हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर किशन शाह : होली पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने के उद्देश्य से जिला कोतवाली परिसर में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगर के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक की अध्यक्षता अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) द्वारा की गई। इस दौरान थाना प्रभारी ने उपस्थित लोगों से अपील की कि होली के अवसर पर किसी भी प्रकार की अफवाह, हुड़दंग या आपसी विवाद से दूर रहें और भाईचारे के साथ पर्व मनाएं।
एसडीएम ने कहा कि होली आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक एकता का प्रतीक है। सभी नागरिक प्रशासन का सहयोग करें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि नशे की हालत में वाहन न चलाएं और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचें।
थाना प्रभारी ने बताया कि पर्व के दौरान नगर के प्रमुख चौक-चौराहों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहेगा। साथ ही सोशल मीडिया पर भ्रामक या आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में नगर के पार्षदगण, जनप्रतिनिधि, व्यापारी संघ के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शांतिपूर्ण होली मनाने और प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
अंत में नगरवासियों से अपील की गई कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
मनेंद्रगढ़ जिला कोतवाली में शांति समिति की बैठक सम्पन्न, शांतिपूर्ण होली मनाने की अपील..
खड़गवां में किसानों को होली से पहले 64.31 करोड़ की सौगात
हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर किशन शाह: होली पर्व से पहले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। एमसीबी जिले के 15,852 कृषकों को कृषक उन्नति योजना अंतर्गत 64 करोड़ 31 लाख 69 हजार 326 रुपये 60 पैसे की आदान सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है।
खड़गवां विकासखंड में आयोजित किसान सम्मेलन सह राशि वितरण समारोह में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसके अन्नदाता किसान हैं और उनकी समृद्धि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि होली से पहले खातों में राशि अंतरित कर सरकार ने अपना वादा निभाया है।
राज्य स्तर से 10,324 करोड़ की सहायता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड स्थित रहंगी खेल मैदान से राज्य के 25 लाख 28 हजार किसानों के खातों में 10,324 करोड़ रुपये की आदान सहायता राशि जारी की। इसी क्रम में मनेन्द्रगढ़, भरतपुर और खड़गवां विकासखंडों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए।
खड़गवां को 18.50 करोड़ से अधिक
खड़गवां विकासखंड के 2,987 किसानों को 11 करोड़ 84 लाख 31 हजार 941 रुपये 60 पैसे तथा कोड़ा क्षेत्र के 1,862 किसानों को 6 करोड़ 66 लाख 56 हजार 966 रुपये की राशि अंतरित की गई। कुल मिलाकर खड़गवां क्षेत्र को 18 करोड़ 50 लाख 88 हजार 907 रुपये 60 पैसे की सहायता प्रदान की गई।
जिले में लगभग 49 हजार किसान करीब 46 हजार हेक्टेयर में खेती करते हैं, जिनमें 33,840 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है। समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले पंजीकृत किसानों को 731 रुपये प्रति क्विंटल की अंतर राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में भेजी गई है।
सरकार की योजनाओं पर जोर
मंत्री जायसवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान की खरीदी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की है। पूर्व में 2,369 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा चुका था, जबकि शेष 731 रुपये की अंतर राशि अब जारी की गई है।
उन्होंने कहा कि डीबीटी प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास, वनाधिकार पट्टा वितरण और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
खड़गवां में विकास कार्य
मंत्री ने बताया कि खड़गवां में कृषि महाविद्यालय का निर्माण प्रारंभ हो चुका है। बरदर–गिद्धमुड़ी मार्ग विकास, उधनापुर नहर संचालन, रतनपुर एवं करवा अंजलि जलाशय से जल आपूर्ति जैसी योजनाओं पर कार्य जारी है। साथ ही खड़गवां में ही रजिस्ट्री सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य प्रिया मसराम, जनपद सदस्य श्याम बाई मरकाम सहित कई जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। समारोह स्थल पर उत्साह और उमंग का वातावरण देखने को मिला।
11 आईएएस अधिकारियों के तबादले, देखें आदेश…
हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : राज्य शासन द्वारा आज 11 IAS अधिकारियों के तबादले किए गए हैं।
देखें आदेश :



सरगवां में 20 करोड़ से बैराज और 10 करोड़ से बनेगी रिंग रोड..
