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पटवारी पर रिश्वतखोरी का गंभीर आरोप, वृद्ध ग्रामीण सेवक से लिए 4 हजार, फिर भी नहीं किया अभिलेख सुधार…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : प्रेमनगर तहसील अंतर्गत राजस्व व्यवस्था में मनमानी और भ्रष्टाचार का एक और गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम बकिरमा निवासी वृद्ध ग्रामीण सेवक राम ने पटवारी पवन साय पर रिश्वत मांगने और राशि लेने के बावजूद कार्य नहीं करने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपी है।

शिकायत के अनुसार सेवक राम के नाम कुल 14 भू-खंड दर्ज हैं, लेकिन कम्प्यूटरीकृत अभिलेख में गंभीर लापरवाही करते हुए ऑनलाइन बी-1 में केवल 11 भू-खंड ही प्रदर्शित हो रहे हैं। जब उन्होंने तहसील कार्यालय प्रेमनगर में वर्ष 2013-14 का हस्तलिखित बी-1 अभिलेख देखा, तो सभी छूटे हुए भू-खंड उसमें स्पष्ट रूप से दर्ज पाए गए। इसके पश्चात अभिलेख सुधार के लिए उन्होंने पटवारी पवन साय से संपर्क किया।

सेवक राम का आरोप है कि अभिलेख सुधार के बदले पटवारी ने उनसे 5,000 रुपए की मांग की। मजबूरीवश उन्होंने 4,000 रुपए दे दिए, लेकिन इसके बावजूद आज तक अभिलेख में सुधार नहीं किया गया। उनका कहना है कि वे पिछले कई महीनों से तहसील और पटवारी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, किंतु हर बार “कल आना”, “प्रणाली बंद है”, “आज कार्यभार अधिक है” जैसे बहानों से उन्हें टाल दिया जाता रहा।

अभिलेख अद्यतन नहीं होने के कारण सेवक राम को ऋण पुस्तिका नवीनीकरण, कृषि कार्य तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद समस्या यथावत बनी हुई है।

ग्राम बकिरमा एवं कोट्या हल्का के ग्रामीणों ने भी पटवारी पवन साय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों के कार्य जानबूझकर लंबित रखना, अनावश्यक बहाने बनाना और अवैध वसूली की मांग करना आम बात हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई किसान पहले भी इसी प्रकार की परेशानी झेल चुके हैं।

पीड़ित सेवक राम ने कलेक्टर से मांग की है कि उनके सभी छूटे हुए भू-खंड तत्काल बी-1 अभिलेख में दर्ज कर सुधार किया जाए तथा इस प्रकार की अवैध वसूली और लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि वृद्ध एवं छोटे किसानों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार अपमान और परेशानियों का सामना न करना पड़े।

प्रेमनगर क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस गंभीर शिकायत पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होती है अथवा मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

मनेंद्रगढ़ पीडब्ल्यूडी में 18–20 साल से जमे कर्मचारी, शासन की तबादला नीति पर सवाल…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : लोक निर्माण विभाग (PWD) मनेंद्रगढ़ में वर्षों से एक ही जगह पर जमे कर्मचारियों और बाबुओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार विभाग में कई कर्मचारी ऐसे हैं जो 18 से 20 वर्षों से बिना तबादला एक ही पद और स्थान पर कार्यरत हैं, लेकिन अब तक शासन का ध्यान पीडब्ल्यूडी की ओर क्यों नहीं गया, यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
राज्य शासन द्वारा समय-समय पर तबादला नीति लागू की जाती है, जिसमें स्पष्ट रूप से लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों को स्थानांतरित करने का प्रावधान है। इसके बावजूद मनेंद्रगढ़ पीडब्ल्यूडी में यह नीति कागज़ों तक सीमित नजर आ रही है। स्थानीय लोगों और विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही जगह पर जमे रहने से
कामकाज में पारदर्शिता पर सवाल
कथित मनमानी और दबदबा
ठेकेदारी एवं भुगतान प्रक्रिया में प्रभाव
जैसी स्थितियां पैदा होती हैं।
क्या जनपद निधि को हो रहा नुकसान?
सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पीडब्ल्यूडी में जमे कर्मचारियों के कारण जनपद या शासन निधि का नुकसान (सन घाट) हो रहा है? यदि नहीं, तो फिर तबादलों में यह विभाग अपवाद क्यों बना हुआ है?
जनता की मांग
क्षेत्रवासियों की मांग है कि
पीडब्ल्यूडी मनेंद्रगढ़ में लंबे समय से जमे कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक की जाए।
तबादला नीति का सख्ती से पालन हो।
जरूरत पड़ने पर विभागीय जांच भी कराई जाए।
अब देखना यह होगा कि खबरों और जनदबाव के बाद शासन और उच्च अधिकारी पीडब्ल्यूडी मनेंद्रगढ़ पर कब ध्यान देते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

रिटायरमेंट से पहले रेंजर के कार्यकाल की जांच की मांग तेज…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : वन मंडल मनेंद्रगढ़ अंतर्गत वन परिक्षेत्र मनेंद्रगढ़ में पदस्थ रेंजर रामसागर कुर्रे के विरुद्ध गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रेंजर पर अपने कार्यकाल के दौरान पद का दुरुपयोग कर लाखों रुपये की शासकीय राशि के गबन का आरोप है।
बताया जा रहा है कि रेंजर रामसागर कुर्रे ने अपने डिप्टी कार्यकाल के दौरान ऐसे कई कार्यों का भुगतान निकलवाया, जहां वास्तव में कोई काम ही नहीं हुआ। इतना ही नहीं, कुछ बीट क्षेत्रों में बिना कार्य किए ही राशि आहरित करने के आरोप भी सामने आए हैं। आरोप है कि अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया गया।
सूत्रों का यह भी कहना है कि जिन बीटों में कार्य नहीं हुआ, वहां से भी शासकीय धनराशि निकाली गई, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि रेंजर रामसागर कुर्रे मार्च माह में सेवानिवृत्त (रिटायर) होने वाले हैं। ऐसे में स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा यह मांग जोर पकड़ रही है कि रिटायरमेंट से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो समय रहते कार्रवाई हो सके।
जनता का कहना है कि यदि सेवानिवृत्ति के बाद जांच होती है, तो कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए शासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की जा रही है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच आदेश जारी किए जाएं।
अब देखना यह होगा कि शासन और वन विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या रिटायरमेंट से पहले जांच संभव हो पाती है या नहीं।

सरगुजा संभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के नकारेपन के कारण संभाग बन रहा अपराधियों का गढ़…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा संभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के नकारेपन के कारण सरगुजा संभाग अपराधियों का गढ़ बनते जा रहा हैं। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि बेधड़क अपराध हो रहे हैं, बेगुनाह पीस रहे हैं, कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं और यह दोनों मलाई चाटने में व्यस्त है। अपराधियों का मनोबल इतना तेज हो गया है कि उनका कहना है कि जेब में है अगर पैसे तो हो जाएगा सब काम ना होगी कोई कार्यवाही ना भुगतना होगा अंजाम।

बूझो तो जाने हम हैं कौन..??

