हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/भैयाथान मुकेश गुप्ता : एक तरफ सरकार बाल विवाह रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। सूरजपुर जिले से एक बेहद गंभीर और सिस्टम की लापरवाही को उजागर करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नाबालिग युवक का सरेआम विवाह संपन्न करा दिया गया और जिम्मेदार ‘महिला एवं बाल विकास विभाग’ गहरी नींद में सोता रहा। इस पूरे मामले में विभाग की चुप्पी कई बड़े सवालों को जन्म दे रही है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज मामला जिले के भैयाथान विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सिरसी के नावापारा का है जहां चेतराज राजवाड़े के पुत्र की बारात 19 जून 2026 को ग्राम बिनकारा जिला सूरजपुर को गई और विवाह उपरांत 21 जून 2026 को सिरसी नावापारा में प्रीतिभोज एवं आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया गया। आश्चर्य की बात यह रही कि यहाँ नियमों और कानूनों को ताक पर रखकर एक नाबालिग युवक का विवाह करा दिया गया। गांव में इतनी बड़ी घटना हो गई, लेकिन बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी जिस विभाग पर है, उसे इसकी भनक तक नहीं लगी—या यूं कहें कि जानकर भी अनजान बने रहने का नाटक किया गया।
चोर की दाढ़ी में तिनका: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का बेतुका बयान
मामले का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू तब सामने आया, जब मीडिया ने इस लापरवाही की तह तक जाने की कोशिश की। ग्राम पंचायत सिरसी के नवापारा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मोनी गुप्ता से जब पत्रकार ने इस बाबत सवाल किया, तो उन्होंने बड़ी ही चालाकी से मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की।
मोनी गुप्ता ने तुरंत कह दिया कि “शादी के वक्त मैं छुट्टी पर थी।”
लेकिन यहीं वह अपने ही बुने जाल में फंस गईं। पत्रकार ने बातचीत के दौरान उन्हें शादी की कोई तारीख बताई ही नहीं थी! ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि:
जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को यह पता ही नहीं था कि शादी किस दिन हुई है, तो उन्होंने एक ही झटके में यह कैसे कह दिया कि उस दिन वह छुट्टी पर थीं?
बाद में जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें शादी की जानकारी थी, तो उन्होंने साफ मुकरते हुए कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बिना तारीख जाने खुद को छुट्टी पर बताना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
खड़े होते हैं कई गंभीर सवाल:
इस पूरे घटनाक्रम ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
गांव में नाबालिग युवक की शादी की तैयारियां कई दिनों से चल रही होंगी, तो क्या ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले मैदानी अमले (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका) को इसकी जानकारी नहीं थी?
दूसरा सवाल क्या मामले को दबाने के लिए ‘छुट्टी’ का बहाना पहले से ही तैयार कर लिया गया था?
तीसरा सवाल घटना सामने आने के बाद भी महिला एवं बाल विकास विभाग के उच्चाधिकारी अब तक मौन क्यों हैं?
कार्यवाही का इंतजार
यह मामला सिर्फ एक लापरवाही का नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे कानून के उल्लंघन और कर्तव्यहीनता का है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मोनी गुप्ता का यह विरोधाभासी बयान उन्हें सीधे तौर पर संदेह के घेरे में लाता है। अब देखना यह होगा कि सूरजपुर जिले के आला अधिकारी और कलेक्टर इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं। क्या लापरवाह कर्मचारियों पर गाज गिरेगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

