलेंद्र दिवाकर के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया हैं। इस मामले में नायब तहसीलदार शैलेंद्र दिवाकर फरार बताए जा रहे हैं। इस मामले में अब तक उनकी गिरफ्तारी न होने को लेकर पीड़ित पक्ष में काफी आक्रोश हैं। उल्लेखनीय हैं कि पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने 26 मई को अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी, लेकिन अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

क्या हैं मामला
जानकारी के अनुसार, पीड़िता ने नायब तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए गंज थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली और मामले की विवेचना शुरु की। एफआईआर दर्ज हुए कई दिन बीत जाने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उसे बचाने का प्रयास कर रही है।

पुलिस पर संरक्षण देने का भी आरोप
पीड़िता का दावा है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी के परिजन लगातार थाना पहुंचकर पुलिसकर्मियों से मुलाकात कर रहे है। साथ ही आरोपी भी पुलिस के संपर्क में बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पीड़िता ने राज्य के गृहमंत्री और पुलिस कमिश्नर से भी शिकायत की है।

सूरजपुर में दबिश, आरोपी अब भी फरार
पुलिस का कहना है कि आरोपी नायब तहसीलदार के खिलाफ अपराध दर्ज कर ली गई है और उसकी तलाश जारी है। आरोपी के सूरजपुर स्थित निवास पर पुलिस टीम ने दबिश भी दी थी, लेकिन वहां नहीं मिला। फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव के निर्देश पर त्वरित एक्शन: केशकाल घाट फोरलेन बायपास निर्माण के लिए कार्यादेश जारी…

₹308 करोड़ की लागत से बनेगा 11.38 किमी लंबा बायपास…उपमुख्यमंत्री ने 5 जून को किया था रूट का निरीक्षण, दिए थे काम में तेजी लाने के निर्देश….
हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव के बस्तर दौरे के दौरान दिए गए निर्देशों पर विभाग ने त्वरित एक्शन लिया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (रायपुर-जगदलपुर मार्ग) पर बस्तर की जीवनरेखा माने जाने वाले बहुप्रतीक्षित केशकाल घाट फोरलेन बायपास के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने आज चयनित निर्माण एजेंसी को कार्यादेश (Work Order) जारी कर दिया है।
निरीक्षण के मात्र 6 दिनों के भीतर बड़ी कार्रवाई
गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान 5 जून को विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के साथ बायपास के दोनों छोरों का खुद ग्राउंड जीरो पर जाकर निरीक्षण किया था। उन्होंने इस दौरान कार्यों की सुस्ती पर नाराजगी जताते हुए इसमें तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए थे। उनके इस कड़े रुख के बाद विभाग ने कागजी और तकनीकी प्रक्रियाओं को युद्धस्तर पर पूरा करते हुए आज निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है।
गुणवत्ता और समय-सीमा से समझौता नहीं: उपमुख्यमंत्री
कार्यादेश जारी होने पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि:
“निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही पूरा करना होगा। बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह बायपास बेहद महत्वपूर्ण है। यहाँ सुगम आवाजाही शुरू करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।
केशकाल घाट बायपास की मुख्य विशेषताएँ:
कुल लागत: ₹308 करोड़
कुल लंबाई: 11.38 किलोमीटर (फोरलेन)
पुलों का निर्माण: इस रूट पर आवागमन को सुगम बनाने के लिए 2 बड़े (वृहद) और 2 मध्यम पुलों का निर्माण भी किया जाएगा।
इस बायपास के बन जाने से केशकाल घाट पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से जनता को हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी और बस्तर से रायपुर का सफर बेहद आसान और सुरक्षित हो जाएगा।

छत्तीसगढ़ में पांच नए मेडिकल कॉलेज खुलने का सपना टूटा, अफसरों की लापरवाही से बड़ा नुकसान

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सैकड़ों युवाओं के डॉक्टर बनने के सपने को एक बड़ा झटका लगा है। प्रदेश में इस सत्र से शुरू होने वाले पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की उम्मीदें अब पूरी तरह से टूट चुकी हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा मान्यता न मिलने के कारण अब इन कॉलेजों में इस वर्ष दाखिला नहीं हो सकेगा। सूत्रों की मानें तो इस बड़े नुकसान के पीछे प्रशासनिक स्तर पर हुई भारी लापरवाही और ढुलमुल रवैया सबसे मुख्य वजह बनकर उभरा है।

इन पांच जिलों में खुलने थे कॉलेज

राज्य सरकार ने प्रदेश के दूरदराज और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से पांच नए मेडिकल कॉलेजों की आधारशिला रखी थी। ये कॉलेज निम्नलिखित जिलों में प्रस्तावित थे:

  1. मनेंद्रगढ़
  2. गीदम (दंतेवाड़ा)
  3. जांजगीर-चांपा
  4. कवर्धा (कबीरधाम)
  5. महासमुंद (विस्तार/नया सेटअप)

क्यों टूटा सपना? जानिए मुख्य कारण

NMC की टीम ने जब इन प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण किया, तो वहां नियमों और गाइडलाइंस की जमकर धज्जियां उड़ती दिखीं। अफसरों की लापरवाही के कारण निम्नलिखित कमियां पाई गईं:

  • फैकल्टी और स्टाफ की भारी कमी: मेडिकल कॉलेजों के लिए जरूरी प्रोफेसरों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती समय पर पूरी नहीं की जा सकी।
  • अधूरा इंफ्रास्ट्रक्चर: कई जगहों पर कॉलेज और अस्पताल की इमारतें अधूरी थीं। लैब, लाइब्रेरी और हॉस्टल का निर्माण कार्य कागजों से बाहर जमीन पर नहीं उतर पाया था।
  • इक्विपमेंट्स (उपकरणों) का अभाव: मरीजों की जांच और छात्रों की पढ़ाई के लिए जरूरी आधुनिक मेडिकल उपकरण और मशीनें तक इंस्टॉल नहीं की जा सकी थीं।
  • समय पर कमियां दूर न करना: NMC ने पहले भी कमियों को लेकर अल्टीमेटम दिया था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और तय समय सीमा (डेडलाइन) बीत गई।

राज्य को क्या हुआ बड़ा नुकसान?