जांच की जा रही है जांच के बाद जो भी सामने आएगा उस पर आगे की कार्यवाही की जाएगी…. यह इनका रटा हुआ डायलॉग है जो डायलॉग यह महानुभाव हर पीड़ित को देते हैं और पीड़ित के आवेदन आते ही दूसरे पक्ष से सेटलमेंट कर लेते हैं और मामले की जांच सालों साल चलते रह जाती है, लेकिन मामले का कोई निष्कर्ष नहीं निकलता और न ही जांच रिपोर्ट सामने आती हैं। यही नहीं अगर इनको कोई पत्रकार माइक सटा दें तो अपने कनिष्ठ किसी अधिकारी को फंसा देते हैं और कहते हैं कि “अरे तुमने तो गलती कर दिया तुम्हें ऐसा करना था वैसा करना था।” आगे उनका लाइन होता है देखिए हमने जांच रिपोर्ट मंगा ली है जांच रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे और आगे की कार्रवाई करेंगे। दोषियों को बक्सा नहीं जाएगा दोषियों के विरुद्ध अवश्य ही कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दे लेकिन कार्रवाई के नाम पर होता है नील बटा सन्नाटा….

एक दूसरे महानुभाव है जो हमेशा व्यस्त रहते हैं आम लोगों से मिलना इनकी फितरत में ही नहीं है अधिकारी बन गए हैं लेकिन अधिकारी से ज्यादा अपने आप को बादशाह समझते हैं। उनके यहां आवेदन जाना मतलब अनावेदक के पास जानकारी का पहुंचना सबसे पहले अनावेदक से बातें होगी सेटलमेंट होगा उसके बाद आगे की कार्रवाई तो आपको पता ही है बस जांच जारी है जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

इन दोनों ने मिलकर बना रखा है जंगल राज

यह दोनों ऐसे महानुभाव हैं जिनको अपने इज्जत की कोई फिक्र नहीं है इनका बस पैसे से मतलब है सिर्फ और सिर्फ पैसा आपको बता दे की एक और जांच रिपोर्ट आती है दूसरी और पैसे आते हैं तो यह महानुभाव जाच रिपोर्ट को दरकिनार करके पैसे को चुनते हैं और बस वही अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता। इन दोनों ने संभाग को जंगल राज बना दिया है जहां अपराधियों के हौसले काफी बुलंद है और कोई भी अपराधी अपराध करने से पहले तनिक मात्र भी नहीं डरता है। अपराधियों को खुला संरक्षण इन दोनों के द्वारा दिया गया है अपराधियों पर कार्यवाही ना होना और इन दोनों के संरक्षण के कारण अन्य लोग भी अपराधों की ओर बढ़ रहे हैं और दिन दोगुनी रात चौगुनी अपराध की घटनाओं में वृद्धि हो रही है।

तबादले का इंतजार तभी बदलेगी संभाग की तस्वीर

ज्यादा लंबा समय तो नहीं हुआ इन दोनों भ्रष्ट अधिकारियों को संभाग में आए हुए लेकिन जितने भी समय से आए हैं कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रही बल्कि सिर्फ और सिर्फ उनके जेब भर रहे हैं लंबे समय से पीड़ित इनके तबादलों का इंतजार कर रहे हैं लेकिन सरकार पता नहीं कब उनके तबादले करेंगे और तबादले के बाद ही शायद संभाग की तस्वीर बदलेगी और दोनों विभागों में कसावट आएगी शायद उसके बाद कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कुछ अपराधी मानसिकता के लोगों पर कार्रवाई हो पाएगी।

भगवान से प्रार्थना जल्द इन्हें सद्बुद्धि दें… पुरानी कहावत चूस का धन मूस खाता है… हो सकता है संभवत इनके मामलों में भी यही हो और एक दिन ऐसा आए कि जनता को चूस चूस कर इकट्ठा किया जा रहा यह धन उनके किसी काम ना आए।

शासन मेहरबान! जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में तबादला नीति बेअसर…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनने के बाद जनता को उम्मीद थी कि वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों और बाबुओं पर कार्रवाई होगी और व्यापक तबादले किए जाएंगे। लेकिन जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ की स्थिति इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यहां कर्मचारी से लेकर बाबू तक बरसों से एक ही जगह जमे हुए हैं, जबकि शासन की तबादला नीति केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।
स्थानीय आम नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों के कारण कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। विकास कार्यों में देरी, पारदर्शिता की कमी और शिकायतों का अंबार इसी का परिणाम बताया जा रहा है। बावजूद इसके अब तक किसी ठोस कार्रवाई या बड़े तबादले की पहल नहीं की गई।
सूत्रों की मानें तो कई कर्मचारी वर्षों से प्रभाव और पहुंच के चलते अपने पद पर टिके हुए हैं। शासन-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर तबादला नीति लागू क्यों नहीं हो पा रही है। जनता पूछ रही है—क्या शासन जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में मेहमान बनकर रह गया है
अब देखना होगा कि शासन इस ओर कब ध्यान देता है और कब तक जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में जमे अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई होती है, या फिर जनता की उम्मीदें यूं ही टूटती रहेगी।

किसानों की मांग पर बढ़ी धान खरीदी केंद्रों की लिमिट, विधायक मरावी व भाजपा जिला अध्यक्ष सोनी की संयुक्त पहल लाई रंग…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : जिले के विभिन्न धान खरीदी केंद्रों में धान खरीदी की लिमिट नहीं बढ़ने से किसान लंबे समय से परेशान थे। लिमिट के अभाव में किसान समय पर अपना धान नहीं बेच पा रहे थे, जिससे खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था और किसानों में असंतोष की स्थिति बनी हुई थी।

