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आवारा कुत्तों के हमले में 15 हिरणों की मौत,, डिप्टी रेंजर समेत चार निलंबित…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा जिले के अम्बिकापुर स्थित संजय वन वाटिका में आवारा कुत्तों के हमले में 15 हिरणों की मौत हो गई। आवारा कुत्तों के हमले में इतनी बड़ी तादात पर हिरणों के मौत का मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया हैं। वहीं इस मामले में वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए वन वाटिका के प्रभारी सहित तीन सहायकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जारी आदेश के अनुसार उपवन क्षेत्रपाल (एससीएफओ) एवं प्रभारी अशोक सिन्हा, सहायक वनपाल ममता परते, प्रतिमा लकड़ा और बिंदु सिंह को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत निलंबित किया गया है। अधिकारियों पर वन्य प्राणियों के संरक्षण में घोर उदासीनता के कारण यह कार्यवाही की गई हैं। उल्लेखनीय हैं कि इस घटना में कुल 15 हिरणों की मौत हुई, जिनमें कोटरा, चीतल और चौसिंघा प्रजाति शामिल हैं। मृतकों में नर और मादा दोनों शामिल हैं। घटना के बाद एक और हिरण की मौत होने की भी पुष्टि हुई है। मिली जानकारी के अनुसार 4-5 आवारा कुत्ते बाड़े में घुस आए थे और उन्होंने हिरणों पर हमला कर दिया था इस हमले में बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौत हो गई।  

घटना की जानकारी पर डीएफओ अभिषेक जोगावत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच के लिए एसडीओ के नेतृत्व में टीम गठित की है, जिसे दो दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय और निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाती, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। 

छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित : धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम…

हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श के बाद पारित कर दिया गया। यह विधेयक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य में धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना और नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करना है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह विधेयक सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और यह कानून उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि बदलते समय के साथ कानूनों का अद्यतन आवश्यक हो जाता है। वर्ष 1968 से लागू प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गए थे। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़े विवादों के कारण सामाजिक तनाव और वर्ग संघर्ष की स्थितियां बनीं, जो कई बार प्रशासन और न्यायालय तक पहुंचीं। ऐसे परिदृश्य में एक स्पष्ट, पारदर्शी और प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई, जिससे समाज में बार-बार उत्पन्न होने वाले विवादों को रोका जा सके और समरसता को बनाए रखा जा सके।
विधेयक में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। अब धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा, जिसके बाद निर्धारित समय-सीमा में सूचना सार्वजनिक की जाएगी और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। जांच के उपरांत ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता रहे, लेकिन यह परिवर्तन किसी दबाव, प्रलोभन या भय के कारण न हो, इसकी जांच अनिवार्य होगी।
इस कानून में धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी को हर वर्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें धर्मांतरण से संबंधित जानकारी का विवरण शामिल होगा। ग्राम सभा को भी इस प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। विवाह को धर्मांतरण का आधार नहीं माना गया है, और विवाह के बाद भी धर्म परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।
अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विधेयक में कड़े दंड के प्रावधान किए गए हैं। जिसमें अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए सामान्य अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 5 लाख रुपए तक जुर्माना, विशेष वर्ग जिसमें महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति, नाबालिग आदि शामिल है, के अवैध धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 10 लाख रुपए जुर्माना, सामूहिक अवैध धर्मांतरण पर 10 वर्ष से आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान है। इसी तरह लोक सेवक द्वारा इस प्रकार का अपराध किया जाता है तो उसे 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 10 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है, वैसे ही धन के माध्यम से धर्मांतरण किए जाने संबंधित व्यक्ति को 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 20 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है। भय या प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष कारावास एवं न्यूनतम 30 लाख रुपए जुर्माना का भी प्रावधान है। इन अपराधों की पुनरावृत्ति किए जाने पर संबंधित को आजीवन कारावास और पीड़ितों के लिए प्रतिकार व्यवस्था विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है। 
 इस विधेयक में पीड़ितों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, धोखे या लालच के कारण किया गया पाया जाता है, तो उसे पीड़ित मानते हुए न्यायालय द्वारा क्षतिपूर्ति दिलाने का प्रावधान किया गया है। इससे न केवल पीड़ित को न्याय मिलेगा, बल्कि ऐसे कृत्यों पर प्रभावी रोक भी लगेगी। जांच प्रक्रिया को भी सुदृढ़ किया गया है, जिसमें केवल सक्षम अधिकारी ही मामलों की जांच करेंगे और न्यायालयों को इस अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए अधिसूचित किया जाएगा। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा। 
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून सामाजिक समरसता को मजबूत करेगा, विवादों को कम करेगा और राज्य में एक संतुलित एवं शांतिपूर्ण वातावरण स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता को सुरक्षित रखते हुए कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है।
इस विधेयक में प्रतिकार व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, प्रलोभन या धोखे से किया गया हो, तो उसे स्पष्ट रूप से पीड़ित माना जाएगा। ऐसे मामलों में न्यायालय आरोपी को पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दे सकता है। इसका भी प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम के तहत मामलों की जांच उप निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी। ऐसे मामलों में प्रमाण का भार आरोपी पर होगा। मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित न्यायालयों को अधिसूचित किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून राज्य में सामाजिक समरसता को मजबूत करेगा तथा विवादों को कम करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि स्पष्ट कानूनी व्यवस्था से अनावश्यक तनाव और संघर्ष की स्थिति से बचा जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक पारंपरिक सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता को भी सुनिश्चित करेगा।

जमीन-मकान की रजिस्ट्री होगी अधिक सरल, सुलभ और कम खर्चीली, सरकार ने 0.60% उपकर किया समाप्त…

हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को आज ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर बाजार मूल्य के आधार पर लगाया जाने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त हो गया है। वाणिज्यिक कर मंत्री ओ पी चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से प्रदेश के आम नागरिकों, किसानों, मध्यमवर्गीय परिवारों तथा संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
छत्तीसगढ़ उपकर समाप्त होने से अब संपत्ति पंजीयन की लागत में कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर एक करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की संपत्ति पर नागरिकों को लगभग 60 हजार रुपये की सीधी बचत होगी, इससे जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक सुलभ, सरल और कम खर्चीली बनेगी। इस अवसर पर विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करते हुए मंत्री चौधरी  ने कहा कि यह विधेयक केवल एक विधिक संशोधन नहीं, बल्कि राज्य सरकार की जनहित, लोककल्याण और कर-व्यवस्था में न्यायपूर्ण सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट मत है कि शासन का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जित करना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को सरल, सुलभ और सम्मानजनक बनाना है।
वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 के माध्यम से आम जनता के उपयोग की वस्तुओं एवं सेवाओं पर व्यापक कर रियायतें प्रदान कीं, जिससे आम नागरिकों की निर्वाह लागत में कमी आई। इसी क्रम में पंजीयन विभाग में भी अनेक ऐतिहासिक, व्यावहारिक और जनहितकारी सुधार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आम जनता पर आर्थिक बोझ कम करना और सेवाओं को सरल बनाना है। उन्होंने बताया कि स्वतः नामांतरण व्यवस्था आम जनता के लिए अत्यंत राहतकारी सिद्ध हुई है। पंजीयन के बाद तत्काल नामांतरण होने से पक्षकारों को आर्थिक बचत के साथ-साथ महीनों चलने वाली नामांतरण प्रक्रिया से मुक्ति मिली है। मई 2025 से अब तक लगभग डेढ़ लाख दस्तावेजों का स्वतः नामांतरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
पंजीयन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए सुगम मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो संपत्ति की सही भौगोलिक स्थिति सुनिश्चित करने में सहायक है। साथ ही, फर्जी व्यक्ति द्वारा पहचान छुपाकर पंजीयन न कराया जा सके, इसके लिए पंजीयन कार्यालयों में आधार आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए विभाग द्वारा पंजीयन कार्यालयों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वीजा ऑफिस की तर्ज पर सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत नागरिकों को वातानुकूलित प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, निःशुल्क वाई-फाई तथा क्यू-आधारित त्वरित पंजीयन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में 10 पंजीयन कार्यालयों को पीपीपी मोड पर स्मार्ट पंजीयन कार्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके बाद अन्य कार्यालयों को भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट कार्यालय बनाया जाएगा।
ओपी चौधरी ने बताया कि सरकार ने पंजीयन शुल्क निर्धारण की व्यवस्था में सुधार किया है। पहले संपत्ति के पंजीयन में गाइडलाइन मूल्य एवं बाजार मूल्य से जो अधिक होता था, उसी पर शुल्क लिया जाता था। अब इस व्यवस्था को बदलते हुए पंजीयन शुल्क को आपसी लेनदेन की कीमत के बजाय गाइडलाइन मूल्य से जोड़ा गया है, इससे बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिली है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी संपत्ति का गाइडलाइन मूल्य 10 लाख रुपये है, लेकिन दस्तावेज में बैंक ऋण आदि के कारण 25 लाख रुपये अंकित हैं, तो अब शुल्क केवल 10 लाख रुपये पर ही लगेगा। इस निर्णय से राज्य सरकार ने लगभग 170 करोड़ रुपये के राजस्व का त्याग किया है।
पहले परिवारजनों के मध्य दान, बंटवारा और हक-त्याग जैसी रजिस्ट्रियों पर बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे सरकार ने घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया है, चाहे संपत्ति का मूल्य कितना भी हो। उदाहरण के तौर पर, एक करोड़ रुपये की संपत्ति के दान पर पहले 80 हजार रुपये शुल्क लगता था, जो अब केवल 500 रुपये रह गया है, इससे सामान्य परिवारों और किसानों को व्यापक राहत मिली है।
गाइडलाइन मूल्य निर्धारण में भी व्यापक जनहितकारी सुधार किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी भूमि पर भी अत्यधिक मूल्यांकन की स्थिति को समाप्त करते हुए वर्गमीटर आधारित मूल्यांकन व्यवस्था खत्म कर दी गई है और अब मूल्यांकन हेक्टेयर दर से किया जा रहा है, इससे आम जनता को 300 से 400 करोड़ रुपये तक के लाभ का अनुमान है।
 मंत्री चौधरी ने बताया कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर लागू ढाई गुना मूल्यांकन, शहरों और गाँवों में कई प्रकार के अतिरिक्त मूल्यांकन तथा भूमि पर लगे वृक्षों के अलग मूल्यांकन जैसे प्रावधानों को भी समाप्त किया है, इससे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम हुआ है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। शहरी मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देते हुए अब फ्लैट का मूल्यांकन सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय केवल बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बाउंड्री वॉल, प्लिंथ आदि जैसे कारणों से होने वाले अनावश्यक अतिरिक्त मूल्यांकन को भी समाप्त किया गया है।
चौधरी ने बताया कि किसानों के हित में भी सरकार ने महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले दो-फसली भूमि, नकदी फसल, मछली पालन हेतु तालाब जैसी स्थितियों में अतिरिक्त मूल्यांकन कर आर्थिक भार बढ़ा दिया जाता था। अब इन सभी प्रावधानों को समाप्त कर कृषि भूमि के लेनदेन को अधिक सहज, न्यायसंगत और किफायती बनाया गया है। मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 के अंतर्गत स्थावर संपत्ति के अंतरण पर उपकर का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2023 में तत्कालीन सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन एवं राजीव गांधी मितान क्लब योजना के वित्तपोषण हेतु स्टांप शुल्क के अतिरिक्त 12 प्रतिशत की दर से उपकर अधिरोपित किया गया था। इसके कारण नागरिकों को संपत्ति के पंजीयन पर बाजार मूल्य का लगभग 0.60 प्रतिशत अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा था।
वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान में राजीव गांधी मितान क्लब योजना संचालित नहीं है तथा रोजगार संबंधी योजनाओं का वित्तपोषण अब राज्य के सामान्य बजट से किया जा रहा है। ऐसे में जिस उद्देश्य से यह उपकर लगाया गया था, वह अब प्रासंगिक नहीं रह गया है। इसी सोच के अनुरूप जनता को राहत प्रदान करने के लिए इस अनावश्यक उपकर को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार को उपकर से लगभग 148 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 150 करोड़ रुपये का उपकर प्राप्त हो चुका है। उपकर समाप्त होने से सरकार को राजस्व की हानि अवश्य होगी, किंतु इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा और यही सरकार की नीतियों का मूल केंद्र है।उन्होंने आगे कहा कि इस संशोधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 की धारा 8, धारा 9 तथा अनुसूची में वर्णित उपकर संबंधी प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव किया गया है। अचल संपत्ति के अंतरण विलेखों के पंजीयन पर लगाया जाने वाला उपकर अब पूर्णतः समाप्त कर दिया जाएगा। शासन के इस निर्णय और पंजीयन विभाग में किए गए सुधारों से प्रदेश की जनता को अनेक प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होंगे। संपत्ति के पंजीयन पर देय शुल्क में कमी आएगी, जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक किफायती होगी, मध्यमवर्गीय एवं निम्न आय वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी, दस्तावेजों के पंजीयन में वृद्धि होगी, किसानों और परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा तथा संपत्ति का बाजार मूल्य और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार सदैव इस सिद्धांत पर चली है कि छत्तीसगढ़ की जनता पर अनावश्यक कर का बोझ नहीं होना चाहिए। यह निर्णय और सुधारों की यह श्रृंखला उन लाखों नागरिकों को राहत देने वाली है, जो अपनी जीवन भर की कमाई से जमीन खरीदते हैं, घर बनाते हैं। परिवार में संपत्ति का बंटवारा करते हैं अथवा अपने बच्चों के भविष्य के लिए संपत्ति का हस्तांतरण करते हैं। यह केवल कर में कमी नहीं, बल्कि जनता के परिश्रम, सपनों और अधिकारों के प्रति संवेदनशील शासन का परिचायक है। उन्होंने कहा कि विष्णु देव की सरकार आने के बाद पंजीयन विभाग में किए जाने वाले जनहितैषी सुधारों के कारण पंजीयन शुल्क में होने वाले रियायतों से प्रतिवर्ष 460 करोड़ का सीधा लाभ आमजनता को होगा।

