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धूमधाम से मनाई जाएगी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सजेगी महफिल…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : कला, साहित्य और संगीत के पुरोधा, विश्व कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती इस वर्ष शहर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। नेताजी बंग समाज वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आगामी 9 मई 2026 (शनिवार) को एक भव्य सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया जा रहा है।
यह समारोह भगवानपुर स्थित मधुर मिलन भवन में सायं 6:30 बजे से प्रारंभ होगा। आयोजन को लेकर समाज के सदस्यों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान गुरुदेव की कालजयी कृतियों को विभिन्न कला रूपों के माध्यम से जीवंत किया जाएगा।
प्रमुख आकर्षण:
नाट्य मंचन: टैगोर द्वारा रचित प्रसिद्ध उपन्यासों पर आधारित नाटकों की प्रस्तुति।
काव्य पाठ: गुरुदेव की चुनिंदा कविताओं का वाचन।
संगीत एवं नृत्य: हिंदी और बांग्ला भाषा में रवींद्र संगीत का गायन, साथ ही सामूहिक एवं एकल नृत्य प्रदर्शन।
“गुरुदेव टैगोर का साहित्य और संगीत भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहर है। इस आयोजन का उद्देश्य उनकी विरासत को जन-जन तक पहुँचाना है।

“विजय अधिकारी**, सचिव (नेताजी बंग समाज वेलफेयर सोसाइटी)
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आमजनों से अपील:
संस्था के सचिव विजय अधिकारी ने शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और कला प्रेमियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस सांस्कृतिक संध्या का हिस्सा बनें और कार्यक्रम को सफल बनाएँ।

जिले के 108 पुलिसकर्मियों के तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और उप महानिरीक्षक राजेश कुमार अग्रवाल द्वारा आज 108 पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। जारी आदेश में पांच उप निरीक्षक 21 सहायक उप निरीक्षकों के नाम शामिल है।

देखें आदेश :

43 IAS अधिकारियों के प्रभार में परिवर्तन, सूरजपुर, बलरामपुर समेत 7 जिलों के कलेक्टरों के भी हुए तबादले…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज 43 आईएएस अधिकारियों के प्रभार में परिवर्तन किए हैं। जारी आदेश में सात जिलों के कलेक्टरों के भी तबादले किए गए हैं। जारी आदेश में सूरजपुर कलेक्टर एस. जयवर्धन का भी तबादला किया गया हैं उनके स्थान पर रेना जमील को सूरजपुर का नया कलेक्टर बनाया गया है।

देखें आदेश :

लटोरी भूमि घोटाला: शासकीय भूमि की बंदरबांट के बाद तहसीलदार सुरेन्द्र पैंकरा की सीएम मामा के शरण जशपुर भागने की तैयारी…?

हिंद स्वराष्ट्र लटोरी/सूरजपुर : जिला प्रशासन सूरजपुर में इन दिनों नियम और निष्पक्षता ताक पर नजर आ रही है। लटोरी के विवादित तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा को बचाने के लिए प्रशासन ने मानों सारी हदें पार कर दी हैं। ताज़ा मामला एसडीएम की उस जांच रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसमें तहसीलदार को ‘पाक-साफ’ बताने के लिए पत्रकारिता की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए गए हैं।
एसडीएम की रिपोर्ट: साद्विक त्रुटि’ या सुनियोजित बचाव?
एसडीएम महोदया द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट ने सबको हैरान कर दिया है। एक ओर तहसीलदार की भारी अनियमितताओं को मात्र एक साद्विक त्रुटि बताकर उन्हें क्लीन चिट दे दी गई, वहीं दूसरी ओर इस मामले को उजागर करने वाले पत्रकार के उद्देश्यों को ही संदिग्ध बता दिया गया।
बड़ा सवाल : आखिर एसडीएम मैडम को पत्रकार के “गुप्त उद्देश्यों” का पता कैसे चला? क्या तहसीलदार ने अपनी सफाई के दौरान कोई ऐसी कहानी गढ़ी जिसे बिना प्रमाण के रिपोर्ट का हिस्सा बना लिया गया? दो अधिकारियों के बीच की ये ‘जुगलबंदी’ अब चर्चा का विषय बनी हुई है।