किसानों की परेशानी को देखते हुए प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी ने न केवल धान खरीदी केंद्रों का लगातार दौरा कर किसानों से सीधा संवाद किया, बल्कि विधानसभा सत्र के दौरान विभागीय मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री से मुलाकात कर धान खरीदी केंद्रों की लिमिट बढ़ाने की मांग भी मजबूती से रखी।

विधायक मरावी की मांग पर प्रभारी मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिले के  कलेक्टर को धान खरीदी केंद्रों की लिमिट तत्काल बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही विधायक मरावी ने जिला प्रशासन से निरंतर संपर्क बनाए रखते हुए किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान होगा।

इधर भाजपा जिला अध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी ने भी किसानों की समस्या को लेकर जिला कलेक्टर एवं प्रभारी मंत्री से मोबाइल के माध्यम से संपर्क किया और लिमिट बढ़ाने का आग्रह किया। जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयासों के बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए संबंधित धान खरीदी केंद्रों की लिमिट बढ़ा दी।

लिमिट बढ़ने के बाद धान खरीदी की प्रक्रिया में तेजी आई है और अब किसान बिना किसी बाधा के अपना धान बेच पा रहे हैं। व्यवस्था में सुधार से जिले के किसानों में संतोष का माहौल है। किसानों ने प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी एवं भाजपा जिला अध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका से उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान संभव हो सका।

देव कुमार गुप्ता बने भारतीय जनता युवा मोर्चा, जिला अध्यक्ष…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : भारतीय जनता पार्टी के युवा संगठन को मजबूती प्रदान करते हुए संगठन ने देव कुमार गुप्ता को भारतीय जनता युवा मोर्चा, जिला सूरजपुर का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। नियुक्ति की सूचना मिलते ही जिलेभर के युवा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। नगर में विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर खुशियां मनाईं तथा एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। देव कुमार गुप्ता लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। वे वर्ष 2020 से अब तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला मंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनके कार्यकाल के दौरान संगठनात्मक गतिविधियों को गति मिली तथा युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ी।

पूर्व संगठनात्मक दायित्व
देव कुमार गुप्ता ने वर्ष 2012 से 2016 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा, सूरजपुर शहर मंडल में प्रचार-प्रसार मंत्री के रूप में दायित्व निभाया। इसके पश्चात वर्ष 2016 से 2020 तक वे सूरजपुर शहर मंडल अध्यक्ष रहे। इन दायित्वों के दौरान उन्होंने संगठन विस्तार एवं युवाओं को जोड़ने का कार्य किया।

नवनियुक्त जिला अध्यक्ष देव कुमार गुप्ता ने अपनी नियुक्ति पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन की नीतियों एवं विचारधारा को युवाओं तक पहुंचाने के साथ-साथ पार्टी को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक मंडल एवं बूथ स्तर तक युवाओं को जोड़कर संगठन को मजबूत किया जाएगा। उनकी नियुक्ति पर भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में युवा मोर्चा जिले में नई ऊर्जा के साथ कार्य करेगा।

पत्रकार जितेंद्र का चिट्ठी बम!! और ‘मग्गू भाई’ का ऐसा ‘भौकाल’ कि सिस्टम भी शरमा जाए!!

रायपुर / बलरामपुर / विशेष व्यंग्यात्मक रिपोर्ट : अरे भाई साहब! क्या गदर मचा है बलरामपुर में! एक चिट्ठी से बम फटा है और उसके छर्रे सीधे राष्ट्रपति भवन तक उड़े हैं। मामला अपने विनोद अग्रवाल उर्फ ‘मग्गू सेठ’ का है। पत्रकार ने जो ‘लपेटे में लिया है’, कसम से पढ़ के जिगर खुश हो जाएगा।
यह कोई आम शिकायत नहीं है, यह ‘व्यंग्य का परमाणु बम’ है! पढ़िए मग्गू भाई की कई ऐसी ‘कतई जहर’ लीलाएं जो पुलिस-प्रशासन की ‘पैंट गीली’ करने के लिए काफी हैं।

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार जितेन्द्र ने सेठ जी को जिस अंदाज़ में लपेटा है, उसे पढ़कर लगता है— सच अगर व्यंग्य बन जाए, तो सत्ता को भी आईना दिखा देता है।

क्रशर कांड: मौत नहीं, मोक्ष है गुरु!

पब्लिक सोचती है कि बरियों वाले आदिवासी शिव नारायण की मौत क्रशर में दबने से हुई। अरे हटाओ यार! चिट्ठी में साफ लिखा है कि यह तो बंदे का ‘सौभाग्य’ था। 
उसने मरने के लिए मग्गू सेठ का ही क्रशर चुना, इसे ‘आत्महत्या’ या हादसा बोलना पुलिस की नासमझी है।
भाई के क्रशर में जान देना मतलब सीधा स्वर्ग का टिकट! पुलिस फालतू में केस-वेस का लोड ले रही है।

सबूतों का क्या? अरे, पूरा ऑफिस ही ‘फूंक’ डाला!

भाई का गेम देखो, एकदम ओपी (OP) लेवल! खनिज विभाग में करोड़ों का घोटाला हुआ तो टेंशन नहीं ली।
सबूत छुपाने के लिए फाइल-वाइल नहीं गायब की, सीधे बलरामपुर खनिज ऑफिस में ही आग लगवा दी। 
पत्रकार लिखता है कि सरकारी फाइलों को ‘अग्नि को समर्पित’ करना अपराध नहीं, बल्कि एक पवित्र ‘यज्ञ’ है। सबूतों का ऐसा हवन किया कि राख भी नहीं मिली!