अचल संपत्ति रजिस्ट्री पर उपकर समाप्त, आम नागरिकों को बड़ी राहत – मुख्यमंत्री साय 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगाए गए 0.60 प्रतिशत उपकर को समाप्त करना हमारी सरकार का जनहित में लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि आम नागरिक, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए हम लगातार कर व्यवस्था को सरल, न्यायसंगत और नागरिक-अनुकूल बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल कर में राहत नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के सपनों को सम्मान देने की दिशा में एक सार्थक पहल है, जो अपनी मेहनत की कमाई से घर और जमीन खरीदते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कदम से संपत्ति के पंजीयन में वृद्धि होगी, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।

‘राम-राज्य’ में ‘अफीम’ की खेती और मंत्री जी की ‘नजर’…


हिंद स्वराष्ट्र संपादकीय : छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का दम भरने वाले कृषि विभाग के लिए इन दिनों हवाएं कुछ बदली-बदली और ‘नशीली’ नजर आ रही हैं। विडंबना देखिए कि सूबे के कद्दावर कृषि मंत्री रामविचार नेताम के अपने ही गृह जिले (बलरामपुर-रामानुजगंज) में प्रशासन को उन्नत किस्म के धान या टमाटर नहीं, बल्कि लहलहाती अफीम की फसल मिली है। इसे विडंबना कहें या विभागीय सक्रियता की पराकाष्ठा कि जिस मंत्री के कंधों पर प्रदेश को ‘अन्न का कटोरा’ बनाए रखने की जिम्मेदारी है, उनके ही आंगन में ‘नशे का कटोरा’ तैयार हो रहा था।
चिराग तले अंधेरा या कुछ और?
कहावत है कि चिराग तले हमेशा अंधेरा होता है, लेकिन जब चिराग खुद कृषि मंत्रालय की बागडोर संभाल रहा हो, तो अंधेरा इतना घना कैसे हो गया कि खेतों में प्रतिबंधित अफीम की क्यारियां सज गईं? मंत्री जी अक्सर मंचों से किसानों को आधुनिक खेती और जैविक खाद के फायदे गिनाते हैं, पर शायद वह यह बताना भूल गए कि उनके अपने क्षेत्र में कुछ ‘प्रगतिशील’ किसान ‘नार्को-फार्मिंग’ में डिग्री हासिल कर रहे थे।
साहेब की नजरें और प्रशासनिक ‘मौन’
सवाल यह उठता है कि क्या यह महज एक प्रशासनिक चूक है या फिर सत्ता की धमक के साये में पनपता एक अवैध कारोबार? जब जिले का पूरा अमला मंत्री जी के दौरे और स्वागत की तैयारियों में व्यस्त रहता है, तब खेतों में अफीम का उगना पुलिस और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। क्या मंत्री जी को अपने क्षेत्र की मिट्टी की महक और अफीम के फूलों की गंध में फर्क महसूस नहीं हुआ?
“जिस धरती पर अन्नपूर्णा की स्तुति होनी चाहिए थी, वहां नशे की खेती का फलना-फूलना यह बताता है कि सरकार की ‘नजर’ और ‘नियत’ के बीच एक बड़ा अंतर है।”

जवाबदेही किसकी?
मंत्री रामविचार नेताम जी को अब यह स्पष्ट करना होगा कि क्या उनका ‘कृषि मॉडल’ इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है? यदि मंत्री जी अपने घर के पिछवाड़े हो रही अवैध गतिविधियों से अनजान हैं, तो फिर पूरे प्रदेश की कृषि व्यवस्था की निगरानी का उनका दावा कितना खोखला है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। यह सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि उन दावों की पोल है जो सुशासन और ‘जीरो टॉलरेंस’ के नाम पर किए जाते हैं।
उम्मीद है कि अगली बार जब मंत्री जी किसानों को ‘फसल विविधीकरण’ की सलाह देंगे, तो वह अफीम को उस सूची से बाहर रखने की याद जरूर रखेंगे। फिलहाल तो बलरामपुर के इन खेतों ने सरकार के चेहरे पर जो ‘लाली’ बिखेरी है, वह अफीम के फूलों से भी ज्यादा सुर्ख है।

समुद्र में चीन की ‘युद्ध’ की तैयारी? मछली पकड़ने वाली नावों के असामान्य पैटर्न से दुनिया हैरान…

नई दिल्ली। पूर्वी चीन सागर से आई सैटेलाइट तस्वीरों और समुद्री डेटा ने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के बीच हलचल पैदा कर दी है। हाल ही में हुए एक जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि हजारों मछली पकड़ने वाली नावें चीनी समुद्र में बेहद सटीक और जटिल ज्यामितीय आकार बना रही हैं, जो आम तौर पर मछली पकड़ने की गतिविधियों से बिलकुल अलग लगता है।
दिसंबर के अंत से जनवरी की शुरुआत के बीच, चीनी बेड़े ने तीन अलग-अलग मौकों पर अपनी संगठित शक्ति का प्रदर्शन किया है। समुद्री डेटा फर्म ‘ingeniSPACE’ के मुख्य परिचालन अधिकारी जेसन वांग ने AFP को बताया कि ये पैटर्न बेहद असामान्य लग रहे थे।

चीन ने कब-कब किया शक्ति का प्रदर्शन
25 दिसंबर को लगभग 2,000 चीनी जहाजों ने ताइवान के उत्तर-पूर्व में ‘L’ आकार की दो विशाल समानांतर कतारें बनाई। ये कतारें करीब 300 किलोमीटर तक फैली थी।

इसके बाद जनवरी की शुरुआत लगभग 1,000 चीनी जहाजों ने लगभग 400 किलोमीटर कर फैली एक विशाल आयताकार (Rectangle) आकृति बनाई। विशेष बात यह थी कि इसमें वही जहाज शामिल थे जो दिसंबर की घटना में देखे गए थे।

वहीं कुछ सप्ताह बाद 1,200 चीनी जहाजों ने फिर से समानांतर रेखाएं बनाई और करीब 30 घंटों तक अपनी स्थिति पर डटे रहे।

विशेषज्ञों ने कहा ‘मछली पकड़ना’ उद्देश्य नहीं
समुद्री सुरक्षा विश्लेषकों का तर्क है कि ये गतिविधियां किसी भी तरह से व्यावसायिक नहीं लग रही थी। खराब मौसम और तेज हवाओं के बीच हजारों जहाजों का एक-दूसरे से मात्र 500 मीटर की दूरी पर सटीक रेखा में रहना बिना किसी केंद्रीय कमान के संभव नहीं है। आमतौर पर मछुआरे अधिक शिकार करने के लिए फैल जाते हैं, न कि एक-दूसरे के करीब आकर कतारें बनाते हैं।

तैयारी का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन द्वारा अपने नागरिक बेड़े को रणनीतिक उद्देश्यों, जैसे कि नाकाबंदी या संकट के समय सैन्य सहयोग के लिए उपयोग करने का एक परीक्षण हो सकता है। पूर्व नौसैनिक अधिकारियों का कहना है कि पहले खराब मौसम में ये नावें बंदरगाह लौट जाती थीं, लेकिन अब इनका समुद्र में डटे रहना एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।

