हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर किशन शाह : केल्हारी से लगभग 3 किलोमीटर दूर बिछिया टोला अंतर्गत बहने वाली केवई (ओला) नदी में अवैध रेत उत्खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि नदी के बीचों-बीच पोकलेन और जेसीबी मशीनों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है, जिससे नदी की धारा और प्राकृतिक संरचना को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
अंतरराज्यीय सीमा पर खुला खेल
केवई नदी छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की अंतरराज्यीय सीमा बनाती है। नदी का एक किनारा छत्तीसगढ़ में तो दूसरा मध्य प्रदेश में स्थित है। रेत माफिया छत्तीसगढ़ सीमा से अवैध रूप से रेत निकालकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में ऊंचे दामों पर खपा रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन 20 से 25 ट्रैक्टर रेत की ढुलाई खुलेआम हो रही है।
एनजीटी नियमों की अनदेखी
नदी किनारे अस्थायी सड़क बनाकर मशीनों से खुदाई की जा रही है। आरोप है कि (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर नदी के भीतर भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।इस तरह का उत्खनन नदी के जलस्तर को तेजी से गिरा सकता है और पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ सकता है।
पर्यावरणीय खतरे की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक रेत निकासी से—
जलस्तर में गिरावट
नदी किनारों का कटाव
जलीय जीवों व जैव विविधता को नुकसान
भविष्य में जल संकट की संभावना
जैसे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
एमसीबी जिले के अंतर्गत तहसील केल्हारी में चल रहे इस अवैध कारोबार पर प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खनिज विभाग के संरक्षण से इतनी बड़ी मात्रा में उत्खनन हो रहा है। यह प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
देखने वाली बात यह है की शासन इस पर क्या ठोस कार्रवाई करती है या फिर रेत माफियाओं का हौसला ऐसे ही होता रहेगा बुलंद।

