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Bank FD की तुलना में यहां मिल रहा बंपर रिटर्न, छोटे निवेशक के अमीर बनने के रास्ते पर सरकार का ग्रीन सिग्नल…

हिंद स्वराष्ट्र : छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में लगातार तीन बार बढ़ोतरी होने से डाकघर की फिक्स्ड डिपॉजिट एक बार फिर बैंक एफडी के मुकाबले में अधिक मजबूत हो गई हैं। छोटी बचत योजनाओं के तहत डाकघर में दो साल की फिक्स्ड डिपॉजिट पर 6.9 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है जो अधिकांश बैंकों की तरफ से समान मैच्योरिटी अवधि वाली जमाओं पर दी जाने वाली दर के बराबर है। रिजर्व बैंक ने मई 2022 में रेपो दर में वृद्धि का सिलसिला शुरू किया था और तब से यह चार प्रतिशत से बढ़कर 6.50 प्रतिशत हो चुकी है। इसका असर यह हुआ कि पिछले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बैंकों ने अधिक पैसा जुटाने के लिए खुदरा जमाओं पर ज्यादा ब्याज देना शुरू कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि मई 2022 से फरवरी 2023 के दौरान बैंकों की नई जमाओं पर भारित औसत घरेलू फिक्स्ड डिपॉजिट दर (डब्ल्यूएडीटीडीआर) 2.22 प्रतिशत तक बढ़ गई। वहीं वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही में बैंकों का जोर थोक जमाओं पर अधिक था, लेकिन दूसरी छमाही में उनकी प्राथमिकता बदली और खुदरा जमा जुटाने पर उन्होंने अधिक ध्यान दिया। ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना इसी का हिस्सा रहा।

छोटी बचत योजनाओं पर सरकार लेती है निर्णय
सरकार ने छोटी बचत योजनाओं (एसएसआई) के लिए ब्याज दरें अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए 0.1-0.3 प्रतिशत, जनवरी-मार्च तिमाही के लिए 0.2-1.1 प्रतिशत और अप्रैल-जून 2023 तिमाही के लिए 0.1-0.7 प्रतिशत तक बढ़ा दी थी। इसके पहले छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें लगातार नौ तिमाहियों से अपरिवर्तित बनी हुई थीं। वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही से 2022-23 की दूसरी तिमाही तक इनमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी। बता दें कि छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों का निर्णय सरकार करती है। इसका निर्धारण तुलनीय मैच्योरिटी वाली सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाले प्रतिफल से जुड़ा होता है। रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट दरें अब डाकघर फिक्स्ड डिपॉजिट दरों की तुलना में प्रतिस्पर्धी रूप से निर्धारित हैं। रिजर्व बैंक के मुताबिक, एक से दो साल की मैच्योरिटी वाली बैंक खुदरा जमा पर डब्ल्यूएडीटीडीआर फरवरी 2023 में 6.9 प्रतिशत हो गया जबकि सितंबर 2022 में यह 5.8 प्रतिशत और मार्च 2022 में 5.2 प्रतिशत था। छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर लगातार तीन बार बढ़ने के बाद द्विवर्षीय डाकघर फिक्स्ड डिपॉजिट पर अब 6.9 प्रतिशत का रिटर्न मिल रहा है। यह दर सितंबर, 2022 में 5.5 प्रतिशत थी।

SBI दे रहा 6.8 प्रतिशत का ब्याज
देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई एक साल से अधिक और दो साल से कम की जमा पर 6.8 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। वहीं दो साल से अधिक और तीन साल से कम की जमा पर एसबीआई की ब्याज दर सात प्रतिशत है। बैंकों ने मई, 2022-मार्च, 2023 के दौरान नीतिगत रेपो दर में हुई वृद्धि के अनुरूप अपनी बाहरी बेंचमार्क-आधारित ऋण दरों (ईबीएलआर) में 2.50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इस दौरान ऋण मूल्य निर्धारण के आंतरिक मानक एमसीएलआर में 1.40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

मारपीट मामले में विधायक बृहस्पत सिंह ने मानी अपनी गलती, बैंककर्मियों से चल रहा विवाद समझौते के साथ खत्म….

हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : पिछले तीन दिनों से विधायक और बैंककर्मियों के बीच चला आ रहा विवाद आज खत्म हो गया। दोनों पक्ष ने एक दूसरे माफी मांगकर विवाद को वहीं समाप्त करने का फैसला लिया। सर्किट हाउस में विधायक और बैंक कर्मचारियों को बुलाया गया था। बैठकर दोनों पक्षों ने विवाद पर सुलह करने की इच्छा जतायी। जिसके बाद विधायक बृहस्पत सिंह ने खेद जताया और अपने किये कृत्य को अनुचित बताया। उन्होंने माना कि भावावेश में उन्होंने जो कदम उठाया, वो उचित नहीं था। वहीं बैंक कर्मचारियों ने भी अपनी गलती स्वीकार की, जिसके बाद मामला खत्म हो गया। आपको बता दें कि तीन दिन पहले विधायक बृहस्पत सिंह का बैंक कर्मचारी को थप्पड़ मारते वीडियो सामने आया था। जिसके बाद बैंककर्मी और विधायक के बीच विवाद बढ़ गया। बैंककर्मियों ने जहां काम रोककर प्रदर्शन शुरू कर दिया, तो वहीं विधायक भी किसानों के साथ धरने पर बैठ गये थे। गुरुवार को विधायक ने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। किसानों के साथ अहित होगा तो वो ऐसा कृत्य करने से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि अपने किये कृत्य को दो दिन पहले तक उचित बताने वाले बृहस्पत सिंह का आज सुर बदल गया। विधायक बृहस्पत सिंह ने आज अपने कृत्य पर खेद जताया और विधायक और पीड़ित बैंककर्मी ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर मामले का अंत कर दिया है। इस बीच विधायक बृहस्पत सिंह ने मामले को लेकर खेद जताते हुए कहा कि भावावेश में आकर गलती हुई है। जिसके बाद बलरामपुर सर्किट हाउस में दोनों पक्षों में समझौता हो गया हैं।

पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्यवाही में 6 ट्रैक्टर सागौन लकड़ी सहित जेसीबी जब्त….

हिंद स्वराष्ट्र पत्थलगांव : जशपुर जिले की पत्थलगांव पुलिस ने एक घर में छापामारी करके भारी मात्रा में सागौन की लकड़ी बरामद की है। जप्त की गई सागौन की कीमत लाखों में बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार को पत्थलगांव के बेलडेगी जंगल में ग्रामीणों ने जंगल में लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी को पकड़ लिया था। ग्रामीणों ने जब लकड़ी की तस्करी कर रहे ट्रेक्टर ड्राइवर से पूछताछ की तो उसने यह सारा काम लुडेग के किसी मनोज खुटिया का होना बताया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना तत्काल पत्थलगांव पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पत्थलगांव थाना प्रभारी भास्कर शर्मा पूरे दल बल के साथ बेलडेगी जंगल पहुंचे और सागौन से भरा ट्रेक्टर और जेसीबी को जप्त कर लिया। इसके बाद पुलिस द्वारा मनोज खुटिया के घर में भी छापेमारी की गई जहां सागौन लकड़ी भारी मात्रा मे उसके घर और बाड़ी से मिली। पुलिस को करीब 6 ट्रेक्टर अवैध लकड़ियां बरामद हुई हैं। सभी लकड़ियों को जेसीबी और ट्रेक्टर के साथ थाना लाया गया है। साथ में एक व्यक्ति को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

जच्चा–बच्चा की मौत के बाद रश्मि नर्सिंग होम को प्रशासन ने किया सील…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : जिले के तिलसिवां स्थित एक निजी नर्सिंग होम में 5 अप्रैल की रात डिलीवरी के समय नवजात की मौत के कुछ घंटे बाद प्रसूता की भी मौत हो गई। इस मामले में प्रसूता के परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत थाने में की। इधर सीएमएचओ ने भी टीम गठित कर मामले में जांच का आश्वासन दिया। इन सबके बीच प्रशासन की ओर से तहसीलदार ने शाम को निजी नर्सिंग होम को सील कर दिया है, ताकि सबूतों के साथ कोई छेडख़ानी न हो।