पुलिस ‘लुका-छिपी’ खेल रही, सेठ जी घर में ‘पार्टी’ कर रहे!
इसे कहते हैं असली स्वैग (Swag)! पुलिस का कहना है कि मग्गू सेठ और उनका भाई प्रवीण अग्रवाल ‘फरार’ हैं।
लेकिन अंदर की खबर यह है कि ये दोनों ‘वांटेड’ मुजरिम जून/जुलाई 2025 में अपने ही घर में शादी की सालगिरह मना रहे थे और दावत उड़ा रहे थे। 
पुलिस बेचारी देश-विदेश में ढूंढ रही है और भाई घर पर बिरयानी पेल रहे हैं। इसे कहते हैं पुलिस और अपराधी का ‘अटूट लव’।

मुफ्त ‘मुक्ति धाम’ (मौत का कुआं)

भाई की समाजसेवा तो देखिए— मवेशियों और इंसानों दोनों के लिए गहरे कुएं खुदवाए गए हैं, जिनकी गहराई इंची टेप भी न नाप सके।
मवेशी गिरकर मर जाएं, इंसान फांसी लगाकर आत्महत्या कर लें—तो इसे हादसा मत कहिए, यह सेठ जी द्वारा दी गई निःशुल्क अंतिम यात्रा सुविधा है। कितने महान विचार हैं गुरु!

आदिवासियों का ‘कल्याण’ — जमीन हड़प योजना!
भाई ने आदिवासियों की जमीन हड़पकर ऐसा पुण्य कमाया है कि धर्मराज भी कन्फ्यूज हों जाए!
कमला देवी (पति रीझन) जैसी कई आदिवासी महिला-पुरुष के नाम पर बेनामी संपत्ति— ताकि उनका नाम इतिहास में दर्ज हो जाए।
पहाड़ी कोरवाओं की जमीन छीनी जा रही है ताकि उन्हें “वापस जंगल भेजा जा सके”— क्योंकि शहर की गंदी हवा उन्हें सूट नहीं करती।
वाह! विकास हो तो ऐसा।

पत्रकारिता का ‘शुद्धिकरण’

77 साल की आज़ादी के बाद भी पत्रकार सुरक्षा कानून नहीं बना— और इसी कमी का सबसे सुंदर उपयोग मग्गू सेठ जैसे लोग कर रहे हैं।
जो पत्रकार सेठ जी की महिमा नहीं गाता, उसे भाई साहब अपने नेटवर्क और स्थानीय पुलिस के सहयोग से झूठे केस में जेल भिजवा देते हैं।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को तिजोरी के नीचे दबाकर रखना उनका शौक है— और पुलिस का सराहनीय सहयोग। भाई का स्वैग ही अलग है।

रोज़गार सृजन का ‘अद्वितीय मॉडल’

भाई द्वारा संचालित सरगुजा संभाग का सबसे बड़ा खनन संस्थान— महामाया स्टोन क्रशर—
सेठ जी के फरार होने पर सील हुआ, लेकिन कलेक्टर और खनिज विभाग की दूरगामी दया दृष्टि से फिर चालू हो गया।
यह है कानून-मुक्त रोज़गार मॉडल।
पत्रकार ने तो निवेदन किया है ऐसे क्रशर पूरे छत्तीसगढ़ में खोले जाएं ताकि युवाओं को नियमों से मुक्त रोजगार मिले और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना साकार हो।

क्राइम कुंडली ऐसी कि यमराज भी कन्फ्यूज

2009 से 2025 तक थाना राजपुर और बरियों में मुकदमों की कतार—

2020: गैर-इरादतन हत्या (304-II)
2015: अपहरण (365, 342)
बलवा, मारपीट, गाली-गलौज — रोज़ का नाश्ता

सिस्टम का ‘मोय-मोय’

पत्र का सार बिल्कुल साफ है—
“राजा राज करेगा और जुल्म बार-बार करेगा।”
इसलिए जनहित (यानी सेठ-हित) में निवेदन है कि:
राजस्व, खनिज और प्रशासन के सभी अधिकारियों को राष्ट्रीय सम्मान दिया जाए, वेतन 100% बढ़ाया जाए।
मग्गू सेठ और प्रवीण अग्रवाल पर लगे सभी आरोप तत्काल खारिज किए जाएं।
उल्टा, शिकायत करने वाले आदिवासियों और पत्रकारों को गिरफ्तार किया जाए।

जो पुलिसकर्मी गलती से भी सेठ जी पर कार्रवाई सोचें, उन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाए— ताकि ‘सुविधा शुल्क’ निर्बाध चलता रहे।
और अंत में पत्रकार ने भारत के राष्ट्रपति जी से निवेदन किया है कि महोदया, आप इस “व्यंग्यात्मक सत्य” को समझेंगी।

अब देखना यह है कि दिल्ली वाला सिस्टम इस लोकल डॉन की हेकड़ी निकालता है, या फिर यह फाइल भी ठंडे बस्ते में मोक्ष पा जाती है।

सूरजपुर: बाघ की मौत पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर सरकार और वन विभाग को जारी किया नोटिस…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में स्थित तमोर पिंगला अभयारण्य में एक बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब कानूनी तूल पकड़ लिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और वन विभाग के आला अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायालय ने जताई गहरी चिंता
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि प्रदेश में राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा में चूक एक गंभीर विषय है। कोर्ट ने इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज करते हुए निम्नलिखित पक्षों से जवाब मांगा है:
* प्रमुख सचिव (वन विभाग)
* प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF – वन्यजीव)
* सूरजपुर वन मंडल के संबंधित अधिकारी


क्या है पूरा मामला?
दो दिन पूर्व 15 दिसंबर को सूरजपुर के तमोर पिंगला अभयारण्य क्षेत्र में एक बाघ का शव बरामद हुआ था। शुरुआती जांच में बाघ के अंगों के साथ छेड़छाड़ और संदिग्ध परिस्थितियों ने शिकार की ओर इशारा किया था। हालांकि वन विभाग ने जांच की बात कही थी, लेकिन कोर्ट ने विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए हैं।


जारी नोटिस के मुख्य बिंदु:


* पोस्टमार्टम रिपोर्ट : कोर्ट ने बाघ की मौत का सटीक कारण और विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
* सुरक्षा ऑडिट: अभयारण्य में तैनात कर्मचारियों की संख्या और गश्त (Patrolling) की मॉनिटरिंग कैसे की जा रही है, इसका ब्यौरा मांगा गया है।
* लापरवाही पर कार्रवाई: घटना के समय तैनात जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।


“वन्यजीवों का संरक्षण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि संरक्षित क्षेत्रों में भी बाघ सुरक्षित नहीं हैं, तो यह तंत्र की विफलता है।” – हाइकोर्ट की मौखिक टिप्पणी



आगे क्या होगा?

