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मण्डी समिति सूरजपुर में निर्माण कार्यों के नाम पर ‘अनोखा खेल’, हर काम की लागत ठीक 9.94 लाख; चहेते ठेकेदारों पर ही मेहरबानी….

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर :  कृषि उपज मण्डी समिति सूरजपुर के अंतर्गत आने वाले विभिन्न शासकीय धान उपार्जन केन्द्रों में चल रहे निर्माण कार्यों में एक बड़ा ही दिलचस्प और संदेहास्पद खेल सामने आया है। मण्डी समिति द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, जिले के 11 अलग-अलग उपार्जन केन्द्रों में पक्का फड़ निर्माण एवं समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि प्रत्येक कार्य की प्राक्कलित राशि (लागत) बिल्कुल एक समान यानी 9.94 लाख रुपये रखी गई है।
इतना ही नहीं, कुल 11 निर्माण कार्यों के ठेके केवल दो ही चहेते ठेकेदारों में बांट दिए गए हैं। इस पूरे मामले में विभागीय कार्यप्रणाली, प्राक्कलन (Estimate) की सत्यता और निविदा प्रक्रिया (Tendering Process) को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
10 लाख से कम की सीमा का खेल?
जानकारों की मानें तो सरकारी विभागों में अक्सर ई-टेंडरिंग की जटिल प्रक्रियाओं, उच्च स्तरीय वित्तीय स्वीकृतियों और कड़े नियमों से बचने के लिए जानबूझकर किसी भी कार्य की लागत को 10 लाख रुपये से कम (जैसे 9.94 लाख) रखा जाता है। सूरजपुर मण्डी समिति के इन सभी 11 कार्यों में लागत का ठीक 9.94 लाख रुपये होना इसी प्रशासनिक लूपहोल (खामी) की ओर इशारा करता है। क्या सभी जगहों पर जमीन का आकार, समतलीकरण की जरूरत और सामग्री की लागत बिल्कुल एक समान थी? यह अपने आप में एक बड़ा यक्ष प्रश्न है।

केवल दो ठेकेदारों पर पूरी मण्डी मेहरबान
सार्वजनिक हुई सूची के मुताबिक, मण्डी समिति के अधिकारियों ने सारे नियम-कायदों को ताक पर रखकर 11 में से 8 महत्वपूर्ण काम अकेले एक ही ठेकेदार को सौंप दिए हैं, जबकि शेष 3 काम दूसरे ठेकेदार के खाते में गए हैं:
1. अंकित दुबे (गणेशपुर, सिलफिली): इन्हें कुल 8 स्थानों पर कार्य मिला है। इनमें बतरा, कंचनपुर, कंदरई, सिरसी, केशवनगर, बकीरमा, टमकी और खोपा शामिल हैं। इन 8 कार्यों की कुल लागत ₹79.52 लाख है।
2. विनय जायसवाल (बड़सरा, भैयाथान): इन्हें शेष 3 स्थानों—कुर्शीडीह, करौटी बी और सावारांवा का कार्य सौंपा गया है। इन 3 कार्यों की कुल लागत ₹29.82 लाख है।
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों और स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि जब एक ही ठेकेदार को इतने सारे क्षेत्रों में एक साथ काम दे दिया जाता है, तो समय पर काम पूरा होना और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही, स्थानीय छोटे ठेकेदारों को इस प्रक्रिया से दूर रखकर केवल चुनिंदा लोगों को उपकृत करना सीधे तौर पर पारदर्शिता पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले के उजागर होने के बाद क्या जिला प्रशासन या उच्च अधिकारी इन निर्माण कार्यों के प्राक्कलन और आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराएंगे, या फिर ‘9.94 लाख का यह जादुई आंकड़ा’ फाइलों में सिमट कर रह जाएगा।

छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में बड़ी पदोन्नति: 61 उप निरीक्षकों (SI) की निरीक्षक पद हेतु ‘योग्यता सूची’ जारी….

हिंद स्वराष्ट्र नवा रायपुर :  छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) छत्तीसगढ़, नवा रायपुर द्वारा वर्ष 2026 के लिए उप निरीक्षक (Sub-Inspector) से ‘निरीक्षक’ (Inspector) के पद पर पदोन्नति हेतु आधिकारिक योग्यता सूची (Fit List) जारी कर दी गई है। इस बहुप्रतीक्षित सूची में राज्य के विभिन्न जिलों और विशेष इकाइयों में तैनात कुल 61 उप निरीक्षकों के नामों को हरी झंडी दी गई है।
पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय की ओर से जारी इस आदेश के तहत, सूची में पहले नंबर पर सक्ती जिले में पदस्थ उप निरीक्षक चन्द्रप्रकाश कंवर का नाम शामिल है। इसके अलावा सूची में वर्ष 2008 और मुख्य रूप से वर्ष 2013 बैच के जांबाज अधिकारियों को बड़े पैमाने पर स्थान मिला है।
नक्सल मोर्चे से लेकर मैदानी इलाकों के अफसरों को मिला तोहफा
जारी सूची में बस्तर, बीजापुर, सुकमा, कांकेर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे संवेदनशील नक्सल मोर्चों पर तैनात उप निरीक्षकों के साथ-साथ रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा, गरियाबंद, कबीरधाम और नवगठित जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही सहित विभिन्न जिलों के फील्ड अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा सीबीआई (CBI), एसीबी (ACB) और एसआईबी (SIB) जैसी विशेष विंग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारियों को भी योग्यता सूची में शामिल कर पदोन्नति का रास्ता साफ किया गया है।
    

छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 8 IAS अधिकारियों के तबादले, कई जिलों के जिला पंचायत CEO बदले गए…

हिंद स्वराष्ट्र नवा रायपुर :  छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 8 अधिकारियों के तबादले और नवीन पदस्थापना आदेश जारी किए हैं। राज्यपाल के नाम से सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार द्वारा जारी इस आदेश के तहत कई जिलों के जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) को बदला गया है, वहीं कुछ अधिकारियों को महत्वपूर्ण अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
जारी आदेश के अनुसार, वर्ष 2011 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और नगरीय प्रशासन एवं विकास के संचालक रिमिजियुस एक्का को उनके वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा, धमतरी जिला पंचायत के सीईओ गजेन्द्र सिंह ठाकुर (2019 बैच) को मंत्रालय में उप सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन तथा पुनर्वास विभाग के पद पर पदस्थ किया गया है।
प्रशासनिक सर्जरी में नगर पालिक निगम भिलाई को भी नया प्रशासनिक मुखिया मिला है। राजनांदगांव जिला पंचायत की सीईओ सुरुचि सिंह (2020 बैच) को अब भिलाई नगर निगम का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही बस्तर, कोरबा, दंतेवाड़ा और धमतरी सहित कई जिलों के जिला पंचायतों के सीईओ बदले गए हैं।
वर्ष 2023 बैच के तीन युवा आईएएस अधिकारियों—एम. भार्गव, तन्मय खन्ना और दुर्गा प्रसाद अधिकारी को अनुविभागीय अधिकारी (SDM) से पदोन्नत करते हुए विभिन्न जिलों में जिला पंचायत सीईओ की कमान सौंपी गई है।
तबादले एवं नवीन पदस्थापना की पूरी सूची:
1. रिमिजियुस एक्का (2011): संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास के साथ मुख्य कार्यपालन अधिकारी, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA)का अतिरिक्त प्रभार मिला।
2. गजेन्द्र सिंह ठाकुर (2019):  सीईओ, जिला पंचायत, धमतरी से उप सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन तथा पुनर्वास विभाग, मंत्रालय।
3. प्रतीक जैन (2020):  सीईओ, जिला पंचायत, बस्तर से मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, कोरबा।
4. सुरुचि सिंह (2020): सीईओ, जिला पंचायत, राजनांदगांव से आयुक्त, नगर पालिक निगम, भिलाई।
5. जयंत नाहटा (2021): सीईओ, जिला पंचायत, दंतेवाड़ा से मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, धमतरी।
6. एम. भार्गव (2023):एसडीएम, डोंगरगढ़ (राजनांदगांव) से मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, दंतेवाड़ा।
7.तन्मय खन्ना (2023): एसडीएम, कटघोरा (कोरबा) से मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, बस्तर।
8.  दुर्गा प्रसाद अधिकारी (2023):  एसडीएम, घरघोड़ा (रायगढ़) से मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, राजनांदगांव।
राज्य शासन द्वारा किए गए इस फेरबदल को प्रशासनिक कसावट और विकास कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी नियुक्तियां अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक प्रभावी रहेंगी।