TI, SI समेत 11 पुलिस अधिकारियों के तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र जशपुर : जशपुर जिले के पुलिस उप महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह द्वारा प्रशासनिक दृष्टिकोण से 11 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए हैं। जारी आदेश में 4 निरीक्षक, 4  उप निरीक्षक और तीन सहायक उपनिरीक्षकों  के नाम शामिल हैं।

देखें आदेश :

सांसद चिंतामणि महराज ने अंबिकापुर रेलवे स्टेशन के 2 नए प्लेटफार्म सहित विकास कार्यों की रखी आधारशिला,10 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में आज सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज द्वारा आज लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से किए जाने वाले विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया।

सांसद चिंतामणि महराज ने अंबिकापुर रेलवे स्टेशन परिसर में 2 नए प्लेटफार्म, नया लूप लाइन, पैदल पथ पार (फुट क्रॉसिंग) तथा प्लेटफार्म क्रमांक 1 के लंबाई विस्तार सहित अन्य आवश्यक अधोसंरचना कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया।

भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद चिंतामणि महराज ने कहा कि अंबिकापुर रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आवागमन करते हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या और उनकी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड द्वारा स्टेशन में विभिन्न विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों के पूर्ण होने से यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं मिलेंगी तथा ट्रेनों के संचालन में भी सुगमता आएगी।

सांसद ने कहा कि नए प्लेटफार्म के निर्माण और लूप लाइन के विस्तार से ट्रेनों के आवागमन की क्षमता बढ़ेगी, जिससे यात्रियों को ट्रेन पकड़ने और उतरने में अधिक सुविधा होगी। वहीं पैदल पथ पार (फुट क्रॉसिंग) के निर्माण से यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक सुरक्षित आवाजाही का बेहतर विकल्प मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए रेल सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अंबिकापुर रेलवे स्टेशन में इन कार्यों के पूर्ण होने से सरगुजा संभाग के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह, नगर पंचायत सभापति हरिमंदिर सिंह टिन्नी, रेलवे बोर्ड के एएनआई अजय कुमार, स्टेशन प्रबंधक सुधांशु रंजन, जोनल रेलवे बोर्ड के सदस्य मुकेश तिवारी सहित पार्षदगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग करने वाले होटलों पर कार्रवाई, सूरजपुर से 10 वहीं प्रतापपुर से 14 सिलेंडर जब्त…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : विगत दिवस जिले में घरेलू गैस सिलेंडर के व्यावसायिक उपयोग के विरुद्ध राजस्व एवं खाद्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा गुरुवार को कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान कई होटलों का निरीक्षण कर घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए गए। राजस्व एवं खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने ओडगी रोड स्थित यादव होटल में जांच के दौरान 03 नग घरेलू गैस सिलेंडर (कुल 14.2 किलोग्राम) जब्त किए। जब्त किए गए सिलेंडरों को इंडेन गैस एजेंसी भैयाथान को सुपुर्द किया गया। इसके अलावा घरेलू गैस के व्यावसायिक उपयोग की शिकायतों के आधार पर टीम ने सूरजपुर के गोलू स्वीट्स, पंडित स्वीट्स, होटल मद्रासी तथा आनंद रिहंदम का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गोलू होटल से 06 नग उपयोग किए गए घरेलू गैस सिलेंडर तथा आनंद रिहंदम के किचन कक्ष से 01 नग उपयोग किया हुआ घरेलू गैस सिलेंडर बरामद किया गया, जिन्हें टीम द्वारा जब्त कर लिया गया।
             

घरेलू गैस सिलेंडर के अवैध उपयोग पर कार्रवाई प्रतापपुर में 14 सिलेंडर जब्त

प्रतापपुर क्षेत्र में होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग किए जाने की शिकायत पर खाद्य एवं राजस्व विभाग के संयुक्त दल ने बुधवार को कई प्रतिष्ठानों में जांच की। जांच के दौरान कुल 14 घरेलू गैस सिलेंडर – 10 नग 14.2 किलोग्राम और 04 नग 5 किलोग्राम – जब्त किए गए। जब्त सिलेंडर इंडेन एजेंसी प्रतापपुर को सौंप दिए गए। तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और खाद्य निरीक्षक प्रतापपुर की इस टीम ने पांच प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की। नया बस स्टैंड स्थित रोशन डेली नीड्स से सबसे ज्यादा 10 सिलेंडर जब्त हुए। इसके अलावा पुराना बस स्टैंड के शुभम होटल और जायसवाल होटल तथा नया बस स्टैंड के मंगलेश डेली नीड्स और परवेज कुमार के प्रतिष्ठान से एक-एक सिलेंडर जब्त किए गए।

देवगढ़ में उप तहसील की घोषणा, अब ग्रामीणों को राजस्व कार्यों के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूर…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज सरगुजा जिले के उदयपुर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विधानसभा में देवगढ़ में उप तहसील स्थापित किए जाने की घोषणा की। यह निर्णय उदयपुर क्षेत्र सहित देवगढ़ और आसपास के ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि लंबे समय से उदयपुर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा देवगढ़ में उप तहसील की स्थापना की मांग उठाई जा रही थी। अब इस मांग के पूरा होने से क्षेत्र के हजारों लोगों को राजस्व और प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर-दराज के कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पडेगा।

देवगढ़ में उप तहसील बनने से क्षेत्र के ग्रामीणों को नामांतरण, सीमांकन, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, भू-अभिलेख संबंधी कार्यों सहित अन्य राजस्व सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी। इससे न केवल आम लोगों का समय और खर्च बचेगा, बल्कि प्रशासनिक कामकाज भी अधिक सुगम और प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेगा।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे उदयपुर क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीणों को शासन की सेवाओं का लाभ और अधिक सहजता से प्राप्त हो सकेगा।

देवगढ़ में उप तहसील की स्थापना को उदयपुर क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे क्षेत्र में प्रशासनिक पहुंच बढ़ेगी और विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी।

छत्तीसगढ़ के शिमला मैनपाट में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल बनाएगा सर्वसुविधायुक्त पर्यटन–आवासीय परिसर…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ के ‘शिमला’ नाम से प्रसिद्ध मैनपाट में पर्यटन सुविधाओं और आवासीय विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार द्वारा मैनपाट में 4.80 हेक्टर (12 एकड़) भूमि अटल विहार योजना हेतु छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को आवंटित की गई है।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि इस भूमि पर आधुनिक एवं बहुउपयोगी पर्यटन–आवासीय परिसर का निर्माण शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप विकसित होने वाली यह परियोजना मैनपाट आने वाले पर्यटकों को बेहतर, सुरक्षित और किफायती ठहराव उपलब्ध कराएगी।

श्री सिंह देव ने कहा कि यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के सक्रिय प्रयासों से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि मैनपाट में लगातार बढ़ते पर्यटक आगमन को देखते हुए इस तरह की सुविधाओं की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

प्रस्तावित परिसर में आधुनिक वेलनेस एवं मनोरंजन सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। सिंह देव ने बताया कि परियोजना में केरल मॉडल पर आधारित वेलनेस सेंटर, प्राकृतिक पंचकर्म चिकित्सा, हर्बल स्पा और आयुष सेवाएं प्रस्तावित हैं। साथ ही 24×7 क्लब हाउस, मिलेट्स कैफे, जिम, स्विमिंग पूल, किड्स प्ले एरिया, स्टीम बाथ और एंटरटेनमेंट ज़ोन विकसित किए जाएंगे। पर्यावरण अनुकूल विकास के तहत ट्री हाउस, कॉटेज और स्थानीय जीवन एवं संस्कृति का अनुभव कराने वाला सांस्कृतिक क्षेत्र भी शामिल होगा।