वन विभाग को अब एक निश्चित समय सीमा के भीतर कोर्ट में अपना शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट बाघों के संरक्षण के लिए कुछ कड़े दिशा-निर्देश भी जारी कर सकता है।

भालू तो पकड़ा गया, मगर अब सवाल डीएफओ पर कार्यवाही कब…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : तीन महीने तक मनेंद्रगढ़ शहर के क्षेत्रों में दहशत का कारण बने भालू को आखिरकार पकड़ लिया गया लेकिन इस पूरी घटना के बाद    वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि भालू तो पकड़ में आ गया, मगर अब इससे भी बड़ी जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
आरोप है कि पिछले तीन महीनों तक डीएफओ द्वारा न तो कोई ठोस पहल की गई और न ही भालू को पकड़ने के लिए प्रभावी रणनीति बनाई गई। न विभागीय बैठक बुलाई गई, न ही कर्मचारियों-अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए। परिणामस्वरूप आम जनता भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर रही।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित नहीं हुईं, तब तक वन विभाग सक्रिय नहीं हुआ। हिंद स्वराज पेपर में खबर प्रकाशित होने के बाद 24 घंटे के भीतर भालू को पकड़ लिया गया, जिससे विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं
  और डीएफओ के तबादले की मांग । प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है, जिसकी कीमत जनता ने डर और असुविधा झेलकर चुकाई।
जनता और सामाजिक संगठनों की मांग है कि शासन अब इस मामले को गंभीरता से ले और डीएफओ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही समय पर निर्णय न लेने वाले अधिकारियों का तबादला किया जाए, ताकि भविष्य में वन्यजीवों से जुड़ी ऐसी घटनाएं “तमाशा” न बनें।
लोगों का कहना है कि शासन को दो साल होने जा रहे हैं, अब वास्तविक बदलाव नजर आना चाहिए। जिम्मेदारी तय होगी तभी व्यवस्था सुधरेगी और आगे से किसी भालू या अन्य वन्यजीव को लेकर जनता को इस तरह परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

खबर का असर: हिंद स्वराष्ट्र में खबर छपते ही 24 घंटे के भीतर पकड़ा गया भालू…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : मनेंद्रगढ़ शहर में पिछले तीन महीनों से भालू की दहशत से लोग भयभीत थे। शहर के विभिन्न वार्डों में भालू की लगातार आवाजाही से आमजन में डर का माहौल बना हुआ था। इस दौरान वन विभाग की टीमें भालू को पकड़ने के प्रयास में लगी रहीं, अन्य अखबारों में भी लगातार खबरें प्रकाशित होती रहीं, लेकिन न तो भालू पकड़ा जा सका और न ही जिम्मेदार अधिकारियों डीएफओ व रेंजर पर कोई कार्रवाई या तबादला हुआ।
स्थानीय नागरिकों द्वारा कई बार धरना-प्रदर्शन किए गए। बताया गया कि भालू को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उचित स्थान पर छोड़ने के लिए वन विभाग के पांच डिवीजन तक सक्रिय थे, फिर भी लंबे समय तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली।
आखिरकार हिंद स्वराष्ट्र समाचार पत्र में मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया। खबर प्रकाशित होने के महज 24 घंटे के भीतर वन विभाग की टीम ने भालू को पकड़ लिया। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली और शहर में सामान्य स्थिति बहाल हुई।


स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पहले ही गंभीरता दिखाई जाती, तो महीनों तक लोगों को भय में नहीं रहना पड़ता। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मीडिया की भूमिका प्रशासन को जवाबदेह बनाने में अहम है और समय पर उठाई गई आवाज से ही परिणाम सामने आते हैं।

सरगुजा कलेक्टर समेत 11 IAS अधिकारियों के तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर :सरगुजा जिले के कलेक्टर भोसकर विलास संदीपान समेत 11 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। अजीत बंसल को सरगुजा जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया हैं।

देखें आदेश :

भालू के आतंक पर सियासत गरम, फिर भी नहीं हटें डीएफओ–रेंजर,, मनेंद्रगढ़ वन मंडल को किसका  संरक्षण? उठ रहे गंभीर सवाल….

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : वन मंडल मनेंद्रगढ़ में डीएफओ और संबंधित रेंजर को हटाने के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों ने हर संभव प्रयास किए, लेकिन अब तक शासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है। इससे यह सवाल लगातार गहराता जा रहा है कि आखिर डीएफओ और रेंजर के ऊपर किसका संरक्षण है, जो इतने बड़े जनआक्रोश के बावजूद वे अपने पद पर बने हुए हैं।
बताया जा रहा है कि बीते तीन महीनों से मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में भालू का आतंक बना हुआ है। गांवों और आसपास के इलाकों में भालू के हमलों से दहशत का माहौल है। इस दौरान कई नगर के वार्डों में  भालू ने हमला किया, जिनमें अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से न तो समय पर ठोस कदम उठाए गए और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई।
हालात तब और बिगड़ गए जब सत्ता पक्ष की चुप्पी के बाद विपक्ष ने मोर्चा संभाला। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
डीएफओ कार्यालय का घेराव
रेंजर कार्यालय का घेराव
थाने में धरना-प्रदर्शन
जैसी कई बड़ी कार्रवाइयाँ की गईं।
इसके बावजूद भी शासन स्तर पर डीएफओ और रेंजर को हटाने में विफलता सामने आई है। स्थानीय जनता और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि जब इतने लंबे समय से भालू के हमले जारी हैं और प्रशासनिक लापरवाही स्पष्ट है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
नगर वीडियोका कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग ने प्रभावी कदम उठाए होते, तो इतने हमले नहीं होते। अब जनता में रोष बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

घुई रेंज में बाघ का मिला शव, दांत और नाखून गायब, बाघ की मौजूदगी को ट्रेस करने में भी नाकाम रही वन विभाग की टीम…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सूरजपुर जिले के घुई रेंज में एक बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई हैं। बाघ के शरीर पर चोटों के निशान मिले हैं। बाघ के शव से दांत और नाखून गायब हैं। आशंका जताई जा रही है कि बाघ शिकारियों द्वारा फैलाए गए जाल में फंस गया होगा। टाइगर रिजर्व में टाइगर की मौत और उसकी उपस्थिति की जानकारी वन विभाग को ना होना लापरवाही को उजागर करता है और वन विभाग के कार्य प्रणाली पर पड़े प्रश्न चिन्ह खड़े कर रहा है।