1. 500 मेडिकल सीटों का नुकसान: अगर ये पांचों कॉलेज शुरू हो जाते, तो प्रदेश को सीधे तौर पर 500 नई MBBS सीटें मिलतीं। इसका मतलब है कि छत्तीसगढ़ के 500 स्थानीय छात्र जो डॉक्टर बनने का ख्वाब देख रहे थे, वे इस साल इस मौके से वंचित रह गए।
2. करोड़ों के बजट का अपव्यय: इन कॉलेजों के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया गया था। समय पर काम न होने से न सिर्फ लागत बढ़ेगी, बल्कि विकास कार्य भी अधर में लटक गए हैं।
3. ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को झटका: गीदम और मनेंद्रगढ़ जैसे सुदूर अंचलों में मेडिकल कॉलेज खुलने से वहां के लोगों को सुपर-स्पेशलिटी इलाज की उम्मीद थी, जो अब लंबे समय के लिए टल गई है।

जनता की सहूलियत के लिए कड़ा फैसला: अब हर सोमवार को दफ्तर में बैठेंगे पटवारी, कलेक्टर ने जारी किए सख्त निर्देश…

हिंद स्वराष्ट्र कोरिया : ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को अब अपने राजस्व संबंधी छोटे-मोटे कामों के लिए पटवारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में कलेक्टर्स द्वारा जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए पटवारियों की मुख्यालय में उपस्थिति को लेकर सख्त निर्देश जारी किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में कोरिया जिला कलेक्टर ने एक बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है, जिसके तहत जिले के सभी पटवारियों को सप्ताह के हर सोमवार को अनिवार्य रूप से अपने हल्का मुख्यालय (कार्यालय) में उपस्थित रहना होगा।
क्यों पड़ी इस आदेश की जरूरत?
अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों से यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि ग्रामीण जब नामांतरण, फौती, बंटवारा, सीमांकन या आय-जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने तहसील या पटवारी दफ्तर पहुंचते हैं, तो पटवारी फील्ड वर्क या अन्य कारणों का हवाला देकर नदारद मिलते हैं। इससे ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। जनता की इसी परेशानी को देखते हुए प्रशासन ने यह सख्त रुख अपनाया है।
आदेश की मुख्य बातें और नियम:
सोमवार को अनिवार्य उपस्थिति: सभी पटवारियों को सोमवार को पूरे समय अपने आवंटित कार्यालय/मुख्यालय में मौजूद रहकर केवल जनता की समस्याओं का निराकरण करना होगा।
मुख्यालय में निवास का नियम: भू-राजस्व संहिता के नियमों के तहत वैसे भी सभी पटवारियों को अपने हल्का मुख्यालय में रहना अनिवार्य है। इस आदेश के बाद अब कलेक्टर्स द्वारा इसकी औचक जांच (Surprise Inspection) भी की जा रही है।
सरगुजा संभाग सहित अन्य जिलों में भी कड़ाई: कोरिया जिले के अलावा सरगुजा संभाग के अन्य जिलों और छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में भी स्थानीय स्तर पर कलेक्टर्स ने सोमवार और गुरुवार जैसे दिन पटवारियों की उपस्थिति के लिए तय किए हैं।

काम में लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सोमवार को मुख्यालय में अनुपस्थित रहने वाले या बिना पूर्व सूचना के गायब रहने वाले पटवारियों के खिलाफ ‘काम में लापरवाही’ के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई और निलंबन तक के कदम उठाए जा सकते हैं। इस फैसले से ग्रामीण इलाकों के किसानों और आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है।

सिरसी रेशम घोटाला: RTI से महाखुलासा! भृत्य से ‘प्रवर्तक’ बने तिलक श्रीवास्तव को किसने सौंपी सुपरवाइजर की कुर्सी?

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर (भैयाथान) :  ग्राम सिरसी में रेशम विभाग के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के खेल में एक ऐसा चौंकाने वाला प्रशासनिक मोड़ आया है, जिसने विभाग के आला अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सूचना के अधिकार (RTI) से मिले दस्तावेजों ने साबित कर दिया है कि सिरसी केंद्र में नियम-कायदों को ताक पर रखकर चहेतों को मलाईदार कुर्सियां बांटी गई हैं, ताकि भ्रष्टाचार के खेल को बिना किसी डर के अंजाम दिया जा सके।
RTI का बड़ा धमाका: सुपरवाइजर नहीं, ‘प्रवर्तक’ हैं तिलक श्रीवास्तव!
RTI से मिले आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, सिरसी रेशम केंद्र में फील्ड सुपरवाइजर की धौंस जमाने वाले तिलक श्रीवास्तव का मूल पद सुपरवाइजर का है ही नहीं। तिलक श्रीवास्तव मूल रूप से ‘भृत्य’ (peon) के पद पर भर्ती हुए थे, जो बाद में पदोन्नत होकर ‘प्रवर्तक’ (Promoter) के पद पर पहुंचे।
अब सबसे बड़ा तकनीकी और प्रशासनिक सवाल यह उठता है कि:
एक ‘प्रवर्तक’ को फील्ड सुपरवाइजर का प्रभार किस नियम के तहत दिया गया?
क्या रेशम विभाग में योग्य सुपरवाइजरों का अकाल पड़ गया है, या फिर इस ‘खास’ व्यक्ति को आर्थिक गबन की खुली छूट देने के लिए जानबूझकर इस मलाईदार पद पर बैठाया गया है?
कुर्सी अवैध, तो काम भी ‘फर्जी’!
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि जब तिलक श्रीवास्तव का पद ही सुपरवाइजर का नहीं है, तो उनके द्वारा किए गए सभी वित्तीय और प्रशासनिक कार्य स्वतः ही जांच के दायरे में आ जाते हैं। यही वजह है कि सिरसी केंद्र में बेधड़क होकर ये कारनामे किए जा रहे हैं:
पौधारोपण के बजट से पुताई:  नए पौधे लगाने के नाम पर लाखों का बजट स्वीकृत कराया गया और पुराने अर्जुन के पेड़ों पर चूना-पुताई कर पूरी राशि हजम करने की तैयारी कर ली गई।
तकनीक से जालसाजी: मनरेगा के तहत एक ही फोटो को रोज अपलोड करके 7-7 मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही है और सरकारी खजाने को चंपत लगाया जा रहा है।
बिना पद के चौकीदार: विभाग में पद स्वीकृत न होने के बाद भी एक चहेते को चौकीदार बनाकर अवैध भुगतान का रास्ता साफ किया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी का खुला ‘राज’
इस RTI खुलासे के बाद अब यह साफ हो गया है कि पूर्व में दिखाए गए दोनों अंकों की खबरों पर जिला मुख्यालय के अधिकारी मौन क्यों साधे हुए थे। एक भृत्य से प्रमोट हुए कर्मचारी की इतनी हैसियत नहीं हो सकती कि वह अकेले इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे और डिजिटल सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर सके। निश्चित ही इस ‘फर्जी सुपरवाइजर’ की पीठ पर विभाग के किसी ‘बड़े साहब’ का वरदहस्त है।
चुनौतीपूर्ण सवाल: क्या सूरजपुर कलेक्टर और रेशम विभाग के वरिष्ठ संचालक इस आरटीआई के दस्तावेजों के आधार पर इस ‘अवैध’ सुपरवाइजर को तत्काल हटाकर इसके कार्यकाल के दौरान हुए सभी भुगतानों की उच्च स्तरीय जांच कराएंगे? या फिर भ्रष्टाचार की इस ‘रेशमी चादर’ को ऐसे ही ढका रहने दिया जाएगा?