जानकारी के अभाव में न छूटे किसी का प्रवेश: भैयाथान में हेल्प डेस्क लगाकर सहयोग कर रहे एबीवीपी कार्यकर्ता

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/भैयाथान मुकेश गुप्ता: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा पंडित रविशंकर त्रिपाठी शासकीय महाविद्यालय भैयाथान में हेल्प डैक्स लगाकर निरंतर 15 जुलाई तक प्रतिदिन संचालित रहेगा। हेल्प डेस्क का उद्देश्य महाविद्यालय में प्रवेश  लेने वाले नवप्रवेशी विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को प्रवेश प्रक्रिया के दौरान हर संभव सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। परिषद के कार्यकर्ता विद्यार्थियों को ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रवेश प्रक्रिया पंजीयन आवश्यक दस्तावेज विषय चयन शुल्क संबंधित जानकारी तथा प्रवेश से जुड़े अन्य समस्याओं के समाधान में सहयोग प्रदान कर रहे हैं, ताकि किसी भी विद्यार्थी का प्रवेश केवल जानकारी के अभाव में प्रभावित न हो। परिषद के कार्यकर्ताओं ने बताया कि एबीवीपी सदैव छात्र हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं। इस उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष प्रवेश सत्र के दौरान सहायता हेल्प डेस्क का संचार किया जाता हैं, जिससे दूर-दराज क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थियों को समय पर सही जानकारी और आवश्यक सहयोग मिल सके। परिषद ने सभी नवप्रवेशी विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों से अपील की है कि प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी मार्गदर्शन अथवा सहायता के लिए हेल्प डेस्क का  लाभ उठाएं। एबीवीपी का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र विद्यार्थी बिना किसी परेशानी के समय पर महाविद्यालय में प्रवेश प्राप्त कर सके इस हेल्प डेस्क के संचालन में संदीप कुशवाहा अभिषेक कुशवाहा समर कुशवाहा रोशनी यादव ,संध्या देवांगन , समिता कुशवाहा, हर्ष गुर्जर ,चित्रभुवन पैकरा , ध्रुव प्रसाद कुशवाहा का योगदान रहा ।

सूरजपुर में सिस्टम की बड़ी लापरवाही: नाबालिग की करा दी गई शादी, महिला एवं बाल विकास विभाग ने साधी चुप्पी!आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के एक ‘झूठ’ ने खोली पोल…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/भैयाथान मुकेश गुप्ता  : एक तरफ सरकार बाल विवाह रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। सूरजपुर जिले से एक बेहद गंभीर और सिस्टम की लापरवाही को उजागर करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नाबालिग युवक का सरेआम विवाह संपन्न करा दिया गया और जिम्मेदार ‘महिला एवं बाल विकास विभाग’ गहरी नींद में सोता रहा। इस पूरे मामले में विभाग की चुप्पी कई बड़े सवालों को जन्म दे रही है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज मामला जिले के भैयाथान विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सिरसी के नावापारा का है जहां चेतराज राजवाड़े के पुत्र की बारात 19 जून 2026 को ग्राम बिनकारा जिला सूरजपुर को गई और विवाह उपरांत 21 जून 2026 को सिरसी नावापारा में प्रीतिभोज एवं आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया गया। आश्चर्य की बात यह रही कि यहाँ नियमों और कानूनों को ताक पर रखकर एक नाबालिग युवक का विवाह करा दिया गया। गांव में इतनी बड़ी घटना हो गई, लेकिन बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी जिस विभाग पर है, उसे इसकी भनक तक नहीं लगी—या यूं कहें कि जानकर भी अनजान बने रहने का नाटक किया गया।
चोर की दाढ़ी में तिनका: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का बेतुका बयान
मामले का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू तब सामने आया, जब मीडिया ने इस लापरवाही की तह तक जाने की कोशिश की। ग्राम पंचायत सिरसी के नवापारा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मोनी गुप्ता से जब पत्रकार ने इस बाबत सवाल किया, तो उन्होंने बड़ी ही चालाकी से मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की।
मोनी गुप्ता ने तुरंत कह दिया कि “शादी के वक्त मैं छुट्टी पर थी।”
लेकिन यहीं वह अपने ही बुने जाल में फंस गईं। पत्रकार ने बातचीत के दौरान उन्हें शादी की कोई तारीख बताई ही नहीं थी! ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि:
जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को यह पता ही नहीं था कि शादी किस दिन हुई है, तो उन्होंने एक ही झटके में यह कैसे कह दिया कि उस दिन वह छुट्टी पर थीं?
बाद में जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें शादी की जानकारी थी, तो उन्होंने साफ मुकरते हुए कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बिना तारीख जाने खुद को छुट्टी पर बताना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
खड़े होते हैं कई गंभीर सवाल:
इस पूरे घटनाक्रम ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
गांव में नाबालिग युवक की शादी की तैयारियां कई दिनों से चल रही होंगी, तो क्या ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले मैदानी अमले (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका) को इसकी जानकारी नहीं थी?
दूसरा सवाल क्या मामले को दबाने के लिए ‘छुट्टी’ का बहाना पहले से ही तैयार कर लिया गया था?
तीसरा सवाल घटना सामने आने के बाद भी महिला एवं बाल विकास विभाग के उच्चाधिकारी अब तक मौन क्यों हैं?
कार्यवाही का इंतजार
यह मामला सिर्फ एक लापरवाही का नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे कानून के उल्लंघन और कर्तव्यहीनता का है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मोनी गुप्ता का यह विरोधाभासी बयान उन्हें सीधे तौर पर संदेह के घेरे में लाता है। अब देखना यह होगा कि सूरजपुर जिले के आला अधिकारी और कलेक्टर इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं। क्या लापरवाह कर्मचारियों पर गाज गिरेगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

मंत्रालय के आदेश को भी ठेंगे पर रखती हैं SDM शिवानी जायसवाल? तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा को बचाने के लिए 3 महीने से दबा रखी है जांच फाइल!

