हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सैकड़ों युवाओं के डॉक्टर बनने के सपने को एक बड़ा झटका लगा है। प्रदेश में इस सत्र से शुरू होने वाले पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की उम्मीदें अब पूरी तरह से टूट चुकी हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा मान्यता न मिलने के कारण अब इन कॉलेजों में इस वर्ष दाखिला नहीं हो सकेगा। सूत्रों की मानें तो इस बड़े नुकसान के पीछे प्रशासनिक स्तर पर हुई भारी लापरवाही और ढुलमुल रवैया सबसे मुख्य वजह बनकर उभरा है।
इन पांच जिलों में खुलने थे कॉलेज
राज्य सरकार ने प्रदेश के दूरदराज और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से पांच नए मेडिकल कॉलेजों की आधारशिला रखी थी। ये कॉलेज निम्नलिखित जिलों में प्रस्तावित थे:
- मनेंद्रगढ़
- गीदम (दंतेवाड़ा)
- जांजगीर-चांपा
- कवर्धा (कबीरधाम)
- महासमुंद (विस्तार/नया सेटअप)
क्यों टूटा सपना? जानिए मुख्य कारण
NMC की टीम ने जब इन प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण किया, तो वहां नियमों और गाइडलाइंस की जमकर धज्जियां उड़ती दिखीं। अफसरों की लापरवाही के कारण निम्नलिखित कमियां पाई गईं:
- फैकल्टी और स्टाफ की भारी कमी: मेडिकल कॉलेजों के लिए जरूरी प्रोफेसरों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती समय पर पूरी नहीं की जा सकी।
- अधूरा इंफ्रास्ट्रक्चर: कई जगहों पर कॉलेज और अस्पताल की इमारतें अधूरी थीं। लैब, लाइब्रेरी और हॉस्टल का निर्माण कार्य कागजों से बाहर जमीन पर नहीं उतर पाया था।
- इक्विपमेंट्स (उपकरणों) का अभाव: मरीजों की जांच और छात्रों की पढ़ाई के लिए जरूरी आधुनिक मेडिकल उपकरण और मशीनें तक इंस्टॉल नहीं की जा सकी थीं।
- समय पर कमियां दूर न करना: NMC ने पहले भी कमियों को लेकर अल्टीमेटम दिया था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और तय समय सीमा (डेडलाइन) बीत गई।
राज्य को क्या हुआ बड़ा नुकसान?
1. 500 मेडिकल सीटों का नुकसान: अगर ये पांचों कॉलेज शुरू हो जाते, तो प्रदेश को सीधे तौर पर 500 नई MBBS सीटें मिलतीं। इसका मतलब है कि छत्तीसगढ़ के 500 स्थानीय छात्र जो डॉक्टर बनने का ख्वाब देख रहे थे, वे इस साल इस मौके से वंचित रह गए।
2. करोड़ों के बजट का अपव्यय: इन कॉलेजों के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया गया था। समय पर काम न होने से न सिर्फ लागत बढ़ेगी, बल्कि विकास कार्य भी अधर में लटक गए हैं।
3. ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को झटका: गीदम और मनेंद्रगढ़ जैसे सुदूर अंचलों में मेडिकल कॉलेज खुलने से वहां के लोगों को सुपर-स्पेशलिटी इलाज की उम्मीद थी, जो अब लंबे समय के लिए टल गई है।