पुनर्वास पट्टे से प्राप्त भूमि के क्रय-विक्रय एवं पंजीयन पर रोक…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : कलेक्टर अजीत वसंत सरगुजा द्वारा जारी आदेश के अनुसार पुनर्वास पट्टे से प्राप्त भूमि के क्रय-विक्रय एवं उसके पंजीयन पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है।

जारी आदेश में कहा गया है कि पुनर्वास पट्टे से प्राप्त भूमि को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165 (7) (ख) के तहत क्रय-विक्रय की अनुमति को न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने की स्थिति में संहिता की धारा 44 (1) के तहत अपील प्रकरणों में तथा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 30 के तहत वरिष्ठ राजस्व न्यायालयों द्वारा ऐसे पुनर्वास पट्टे से प्रदत्त भूमि के क्रय-विक्रय की अनुमति दी जा सकती है अथवा नहीं, इस संबंध में सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, रायपुर से मार्गदर्शन मांगा गया है।

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में शासन के हितों को दृष्टिगत रखते हुए निर्देशित किया गया है कि सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, रायपुर से मार्गदर्शन प्राप्त होने तक पुनर्वास पट्टे से प्राप्त भूमि के क्रय-विक्रय तथा इसके पंजीयन पर रोक रहेगी। मार्गदर्शन प्राप्त होने के उपरांत इस संबंध में पृथक से अवगत कराया जाएगा।

इस संबंध में जिला पंजीयक सरगुजा, अम्बिकापुर तथा उप पंजीयक अम्बिकापुर एवं सीतापुर को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

विश्रामपुर सबस्टेशन में कल सुबह लगेगा इमरजेंसी शटडाउन: सरगुजा और बलरामपुर जिलों में 3 घंटे ठप रहेगी बिजली…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर  : सरगुजा और बलरामपुर जिले के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक जरूरी खबर है। कल यानी 09 जून 2026 मंगलवार को क्षेत्र के एक बड़े हिस्से में बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप रहेगी। 220/132 KV महाप्रबंधक कार्यालय/सबस्टेशन विश्रामपुर में आवश्यक रखरखाव (Maintenance) और मरम्मत कार्य के लिए बिजली विभाग द्वारा इमरजेंसी शटडाउन लिया जा रहा है।
शटडाउन का समय और प्रभावित क्षेत्र
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली कटौती का समय सुबह 08:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक (कुल 3 घंटे) निर्धारित किया गया है।
इस शटडाउन के कारण सरगुजा और बलरामपुर जिलों के अंतर्गत आने वाले सभी सबस्टेशनों से जुड़े क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बंद रहेगी। सुबह के समय बिजली गुल रहने से पानी की सप्लाई और रोजमर्रा के जरूरी काम प्रभावित हो सकते हैं।

विद्युत विभाग की अपील:

बिजली विभाग ने इस दौरान उपभोक्ताओं को होने वाली असुविधा के लिए खेद जताया है। साथ ही विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस शटडाउन को ध्यान में रखते हुए अपने पानी के स्टोरेज और अन्य जरूरी कार्यों की योजना पहले से ही बना लें, ताकि सुबह के समय किसी बड़ी परेशानी से बचा जा सके।

बुजुर्गों के सम्मान और सुखद जीवन की नई पहल: ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर सेंटर का वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने किया शुभारंभ…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्ण, सुरक्षित और आनंदमय वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में सरगुजा जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है। समाज कल्याण विभाग द्वारा स्थापित ‘सियान गुड़ी’ (वरिष्ठ नागरिक डे-केयर सेंटर) का शुभारंभ सोमवार को वित्त एवं जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया।

इस अवसर पर मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि सम्माननीय बुजुर्ग समाज की धरोहर हैं। उनके अनुभवों से ही आने वाली पीढ़ियां सीख लेकर समाज को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उन्होंने कहा कि समाज में बुजुर्गों का सम्मान अत्यंत आवश्यक है। इसी सोच के साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं एवं मनोरंजन की व्यवस्थाओं से युक्त सियान गुड़ी डे-केयर सेंटर की शुरुआत की गई है, जिससे वे सम्मानपूर्वक और आनंदमय वातावरण में अपना समय व्यतीत कर सकें।

महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि वर्तमान समय की व्यस्त जीवनशैली में परिवार के सदस्य कई बार अपने बुजुर्गों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते, जिसके कारण वे अकेलेपन का अनुभव करते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के इसी अकेलेपन को दूर करने तथा उन्हें सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सियान गुड़ी डे-केयर सेंटर की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र बुजुर्गों के लिए सामाजिक जुड़ाव, स्वास्थ्य संरक्षण और मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने बताया कि डे केयर सेंटर में योग, प्राणायाम, फिजियोथेरेपी, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, पुस्तकालय, पारिवारिक परामर्श, सांस्कृतिक एवं सामुदायायिक गतिविधियां, इंडोर गेम्स, स्वल्पाहार तथा भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। 25 सीटर क्षमता वाले इस केंद्र का संचालन सप्ताह में छह दिवस प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक किया जाएगा।

उद्घाटन अवसर पर मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधियों ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ कैरम और लूडो खेलकर संवाद कर आत्मीय समय बिताया। कार्यक्रम के दौरान शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को व्हीलचेयर एवं छड़ी का वितरण भी किया गया। बुजुर्गों के सामाजिक, मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

मनेंद्रगढ़ रोड स्थित टाटा शोरूम के पीछे स्थापित इस डे-केयर सेंटर का संचालन समाज कल्याण विभाग के सहयोग से अनामिका वेलफेयर सोसायटी, अंबिकापुर द्वारा किया जाएगा। 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए विकसित इस केंद्र में उन्हें दिनभर मनोरंजन, सामाजिक सहभागिता और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं से युक्त अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।

कार्यक्रम में विधायक प्रबोध मिंज, महापौर मंजूषा भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह, नगर पालिक निगम अंबिकापुर के सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवनारायण यादव, पार्षद कमलेश तिवारी सहित अन्य पार्षदगण जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

इस अवसर पर कलेक्टर अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ विनय अग्रवाल, समाज कल्याण विभाग के उप संचालक व्ही.के. उइके , एसडीएम बनसिंह नेताम, अनामिका वेलफेयर सोसायटी की सचिव रीता अग्रवाल तथा समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

सत्ता, प्रशासन और तथाकथित पत्रकारिता के गठजोड़ ने महिला को किया प्रताड़ित; न्याय की आस में सरेआम नीलाम हो रही अस्मत..