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : लटोरी तहसील में पद के दुरुपयोग और नियमों को ताक पर रखने का यह मामला अब सीधे तौर पर प्रशासनिक अवहेलना और बड़ी लीपापोती की ओर इशारा कर रहा है। नए सनसनीखेज दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि छत्तीसगढ़ शासन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग मंत्रालय (नवा रायपुर) और कलेक्टर कार्यालय सूरजपुर के सख्त निर्देशों के बावजूद, सूरजपुर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी एसडीएम महोदया महीनों से कुंडली मारकर बैठी हैं। आरोपी तहसीलदार को अभयदान देने के लिए जांच प्रतिवेदन (Report) को दबाकर रखना अब उजागर हो चुका है।
मंत्रालय से आया था आदेश, SDM ने नहीं दिया भाव
आधिकारिक दस्तावेज़  के मुताबिक, आवेदिका मृण्मयी पाण्डेय द्वारा लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा के विरुद्ध पद के दुरुपयोग और सिविल सेवा आचरण नियमावली, 1964 के नियम 3(1), 3(2)(i) एवं 3(2)(iii) के उल्लंघन की गंभीर शिकायत की गई थी।
इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए दिनांक 09 मार्च 2026 को कलेक्टर कार्यालय सूरजपुर (शिकायत शाखा) ने पत्र क्रमांक 1428 जारी कर एसडीएम सूरजपुर को तत्काल नियमानुसार जांच कर कृत कार्यवाही से अवगत कराने का आदेश दिया था।
महीनों बीते… पर साहब का प्रतिवेदन अब भी ‘वांछित’ है!
इस बात को बीते तीन महीने से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन मजाल है कि अनुविभागीय अधिकारी (रा.) सूरजपुर के कानों पर जूं तक रेंगी हो।


दूसरा दस्तावेज़ दिनांक 09 जून 2026 इस प्रशासनिक नाकामी और जानबूझकर की जा रही देरी पर मुहर लगाता है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जब इस जांच की संपूर्ण दस्तावेज और सत्यापित छायाप्रति मांगी गई, तो जिला जनसूचना अधिकारी (कलेक्टर कार्यालय) को लिखित में यह जवाब देना पड़ा कि:
“उक्त के संबंध में चाही गई जानकारी अनुविभागीय अधिकारी (रा०) सूरजपुर जिला सूरजपुर को पत्र प्रारूप आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई है, प्रतिवेदन वांछित है।”


राजस्व विभाग में ‘वांछित है’ का सीधा मतलब यह होता है कि उच्च अधिकारियों के आदेश के बावजूद एसडीएम कार्यालय ने तीन महीने में जांच पूरी करने या उसका जवाब भेजने की जहमत नहीं उठाई।
जनता पूछ रही है तीखे सवाल:
यह सुस्ती है या सोची-समझी रणनीति?: जब मामला सीधे तौर पर मंत्रालय (नवा रायपुर) के संदर्भ से जुड़ा हो, तो आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि एसडीएम सूरजपुर तीन महीने बाद भी प्रतिवेदन जमा नहीं कर पाईं?
किसे बचाने का हो रहा प्रयास?: क्या जांच रिपोर्ट को इसलिए लटकाया जा रहा है ताकि समय बीतने के साथ मामला ठंडा पड़ जाए और आरोपी तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा के खिलाफ कोई बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई न हो सके?
कलेक्टर के आदेश की कीमत क्या?: जब डिप्टी कलेक्टर और कलेक्टर कार्यालय के पत्रों को अनुविभाग स्तर पर इस तरह नजरअंदाज किया जाएगा, तो जिले में न्याय और सुशासन की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
दस्तावेजों की जुबानी यह साफ है कि लटोरी तहसीलदार मामले में केवल नियम ही नहीं तोड़े गए, बल्कि जांच प्रक्रिया को भी कछुए की गति से चलाकर न्याय का गला घोंटा जा रहा है। अब देखना यह है कि जून महीने में ‘प्रतिवेदन वांछित’ होने की बात सामने आने के बाद, क्या कलेक्टर सूरजपुर इस बेहद सुस्त और संदेहास्पद प्रशासनिक रवैये पर कड़ा रुख अख्तियार करेंगे?

सिस्टम का ‘सरेंडर’: करोड़ों के दवा घोटाले में जांच रिपोर्ट धूल फांक रही, SDM पति डॉ. आयुष जायसवाल को बचाने में जुटा पूरा महकमा!

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर: सरगुजा जिले के नवापारा शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुए करोड़ों रुपये के दवा घोटाले ने प्रशासनिक ईमानदारी की पोल खोल कर रख दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के निर्देश पर गठित सात सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति ने घोटाले की पुष्टि कर दी है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।
पूरे जिले में अब यह सवाल गूंज रहा है कि क्या अंबिकापुर का प्रशासन एक SDM के रसूख के आगे नतमस्तक हो गया है? इस पूरे गबन कांड में वर्ष 2024-25 के दौरान क्रय प्रभारी चिकित्सा अधिकारी रहे डॉ. आयुष जायसवाल की भूमिका सवालों के घेरे में है, जो वर्तमान में सूरजपुर एसडीएम शिवानी जायसवाल के पति हैं।


अधिकारियों की मेज पर पड़े हैं ये ‘काले चिठ्ठे’, फिर भी कार्रवाई शून्य
जांच समिति (जिसमें डॉ. वाई. के. किण्डो, डॉ. पी. के. सिन्हा जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे) की रिपोर्ट चीख-चीख कर कह रही है कि सरकारी खजाने को किस तरह लूटा गया:
रिपोर्ट में साफ लिखा है कि जब वर्ष 2019-2020 से 2024 तक के खरीदी दस्तावेज मांगे गए, तो बताया गया कि पिछले वर्ष कार्यालय में आग लगने से सभी रिकॉर्ड जल गए हैं। क्या यह महज एक हादसा था या करोड़ों का गबन छिपाने की सोची-समझी साजिश?
बिना ‘रेट’ के लाखों की खरीदी: वित्तीय वर्ष 2024-25 में दवाओं और उपकरणों की खरीदी के लिए जो नोटशीट बनाई गई, उसमें दर (Rate) का उल्लेख ही नहीं किया गया और बिना रेट तय किए ही 2 से 3 लाख रुपये के क्रय आदेश जारी कर दिए गए।
नियमों की सरेआम धज्जियां:  सीमित निविदा (कोटेशन) के बजाय एक ही फर्म को एक दिन में 50,000 रुपये के कई ऑर्डर देकर सिंगल टेंडर के माध्यम से भ्रष्टाचार किया गया।
कैंसर की दवाओं में भी खेल: कीमोथेरेपी जैसी गंभीर बीमारी की दवाओं के लिए CGMSCL से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तक नहीं लिया गया और संबंधित चिकित्सक द्वारा अपने ही नाम पर दवाएं इश्यू दिखाकर खर्च बता दिया गया।
गायब स्टॉक: जो दवाएं खरीदी गईं, स्टॉक रजिस्टर में उनकी एंट्री स्पष्ट नहीं है और वार्डों में बांटी गई दवाओं के रिकॉर्ड से इसका कोई मिलान नहीं हो रहा है।
अयोग्य कर्मचारियों से काम: फार्मासिस्ट अधिनियम 1948 का उल्लंघन करते हुए अधिकांश औषधियों और सामग्रियों का क्रय एक क्लर्क/सहायक ग्रेड-3 के द्वारा करवाया गया।
प्रशासन की चुप्पी: मजबूरी या मिलीभगत?
जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट और जांच प्रतिवेदन अधिकारियों को सौंप दिया है। सवाल यह है कि जब गबन, दस्तावेजों को खुर्द-बुर्द करने और सरकारी निय1मों के सीधे उल्लंघन के लिखित प्रमाण मौजूद हैं, तो अब तक FIR दर्ज क्यों नहीं की गई?
क्या स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन केवल इसलिए मौन साधे हुए है क्योंकि मुख्य आरोपी डॉ. आयुष जायसवाल के पास ‘SDM शिवानी जायसवाल के पति’ होने का प्रशासनिक कवच है? अगर कोई आम कर्मचारी इस तरह करोड़ों रुपये का हिसाब नहीं दे पाता और फाइलें जलने का बहाना बनाता, तो क्या प्रशासन तब भी इतना ही ‘दयालु’ रहता?
अंबिकापुर की जनता और आरटीआई कार्यकर्ता अब सीधे कलेक्टर और स्वास्थ्य मंत्री से जवाब मांग रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कार्रवाई न होना, न केवल भ्रष्टाचार को संरक्षण देना है, बल्कि आम जनता के विश्वास के साथ सबसे बड़ा धोखा है। प्रशासन को यह तय करना होगा कि वह न्याय के साथ खड़ा है या रसूखदारों के साथ।

बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: छत्तीसगढ़ में आदिम जाति विकास विभाग ने जारी की तबादला सूची, 33 जनपद सीईओ और क्षेत्र संयोजक इधर से उधर…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग मंत्रालय द्वारा प्रशासनिक दृष्टिकोण से राज्य में एक बड़ा फेरबदल किया गया है। विभाग के अंतर्गत कार्यरत कुल 33 अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर उन्हें नए जिलों और जनपद पंचायतों में पदस्थ किया गया है।
महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी इस आधिकारिक आदेश के अनुसार, स्थानांतरित होने वाले अधिकारियों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (मु.का.अधि.), जनपद पंचायत, क्षेत्र संयोजक, सहायक संचालक तथा खंड शिक्षा अधिकारी स्तर के प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। यह आदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार अवर सचिव कुसुम कुजूर द्वारा हस्ताक्षरित कर जारी किया गया है।
प्रमुख स्थानांतरण और नई पदस्थापना:
अमजद जाफरी (मु.का.अधि., जनपद पंचायत, गरियाबंद) को अब कार्यालय-आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, नवा रायपुर भेजा गया है।
अमित भाटिया (मु.का.अधि., जनपद पंचायत, जगदलपुर, बस्तर) को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, ओरछा, जिला-नारायणपुर बनाया गया है।
लोकेश्वर (क्षेत्र संयोजक, ओरछा) का स्थानांतरण कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, जिला-राजनांदगांव में किया गया है।
खुशबु शास्त्री (मु.का.अधि., मैनपाट, सरगुजा) को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, लखनपुर, जिला-सरगुजा की जिम्मेदारी दी गई है।
भूपेन्द्र कुमार सोनवानी (मु.का.अधि., पाली, कोरबा) को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, सूरजपुर भेजा गया है।
शुभा दामोदर मिश्रा (मु.का.अधि., गौरेला) को कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, जिला-बिलासपुर नियुक्त किया गया है।


15 दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश
शासन द्वारा जारी इस आदेश में कड़े निर्देश दिए गए हैं कि स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को अपनी नवीन पदस्थापना के स्थान पर 15 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करना होगा और अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। उक्त सभी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
इस व्यापक फेरबदल को राज्य में जमीनी स्तर पर विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आदेश की प्रतिलिपियां माननीय मुख्यमंत्री सचिवालय, विभागीय मंत्री के विशेष सहायक, मुख्य सचिव कार्यालय तथा संबंधित जिलों के कलेक्टर्स को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई हैं।

दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव के समापन समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव का समापन समारोह रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सराबोर रहा। कार्यक्रम में स्कूली छात्र-छात्राओं एवं कलाकारों ने लोकनृत्य, नाटक व गीत-संगीत की शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। पूरे वातावरण में उत्साह, भक्ति और उल्लास की मनोहारी छटा बिखरी रही। कार्यक्रम में श्री राम के भक्तिमय गीत-संगीत की प्रस्तुतियों से वातावरण राममय हुआ।

इस दौरान जांजगीर चाम्पा जिले के शांति प्रतिमा डांस ग्रुप की महिशासुर मर्दिनी नृत्य नाटिका की शानदार प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरीं।  कस्तूरबा गांधी विद्यालय लखनपुर की छात्राओं ने मेघदूतम पर आधारित नृत्य नाटिका की मनमोहक प्रस्तुत दी। वहीं साई म्यूजिकल पारम्परिक नृत्य समूह ने हनुमान जी की लीला, रामभजन एवं शबरी प्रसंग पर नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी। प्रकाश रसीला ने लोक गीत एवं वाद्य यंत्र की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में स्टार ग्रुप ने सामूहिक नृत्य, शास्वती बनर्जी ने नृत्य, जागृति म्युजिकल ग्रुप (विस्वा) ने लोक संगीत, कस्तूरबा गाँधी बालिका आवासीय विद्यालय ने बैंड, कस्तूरबा गाँधी बालिका आवासीय विद्यालय ने राजस्थानी नृत्य, शा.उ.मा. विद्यालय सलका उदयपुर ने सरगुजिहा नृत्य, कन्या छात्रावास उदयपुर ने आदिवासी नृत्य, सेजेस उदयपुर द्वारा  सामूहिक नृत्य की प्रस्तुति दी गई। वहीं शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झिरमिटी उदयपुर ने सामूहिक नृत्य, वियन्नी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय झिरमिटी उदयपुर ने सामूहिक नृत्य, बृजेश शर्मा ने भजन, संदीप गोस्वामी ने लोक गीत भजन, लालसाय सरगुजिहा पार्टी ने छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य, बीजीएम म्युजिकल ग्रुप ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। देर शाम तक चले इन कार्यक्रमों ने दर्शकों को उत्सव स्थल पर बांधे रखा।

झूठी शिकायत कर लोगों को फंसाने की कोशिश पड़ी भारी, महिला पर केस दर्ज…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन शाह : जिले की सिटी कोतवाली पुलिस ने झूठी शिकायत देकर लोगों को फंसाने और शासन से अनुचित लाभ लेने के प्रयास के मामले में एक महिला के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की है।
पुलिस के अनुसार, सावित्री बसोर ने अपने पति सहित अन्य लोगों के विरुद्ध जबरन शारीरिक संबंध बनाने, जान से मारने की धमकी और अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए विभिन्न अधिकारियों को शिकायत दी थी। शिकायत की विस्तृत जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के परीक्षण में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। जांच में शिकायत पूरी तरह झूठी और भ्रामक पाई गई।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित महिला पूर्व में भी इसी प्रकार की शिकायतें देकर लोगों को गंभीर मामलों में फंसाने, समझौते के नाम पर धन प्राप्त करने तथा शासन से मिलने वाली राहत राशि का अनुचित लाभ लेने का प्रयास करती रही है।
पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह (आईपीएस) के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र नायक के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी विवेक पाटले ने माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मनेन्द्रगढ़ से अभियोजन की अनुमति प्राप्त की। इसके बाद इस्तगासा क्रमांक 01/2026 के आधार पर महिला के विरुद्ध बीएनएसएस की धारा 217 एवं 248 के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई।
एमसीबी पुलिस की अपील
एमसीबी पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की शिकायत सत्य तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही प्रस्तुत करें। झूठी एवं भ्रामक शिकायत देकर निर्दोष लोगों को फंसाने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आज से दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव शुरू,पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल करेंगे शुभारंभ, समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक धरोहर रामगढ़ में आषाढ़ के प्रथम दिवस 29 एवं 30 जून 2026 को दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का आयोजन किया जाएगा। संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन  के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। महोत्सव में जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, इतिहासकार, कलाकार, पर्यटक तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल होंगे।