दोहरा मापदंड: एक पर कार्रवाई, पांच पर मेहरबानी क्यों?
प्रशासन का दोहरा चरित्र इस बात से स्पष्ट होता है कि जिस जमीन की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी, उसमें सुनील शर्मा एवं अन्य के विरुद्ध धारा 165 (7) (ख) के तहत प्रकरण दर्ज कर जमीन को पुनः शासकीय मद में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
लेकिन, यहां मैडम की ‘दरियादिली’ के कुछ और ही रंग देखने को मिल रहे हैं:
उसी मामले से जुड़े अन्य 5 रसूखदारों पर आज तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
उनके प्रकरण आखिर किन कारणों से लंबित रखे गए हैं?
क्या प्रशासन अपनी सुविधानुसार नियम तय कर रहा है, जहाँ अपनों को ‘दया दान’ और दूसरों पर ‘तानाशाही’ प्रहार किया जा रहा है?
तहसीलदार की भूमिका पर चुप्पी क्यों?
सबसे हास्यास्पद तथ्य यह है कि सुनील शर्मा के खिलाफ हो रही कार्रवाई में स्वयं आरोपी तहसीलदार से ही प्रतिवेदन लिया गया है। तहसीलदार ने स्वीकार किया है कि इस मामले में धारा 165(7)(ख)का उल्लंघन हुआ है।
सवाल उठता है:  अगर उल्लंघन हुआ है, तो बिना पटवारी प्रतिवेदन और बिना चौहद्दी मिलान के जमीन के कागजात तैयार करने वाले तहसीलदार पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या नियम सिर्फ जनता के लिए हैं, कुर्सी पर बैठे अधिकारियों के लिए नहीं?
‘सीएम के कथित भांजे’ का रसूख और भविष्य की राह
चर्चा है कि खुद को मुख्यमंत्री का भांजा बताने वाले तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा अब तबादले की आड़ में अपने कारनामों पर पर्दा डालने की कोशिश में हैं। उन्हें लगता है कि लटोरी छोड़ते ही बला टल जाएगी।
शायद स्थानीय प्रशासन उन्हें बचा ले, लेकिन राजस्व मंडल और मुख्य सचिव तक पहुंची शिकायतें उनका पीछा नहीं छोड़ेंगी। सत्ता के संरक्षण का दावा करने वाले अधिकारी ये भूल रहे हैं कि कागजों के हेर-फेर का हिसाब कभी न कभी जरूर देना पड़ता है।
अब देखना यह है कि क्या सूरजपुर कलेक्टर इस ‘दोहरी जांच’ और ‘पक्षपातपूर्ण कार्रवाई’ पर संज्ञान लेते हैं या भ्रष्टाचार की इस पटकथा को मौन सहमति दी जाएगी?

जशपुर भागने की तैयारी और प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट
जैसे ही इस घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुईं, तहसीलदार सुरेन्द्र साय पैंकरा की भूमिका संदिग्ध पाई गई। सूत्रों के हवाले से खबर है कि तहसीलदार पर कार्यवाही की तलवार लटक रही है, जिससे बचने के लिए वे अपने गृह क्षेत्र और स्वघोषित सीएम मामा के पास जशपुर भागने की योजना बना रहे हैं।
विभागीय गलियारों में यह भी चर्चा है कि भागने से पहले कई महत्वपूर्ण फाइलों को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की जा सकती है।
लटोरी भूमि घोटाला केवल एक भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि यह सिस्टम में बैठे सफेदपोशों द्वारा सरकारी संपत्ति की लूट का उदाहरण है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन सुरेन्द्र साय पैंकरा को जशपुर भागने से पहले पकड़ पाता है या यह मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।

इससे पहले भी तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा के कारनामों की कई खबरें चलाई जा चुकी हैं। इस खबर के अगले अंक में आप देखेंगे कैसे एक शासकीय मद से प्राप्त जमीन जिस पर हिंद स्वराष्ट्र के दखल के बाद  बी1 और खसरा में शासन से प्राप्त भूमि अहस्तांतरणीय अंकित किया गया है, उस जमीन की बिक्री के लिए एसडीएम मैडम के चहेते तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा द्वारा कैसे चौहद्दी निर्माण कर दिया गया हैं।

कलेक्टर ने 7 दिन के भीतर शहर से फटाका गोदामों को बाहर शिफ्ट करने के दिए निर्देश, राममंदिर के सामने प्लास्टिक दुकान में आगजनी प्रकरण की जांच हेतु संयुक्त दल गठित…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : कलेक्टर अजीत वसंत ने नगर में संचालित फटाका गोदामों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टर महोदय द्वारा निर्देशित किया गया है कि नगर अम्बिकापुर के सभी फटाका दुकानों के भण्डारण/गोदामों को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाए।

जारी निर्देशानुसार नगर अम्बिकापुर में कुल 08 स्थाई फटाका लायसेंसधारी एवं 02 फटाका निर्माण के लायसेंसधारी संचालित हैं। इनमें मो० जुनैद, सतीश कुमार जैन, विनोद कुमार जैन, रोशनलाल गोयल, आशीष कुमार अग्रवाल, अजय कुमार गोयल, गौरीशंकर पाण्डेय, मुकेश कुमार अग्रवाल (दो प्रविष्टियां, जिनमें एक फटाका निर्माण हेतु) तथा मनोज कुमार मारू (फटाका निर्माण हेतु) शामिल हैं।

अनुविभागीय दण्डाधिकारी अम्बिकापुर को निर्देशित किया गया है कि संबंधित सभी फटाका गोदामों का निरीक्षण कर निम्न बिन्दुओं पर जांच सुनिश्चित करें—
(1) क्या ये सभी गोदाम रिहायसी क्षेत्र में स्थित हैं।
(2) क्या गोदाम तक आकस्मिक स्थिति में अग्निशमन वाहन के पहुंचने हेतु पर्याप्त मार्ग उपलब्ध है।
(3) क्या वर्तमान में लायसेंस की शर्तों का पालन किया जा रहा है।
(4) यदि जांच के दौरान अवैध भण्डारण अथवा घनी आबादी के बीच गोदाम पाए जाते हैं तो वैधानिक कार्यवाही करते हुए उन्हें स्थानांतरित कराया जाए।

निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि समस्त फटाका गोदामों का निरीक्षण कर 07 दिवस के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करना सुनिश्चित किया जाए, ताकि नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