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर: मंगलवार को विधानसभा में प्रस्तुत राज्य बजट में सरगुजा संभाग के लिए सौगातों की झड़ी लगा दी गई है। राज्य सरकार ने सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, कोरिया और जशपुर सहित पूरे संभाग के लिए करोड़ों रुपए का प्रावधान किया है।
सड़क, सिंचाई और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों के बजट में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी। यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए बजट में घोषणाएं की गई हैं। बलरामपुर-रामानुजगंज शहर के भीतर भारी वाहनों के दबाव को कम करने के लिए रिंग रोड निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। कोरिया से चिरमिरी मार्ग के उन्नयन के लिए 10 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान है, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।
भैयाथान के तेलगांव से बुंदिया चौक तक सड़क निर्माण के लिए 7 करोड़ रुपए से अधिक की राशि दी गई है। कृषि और भू-जल स्तर में सुधार के लिए दो प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। सरगवां बैराज (अंबिकापुर) निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया है। गज डैम (बैकुंठपुर) के उन्नयन के लिए 10 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं से हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। सरगुजा के लोगों को अब इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी होगी।
अंबिकापुर में 220 बिस्तर क्षमता वाले जिला चिकित्सालय के नए भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस अस्पताल के बनने से संभाग के मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा। क्षेत्रीय विकास को रफ्तार देने के लिए सरकार ने सरगुजा-जशपुर विकास प्राधिकरण की राशि 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ कर दी है। इसी तरह बस्तर विकास प्राधिकरण के लिए भी 75 करोड़ का प्रावधान है।
पीएम श्री शासकीय प्राथमिक विद्यालय चनवारीडांड का विभागीय निरीक्षण, अधिकारियों ने दिए आवश्यक निर्देश…
हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन शाह : जिले के पीएम श्री शासकीय प्राथमिक विद्यालय चनवारीडांड में आज विभागीय अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में माननीय एसडीएम लिंगराज सिदार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी विपिन पाण्डेय, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी वीरेन्द्र पाण्डेय तथा डीपीओ सुशील शर्मा शामिल रहे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पीएम श्री विद्यालय के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं एवं आवश्यक कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। शैक्षणिक गतिविधियों, छात्र उपस्थिति, शिक्षण गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं एवं अभिलेखों का बारीकी से अवलोकन किया गया।
अधिकारियों ने अकादमिक गतिविधियों की समीक्षा करते हुए शिक्षकों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करने, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर संकुल समन्वयक सुरेश मिश्रा एवं विद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विद्यालय की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया।
भ्रष्टाचार का ‘रेशमी’ खेल: भैयाथान के सिरसी में मनरेगा और रेशम विभाग की मिलीभगत से करोड़ों को चूना!
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/भैयाथान मुकेश गुप्ता : जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम सिरसी से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शासन की पारदर्शी व्यवस्था और डिजिटल हाजिरी (NMMS) की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। यहाँ रेशम विभाग के कार्यों में वृक्षारोपण के नाम पर स्वीकृत राशि को ‘पुताई’ के खेल में ठिकाने लगाया जा रहा है।
बेवक्त की पुताई और फर्जीवाड़े का ‘कलर’
हैरानी की बात यह है कि रेशम विभाग के अर्जुन वृक्षों में पुताई का कार्य अमूमन अगस्त से नवंबर के बीच किया जाता है, लेकिन वर्तमान में नियम-कायदों को ताक पर रखकर यह कार्य केवल बजट खपाने के उद्देश्य से कराया जा रहा है। वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण कार्य की आड़ में सिर्फ चूना-पुताई कर खानापूर्ति की जा रही है।
डिजिटल अटेंडेंस में ‘फोटोशॉप’ का खेल
भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गई जब मनरेगा के तहत हो रहे इस कार्य में मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज करने के लिए तकनीक का सहारा लिया गया।
एक ही फोटो, हर दिन हाजिरी: ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम को ठगने के लिए एक ही तस्वीर का इस्तेमाल रोजाना किया जा रहा है।
बढ़ता ग्राफ: कुछ दिनों पहले तक 3 मजदूरों की फर्जी हाजिरी लग रही थी, लेकिन अब हौसले इतने बुलंद हैं कि 7 मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर सरकारी खजाने पर डाका डाला जा रहा है।
बिना पद के ‘चौकीदार’ और फील्ड ऑफिसर पर आरोप
शिकायत के अनुसार, सिरसी में अर्जुन पेड़ों की रखवाली के लिए एक चौकीदार की नियुक्ति की गई है, जबकि विभाग में ऐसा कोई पद स्वीकृत ही नहीं है। बिना पद स्वीकृति के नियुक्ति और भुगतान अपने आप में एक बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रहा है। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का सीधा आरोप फील्ड ऑफिसर तिलक श्रीवास्तव पर है, जिनके संरक्षण में यह पूरा ‘फर्जीवाड़ा नेटवर्क’ फल-फूल रहा है।
जब सरकार मनरेगा में पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य कर चुकी है, तो एक ही फोटो से बार-बार अटेंडेंस कैसे स्वीकार हो रही है? क्या इसमें उच्च अधिकारियों की भी मौन सहमति है?