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : “किसी को इतना भी न सताओ साहब की वो आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाएं…” यह महज एक जुमला नहीं, बल्कि सूरजपुर जिले की एक बेबस और अकेली महिला की वो चीख है, जो व्यवस्था के बहरे कानों तक पहुंचने का रास्ता ढूंढ रही है। जिले में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने शासन, पुलिस प्रशासन और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के इस मामले में प्रशासनिक निष्क्रियता के चलते अब पीड़िता न्याय की उम्मीद छोड़ मौत को गले लगाने जैसी स्थिति में पहुंच गई है।

SP ऑफिस के सामने आरोपी खोल रहा दुकान, पुलिस को दिख रहा ‘फरार’
मामले के अनुसार, कलेक्ट्रेट कार्यालय जहां SP कार्यालय भी हैं उसके ठीक सामने दुकान चलाने वाले एक छोटे कारोबारी प्रदीप गुप्ता उर्फ प्रदीप अग्रहरि पर एक महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। कड़ी मशक्कत और कई पापड़ बेलने के बाद आखिरकार बीते 12 मई को पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध तो पंजीबद्ध कर लिया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी को ‘फरार’ बताया जा रहा है, जबकि स्थानीय सूत्रों के अनुसार वह SP ऑफिस के सामने ही अपनी दुकान पर बेखौफ बैठ रहा है।
हॉस्टल अधीक्षिका पत्नी पर पद के दुरुपयोग का आरोप
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब आरोपी कारोबारी की पत्नी, जो कि शासकीय विभाग में हॉस्टल अधीक्षिका के पद पर तैनात हैं, द्वारा अपने पद और प्रभाव का धौंस दिखाने की बात सामने आई। आरोप है कि अधीक्षिका ने पीड़िता के साथ-साथ कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों को भी चमकाने और धमकी देने का प्रयास किया, जिससे मामले को दबाया जा सके।
सोशल मीडिया पर चरित्र हनन, व्हाट्सएप ग्रुप में भी परोसी गई खबर
आरोपी की हिम्मत यहीं नहीं रुकी। ‘फरारी’ के दौरान ही उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पीड़िता के चरित्र पर कीचड़ उछालना शुरू कर दिया। आरोपी ने अपनी आईडी से महिला के संवेदनशील पहचान पत्र (दस्तावेजों) और तस्वीरों को सार्वजनिक करते हुए फेसबुक ग्रुप्स में अपशब्द लिखे और भ्रामक बातें फैलाईं।
हद तो तब हो गई जब इस घिनौने खेल में तथाकथित पत्रकारिता का भी सहारा लिया गया। एक कथित पत्रकार के माध्यम से क्षेत्र में चल रहे देह व्यापार से जोड़कर एक भ्रामक खबर प्रायोजित कराई गई। इस खबर में महिला के निजी दस्तावेजों की तस्वीरों को सरेआम लगा दिया गया।
सबसे बड़ा सवालिया निशान: इस बदनाम करने वाली खबर को व्हाट्सएप के उस ग्रुप में भी शेयर किया गया, जिसमें सूरजपुर जिले के तमाम आला अधिकारी, प्रशासनिक अमला और जिम्मेदार लोग मौजूद हैं। लेकिन अत्यंत निंदनीय है कि किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस पर संज्ञान लेना उचित नहीं समझा। अधिकारियों की इस मूक सहमति या अनदेखी के कारण महिला की इज्जत सरेआम नीलाम होती रही।
व्यवस्था से उठेगा भरोसा, तो कौन होगा जिम्मेदार?
यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि जब रक्षक ही मूकदर्शक बन जाएं, तो भक्षक के हौसले कितने बुलंद हो जाते हैं। एक तरफ सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ सूरजपुर की यह घटना उन दावों को खोखला साबित कर रही है।
पीड़ित महिला और उसका परिवार इस भ्रामक और बदनाम करने वाली साजिश से मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है। अब सवाल यह उठता है कि क्या सूरजपुर का शासन और पुलिस प्रशासन इस बेबस महिला को समय पर न्याय दिला पाएगा, या फिर व्यवस्था की यह सुस्ती किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है?

सरगुजा संभाग में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे हैं 20 से अधिक पैरामेडिकल कॉलेज, शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर (सरगुजा) : युवाओं के भविष्य और मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने का एक बड़ा खेल सरगुजा संभाग के मुख्यालय अम्बिकापुर में धड़ल्ले से जारी है। शहर और आसपास के इलाकों में वर्तमान में 20 से अधिक ऐसे पैरामेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ शासन और पैरामेडिकल काउंसिल के कड़े नियमों को पूरी तरह ठेंगा दिखा रहे हैं। इन संस्थानों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर प्रशासन से लेकर विभाग तक कई लिखित शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन रसूख और सांठगांठ के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
नियमों की उड़ रही धज्जियां: सिर्फ कागजों पर हैं अस्पताल और लैब्स
‘छत्तीसगढ़ सह चिकित्सा परिषद अधिनियम, 2001’ और चिकित्सा शिक्षा विभाग (DME) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी पैरामेडिकल संस्थान को मान्यता तभी मिल सकती है जब वे तय मापदंडों को पूरा करें। लेकिन अम्बिकापुर में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है:
बिना वैध अस्पताल संबद्धता (MOU) के संचालन: नियमतः हर कॉलेज के पास स्वयं का या किसी मान्यता प्राप्त 100 बेड के अस्पताल के साथ 30 वर्षों का क्लीनिकल अनुबंध होना अनिवार्य है, ताकि छात्र व्यावहारिक प्रशिक्षण (Practical Training) ले सकें। लेकिन यहाँ अधिकांश संस्थान सिर्फ 10-20 कमरों के भवनों में बिना किसी चालू अस्पताल के चल रहे हैं।
लापता हैं सुसज्जित प्रयोगशालाएं (Labs): पैथोलॉजी (DMLT/BMLT), एक्स-रे और ओटी तकनीशियन जैसे कोर्सेज के लिए आधुनिक माइक्रोस्कोप, सेंट्रीफ्यूज और बायोकेमिस्ट्री लैब्स अनिवार्य हैं। शहर के कई कॉलेजों में छात्रों को बिना प्रैक्टिकल के सिर्फ थ्योरी पढ़ाकर डिग्री-डिप्लोमा थमाया जा रहा है।
फर्जी और अयोग्य फैकल्टी का सहारा: नियमों के मुताबिक कोर्सेज के संचालन के लिए एम.डी. (पैथोलॉजी/रेडियोलॉजी) या योग्य स्नातकोत्तर शिक्षक होने चाहिए। यहाँ एक ही शिक्षक के नाम पर कई कॉलेजों की संबद्धता कागजों पर दिखा दी जाती है, जबकि असल में योग्य स्टाफ गायब है।