अम्बिकापुर शहर में राममंदिर के सामने स्थित मुकेश प्लास्टिक दुकान में हुई आगजनी की घटना को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त जांच दल का गठन किया गया है।
कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सरगुजा द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर सात दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 23 अप्रैल 2026 को उक्त स्थल पर आगजनी की घटना घटित हुई थी, जिसके परिप्रेक्ष्य में पुलिस अधीक्षक सरगुजा के पत्र के आधार पर पुलिस, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को सम्मिलित करते हुए जांच दल गठित किया गया है।

गठित जांच दल में अनुविभागीय दण्डाधिकारी अम्बिकापुर, नगर पुलिस अधीक्षक अम्बिकापुर, क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला के प्रतिनिधि, जिला नगर सेना तथा नगर पालिक निगम के कार्यपालन अभियंता को शामिल किया गया है।

जिला दण्डाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया है कि जांच दल घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर सात दिवस के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करे, ताकि आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

राघव चड्ढा ने छोड़ी आम आदमी पार्टी, बीजेपी में AAP के दो तिहाई सांसदों के साथ हुए शामिल…

हिंद स्वराष्ट्र नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने बीजेपी का दामन थाम लिया है, उन्होंने बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि जिस AAP को मैंने अपनी जिंदगी के 15 साल दिए, अब वह पार्टी ईमानदार राजनीति से दूर हो गई है। उन्होंने कहा कि वो अपनी पार्टी के दो तिहाई सांसदों के साथ पार्टी छोड़ रहे हैं। राघव ने कहा कि राज्यसभा में हमारे 10 सदस्य हैं, दो-तिहाई सदस्य हमारे साथ हैं और हमने इस पर हस्ताक्षर करके इसे राज्यसभा के सभापति को भेज दिया है। राघव ने कहा कि उनके साथ  हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी शामिल हैं।

SDM मैडम के रसूख के आगे नतमस्तक हुआ सिस्टम! करोड़ों डकारने वाले डॉ. आयुष जायसवाल को किसका संरक्षण?

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर (सरगुजा): क्या छत्तीसगढ़ में कानून केवल आम आदमी के लिए है? क्या सरकारी खजाना लूटने वालों के पास अगर ‘पावरफुल’ कनेक्शन हो, तो उनके लिए जांच रिपोर्ट महज एक रद्दी का टुकड़ा है? सरगुजा जिले के नवापारा शहरी स्वास्थ्य केंद्र में हुए करोड़ों के दवा घोटाले ने प्रशासन की नीयत पर कालिख पोत दी है।
जांच में भ्रष्टाचार के सबूत ‘पहाड़’ जैसे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर प्रशासन ‘मौन व्रत’ धारण किए बैठा है। आखिर क्यों? क्या इसलिए कि मुख्य आरोपी डॉ. आयुष जायसवाल क्षेत्र की एक रसूखदार एसडीएम (SDM) के पति हैं?


जांच रिपोर्ट में ‘पाप’ साबित, फिर भी साहब ‘साफ’!
CMHO को सौंपी गई आधिकारिक रिपोर्ट चीख-चीख कर कह रही है कि दवाओं और उपकरणों के नाम पर सरकारी पैसे की बंदरबांट हुई है।
सबूतों की चिता जलाई गई:  पुरानी फाइलों को आग लगाकर यह समझ लिया गया कि पाप धुल गए।
अंधी लूट: बिना रेट तय किए, बिना टेंडर के चहेते सप्लायरों को करोड़ों के ऑर्डर बांट दिए गए।
कीमोथेरेपी में भी खेल: कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की दवाओं में भी भ्रष्टाचार करने से डॉ. आयुष जायसवाल और उनके साथियों का दिल नहीं कांपा।
अधिकारी चुप हैं या डरे हुए हैं?
हैरानी की बात है कि जांच रिपोर्ट आए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन कलेक्टर से लेकर स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी फाइलों पर कुंडली मारकर बैठे हैं। जनता पूछ रही है— क्या प्रशासनिक अधिकारियों की नैतिकता किसी के पति होने के नाते गिरवी रखी जा चुकी है? अगर आरोपी कोई आम क्लर्क होता तो अब तक सलाखों के पीछे होता, लेकिन यहाँ ‘मैडम’ के रसूख ने पूरे सिस्टम को लकवा मार दिया है।


शर्मनाक: गरीबों की दवा के पैसों से ऐश!
एक तरफ गरीब जनता अस्पतालों में दवाइयों के लिए भटकती है, और दूसरी तरफ अधिकारी और उनके रसूखदार परिजन करोड़ों का गबन कर चैन की नींद सो रहे हैं। अगर इस रिपोर्ट के बाद भी FIR दर्ज नहीं होती है, तो यह माना जाएगा कि सरगुजा प्रशासन भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बना चुका है।
सवाल जो प्रशासन को चुभेंगे:
1. क्या जांच समिति की रिपोर्ट केवल दिखावा थी?
2. क्या कलेक्टर और CMHO पर ऊपर से दबाव है कि ‘SDM पति’ का बाल भी बांका न हो?
3. सबूत जलाने के बाद भी अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?