गौरतलब है कि सूरजपुर जिले के ग्राम भुवनेश्वरपुर निवासी पूजा साहू 22 वर्ष को 3 अप्रैल को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन उसे लेकर सूरजपुर जिला चिकित्सालय पहुंचे। यहां 4 अप्रैल तक उसका इलाज चलता रहा, लेकिन स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। इस संबंध में प्रसूता के पिता ने बताया कि 4 अप्रैल को वे उसे अंबिकापुर अस्पताल ले जाने का मन बना रहे थे। इसी बीच जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉ. रश्मि कुमार ने उनसे कहा कि उनका ग्राम तिलसिवां में निजी नर्सिंग होम है, वहां अच्छी सुविधाएं हैं। नॉर्मल डिलीवरी के 15 हजार और ऑपरेशन से डिलीवरी में 35-40 हजार रुपए में हो जाएगा। वह 100 प्रतिशत नॉर्मल डिलीवरी करा देगी। डॉक्टर की यह बात सुनकर परिजनों ने उसे रश्मि नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया। यहां 10 हजार रुपए एडवांस दिया तो उसका इलाज शुरु किया गया। प्रसूता के पिता ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया कि 5 अप्रैल की सुबह 5 से 10 बजे तक बेटी को ऑपरेशन थियेटर में ले गए और नॉर्मल डिलीवरी की कोशिश की। जब नॉर्मल डिलीवरी नहीं हुआ तो ऑपरेशन किया। 12 बजे आकर डॉक्टर ने बताया कि बच्चे को हम बचा नहीं पाए लेकिन मां सुरक्षित है। इस पर हमने जैसे-तैसे संतोष कर लिया। 3 बजे बेटी से मिलने दिया गया तो वह ठीक थी। 5 बजे उसे रूम में शिफ्ट किया गया तो वह अच्छे से बोल रही थी, खाना मांगा लेकिन खाने नहीं दिया गया, सिर्फ पानी दिया गया। साढ़े 10 बजे रात में ब्लड का दूसरा बॉटल चढ़ाने के दौरान उसकी स्थिति पूरी तरह से बिगड़ गई। इसके बाद बेटी के सीने पर नर्स व डॉक्टर पंप करने लगे। इसी बीच मौत हो गई।

प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप, थाने में हुई शिकायत….

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के एक प्राइवेट नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप लगा है। जहां एक महिला और उसके बच्चे की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई है। महिला और बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने नर्सिंग होम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उसके खिलाफ कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। परिजनों का आरोप है कि नर्सिंग होम की लापरवाही के कारण महिला और उसके बच्चे की मौत हुई है। पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर लिया हैं और नर्सिंग होम पहुंच कर मामले की जांच शुरू कर दी हैं।

रेपो रेट से लेकर महंगाई पर आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा? जानें उनके बयान की 10 बड़ी बातें…

हिंद स्वराष्ट्र नई दिल्ली : रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने गुरुवार (6 अप्रैल) को वित्त वर्ष 2024 की पहली मौद्रिक पॉलिसी का एलान कर दिया है। आरबीआई गवर्नर ने रेपो रेट पर अपने फैसले और महंगाई दर व विकास दर पर अपने अनुमानों से इस बात बाजार को सरप्राइज किया है। इससे पहले अनुमान था कि एमपीसी की बैठक के बाद केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी कर सकता है। लेकिन लगातार छह बार रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद इस बार इसे अपरिवर्तित रखा गया है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले से होेम लोन और वाहन लोन चुकाने वाले ग्राहकों को राहत मिलेगी, क्योंकि फिलहाल उनकी ईएमआई में इजाफा नहीं होगा।

आइए जानते हैं इस बार की एमपीसी की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर की घोषणा में 10 बड़ी बातें क्या-क्या रहीं?

रेपो रेट में बदलाव नहीं: आरबीआई गवर्नर के अनुसार इस बार एमपीसी की बैठक में ने रेपो रेट (Repo rate) में कोई बदलाव नहीं किया है। लागतार छह बार रेपो रेट बढ़ाने के बाद इस बार इसे 6.5 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा है।

