हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/लटोरी : गांव की सरकार चलाने वाले मुखिया जी अब खुद ‘हवालात’ की सरकार देख रहे हैं। हरिपुर ग्राम पंचायत के सरपंच, जिन पर गांव के ही एक रिटायर्ड शिक्षक और उनके पुत्रों पर जानलेवा हमला करने का संगीन आरोप है, फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में हैं। हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं के तहत हुई इस गिरफ्तारी ने पूरे जिले के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, पुरानी रंजिश के चलते सरपंच और उनके साथियों ने बीते 24 जनवरी की सुबह रिटायर्ड शिक्षक के परिवार पर जानलेवा हमला किया था। इस हमले में पीड़ित पक्ष को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सरपंच को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
सवाल: जेल से चलेगी सरकार या कुर्सी होगी खाली?
जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरपंच जेल से ही पंचायत की जिम्मेदारी निभाएंगे? कानून के विशेषज्ञों और पंचायती राज अधिनियम के मुताबिक स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- निलंबन (Suspension) की तलवार: नियमानुसार, यदि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को गंभीर आपराधिक मामले में 48 घंटे से अधिक की न्यायिक हिरासत (Jail) में भेजा जाता है, तो जिला कलेक्टर या संबंधित विभाग उन्हें पद से निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
- प्रभार का हस्तांतरण: सरपंच के जेल जाने की स्थिति में ग्राम पंचायत का कामकाज ठप नहीं होता। ऐसी सूरत में ‘उप-सरपंच’ को कार्यवाहक सरपंच का प्रभार सौंपा जा सकता है, ताकि विकास कार्य बाधित न हों।
- पद से बर्खास्तगी: यदि कोर्ट में आरोप सिद्ध हो जाते हैं और सरपंच को दोषी करार दिया जाता है, तो उनकी सदस्यता स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी और उस वार्ड/पंचायत में उपचुनाव की स्थिति बनेगी।
प्रशासनिक रुख
फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी मामले की फाइल और कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामले में सरपंच का पद पर बने रहना मुश्किल नजर आ रहा है।
“कानून सबके लिए बराबर है। यदि कोई जनप्रतिनिधि हिंसा में शामिल पाया जाता है, तो पंचायती राज नियमों के तहत उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।” — विभागीय सूत्र
अब देखना यह होगा कि हरिपुर की जनता को नया मुखिया कब मिलता है या फिर कानूनी दांव-पेच सरपंच की कुर्सी बचा पाते हैं।



