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बीजेपी विधायक रामकुमार टोप्पो और समर्थकों पर नायब तहसीलदार से मारपीट का आरोप, विधायक की चचेरी बहन ने भी थाने में दिया आवेदन…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। सरगुजा के राजापुर उप-तहसील कार्यालय में सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो, उनके समर्थकों और स्थानीय नायब तहसीलदार के बीच तीखी बहस, गंभीर विवाद और मारपीट की घटना हुई है। इस घटना के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

विवाद की मुख्य वजह: दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और देरी का मामला

यह पूरा विवाद राजापुर उप-तहसील कार्यालय में सरकारी काम में देरी और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर (साइन) कराने को लेकर शुरू हुआ। घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे इस प्रकार हैं:

  • विधायक पक्ष का आरोप (चचेरी बहन से दुर्व्यवहार): रिपोर्ट के अनुसार, विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन किसी निजी या आधिकारिक काम से राजापुर उप-तहसील कार्यालय गई थीं। विधायक पक्ष का आरोप है कि वहां मौजूद नायब तहसीलदार ने उनके साथ न सिर्फ अभद्रता की, बल्कि दुर्व्यवहार भी किया। इसी बात की जानकारी जब विधायक को मिली, तो वे कार्यालय पहुंचे।
  • नायब तहसीलदार का आरोप (मारपीट और कपड़े फाड़ने का दावा): दूसरी ओर, पीड़ित नायब तहसीलदार का कहना है कि विवाद किसी दस्तावेज़ पर तुरंत हस्ताक्षर कराने के दबाव को लेकर शुरू हुआ था। तहसीलदार का आरोप है कि इसके बाद सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो अपने समर्थकों के साथ दफ्तर में घुस आए। उन्होंने सरकारी काम में बाधा डालते हुए गाली-गलौज की और उनके साथ मारपीट की, जिससे उनके कपड़े तक फट गए।

कलेक्टर से मिले तहसीलदार

घटना के बाद पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी देर शाम सीधे सरगुजा (अंबिकापुर) कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर आपबीती सुनाई और लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीएम (SDM) फागेश सिन्हा ने तुरंत हस्तक्षेप किया है और स्थिति को संभालने का प्रयास किया।

SDM फागेश सिन्हा ने भी की मारपीट की पुष्टि

नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के अनुसार शाम को विधायक के पीए का फोन आने पर वे राजापुर पहुंचे, जहां एसडीएम फागेश सिन्हा भी उनके साथ थे। राजापुर चौराहे पर विधायक और उनके समर्थक पहले से मौजूद थे। बातचीत के दौरान समर्थकों ने अचानक उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।सीतापुर एसडीएम फागेश सिन्हा ने भी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि मौके पर 30-40 समर्थक मौजूद थे और बातचीत के बीच नायब तहसीलदार के साथ मारपीट शुरू हो गई। उन्होंने बताया कि विधायक ने भी नायब तहसीलदार के साथ मारपीट की है। इसके बाद काफी प्रयास से अधिकारी को वहां से निकालकर थाने पहुंचाया गया।

छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने कार्यवाही की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संगी कई सरगुजा द्वारा नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ हुई इस घटना की कड़ी निंदा की है और सीतापुर विधायक और उनके समर्थकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संघ द्वारा कार्यवाही न होने की स्थिति में सामूहिक हड़ताल पर जाने की भी बात कही गई है।

खाकी पर दाग: अपने ही आरक्षक की मौत का इंसाफ नहीं कर पा रही पुलिस, 3 महीने बाद भी ‘अंधेरे’ में जांच…!

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर: कहते हैं कि पुलिस की नजरों से अपराधी का बचना नामुमकिन होता है, लेकिन जब खुद खाकी वर्दी पहनने वाले किसी अपने के साथ अन्याय हो, और विभाग ही हाथ पर हाथ धरे बैठा रहे, तो इसे आप क्या कहेंगे? संवेदनहीनता की पराकाष्ठा या फिर जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता?
आज से ठीक तीन महीने पहले 2 फरवरी की शाम करीब 8 बजे कर्तव्य की वेदी पर अपनी सेवाएं देकर घर लौट रहे एक पुलिस आरक्षक अभय कुमार पाण्डेय की सड़क दुर्घटना में असामयिक और दर्दनाक मौत हो गई थी। वह आरक्षक, जिसने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों की सुरक्षा में लगा दी, आज उसका अपना परिवार न्याय की भीख मांग रहा है। लेकिन अफसोस! घटना के 126 दिन बीत जाने के बाद भी ‘हाईटेक’ होने का दावा करने वाली हमारी सूरजपुर पुलिस उस घटनाकारी वाहन और उसके चालक का सुराग तक नहीं लगा पाई है।
अपनों की बेरुखी से टूट रहा पीड़ित परिवार
इस दिशाहीन और कछुआ गति से चल रही जांच ने मृतक आरक्षक के परिजनों को गहरे सदमे और निराशा में धकेल दिया है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। रोते हुए परिजनों का एक ही सवाल है—
“अगर एक पुलिसवाले के हत्यारे को पुलिस नहीं पकड़ सकती, तो आम जनता की सुरक्षा का दावा कैसे किया जा सकता है? क्या हमारे बेटे की जान की कोई कीमत नहीं थी?”

जांच अधिकारी सुशील तिवारी की कार्य प्रणाली से भी परिजनों में काफी आक्रोश हैं, उनका कहना है कि जब प्रत्यक्षदर्शी और इस घटना के मुख्य गवाह द्वारा इस मामले की जानकारी थाना प्रभारी को घटना के बाद तत्काल फोन के माध्यम से दी गई थी फिर इतने दिनों बाद भी उसका बयान क्यों नहीं लिया गया? जब केस हिट एंड रन का है तो पर्याप्त धाराएं क्यों नहीं जोड़ी गई..?

फाइलों में दफन हो गई संवेदना?
मृतक के पिता की मानें तो जांच के नाम पर अब तक केवल कागजी घोड़े दौड़ाए गए हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगालने और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ करने के बजाय, मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। विभाग के आला अधिकारियों की यह चुप्पी हैरान करने वाली है। जिस विभाग को अपने साथी की मौत पर सबसे ज्यादा आक्रामक होना चाहिए था, वही विभाग आज इतनी ‘बेशर्मी’ और सुस्ती से काम कर रहा है कि आरोपियों के हौसले बुलंद हैं।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल:
तकनीक का क्या हुआ? शहर भर में लगे नाइट विजन और स्मार्ट सिटी के सीसीटीवी कैमरे क्या सिर्फ आम जनता का चालान काटने के लिए हैं? एक आरक्षक को कुचलने वाली गाड़ी गायब कैसे हो गई?
इच्छाशक्ति की कमी क्यों? अगर यही घटना किसी रसूखदार या नेता के साथ हुई होती, तो क्या पुलिस अब तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती?
सहकर्मियों की एकजुटता कहां है? अपने ही एक साथी के परिवार के आंसू क्या अधिकारियों को नजर नहीं आ रहे?

