शिवनंदनपुर नगर पंचायत: जीत के उत्साह के बीच गहराया ‘जाति प्रमाण पत्र’ का विवाद, कानूनी पेच में फंस सकता है शपथ ग्रहण!

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हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सूरजपुर जिले के नवगठित नगर पंचायत शिवनंदनपुर में चुनावी नतीजे आने के ठीक अगले ही दिन सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। कल ही घोषित हुए परिणामों में अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाले भाजपा प्रत्याशी रितेश जायसवाल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि विपक्ष उनके जाति प्रमाण पत्र की वैधानिकता को लेकर कानूनी और प्रशासनिक मोर्चा खोलने की तैयारी में है।

क्या है पूरा मामला? सूत्रों के अनुसार आरोप

अपपुष्ट सूत्रों और सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, नवनिर्वाचित अध्यक्ष रितेश जायसवाल के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विपक्षी खेमे द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि विपक्षी दल इस मामले में राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जता रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह पूरी तरह से जांच का विषय है।
इस मामले को लेकर कांग्रेस प्रत्याशी संजय सोनी काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो वे जल्द ही अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर को ज्ञापन सौंप सकते हैं। संजय सोनी का कहना है कि उन्होंने नामांकन के दौरान भी इस विषय पर अनुविभागीय अधिकारी (SDM) शिवानी जायसवाल के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने का प्रयास किया था।

कानूनी पहलू: क्या रुक सकता है शपथ ग्रहण?

इस पूरे मामले में अगर कानूनी जानकारों और विशेषज्ञों की राय पर गौर किया जाए, तो स्थिति काफी संवेदनशील है:

  • जांच समिति (Scrutiny Committee) की भूमिका: भारत के सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों (माधुरी पाटिल बनाम अतिरिक्त कमिश्नर केस) के अनुसार, किसी भी जाति प्रमाण पत्र की वैधता की जांच केवल राज्य स्तरीय ‘उच्च स्तरीय छानबीन समिति’ (High-Powered Scrutiny Committee) ही कर सकती है। जब तक यह समिति प्रमाण पत्र को अवैध घोषित नहीं करती, तब तक किसी को सीधे तौर पर दोषी नहीं माना जा सकता।
  • क्या शपथ ग्रहण पर रोक लग सकती है? कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि शपथ ग्रहण से पहले जिला प्रशासन या सक्षम प्राधिकारी के पास वैधानिक साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज होती है, और प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध लगता है, तो प्रशासन जांच पूरी होने तक शपथ ग्रहण कार्यक्रम को अस्थायी रूप से टालने या रोकने का निर्णय ले सकता है।
  • चुनाव याचिका (Election Petition): यदि एक बार शपथ ग्रहण संपन्न हो जाता है, तो इसके बाद निर्वाचित प्रत्याशी को हटाने का एकमात्र कानूनी रास्ता ‘छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम’ के तहत संबंधित न्यायालय या ट्रिब्यूनल में ‘चुनाव याचिका’ (Election Petition) दायर करना ही बचता है।

बढ़ता सियासी पारा

चूंकि केंद्र और राज्य दोनों ही जगह भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है, ऐसे में इस मामले को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला एक बड़े सियासी घमासान का रूप ले सकता है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होंगे।

पक्ष रखने से किया इनकार

इस पूरे विवाद और आरोपों पर जब हमारी टीम ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष रितेश जायसवाल का पक्ष जानने का प्रयास किया, तो उन्होंने अपनी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए फिलहाल इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।


नोट: यह खबर पूरी तरह से सूत्रों से मिली जानकारी और राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं पर आधारित है। किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हमारा संस्थान किसी भी पक्ष पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाता है और मामले की निष्पक्ष जांच का समर्थन करता है।

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