उन्होंने कहा कि परियोजना से मैनपाट में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होंगे और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नई संभावनाएं खुलेंगी। गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधा उपलब्ध होने से पर्यटकों का ठहराव समय बढ़ेगा, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मैनपाट छत्तीसगढ़ का विशिष्ट एवं उभरता हुआ पर्यटन गंतव्य है। तेजी से बढ़ रही पर्यटक संख्या को देखते हुए यहाँ आधुनिक सुविधाओं का विकास अत्यावश्यक है। हाउसिंग बोर्ड की यह पहल पर्यटन, आवास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी तथा मैनपाट को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित करेगी।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना को छत्तीसगढ़ के पर्यटन विस्तार के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के विकास से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा और राज्य का हॉस्पिटैलिटी सेक्टर मजबूत होगा।

सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने इसे मैनपाट के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह परियोजना स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं व्यापार के अवसर उपलब्ध कराएगी और क्षेत्र की पहचान को नई ऊँचाई देगी।

अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि यह पहल छत्तीसगढ़ में पर्यटन–आवास विकास के क्षेत्र में गृह निर्माण मंडल की ऐतिहासिक भूमिका को मजबूत करेगी और भविष्य में मैनपाट को एक प्रमुख राष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने का आधार बनेगी।

बड़ी खबर: अंबिकापुर ‘दवा घोटाले’ में प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी, जांच रिपोर्ट के बावजूद SDM शिवानी जायसवाल के पति डॉ आयुष जायसवाल पर मेहरबानी क्यों?

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : सरगुजा जिले के नवापारा शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुए करोड़ों के दवा घोटाले में एक नया मोड़ आ गया है। जांच समिति द्वारा भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत पेश किए जाने के महीनों बाद भी अब तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं होना, जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
दस्तावेज ‘खाक’, जांच ‘साफ’, फिर भी कार्रवाई ‘हाफ’
हैरानी की बात यह है कि जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड ‘आग’ के हवाले कर दिए गए। इसके बावजूद, वर्तमान में उपलब्ध 2024-25 के दस्तावेजों में ही करोड़ों की धांधली पकड़ी गई है। लेकिन विडंबना देखिए कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने और भ्रष्टाचार सिद्ध होने के बाद भी आज तक न तो किसी पर FIR हुई है और न ही किसी को निलंबित किया गया है।
रसूख के आगे नतमस्तक सिस्टम?
स्थानीय गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी डॉ. आयुष जायसवाल को उनके रसूख का लाभ मिल रहा है। डॉ. आयुष वर्तमान में सूरजपुर में पदस्थ SDM शिवानी जायसवाल के पति हैं। क्या यही कारण है कि सरकारी खजाने में करोड़ों की सेंध लगाने वालों के खिलाफ फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं?


जांच रिपोर्ट के वो अहम खुलासे जिन पर नहीं हुआ एक्शन:मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को सौंपी गई जांच समिति की रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को सौंपी गई जांच समिति की रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

दस्तावेज जलाने की साजिश: जब जांच समिति ने साल 2019 से 2024 के बीच की खरीदी के रिकॉर्ड मांगे, तो केंद्र द्वारा यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि ‘कार्यालय में आग लगने के कारण पुराने दस्तावेज जल गए हैं’। इसे सबूतों को मिटाने की एक बड़ी साजिश के रूप में देखा जा रहा है।

नियमों की धज्जियां (सिंगल टेंडर घोटाला): नियमों के मुताबिक दवा खरीदी के लिए प्रतिस्पर्धात्मक कोटेशन मंगाने थे, लेकिन जांच में पाया गया कि साठगांठ कर केवल एक ही फर्म (सिंगल टेंडर) को 50-50 हजार रुपये के कई ऑर्डर एक ही दिन में थमा दिए गए।

बिना रेट के ‘अंधी’ खरीदी: वित्तीय वर्ष 2024-25 की फाइलों में दवाओं और उपकरणों की दर (Rate) का उल्लेख ही नहीं है। बिना दाम तय किए ही लाखों रुपये के ऑर्डर जारी कर दिए गए।

कीमोथेरेपी दवाओं में फर्जीवाड़ा: डॉ. आयुष जायसवाल और अन्य संबंधितों पर आरोप है कि उन्होंने कीमोथेरेपी की दवाओं के लिए CGMSCL से अनिवार्य NOC तक नहीं ली। खुद ही डिमांड लेटर लिखा और खुद ही अपने नाम पर दवाएं इश्यू करवाकर खर्च दिखा दिया।

गायब स्टॉक: रजिस्टर में दवाओं की एंट्री और वार्डों में दवाओं की असल सप्लाई के बीच कोई मेल नहीं मिल रहा है।

रसूख के रक्षण में दबा भ्रष्टाचार?
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से डॉ. आयुष जायसवाल (तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा अधिकारी) और डॉ. हिमांशु गुप्ता के कार्यकाल के दौरान हुई धांधली का जिक्र है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि SDM पति होने के नाते डॉ. आयुष को बचाने की कोशिशें की जा सकती हैं।
अधिकारियों पर लटकी तलवार
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि लिपिकीय वर्ग से स्टोरकीपर का काम लेना और नियमों के विरुद्ध जाकर चहेती फर्मों को उपकृत करना सीधे तौर पर गबन की श्रेणी में आता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने ही ‘पावरफुल’ अधिकारी के परिवार पर कार्रवाई करता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

आरटीआई कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर आरोपी कोई आम कर्मचारी होता, तो अब तक जेल की सलाखों के पीछे होता। लेकिन यहाँ ‘साहब’ के पति पर मेहरबानी समझ से परे है। क्या CMHO और जिला प्रशासन राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में इस बड़े घोटाले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं?

सूरजपुर ग्राउंड रिपोर्ट: SDM का ‘चाचा’ वाले खुलासे पर आधिकारिक खंडन, लेकिन सवालों के घेरे में अधूरी जांच!

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर:  लटोरी जमीन घोटाले में ‘हिंद स्वराष्ट्र’ की खबर के बाद प्रशासन में मचे हड़कंप के बीच एक नया मोड़ आया है। एसडीएम शिवानी जायसवाल ने एक आधिकारिक ज्ञापन (दिनांक 12.03.2026) जारी कर उस खबर का खंडन किया है जिनमें एक खरीददार को उनका ‘चाचा’ बताया गया था। एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि जांच या ग्राम लटोरी से संबंधित किसी भी शिकायत से जुड़ा कोई भी व्यक्ति उनका रिश्तेदार नहीं है।
हालांकि, इस खंडन के बाद भी घोटाले की परतें कम होने के बजाय और उलझती नजर आ रही हैं। जनता और मीडिया अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि यदि रिश्तेदारी नहीं है, तो जांच में ‘कंजूसी’ क्यों बरती गई?

