हिंद स्वराष्ट्र मनेंद्रगढ़ किशन शाह: एमसीबी जिले के मनेंद्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात शिशु की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अविनाश खरे द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच टीम ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर परिजनों के बयान दर्ज किए और घटना से संबंधित जानकारी जुटाई। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
प्रसव के बाद दूसरे अस्पतालों में कराया गया उपचार
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, मनेंद्रगढ़ के लालपुर निवासी आमटी कुमार रवि ने 10 सितंबर 2026 को अपनी पत्नी को प्रसव के लिए 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों का कहना है कि प्रसव के बाद उन्हें नवजात के पानी पी लेने की जानकारी दी गई। इसके बाद बच्चे को बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर किया गया।
परिजनों के आरोप के मुताबिक, अंबिकापुर में जांच के दौरान एक्स-रे में नवजात के दोनों पैरों और हाथ की हड्डियों में फ्रैक्चर होने की बात सामने आई। इसके बाद बच्चे को रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान 4 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार ने उपचार के दौरान हुई घटनाओं और नवजात को आई चोटों के संबंध में सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।
शिकायत के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग
नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और थाने में शिकायत कर मामले की जांच कराने की मांग की थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे ने पांच सदस्यीय चिकित्सकीय जांच दल गठित किया। टीम ने परिजनों से बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए और घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली।
अब जांच के दौरान संबंधित अस्पतालों के चिकित्सकीय अभिलेखों, उपचार से जुड़े विवरण और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जाना महत्वपूर्ण होगा, ताकि घटना की परिस्थितियों और नवजात को आई चोटों के कारणों का पता लगाया जा सके।
लापरवाही मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन
220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है। यदि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होंगी परिस्थितियां
नवजात की मौत के इस मामले में अब जांच समिति की रिपोर्ट पर सबकी निगाहें टिकी हैं। परिजन निष्पक्ष जांच के जरिए घटना की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। जांच में चिकित्सकीय दस्तावेजों, उपचार के क्रम और संबंधित तथ्यों का परीक्षण अहम होगा। फिलहाल, जांच पूरी होने और साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और उपचार में लापरवाही हुई थी या नहीं।