दरअसल गुरु घासीदास-तमोर-पिंगला टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले घुई रेंज में आज सुबह एक बाघ का शव ग्रामीणों ने देखा और इसकी सूचना वन विभाग को दी। बाघ के दांत और नाखून मौके से गायब मिले हैं। आशंका है कि ग्रामीणों द्वारा शिकार के लिए लगाए गए फंदे में बाघ फंस गया था, जिससे उसकी मौत हो गई होगी और मौत के बाद शिकारियों ने उसके दांत और नाखून निकाल लिए होंगे। हालांकि इस मामले में वन विभाग के अधिकारी अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इस मामले में अब तक आधिकारिक रूप से कोई भी बयान सामने  नहीं आया है। इससे पूर्व भी वन परिक्षेत्र अधिकारी पर रेंज से बाहर रहने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन विभाग द्वारा इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया जिसका खामियाजा भारत के राष्ट्रीय पशु बाघ की मौत से चुकाना पड़ रहा है।

बाघ की मौजूदगी की खबर शिकारी को तो हुई पर वन विभाग को नहीं मिली

उल्लेखनीय हैं कि घुई वन परिक्षेत्र का एक बड़ा इलाका गुरु घासीदास-तमोर-पिंगला टाइगर रिजर्व में शामिल किया गया है। यहां बाघों की आवाजाही पहले भी होती रही है। जिस बाघ की मौत हुई है, वह वन विभाग द्वारा ट्रेस नहीं किया गया था। वन परिक्षेत्र में बाघ दिनदहाड़े घूम रहा था इसकी जानकारी वन विभाग को ना होना बहुत बड़ी लापरवाही को उजागर कर रही है।  कयास लग रहे हैं कि बाघ वाड्रफनगर या बिहारपुर वन परिक्षेत्र से होकर घुई रेंज में पहुंचा था। बाघ की उपस्थिति और बाघ कहां से कैसे और कब इस क्षेत्र में पहुंचा इसकी जानकारी वन विभाग को नहीं है। टाइगर रिजर्व में टाइगर की मौत काफी बड़े लापरवाही को दर्शा रही हैं।

फिलहाल वनविभाग के अधिकारियों द्वारा बाघ का पोस्टमॉर्टम पशु चिकित्सकों की टीम से कराया हैं और पोस्टमॉर्टम के बाद बाघ के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया हैं।

जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में वर्षों से जमे अधिकारी–कर्मचारी, तबादलों की उम्मीद पर फिरता पानी…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक आज भी अपनी कुर्सियों पर जमे हुए हैं। स्थानीय जनता में यह चर्चा आम है कि कुछ बाबू और अधिकारी “अजगर की तरह” वर्षों से एक ही जगह कुंडली मारकर बैठे हैं, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है।
छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद आम जनता को उम्मीद थी कि विभागों में लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला किया जाएगा, ताकि नई कार्यसंस्कृति और निष्पक्ष प्रशासन स्थापित हो सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, जनपद पंचायत में कई ऐसे कर्मचारी और अधिकारी हैं जो बरसों से एक ही जगह पदस्थ हैं। इससे न केवल भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ती हैं, बल्कि आम नागरिकों के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “पुराने चेहरे” ही फैसले लेते हैं और आम जनता की समस्याएं वहीं की वहीं रह जाती हैं।
जनता अब शासन और जिला प्रशासन से मांग कर रही है कि जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची बनाकर शीघ्र तबादला किया जाए, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता आए और विकास कार्यों को गति मिल सके।
अब देखना यह होगा कि जनता की इस आवाज़ पर शासन–प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है, या फिर ये अधिकारी–कर्मचारी यूं ही वर्षों तक एक ही जगह जमे रहेंगे।

प्राइवेट गाड़ियों में ‘छत्तीसगढ़ शासन’ लिखकर अधिकारी-कर्मचारी कर रहे पद का दुरुपयोग…!

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी किशन देव शाह : जिले में सरकारी रौब दिखाने के लिए कुछ अधिकारी और कर्मचारी प्राइवेट वाहनों पर “छत्तीसगढ़ शासन” लिखकर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह न केवल मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता और प्रशासन दोनों को भ्रमित करने वाला गंभीर मामला भी है।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि कई बार ऐसे वाहन सड़क पर बेतरतीब तरीके से चलते हैं, ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते और “सरकारी” लिखे होने का फायदा उठाकर जांच से बचने की कोशिश करते हैं।
जनता का कहना है कि “सरकारी दर्जा लेने के लिए या दबाव बनाने के लिए अधिकारी-कर्मचारी निजी गाड़ियों पर शासन लिखाते हैं, जो सीधा-सीधा पद का दुरुपयोग है।”
प्रशासन से सख्ती की मांग
स्थानीय सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने जिला प्रशासन से ऐसे वाहनों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

