हिंद स्वराष्ट्र : आज के आधुनिक जीवन में बदलती खान-पान की आदतों और भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण मधुमेह (डायबिटीज) तेजी से फैलने वाली बीमारियों में शामिल हो गई है। पहले यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के युवाओं और बच्चों में भी इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते इस बीमारी के प्रति जागरूकता न बढ़ाई गई तो यह आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। इसके पीछे असंतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, तनाव और आनुवंशिक कारण प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इस बीमारी के लक्षणों में बार-बार प्यास लगना, जल्दी थकान होना, बार-बार पेशाब आना, घाव का देर से भरना और अचानक वजन कम होना शामिल हैं।
बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है। इसके लिए लोगों को संतुलित आहार लेना चाहिए, जिसमें हरी सब्जियां, फल और रेशेदार खाद्य पदार्थ अधिक हों। मीठे पदार्थों और जंक फूड का सेवन कम करना चाहिए। रोजाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम या पैदल चलना भी बहुत जरूरी है। इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना और शरीर के वजन को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।
मधुमेह होने पर कैसी हो जीवनशैली
यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह हो जाए तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सही जीवनशैली अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। मरीज को नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेनी चाहिए और समय-समय पर शुगर की जांच करवानी चाहिए। भोजन में कम चीनी, कम तेल और अधिक पौष्टिक आहार लेना चाहिए। नियमित योग और हल्का व्यायाम करना भी बहुत लाभदायक होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाकर मधुमेह जैसी बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि समाज का हर व्यक्ति इस बीमारी के प्रति जागरूक हो और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखे।

