हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद की भारी-भरकम राशि में हुए बहुचर्चित वित्तीय घोटाले और फर्जीवाड़े के मामले में न्यायपालिका ने बहुत कड़ा और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अम्बिकापुर गुलापन राम यादव की अदालत ने भ्रष्टाचार और अनियमिताओं के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले प्रार्थी अभयनारायण पाण्डेय की याचिका पर यह आदेश पारित किया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व जनपद पंचायत CEO सुरेश्वर नाथ तिवारी समेत 9 आरोपियों के खिलाफ थाना सिटी कोतवाली में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर विधिवत विवेचना करने और अदालत में अभियोग पत्र प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है।
स्वामी आत्मानंद कॉलेज के सौंदर्यीकरण और निर्माण के नाम पर हुआ करोड़ों का फर्जीवाड़ा
यह पूरा मामला केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय में डीएमएफ (DMF) मद से स्वीकृत तीन बड़े विकास कार्यों से जुड़ा है। जिला कलेक्टर कार्यालय द्वारा 31 मार्च 2023 को इन कार्यों के लिए कुल ₹1,32,33,000/- की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी:
1. गार्डन का सौंदर्यीकरण एवं सीसी रोड निर्माण: ₹33,24,000/-
2.प्रथम तल पर प्रयोगशाला, पुस्तकालय नवीनीकरण एवं आहाता निर्माण: ₹49,57,000/-
3.भू-तल पर प्राचार्य कक्ष, ऑफिस नवीनीकरण, प्रवेश द्वार एवं पार्किंग शेड: ₹49,52,000/-
अदालत में पेश परिवाद और दस्तावेजों के अनुसार, इन सभी कार्यों के लिए ग्राम पंचायत केशवपुर को निर्माण एजेंसी बनाया गया था और नियमों के तहत पारदर्शी निविदा (Tender) या जेम पोर्टल (GEM) के जरिए प्रक्रिया अपनाई जानी थी। किंतु तत्कालीन जनपद CEO सुरेश्वर नाथ तिवारी और अन्य अधिकारियों ने सांठगांठ कर सभी नियमों को ताक पर रख दिया और पूरी राशि अपने चहेते निजी फर्मों—मेसर्स अनन्या कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स तथा मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन बिल्डर्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स—को मनमाने तरीके से आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से ट्रांसफर कर दी।
जांच समिति की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल
शिकायत के बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच समिति (जिसमें संयुक्त कलेक्टर राम सिंह ठाकुर, कार्यपालन अधिकारी वीरेन्द्र कुमार सिंह, अतिरिक्त CEO नेहा सिंह और सहायक कोषालय अधिकारी मनोज कुमार शर्मा शामिल थे) की कार्रवाई पर भी सवाल उठे हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में माना कि जांच समिति के कुछ सदस्यों ने प्रथम दृष्टया अनियमितताओं को उजागर किया, परंतु जांच के दौरान आरोपियों को बचाने और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर परस्पर विरोधी एवं लीपापोती वाला प्रतिवेदन तैयार करने का प्रयास किया गया। हालांकि, अदालत ने जांच दल के सदस्यों को सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य से मुक्त रखा, लेकिन क्रमांक 1 से 9 तक के मुख्य आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का मामला स्पष्ट रूप से पाया।
किन-किन आरोपियों के खिलाफ दर्ज होगी FIR?
अदालत के आदेश के परिपालन में थाना सिटी कोतवाली अम्बिकापुर को जिन 9 आरोपियों के विरुद्ध BNS एवं IPC की गंभीर धाराओं (धारा 34, 120B, 409, 420, 467, 468, 471) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया है, वे इस प्रकार हैं:
1. सुरेश्वर नाथ तिवारी – सेवानिवृत्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत अम्बिकापुर
2. विवेक प्रताप सिंह राठौर – उप अभियंता (Sub Engineer), जनपद पंचायत अम्बिकापुर
3. उपेन्द्र सिंह सेंगर – तत्कालीन प्रभारी SDO एवं वर्तमान उप अभियंता, जनपद पंचायत अम्बिकापुर
4. शैलेन्द्र मिश्र – सहायक ग्रेड-02 (तत्कालीन लिपिक जनपद, वर्तमान शिक्षक)
5. राम प्रकाश यादव – तत्कालीन सचिव, ग्राम पंचायत केशवपुर
6.इम्तान सिंह – तत्कालीन सरपंच, ग्राम पंचायत केशवपुर
7. सुयस अग्रवाल – कार्य व्यवसायी, रायपुर
8. अरविंद कुमार अग्रवाल – मेसर्स अनन्या कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, अम्बिकापुर
9.मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन – बिल्डर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स एंड आर्किटेक्ट्स, अम्बिकापुर
माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शत्रुधन सिंह ने जोरदार पैरवी की। परिवाद पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ‘ललिता कुमारी विरुद्ध स्टेट ऑफ़ यूपी’ का हवाला देते हुए यह तर्क दिया गया कि जब संज्ञेय अपराध की सूचना पुलिस और एसपी को दी गई थी, तब अनिवार्य रूप से FIR दर्ज की जानी चाहिए थी। पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर प्रार्थी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत न्यायालय की शरण ली।
अदालत ने अपने आदेश में इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि कैसे शासकीय अमानत में खयानत (Criminal Breach of Trust), धोखाधड़ी और कूटरचना (Forgery) के जरिए करोड़ों रुपये की शासकीय निधि का बंदरबांट किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोक सेवकों को धारा 197 का संरक्षण तब मिलता है जब वे अपने पदीय कर्तव्यों का वैध निर्वहन कर रहे हों, न कि तब जब वे योजनाबद्ध साजिश के तहत वित्तीय अनियमितताओं और आर्थिक अपराध को अंजाम दें।
अब आगे क्या?
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अम्बिकापुर के इस तगड़े आदेश के बाद सरगुजा जिले के प्रशासनिक हलकों में भूचाल आ गया है। इस फैसले ने भ्रष्ट तंत्र और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों-ठेकेदारों के होश उड़ा दिए हैं। अब थाना सिटी कोतवाली पुलिस को आदेश का परिपालन करते हुए तत्काल FIR दर्ज कर विस्तृत विवेचना करनी होगी और तय समय-सीमा में न्यायालय के समक्ष चालान पेश करना होगा।