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस ‘सफेद हाथी’ बन चुके प्रोजेक्ट और फील्ड ऑफिसर की कारगुजारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।
इस मामले में जब तिलक श्रीवास्तव से चौकीदार के फोन के माध्यम से बात की गई तब उनके द्वारा इस मामले को स्वीकार किया गया और बयान देने की बात भी कही गई लेकिन कई दिनों तक बयान के लिए घुमाने के बावजूद उनके द्वारा बयान नहीं दिया गया। बयान न मिलने के कारण अंतत उनके बयान के बिना ही इस न्यूज़ को प्रकाशित कर दिया गया है, लेकिन इस मामले में चौकीदार द्वारा अपना पक्ष रखा गया है और चौकीदार ने हो रहे सारे घोटाले की पोल खोल कर रख दी है। अगले अंक में हमारे द्वारा उनके द्वारा दिए गए बयान के साथ एक विस्तृत न्यूज़ चलाई जाएगी।
बड़ी खबर: छत्तीसगढ़ वन विभाग में पदोन्नति के बाद 45 अधिकारियों की नई नियुक्तियाँ…
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने राज्य में प्रशासनिक फेरबदल की एक और सूची जारी की है। इस आदेश के तहत पदोन्नत हुए 15 वनक्षेत्रपालों को अस्थायी रूप से नवीन पदस्थापना दी गई है। विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक ESTB-102(2)/145/2025-FOREST के अनुसार, अधिकारियों को उनके नाम के सम्मुख दर्शाए गए नए स्थानों पर पदस्थ किया गया है।
प्रमुख नियुक्तियाँ और नवीन प्रभार:



छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल: 124 वनक्षेत्रपालों के नवीन पदस्थापना आदेश जारी…
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग (मंत्रालय) ने राज्य प्रशासनिक सेवा में बड़ा बदलाव करते हुए 124 वनक्षेत्रपालों (Range Officers) का प्रशिक्षण उपरांत अस्थायी रूप से नवीन पदस्थापना आदेश जारी किया है। महानदी भवन से जारी इस आधिकारिक सूची में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रभार बदले गए हैं।
वन परिक्षेत्र अधिकारियों के तबादले देख सूची :





बिछिया टोला की केवई नदी में अवैध रेत उत्खनन: मशीनों से दिन-दहाड़े खनन, प्रशासन पर उठे सवाल…
हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर किशन शाह : केल्हारी से लगभग 3 किलोमीटर दूर बिछिया टोला अंतर्गत बहने वाली केवई (ओला) नदी में अवैध रेत उत्खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि नदी के बीचों-बीच पोकलेन और जेसीबी मशीनों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है, जिससे नदी की धारा और प्राकृतिक संरचना को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
अंतरराज्यीय सीमा पर खुला खेल
केवई नदी छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की अंतरराज्यीय सीमा बनाती है। नदी का एक किनारा छत्तीसगढ़ में तो दूसरा मध्य प्रदेश में स्थित है। रेत माफिया छत्तीसगढ़ सीमा से अवैध रूप से रेत निकालकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में ऊंचे दामों पर खपा रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन 20 से 25 ट्रैक्टर रेत की ढुलाई खुलेआम हो रही है।
एनजीटी नियमों की अनदेखी
नदी किनारे अस्थायी सड़क बनाकर मशीनों से खुदाई की जा रही है। आरोप है कि (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर नदी के भीतर भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।इस तरह का उत्खनन नदी के जलस्तर को तेजी से गिरा सकता है और पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ सकता है।
पर्यावरणीय खतरे की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक रेत निकासी से—
जलस्तर में गिरावट
नदी किनारों का कटाव
जलीय जीवों व जैव विविधता को नुकसान
भविष्य में जल संकट की संभावना
जैसे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
एमसीबी जिले के अंतर्गत तहसील केल्हारी में चल रहे इस अवैध कारोबार पर प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खनिज विभाग के संरक्षण से इतनी बड़ी मात्रा में उत्खनन हो रहा है। यह प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
देखने वाली बात यह है की शासन इस पर क्या ठोस कार्रवाई करती है या फिर रेत माफियाओं का हौसला ऐसे ही होता रहेगा बुलंद।
हफ्ते भर के भीतर दुबारा पटवारियों का जारी हुआ तबादला लिस्ट,कलेक्टर ने 58 पटवारियों का स्थानांतरण आदेश किया जारी…
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : जिले के विभिन्न तहसीलों में लंबे समय से पदस्थ हल्का पटवारियों के कार्यों में प्रभावशीलता, प्रशासनिक दक्षता एवं लोकहित को दृष्टिगत रखते हुए 58 पटवारियों का स्थानांतरण आदेश कलेक्टर अजीत वसंत द्वारा जारी किया गया है।
देखें आदेश :




सरगुजा जिले में पटवारियों के थोक में तबादले, 83 पटवारियों का किया गया तबादला…
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : लंबे समय से एक ही स्थान पर पड़ा स्थल का पटवारी को प्रशासनिक दक्षता एवं कार्यों के बेहतर संपादन एवं लोकहित की दृष्टिकोण से सरगुजा जिले के 83 पटवारियों के तबादले किए गए हैं।
देखें आदेश :





छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई, कस्टोडियल डेथ मामले में SDM करुण डहरिया निलंबित; हत्या का केस दर्ज…
हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर-रामानुजगंज: छत्तीसगढ़ शासन ने बलरामपुर जिले के कुसमी में पदस्थ एसडीएम (डिप्टी कलेक्टर) करुण डहरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अवैध बॉक्साइट परिवहन की जांच के दौरान हुई एक व्यक्ति की मौत और एसडीएम की गिरफ्तारी के बाद की गई है।

क्या है पूरा मामला?
