बलरामपुर/कुसमी: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। कुसमी ब्लॉक के हंसपुर में अवैध बॉक्साइट खनन की जांच करने गए एसडीएम (SDM) करूँण डहरिया और उनके साथ आए निजी लोगों पर ग्रामीणों के साथ बेरहमी से मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। इस हमले में एक 60 वर्षीय आदिवासी ग्रामीण की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
‘सिंचाई कर लौट रहे थे ग्रामीण’
जानकारी के मुताबिक, रविवार की रात करीब 8 बजे जब ग्रामीण अपने खेतों में गेहूं की सिंचाई कर लौट रहे थे, तभी सरना के पास थार कार सवार एसडीएम और उनके अन्य साथी 6-7 लोगों ने उन्हें रोका।
घायल पीड़ितों—अजीत उरांव (60 वर्ष) और आकाश अगरिया (20 वर्ष)—ने बताया कि उनसे पूछताछ की गई और फिर बिना किसी ठोस कारण के उन पर रॉड, डंडों और लातों से हमला कर दिया गया। मारपीट इतनी भीषण थी कि राम नरेश राम (60 वर्ष) मौके पर ही बेहोश हो गए। तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमी ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान राम नरेश राम ने दम तोड़ दिया।
उठते गंभीर सवाल: प्रशासन या ‘गुंडागर्दी’?
इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
निजी वाहन का इस्तेमाल: जांच के लिए एसडीएम सरकारी गाड़ी के बजाय एक निजी ‘थार’ गाड़ी में क्यों गए थे?
प्राइवेट लोग साथ क्यों?: राजस्व विभाग के आधिकारिक कर्मचारियों के स्थान पर एसडीएम के साथ ‘निजी गुर्गे’ क्या कर रहे थे?
साक्ष्य मिटाने की कोशिश?: सूत्रों का दावा है कि घटना के बाद मामले को दबाने के लिए नायब तहसीलदार को फोन कर बुलाया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि पूरी टीम राजस्व अमले के साथ थी।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल क्षेत्र में तनाव का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी पर लगे हत्या और मारपीट के इन आरोपों ने सरकार और सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
“हम तो बस पानी चलाकर लौट रहे थे, हमें क्या पता था कि सरकारी अधिकारी ही हमारी जान के दुश्मन बन जाएंगे।” अजीत उरांव (घायल ग्रामीण)