जल्द गिरफ्तारी की मांग, उग्र आंदोलन की चेतावनी
मृतक आरक्षक के परिजनों और आक्रोशित नागरिकों ने अब साफ कर दिया है कि उन्हें और आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। परिजनों ने आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी और मामले की किसी सक्षम अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
यदि पुलिस विभाग अब भी कुंभकर्णी नींद से नहीं जागा और जल्द ही आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो यह मामला केवल एक दुर्घटना की जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह खाकी के रक्षकों के खिलाफ एक बड़ा जन-आंदोलन रूप ले सकता है।
अब देखना यह है कि इस खबर के बाद भी अधिकारियों की आंखों का पानी मर चुका है, या उनके भीतर अपने साथी के प्रति थोड़ी भी संवेदना बाकी है!

भू-राजस्व पट्टा धांधली: सरगुजा संभाग कमिश्नर ने खारिज की पुनरीक्षण याचिका; तहसीलदार पिता संजीत पाण्डेय के रसूख से दूसरे की जमीन अपने नाम कराने का मामला उजागर…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर। सरगुजा संभाग कमिश्नर न्यायालय द्वारा भू-राजस्व पट्टा मामले में पुनरीक्षण याचिका खारिज किए जाने के बाद अब रसूखदार अधिकारियों द्वारा अपने पद के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सुर्खियों में आ गया है। न्यायालय के आदेश पत्र से यह साफ हो गया है कि पुनरीक्षणकर्ता अचिन्त्य पाण्डेय के पिता संजीत कुमार पाण्डेय स्वयं तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं, और उनके इसी प्रशासनिक प्रभाव का गलत इस्तेमाल कर शासकीय वन भूमि की हेरफेर की गई।

क्या है पूरा मामला?
मामला मैनपाट तहसील के ग्राम आमगांव स्थित खसरा नंबर 63/21 (रकबा 0.506 हेक्टेयर) से जुड़ा हुआ है. अभिलेखों के अनुसार, यह भूमि मूल रूप से वर्ष 1974-75 में रेवती प्रसाद नामक व्यक्ति को शासकीय पट्टे पर पांच वर्ष के लिए आबंटित की गई थी. सितंबर 2023 में कलेक्टर सरगुजा से कथित रूप से विक्रय अनुमति प्राप्त कर पुनरीक्षणकर्ता अचिन्त्य पाण्डेय ने पंजीकृत सेल डीड के माध्यम से इस जमीन को खरीद लिया और राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया।
विवाद तब शुरू हुआ जब शिकायतकर्ता उमा कुमारी ने राजस्व अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि उक्त भूमि उसकी हैं और नक्शे और चौहद्दी में हेरफेर कर राजस्व अमले की मिलीभगत से उसकी जमीन व वन भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है.

​कागजों पर हेरफेर और शर्तों का उल्लंघन

जांच में पाया गया कि जिस विवादित भूमि के विक्रय पत्र में केवल 1 सरई का पेड़ दर्ज था, वहां वास्तव में 55 सरई सहित कुल 84 घने वृक्ष खड़े हैं, जो प्राकृतिक वन भूमि के अंतर्गत आते हैं। इसके अतिरिक्त, जिस शासकीय पट्टे के आधार पर यह पूरी खरीदी की गई, उस पर मूल पट्टाधारी का कभी भौतिक कब्जा या कृषि कार्य रहा ही नहीं, जो कि पट्टे की शर्तों का खुला उल्लंघन है।

​संभाग कमिश्नर नरेंद्र कुमार दुग्गा ने शासन और जनहित को सर्वोपरि मानते हुए कलेक्टर सरगुजा द्वारा शुरू की गई पट्टा वैधता की जांच को पूरी तरह विधिसम्मत ठहराया है। कमिश्नर कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब जिम्मेदार अधिकारी के परिजनों पर कलेक्टर न्यायालय की गाज गिरना तय माना जा रहा है। 

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा: ‘कागजों पर 1 पेड़, मौके पर खड़ा मिला पूरा जंगल’
कलेक्टर सरगुजा के निर्देश पर अपर कलेक्टर द्वारा की गई मौके की जमीनी जांच में बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
वन भूमि का स्वरूप: रजिस्ट्री के कागजात में उक्त विवादित भूमि पर महज 1 सरई (साल) का पेड़ होना दर्शाया गया था, जबकि मौके पर भौतिक जांच में 55 सरई के पेड़ों सहित कुल 84 घने और प्राकृतिक रूप से उगे वृक्ष पाए गए. यह पूरी तरह से ‘घने जंगल’ (वन भूमि) की परिभाषा में आता है.
अधिकारियों के पद का दुरुपयोग: उत्तरवादी पक्ष ने लिखित तर्क में आरोप लगाया कि पुनरीक्षणकर्ता के पिता स्वयं तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं. आरोप है कि इसी प्रशासनिक रसूख और प्रभाव का गलत इस्तेमाल कर कूटरचित (फर्जी) राजस्व दस्तावेज तैयार कराए गए और घने वन क्षेत्र की रजिस्ट्री करवा ली गई.
नक्शा तरमीम में अवैध खेल: बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश अथवा वैध आवेदन के ही राजस्व निरीक्षक (RI) के माध्यम से चुपचाप चालू नक्शे में संशोधन (तरमीम) कर जमीन का चिन्हांकन कहीं और काट दिया गया.
पट्टे की शर्तों का उल्लंघन: मौका जांच से यह भी साफ हुआ कि 1975 में मिले इस शासकीय पट्टे पर मूल पट्टाधारी ने कभी कोई कृषि कार्य या भौतिक कब्जा किया ही नहीं था, जो कि सरकारी पट्टा आबंटन की शर्तों का सीधा और गंभीर उल्लंघन हैं।


प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए कानून का सहारा लेने की कोशिश नाकाम
कलेक्टर सरगुजा ने जब अपर कलेक्टर की इस गंभीर जांच रिपोर्ट के आधार पर 8 अगस्त 2025 को पट्टे की वैधता की जांच के लिए पुनरीक्षणकर्ता और मूल पट्टाधारी को नोटिस जारी किया, तो इस प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए आवेदक ने कमिश्नर कोर्ट में धारा 50 के तहत पुनरीक्षण याचिका लगा दी थी.
आवेदक का तर्क था कि पट्टा आबंटन के 50 साल बाद उसकी वैधता की जांच नहीं की जा सकती और न ही बिना वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के पुराने आदेशों का पुनर्विलोकन (Review) किया जा सकता है.
इस पर कमिश्नर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “शासन हित सर्वोपरि हैं और इस पर समय-सीमा का कोई बंधन नहीं हैं”
सरगुजा संभाग कमिश्नर ने आवेदक के तमाम तर्कों को खारिज करते हुए अपने फैसले में बेहद महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है:
1. स्वतः संज्ञान (Suo Motu) में लिमिटेशन लागू नहीं: कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 50 के तहत यदि प्रशासन जनहित या शासकीय भूमि के संरक्षण के लिए स्वतः संज्ञान लेकर पुनरीक्षण या जांच करता है, तो उसमें समय-सीमा (Limitation) का नियम आड़े नहीं आता.
2. कोई अधिकार प्रभावित नहीं हो रहा:  चूंकि कलेक्टर सिर्फ पट्टे की शर्तों और धोखाधड़ी की ‘जांच’ कर रहे हैं और पक्षकारों को सुनवाई का पूरा मौका दे रहे हैं, इसलिए इससे किसी के विधिक अधिकारों का हनन नहीं हो रहा है.
3. प्रशासनिक जांच पूरी तरह वैध: न्यायालय ने कलेक्टर सरगुजा द्वारा जारी 08.08.2025 के जांच आदेश को पूरी तरह विधिसम्मत और प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत माना है.
कमिश्नर कोर्ट द्वारा याचिका खारिज (अग्राह्य) किए जाने के बाद, अब कलेक्टर न्यायालय में इस पूरे पट्टा घोटाले और वन भूमि की कूटरचना को लेकर चल रही जांच की कार्यवाही तेज गति से आगे बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र के भू-माफियाओं और भ्रष्ट राजस्व अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