29 जून को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री करेंगे शुभारंभ
महोत्सव का शुभारंभ 29 जून को प्रातः 10:30 बजे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में होगा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से किया जाएगा। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत, उद्बोधन तथा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। दिनभर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति पर आधारित लोकनृत्य, लोकगीत एवं पारंपरिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। सायंकाल प्रदेश के सुप्रसिद्ध लोक एवं सांस्कृतिक कलाकार अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से महोत्सव की गरिमा बढ़ाएंगे।
भव्य रामलीला का मंचन नई दिल्ली के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।

रामगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों से होंगे रूबरू
महोत्सव के दौरान आगंतुकों को विश्व की प्राचीनतम रंगशाला के रूप में प्रसिद्ध सीताबेंगरा गुफा, ऐतिहासिक जोगीमारा गुफा, रामगढ़ पर्वत श्रृंखला तथा अन्य महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इतिहास एवं पुरातत्व विशेषज्ञ इन धरोहरों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक महत्व की विस्तृत जानकारी देंगे।

30 जून को साहित्य, संस्कृति और जनजातीय परंपराओं का होगा उत्सव
महोत्सव के दूसरे दिन 30 जून को साहित्य, इतिहास एवं संस्कृति पर केंद्रित परिचर्चाएं, लोककलाओं की प्रस्तुति, जनजातीय संस्कृति का प्रदर्शन, स्थानीय हस्तशिल्प एवं पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करेंगे।

समापन समारोह में मुख्यमंत्री होंगे मुख्य अतिथि
रामगढ़ महोत्सव का समापन 30 जून को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में आयोजित होगा। समापन समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ उत्कृष्ट प्रतिभागियों, कलाकारों एवं सहयोगियों को सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री महोत्सव को संबोधित करते हुए प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं पर्यटन विकास से जुड़े विषयों पर अपने विचार भी व्यक्त करेंगे।

पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया आयाम
रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से सरगुजा की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ-साथ क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। महोत्सव में आने वाले पर्यटकों को रामगढ़ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, पुरातात्विक धरोहरों तथा स्थानीय जनजातीय संस्कृति को निकट से जानने और समझने का अवसर प्राप्त होगा।
जिला प्रशासन ने जिलेवासियों, साहित्यकारों, कलाकारों, विद्यार्थियों एवं पर्यटकों से अधिक से अधिक संख्या में महोत्सव में सहभागिता कर इस सांस्कृतिक आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।

अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस अब सप्ताह में दो दिन, केंद्रीय रेलवे मंत्रालय के फैसले का मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया स्वागत, कहा- यात्रियों की वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी….

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर :  सरगुजा संभाग एवं उत्तर छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारतीय रेलवे मंत्रालय ने ट्रेन संख्या 22407/22408 अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस के संचालन को साप्ताहिक से बढ़ाकर द्विसाप्ताहिक (सप्ताह में दो दिन) करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय का पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के लाखों यात्रियों के लिए जनहितैषी कदम बताया है।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस उत्तर छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा के रूप में कार्य करती है। दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ट्रेन की आवृत्ति बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी, जिसे केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय ने गंभीरता से लेते हुए पूरा किया है।

उन्होंने कहा कि ट्रेन के सप्ताह में दो दिन संचालन से यात्रियों को अधिक सुविधा और विकल्प उपलब्ध होंगे। विशेष रूप से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों तथा गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए बड़े शहरों की यात्रा करने वाले मरीजों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इससे यात्रा की प्रतीक्षा अवधि कम होगी और क्षेत्र की राजधानी दिल्ली सहित अन्य प्रमुख शहरों से बेहतर रेल संपर्क स्थापित होगा।

मंत्री अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश के दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। रेलवे के आधुनिकीकरण, नई रेल सेवाओं के विस्तार और यात्री सुविधाओं में लगातार वृद्धि का लाभ अब सरगुजा जैसे अंचलों तक भी पहुंच रहा है। यह निर्णय क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।

उन्होंने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रेलवे मंत्रालय ने क्षेत्र की जनभावनाओं का सम्मान किया है। अग्रवाल ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में उत्तर छत्तीसगढ़ को रेलवे क्षेत्र में और अधिक सुविधाएं, नई रेल सेवाएं तथा आधारभूत संरचना से जुड़ी नई सौगातें प्राप्त होंगी।

अग्रवाल ने कहा, “अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस को द्विसाप्ताहिक किए जाने का निर्णय सरगुजा संभाग के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और क्षेत्र की कनेक्टिविटी पहले से अधिक मजबूत होगी। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

यह निर्णय न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि सरगुजा क्षेत्र के आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास को भी नई दिशा प्रदान करेगा। क्षेत्रवासियों ने भी इस घोषणा का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय के प्रति खुशी व्यक्त की है।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई: 32 मामलों में से 15 का मौके पर निराकरण, प्रभारी एसएडीओ के निलंबन की अनुशंसा, चिकित्सक पति को 20 हजार रुपये भरण-पोषण देने के निर्देश….

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आज सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिले के कुल 32 प्रकरणों की संयुक्त जनसुनवाई आयोजित की गई। यह प्रदेश स्तर की 402वीं और जिला स्तर की 11वीं सुनवाई थी। संवेदनशीलता से मामले सुनते हुए आयोग ने मौके पर ही 15 प्रकरणों का अंतिम रूप से निराकरण किया और कई कड़े निर्देश जारी किए।
प्रमुख मामलों में आयोग की बड़ी कार्रवाई:
कार्यस्थल पर प्रताड़ना प्रभारी SADO के निलंबन की अनुशंसा
कृषि विभाग की महिला कर्मचारियों ने प्रभारी एसएडीओ (SADO) विनायक पाण्डेय पर कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार, अभद्र भाषा और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। आयोग ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए आरोपी अधिकारी के तत्काल निलंबन की अनुशंसा की है। साथ ही, उपसंचालक कृषि (अम्बिकापुर) को विभागीय जांच कर दो वेतनवृद्धियां (Increments) रोकने और दो महीने में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
डॉक्टर पति को हिदायत, पत्नी को मिलेगा 20 हजार भरण-पोषण
एक वैवाहिक विवाद में आयोग ने अनावेदक चिकित्सक (डॉक्टर) पति को सख्त हिदायत देते हुए ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ में नियमित उपस्थित होने के निर्देश दिए। आयोग ने पति को अपनी पत्नी को हर महीने 20 हजार रुपये भरण-पोषण राशि देने तथा संबंधों को सुधारने के प्रयास करने को कहा है। इस मामले की एक साल तक सखी सेंटर अम्बिकापुर द्वारा निगरानी की जाएगी।
निजी स्कूल की मनमानी पर कड़ा रुख