चेतावनी

जिला प्रशासन याद रखे, फाइलें दबाई जा सकती हैं, लेकिन जनता की आवाज नहीं। यह खबर तब तक थमेगी नहीं, जब तक गरीबों का हक डकारने वाले डॉ. आयुष जायसवाल और उनके सहयोगी सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जाते।

सूरजपुर जिले के 9 राजस्व निरीक्षकों के तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सूरजपुर कलेक्टर द्वारा प्रशासनिक दृष्टिकोण से 9 राजस्व निरीक्षकों के भी तबादले किए हैं। उल्लेखनीय हैं कि इससे पहले कलेक्टर द्वारा 106 पटवारियों के तबादले किए गए थे। 

देखें आदेश :

सूरजपुर में पटवारियों के थोक में तबादले, एक साथ 106 पटवारियों का किया गया तबादला…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सूरजपुर में पटवारियों के थोक में तबादले किए गए हैं। कलेक्टर द्वारा जारी एक आदेश में 106 पटवारियों का एक साथ तबादला किया गया है, पर आश्चर्य की बात यह है कि यह तबादला 17 अप्रैल को ही किया गया था लेकिन इस तबादला आदेश को सामने आने में एक हफ्ते का लंबा समय लग गया। इस आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा अगर यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया था तो फिर कल एसीबी द्वारा पकड़े गए पटवारी सौरव गोस्वामी का जब इस आदेश में नाम था तो फिर तत्काल प्रभाव से उनका तबादला क्यों नहीं हुआ था..??

देखें आदेश :

सरगुजा में दबंगई, सरकारी दफ्तर में घुसकर पटवारी और ऑपरेटर की बेरहमी से पिटाई…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर/दरिमा : सरगुजा जिले के दरिमा थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ सत्ता और रसूख के नशे में चूर भू-माफिया और भाजपा नेता मोनू कुजूर ने अपने साथियों के साथ मिलकर पटवारी कार्यालय में जमकर उत्पात मचाया। आरोपियों ने न केवल सरकारी कार्य में बाधा डाली, बल्कि पटवारी और उनके ऑपरेटर के साथ बेरहमी से मारपीट भी की। यह पूरी वारदात कार्यालय में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है।
विवाद की वजह: RI का नंबर बना बहाना
जानकारी के अनुसार, घटना ग्राम कंठी स्थित पटवारी कार्यालय की है। बताया जा रहा है कि भाजपा नेता मोनू कुजूर अपने कुछ साथियों के साथ कार्यालय पहुँचा था। विवाद की शुरुआत राजस्व निरीक्षक (RI) का मोबाइल नंबर मांगने को लेकर हुई। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि आरोपियों ने कानून को ताक पर रखकर पटवारी और ऑपरेटर पर हमला कर दिया।
दहशत में कर्मचारी, प्रशासन पर उठे सवाल
मारपीट की इस घटना में पटवारी और उनके ऑपरेटर को गंभीर चोटें आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला इतना हिंसक था कि दफ्तर में मौजूद अन्य लोग और ग्रामीण दहशत में आ गए और किसी ने बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं जुटाई।
बड़ा सवाल: क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें अब खाकी या प्रशासन का कोई खौफ नहीं रहा?

कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद राजस्व कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर सरकारी दफ्तर के भीतर ही वे सुरक्षित नहीं हैं, तो फील्ड पर काम करना असंभव होगा। अब सबकी नजरें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या सत्ता पक्ष से जुड़े होने के बावजूद आरोपी मोनू कुजूर और उसके साथियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी या मामला रसूख के नीचे दबा दिया जाएगा।

सूरजपुर: 25 हजार की घूस लेते पटवारी रंगे हाथों गिरफ्तार, ACB की बड़ी कार्रवाई..

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर | भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने सूरजपुर जिले में एक बड़ी दबिश दी है। टीम ने प्रतापपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम सेन्धोपारा के पटवारी सौरभ गोस्वामी को 25,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पटवारी जमीन नामांतरण के बदले पीड़ित से मोटी रकम की मांग कर रहा था।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला प्रतापपुर तहसील के सेन्धोपारा गांव का है। यहाँ स्थित जमीन एसईसीएल (SECL) द्वारा अधिग्रहित क्षेत्र के अंतर्गत आती है। प्रार्थी अपनी जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए लंबे समय से पटवारी कार्यालय के चक्कर काट रहा था।
आरोप है कि पटवारी सौरभ गोस्वामी काम करने के बजाय प्रार्थी को बार-बार घुमा रहा था और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बदले में रिश्वत की मांग कर रहा था। पटवारी की आए दिन की मांग और टालमटोल से परेशान होकर आखिरकार पीड़ित ने इसकी लिखित शिकायत अंबिकापुर स्थित ACB कार्यालय में दर्ज कराई।

ACB ने बिछाया जाल

शिकायत की तस्दीक करने के बाद ACB की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। बुधवार को जैसे ही पटवारी ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 25,000 रुपये अपने हाथ में लिए, पहले से मुस्तैद ACB की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।

अधिकारियों का बयान: “भ्रष्टाचार के मामले में शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की गई है। आरोपी पटवारी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।”

क्षेत्र में हड़कंप

पटवारी की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही राजस्व विभाग और तहसील कार्यालय में हड़कंप मच गया है। फिलहाल ACB की टीम आरोपी पटवारी से पूछताछ कर रही है और उसके ठिकानों व अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।

सरगुजा में प्रशासनिक सर्जरी: एसडीएम तहसीलदारों के तबादले…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई है। सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत द्वारा जिले भर में पदस्थ तहसीलदारों और एसडीएम के प्रभार में परिवर्तन किए हैं।

देखें आदेश :

नगरीय प्रशासन विभाग में बड़ा फेरबदल: 20 सीएमओ समेत 37 अधिकारियों के थोक में तबादले…

हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और कामकाज में कसावट लाने के उद्देश्य से विभाग में बड़ा फेरबदल किया है। शासन द्वारा जारी ताज़ा सूची के अनुसार, प्रदेश भर के कई नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के मुख्य अधिकारियों सहित तकनीकी अमले का थोक में तबादला कर दिया गया है।
जारी आदेश के तहत कई लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों को हटाया गया है। सरकार ने इस फेरबदल को ‘नियमित प्रक्रिया’ बताया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि आगामी विकास कार्यों और लंबित परियोजनाओं की सुस्त रफ़्तार को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

कर्मचारियों में हलचल
एक साथ इतने बड़े पैमाने पर हुए तबादलों से विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है। कई अधिकारी इस आदेश से खुश हैं तो कई अपनी पसंदीदा पोस्टिंग खोने के कारण असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। विभाग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए कार्यस्थल पर जॉइनिंग देनी होगी, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

भाषा के आधार पर भेदभाव मामले में स्वरंग किड्स एकेडमी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना, संचालन स्थगित…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : भाषा के आधार पर बालक को प्रवेश देने से इंकार करने के संबंध में सोशल मीडिया तथा विभिन्न न्यूज चैनलों के माध्यम से सामने आए मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रकरण की विस्तृत जांच कराई गई।
जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी डॉ दिनेश कुमार झा ने आदेश जारी किया गया है, जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया कि स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशागी एजूकेशन सोसायटी) चोपड़ापारा अम्बिकापुर द्वारा 04 वर्ष के एक मासूम बच्चे को विद्यालय में प्रवेश देने से इस आधार पर इंकार किया गया कि वह हिन्दी में बातें नहीं कर पाता तथा स्थानीय सरगुजिहा भाषा में बात करता है। संस्था द्वारा बच्चे के पिता से यह भी कहा गया कि इस विद्यालय में बड़े घर के बच्चे पढ़ते हैं और शिक्षक बच्चे की बातें नहीं समझ पा रहे हैं, इसलिए उसे प्रवेश नहीं दिया जा सकता।
इस प्रकार भाषा के आधार पर किसी बालक के साथ किया गया भेदभाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के विपरीत तथा पूर्णतः अनुचित एवं अस्वीकार्य पाया गया। इस संबंध में संस्था से स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि संस्था बिना विभागीय मान्यता के संचालित हो रही थी तथा शाला प्रबंधन एवं शिक्षकों द्वारा अपनी गलती स्वीकार की गई।
प्राप्त शिकायत की जांच हेतु रूमी घोष, वरिष्ठ प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केदारपुर अम्बिकापुर की अध्यक्षता में जांच दल गठित किया गया। जांच दल द्वारा भी समाचारों में प्रसारित घटना की पुष्टि करते हुए संस्था के बिना मान्यता संचालन की जानकारी दी गई।

उक्त कृत्य को निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया। अतः निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा-18 (5) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशागी एजूकेशन सोसायटी) चोपड़ापारा अम्बिकापुर पर 1,00,000 रुपये (एक लाख रुपये) का आर्थिक दण्ड अधिरोपित किया गया है तथा आगामी आदेश तक संस्था का संचालन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देशित किया है कि अधिरोपित आर्थिक दण्ड शासन के खजाने में चालान के माध्यम से जमा कर उसकी प्रति प्रस्तुत की जाए। साथ ही विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, अम्बिकापुर को निर्देश दिए गए हैं कि संस्था में अध्ययनरत बच्चों के पालकों से संपर्क कर उनके बच्चों को अन्य उपयुक्त विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित करें।

कार्यों में लापरवाही ग्राम पंचायत सचिव निलंबित…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल के द्वारा गुरुवार को जनपद पंचायत लखनपुर के ग्राम पंचायत बेलखरिखा का भ्रमण किया गया। इस दौरान ग्राम पंचायत बेलखरिखा में पदस्थ सचिव कमल साय बिना कारण पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए। वहीं ग्राम पंचायत में 15वां वित्त योजनान्तर्गत स्वीकृत पुराने कार्य अपूर्ण पाए गए। ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना अन्तर्गत वर्ष 2024-25 में कुल 181 आवास स्वीकृत हैं उनमें से केवल 69 आवास पूर्ण है, जो कि केवल 38 प्रतिशत (जिले का ऐवरेज 68 प्रतिशत) है। ग्रामीणों से चर्चा करने पर यह बात भी सामने आयी कि सचिव कमल साय पंचायत भवन में प्रायः मद्यपान कर उपस्थित रहते हैं। उक्त कृत्य हेतु जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल के द्वारा ग्राम पंचायत बेलखरिखा सचिव श्री कमल साय को छ.ग. पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के नियम 03 (एक), (दो) एवं (तीन) एवं नियम-22 का उल्लंघन करने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर इनका मुख्यालय जनपद पंचायत लखनपुर निर्धारित किया गया।

