सिरसी रेशम घोटाला: RTI से महाखुलासा! भृत्य से ‘प्रवर्तक’ बने तिलक श्रीवास्तव को किसने सौंपी सुपरवाइजर की कुर्सी?

0

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर (भैयाथान) :  ग्राम सिरसी में रेशम विभाग के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के खेल में एक ऐसा चौंकाने वाला प्रशासनिक मोड़ आया है, जिसने विभाग के आला अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सूचना के अधिकार (RTI) से मिले दस्तावेजों ने साबित कर दिया है कि सिरसी केंद्र में नियम-कायदों को ताक पर रखकर चहेतों को मलाईदार कुर्सियां बांटी गई हैं, ताकि भ्रष्टाचार के खेल को बिना किसी डर के अंजाम दिया जा सके।
RTI का बड़ा धमाका: सुपरवाइजर नहीं, ‘प्रवर्तक’ हैं तिलक श्रीवास्तव!
RTI से मिले आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, सिरसी रेशम केंद्र में फील्ड सुपरवाइजर की धौंस जमाने वाले तिलक श्रीवास्तव का मूल पद सुपरवाइजर का है ही नहीं। तिलक श्रीवास्तव मूल रूप से ‘भृत्य’ (peon) के पद पर भर्ती हुए थे, जो बाद में पदोन्नत होकर ‘प्रवर्तक’ (Promoter) के पद पर पहुंचे।
अब सबसे बड़ा तकनीकी और प्रशासनिक सवाल यह उठता है कि:
एक ‘प्रवर्तक’ को फील्ड सुपरवाइजर का प्रभार किस नियम के तहत दिया गया?
क्या रेशम विभाग में योग्य सुपरवाइजरों का अकाल पड़ गया है, या फिर इस ‘खास’ व्यक्ति को आर्थिक गबन की खुली छूट देने के लिए जानबूझकर इस मलाईदार पद पर बैठाया गया है?
कुर्सी अवैध, तो काम भी ‘फर्जी’!
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि जब तिलक श्रीवास्तव का पद ही सुपरवाइजर का नहीं है, तो उनके द्वारा किए गए सभी वित्तीय और प्रशासनिक कार्य स्वतः ही जांच के दायरे में आ जाते हैं। यही वजह है कि सिरसी केंद्र में बेधड़क होकर ये कारनामे किए जा रहे हैं:
पौधारोपण के बजट से पुताई:  नए पौधे लगाने के नाम पर लाखों का बजट स्वीकृत कराया गया और पुराने अर्जुन के पेड़ों पर चूना-पुताई कर पूरी राशि हजम करने की तैयारी कर ली गई।
तकनीक से जालसाजी: मनरेगा के तहत एक ही फोटो को रोज अपलोड करके 7-7 मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही है और सरकारी खजाने को चंपत लगाया जा रहा है।
बिना पद के चौकीदार: विभाग में पद स्वीकृत न होने के बाद भी एक चहेते को चौकीदार बनाकर अवैध भुगतान का रास्ता साफ किया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी का खुला ‘राज’
इस RTI खुलासे के बाद अब यह साफ हो गया है कि पूर्व में दिखाए गए दोनों अंकों की खबरों पर जिला मुख्यालय के अधिकारी मौन क्यों साधे हुए थे। एक भृत्य से प्रमोट हुए कर्मचारी की इतनी हैसियत नहीं हो सकती कि वह अकेले इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे और डिजिटल सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर सके। निश्चित ही इस ‘फर्जी सुपरवाइजर’ की पीठ पर विभाग के किसी ‘बड़े साहब’ का वरदहस्त है।
चुनौतीपूर्ण सवाल: क्या सूरजपुर कलेक्टर और रेशम विभाग के वरिष्ठ संचालक इस आरटीआई के दस्तावेजों के आधार पर इस ‘अवैध’ सुपरवाइजर को तत्काल हटाकर इसके कार्यकाल के दौरान हुए सभी भुगतानों की उच्च स्तरीय जांच कराएंगे? या फिर भ्रष्टाचार की इस ‘रेशमी चादर’ को ऐसे ही ढका रहने दिया जाएगा?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here