एक निजी शिक्षण संस्था द्वारा महिला कर्मचारी की एकतरफा सेवा समाप्त करने की शिकायत पर आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अम्बिकापुर को निर्देश दिया कि वह पीड़ित महिला को एक वर्ष के वेतन के बराबर राहत राशि दिलवाएं और दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
लापता महिला और बीमा क्लेम पर निर्देश
लंबे समय से लापता एक महिला के मामले में बलरामपुर पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय को संरक्षण अधिकारी के माध्यम से त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
बीमा दावा (इंश्योरेंस क्लेम) अटकने के एक मामले में संबंधित बैंक और बीमा कंपनी को एक महीने के भीतर निराकरण करने को कहा गया है।
विवाद सुलझाने के लिए दिए कानूनी सुझाव
संपत्ति और पारिवारिक विवाद से जुड़े अन्य मामलों में आयोग ने पक्षकारों को उचित मंच पर जाने की सलाह दी। पैतृक संपत्ति के बंटवारे के लिए बतौली तहसील कार्यालय में ‘खाता पृथक्करण’ का आवेदन देने को कहा गया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जो मामले पहले से ही न्यायालय में लंबित हैं, उनमें आयोग हस्तक्षेप नहीं करेगा और पक्षकार न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने के लिए स्वतंत्र हैं।
“महिलाओं को त्वरित न्याय और राहत पहुंचाना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनसुनवाई के माध्यम से हम हर पीड़ित महिला की समस्या का संवेदनशीलता और तत्परता से समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं।”
– डॉ. किरणमयी नायक, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग

छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 12 तहसीलदार बने डिप्टी कलेक्टर, सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (मंत्रालय) द्वारा राज्य के प्रशासनिक अमले में एक बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार ने एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए प्रदेश के 12 तहसीलदारों को पदोन्नत (प्रमोशन) कर डिप्टी कलेक्टर बनाया है। यह आदेश 22 जून 2026 को महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी किया गया है।
आदेश के अनुसार, इन अधिकारियों को राज्य प्रशासनिक सेवा के कनिष्ठ श्रेणी वेतनमान में डिप्टी कलेक्टर के पद पर वेतन मैट्रिक्स लेवल-12 (₹56,100 – ₹1,77,500) में अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक पदस्थ किया गया है। यह पदोन्नति तीन वर्ष की स्थानापन्न अवधि के लिए होगी और अधिकारियों की सेवा शर्तें ‘छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा (वर्गीकरण, भर्ती तथा सेवा की शर्तें) नियम, 2023’ के प्रावधानों के अंतर्गत शासित होंगी।
पदोन्नत अधिकारियों और उनकी नई पदस्थापना की सूची:

नोट: सभी पदोन्नत अधिकारियों को अपने नवीन पदस्थापना जिले में कार्यभार ग्रहण करने के दिनांक से अस्थायी रूप से पदस्थ माना जाएगा। इस प्रशासनिक फेरबदल से जिलों के राजस्व और प्रशासनिक कार्यों में और तेजी आने की उम्मीद है।

सूरजपुर: बतरा डैम में नाव पलटने से 3 ग्रामीण लापता, 6 ने तैरकर बचाई जान…

हिंद स्वराष्ट्र करंजी/सूरजपुर: जिले के करंजी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बतरा डैम में सोमवार देर रात मछली पकड़ने गए 9 ग्रामीणों की नाव पलट जाने से एक बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में 6 लोग किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि 3 ग्रामीण गहरे पानी में लापता हो गए हैं। सूचना मिलते ही मंगलवार सुबह स्थानीय पुलिस और डीडीआरएफ (DDRF) की टीम मौके पर पहुंच गई है और लापता लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।

प्रतिबंध के बावजूद रात में गए थे मछली पकड़ने
जानकारी के अनुसार, ग्राम राईं निवासी समयलाल उर्फ पांडे और जगपाल समेत कुल 9 ग्रामीण सोमवार रात करीब 12 बजे बतरा बांध में मछली पकड़ने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि डैम में रात के समय मछली पकड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध है, इसके बावजूद सभी लोग नाव के जरिए जलाशय के बीच में जाल बिछाने गए थे।
अचानक असंतुलित होकर पलटी नाव
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब नाव डैम के बीचों-बीच पहुंची, तो अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव पलटते ही उसमें सवार सभी 9 लोग गहरे पानी में समा गए। हादसे के बाद 6 लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए तैरकर अपनी जान बचा ली, जबकि समयलाल उर्फ पांडे, जगपाल और एक अन्य ग्रामीण पानी में लापता हो गए।
परिजनों में कोहराम, रेस्क्यू टीम मौके पर
घटना के बाद सुरक्षित बचकर निकले लोगों ने तुरंत गांव पहुंचकर परिजनों और ग्रामीणों को हादसे की जानकारी दी। खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण डैम पर इकट्ठा हो गए। मंगलवार सुबह पुलिस और DDRF की टीम ने मौके पर पहुंचकर गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस का कहना है कि रेस्क्यू पूरा होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

अंबिकापुर: सवालों पर ‘सहानुभूति’ के आंसू या महिला कार्ड? महापौर मंजूषा भगत के रोने पर खड़े हुए गंभीर सवाल

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर: भ्रष्टाचार के आरोप लगें तो जवाब दीजिए, सबूत पेश करिए और खुद को बेदाग साबित कीजिए। लेकिन अंबिकापुर की सियासत में आजकल एक नया ही ट्रेंड देखने को मिल रहा है—”जब भी घिरो, रोना शुरू कर दो।”
हाल ही में अंबिकापुर की महिला महापौर मंजूषा भगत का एक कथित रिश्वत लेने का ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस ऑडियो के सामने आने के बाद उम्मीद थी कि महापौर साहिबा प्रशासनिक या कानूनी तौर पर अपनी बेगुनाही के सबूत रखेंगी। लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। वे कैमरे के सामने आईं, हमेशा की तरह उनकी आंखों से आंसू बहे, और उन्होंने इसे अपने खिलाफ एक बड़ी “साजिश” करार दे दिया।
बात सिर्फ रोने तक सीमित रहती तो शायद लोग इसे भावुकता मान लेते, लेकिन इस बार भी उन्होंने अपने बचाव में ‘महिला होने’ और ‘अनुसूचित जाति’ से ताल्लुक रखने का कार्ड खेल दिया।