सूरजपुर: बतरा के नावापारा में महीनों से खराब पड़ा हैंडपंप, गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर:  जिले के भैयाथान विकासखंड के ग्राम पंचायत बतरा अंतर्गत नावापारा मोहल्ले में भीषण गर्मी के बीच जल संकट गहरा गया है। यहां लगा एकमात्र हैंडपंप पिछले कई महीनों से खराब पड़ा है, जिसके कारण वार्ड वासियों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। आलम यह है कि ग्रामीण अब मजबूरन दूषित जल का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
महीनों से मिल रहा सिर्फ आश्वासन
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि हैंडपंप सुधार के लिए कई बार ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव से गुहार लगाई गई है, लेकिन हर बार “पाइप उपलब्ध नहीं है” कहकर बात को टाल दिया जाता है। ताज्जुब की बात यह है कि पंचायत के पास पिछले कई महीनों से पाइप की व्यवस्था नहीं हो पाई है, जो प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
राहगीर और ग्रामीण दोनों परेशान
गर्मी के इस मौसम में नावापारा से गुजरने वाले राहगीर भी प्यास बुझाने के लिए इस हैंडपंप का सहारा लेते हैं, लेकिन घंटों कोशिश के बाद भी पानी नहीं निकलता। ग्रामीणों ने बताया कि:
पीने के पानी के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में भटकना पड़ रहा है।
गंदा और दूषित पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है
“हम कई बार सरपंच-सचिव को बोल चुके हैं, लेकिन वो बस पाइप आने का इंतजार करने को कहते हैं। क्या महीनों तक पाइप नहीं आता? गर्मी में हमारी सुनने वाला कोई नहीं है।”
एक स्थानीय ग्रामीण

प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि जल्द से जल्द हैंडपंप की मरम्मत कराई जाए। यदि समय रहते पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद से कब जागते हैं और नावापारा के लोगों की प्यास कब बुझती है।

वेदांता पावर प्लांट हादसे में मृतकों की संख्या 19 पहुंची, शव लेने लोगों की लगी कतार, मृतकों की लिस्ट जारी…

हिंद स्वराष्ट्र शक्ति : छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले में वेदांता प्लांट हादसे में अब मरने वालों की संख्या 16 से बढ़कर 19 हो गई है. एक साथ 19 मजदूरों की मौत से अस्पतालों में शवों का अंबार लगा हुआ है. अपने परिजनों को खोने वाले लोगों की भारी भीड़ अस्पतालों में जुटने से प्रशासन के हाथ-पांव फुल जाने से इनको समय पर सौंपने में भी समय लग रहा है.

शक्ति जिले के वेदांता प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. रायगढ़ के मेडिकल कॉलेज में शव रखे गए हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज से 11 और जिला अस्पताल में अब तक 5 शव लाए जा चुके हैं. शवों को लाने का सिलसिला लगातार जारी है, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है.

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मृतकों के परिजनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. अपने प्रियजनों की एक झलक पाने के लिए लोग घंटों से इंतजार कर रहे हैं. अस्पताल परिसर के बाहर एंबुलेंस की लंबी कतार लगी हुई है. प्रशासन द्वारा एक-एक शव का पोस्टमार्टम कराकर उन्हें परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है.

घटना की गंभीरता को देखते हुए रायगढ़ जिले की पुलिस के साथ-साथ सक्ती जिले की पुलिस भी मौके पर तैनात है. सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे.

मृतकों के नाम इस प्रकार हैं:

1. रितेश कुमार राय (सोनबरसा, भागलपुर, बिहार)
2. अमृत लाल पटेल (मांझापारा, टुंड्री)
3. ठंडाराम लहरे (जमगहन, मालखरौदा)
4. तरूण कुमार ओझा (रोहराबंध, धनबाद, झारखंड)
5. आकिब खान (पैथन, दरभंगा, बिहार)
6. सुसंता जना (पश्चिम बंगाल)
7. अब्दुल करीम (बोका, झारखंड)
8. उद्धव सिंह यादव (खरसिया)
9. शेख सईफउद्दीन (पश्चिम बंगाल)
10. पप्पू कुमार (उत्तर प्रदेश)
11. अशोक पहरे (पलामू, झारखंड)
12. मानस गिरी (पश्चिम बंगाल)
13. बृजेश कुमार (उत्तर प्रदेश)
14. रामेश्वर महिलाने (जांजगीर-चांपा)
15. कार्तिक महतो (पश्चिम बंगाल)
16. नदीम अंसारी (फगुरम)
17. शिवनाथ मुर्मू
18. चिंतरंजन डलोई (मेदिनीपुर)
19. दीपांकर सिंह (मेदिनीपुर, बोरोबाई)

प्रशासन द्वारा मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया गया है. वहीं, हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है. इस घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैला दी है

छत्तीसगढ़ साड़ी घोटाला: गुणवत्ता और माप में बड़ी धांधली, मंत्री मंत्रालय छोड़ छट्टी बड़ी में व्यस्त और विभाग धांधली में मस्त…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास विभाग एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े काफी सामाजिक महिला है और मंत्रालय छोड़ अधिकतर समय छट्टी–बड़ी और शादी पार्टी के कार्यक्रमों में व्यस्त रहती हैं। मंत्री मैडम के बारे में क्या ही कहें सूरजपुर जिले के अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को संरक्षण देने का कार्य मैडम द्वारा बखूबी किया जा रहा है, थाना तक पहुंचने वाले मामलों में भी मैडम द्वारा कथित तौर पर अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर मामले में अपराधियों को संरक्षण देने का कार्य किया जाता है। उल्लेखनीय हैं कि लक्ष्मी राजवाड़े के कार्यकाल में इससे पहले भी विभाग में कई बड़े घोटाले हुए और अब साड़ियों की खरीदी और वितरण को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।