एसडीएम मैडम की कथित चाचा और उनके कारनामे

एसडीएम मैडम जरा इस मामले में भी प्रकाश डाल देती तो अच्छा होता कि यह शख्स कौन है और शासन से प्राप्त भूमि का नामांतरण बिना कलेक्टर परमिशन के कैसे हो गया?


SDM का पक्ष: “खबर असत्य और भ्रामक”
एसडीएम कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, समाचार पत्र में प्रकाशित “रिश्तेदारी के आगे झुका कानून” शीर्षक वाली खबर पूर्णतः असत्य, भ्रामक और तथ्यहीन है। एसडीएम का दावा है कि उनके द्वारा की गई पूरी जांच तत्कालीन उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष रूप से और नियमानुसार की गई है।
लेकिन… अनुत्तरित सवाल अब भी बरकरार!
एसडीएम के खंडन ने व्यक्तिगत आरोपों पर तो सफाई दे दी, लेकिन जांच की प्रक्रिया पर उठ रहे बड़े सवालों का जवाब अब भी गायब है। सवाल यह हैं कि मैडम द्वारा जांच में गड़बड़ी की गई इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी और उन समाचारों का खंडन क्यों नहीं किया..? आपको बता दे की इससे पहले भी हमारे द्वारा कई खबरें चलाई गई थी लेकिन मैडम के कान में जू तक नहीं रेंगा, लेकिन जब चाचा–भतीजी वाली बात उजागर हो गई तो उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया दे दी। इतनी ही तत्परता से अगर मैडम बाकी मुद्दों में भी ध्यान दे देती तो शायद हमें इतनी खबरें चलाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती और उनकी इतनी किरकिरी नहीं होती। मैडम शिवानी इन सवालों का भी जवाब दें:


चुनिंदा जांच क्यों?

यदि कोई रिश्तेदारी नहीं थी, तो ‘हिंद स्वराष्ट्र’ द्वारा उठाए गए उन अन्य 3 मामलों को जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया गया जिनमें नामांतरण की प्रक्रिया पहले ही पूर्ण हो चुकी थी?

नामांतरण पर चुप्पी:

जिन 3 मामलों (खसरा नं. 213/2, 421/2, 114/1) का जिक्र एसडीएम ने अपनी पहली रिपोर्ट में किया था, उनमें से खसरा नं. 213/2 का नामांतरण नियम विरुद्ध (बिना कलेक्टर अनुमति) होने के बावजूद तहसीलदार को “सद्भाविक त्रुटि” का कवच क्यों दिया गया?

दस्तावेजों का विरोधाभास

एक तरफ एसडीएम मानती हैं कि धारा 165 7(ख) का उल्लंघन हुआ है, दूसरी तरफ इसे जानबूझकर की गई गलती नहीं मानतीं। क्या यह निष्पक्ष जांच का पैमाना है?

रिश्तेदारी की चर्चा बनाम प्रशासनिक पारदर्शिता

भले ही एसडीएम ने पारिवारिक संबंधों से इनकार कर दिया है, लेकिन जमीन घोटाले की गंभीरता इस बात से कम नहीं होती। लटोरी में पट्टे की जमीनों की जिस तरह से बंदरबांट हुई, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। चर्चा अब इस बात की है कि क्या जिला कलेक्टर इस मामले की किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या किसी दूसरे अनुविभाग के अधिकारी से दोबारा जांच कराएंगे?

निष्कर्ष:
प्रशासनिक खंडन अपनी जगह है, लेकिन लटोरी तहसीलदार के ‘कारनामों’ की फाइल अब भी अधूरी है। जब तक सभी 6 संदिग्ध मामलों की पारदर्शी जांच नहीं होती, तब तक “सद्भावना” और “निष्पक्षता” जैसे शब्द केवल कागजी नजर आएंगे।

विशेष स्वास्थ्य खबर: बढ़ता हुआ Uric Acid – कारण, लक्षण, बचाव और घरेलू उपाय…

हिंद स्वराष्ट्र : आजकल बदलती जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों के कारण लोगों में यूरिक एसिड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले यह बीमारी अधिकतर बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। अगर समय रहते इसका ध्यान न दिया जाए तो यह आगे चलकर Gout (गठिया) जैसी समस्या पैदा कर सकती है।


यूरिक एसिड क्या है?

यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक केमिकल होता है जो प्यूरिन (Purine) नामक पदार्थ के टूटने से बनता है।
यह पदार्थ कई खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। सामान्य स्थिति में किडनी यूरिक एसिड को पेशाब के माध्यम से बाहर निकाल देती है, लेकिन जब शरीर में इसकी मात्रा ज्यादा हो जाती है या किडनी इसे ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तब यह खून में बढ़ जाता है।


यूरिक एसिड बढ़ने के मुख्य कारण

ज्यादा प्रोटीन और प्यूरिन वाले भोजन का सेवन

ज्यादा रेड मीट और समुद्री भोजन

शराब या बीयर का सेवन

मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि

ज्यादा मीठे और प्रोसेस्ड फूड

किडनी की समस्या

कम पानी पीना


यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण

यूरिक एसिड बढ़ने पर शरीर में कई संकेत दिखाई देते हैं:

जोड़ों में तेज दर्द (खासकर पैर के अंगूठे में)

सूजन और लालिमा

चलने-फिरने में परेशानी

सुबह के समय जोड़ों में अकड़न

बार-बार दर्द का दौरा पड़ना


अगर यह समस्या ज्यादा बढ़ जाए तो यह गठिया (गाउट) का रूप ले सकती है।


यूरिक एसिड में क्या खाना चाहिए

यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने के लिए सही खान-पान बहुत जरूरी है।

✔ हरी सब्जियां
✔ फल (सेब, केला, पपीता)
✔ लो-फैट दूध और दही
✔ साबुत अनाज
✔ ज्यादा पानी


❌ किन चीजों से बचना चाहिए

रेड मीट

शराब और बीयर

ज्यादा दालें (सीमित मात्रा में)

तली-भुनी चीजें

ज्यादा चीनी वाले पेय



🏠 यूरिक एसिड के घरेलू उपाय

कुछ घरेलू उपाय यूरिक एसिड को कम करने में मदद कर सकते हैं:

1️⃣ नींबू पानी
सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीने से शरीर में यूरिक एसिड कम होने में मदद मिलती है।

2️⃣ सेब का सिरका
एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पी सकते हैं।

3️⃣ अजवाइन और मेथी
रात में मेथी के दाने भिगोकर सुबह खाने से फायदा मिलता है।

4️⃣ ज्यादा पानी पीना
दिन में 8-10 गिलास पानी पीने से शरीर से यूरिक एसिड बाहर निकलने में मदद मिलती है।


🏃‍♂️ बचाव के उपाय

रोजाना हल्की व्यायाम या वॉक करें

वजन नियंत्रित रखें

ज्यादा पानी पिएं

संतुलित भोजन करें

समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाएं


यूरिक एसिड एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। सही खान-पान, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

“रिश्तेदारी के आगे झुका कानून? सूरजपुर जमीन घोटाले में नया मोड़! चाचा को बचाने SDM भतीजी ने की ‘सेटिंग’?