शिकायतों का अंबार, लेकिन प्रशासन की ‘रहस्यमयी’ चुप्पी
स्थानीय जागरूक नागरिकों और छात्र संगठनों द्वारा इस फर्जीवाड़े के खिलाफ जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और आयुष विश्वविद्यालय को साक्ष्यों के साथ कई बार लिखित शिकायतें सौंपी जा चुकी हैं। इन शिकायतों में साफ तौर पर उन कॉलेजों की सूची और उनकी कमियों का ब्योरा दिया गया है जो नियमों को पूरा नहीं करते।
बावजूद इसके, अब तक स्थानीय प्रशासन या संयुक्त निरीक्षण टीम (Inspection Team) द्वारा इन संदिग्ध संस्थानों पर कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई या उन्हें सील करने की जहमत नहीं उठाई गई है। प्रशासन की यह सुस्ती और उदासीनता सीधे तौर पर इन शिक्षा माफियाओं को संरक्षण देने जैसी प्रतीत होती है।
छात्रों के भविष्य और जनता के स्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़
पैरामेडिकल स्टाफ (जैसे लैब तकनीशियन, एक्स-रे तकनीशियन) स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ होते हैं। डॉक्टरों का इलाज इन्हीं की रिपोर्ट्स पर निर्भर करता है।
जब इन कॉलेजों से बिना किसी प्रैक्टिकल ज्ञान और ट्रेनिंग के छात्र डिग्रियां लेकर निकलेंगे, तो वे मरीजों की जांच रिपोर्ट सही कैसे बनाएंगे? यह न केवल छात्रों के करियर के साथ धोखा है, बल्कि भविष्य में मरीजों की जान को सीधे जोखिम में डालने जैसा है।
स्थानीय स्तर पर उठ रही मांगों के अनुसार, अब समय आ गया है कि उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर अम्बिकापुर के इन सभी 20 से अधिक पैरामेडिकल कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पताल अनुबंध और काउंसिल की एनओसी की भौतिक जांच (Physical Verification) की जाए और नियम विरुद्ध पाए जाने वाले संस्थानों को तत्काल बंद कर उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।

शिवनंदनपुर विवाद : प्राथमिक जांच में सामने आया 6 दिन में जारी हुआ जाति प्रमाण पत्र, प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल!!

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद शुरू हुआ ‘जाति प्रमाण पत्र’ का विवाद अब प्रशासनिक प्रक्रियाओं के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। इस मामले में आई कुछ प्राथमिक जानकारियों और दावों के बाद अब इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रत्याशी रितेश जायसवाल का जाति प्रमाण पत्र असामान्य रूप से बहुत कम समय में जारी किया गया था।


6 दिनों में जारी होने का दावा: आम बनाम खास की चर्चा
प्राथमिक तौर पर सामने आ रही जानकारियों के अनुसार, रितेश जायसवाल का अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का जाति प्रमाण पत्र आवेदन करने के महज छठवें दिन ही जारी कर दिया गया था। (12/05/2026 को आवेदन दिया गया और 18/05/2026 को जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया)। लोक सेवा गारंटी अधिनियम और सामान्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत आमतौर पर किसी भी आम नागरिक का ओबीसी जाति प्रमाण पत्र बनने में औसतन 2 से 4 हफ्ते (15 से 30 दिन) का समय लगता है।
ऐसे में यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इतनी तीव्र गति से यह प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ? हालांकि, प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि सभी दस्तावेज पहले से दुरुस्त और सत्यापित हों, तो तकनीकी रूप से प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकती है, इसलिए यह मामला पूरी तरह से विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।


क्या कहते हैं कानूनी और प्रशासनिक नियम?
इस त्वरित प्रक्रिया को लेकर यदि कानूनी और तकनीकी पक्षों को समझें तो:
कानूनन, किसी प्रमाण पत्र का जल्दी जारी होना अपने आप में उसके ‘फर्जी’ होने का प्रमाण नहीं है। जब तक यह साबित न हो कि प्रमाण पत्र जारी करने के लिए किसी गलत दस्तावेज का सहारा लिया गया है या नियमों को ताक पर रखा गया है, तब तक इसे अवैध नहीं कहा जा सकता।
लोक सेवा केंद्र और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड की स्क्रूटनी (जांच) के बाद ही यह साफ होगा कि क्या इस फाइल को आगे बढ़ाने में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
कलेक्ट्रेट में शिकायत की तैयारी तेज
इस नए मोड़ के बाद प्राप्त सूत्रों के अनुसार, समय सीमा (Timeframe) के इस अंतर को मुख्य आधार बनाकर कलेक्टर से इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की जाएगी।
जानकारों का आरोप है कि इस त्वरित प्रक्रिया के पीछे कथित रूप से प्रशासनिक सहयोग हो सकता है, जबकि भाजपा खेमे का मानना है कि चुनाव में हार से बौखलाया विपक्ष अब प्रक्रियात्मक बातों को बेवजह तूल देकर नवनिर्वाचित अध्यक्ष की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है।
जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति
फिलहाल, यह पूरा मामला केवल प्राथमिक दावों और चर्चाओं पर टिका है। जब तक जिला प्रशासन या जाति छानबीन समिति इस पर कोई आधिकारिक बयान या जांच रिपोर्ट जारी नहीं करती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।


नोट: यह समाचार पूरी तरह से प्राथमिक जानकारियों, प्रशासनिक समय-सीमा की चर्चाओं और सूत्रों के दावों पर आधारित है। हमारा संस्थान किसी भी व्यक्ति या अधिकारी पर सीधे तौर पर अनियमितता का आरोप नहीं लगाता है। मामले की सच्चाई निष्पक्ष प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी।

शिवनंदनपुर नगर पंचायत: जीत के उत्साह के बीच गहराया ‘जाति प्रमाण पत्र’ का विवाद, कानूनी पेच में फंस सकता है शपथ ग्रहण!