सरकारी आदेश के मुताबिक, 16 फरवरी 2026 को एसडीएम करुण डहरिया के नेतृत्व में एक टीम ग्राम हंसपुर (थाना कोरंधा) में अवैध बॉक्साइट परिवहन की सूचना पर जांच करने गई थी। आरोप है कि इस दौरान टीम द्वारा तीन ग्रामीणों—राम उर्फ रामनरेश (62 वर्ष), अजीत राम (60 वर्ष) और आकाश अगरिया (20 वर्ष)—के साथ मारपीट की गई।
इस मारपीट के गंभीर परिणाम स्वरूप 62 वर्षीय राम उर्फ रामनरेश की मृत्यु हो गई। घटना के बाद जिला कलेक्टर की रिपोर्ट और पुलिस जांच में एसडीएम की संलिप्तता पाए जाने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
कोरंधा थाने में इस मामले को लेकर अपराध क्रमांक 03/2026 दर्ज किया गया है। एसडीएम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत मामला दर्ज है:
* धारा 103 (1): हत्या (Murder)
* धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुँचाना
* धारा 3(5): सामान्य आशय (Common Intention)
एसडीएम करुण डहरिया को 16 फरवरी 2026 को ही गिरफ्तार कर लिया गया था और वर्तमान में वे न्यायिक रिमांड पर जिला जेल रामानुजगंज में निरुद्ध हैं।
शासन का निलंबन आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेश के अनुसार:
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9(2)(क) के तहत श्री करुण डहरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, सरगुजा संभाग (अंबिकापुर) निर्धारित किया गया है।उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
यह आदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से उप सचिव क्लेमेन्टीना लकड़ा द्वारा जारी किया गया है।
बंद कमरे में कोयला जलाकर सोना पड़ा भारी, दम घुटने से पति-पत्नी और मासूम बच्ची की मौत…
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : जिले के ग्राम चंदरपुर (तलवापारा) में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ कोयले के धुएं से दम घुटने के कारण एक ही परिवार के तीन सदस्यों की अकाल मृत्यु हो गई। मृतकों में पति, पत्नी और उनकी 4 वर्षीय मासूम बेटी शामिल है। इस घटना के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम चंदरपुर निवासी कवल साय (30 वर्ष), उनकी पत्नी कुन्ती बाई (25 वर्ष) और उनकी 4 साल की बेटी बीती रात ठंड से बचने के लिए कमरे में कोयला (अंगीठी) जलाकर सोए थे।
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने इस मकान में रोशनदान (Ventilation) की कमी थी। कमरा पूरी तरह बंद होने के कारण कोयले से निकलने वाली जहरीली गैस (कार्बन मोनोऑक्साइड) कमरे में भर गई, जिससे सोते समय ही तीनों का दम घुट गया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
ग्रामीणों में शोक की लहर
सुबह जब घर के अन्य सदस्यों ने काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर अंदर देखा, तो उनके होश उड़ गए। तीनों के शव बिस्तर पर ही मिले। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में इस दुखद घटना के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है।
पुलिस जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक तौर पर मौत का कारण दम घुटना ही लग रहा है, लेकिन मामले की हर पहलू से गहन जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बंद कमरे में कोयला या लकड़ी जलाकर सोना जानलेवा हो सकता है। जलते हुए कोयले से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस निकलती है, जिसका कोई रंग या गंध नहीं होती, और यह चुपचाप इंसान को मौत की नींद सुला देती है।
सूरजपुर महाघोटाला: क्या ‘सद्भावना’ के नाम पर जमीनों की बंदरबांट को रफा-दफा कर रही हैं SDM शिवानी जायसवाल?
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : जिला सूरजपुर में भू-राजस्व नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। लटोरी तहसील में शासकीय पट्टे की जमीनों को बिना कलेक्टर की अनुमति के खुर्द-बुर्द करने के मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शिवानी जायसवाल की भूमिका संदिग्ध घेरे में है। ताजा दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि एसडीएम महोदया ने गंभीर वित्तीय और कानूनी अनियमितताओं के बावजूद आरोपी तहसीलदार को क्लीन चिट देने की पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर ली है।
‘कारनामा’ उजागर हुआ तो बचाव में उतरा प्रशासन
बता दें कि समाचार पत्र हिंद स्वराष्ट्र और सिंधु स्वाभिमान में “लटोरी तहसीलदार कारनामा” शीर्षक से प्रकाशित खबरों के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था। मामले की जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि ग्राम लटोरी के खसरा नंबर 213/2, 421/2 और 114/1 की भूमि, जो कि मूल रूप से शासकीय पट्टे की जमीन थी, उसे बिना कलेक्टर की अनिवार्य अनुमति के बेचा गया। यह सीधे तौर पर भू-राजस्व संहिता की धारा 165 7 (ख) का खुला उल्लंघन है।
SDM की अजीबोगरीब दलील: “गलती तो हुई, पर नीयत साफ थी”
सबसे चौंकाने वाला पहलू एसडीएम सूरजपुर द्वारा कलेक्टर को भेजी गई रिपोर्ट है। एक तरफ एसडीएम स्वीकार करती हैं कि तहसीलदार ने पट्टे की जमीन पर चौहद्दी (Boundary) जारी की और बिना अनुमति रजिस्ट्री होने दी, लेकिन दूसरी तरफ वे इसे “सद्भाविक त्रुटि” (Good faith error) बताकर ढाल बन रही हैं।
तर्क 1: एसडीएम का कहना है कि तहसीलदार ने जानकारी होने के बाद नामांतरण (Mutation) नहीं किया, इसलिए यह केवल एक छोटी सी गलती है।
तर्क 2: खसरा नंबर 213/2 के मामले में एसडीएम ने सारा ठीकरा राजस्व निरीक्षक (RI) पर फोड़ दिया कि उसने रिपोर्ट में पट्टे की जमीन का जिक्र नहीं किया था, इसलिए तहसीलदार ने नामांतरण कर दिया।
सवाल यह उठता है कि क्या एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी इतना अनजान हो सकता है कि उसे पट्टे की जमीन और सामान्य जमीन का फर्क समझ न आए? या फिर यह ‘सद्भावना’ किसी बड़े लेनदेन का हिस्सा है?