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : लटोरी तहसील में हुए बहुचर्चित जमीन घोटाले में अब एक ऐसा पारिवारिक मोड़ आ गया है, जिसने एसडीएम शिवानी जायसवाल की पूरी जांच रिपोर्ट को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। ‘हिंद स्वराष्ट्र’ समाचार पत्र में प्रकाशित कड़ियों (पार्ट 1, 2, 3) के बाद जिस जांच का जिम्मा एसडीएम को सौंपा गया था, उसमें उन्होंने ‘चुन-चुन कर’ केवल उन्हीं मामलों को संज्ञान में लिया जो अभी लंबित थे। लेकिन असली खेल उन तीन मामलों में हुआ जिन्हें एसडीएम ने अपनी जांच की परिधि से बाहर रखा।
जांच में ‘पिक एंड चूज’ का खेल: तीन मामले गायब क्यों?
दस्तावेजों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ‘हिंद स्वराष्ट्र’ ने लटोरी तहसीलदार के कई कारनामों का खुलासा किया था। लेकिन एसडीएम शिवानी जायसवाल ने केवल उन 3 खबरों पर नोटिस जारी किया जिनमें नामांतरण (Mutation) की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी या विवादित थी। 
सबसे बड़ा सवाल: उन बाकी 3 गंभीर मामलों को जांच में क्यों नहीं जोड़ा गया जिनमें नामांतरण की प्रक्रिया गुपचुप तरीके से पूर्ण कर ली गई थी? क्या उन फाइलों में दबे सफेदपोश चेहरों को बचाना एसडीएम की प्राथमिकता थी?
भतीजी बनी जज, तो ‘चाचा’ को मिली क्लीन चिट!
इस पूरे मामले की तह तक जाने पर जो सच सामने आया है, वह जिला प्रशासन की जड़ें हिला देने वाला है। चर्चा है कि जिन जमीनों की खरीद-बिक्री में नियमों को ताक पर रखा गया, उनमें से एक प्रमुख क्रेता (खरीददार) स्वयं एसडीएम शिवानी जायसवाल के चाचा बताए जा रहे हैं।
राजस्व विभाग के गलियारों में अब यह सवाल गूंज रहा है: “जब भतीजी ही जांच अधिकारी हो, तो चाचा पर कार्यवाही की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”
हितों का टकराव (Conflict of Interest) और कानून की अवहेलना
कानूनी तौर पर यदि किसी जांच में अधिकारी का सगा संबंधी शामिल हो, तो उस अधिकारी को स्वयं को जांच से अलग कर लेना चाहिए। लेकिन यहाँ एसडीएम ने न केवल जांच की, बल्कि तहसीलदार को “सद्भाविक त्रुटि” का प्रमाण पत्र देकर मामले को रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की। 
तहसीलदार का बचाव: एसडीएम ने रिपोर्ट में लिखा कि तहसीलदार ने जानबूझकर गलती नहीं की। 

सीमित जांच:

केवल खसरा नंबर 213/2, 421/2 और 114/1 तक ही जांच को सीमित रखा गया ताकि बाकी बड़े चेहरों तक आंच न पहुंचे। 
पत्रकार को बनाया निशाना, चाचा को बनाया सुरक्षित
हैरानी की बात है कि जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार पर बात करने के बजाय, तहसीलदार के उस बयान को तवज्जो दी गई जिसमें उन्होंने पत्रकार की नियत पर सवाल उठाए थे। यह स्पष्ट करता है कि प्रशासन का उद्देश्य सच का पता लगाना नहीं, बल्कि सच दिखाने वालों का मुंह बंद करना और अपने परिजनों को लाभ पहुंचाना था। 
अब गेंद कलेक्टर सूरजपुर के पाले में है: क्या एक ऐसी एसडीएम की जांच रिपोर्ट को स्वीकार किया जाएगा जिसका सीधा संबंध आरोपियों या लाभार्थियों से है? क्या इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होगी?

बढ़ती मधुमेह की बीमारी—जागरूकता, सावधानी और स्वस्थ जीवनशैली ही बचाव का रास्ता…

हिंद स्वराष्ट्र : आज के आधुनिक जीवन में बदलती खान-पान की आदतों और भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण मधुमेह (डायबिटीज) तेजी से फैलने वाली बीमारियों में शामिल हो गई है। पहले यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के युवाओं और बच्चों में भी इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते इस बीमारी के प्रति जागरूकता न बढ़ाई गई तो यह आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। इसके पीछे असंतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, तनाव और आनुवंशिक कारण प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इस बीमारी के लक्षणों में बार-बार प्यास लगना, जल्दी थकान होना, बार-बार पेशाब आना, घाव का देर से भरना और अचानक वजन कम होना शामिल हैं।

बचाव के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है। इसके लिए लोगों को संतुलित आहार लेना चाहिए, जिसमें हरी सब्जियां, फल और रेशेदार खाद्य पदार्थ अधिक हों। मीठे पदार्थों और जंक फूड का सेवन कम करना चाहिए। रोजाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम या पैदल चलना भी बहुत जरूरी है। इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना और शरीर के वजन को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।

मधुमेह होने पर कैसी हो जीवनशैली

यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह हो जाए तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सही जीवनशैली अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। मरीज को नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेनी चाहिए और समय-समय पर शुगर की जांच करवानी चाहिए। भोजन में कम चीनी, कम तेल और अधिक पौष्टिक आहार लेना चाहिए। नियमित योग और हल्का व्यायाम करना भी बहुत लाभदायक होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाकर मधुमेह जैसी बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि समाज का हर व्यक्ति इस बीमारी के प्रति जागरूक हो और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखे।

सावधान: हिंद स्वराष्ट्र के प्रतिनिधि पद से भूषण बघेल पदमुक्त, संस्थान ने जारी की सूचना…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर: ‘हिंद स्वराष्ट्र’ समाचारपत्र की संपादक मृण्मयी पाण्डेय ने सूरजपुर विकासखंड क्षेत्र के अपने प्रतिनिधि भूषण बघेल को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है। संस्थान द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बघेल को उनके कार्यों में पाई गई अनियमितता और गलत आचरण के चलते निष्कासित किया गया है।
संस्थान से अब कोई संबंध नहीं
हिंद स्वराष्ट्र प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि 3 मार्च 2026 से भूषण बघेल का संस्थान के साथ किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं रह गया है। उनके द्वारा किए गए किसी भी कार्य या व्यवहार के लिए संस्थान जिम्मेदार नहीं होगा।
आमजन और अधिकारियों के लिए अपील
संस्थान ने क्षेत्र के नागरिकों, सरकारी विभागों और विज्ञापनदाताओं के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
1. हिंद स्वराष्ट्र से संबंधित किसी भी खबर, विज्ञापन या आधिकारिक कार्य के लिए भूषण बघेल से कोई संपर्क न रखें।
2.यदि भूषण बघेल हिंद स्वराष्ट्र के नाम का उपयोग करते हैं, तो वह पूर्णतः अवैध माना जाएगा।
3.संस्थान से जुड़ी किसी भी जानकारी या समाचार के लिए अब केवल अधिकृत प्रतिनिधियों या मुख्य कार्यालय से ही संपर्क करें।
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अहमदाबाद में इतिहास: भारत तीसरी बार टी20 वर्ल्ड चैंपियन, न्यूजीलैंड को 96 रनों से रौंदा…

