हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर (सरगुजा): छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के राजापुर उप-तहसील कार्यालय में हुए हाई-प्रोफाइल विवाद ने अब एक बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। शासकीय कार्य में देरी और दुर्व्यवहार के आरोपों से शुरू हुए इस मामले में सरगुजा पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर क्रॉस एफआईआर (Cross FIR)दर्ज की है।
जहां एक तरफ भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट के आरोप में गंभीर गैर-जमानती धाराएं लगाई गई हैं, वहीं दूसरी तरफ विधायक की चचेरी बहन की शिकायत पर नायब तहसीलदार के खिलाफ भी जमानती धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
कानूनी कार्रवाई: दोनों पक्षों पर दर्ज हुई FIR का पूरा ब्योरा
पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों के लिखित आवेदनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं:
1. विधायक और समर्थकों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा
नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी की शिकायत पर सरगुजा पुलिस ने सीतापुर विधायक और उनके साथियों पर कड़ी कार्रवाई की है। शासकीय कार्य में बाधा डालने, दफ्तर में घुसकर गाली-गलौज करने, शासकीय सेवक के साथ मारपीट करने और कपड़े फाड़ने के आरोप में पुलिस ने विधायक रामकुमार टोप्पो, यूसूफ, नाज़िम रज़ा तथा पंकज गुप्ता को नामजद किया है। इसके साथ ही 10 से 12 अन्य अज्ञात समर्थकों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
बीएनएस (BNS) की धारा 221 लोक सेवक के शासकीय कार्य में बाधा डालना, धारा 121(1) लोक सेवक को अपने कर्तव्य से रोकने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, धारा 191(2) दंगा या उपद्रव करने से संबंधित और धारा 132 लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग की धाराएं लगाई गई हैं।
2. नायब तहसीलदार के खिलाफ जमानती धाराओं में केस
विधायक की चचेरी बहन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने राजापुर के नायब तहसीलदार के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। महिला ने शिकायत दर्ज कराई है कि जब वह शासकीय कार्य के लिए कार्यालय गई थीं, तब तहसीलदार ने उनके साथ जातिगत गाली-गलौज की, अश्लील इशारे किए और अभद्रता करते हुए धक्का-मुक्की कर बलपूर्वक उन्हें ऑफिस से बाहर निकाल दिया। बीएनएस (BNS) की धारा 296 सार्वजनिक रूप से अश्लील कृत्य या अभद्रता करना, धारा 351(2) आपराधिक धमकी देना, धारा 79 महिला की गरिमा और लज्जा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किया गया कृत्य की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया हैं।
प्रशासनिक आक्रोश और राजनीतिक घमासान तेज
इस घटना के बाद से ही अंबिकापुर और सरगुजा संभाग के प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व कर्मचारी संघों में भारी आक्रोश है। पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी थी, जिसके बाद से ही राजस्व अधिकारी संघ दोषियों पर कड़ी और त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहा है।
दूसरी तरफ, सत्ताधारी दल (भाजपा) के विधायक पर गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज होने से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार को कानून-व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा के मोर्चे पर घेरा है। वहीं, शासन स्तर से स्पष्ट किया गया है कि कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से कर रहा है और जांच के आधार पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

