हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर: जिले में खनिज न्यास संस्थान (DMF) के पैसों की बंदरबांट और सरकारी धन के खुलेआम दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। जनता के विकास और खनन प्रभावित क्षेत्रों के उद्धार के लिए मिलने वाले करोड़ों रुपयों को बिना किसी धरातली जांच के पानी की तरह बहाया जा रहा है। कागजों पर विकास की ऐसी ‘हरियाली’ दिखाई जा रही है, जिसका जमीन पर नामोनिशान तक नहीं है।
इस महाघोटाले का सबसे जीता-जागता उदाहरण देखना हो, तो जिले के ग्राम पंचायत पचीरा चले जाइए। यहाँ बाबा सिद्धेश्वर मंदिर परिसर में ब्लॉक प्लांटेशन (वृक्षारोपण) के नाम पर सरकारी खजाने को जमकर चूना लगाया गया है।
₹9.87 लाख खर्च, पर जमीन पर ₹1 लाख का काम भी नहीं!
मिली जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत पचीरा के बाबा सिद्धेश्वर मंदिर परिसर में सिर्फ 386 पौधे लगाने के नाम पर 9 लाख 87 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि स्वीकृत और खर्च कर दी गई। यानी औसतन एक पौधे की कीमत करीब ₹2,500 से अधिक बैठती है!
चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 10 लाख रुपए की इस मोटी रकम को फूंकने के बाद भी धरातल पर 1 लाख का काम भी ढंग से नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मंदिर परिसर में भ्रष्टाचार का यह खेल साफ नजर आ रहा है, लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
बड़ा सवाल क्या 386 पौधे लगाने और उनकी देखरेख के लिए ₹10 लाख की जरूरत होती है? या फिर ‘ब्लॉक प्लांटेशन’ के नाम पर यह सीधे-सीधे अफसरों और ठेकेदारों की जेब भरने का ‘प्लान’ था?
अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत?
सूरजपुर जिले में डीएमएफ फंड के आवंटन की प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
बिना धरातली जांच के फंड कैसे जारी हुआ? क्या तकनीकी स्वीकृति और मूल्यांकन सिर्फ दफ्तर में बैठकर, एसी कमरों की हवा खाते हुए कर दिया गया?
फिजिकल वेरिफिकेशन क्यों नहीं? इतनी बड़ी राशि जारी होने के बाद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर जाकर काम की गुणवत्ता और पौधों की गिनती करने की जहमत क्यों नहीं उठाई?
जनता में भारी आक्रोश, जांच की मांग
सूरजपुर की जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जो पैसा जिले के पिछड़े इलाकों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च होना चाहिए था, उसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों व संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर ‘कागजी विकास’ के इस खेल पर पर्दा डाल दिया जाता है।
जिले में DMF फंड के पैसों के दुरुपयोग के और भी कई मामले हैं जिनके खुलासे हमारे द्वारा जल्द किए जाएंगे….