क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2024-25 के लिए प्रदेश की लगभग 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ियाँ वितरित की जानी थीं। इस खरीदी का जिम्मा खादी एवं ग्रामोद्योग को दिया गया था। लगभग 9.7 करोड़ रुपये के बजट से प्रति साड़ी ₹500 की दर पर साड़ियाँ खरीदी गईं। यह मामला तब गरमाया जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साड़ियों की खराब गुणवत्ता और कम लंबाई की शिकायत करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वितरण के दौरान कार्यकर्ताओं ने साड़ियों में कई गड़बड़ियां पाईं:
लंबाई में कमी: वर्क ऑर्डर के अनुसार साड़ी की लंबाई 6.3 मीटर (5.5 मीटर साड़ी + 80 सेमी ब्लाउज) होनी चाहिए थी। लेकिन वास्तविकता में कई जिलों में साड़ियाँ महज 5 मीटर या 5.3 मीटर की निकलीं।
घटिया गुणवत्ता: कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जो साड़ी ₹500 में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, उसकी बाजार कीमत ₹200-250 से अधिक नहीं है।
धुलाई के बाद समस्या: पहली बार धोने के बाद ही साड़ियों का रंग उतरने लगा और कपड़ा बुरी तरह सिकुड़ गया, जिससे वे पहनने लायक नहीं रहीं।
इस मामले ने प्रदेश में राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।
विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे करोड़ों का भ्रष्टाचार करार दिया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
विभाग की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने शिकायतों का संज्ञान लिया है। शुरुआती जांच के बाद विभाग ने ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया है और मामले की गहराई से जांच के आदेश दिए हैं।
वर्तमान स्थिति
अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच हुए इस वितरण में अनियमितता पाए जाने के बाद अब साड़ियों को वापस लेने और दोषियों पर कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रायपुर सहित कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर इन साड़ियों को लौटाने की चेतावनी दी है। लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है जब विभाग में कोई बड़ा घोटाला किया हो इससे पहले भी इनके कार्यकाल में कई बड़े घोटाले हुए हैं और जिनकी जांच आज भी लंबित है।

1. रेडी-टू-ईट (RTE) वितरण और गुणवत्ता विवाद

​साड़ी विवाद से पहले, विभाग में रेडी-टू-ईट (कुपोषण दूर करने के लिए दिया जाने वाला पूरक पोषण आहार) की गुणवत्ता और इसके वितरण तंत्र को लेकर सवाल उठे थे।

  • ​शिकायतें: प्रदेश के कई आंगनबाड़ी केंद्रों से यह शिकायत आई थी कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को बांटे जाने वाले आहार की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं है।
  • ​विवाद: वितरण का काम निजी समूहों या सहकारी समितियों को देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के आरोप विपक्ष द्वारा लगाए गए थे।

​2. मोबाइल फोन और टैबलेट खरीदी में धांधली के आरोप

​विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए जाने वाले स्मार्टफोन और टैबलेट की खरीदी में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।

  • ​आरोप: यह दावा किया गया था कि पुरानी निविदाओं (Tenders) के आधार पर बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर उपकरणों की खरीदी की गई। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि कम गुणवत्ता वाले उपकरण खरीदे गए, जो जल्द ही खराब हो गए।

​3. आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में भ्रष्टाचार

​छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण और मरम्मत के फंड के दुरुपयोग की खबरें सामने आई थीं।

  • ​मामला: कई स्थानों पर कागजों में भवन निर्माण पूर्ण दिखा दिया गया था, जबकि धरातल पर काम अधूरा था। इसके अलावा, भवनों के रंग-रोगन और सुविधाओं के नाम पर निकाली गई राशि में गबन की शिकायतें जिला स्तर पर दर्ज हुई थीं।

​4. कार्यकर्ताओं की नियुक्तियों में अनियमितता

​विगत महीनों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया में भी स्थानीय स्तर पर भाई-भतीजावाद और पैसों के लेनदेन के आरोप लगे थे, जिसकी कई जिलों में जांच अभी भी जारी है।

प्रशासनिक विफलता या मौन सहमति?
महिला एवं बाल विकास विभाग, जिसकी जिम्मेदारी प्रदेश की सबसे संवेदनशील आबादी—महिलाओं और बच्चों—के संरक्षण की है, आज भ्रष्टाचार और लापरवाही का केंद्र बनता जा रहा है। साड़ी घोटाले से लेकर मोबाइल खरीदी और रेडी-टू-ईट की गुणवत्ता में आई गिरावट यह स्पष्ट करती है कि विभाग के भीतर निगरानी तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की भूमिका पर सवाल:
एक कैबिनेट मंत्री के रूप में यह लक्ष्मी राजवाड़े की जिम्मेदारी है कि करोड़ों रुपये के टेंडर और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी हो। साड़ियों की लंबाई कम निकलना और घटिया कपड़े का वितरण सीधे तौर पर उनके विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच की सांठगांठ को दर्शाता है, जिसे रोकने में वह विफल रही हैं।
केवल ‘जांच’ का दिलासा

हर बार घोटाला उजागर होने के बाद मंत्री की ओर से “जांच की जाएगी” या “भुगतान रोक दिया गया है” जैसे रटे-रटाए बयान सामने आते हैं। सवाल यह है कि घोटाला होने ही क्यों दिया गया? क्या विभाग में भ्रष्टाचार मंत्री की नाक के नीचे पनप रहा है या उनकी प्रशासनिक ढिलाई का फायदा उठाया जा रहा है?