पीटीएस मैनपाट का 12वां दीक्षांत समारोह समपन्न, 83 नवआरक्षकों ने ली कर्तव्य निष्ठा की शपथ…

हिंद स्वराष्ट्र मैनपाट : दिनांक 25.05.2026 को पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा (भा.पु.से.) मुख्य अतिथि की उपस्थिति में पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय मैनपाट का 12वां दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आये कुल 83 नवआरक्षकों द्वारा परेड ग्राउंड में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मुख्य अतिथि को गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके पश्चात पुलिस अधीक्षक पी.टी.एस. मैनपाट जिला सरगुजा सचिंद्र चौबे द्वारा पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा का आभार व्यक्त करते हुए दीक्षांत परेड समारोह में शामिल सभी नौजवानों के प्रतिभाओं के बारे में सामान्य जानकारी से अवगत कराते हुए नौजवानों को कर्तव्य निष्ठा की शपथ दिलाये।
पुलिस महानिरीक्षक द्वारा अपने उद्बबोधन में कहा गया कि आरक्षक पुलिस विभाग का अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण अंग है, जो सीधे तौर पर आम जनता से जुड़कर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है। उसके कार्य एवं आचरण से विभाग की छवि बनती है। जो आप सभी ने अनुशासित रहकर निर्धारित समय में इस प्रशिक्षण विद्यालय के द्वारा प्राप्त किया है। उन्होने कहा कि आप सभी अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन नवीन कानूनों के अनुरूप पूर्णतः निष्पक्षता के साथ लगन व मेहनत से करें। उनके द्वारा सभी नौजवानों को उज्जवल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं दी गई।

दीक्षांत परेड समारोह में राज्य के विभिन्न जिलों से आये नवआरक्षक जो जिला-महासमुद से 3 रायपुर. 20 राजनांदगांव 07 रायगढ़ 04 दुर्ग 06 जशपुर 04 कोरबा 03 बालोद 02 एमसीबी 02 बिलासपुर 05 बलरामपुर 04 सरगुजा 02 बेमेतरा 01 धमतरी 07 सूरजपुर 01 गरियाबंद 02 कबीरधाम 03 बलौदाबाजार 01 सक्ती 01 कोरिया 01 मुंगेली 01 मोहला-मानपुर 02 ईओडब्लू रायपुर 01 कुल 83 नवआरक्षकों के द्वारा भाग लिया गया। बुनियादी प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विषयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले नौजवानों को मुख्य अतिथि के द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। दीक्षांत परेड समारोह का नेतृत्व परेड कमाण्डर दिलीप खलखो एवं सहायक परेड कमाण्डर रोहन चन्द्राकर के द्वारा किया गया।

समापन के दौरान पुलिस अधीक्षक पीटीएस मैनपाट के द्वारा मुख्य अतिथि पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। तत्पश्चात पुलिस अधीक्षक पीटीएस मैनपाट के द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवालए कमाण्डेंट 18वीं वाहिनी उसबल मनेन्द्रगढ संजय शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक पीटीएस माना रायपुर राजकुमार मिंज को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। दीक्षांत परेड समारोह के दौरान पुलिस अधिकारी सहित जनप्रतिनिधि, पत्रकारगण एवं आमनागरिक उपस्थित सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता आशीष कच्छप के द्वारा किया गया।

सिविल अस्पताल में इंजेक्शन लगाने के 10 मिनट बाद महिला की मौत; परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, हंगामा…

हिंद स्वराष्ट्र वाड्रफनगर। क्षेत्र के सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की अचानक मौत के बाद हड़कंप मच गया। परिजनों का आरोप है कि गलत इंजेक्शन लगाने की वजह से महिला की तबीयत बिगड़ी और महज 10 मिनट के भीतर उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ, जिसे देखते हुए पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाड्रफनगर क्षेत्र के ग्राम सोनहत की रहने वाली राजकालिया (पति रामअवतार) को बुखार की शिकायत थी। परिजन उन्हें इलाज के लिए स्थानीय सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने महिला को एक इंजेक्शन लगाया।
परिजनों का गंभीर आरोप: “इंजेक्शन लगाए जाने के कुछ ही देर बाद महिला के पूरे शरीर में तेज खुजली, बेचैनी और घबराहट शुरू हो गई। देखते ही देखते उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई और करीब 10 मिनट के भीतर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।”
अस्पताल प्रबंधन पर फूटा गुस्सा, मौके पर पहुंची पुलिस
महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन के बाद जब महिला की हालत बिगड़ने लगी, तब डॉक्टरों और स्टाफ ने समय पर उचित उपचार और निगरानी नहीं दी। अगर समय रहते सही कदम उठाए जाते, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन इकट्ठा हो गए, जिससे वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत पुलिस टीम को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश देकर स्थिति को शांत कराया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक और तकनीकी कारणों का खुलासा हो सकेगा। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इस दर्दनाक घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के इलाज के तौर-तरीकों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, पीड़ित परिवार ने प्रशासन से दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

रक्षक ही बने भक्षक! 13 लाख की सागौन लकड़ी महाराष्ट्र पार, डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड निलंबित…

हिंद स्वराष्ट्र मोहला मानपुर अंबागढ़-चौकी : वन परिक्षेत्र के देववाडवी सर्किल अंतर्गत आने वाले टाटेकसा (कक्ष क्रमांक 751) के संरक्षित जंगल से बेशकीमती इमारती लकड़ियों की तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। तस्करों ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था को सेंध लगाते हुए लगभग 13 लाख रुपये मूल्य की सागौन और मिश्रित प्रजाति की लकड़ी को छत्तीसगढ़ की सीमा से बाहर महाराष्ट्र पार कर दिया।
इस बड़ी लापरवाही और मिलीभगत के सामने आने के बाद डीएफओ (DFO) दिनेश पटेल ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की जांच रिपोर्ट मिलते ही ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में डिप्टी रेंजर पुरुषोत्तम सिंह भलावी और बीट गार्ड खेमचंद देशलहरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: काटे गए 68 विशालकाय पेड़
संरक्षित जंगल से बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई की शिकायत मिलने के बाद डीएफओ दिनेश पटेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन जांच के निर्देश दिए थे। जांच टीम की रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
तस्करों ने जंगल के अंदर से कुल 68 नग सागौन और अन्य मिश्रित प्रजातियों के विशालकाय पेड़ों को काटकर धराशायी कर दिया।
बेखौफ तस्करी: तस्कर बिना किसी डर के इन भारी-भरकम लकड़ियों के लट्ठों (logs) को वाहनों में लोड कर छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे महाराष्ट्र राज्य में ले जाने में कामयाब रहे।
लाखों का नुकसान: शुरुआती आकलन के अनुसार, तस्करी की गई इन लकड़ियों की कुल बाजार कीमत लगभग 13 लाख रुपये आंकी गई है।

