हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद शुरू हुआ ‘जाति प्रमाण पत्र’ का विवाद अब प्रशासनिक प्रक्रियाओं के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। इस मामले में आई कुछ प्राथमिक जानकारियों और दावों के बाद अब इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रत्याशी रितेश जायसवाल का जाति प्रमाण पत्र असामान्य रूप से बहुत कम समय में जारी किया गया था।
6 दिनों में जारी होने का दावा: आम बनाम खास की चर्चा
प्राथमिक तौर पर सामने आ रही जानकारियों के अनुसार, रितेश जायसवाल का अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का जाति प्रमाण पत्र आवेदन करने के महज छठवें दिन ही जारी कर दिया गया था। (12/05/2026 को आवेदन दिया गया और 18/05/2026 को जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया)। लोक सेवा गारंटी अधिनियम और सामान्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत आमतौर पर किसी भी आम नागरिक का ओबीसी जाति प्रमाण पत्र बनने में औसतन 2 से 4 हफ्ते (15 से 30 दिन) का समय लगता है।
ऐसे में यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इतनी तीव्र गति से यह प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ? हालांकि, प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि सभी दस्तावेज पहले से दुरुस्त और सत्यापित हों, तो तकनीकी रूप से प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकती है, इसलिए यह मामला पूरी तरह से विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
क्या कहते हैं कानूनी और प्रशासनिक नियम?
इस त्वरित प्रक्रिया को लेकर यदि कानूनी और तकनीकी पक्षों को समझें तो:
कानूनन, किसी प्रमाण पत्र का जल्दी जारी होना अपने आप में उसके ‘फर्जी’ होने का प्रमाण नहीं है। जब तक यह साबित न हो कि प्रमाण पत्र जारी करने के लिए किसी गलत दस्तावेज का सहारा लिया गया है या नियमों को ताक पर रखा गया है, तब तक इसे अवैध नहीं कहा जा सकता।
लोक सेवा केंद्र और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड की स्क्रूटनी (जांच) के बाद ही यह साफ होगा कि क्या इस फाइल को आगे बढ़ाने में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
कलेक्ट्रेट में शिकायत की तैयारी तेज
इस नए मोड़ के बाद प्राप्त सूत्रों के अनुसार, समय सीमा (Timeframe) के इस अंतर को मुख्य आधार बनाकर कलेक्टर से इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की जाएगी।
जानकारों का आरोप है कि इस त्वरित प्रक्रिया के पीछे कथित रूप से प्रशासनिक सहयोग हो सकता है, जबकि भाजपा खेमे का मानना है कि चुनाव में हार से बौखलाया विपक्ष अब प्रक्रियात्मक बातों को बेवजह तूल देकर नवनिर्वाचित अध्यक्ष की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है।
जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति
फिलहाल, यह पूरा मामला केवल प्राथमिक दावों और चर्चाओं पर टिका है। जब तक जिला प्रशासन या जाति छानबीन समिति इस पर कोई आधिकारिक बयान या जांच रिपोर्ट जारी नहीं करती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
नोट: यह समाचार पूरी तरह से प्राथमिक जानकारियों, प्रशासनिक समय-सीमा की चर्चाओं और सूत्रों के दावों पर आधारित है। हमारा संस्थान किसी भी व्यक्ति या अधिकारी पर सीधे तौर पर अनियमितता का आरोप नहीं लगाता है। मामले की सच्चाई निष्पक्ष प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी।