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सूरजपुर जिले के नवगठित नगर पंचायत शिवनंदनपुर में चुनावी नतीजे आने के ठीक अगले ही दिन सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। कल ही घोषित हुए परिणामों में अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाले भाजपा प्रत्याशी रितेश जायसवाल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि विपक्ष उनके जाति प्रमाण पत्र की वैधानिकता को लेकर कानूनी और प्रशासनिक मोर्चा खोलने की तैयारी में है।

क्या है पूरा मामला? सूत्रों के अनुसार आरोप

अपपुष्ट सूत्रों और सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, नवनिर्वाचित अध्यक्ष रितेश जायसवाल के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विपक्षी खेमे द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि विपक्षी दल इस मामले में राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जता रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह पूरी तरह से जांच का विषय है।
इस मामले को लेकर कांग्रेस प्रत्याशी संजय सोनी काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो वे जल्द ही अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर को ज्ञापन सौंप सकते हैं। संजय सोनी का कहना है कि उन्होंने नामांकन के दौरान भी इस विषय पर अनुविभागीय अधिकारी (SDM) शिवानी जायसवाल के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने का प्रयास किया था।

कानूनी पहलू: क्या रुक सकता है शपथ ग्रहण?

इस पूरे मामले में अगर कानूनी जानकारों और विशेषज्ञों की राय पर गौर किया जाए, तो स्थिति काफी संवेदनशील है:

  • जांच समिति (Scrutiny Committee) की भूमिका: भारत के सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों (माधुरी पाटिल बनाम अतिरिक्त कमिश्नर केस) के अनुसार, किसी भी जाति प्रमाण पत्र की वैधता की जांच केवल राज्य स्तरीय ‘उच्च स्तरीय छानबीन समिति’ (High-Powered Scrutiny Committee) ही कर सकती है। जब तक यह समिति प्रमाण पत्र को अवैध घोषित नहीं करती, तब तक किसी को सीधे तौर पर दोषी नहीं माना जा सकता।
  • क्या शपथ ग्रहण पर रोक लग सकती है? कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि शपथ ग्रहण से पहले जिला प्रशासन या सक्षम प्राधिकारी के पास वैधानिक साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज होती है, और प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध लगता है, तो प्रशासन जांच पूरी होने तक शपथ ग्रहण कार्यक्रम को अस्थायी रूप से टालने या रोकने का निर्णय ले सकता है।
  • चुनाव याचिका (Election Petition): यदि एक बार शपथ ग्रहण संपन्न हो जाता है, तो इसके बाद निर्वाचित प्रत्याशी को हटाने का एकमात्र कानूनी रास्ता ‘छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम’ के तहत संबंधित न्यायालय या ट्रिब्यूनल में ‘चुनाव याचिका’ (Election Petition) दायर करना ही बचता है।

बढ़ता सियासी पारा

चूंकि केंद्र और राज्य दोनों ही जगह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है, ऐसे में इस मामले को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला एक बड़े सियासी घमासान का रूप ले सकता है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होंगे।

पक्ष रखने से किया इनकार

इस पूरे विवाद और आरोपों पर जब हमारी टीम ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष रितेश जायसवाल का पक्ष जानने का प्रयास किया, तो उन्होंने अपनी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए फिलहाल इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।


नोट: यह खबर पूरी तरह से सूत्रों से मिली जानकारी और राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं पर आधारित है। किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हमारा संस्थान किसी भी पक्ष पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाता है और मामले की निष्पक्ष जांच का समर्थन करता है।

भैयाथान में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल अधूरे मकानों को कागजों में दिखाया पूरा, लाखों का बंदरबाट…!!

हिंद स्वराष्ट्र भैयाथान मुकेश गुप्ता : सूरजपुर भैयाथान में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल अधूरे मकानों को कागजों में दिखाया गया पूरा लाखों का बंदरबाट सूरजपुर जिले से गरीबों के आशियाने को लेकर एक बहुत बड़ी लापरवाही और धाधली की खबर सामने आ रही है, जिले के भैयाथान ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतो में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे मकानों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है जहां धरातल पर मकान अधूरे पड़े है लेकिन कागजों और सरकारी रिकार्ड में उन्हें पूरा दिखा कर लाखों रुपए की राशि निकाल ली गई है। इस मामले के सामने आने के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
जिओ ट्रैकिंग में हुआ बड़ा खेल दूसरे के घरों की फोटो लगाकर निकला पैसा
भैयाथान क्षेत्र के ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि योजना की निगरानी करने वाले आवास मित्रों और पंचायत स्तर के जिम्मेदार कर्मचारीयो ने आपस में मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया है नियम के अनुसार मकान की प्रगति देखने के लिए जिओ ट्रैकिंग की जाती है आरोप है कि कर्मचारीयो ने अधूरे पड़े मकानों को जिनमें न तो छत ढली है और न ही दरवाजे खिड़कीया लगी है उन्हें भी रिकॉर्ड में पूरा दर्शा दिया गया है हद तो तब हो गई मामलों में किसी दूसरे के पक्के मकान की तस्वीर खींचकर उसे गरीब हितग्राहीयो का घर बता कर फाइनल पेमेंट जारी करवा लिया गया हैं।

शराब के नशे में लड़ रहे पति-पत्नी ने ली 3 माह के मासूम की जान…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर: जिले की लटोरी चौकी क्षेत्र से एक हृदयविदारक घटना निकलकर सामने आई है जहां शराब के नशे में लड़ रहे दंपति अचानक अपने ही तीन माह के मासूम के ऊपर गिर पड़े, इस हादसे में मासूम को गंभीर चोटें आई और इलाज के दौरान मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार इस घटना के वक्त दोनों पति-पत्नी काफी शराब के नशे में थे और किसी बात को लेकर आपस में विवाद कर रहे थे। धीरे-धीरे यह विवाद और बढ़ गया इसके बाद दोनों आपस में धक्का मुक्की करने लगे इस दौरान वे दोनों वहीं पास में सोए हुए अपने तीन माह के बच्चे के ऊपर गिर गए जिससे बच्चे को गंभीर चोटें आई, घटना की जानकारी मिलने पर परिजन बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन गंभीर चोट के कारण बच्चे की मौत हो गई।