कड़े ऐक्शन के मूड में वन विभाग
टाटेकसा के इस संरक्षित वन क्षेत्र में हुई इतनी बड़ी वारदात ने वन विभाग की गश्त और सुरक्षा दावों की पोल खोल कर रख दी है। स्थानीय ग्रामीणों का भी मानना है कि इतनी बड़ी तादाद में पेड़ों की कटाई और परिवहन बिना स्थानीय वन कर्मियों की सह या घोर लापरवाही के मुमकिन नहीं है।
“जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर डिप्टी रेंजर पुरुषोत्तम सिंह भलावी और बीट गार्ड खेमचंद देशलहरा को निलंबित कर दिया गया है। जंगल की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभागीय जांच जारी है, और जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर सख्त कार्रवाई होगी।”
दिनेश पटेल, डीएफओ

इस कार्रवाई के बाद से वन महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस और वन विभाग की टीम अब उन तस्करों के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है, जिन्होंने इस पूरी वारदात को अंजाम दिया है।

महाघोटाला: संभाग में बिना मान्यता के चल रहे पैरामेडिकल कॉलेज, ‘सांध्य’, ‘लिली’ और ‘केपी’ जैसे संस्थान मासूम छात्रों के भविष्य से कर रहे खिलवाड़!

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : एक तरफ सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर भविष्य देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हमारे ही संभाग में शिक्षा और करियर के नाम पर ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ का खेल चल रहा है। संभाग में बिना किसी वैध मान्यता और रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से कई पैरामेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर हजारों मासूम छात्र-छात्राओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं।
इस गोरखधंधे में सांध्य पैरामेडिकल, लिली ऑर्गेनाइजेशन और केपी पैरामेडिकल जैसे कई संस्थानों के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं, जो बिना किसी डर के खुलेआम ‘डिग्री और डिप्लोमा’ बांटने की दुकान खोलकर बैठे हैं।
चकाचौंध वाले विज्ञापन, अंदर सिर्फ खोखलापन
यदि आप शहर की सड़कों पर निकलें, तो आपको दीवारों, चौराहों और बिजली के खंभों पर बड़े-बड़े पोस्टर और चमचमाते विज्ञापन देखने को मिल जाएंगे। इन विज्ञापनों में 100% जॉब गारंटी, बेहतरीन लैब और शानदार करियर के सुनहरे सपने दिखाए जाते हैं। ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के भोले-भाले बच्चे इन पोस्टरों के झांसे में आकर लाखों रुपये की फीस जमा कर देते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इन संस्थानों के पास न तो स्वास्थ्य विभाग की वैध अनुमति है और न ही पैरामेडिकल काउंसिल की मान्यता। छात्रों को जो डिग्रियां थमाई जा रही हैं, वे महज़ रद्दी का टुकड़ा हैं, जिनके आधार पर कभी कोई सरकारी या प्राइवेट नौकरी नहीं मिल सकती।
“हमारा पैसा और समय दोनों बर्बाद हो गया। जब हम काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने की बात करते हैं, तो कॉलेज प्रबंधन गोलमोल जवाब देता है। प्रशासन को सब पता है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही।”
नाम न छापने की शर्त पर एक पीड़ित छात्र


बार-बार शिकायतें, फिर भी कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन!
इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक और हैरान करने वाली भूमिका स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की रही है। जागरूक नागरिकों और ठगे गए छात्रों द्वारा इस धोखाधड़ी के खिलाफ बार-बार लिखित शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। साक्ष्यों के साथ बताया गया है कि कैसे ये कॉलेज नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
लेकिन प्रशासनिक सुस्ती का आलम यह है कि अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। शिकायतों की फाइलें दफ्तरों में धूल खा रही हैं।

प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी और सुस्ती ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या इन अवैध संस्थानों को किसी बड़े रसूखदार या राजनेता का संरक्षण प्राप्त है?
क्या स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे या छात्रों के उग्र आंदोलन का इंतज़ार कर रहा है?
शहर के चप्पे-चप्पे पर लगे अवैध विज्ञापनों पर नगर निगम और प्रशासन की नज़र क्यों नहीं पड़ती?

करियर तबाह, ज़िम्मेदार कौन?
पैरामेडिकल का क्षेत्र सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा हुआ है। बिना मान्यता और बिना उचित ट्रेनिंग के तैयार होने वाले ये छात्र कल को अस्पतालों में क्या सेवाएं देंगे? यह न सिर्फ छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि आम जनता की सेहत के साथ भी एक बड़ा आपराधिक कृत्य है। लाखों रुपये कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाने वाले माता-पिता आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
सांध्य पैरामेडिकल, लिली ऑर्गेनाइजेशन और केपी पैरामेडिकल जैसे संस्थानों पर तत्काल ताला लगना चाहिए और इनके संचालकों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो युवाओं का सिस्टम पर से भरोसा उठ जाएगा।

ब्यूरो रिपोर्ट: अब देखना यह होगा कि इस ख़बर के बाद क्या प्रशासनिक अमला अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है, या फिर चंद रुपयों और रसूख के दम पर बच्चों के भविष्य की यह ‘सौदागरी’ यूँ ही सड़कों पर पोस्टर चमकाती रहेगी।

जिले को मिली हाईटेक सुरक्षा की नई ताकत, मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दिखाई डायल-112 नेक्स्ट जेन सेवा को हरी झंडी…

हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़ किशन शाह : एमसीबी जिले की सुरक्षा एवं आपातकालीन सेवाओं को आज नई मजबूती मिली, जब मनेंद्रगढ़ कोतवाली थाना परिसर में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने छत्तीसगढ़ डायल-112 फेज (नेक्स्ट जेन) सेवा के तहत जिले को प्राप्त 8 अत्याधुनिक इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल (ERV) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर कलेक्टर संतन देवी जांगड़े एवं पुलिस अधीक्षक रतना सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री जायसवाल ने कहा कि एमसीबी जिले के लिए यह ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण है। डायल-112 नेक्स्ट जेन सेवा के माध्यम से जिले को आधुनिक तकनीक से लैस इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल एवं एम्बुलेंस की सौगात मिली है, जिससे आपातकालीन सेवाएं पहले से अधिक तेज, प्रभावी और भरोसेमंद बनेंगी।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा गृह मंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नागरिकों की सुरक्षा और त्वरित राहत सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। नई व्यवस्था से दुर्घटना, अपराध, स्वास्थ्य आपातकाल, महिला सुरक्षा, अग्निकांड एवं अन्य संकट की स्थिति में लोगों को तत्काल सहायता मिल सकेगी।
मंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि इन अत्याधुनिक वाहनों में GPS सिस्टम, PTZ कैमरा, डैश कैमरा, मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) और स्मार्ट मोबाइल फोन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे घटनास्थल तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित होगी तथा राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी भी बेहतर तरीके से हो सकेगी।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक रतना सिंह ने जानकारी दी कि जिले को प्राप्त 8 इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल में से 7 वाहन 24 घंटे जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित किए जाएंगे, जबकि 1 वाहन रिजर्व रखा गया है, ताकि किसी भी तकनीकी अथवा आकस्मिक परिस्थिति में सेवाएं प्रभावित न हों।
उन्होंने कहा कि इन वाहनों के संचालन से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पुलिस सहायता एवं आपात सेवाओं की पहुंच और अधिक सशक्त होगी। आधुनिक तकनीक से लैस ये वाहन किसी भी आपदा, दुर्घटना या आपात स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अधिकारियों ने बताया कि डायल-112 सेवा वर्ष 2018 से प्रदेश में संचालित है, लेकिन “फेज-II नेक्स्ट जेन” के तहत अब इसका विस्तार प्रदेश के सभी 33 जिलों तक कर दिया गया है। नई प्रणाली के माध्यम से पुलिस, स्वास्थ्य सेवा, अग्निशमन सेवा, महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन, आपदा प्रबंधन तथा राष्ट्रीय हाईवे सेवाओं को एकीकृत प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे नागरिकों को एक ही नंबर 112 पर समन्वित आपातकालीन सहायता उपलब्ध हो सकेगी।
प्रदेशभर में इस परियोजना के तहत लगभग 400 इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल तैनात किए जा रहे हैं। साथ ही सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए अत्याधुनिक तथा बैकअप के रूप में भी स्थापित किए गए हैं, जिससे तकनीकी बाधा की स्थिति में भी सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहेंगी
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। डायल-112 नेक्स्ट जेन सेवा के शुभारंभ से जिले में सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सूरजपुर में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने डॉयल 112 की वाहनों को थानों के लिए किया रवाना…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर :  माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिनांक 18 मई 2026 को छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 आपातकालीन सेवा का विस्तार करते हुए इन आधुनिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसी क्रम में जिले के थानों के लिए प्राप्त डॉयल 112 की 11 नग वाहनों को बुधवार, 20 मई 2026 को स्थानीय सर्किट हाउस सूरजपुर में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल ने विधिवत् पूजा-अर्चना कर इन वाहनों को थानों के लिए रवाना किया।
इस अवसर पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि यह एक एकीकृत हेल्पलाइन नंबर है, जिस पर कॉल करके नागरिक संकट की स्थिति में त्वरित सहायता प्राप्त कर सकते हैं। डायल-112 के इस सेवा के तहत पुलिस, एम्बुलेंस, आगजनी, फायर और आपदा प्रबंधन से जुड़ी मदद एक ही नंबर 112 डायल करके प्राप्त की जा सकती है। डॉयल 112 की सेवा प्रारंभ होने पर उन्होंने जिलेवासियों को बधाई दी है।
कलेक्टर सूरजपुर रेना जमील ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं और मेडिकल इमरजेंसी के साथ-साथ डॉयल 112 महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को भी अत्यधिक मजबूत करेगा।
डीआईजी व एसएसपी सूरजपुर प्रशांत कुमार ठाकुर ने कहा कि पुलिस की सहायता लेनी हो, एंबुलेंस, आगजनी, आपदा प्रबंधन के लिए सहयोग लेना हो, इसके लिए 112 नंबर डायल करें इसकी सेवा आज से सभी थानों में प्रारंभ हो गया है। इमरजेंसी रिस्पॉस सपोर्ट सिस्टम के निर्देशानुसार शहरी क्षेत्रों में पीड़ित व्यक्ति को 10 मिनट के अंदर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के अंदर तत्काल सहायता पहुंचाई जायेगी। उन्होंने नागरिकों से अपील किया है कि आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत 112 डायल कर त्वरित मदद ले, आपकी सुरक्षा, हमारी प्राथमिकता है। इस अवसर पर प्रदेश कार्य समिति सदस्य भीमसेन अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी, सीईओ जिला पंचायत विजेन्द्र पाटले, संस्कृति प्रकोष्ठ सह संयोजक धरमवीर सोनी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन, सीएसपी बेनार्ड कुजूर, एसडीओपी सूरजपुर अभिषेक पैंकरा सहित पुलिस अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

मुआवजे के लिए 20 साल का इंतजार: बलरामपुर में किसानों का सब्र टूटा, छत्तीसगढ़-UP बॉर्डर पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : प्रशासनिक संवेदनहीनता और दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बलरामपुर जिले के प्रभावित किसानों के सब्र का बांध टूट गया है। वाड्रफनगर विकासखंड के अंतर्गत छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले धनवार अंतरराज्यीय नाके पर बुधवार (आज) सुबह से प्रभावित ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। इस आंदोलन के कारण दोनों राज्यों के बीच की जीवन रेखा कही जाने वाली इस सड़क पर आवागमन पूरी तरह ठप होने की कगार पर है।

​क्या है पूरा मामला?

​वर्ष 2005-06 में धनवार में आरटीओ (RTO) चेक पोस्ट और परिसर निर्माण के लिए प्रशासन द्वारा 19 आदिवासी और किसान परिवारों की करीब 20 एकड़ उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इस अधिग्रहण को पूरे 20 साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक दांव-पेचों के कारण इन प्रभावित परिवारों को आज तक मुआवजे का एक रुपया भी नसीब नहीं हुआ है। अपनी ही जमीन के हक के लिए दर-दर भटकने के बाद अब ग्रामीणों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।

​प्रभावित ग्रामीणों की प्रमुख माँगें:

​आंदोलन की शुरुआत करने से पहले ग्रामीणों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) बलरामपुर को बकायदा एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उनकी दो टूक माँगें शामिल हैं:

  • ​भूमि के बदले भूमि: या तो शासन प्रभावित परिवारों को कृषि के लिए दूसरी भूमि आवंटित करे।
  • उचित मुआवजा: या फिर वर्तमान बाजार दर को देखते हुए ₹40 लाख प्रति एकड़ की दर से तत्काल मुआवजे का भुगतान किया जाए।

आंदोलनकारियों की चेतावनी: “यदि इस चक्का जाम के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होती है या कानून-व्यवस्था बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी उस सुस्त प्रशासनिक तंत्र की होगी जो बीस वर्षों से कुंभकर्णी नींद सो रहा है।”

​मौके पर भारी पुलिस बल तैनात

​मामले की गंभीरता और चक्का जाम की पूर्व चेतावनी को देखते हुए धनवार बॉर्डर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन के आला अधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

​जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर उठे सवाल

​इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने स्थानीय विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते को इस विकट समस्या से कई बार अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल खोखले आश्वासन ही हाथ लगे।

​ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेताओं ने दो दशकों से न्याय की आस लगाए बैठे इन परिवारों के दर्द की अनदेखी की है। इस मुद्दे को न तो विधानसभा में पुरजोर तरीके से उठाया गया और न ही शासन स्तर पर इसकी कोई ठोस पैरवी की गई।

​आगे क्या?