अम्बिकापुर में भूमि की नई गाइडलाइन दरें लागू : वैज्ञानिक युक्तिकरण से बाजार मूल्य के अनुरूप निर्धारण, किसानों और आमजन को होगा लाभ…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ में भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य को प्रतिबिंबित करने और वर्षों से चली आ रही विसंगतियों को दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 की नई गाइडलाइन दरें लागू कर दी गई हैं। “छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000” के प्रावधानों के तहत उप जिला एवं जिला मूल्यांकन समितियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर स्थावर संपत्तियों के बाजार मूल्य निर्धारण से संबंधित इन दरों को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड, छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। नई गाइडलाइन दरें दिनांक 20 नवंबर 2025 से पूरे राज्य में प्रभावशील हो चुकी हैं।
वर्ष 2019-20 के बाद लगभग छह वर्षों के अंतराल पर गाइडलाइन दरों का यह व्यापक पुनरीक्षण किया गया है। इस अवधि में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों के बीच उल्लेखनीय अंतर उत्पन्न हो गया था। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए वैज्ञानिक, तथ्यपरक और तुलनात्मक पद्धति अपनाते हुए नई दरें निर्धारित की गई हैं। इसका उद्देश्य भूमि के वास्तविक मूल्य को सामने लाना, संपत्ति लेन-देन को पारदर्शी बनाना तथा किसानों और आम नागरिकों को उनकी संपत्ति का उचित मूल्य सुनिश्चित कराना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2025-26 की गाइडलाइन दरों में मुख्य मार्ग पर औसतन 108 प्रतिशत तथा मुख्य मार्ग से अंदर स्थित भूमि पर औसतन 120 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरगुजा जिले में ऐसे 16 ग्राम हैं, जहां मुख्य मार्ग की हेक्टेयर दर में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि परिलक्षित हो रही है। इसका मुख्य कारण एक ही मार्ग से जुड़े समीपस्थ ग्रामों की दरों का युक्तियुक्तकरण है। जिन ग्रामों की पूर्व दरें अत्यंत कम थीं, वहां संतुलन स्थापित करने के कारण अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि दिखाई दे रही है।
उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2019-20 की गाइडलाइन के अनुसार सरगुजा जिले के ग्राम झिरमिटी में मुख्य मार्ग की दर 11 लाख 67 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर थी, जबकि समीप स्थित ग्राम उदयपुर में यह दर 20 लाख 19 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित थी। दोनों ग्राम राष्ट्रीय राजमार्ग-143 के आमने-सामने स्थित हैं। दरों के युक्तियुक्तकरण के बाद झिरमिटी का मुख्य मार्ग दर 20 लाख 19 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तय किया गया, जिससे वहां 587 प्रतिशत की वृद्धि परिलक्षित हुई, जबकि उदयपुर में 297 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि अधिक वृद्धि का कारण कम आधार दरों को समान स्तर पर लाना है।
इसी तरह ग्राम सायरराई में मुख्य मार्ग की दर में 824 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह ग्राम विकसित क्षेत्र में स्थित है और विशेष ग्राम रघुनाथपुर से लगा हुआ है। पूर्व में यहां वर्गमीटर दर लागू होने के कारण राजस्व की हानि हो रही थी। हेक्टेयर दर लागू किए जाने और अधिक क्रय-विक्रय गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए दरों का युक्तियुक्तकरण आवश्यक हो गया था। ग्राम किशुननगर के उदाहरण से यह भी स्पष्ट होता है कि नई गाइडलाइन लागू होने के बाद भी शासन को अपेक्षाकृत कम राजस्व प्राप्त हो रहा है, जिससे यह सिद्ध होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में की गई वृद्धि तार्किक और न्यायसंगत है।
शहरी क्षेत्रों में भी गाइडलाइन दरों का व्यापक पुनरीक्षण किया गया है। नगर निगम अंबिकापुर के 48 वार्डों में मुख्य मार्ग पर औसतन 26 प्रतिशत तथा मुख्य मार्ग से अंदर औसतन 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पिछले पांच वर्षों में जनसंख्या वृद्धि, आवासीय भूखंडों की बढ़ती मांग और विकास कार्यों के विस्तार के कारण नगर निगम क्षेत्र में बाजार मूल्य में स्वाभाविक बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2019-20 की गाइडलाइन में कई क्षेत्रों को अन्य श्रेणी में दर्शाया गया था, जो वर्तमान में पूर्णतः आवासीय क्षेत्रों में परिवर्तित हो चुके हैं। इन्हें समाप्त कर संबंधित वार्डों की दरों से युक्तियुक्तकरण किया गया है, जिससे कुछ वार्डों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि वर्तमान दरें अभी भी सर्वे आधारित बाजार दरों से कम बनी हुई हैं।
नगर निगम अंबिकापुर के वार्ड क्रमांक 02 गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर वार्ड की एक कंडिका में 69 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, क्योंकि पूर्व गाइडलाइन में यहां की दर अत्यंत कम थी। वर्ष 2025-26 की गाइडलाइन में इसे बढ़ाकर 560 रुपये प्रति वर्गफुट किया गया है। इसी प्रकार कुछ अन्य वार्डों में 40 से 70 प्रतिशत तक की वृद्धि कंडिकाओं के सरलीकरण, दरों के युक्तियुक्तकरण तथा क्षेत्रों के विकसित और व्यवसायिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए की गई है।
नगर निगम क्षेत्र में शामिल ग्राम गंगापुर, नवागढ़ और बिशुनपुर की पूर्व हेक्टेयर दरें आसपास के ग्रामों की तुलना में काफी कम थीं। वर्ष 2025-26 की गाइडलाइन में इन्हें बढ़ाकर 1 करोड़ 10 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर किया गया है, जो लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इसके साथ ही पेरी-अर्बन ग्रामों में वर्गमीटर दर समाप्त कर हेक्टेयर दर लागू की गई है। निर्देशानुसार नगर निगम क्षेत्र से लगे ग्रामों की हेक्टेयर दर पेरी-अर्बन ग्रामों से कम नहीं होनी चाहिए, इसी कारण कुछ ग्रामों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
नई गाइडलाइन दरें पंजीयन अधिकारियों द्वारा विस्तृत परीक्षण, विश्लेषण और तुलनात्मक अध्ययन के बाद निर्धारित की गई हैं। इनका उद्देश्य किसानों और आम जनता को उनकी भूमि एवं संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य दिलाना, भूमि लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना तथा बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों के बीच लंबे समय से बने अंतर को कम करना है। शासन का विश्वास है कि यह नई व्यवस्था आम जनता के हित में है और राज्य के संतुलित तथा समावेशी विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान करेगी।

लांजित में मिनी फुटबॉल टूर्नामेंट का भव्य समापन, कोढापुरूवा ने खिताब जीता…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/ओढ़गी : ग्राम पंचायत लांजित में पिछले एक सप्ताह से आयोजित ग्राम स्तरीय मिनी फुटबॉल टूर्नामेंट का आज रोमांचक समापन हुआ। फाइनल मुकाबला लांजित खोहपारा और कोढापुरूवा की टीमों के बीच खेला गया, जिसमें कोढापुरूवा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 1–0 से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया।

फाइनल मैच के अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच धरम सिंह आयम ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि
“खेल हमें अनुशासन, टीमवर्क और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का संदेश देता है। गांव के युवा खेल के माध्यम से आगे बढ़ें, यह हम सबकी जिम्मेदारी है।”