सवाल पर आंसू: क्या महिला होना कोई कमज़ोरी है?
यह कोई पहली बार नहीं है जब महापौर मंजूषा भगत मीडिया के सामने इस तरह फफक-फफक कर रोई हैं। शहर का हर नागरिक और मीडियाकर्मी गवाह है कि जब भी नगर निगम के कामकाज, विकास कार्यों में लापरवाही या किसी विवाद पर उनसे तीखे सवाल पूछे जाते हैं, तो जवाब देने के बजाय उनकी आंखों से गंगा-जमुना बहने लगती हैं।
महापौर की इन बातों और आंसुओं के पीछे का नैरेटिव कुछ ऐसा होता है मानो—“मैं महिला हूँ, इसलिए मुझे निशाना बनाया जा रहा है।”
अब यहाँ सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह उठता है: क्या प्रशासनिक पदों पर बैठी महिलाओं के खिलाफ सवाल पूछना अपराध है? और क्या हर जांच या सवाल के सामने खुद को ‘पीड़ित’ बताकर रो देना, बाकी उन करोड़ों महिलाओं का अपमान नहीं है जो हर दिन संघर्ष करके समाज में अपनी ताकत का लोहा मनवा रही हैं?
जब बातें ऐसी हों मानो ‘महिला होना ही पाप है‘
महापौर जिस तरह से हर बार रोते हुए महिला होने का रोना रोती हैं, उससे समाज में एक बेहद गलत और नकारात्मक संदेश जाता है। उनकी बातें सुनकर ऐसा प्रतीत होने लगता है मानो इस देश में महिला होना या राजनीति में आना ही कोई पाप या अभिशाप हो।
तल्ख हकीकत:
आज भारत की महिलाएं राष्ट्रपति से लेकर फाइटर जेट उड़ाने और बड़े-बड़े कॉर्पोरेट साम्राज्य संभालने तक का काम कर रही हैं। जब उन पर सवाल उठते हैं, तो वे अपनी कार्यप्रणाली और तथ्यों से जवाब देती हैं, न कि आंसुओं से। ऐसे में एक जिम्मेदार संवैधानिक पद (महापौर) पर बैठीं मंजूषा भगत का बार-बार ‘वीमेन कार्ड’ खेलना महिला सशक्तिकरण की पूरी परिभाषा को ही कमज़ोर करता है।

जनता को आंसुओं से सरोकार नहीं, सच की तलाश है
अंबिकापुर की जनता ने उन्हें रोने के लिए नहीं, बल्कि शहर की कमान संभालने और विकास करने के लिए चुनकर भेजा है। ऑडियो असली है या नकली, यह जांच का विषय है। लेकिन जांच से पहले ही ‘महिला होने’ और ‘जाति’ की ढाल के पीछे छिप जाना राजनीति का सबसे सस्ता पैंतरा नजर आता है।
अगर ऑडियो फर्जी है, तो महापौर को डंके की चोट पर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए और जांच का सामना करना चाहिए। रोकर सहानुभूति बटोरने की यह कोशिश कहीं न कहीं इस बात का इशारा करती है कि शायद उनके पास तीखे सवालों के सीधे और ठोस जवाब नहीं हैं।

“योग आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग” ग्राम सखौली में केन्द्रीय संचार  ब्यूरो अंबिकापुर, सूचना एवम प्रसारण मंत्रालय द्वारा किया गया एक दिवसीय जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : भारत सरकार,सूचना एवम प्रसारण मंत्रालय के केन्द्रीय संचार ब्यूरो अंबिकापुर द्वारा सरगुजा जिले,ब्लाक अंबिकापुर  के  ग्राम सखौली के उच्त्तर माध्यमिक शाला में 12 वे “अन्तररास्ट्रीय योग दिवस”के अंतर्गत एक दिवसीय विशेष जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शाला प्राचार्या अनीता कुजूर,संकुल समन्वयक सलीम खान,शिक्षक गण विजय कान्त तिवारी ,प्रेम शंकर चौधरी ,अनवर हुसैन ,राजेश यादव,रणवीर केरकेट्टा छात्र गण  तथा बहुतायत संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
शाला प्राचार्या अनीता कुजूर ने लोगो को योग के बारे में बताते हुए कहा की योग शरीर और मस्तिष्क को एक साथ सन्तुलित करके प्रकृति से जुड़ने का सबसे सुरक्षित माध्यम है। यह व्यायाम का एक प्रकार है, जिसमें शरीर के संतुलन और आहार, सांस की क्रिया के साथ ही शारीरिक आकृति को भी नियंत्रित करना भी काफी आवश्यक है। यह शरीर और मस्तिष्क को ध्यान से जोड़ता है और जिसके माध्यम से शरीर को आराम मिलता है। यह शरीर और मस्तिष्क के ऊपर नियंत्रण रखने के साथ ही तनाव और चिन्ता को कम करके शरीर और मस्तिष्क के अच्छे स्वास्थ्य को बनाये रखने में भी मदद करता है।
ब्यूरो प्रभारी हिमांशु सोनी द्वारा ग्रामीणों को योग के बारे में बताते हुए कहा की अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ही इस दिन को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव दिया था। योग का अभ्यास एक बेहतर इंसान बनने के साथ एक तेज दिमाग, स्वस्थ दिल और एक सुकून भरे शरीर को पाने के तरीकों में से एक है।
योग अपने अद्भुत स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2015 में आरंभ होने के बाद, हर साल 21 जून को मनाया जाता है। यह हमारे जीवन में इस प्राचीन भारतीय कला को अनमोल करने के महत्व पर बल देने का एक महान प्रयास है। योग व्यायाम का ऐसा प्रभावशाली प्रकार है, जिसके माध्याम से न केवल शरीर के अंगों बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा में संतुलन बनाया जाता है। यही कारण है कि योग से शा‍रीरिक व्याधियों के अलावा मानसिक समस्याओं से भी निजात पाई जा सकती है।

कार्यक्रम में योग के विभिन्न आसन जैसे ताड़ासन ,अनुलोम विलोम ,वज्रासन ,पवनमुक्तासन ,भ्रामरी ,सूर्य नमस्कार ,हलासन जैसे अनेक योग आसन करके लोगो को सिखाया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। महिलाओं द्वारा रंगोली बना कर लोगो को योग करने हेतु प्रेरित किया। सांथ ही एक प्रश्न मच का भी आयोजन किया गया जिसमे विजित प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

जमीनी हकीकत परखने अचानक मैदान में उतरीं कलेक्टर,भैयाथान क्षेत्र का किया सघन निरीक्षण,अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश,…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर / भैयाथान मुकेश गुप्ता : शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और शासकीय व्यवस्थाओं की सुस्ती दूर करने के लिए कलेक्टर रेना जमील शनिवार को पूरी प्रशासनिक टीम के साथ भैयाथान विकासखंड के दौरे पर रहीं। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी, अस्पताल, मनरेगा कार्यों और सुदूर बस्तियों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को दो टूक लहजे में कहा कि शासन की हर योजना का लाभ अंतिम छोर में खड़े पात्र हितग्राही तक पहुंचना ही चाहिए, इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आंगनबाड़ी में बच्चों का निवाला परखा
ग्राम पंचायत मसिरा के पनिका पारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में कलेक्टर ने बच्चों को दिए जाने वाले गर्म भोजन और टेक होम राशन टीएचआर की गुणवत्ता जांची। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों के शारीरिक-मानसिक विकास के लिए हरी सब्जियां और संतुलित पोषण नियमित रूप से दिया जाए।
बसोर बस्ती में संवेदनशीलता, शिविर लगाने के निर्देश भी दिए
समौली ग्राम की बसोर बस्ती पहुंचकर कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अफसरों को निर्देश दिए कि बस्ती में विशेष शिविर  लगाकर शत-प्रतिशत बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र, पात्र परिवारों के राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, श्रम कार्ड, आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड तुरंत बनाए जाएं।
भिक्षावृत्ति छोड़ आत्मनिर्भर बनने की दी सीख
बस्ती की महिलाओं से चर्चा करते हुए उन्होंने भिक्षावृत्ति जैसे कार्यों को छोड़ मनरेगा और स्व-सहायता समूहों  से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए कलेक्टर ने पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा स्कूल और हॉस्टल से जोड़ने के निर्देश दिए।
सिकल सेल पीड़ितों के बेहतर इलाज के लिए अधिकारीयो निर्देश दिए
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भैयाथान का औचक निरीक्षण कर कलेक्टर ने प्रसव कक्ष, ओपीडी, महिला वार्ड और एनबीएसयू वार्ड की व्यवस्थाएं देखीं। डॉक्टरों की उपस्थिति और मरीजों को मिलने वाली दवाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने समयबद्ध इलाज सुनिश्चित करने को कहा। वहीं, समौली के मेडिकल कैंप में सिकल सेल और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष और बेहतर उपचार के निर्देश दिए।
पोषण पुनर्वास केंद्र  में माताओं को सलाह …..
एनआरसी वार्ड में भर्ती कुपोषित बच्चों की माताओं से कलेक्टर ने सीधे बात की। उन्होंने डॉक्टरों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने और माताओं को डिस्चार्ज के बाद भी बच्चों के खान-पान का विशेष ध्यान रखने की समझाइश दी
विकास कार्य और हाइड्रो पावर प्लांट का भी जाकर जायजा लिया।