​अपनी मांगों को लेकर धरने पर अड़े ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन और चक्का जाम समाप्त नहीं होगा। अब देखना यह है कि इस व्यापक जन-आक्रोश के बाद प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटती है या शोषित परिवारों का इंतजार और लंबा होता है।

सुरजपुर: अनियंत्रित ट्रैक्टर पलटने से चालक की दर्दनाक मौत, इलाके में सनसनी…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/भैयाथान विशेष संवाददाता : जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कुसुमसी से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहाँ कुसुमसी बाजार के पास एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। इस भीषण हादसे में ट्रैक्टर चालक की मौके पर ही मौत हो गई।
मृतक की पहचान 30 वर्षीय भुनेश्वर देवांगन के रूप में हुई है। चश्मदीदों के मुताबिक, हादसा इतना जबरदस्त था कि ट्रैक्टर पलटने के बाद चालक उसके नीचे ही दब गया। गंभीर चोटें आने के कारण भुनेश्वर देवांगन ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

बलरामपुर: ट्रैक्टर की टक्कर से बाइक सवार युवा मनरेगा इंजीनियर की मौत, अवैध रेत परिवहन की खुली पोल…

हिंद स्वराष्ट्र राजपुर (बलरामपुर) :  बलरामपुर जिले के राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुंदीकला में शुक्रवार की दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। यहाँ एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बाइक सवार युवा इंजीनियर को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में इंजीनियर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाकारित ट्रैक्टर में अवैध रेत लोड थी।
शासकीय कार्य से लौट रहे थे आशुतोष
जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर के गांधीनगर निवासी आशुतोष गुप्ता (30 वर्ष) राजपुर जनपद पंचायत में मनरेगा (MGNREGA) के तहत तकनीकी सहायक (इंजीनियर) के पद पर पदस्थ थे। शुक्रवार की दोपहर वे अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन करने के बाद बाइक से लौट रहे थे। इसी दौरान ग्राम कुंदीकला के पास विपरीत दिशा से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि आशुतोष बाइक समेत सड़क पर दूर जा गिरे और उन्हें गंभीर चोटें आईं।
देवदूत बनकर पहुँचे SDM, पर नहीं बच सकी जान
हादसे के कुछ ही देर बाद उसी मार्ग से राजपुर एसडीएम (SDM) का वाहन गुजर रहा था। सड़क पर लहूलुहान स्थिति में पड़े इंजीनियर को देखकर एसडीएम ने संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने बिना समय गंवाए घायल आशुतोष को तत्काल अपने ही शासकीय वाहन में बिठाया और खुद अंबिकापुर स्थित अस्पताल के लिए रवाना हुए। हालांकि, अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद आशुतोष को मृत घोषित कर दिया। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोट आने के कारण अत्यधिक खून बह जाना मौत की वजह बताया जा रहा है।
अवैध रेत परिवहन बना काल
इस हादसे ने क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दुर्घटना को अंजाम देने वाले ट्रैक्टर में अवैध रूप से रेत लोड थी, जिसे खपाने के लिए चालक बेहद तेज और लापरवाही पूर्वक वाहन चला रहा था। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही राजपुर थाना पुलिस ने ट्रैक्टर को जब्त कर लिया है और फरार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। युवा इंजीनियर की मौत से उनके गृहग्राम गांधीनगर (अंबिकापुर) और राजपुर जनपद कार्यालय में शोक की लहर दौड़ गई है।

अरुण देव गौतम बनें छत्तीसगढ़ के नए DGP

हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को राज्य का नया और पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया हैं। इससे पहले वे राज्य में प्रभारी डीजीपी के तौर पर कार्य कर रहे थे, और गृह विभाग ने उनकी स्थायी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया हैं।

अरुण देव गौतम से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • बैच: 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी。
  • पूर्व पद: डीजीपी बनने से पहले वे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG), एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) के रूप में तैनात थे。
  • प्रमुख उपलब्धियां: उन्हें वर्ष 2002 में कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए ‘संयुक्त राष्ट्र पदक’, 2010 में ‘भारतीय पुलिस पदक’ और 2018 में ‘विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक’ से सम्मानित किया जा चुका है

अंबिकापुर में हैवानियत: लव मैरिज के बाद पति ने गर्भवती पत्नी को बेरहमी से पीटा, प्राइवेट पार्ट में डाला लोहे का औजार; मौत…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर (सरगुजा): छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से घरेलू हिंसा और क्रूरता का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। मणिपुर थाना क्षेत्र के ग्राम भिठीकला में एक युवक ने अपनी 3 महीने की गर्भवती पत्नी की बेरहमी से पिटाई की और उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रेती (औजार) डाल दी। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा महिला को मृत घोषित किए जाने के बाद आरोपी पति शव छोड़कर फरार हो गया। मृतका की पहचान 23 वर्षीय हीराबाई के रूप में हुई है, जिसने आरोपी प्रदीप अगरिया से लव मैरिज की थी।
हादसे की झूठी कहानी गढ़ी, मौत का पता चलते ही भागा
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर प्रदीप अगरिया ने अपनी पत्नी हीराबाई को इस कदर पीटा कि वह बेसुध हो गई। इसके बाद वह उसे बाइक पर बांधकर अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गया। पकड़े जाने के डर से उसने डॉक्टरों को गुमराह करने के लिए कहानी गढ़ी कि उसकी पत्नी सड़क हादसे में घायल हुई है। हालांकि, जांच के बाद डॉक्टरों ने हीराबाई को मृत घोषित कर दिया। पत्नी की मौत की खबर सुनते ही प्रदीप अस्पताल में ही शव छोड़कर अपनी बाइक से फरार हो गया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्रूरता का खुलासा, शरीर पर चोट के 16 निशान
गुरुवार को परिजनों के न मिलने पर पुलिस ने शव को मॉर्च्युरी में रखवा दिया था। शुक्रवार को जब परिजन पहुंचे, तब शव का पोस्टमॉर्टम किया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर गंभीर चोटों के 16 निशान मिले हैं।
मणिपुर थाना प्रभारी सीपी तिवारी और फॉरेंसिक एक्सपर्ट प्रभात भगत ने घटनास्थल (घर) का निरीक्षण किया। घर के कमरे, मुख्य दरवाजे और सामानों पर खून के गहरे धब्बे मिले हैं। महिला को घसीटे जाने के निशान भी बरामद हुए हैं।

5 साल की मासूम बेटी बनी चश्मदीद
इस पूरी हैवानियत की गवाह दोनों की 5 वर्षीय मासूम बेटी बनी। बच्ची ने सहमे हुए पुलिस को बताया कि उसके पिता ने उसकी आंखों के सामने मां को बेरहमी से पीटा। वह डर के मारे एक कोने में दुबक कर रोती रही। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी पति की तलाश तेज कर दी है।