इस आयोजन में गांव के युवाओं और ग्राम प्रतिनिधि ग्रामवासियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा जिससे पुरे मैच में आदेश्वर गुर्जर लेफरी का  महत्वपूर्ण भुमिका रहा युवाओं की मेहनत, अनुशासन और लगन से टूर्नामेंट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पूरे सप्ताह खिलाड़ियों और दर्शकों में खेल के प्रति खास उत्साह देखने को मिला।

अंत में विजेता टीम को ट्रॉफी प्रदान की गई और रनर-अप टीम को भी सम्मानित किया गया। ग्रामवासियों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे खेल आयोजन गांव में ऊर्जा और एकता को मजबूत करते हैं।

मित्तल कोल्ड स्टोरेज के लापरवाही ने ले ली तीन मजदूरों की जान स्टोरेज की दीवार गिरने से हुई मौत…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : जिले के नैनपुर स्थित मित्तल राइस मिल (एवं कोल्ड स्टोरेज) में आज सुबह करीब 10 बजे एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया। मिल परिसर में अचानक दीवार गिरने से तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया।
इस हादसे में मृतकों की पहचान
होल सिंह (30 वर्ष),
माने राजवाड़े (28 वर्ष) तथा
वेद सिंह (45 वर्ष) के रूप में हुई है।
वहीं सुरेंद्र सिंह (25 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है। तीनों मृतक एवं घायल मजदूर सूरजपुर जिले के निवासी हैं।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ हैं। मिल में मौजूद अन्य कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने घायलों को मलबे से बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मृतकों के शवों को परिजनों की उपस्थिति में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

इसी बीच राइस मिल के अन्य कर्मचारियों से मिली जानकारी ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि राइस मिल में शासन द्वारा निर्धारित किसी भी सुरक्षा गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा था।

यह भी बताया गया कि राइस मिल संचालक की ओर से मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए थे, जिसके चलते यह हादसा और भी गंभीर बन गया।

घटना के बाद मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा हैं। स्थिति को नियंत्रित रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस बल मौके पर मुस्तैद हैं।

सूरजपुर जिले के सभी थानों और चौकियों का पुलिस बल घटनास्थल पर तैनात किया गया हैं।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर, कलेक्टर एस. जयवर्धन, साथ ही सूरजपुर एसडीएम शिवानी जायसवाल, तहसीलदार सूर्यकांत साय एवं अन्य जिला प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे।

वही स्थानीय सरपंच पति (सुखल सिंह) एवं परिवार जनों का कहना है कि इस मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जानी चाहिए तथा जो भी इस घटना का जिम्मेदार होता है उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, वही परिवारजन उचित मुआवजे की मांग करते हुए यह भी कहा कि अगर मुआवजे की राशि समय पर उन्हें नहीं दिया जाता है तो वह उग्र आंदोलन करने को बाधित होंगे।

प्रशासन की प्रारंभिक जांच में दीवार के जर्जर और कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं अब यह भी जांच का विषय है कि राइस मिल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई या नहीं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद यदि राइस मिल संचालक की लापरवाही पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मूक बधिर विद्यालय का मामला फिर गरमाया, जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाकर शिवसेना ने दिया ज्ञापन…             

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : ज्ञानोदय मुखबधिर विद्यालय विश्रामपुर का मामला थमने का नाम नही ले रहा है।पहले जहां इस विद्यायल के प्रबंधन पर विद्यालय परिसर में दिव्यांगों बच्चों से मजदूरी कराने के साथ कई आरोप लग चूके है और बच्चों से काम कराने का वीडियो भी वारयल हुआ था जिसपर कई विभागों की जांच जारी है। वहीं अब विद्यायल के संचालक पर धमकी देने सहित गुंडागर्दी कराने के गम्भीर आरोप लगे है। दरअसल बिते दिनों जिले के बिश्रामपुर क्षेत्र में संचालित ज्ञानोदय मुकबधिर विद्यालय में मुकबधिर बच्चों का काम करते व पेड़ काटने का कार्य करते हुए विडियो वायरल हुआ था। जिसको लेकर कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा श्रम व बाल संरक्षण विभाग के द्वारा मामले में जांच कि जा रही है। वही बच्चों से श्रम कराये जाने के मामले में जांच व मुकबधिर स्कूल के संचालन के संबंध में जांच हेतु शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) गुट के द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन सौंप मामले में जांच व कार्यवाही की मांग की गई थी।जिसके बाद आज शिवसेना के जिला अध्यक्ष विष्णु वैष्णव अपने समर्थकों के साथ आज पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे और उन्होंने ज्ञानोदय मुकबधिर विद्यालय के संचालक विजयराज अग्रवाल के ऊपर उनकी अनुपस्थिति में घर पर गुर्गों को भेज उनकी पत्नी को धमकाने सहित मामले से दुर रहने नसीहत देने के गम्भीर आरोप लगाए है। जिससे नाराज सैकड़ों की संख्या में शिव सैनिक उग्र रूप दिखाते हुए आज सँयुक्त कार्यालय पहुँचे और उन्होंने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंप मामले में कार्यवाही करने की मांग की साथ ही उन्होंने किसी शिव सैनिक के उपर कुछ भी घटना घटित होने पर  ज्ञानोदय मुकबधिर विद्यालय के संचालक विजयराज अग्रवाल से जोड़ने की बात कही और यदि 15 दिवस में संबंधित पर कार्यवाही नहीं होने पर आंदोलन और धरना प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है। वहीं  पुलिस शिकायत के बाद अब  मामले में जांच कर उचित कार्यवाही करने की बात कर रही है। 

ज्ञापन सौपनें वालों में शिवसेना जिला प्रमुख विष्णु वैष्णव, महिला जिलाध्यक्ष पिंकी पटेल, प्रेमनगर ग्रामीण जिला प्रमुख हेमंत महंत, जिला सचिव डॉ.आर एस , नगर प्रमुख सूरजपुर साहिल, ब्लॉक प्रमुख सूरजपुर मोहन सिंह टेकाम, जिला प्रवक्ता मनेश दिवेदी, गौतम कुमार, रजनी सिंह, कौशल्या राजवाड़े, बालकुंवर, कलावती, अनिता अन्य शिवसैनिकगण शामिल रहे।

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