नायब तहसीलदार से मारपीट के विरोध में राज्य भर के प्रशासनिक अधिकारी आंदोलित, काली पट्टी बांधकर जताएंगे विरोध…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर (सरगुजा): छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में नायब तहसीलदार के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राजापुर उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार माणिक के साथ हुई कथित अभद्रता और मारपीट के विरोध में जिला सरगुजा के समस्त प्रशासनिक एवं राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में ‘छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा संघ (इकाई जिला-सरगुजा)’ द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर, जिला सरगुजा को सौंपा गया है।
विधायक और समर्थकों पर मारपीट का आरोप
सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, यह घटना बीते 27 मई 2026 की है। आरोप है कि सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक रामकुमार टोप्पो एवं उनके समर्थकों (कार्यकर्ताओं) द्वारा राजापुर उप तहसील के नायब तहसीलदार तुषार माणिक के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई। संघ का कहना है कि इस घटना से जिले के समस्त प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी-कर्मचारी अत्यंत आहत और क्षुब्ध हैं।
प्रशासनिक अमले में व्यापक असंतोष
प्रशासनिक सेवा संघ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह घटना न केवल एक शासकीय अधिकारी की गरिमा और सुरक्षा पर सीधा आघात है, बल्कि इससे संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र का मनोबल भी प्रभावित हुआ है। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी दोषियों के विरुद्ध अब तक कोई अपेक्षित, संतोषजनक या ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके चलते शासकीय कर्मचारियों में भारी असंतोष और अविश्वास की स्थिति निर्मित हो गई है।
तीन दिवसीय आंदोलन की घोषणा
मामले में त्वरित कार्रवाई न होने से नाराज ‘छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा संघ इकाई सरगुजा’ ने सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया है। संघ द्वारा घोषित रणनीति के अनुसार:
1. 01 जून 2026 से 03 जून 2026 तक जिले के सभी प्रशासनिक एवं राजस्व अधिकारी-कर्मचारी अपने हाथों या बाजुओं पर ‘काली पट्टी’ लगाकर नियमित शासकीय कार्य करेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
2. सामूहिक अवकाश की चेतावनी यदि इस तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन के दौरान भी दोषियों के खिलाफ कानून के अनुरूप कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो इसके बाद दो दिनों का ‘सामूहिक अवकाश’ (Mass Casual Leave) लेकर कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के आंदोलन का समर्थन किया जाएगा।
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ या कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी उग्र आंदोलन की रणनीति तय कर शासन-प्रशासन को अलग से अवगत कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से अधिकारियों ने माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस घटना की गंभीरता को देखते हुए दोषियों के विरुद्ध अविलंब, त्वरित, निष्पक्ष और कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि शासकीय सेवक सुरक्षित माहौल में निर्भीक होकर अपना कर्तव्य निभा सकें। इस ज्ञापन पत्र पर जिले के समस्त राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों के हस्ताक्षर एवं उनकी सहमति मौजूद है।

वित्तीय अनियमितता में दो निलंबित, जनगणना कार्य में लापरवाही पर चार शिक्षकों की रोकी गई वेतनवृद्धि…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : जिला शिक्षा अधिकारी, सरगुजा द्वारा शासकीय कार्यों में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता एवं अनुशासनहीनता के मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की गई है। जारी आदेशों के तहत दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, वहीं जनगणना कार्य में लापरवाही बरतने वाले चार शिक्षकों की एक-एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से अवरुद्ध की गई है।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार शासकीय प्राथमिक शाला पण्डरीडांड, विकासखण्ड उदयपुर की प्रधानपाठिका अंजेला किण्डो को शासकीय राशि के दुरुपयोग, कूटरचना एवं वित्तीय अनियमितता के आरोपों के कारण निलंबित किया गया है। जांच में बालवाड़ी संचालन हेतु प्राप्त राशि के आहरण में अनियमितता, फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग, शासकीय राशि का अनधिकृत हस्तांतरण तथा भंडार क्रय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है।

इसी प्रकार कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, सीतापुर में पदस्थ लेखापाल दूधनाथ सिंह को सेवानिवृत्त कर्मचारी के स्वत्वों के भुगतान में लापरवाही तथा पात्रता से अधिक अवकाश नगदीकरण भुगतान किए जाने के प्रकरण में निलंबित किया गया है। जांच में वित्तीय प्रकरणों के निष्पादन में गंभीर त्रुटियां पाई गईं।

इसके अतिरिक्त कलेक्टर एवं प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी सरगुजा के प्रतिवेदन के आधार पर जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में लापरवाही बरतने पर चार शिक्षकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। शासकीय प्राथमिक शाला आमापारा, विकासखण्ड लुण्ड्रा के सहायक शिक्षक सुखदेव राम, शासकीय प्राथमिक शाला ससौलीपारा के प्रधान पाठक उमेश कुमार तिवारी, शासकीय प्राथमिक शाला आमगांव, विकासखण्ड मैनपाट के सहायक शिक्षक उमेश सिंह नेताम तथा शासकीय प्राथमिक शाला समनिया के सहायक शिक्षक रवि कुमार की आगामी एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकी गई है।

जिला शिक्षा अधिकारी डॉ दिनेश कुमार झा ने कहा है कि शासन के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों एवं शासकीय दायित्वों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनुशासनहीनता अथवा वित्तीय अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग द्वारा कार्यों की सतत निगरानी की जा रही है तथा भविष्य में भी अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूलों में संविदा भर्ती पर सरकार ने लगाई रोक…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की संविदा भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह निर्णय जिला स्तर पर होने वाली भर्तियों में मिल रही अनियमितताओं की शिकायतों के बाद लिया गया हैं। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता लाने के लिए, अब नियुक्तियां जिला स्तर के बजाय राज्य स्तरीय केंद्रीयकृत परीक्षा के माध्यम से की जाएंगी। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सभी जिला कलेक्टरों और शिक्षा अधिकारियों को वर्तमान भर्तियों को स्थगित करने का निर्देश जारी कर दिया हैं।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में शैक्षणिक तथा गैर शैक्षणिक पदों हेतु संविदा भर्ती केन्द्रीयकृत परीक्षा संचालनालय द्वारा आयोजित कराई जायेगी। केन्द्रीयकृत परीक्षा उपरांत शैक्षणिक तथा गैर शैक्षणिक के विभिन्न पदों हेतु सूची संचालनालय द्वारा जिलों को प्रेषित की जायेगी।
जारी आदेश में बताया गया हैं कि केन्द्रीयकृत परीक्षा हेतु विस्तृत दिशा निर्देश पृथक से जारी की जाएगी।

सूरजपुर में जमीनी विवाद में खूनी खेल: छोटे भाई ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर की बड़े भाई की हत्या, आरोपी गिरफ्तार…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/भैयाथान मुकेश गुप्ता : जिला अंतर्गत भैयाथान जनपद के ग्राम पंचायत करकोटी से रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ पुराने जमीनी विवाद को लेकर एक छोटे भाई ने अपने ही सगे बड़े भाई पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस वारदात के बाद से पूरे इलाके में दहशत और सनसनी का माहौल है।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम करकोटी निवासी रामबिलास कुशवाहा (उम्र लगभग 60 वर्ष) का अपने बड़े भाई रामबरन कुशवाहा (उम्र लगभग 65 वर्ष) के साथ काफी समय से जमीनी विवाद चल रहा था। आज सुबह करीब 7:00 बजे इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते विवाद इतना गहराया कि छोटे भाई रामबिलास ने तैश में आकर अपने बड़े भाई पर लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमला इतना घातक था कि रामबरन कुशवाहा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
घटना की सूचना मिलते ही झिलमिली थाना की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी भाई रामबिलास को गिरफ्तार कर लिया हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले की आगे की वैधानिक जांच शुरू कर दी है।

सूरजपुर में DMF फंड की ‘लूट’: बिना जांच के बांटे करोड़ो, 386 पौधों के नाम पर डकार गए ₹10 लाख!