जनगणना कार्य में लापरवाही, व्याख्याता एवं सहायक शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : भारत की जनगणना 2027 के कार्यों में तहसीलदार एवं चार्ज जनगणना अधिकारी लुण्ड्रा के प्रतिवेदन के अनुसार विकासखण्ड लुण्ड्रा के कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के व्याख्याता राजपाल देव एवं शासकीय प्राथमिक शाला आमापरा के सहायक शिक्षक सुखदेव राम को जनगणना कार्य में लापरवाही बरतने पर कलेक्टर एवं प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

व्याख्याता राजपाल देव द्वारा एच एल बी नंबर 186 ससौली के प्रगणक के ऑनलाइन कार्य में लापरवाही बरती गई। वहीं सहायक शिक्षक सुखदेव राम के द्वारा एचएलबी नंबर 0063 के प्रगणक के रूप में कार्य में लापरवाही किये जाने एवं जनगणना सुपरवाईजर के द्वारा प्रतिदिन नशा किए जाने सम्बन्धी जानकारी दी गई।

प्रकरण से स्पष्ट हुआ कि राजपाल देव एवं सुखदेव राम का यह कृत्य भारत की जनगणना 2027 परिपत्र संख्या 16 कण्डिका क्रमांक 8 में अंकित जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत जनगणना के कार्य प्रणाली को बाधित करना प्रतीत होता है। इनका कृत सिविल सेवा आचरण नियम 3(1) (iii) के तहत् शासकीय सेवक के लिए यह कृत्य स्वेच्छाचारिता को द्योतक है, जो घोर लापरवाही, जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और अनुशासनहीनता परिलक्षित करता है।
उक्त संबंध में उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण एक दिवस के भीतर कार्यालय में अपना जवाब प्रस्तुत करना सुनिश्चित करने कहा गया है। निर्धारित समयावधि में स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किये जाने पर उनके  विरूद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 के नियम 10 के तहत यह अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

बलरामपुर: अवैध साल की लकड़ियों का परिवहन करते दो आरोपी गिरफ्तार, वन विभाग की बड़ी कार्रवाई…

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में वन विभाग ने अवैध लकड़ी तस्करी के विरुद्ध एक बड़ी सफलता हासिल की है। वनमण्डलाधिकारी (DFO) बलरामपुर आलोक कुमार बाजपेयी के निर्देशन और उपवनमण्डलाधिकारी अनिल कुमार सिंह पैकरा के मार्गदर्शन में वन विभाग की टीम ने अवैध साल प्रजाति के लट्ठों से लदे एक वाहन को जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
अवैध परिवहन पर छापेमारी
जानकारी के अनुसार, दिनांक 11 मई 2026 को वन परिक्षेत्र बलरामपुर के सर्किल माणिकपुर (बीट माणिकपुर, वन कक्ष क्रमांक आर.एफ. 3511, वनखण्ड मानपुर) से सूचना प्राप्त हुई थी। वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर पिकअप वाहन (क्रमांक UP64T9601) को रोका। तलाशी लेने पर वाहन में साल प्रजाति के 08 नग लट्ठे (कुल आयतन 1.915 घन मीटर) लदे पाए गए, जिनका परिवहन अवैध रूप से किया जा रहा था।


आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान विष्णु गुप्ता (पिता स्व. दशरथ गुप्ता) और सर्वोत्तम गुप्ता (पिता विष्णु गुप्ता) के रूप में हुई है। दोनों आरोपी ग्राम बानापती, थाना रामानुजगंज, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज के निवासी बताए जा रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई
वन विभाग ने वाहन सहित वनोपज को जब्त कर लिया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 41 व 52, और छत्तीसगढ़ अभिवहन (वनोपज) नियम 2001 के नियम 22 के तहत वन अपराध प्रकरण क्रमांक 21979/12 दर्ज किया गया है। दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
टीम का योगदान
इस पूरी कार्रवाई में वन परिक्षेत्राधिकारी बलरामपुर निखिल सक्सेना, वनक्षेत्रपाल घनश्याम शर्मा, वनपाल प्रहलाद तिवारी, और वन रक्षक अजीत कुजूर, शिवशंकर सिंह, देवीलाल, राजेश राम, संजीव सिंह व सुरेन्द्र सिंह ओईके की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वाड्रफनगर के जंगलों में धधक रही आग: कुंभकरणी नींद में सोया वन विभाग, राम नारायण राम की चुप्पी पर उठे सवाल…

हिंद स्वराष्ट्र वाड्रफनगर (बलरामपुर): एक तरफ सरकार जंगलों को बचाने के लिए करोड़ों के फंड जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर बलरामपुर वन मंडल के वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र से लापरवाही की ऐसी तस्वीर सामने आ रही है जो रूह कंपा देने वाली है। वाड्रफनगर  वन परिक्षेत्र के जंगलों में पिछले कई दिनों से भीषण आग लगी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चैन की बंसी बजा रहे हैं।
धुएं के आगोश में जंगल
घाट पेंडारी के पहाड़ों और मैदानी जंगलों में आग ने तांडव मचा रखा है। सैकड़ों एकड़ में फैली बेशकीमती वन संपदा और वन्यजीव इस आग की भेंट चढ़ रहे हैं। धुएं के गुबार दूर-दूर से देखे जा सकते हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि जिस विभाग पर इन जंगलों की सुरक्षा का जिम्मा है, वह पूरी तरह नतमस्तक नजर आ रहा है।
परिक्षेत्र अधिकारी की ‘कुंभकरणी नींद’
क्षेत्र में चर्चा है कि वन परिक्षेत्र अधिकारी राम नारायण राम को शायद जंगलों के जलने से कोई सरोकार नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि आगजनी की सूचना के बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही है।
“ऐसा लगता है मानो अधिकारी कुंभकरणी नींद में सोए हुए हैं। जब रक्षक ही मौन हो जाए, तो भक्षक बने आग से जंगलों को कौन बचाएगा?”
सिस्टम फेल: दावों की खुली पोल
आग बुझाने के लिए विभाग के पास न तो पर्याप्त संसाधन नजर आ रहे हैं और न ही कोई पुख्ता रणनीति। हर साल फायर वॉचर और गश्त के नाम पर लाखों खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आग लगने पर वन विभाग के पास ‘हाथ पर हाथ धरे बैठने’ के अलावा कोई चारा नहीं बचता।
मुख्य बिंदु जो प्रशासन पर दाग लगा रहे हैं:
निगरानी का अभाव:  पेंडारी और आस पास के क्षेत्र में गश्त की भारी कमी।
वन्यजीवों पर संकट: आग के कारण जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर भागने को मजबूर हैं।
अधिकारी की उदासीनता: राम नारायण राम की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश।

अगर वक्त रहते इस आग पर काबू नहीं पाया गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो वाड्रफनगर के ये हरे-भरे जंगल सिर्फ यादों और कागजों में सिमट कर रह जाएंगे। क्या उच्च अधिकारी इस ‘कुंभकरणी नींद’ को तोड़कर कोई सख्त कदम उठाएंगे या फिर आग की लपटों को अपना काम करने की खुली छूट दी जाएगी?

भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा: नायब तहसीलदार ने पद की धमक में छीनी बुजुर्ग महिला की जमीन, कलेक्टर की जांच में पाप का घड़ा फूटा..