पत्रकार पर ही मढ़ दिया दोष
जब तहसीलदार से इस भ्रष्टाचार पर जवाब मांगा गया, तो उन्होंने अपनी गलती मानने के बजाय शिकायतकर्ता पत्रकार पर ही निशाना साधा। तहसीलदार ने अपने लिखित जवाब में आरोप लगाया कि “पत्रकार का उद्देश्य कुछ और है और उद्देश्य पूरा नहीं होने पर मुझे बदनाम किया जा रहा है।” अब इस मामले में तहसीलदार ही बता पाएंगे कि पत्रकार का उद्देश्य क्या था??हैरानी की बात यह है कि एसडीएम ने तहसीलदार के इस बचकाने और गैर-जिम्मेदाराना तर्क को भी अपनी जांच का आधार बनाया है, जो उनके पक्षपाती रवैये को दर्शाता है।
मुख्य सवाल जो एसडीएम की कार्यप्रणाली पर पर्दा उठाते हैं:
1. जब नियम स्पष्ट है कि पट्टे की जमीन बिना कलेक्टर की अनुमति के नहीं बिक सकती, तो तहसीलदार ने चौहद्दी क्यों जारी की?
2. क्या धारा 165 का उल्लंघन करने पर केवल ‘नोटिस-नोटिस’ का खेल खेलना ही एसडीएम की जिम्मेदारी है?
3. पट्टे की जमीन की रजिस्ट्री हो जाना ही अपने आप में एक अपराध है, फिर तहसीलदार को “जानबूझकर त्रुटि नहीं करना” कहकर बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है?
क्या प्रशासन की नजर में “भूलवश” किया गया अपराध, अपराध नहीं होता? सूरजपुर जिले के लटोरी तहसील में हुए ताजा जमीन घोटाले और उस पर एसडीएम शिवानी जायसवाल द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट इसी ओर इशारा कर रही है। पट्टे की शासकीय जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री के मामले में एसडीएम ने जिस तरह तहसीलदार को बचाने के लिए ‘शब्दों की बाजीगरी’ की है, उससे साफ है कि यह मामला केवल एक ‘त्रुटि’ नहीं, बल्कि गहरी मिलीभगत है।
कानून की धज्जियां: धारा 165 (7-ख) का खुला उल्लंघन
दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम लटोरी के खसरा नंबर 213/2, 421/2 और 114/1 की भूमि मूलतः शासकीय पट्टे की है। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 165 (7-ख) स्पष्ट रूप से कहती है कि शासन द्वारा आवंटित पट्टे की भूमि को बिना जिला कलेक्टर की पूर्व अनुमति के हस्तांतरित (बेचा) नहीं जा सकता।
बावजूद इसके:
तहसीलदार लटोरी ने इन पट्टे की जमीनों पर बिक्री हेतु चौहद्दी (Boundary) जारी कर दी।
खसरा नंबर 213/2 का तो बाकायदा नामांतरण (Mutation) भी कर दिया गया।
एसडीएम ने स्वयं स्वीकार किया है कि यह धारा 165 (7-ख) का सीधा उल्लंघन है।
SDM की रिपोर्ट: न्याय का गला घोंटने की कोशिश?
हैरानी की बात यह है कि जब कार्रवाई की बारी आई, तो एसडीएम शिवानी जायसवाल ने कलेक्टर को भेजी अपनी रिपोर्ट में तहसीलदार को यह कहते हुए बचा लिया कि:
“तहसीलदार द्वारा जानबूझकर त्रुटि कारित करना प्रतीत नहीं होता है… यह त्रुटि सद्भाविक प्रतीत होती है।”
सवाल यह है:
* सद्भावना या मिलीभगत?: एक राजस्व अधिकारी (तहसीलदार), जिसके पास जमीन के सारे रिकॉर्ड (मिसल बंदोबस्त, अधिकार अभिलेख) होते हैं, वह कैसे “अनजाने” में पट्टे की जमीन की चौहद्दी जारी कर सकता है?
* नामांतरण का खेल: खसरा नंबर 213/2 के मामले में तहसीलदार ने पट्टे की जमीन का नामांतरण आदेश 23.04.2024 को पारित कर दिया। क्या एक तहसीलदार को इतना भी ज्ञान नहीं कि पट्टे की जमीन पर कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य है?
क्या है असली सच?
एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि तहसीलदार ने “त्रुटि” की है, लेकिन उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने के बजाय मामले को केवल सिविल कोर्ट या कलेक्टर न्यायालय की ओर भेजने की खानापूर्ति की है। यह सीधे तौर पर आरोपी अधिकारी को ‘सेफ पैसेज’ देने की कोशिश है ताकि भविष्य में यह कहकर बचा जा सके कि “जांच में कुछ गलत इरादा नहीं पाया गया”।
जनता का सवाल: क्या आम आदमी भी “सद्भावना” के नाम पर पट्टे की जमीन बेच सकता है? अगर नहीं, तो लटोरी तहसीलदार पर मेहरबानी क्यों?