प्रतिबंध के बाद भी भैयाथान के सत्यनगर सिरसी घाट में धड़ल्ले से जारी है रेत का अवैध उत्खनन…

‘एनजीटी’ और सरकारी आदेशों को ताक पर रख कर बह रही नदी की छाती, कुंभकर्णी नींद में सोया स्थानीय प्रशासन…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/ भैयाथान मुकेश गुप्ता। मानसून की दस्तक के साथ ही राज्य सरकार ने नदियों के संरक्षण और पर्यावरण नियमों के तहत रेत खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, प्रदेश की सभी नदियों में 10 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक रेत उत्खनन पर पूरी तरह से रोक रहेगी। संचालक रजत बंसल द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित यह पत्र प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को जारी कर इस पर कड़ाई से अमल करने के निर्देश दिए गए हैं।इसके बावजूद सूरजपुर जिले के भैयाथान जनपद पंचायत अन्तर्गत सत्यनगर सिरसी घाट में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से रेत खनन का खेल जारी है।

केंद्रीय गाइडलाइन की उड़ रही धज्जियां

विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यह प्रतिबंध भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी ‘सस्टेनेबल सैंड माइनिंग गाइडलाइन, 2016’ एवं ‘एनफोर्समेंट एंड मॉनिटरिंग गाइडलाइन, 2020’ के अनुरूप लगाया गया है। वर्षा ऋतु के दौरान नदियों के प्राकृतिक बहाव को बनाए रखने, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और संभावित जनहानि को रोकने के लिए हर साल इस अवधि में खनन पर रोक लगाई जाती है।

अधिकारियों ने मूंदी आंखें, रेत माफिया के हौसले बुलंद

विडंबना यह है कि एक तरफ जहां कागजों पर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। सत्यनगर सिरसी घाट पर बेखौफ होकर रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। शासन-प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध कारोबार को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जिला एवं स्थानीय प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है, जिससे रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या अवैध खनन का यह खेल यूं ही अनवरत जारी रहता है।

प्रशासनिक लापरवाही: अम्बिकापुर में ‘साय सरकार’ के सामूहिक विवाह के 1 महीने बाद भी नवविवाहित जोड़े राशि के लिए भटकने को मजबूर…

8 मई को राजमोहनी भवन में मंत्री राजेश अग्रवाल की मौजूदगी में हुआ था भव्य आयोजन….
43 नवविवाहित जोड़ों के खाते अब भी खाली, ‘सम्मान और सामाजिक सुरक्षा’ के दावों पर उठे सवाल…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : राज्य सरकार द्वारा गरीब परिवारों की बेटियों की सम्मानजनक विदाई और महिला सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ अम्बिकापुर में प्रशासनिक लेटलतीफी का शिकार होती नजर आ रही है। स्थानीय स्तर पर भव्य शासकीय आयोजन संपन्न हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि अब तक कई नवविवाहित जोड़ों के बैंक खातों में नहीं पहुंच सकी है। इसके चलते नवदंपति और उनके परिजन सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
8 मई को हुआ था भव्य आयोजन, पर खाते अब भी खाली
गौरतलब है कि बीते 8 मई 2026 को अम्बिकापुर के राजमोहनी भवन में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत एक गरिमामय सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल शामिल हुए थे। शासकीय दावों के अनुसार, इस भव्य आयोजन में शहनाइयों की गूंज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 43 नवविवाहित जोड़ों ने नए जीवन की शुरुआत की थी। इस दौरान मंत्री अग्रवाल ने साय सरकार को बेटियों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बताते हुए जोड़ों को सुखद जीवन का आशीर्वाद दिया था।
परंतु, इस भावुक विदाई और बड़े-बड़े वादों के हफ्तों बाद भी जमीनी हकीकत यह है कि हितग्राहियों के खाते खाली हैं। नियमानुसार विवाह संपन्न होने के तत्काल बाद यह राशि वधू के बैंक खाते में अंतरित कर दी जानी चाहिए थी, जो अब तक नहीं हुई।
₹35,000 की आर्थिक सहायता का नियम, पर धरातल पर इंतजार
योजना के आधिकारिक प्रावधानों के तहत, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को नए जीवन की शुरुआत आत्मसम्मान और मजबूती से करने के लिए ₹35,000 की सीधी आर्थिक सहायता (बैंक ड्राफ्ट/DBT) प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त नवदम्पत्तियों को आवश्यक घरेलू उपहार सामग्री और कपड़े-बर्तन भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
8 मई को पूरे छत्तीसगढ़ में विभिन्न जिलों को मिलाकर कुल 2,188 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे, जिसे सरकार अपनी ‘जनकल्याणकारी सोच और सामाजिक प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण’ बता रही है। लेकिन अम्बिकापुर के 43 जोड़ों के मामले में यही प्रतिबद्धता फाइलों में दबी नजर आ रही है।
परिजनों में आक्रोश, उठ रहे हैं गंभीर सवाल
आर्थिक रूप से कमजोर (BPL) परिवारों के लिए यह ₹35,000 की राशि बेहद महत्वपूर्ण होती है। कई परिजनों का कहना है कि विवाह के बाद के खर्चों और गृहस्थी जमाने के लिए वे इस राशि पर आश्रित थे। अधिकारियों द्वारा बार-बार केवल “प्रक्रिया चल रही है” का रटा-रटाया आश्वासन दिया जा रहा है, जिससे हितग्राहियों में भारी आक्रोश है।
मुख्य सवाल जो स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़े करते हैं
  जब राजमोहनी भवन के मंच से सरकार की संवेदनशीलता के बड़े-बड़े दावे किए गए, तो 8 मई को हुए विवाह की राशि जून के मध्य तक वधुओं के खातों में क्यों नहीं पहुंची?
  क्या बजट की कमी है, तकनीकी खामी है या फिर महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की लापरवाही, जिसके कारण इन 43 गरीब परिवारों को परेशान होना पड़ रहा है?
विभागीय उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, ताकि राजमोहनी भवन में लिए गए सात फेरों और सरकार के ‘महिला सशक्तिकरण’ के दावों का वास्तविक लाभ इन बेटियों को मिल सके।

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