नैतिक जिम्मेदारी से दूरी

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं, जो जमीनी स्तर पर सरकार की योजनाओं को लागू करती हैं, उन्हें खराब गुणवत्ता का सामान देकर उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ किया गया है। विभाग की मुखिया होने के नाते लक्ष्मी राजवाड़े इस नैतिक पतन और वित्तीय अनियमितता की जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं।
प्रदेश की जनता और विपक्षी दल अब इसे केवल ‘अधिकारियों की गलती’ मानकर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। यदि मंत्री महोदया समय रहते अपने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार नहीं करतीं, तो इन घोटालों की आंच सीधे तौर पर उनकी राजनीतिक साख और कुर्सी तक पहुँचना तय है। यह विभाग अब ‘कल्याण’ के बजाय ‘विवादों’ का पर्याय बनता जा रहा है, जिसका सीधा जवाबदेही का केंद्र स्वयं विभागीय मंत्री हैं।

सीतापुर विधायक की जाति प्रमाण पत्र पर विवाद, हाईकोर्ट ने कहा : 90 दिन में पूरी करें जांच…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर/सीतापुर : सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाण पत्र की वैधता अब कानूनी घेरे में है। जनजाति सुरक्षा मंच का आरोप है कि विधायक का प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरुआत से ही संदिग्ध रही है और इसमें कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
जिला संयोजक, जनजाति सुरक्षा मंच बिहारी लाल तिर्की के अनुसार, विधायक का जाति प्रमाण पत्र 19 सितंबर 2023 को एसडीएम कार्यालय, लैलूंगा से जारी किया गया था। इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने
अक्टूबर 2023: जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति, रायगढ़ में पहली शिकायत दर्ज कराई।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: विधानसभा चुनाव की आहट को देखते हुए मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ले जाया गया (रिट याचिका क्रमांक 4587/2023)।
वर्ष 2026 की नई याचिका: लंबे समय तक ठोस कार्रवाई न होने के कारण वर्ष 2026 में पुनः याचिका दायर की गई हैं।


न्यायालय का सख्त रुख: 90 दिनों का अल्टीमेटम
मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने 2 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने संबंधित छानबीन समिति को निर्देशित किया है कि इस पूरे प्रकरण की जांच 90 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण की जाए।


“हाईकोर्ट के इस आदेश से आम जनता का न्यायपालिका पर भरोसा और सुदृढ़ होगा। यह संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।” — बिहारी लाल तिर्की, जिला संयोजक, जनजाति सुरक्षा मंच


गोपनीयता और साक्ष्य संकलन
तिर्की ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए सभी तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। इस कानूनी लड़ाई में अधिवक्ता ऋषिराज सिंह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिन्होंने दस्तावेजों के संकलन और तकनीकी पक्षों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखा है।


डॉ. आंबेडकर जयंती पर संदेश
संयोगवश, इस घटनाक्रम की जानकारी बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर सार्वजनिक की गई। मंच का कहना है कि वे केवल संवैधानिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना चाहते हैं ताकि आरक्षित वर्गों के अधिकारों का हनन न हो।
90 दिनों की इस समय सीमा के भीतर आने वाली रिपोर्ट विधायक रामकुमार टोप्पो के राजनीतिक भविष्य और उनकी सदस्यता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।

वेदांता पावर प्लांट का बॉयलर फटा, 10 की मौत, 23 घायल, PM मोदी ने किया मुआवजे का ऐलान…

हिंद स्वराष्ट्र शक्ति : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट (Vedanta Power Plant) की एक बॉयलर यूनिट में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया. यह धमाका इतना शक्तिशाली था कि वहां काम कर रहे कई श्रमिक इसकी चपेट में आ गए.

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस हादसे में अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 23 श्रमिक बुरी तरह झुलस गए हैं. घायलों को तुरंत रायगढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है.

घटनास्थल पर अफरा-तफरी और प्रशासन की कार्रवाई
हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई. सक्ती जिले के एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि राहत और बचाव कार्य तेजी से किया गया. रायगढ़ के एसडीएम महेश शर्मा ने कहा कि प्राथमिकता घायलों का सही इलाज कराना है और इस पूरे मामले की गहन जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

एक घायल श्रमिक के पिता राजकुमार ने बताया कि उनका बेटा पिछले 4 महीनों से प्लांट में काम कर रहा था. उन्हें घटना की खबर मिली लेकिन अस्पताल में कोई भी सही जानकारी नहीं दे रहा है, जिससे परिजनों में गुस्सा और दुख दोनों है.

कंपनी का पक्ष: वेदांता पावर प्लांट के प्रवक्ता ने बताया कि हादसा सब-कॉन्ट्रैक्टर NGSL की तरफ से संचालित यूनिट में हुआ. कंपनी स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर जांच कर रही है और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का वादा किया है.

प्रधानमंत्री और नेताओं ने जताया शोक
इस भयावह हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के दिग्गज नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है. पीएम ने एक्स पर पोस्ट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं. उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए ₹2 लाख और घायलों के लिए ₹50,000 की सहायता राशि (PMNRF से) देने की घोषणा की.

वही इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्होंने मृतकों के परिजनों को 5 लाख और घायलों को 50000 की सहायता राशि देने की घोषणा की है।

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