यह पूरा घटनाक्रम इशारा करता है कि सूरजपुर प्रशासन के भीतर एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जो सरकारी जमीनों को निजी हाथों में सौंपने के लिए कागजी हेराफेरी को ‘सद्भावना’ का नाम दे रहा है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर सूरजपुर इस ‘मैनेज्ड’ जांच रिपोर्ट पर क्या एक्शन लेते हैं या फिर भ्रष्टाचार की यह फाइल भी धूल फांकने के लिए छोड़ दी जाएगी।
विष्णु देव साय ने एमसीबी को दी 127 करोड़ की ऐतिहासिक सौगात…
हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर किशन शाह : चिरमिरी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती पर आज विकास, आस्था और जनविश्वास का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एमसीबी जिले को 127 करोड़ रुपये से अधिक की विकास सौगात प्रदान करते हुए 141 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री राम विचार नेतामऔर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल उपस्थित रहे।
मालवीय नगर, पोड़ी स्थित मंगल भवन में आयोजित समारोह में पारंपरिक स्वागत, दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री ने 3,879.85 लाख रुपये की लागत से पूर्ण 82 कार्यों का लोकार्पण तथा 8,824.78 लाख रुपये की लागत से बनने वाले 59 कार्यों का भूमिपूजन किया।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में बड़ी पहल
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि जिले में मेडिकल कॉलेज, एग्रीकल्चर कॉलेज, हॉर्टिकल्चर कॉलेज, पॉलिटेक्निक और फिजियोथैरेपी कॉलेज की स्थापना से युवाओं को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।
मनेंद्रगढ़ में 220 बिस्तरों वाले अस्पताल की स्वीकृति और चिरमिरी में नर्सिंग कॉलेज स्थापना से स्वास्थ्य सुविधाएं सशक्त होंगी।
659 करोड़ रुपये की नागपुर–चिरमिरी रेलवे लाइन परियोजना तथा 43 करोड़ रुपये की साजा पहाड़ सड़क परियोजना से आवागमन सुगम होगा।
जनजातीय और ग्रामीण विकास पर विशेष फोकस
प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि पीएम जनमन योजना के तहत भरतपुर–सोनहत क्षेत्र के बैगा परिवारों को आवास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। बिरसा मुंडा धरती आबा योजना के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं।
किसानों के लिए 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी और महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता जारी है।
‘मोदी की गारंटी’ पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि ‘मोदी की गारंटी’ का अर्थ हर वादा पूरा करना है। 18 लाख प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति, 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी, महिलाओं को आर्थिक सहायता और भूमिहीन मजदूरों को वार्षिक 10 हजार रुपये की सहायता सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है।
उन्होंने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का संकल्प दोहराया और पारदर्शी ई-गवर्नेंस प्रणाली की जानकारी दी।
Shri Jagannath Temple, Chirmiri में मुख्यमंत्री का दर्शन
कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री ने श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। शंखनाद, घंटों की ध्वनि और “जय जगन्नाथ” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
मुख्यमंत्री ने यज्ञशाला में हवन-पूजन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की तथा मंदिर परिसर के विकास हेतु हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। आनंद बाजार में आमजन के साथ प्रसाद ग्रहण कर उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
ऐतिहासिक दिन बना एमसीबी के लिए
127 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम इस आयोजन को ऐतिहासिक बना गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय उत्थान के क्षेत्र में घोषित योजनाएं एमसीबी जिले को विकास की नई दिशा देंगी।
यह दिन न केवल विकास की दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता के दृष्टिकोण से भी जिले के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया।
कुसमी एसडीएम समेत 4 पर हत्या का मुकदमा दर्ज, प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप…
हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर-रामानुजगंज : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ कुसमी में पदस्थ एसडीएम (SDM) करुण डहरिया समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। 60 वर्षीय ग्रामीण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद पुलिस ने यह कड़ी कार्रवाई की है। किसी राजपत्रित अधिकारी पर सीधे हत्या का मामला दर्ज होने से पूरे प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है।
क्या हैं मामला
बलरामपुर जिले के हंसपुर में अवैध बॉक्साइट खनन की सूचना मिलने के बाद मौके पर कुसमी एसडीएम पहुंचे थे, इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों के साथ विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने के बाद अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ रॉड और डंडों से मारपीट की। इस मारपीट में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, वहीं अस्पताल में इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
SDM समेत 4 के विरुद्ध अपराध दर्ज
बलरामपुर जिले के करोंधा थाना क्षेत्र के हंसपुर में ग्रामीण की हत्या के मामले में कुसमी एसडीएम करुण डहरिया समेत तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने ग्रामीण की हत्या और मारपीट के मामले में एसडीएम करुण डहरिया और उसके सहयोगी विक्की सिंह, मंजीत यादव और सुदीप यादव के खिलाफ नामजद हत्या का अपराध दर्ज किया है।
ग्रामीण की मौत से तनाव
दरअसल, इस मामले को लेकर कुसमी में आज जमकर बवाल मचा। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने जमकर प्रदर्शन और चक्का जाम कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि दोपहर 3:30 बजे के बाद शॉर्ट पीएम रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस की टीम ने एफआईआर दर्ज कर ली हैं और आरोपियों को जेल भेजने की तैयारी में लग गई हैं।
विवादों से घिरा। रहा है इनका करियर
करुण डहरिया का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है। इससे पहले भी कुसमी में SDM के पद पर रहते हुए उन पर छह लाख रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। वहीं 2022 में गरियाबंद जिले में जनपद सीईओ के पद पर रहते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा उन्हें ₹20000 रिश्वत लेते हुए भी गिरफ्तार किया था। 2019 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी करुण डहरिया हमेशा ही विवादों से घिरे रहे हैं, विवाद के बाद अब हत्या मामले में FIR ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
अवैध खनन की जांच के दौरान भारी बवाल; SDM पर बर्बरतापूर्वक पिटाई कर आदिवासी बुजुर्ग की हत्या का आरोप…
बलरामपुर/कुसमी: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। कुसमी ब्लॉक के हंसपुर में अवैध बॉक्साइट खनन की जांच करने गए एसडीएम (SDM) करूँण डहरिया और उनके साथ आए निजी लोगों पर ग्रामीणों के साथ बेरहमी से मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। इस हमले में एक 60 वर्षीय आदिवासी ग्रामीण की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
‘सिंचाई कर लौट रहे थे ग्रामीण’
जानकारी के मुताबिक, रविवार की रात करीब 8 बजे जब ग्रामीण अपने खेतों में गेहूं की सिंचाई कर लौट रहे थे, तभी सरना के पास थार कार सवार एसडीएम और उनके अन्य साथी 6-7 लोगों ने उन्हें रोका।
घायल पीड़ितों—अजीत उरांव (60 वर्ष) और आकाश अगरिया (20 वर्ष)—ने बताया कि उनसे पूछताछ की गई और फिर बिना किसी ठोस कारण के उन पर रॉड, डंडों और लातों से हमला कर दिया गया। मारपीट इतनी भीषण थी कि राम नरेश राम (60 वर्ष) मौके पर ही बेहोश हो गए। तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमी ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान राम नरेश राम ने दम तोड़ दिया।
उठते गंभीर सवाल: प्रशासन या ‘गुंडागर्दी’?
इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
निजी वाहन का इस्तेमाल: जांच के लिए एसडीएम सरकारी गाड़ी के बजाय एक निजी ‘थार’ गाड़ी में क्यों गए थे?
प्राइवेट लोग साथ क्यों?: राजस्व विभाग के आधिकारिक कर्मचारियों के स्थान पर एसडीएम के साथ ‘निजी गुर्गे’ क्या कर रहे थे?
साक्ष्य मिटाने की कोशिश?: सूत्रों का दावा है कि घटना के बाद मामले को दबाने के लिए नायब तहसीलदार को फोन कर बुलाया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि पूरी टीम राजस्व अमले के साथ थी।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल क्षेत्र में तनाव का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी पर लगे हत्या और मारपीट के इन आरोपों ने सरकार और सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
“हम तो बस पानी चलाकर लौट रहे थे, हमें क्या पता था कि सरकारी अधिकारी ही हमारी जान के दुश्मन बन जाएंगे।” अजीत उरांव (घायल ग्रामीण)
अमृत धारा महोत्सव में हंगामा: नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा यादव और विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव कार्यक्रम छोड़कर लौटे..
हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर किशन शाह : अमृत धारा महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित महोत्सव में उस समय विवाद की स्थिति बन गई जब नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा यादव और विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव कार्यक्रम स्थल से नाराज होकर लौट गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमृत धारा में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के अवसर पर जिला स्तरीय महोत्सव आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा यादव और विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव भी शामिल थे।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश के दौरान उनकी गाड़ी को पुलिस द्वारा रोक दिया गया। इसी बात को लेकर नाराजगी सामने आई और प्रोटोकॉल व्यवस्था को लेकर भी असंतोष जताया गया। इसी दौरान कथित तौर पर वाहन की नेम प्लेट हटाकर फेंकने की बात भी सामने आई और यह कहा गया कि “हमने अपने दम पर नाम कमाया है।”
घटना के बाद दोनों जनप्रतिनिधि कार्यक्रम छोड़कर वापस लौट गए।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। अमृत धारा महोत्सव क्षेत्र में हर वर्ष महाशिवरात्रि पर विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन होते हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर क्या स्पष्टीकरण देता है और भविष्य में प्रोटोकॉल व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
बड़ी खबर: सलाखों के पीछे पहुंचे हरिपुर सरपंच, क्या अब छिन जाएगी ‘सरपंची’ की कुर्सी?
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/लटोरी : गांव की सरकार चलाने वाले मुखिया जी अब खुद ‘हवालात’ की सरकार देख रहे हैं। हरिपुर ग्राम पंचायत के सरपंच, जिन पर गांव के ही एक रिटायर्ड शिक्षक और उनके पुत्रों पर जानलेवा हमला करने का संगीन आरोप है, फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में हैं। हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं के तहत हुई इस गिरफ्तारी ने पूरे जिले के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, पुरानी रंजिश के चलते सरपंच और उनके साथियों ने बीते 24 जनवरी की सुबह रिटायर्ड शिक्षक के परिवार पर जानलेवा हमला किया था। इस हमले में पीड़ित पक्ष को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सरपंच को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
सवाल: जेल से चलेगी सरकार या कुर्सी होगी खाली?
जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरपंच जेल से ही पंचायत की जिम्मेदारी निभाएंगे? कानून के विशेषज्ञों और पंचायती राज अधिनियम के मुताबिक स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- निलंबन (Suspension) की तलवार: नियमानुसार, यदि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को गंभीर आपराधिक मामले में 48 घंटे से अधिक की न्यायिक हिरासत (Jail) में भेजा जाता है, तो जिला कलेक्टर या संबंधित विभाग उन्हें पद से निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
- प्रभार का हस्तांतरण: सरपंच के जेल जाने की स्थिति में ग्राम पंचायत का कामकाज ठप नहीं होता। ऐसी सूरत में ‘उप-सरपंच’ को कार्यवाहक सरपंच का प्रभार सौंपा जा सकता है, ताकि विकास कार्य बाधित न हों।
- पद से बर्खास्तगी: यदि कोर्ट में आरोप सिद्ध हो जाते हैं और सरपंच को दोषी करार दिया जाता है, तो उनकी सदस्यता स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी और उस वार्ड/पंचायत में उपचुनाव की स्थिति बनेगी।
प्रशासनिक रुख
फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी मामले की फाइल और कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामले में सरपंच का पद पर बने रहना मुश्किल नजर आ रहा है।
“कानून सबके लिए बराबर है। यदि कोई जनप्रतिनिधि हिंसा में शामिल पाया जाता है, तो पंचायती राज नियमों के तहत उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।” — विभागीय सूत्र
अब देखना यह होगा कि हरिपुर की जनता को नया मुखिया कब मिलता है या फिर कानूनी दांव-पेच सरपंच की कुर्सी बचा पाते हैं।
कलेक्टर ने जिस आवेदन को किया था खारिज, जांच लंबित होने के बावजूद संभाग आयुक्त ने दी हरी झंडी; पटवारी की भूमिका भी संदिग्ध…
कोरवा जनजाति की जमीन पर प्रशासनिक ‘खेल’, 5 बच्चों के पिता को ‘निसंतान’ बताकर कमिश्नर कार्यालय से दिलाई बिक्री की अनुमति…..
हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/लटोरी : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में विशेष संरक्षित पहाड़ी कोरवा जनजाति की जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रशासन की नाक के नीचे भू-माफियाओं और राजस्व अमले की मिलीभगत का ऐसा खेल खेला गया है, जिसमें एक जीवित और भरे-पूरे परिवार वाले आदिवासी शख्स को सरकारी दस्तावेजों में ‘निसंतान’ घोषित कर दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि इस विवादित जमीन की बिक्री की अनुमति सरगुजा संभाग आयुक्त (कमिश्नर) कार्यालय से दे दी गई है, जबकि सूरजपुर कलेक्टर ने पूर्व में इस परमिशन के आवेदन को कड़ाई से खारिज कर दिया था। वहीं इस जमीन में राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के आरोप की जांच अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के यहां लंबित हैं।
पटवारी की फर्जी रिपोर्ट और साजिश :
मिली जानकारी के अनुसार, जिस पहाड़ी कोरवा आदिवासी की जमीन की सौदेबाजी की जा रही है, वह वास्तविक जीवन में 5 बच्चों का पिता है। लेकिन क्षेत्र के पटवारी ने अपनी राजस्व रिपोर्ट में उसे ‘निसंतान’ दर्शाया है। जानकारों का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा इसलिए किया गया ताकि यह दिखाया जा सके कि संबंधित आदिवासी का कोई कानूनी वारिस नहीं है और जमीन आसानी से गैर-आदिवासियों या रसूखदारों को बेची जा सके।
कलेक्टर की ‘ना’ के बाद कमिश्नर की ‘हां’ पर उठे सवाल:
इस मामले में प्रशासनिक विरोधाभास ने सबको चौंका दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सूरजपुर कलेक्टर ने जमीन की प्रकृति और आदिवासियों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बिक्री की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। नियमतः पहाड़ी कोरवाओं की जमीन की बिक्री के लिए कड़े प्रावधान हैं। कलेक्टर की अस्वीकृति के बाद यह मामला कमिश्नर कार्यालय पहुंचा, जहां से इसे बिक्री की मंजूरी मिल गई। सवाल यह उठ रहा है कि क्या कमिश्नर कार्यालय ने कलेक्टर के आदेश और पटवारी की संदिग्ध रिपोर्ट की जांच करना जरूरी नहीं समझा?
जांच अभी भी लंबित:
हैरानी की बात यह भी है कि उक्त जमीन को लेकर वर्तमान में एसडीएम (SDM) कार्यालय में जांच प्रक्रिया लंबित है। नियमानुसार, जब किसी संपत्ति या व्यक्ति की स्थिति पर जांच चल रही हो, तो उसकी बिक्री या हस्तांतरण की अनुमति नहीं दी जा सकती। लेकिन यहां जांच पूरी होने का इंतजार किए बिना ही फाइल को मंजूरी दे दी गई।


आदिवासी अधिकारों का हनन:
पहाड़ी कोरवा जनजाति को राष्ट्रपति का ‘दत्तक पुत्र’ माना जाता है और उनकी जमीन की सुरक्षा के लिए विशेष कानून हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भू-माफिया किस कदर सरकारी तंत्र में पैठ बना चुके हैं कि वे एक पिता के अस्तित्व और उसके बच्चों के हक को कागजों पर मिटाने की हिम्मत रखते हैं।
मुख्य सवाल जो जवाब मांगते हैं
* पटवारी ने किस आधार पर 5 बच्चों के पिता को ‘निसंतान’ बताया? क्या उस पर कोई दंडात्मक कार्रवाई होगी?
* एसडीएम कोर्ट में जांच लंबित होने के दौरान बिक्री की अनुमति कैसे जारी हुई?
* कलेक्टर द्वारा खारिज आवेदन पर कमिश्नर कार्यालय ने किन तथ्यों के आधार पर सहमति दी?