ऑनलाइन सट्टे की लत ने ली युवा व्यवसायी की जान: सुसाइड नोट में लिखा- “पापा मुझे माफ करना”…

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हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर: शहर के मायापुर निवासी एक 40 वर्षीय युवा व्यवसायी ने ऑनलाइन सट्टे और कर्ज के दलदल में फंसकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पुराना बस स्टैंड स्थित ड्राईफ्रूट्स व्यवसायी संदीप अग्रवाल ने शुक्रवार दोपहर दुकान में कीटनाशक का सेवन कर लिया, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
दुकान से घर लौटकर पिता को दी जानकारी
घटना शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे की है। मायापुर निवासी संदीप अग्रवाल (पिता राजेंद्र बंसल) अपनी दुकान से घर पहुंचे और बदहवास हालत में पिता से कहा— “मैं अब आप लोगों को और परेशान नहीं करूंगा, मैंने दुकान में जहर खा लिया है।” यह सुनते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजन उन्हें तत्काल होलीक्रॉस अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सुसाइड नोट: “ब्याजखोरों ने उठाया फायदा”
पुलिस को संदीप के पास से दो सुसाइड नोट मिले हैं, जो उन्होंने अपनी पत्नी और पिता के नाम लिखे थे। सुसाइड नोट में संदीप ने अपने पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि उन पर लाखों का कर्ज है, लेकिन अब किसी को एक भी रुपया देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लिखा कि कई लोगों ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाया और ऊंचे ब्याज दरों पर पैसे दिए। वे सालों से ब्याज वसूल रहे थे। नोट में जिक्र है कि कई लोगों ने उन्हें सट्टा खिलवाया और हारने के बाद पैसों के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा था। सुसाइड नोट में कर्ज और नुकसान का विस्तार से वर्णन है, हालांकि संदीप ने किसी विशेष व्यक्ति का नाम उजागर नहीं किया है।
परिवार का इकलौता सहारा था संदीप
संदीप अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उन पर बीमार पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी थी। परिजनों के अनुसार, संदीप को क्रिकेट मैच में ऑनलाइन सट्टा खेलने की लत लग गई थी, जिसमें वह लाखों रुपये गंवा चुके थे। कर्जदाताओं के बढ़ते दबाव और व्यापार में घाटे के कारण वे गहरे मानसिक तनाव में थे।
 
सट्टेबाजी और जुआ मानसिक और आर्थिक विनाश का कारण बनते हैं। यदि आप या आपका कोई परिचित तनाव में है, तो कृपया अपनों से बात करें या हेल्पलाइन नंबरों की मदद लें। जीवन अनमोल है।

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