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर: जिले में खनिज न्यास संस्थान (DMF) के पैसों की बंदरबांट और सरकारी धन के खुलेआम दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। जनता के विकास और खनन प्रभावित क्षेत्रों के उद्धार के लिए मिलने वाले करोड़ों रुपयों को बिना किसी धरातली जांच के पानी की तरह बहाया जा रहा है। कागजों पर विकास की ऐसी ‘हरियाली’ दिखाई जा रही है, जिसका जमीन पर नामोनिशान तक नहीं है।
इस महाघोटाले का सबसे जीता-जागता उदाहरण देखना हो, तो जिले के ग्राम पंचायत पचीरा चले जाइए। यहाँ बाबा सिद्धेश्वर मंदिर परिसर में ब्लॉक प्लांटेशन (वृक्षारोपण) के नाम पर सरकारी खजाने को जमकर चूना लगाया गया है।
₹9.87 लाख खर्च, पर जमीन पर ₹1 लाख का काम भी नहीं!
मिली जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत पचीरा के बाबा सिद्धेश्वर मंदिर परिसर में सिर्फ 386 पौधे लगाने के नाम पर 9 लाख 87 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि स्वीकृत और खर्च कर दी गई। यानी औसतन एक पौधे की कीमत करीब ₹2,500 से अधिक बैठती है!
चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 10 लाख रुपए की इस मोटी रकम को फूंकने के बाद भी धरातल पर 1 लाख का काम भी ढंग से नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मंदिर परिसर में भ्रष्टाचार का यह खेल साफ नजर आ रहा है, लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
बड़ा सवाल क्या 386 पौधे लगाने और उनकी देखरेख के लिए ₹10 लाख की जरूरत होती है? या फिर ‘ब्लॉक प्लांटेशन’ के नाम पर यह सीधे-सीधे अफसरों और ठेकेदारों की जेब भरने का ‘प्लान’ था?
अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत?


सूरजपुर जिले में डीएमएफ फंड के आवंटन की प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
बिना धरातली जांच के फंड कैसे जारी हुआ? क्या तकनीकी स्वीकृति और मूल्यांकन सिर्फ दफ्तर में बैठकर, एसी कमरों की हवा खाते हुए कर दिया गया?
फिजिकल वेरिफिकेशन क्यों नहीं? इतनी बड़ी राशि जारी होने के बाद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर जाकर काम की गुणवत्ता और पौधों की गिनती करने की जहमत क्यों नहीं उठाई?
जनता में भारी आक्रोश, जांच की मांग
सूरजपुर की जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जो पैसा जिले के पिछड़े इलाकों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च होना चाहिए था, उसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों व संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर ‘कागजी विकास’ के इस खेल पर पर्दा डाल दिया जाता है।

जिले में DMF फंड के पैसों के दुरुपयोग के और भी कई मामले हैं जिनके खुलासे हमारे द्वारा जल्द किए जाएंगे….

सरगुजा राजापुर उप-तहसील बवाल: बीजेपी विधायक पर गैर-जमानती और नायब तहसीलदार पर जमानती धाराओं में क्रॉस FIR दर्ज…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर (सरगुजा): छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के राजापुर उप-तहसील कार्यालय में हुए हाई-प्रोफाइल विवाद ने अब एक बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। शासकीय कार्य में देरी और दुर्व्यवहार के आरोपों से शुरू हुए इस मामले में सरगुजा पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर क्रॉस एफआईआर (Cross FIR)दर्ज की है।
जहां एक तरफ भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट के आरोप में गंभीर गैर-जमानती धाराएं लगाई गई हैं, वहीं दूसरी तरफ विधायक की चचेरी बहन की शिकायत पर नायब तहसीलदार के खिलाफ भी जमानती धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
कानूनी कार्रवाई: दोनों पक्षों पर दर्ज हुई FIR का पूरा ब्योरा
पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों के लिखित आवेदनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं:
1. विधायक और समर्थकों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा
नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी की शिकायत पर सरगुजा पुलिस ने सीतापुर विधायक और उनके साथियों पर कड़ी कार्रवाई की है। शासकीय कार्य में बाधा डालने, दफ्तर में घुसकर गाली-गलौज करने, शासकीय सेवक के साथ मारपीट करने और कपड़े फाड़ने के आरोप में पुलिस ने विधायक रामकुमार टोप्पो, यूसूफ, नाज़िम रज़ा तथा पंकज गुप्ता को नामजद किया है। इसके साथ ही 10 से 12 अन्य अज्ञात समर्थकों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
बीएनएस (BNS) की धारा 221 लोक सेवक के शासकीय कार्य में बाधा डालना, धारा 121(1) लोक सेवक को अपने कर्तव्य से रोकने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, धारा 191(2) दंगा या उपद्रव करने से संबंधित और धारा 132 लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग की धाराएं लगाई गई हैं।
2. नायब तहसीलदार के खिलाफ जमानती धाराओं में केस
विधायक की चचेरी बहन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने राजापुर के नायब तहसीलदार के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। महिला ने शिकायत दर्ज कराई है कि जब वह शासकीय कार्य के लिए कार्यालय गई थीं, तब तहसीलदार ने उनके साथ जातिगत गाली-गलौज की, अश्लील इशारे किए और अभद्रता करते हुए धक्का-मुक्की कर बलपूर्वक उन्हें ऑफिस से बाहर निकाल दिया। बीएनएस (BNS) की धारा 296 सार्वजनिक रूप से अश्लील कृत्य या अभद्रता करना, धारा 351(2) आपराधिक धमकी देना, धारा 79 महिला की गरिमा और लज्जा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किया गया कृत्य की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया हैं।
प्रशासनिक आक्रोश और राजनीतिक घमासान तेज
इस घटना के बाद से ही अंबिकापुर और सरगुजा संभाग के प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व कर्मचारी संघों में भारी आक्रोश है। पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी थी, जिसके बाद से ही राजस्व अधिकारी संघ दोषियों पर कड़ी और त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहा है।
दूसरी तरफ, सत्ताधारी दल (भाजपा) के विधायक पर गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज होने से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार को कानून-व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा के मोर्चे पर घेरा है। वहीं, शासन स्तर से स्पष्ट किया गया है कि कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से कर रहा है और जांच के आधार पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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