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर/मैनपाट: छत्तीसगढ़ के शिमला के रूप में विख्यात मैनपाट की हसीन वादियों में अब ‘भू-माफिया’ रूपी सरकारी तंत्र की काली नजर लग चुकी है। शासन जिस मैनपाट को पर्यटन के मानचित्र पर चमकाने का प्रयास कर रहा है, वहीं व्यवस्था के रक्षक ही भक्षक बनकर गरीबों को उजाड़ने पर आमादा हैं। ताजा मामला मैनपाट के अमगांव का है, जहाँ एक रसूखदार नायब तहसीलदार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक असहाय बुजुर्ग महिला की बेशकीमती जमीन पर डकैती डाली है।
कुटरचित दस्तावेजों का खेल: तहसीलदार और आरआई की मिलीभगत
सरगुजा कलेक्टर द्वारा कराई गई उच्च स्तरीय जांच में इस काले कारनामे का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, नायब तहसीलदार संजीत पाण्डेय ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर, राजस्व निरीक्षक (RI) मार्टिन एक्का के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों का मायाजाल बुना। पद की मर्यादा को कलंकित करते हुए पाण्डेय ने उक्त विवादित जमीन के फर्जी दस्तावेज अपने पुत्र अचिंत्य पाण्डेय के नाम पर तैयार करवाए। सरकारी कलम की ताकत का ऐसा नग्न प्रदर्शन किया गया कि रातों-रात कागजों में हेरफेर कर बुजुर्ग महिला की जमीन पर कब्जा जमा लिया गया और वहां बाउंड्री वॉल व नलकूप खनन जैसे अवैध निर्माण कार्य भी कर लिए गए।


साजिश और दमन: पहले जमीन लूटी, फिर जेल भेजने की धमकी दी
नायब तहसीलदार की निर्दयता यहीं नहीं रुकी। आरोप है कि जब पीड़ित बुजुर्ग दंपत्ति ने अपनी जमीन बचाने की कोशिश की, तो उन्हें डराने-धमकाने के लिए संजीत पाण्डेय ने पुलिस और प्रशासन का भय दिखाया। गरीब बुजुर्गों को फर्जी तरीके से ‘वृक्षों की कटाई’ के मामले में फंसा दिया गया ताकि वे कानूनी कार्रवाई के डर से चुप बैठ जाएं। एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी अपराधियों की तरह बुजुर्गों को अन्य झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दे रहा है।


कलेक्टर की जांच में पुष्टि, अब कार्रवाई का इंतजार
पीड़ित महिला की जनदर्शन में की गई शिकायत ने इस पूरे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। कलेक्टर की जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि नायब तहसीलदार ने पद का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी की है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन अपने ही विभाग के इस ‘भ्रष्ट अधिकारी’ पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करेगा या कागजी खानापूर्ति कर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?

कलेक्टर सरगुजा द्वारा इस मामले में सरगुजा संभाग आयुक्त को लिखे गए पत्र का एक अंश

मैनपाट की जनता में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि न्याय की रक्षा करने वाले ही जमीन हड़पने लगेंगे, तो गरीब और बेसहारा लोग न्याय की गुहार किसके सामने लगाएंगे?

“सुशासन तिहार 2026” में जनसमस्याओं का मौके पर समाधान, मंत्री जायसवाल बोले—सरकार अब सीधे जनता के बीच…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी/ खड़गवां किशन शाह : विकासखंड खड़गवां के ग्राम मझौली में आयोजित “गांव-गांव, द्वार-द्वार सुशासन तिहार 2026” के तहत जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों की भारी भागीदारी देखने को मिली। 10 ग्राम पंचायतों को शामिल करते हुए आयोजित इस शिविर में आमजन की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया, जिससे लोगों को मौके पर ही राहत मिली।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित जनप्रतिनिधियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। सुबह से ही ग्रामीण अपनी विभिन्न समस्याएं लेकर शिविर पहुंचे, जहां अलग-अलग विभागों के स्टॉल लगाकर तत्काल समाधान की व्यवस्था की गई थी।
राज्य सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून तक चलाए जा रहे इस विशेष अभियान का उद्देश्य शासकीय योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचाना तथा शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करना है। शिविर में एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
शिविर में कुल 392 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कई का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया। इस दौरान पात्र हितग्राहियों को राशन कार्ड, वन अधिकार पट्टा, आयुष्मान कार्ड एवं जॉब कार्ड सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ वितरित किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनका समाधान कर रही है। उन्होंने कहा कि “सुशासन तिहार” के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसेवा को मजबूत किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भटकना नहीं पड़ रहा।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

ऑनलाइन सट्टे की लत ने ली युवा व्यवसायी की जान: सुसाइड नोट में लिखा- “पापा मुझे माफ करना”…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर: शहर के मायापुर निवासी एक 40 वर्षीय युवा व्यवसायी ने ऑनलाइन सट्टे और कर्ज के दलदल में फंसकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पुराना बस स्टैंड स्थित ड्राईफ्रूट्स व्यवसायी संदीप अग्रवाल ने शुक्रवार दोपहर दुकान में कीटनाशक का सेवन कर लिया, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
दुकान से घर लौटकर पिता को दी जानकारी
घटना शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे की है। मायापुर निवासी संदीप अग्रवाल (पिता राजेंद्र बंसल) अपनी दुकान से घर पहुंचे और बदहवास हालत में पिता से कहा— “मैं अब आप लोगों को और परेशान नहीं करूंगा, मैंने दुकान में जहर खा लिया है।” यह सुनते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजन उन्हें तत्काल होलीक्रॉस अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सुसाइड नोट: “ब्याजखोरों ने उठाया फायदा”
पुलिस को संदीप के पास से दो सुसाइड नोट मिले हैं, जो उन्होंने अपनी पत्नी और पिता के नाम लिखे थे। सुसाइड नोट में संदीप ने अपने पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि उन पर लाखों का कर्ज है, लेकिन अब किसी को एक भी रुपया देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लिखा कि कई लोगों ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाया और ऊंचे ब्याज दरों पर पैसे दिए। वे सालों से ब्याज वसूल रहे थे। नोट में जिक्र है कि कई लोगों ने उन्हें सट्टा खिलवाया और हारने के बाद पैसों के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा था। सुसाइड नोट में कर्ज और नुकसान का विस्तार से वर्णन है, हालांकि संदीप ने किसी विशेष व्यक्ति का नाम उजागर नहीं किया है।
परिवार का इकलौता सहारा था संदीप
संदीप अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उन पर बीमार पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी थी। परिजनों के अनुसार, संदीप को क्रिकेट मैच में ऑनलाइन सट्टा खेलने की लत लग गई थी, जिसमें वह लाखों रुपये गंवा चुके थे। कर्जदाताओं के बढ़ते दबाव और व्यापार में घाटे के कारण वे गहरे मानसिक तनाव में थे।
 
सट्टेबाजी और जुआ मानसिक और आर्थिक विनाश का कारण बनते हैं। यदि आप या आपका कोई परिचित तनाव में है, तो कृपया अपनों से बात करें या हेल्पलाइन नंबरों की मदद लें। जीवन अनमोल है।

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