हिंद स्वराष्ट्र नई दिल्ली/अहमदाबाद : भारतीय क्रिकेट टीम ने एक बार फिर दुनिया पर अपना परचम लहरा दिया है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों के विशाल अंतर से शिकस्त देकर तीसरी बार खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया ने बैक-टू-बैक (2024 और 2026) ट्रॉफी जीतने वाली पहली टीम बनकर इतिहास रच दिया है।
संजू और अभिषेक का तूफान
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 5 विकेट खोकर 255 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया। यह टी20 वर्ल्ड कप फाइनल के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर है। सलामी जोड़ी संजू सैमसन (89 रन) और अभिषेक शर्मा (52 रन) ने कीवी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए पावरप्ले में रिकॉर्ड 92 रन जोड़ दिए। इसके बाद ईशान किशन ने भी 54 रनों की तेजतर्रार पारी खेलकर रन गति को कम नहीं होने दिया।
ताश के पत्तों की तरह ढही कीवी टीम
256 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के अनुशासन के आगे टिक नहीं सकी। जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल की धारदार गेंदबाजी के सामने न्यूजीलैंड की पूरी टीम 19 ओवरों में मात्र 159 रनों पर सिमट गई। भारत की ओर से गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और न्यूजीलैंड को कभी भी मैच में वापसी का मौका नहीं दिया।
मुख्य आंकड़े और रिकॉर्ड्स विवरण आंकड़े भारत का स्कोर 255/5 (20 ओवर) न्यूजीलैंड का स्कोर 159/10 (19 ओवर) मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी संजू सैमसन (89 रन) जीत का अंतर 96 रन (फाइनल की सबसे बड़ी जीत) जीत के साथ बदला लिया इस जीत ने न केवल भारत की झोली में एक और ट्रॉफी डाली, बल्कि 2023 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में इसी मैदान पर मिली हार का जख्म भी भर दिया। पूरे देश में दिवाली जैसा माहौल है और सड़कों पर तिरंगा लहराते हुए फैंस अपनी टीम की इस अभूतपूर्व उपलब्धि का जश्न मना रहे हैं।

सरपंच की सील से वन भूमि का अवैध सौदा: कानून को ठेंगा दिखाकर रची गई वन भूमि खरीदी–बिक्री की साजिश…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/बिहारपुर : सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोल्हुआ में भ्रष्टाचार और कानून के उल्लंघन का एक बड़ा मामला सामने आया है। जहां सरपंच राम लाल पण्डो द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वन विभाग की तीन एकड़ जमीन की बिक्री डेढ़ लाख रुपयों में कर दी। सरपंच द्वारा जमीन खरीदी बिक्री के लिए एक पंचनामा भी बनाया गया हैं जिसमें सरपंच की सील और हस्ताक्षर का उपयोग इस अवैध प्रक्रिया को “सरकारी मान्यता” देने के लिए किया गया हैं।

वन भूमि बिक्री हेतु निर्मित पंचनामा
वन भूमि बिक्री और पैसे लेने का वीडियो

गलती नहीं अपराध

सरपंच द्वारा केवल अपने पद का दुरुपयोग नहीं किया गया हैं बल्कि उनका यह कृत्य कानूनन अपराध की श्रेणी में भी आता हैं। सरपंच द्वारा वन भूमि का अवैध हस्तांतरण किया गया हैं। पंचनामा में भी स्पष्ट लिखा गया है कि जमीन “वन भूमि” है। वन भूमि सरकार (वन विभाग) की संपत्ति होती है। कोई भी व्यक्ति इसे निजी तौर पर बेच या खरीद नहीं सकता। वन संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत वन भूमि का गैर-वानिकी कार्यों या निजी कब्जे के लिए हस्तांतरण दंडनीय अपराध है। वन भूमि पर कब्जा हस्तांतरित करना न केवल वन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि यह सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति की हेराफेरी का मामला है और इस कारनामे में शामिल सभी पक्षकारों और प्रमाणित करने वाले अधिकारियों पर जालसाजी और पद के दुरुपयोग की कार्यवाही की जा सकती हैं।

वन विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल

वन भूमि की खरीदी बिक्री का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है लेकिन वन विभाग मूकदर्शक बनकर मामले में छुपी साधे बैठा है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आपको बता दे कि चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में कई रसूखदार लोगों द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य और खेती-बाड़ी की जारी है और कई ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जहां इन जमीनों का खरीद फरोख्त भी किया जा रहा है लेकिन वन विभाग इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है जिससे वन विभाग द्वारा इन अवैध कृत्यों को मौन सहमति दिए जाने की सुगबुगाहट तेज हैं।

लग्जरी कार में नशीली दवाएं बेचता ‘सरकारी चपरासी’ गिरफ्तार, आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सरगुजा आबकारी उड़नदस्ता टीम ने नशे के सौदागरों के खिलाफ अभियान चलाते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने विश्रामपुर तहसील में पदस्थ एक सरकारी चपरासी को उसकी लग्जरी कार में नशीली टैबलेट की तस्करी करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं जब्त की गई हैं।
मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी
जानकारी के अनुसार, कल शाम (01 मार्च 2026) सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता को सूचना मिली कि तिलसिवा ग्राउंड के पास एक निसान मैग्नाइट कार (CG29 AG 1098) में नशीली दवाओं की सप्लाई होने वाली है। सूचना मिलते ही टीम ने तत्काल ग्राउंड के चारों ओर घेराबंदी की और संदिग्ध कार को रोक लिया।
कार के डैशबोर्ड से मिला नशे का जखीरा
कार की तलाशी लेने पर डैशबोर्ड में रखे एक काले बैग से निम्नलिखित प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुईं:
* ALPRAZOLAM TABLET: 560 नग
* SPASMO PROXYVON PLUS CAPSULE: 48 नग
आरोपी के पास से 608 नग नशीली दवाएं एवं लग्जरी कार जप्त की गई हैं।
तहसील का कर्मचारी निकला नशे का सौदागर
पकड़े गए व्यक्ति ने अपनी पहचान अभिषेक साहू (निवासी गोविंदपुर, सूरजपुर) के रूप में दी है। उसने खुलासा किया कि वह पूर्व में कलेक्ट्रेट सूरजपुर में चपरासी था और वर्तमान में तहसील कार्यालय विश्रामपुर में पदस्थ है।
आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 22(C) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आज (02 मार्च 2026) आरोपी को सूरजपुर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है।
कार्रवाई में शामिल टीम
इस सफल कार्रवाई का नेतृत्व सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता ने किया। टीम में मुख्य आरक्षक रमेश दुबे, अशोक सोनी, नगर सैनिक रणविजय सिंह, ओम प्रकाश गुप्ता और नीरज चौहान की विशेष भूमिका रही।

16 राजस्व निरीक्षकों के तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा कलेक्टर द्वारा प्रशासनिक दृष्टिकोण से एक स्थान पर लंबे समय से जमें कई राजस्व निरीक्षकों के तबादले किए हैं। जारी आदेश में 16 राजस्व निरीक्षकों के तबादले किए गए हैं।

देखें आदेश :

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