महंगाई दर में कमी का अनुमान: आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोर महंगाई दर अभी भी ऊपरी स्तर पर बनी हुई है। हालांकि, FY24 में महंगाई में कमी आ सकती है। FY24 का CPI महंगाई दर का अनुमान 5.3% से घटाकर 5.2% किया गया है।
जीडीपी 6.5% रहने का अनुमान: आरबीआई गवर्नर ने FY24 में 6.5% विकास दर रहने का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि Q4 में निजी खपत में कमी आई है। हालांकि, बेहतर रबी फसल से ग्रामीण क्षेत्रों में मांग सुधरने की उम्मीद है।
ब्याज दर स्थिर रखने के पक्ष में एमपीसी के सभी पक्षः आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक के मौद्रिक नीति समिति के 6 में से 5 सदस्य अकोमोडेटिव रुख वापस लेने के पक्ष में रहे, जबकि सभी सदस्यों ने रेपो रेट अपरिवर्तित रखने के फैसले का समर्थन किया।
चालू खाता घाटा काबू में रहने की उम्मीद: आरबीआई गवर्नर ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान करेंट अकाउंट डिफिसिट (चालू खाता घाटा) काबू में रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि FY23 के अप्रैल-दिसंबर में चालू खाता घाटा GDP का 2.7 फीसदी रहा।
रुपये की स्थिरता पर आरबीआई की नजर: आरबीआई गवर्नर ने कहा कि लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर केंद्रीय बैंक की नजर बनी हुई है। रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई लगातार कोशिश कर रहा है। साथ ही आरबीआई गवर्नर ने कंपनियों को कैपिटल बफर बनाने की सलाह दी है।
यूपीआई को बढ़ावाः आरबीआई गवर्नर ने यूपीआई पर बोलते हुए कहा कि यूपीआई के जरिए पहले से मंजूर क्रेडिट लाइन को आगे बढ़ाया जाएगा।
नहीं बढ़ेगी होम लोन की ईएमआईः आरबीआई की ओर से रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने से एक बात साफ हो गई है कि इससे आपके होम लोन की ईएमआई कुछ महीनों तक अपरिवर्तित रह सकती है।
महंगाई से दो-दो हाथ जारीः आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रिटेल महंगाई दिसंबर 2022 से बढ़ रही है, पर केंद्रीय बैंक इसे नियंत्रण में रखने के लिए लड़ाई जारी रखे हुए है।
कौटिल्य और गांधी को किया यादः आरबीआई गवर्नर ने अपने वक्तव्य के दौरान कौटिल्य और महात्मा गांधी को भी याद किया।

पोते की चाह में दादी ने की 19 दिन की नवजात बच्ची की हत्या….

हिंद स्वराष्ट्र विश्रामपुर : करंजी गांव में 19 दिन की नवजात बच्ची की हत्या मामले का खुलासा करते हुए करंजी पुलिस ने आरोपित कलयुगी दादी मृताली विश्वास को गिरफ्तार कर लिया हैं। पुलिस ने बताया कि पोते की चाहत में आरोपित दादी ने नवजात बच्ची की हत्या करने की मंशा से उसे कुएं में फेंक दिया था। बता दें कि नवजात बच्ची के पिता आशीष विश्वास पिता पंकज विश्वास निवासी करंजी रायगढ़ स्थित जिंदल प्लांट में काम करता है। उसकी पत्नी अर्पणा ने 13 मार्च को रायगढ़ के मिशन हास्पिटल में बच्ची को जन्म दिया था। उसके बाद वह 24 मार्च को नवजात बच्ची के साथ ग्राम करंजी स्थित अपने ससुराल आई थी। शनिवार को दोपहर में वह घर में बच्ची के साथ सो रही थी। इस दौरान उसके अलावा उसकी सास, दादी सास व चाची सास घर में थी। शाम चार बजे नींद खुलने पर उसने देखा कि उसकी नवजात बच्ची बिस्तर से गायब है। घटना से करंजी गांव में सनसनी फैल गई थी। सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी मधुलिका सिंह समेत पुलिस के आला अधिकारी एवं करंजी पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंचे। खोजबीन के दौरान आशीष विश्वास के घर के बाड़ी स्थित कुएं में ही नवजात बच्ची की लाश मिल गई थी। मामले में करंजी पुलिस ने अज्ञात आरोपित के विरुद्ध धारा 302, 201 के तहत अपराध दर्ज कर जांच की जा रही थी।

ऐसे हुआ खुलासा

घटना स्थल पूरी तरह सुरक्षित था। चारदीवारी की ऊंचाई भी पर्याप्त थी। जहां से आसानी से किसी का प्रवेश किया जाना संभव नहीं था। प्रथम दृष्टया ही प्रतीत हो रहा था कि हत्या की वारदात में कोई न कोई पारिवारिक सदस्य ही शामिल है। पुलिस टीम द्वारा शंका के आधार पर मृत नवजात बच्ची की दादी मृताली विश्वास से सख्ती से पूछताछ की। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि पोते की चाहत में उसने मौके का फायदा उठाकर हत्या करने की मंशा से नवजात बच्ची को कुएं में फेंक दिया था। हत्या की पुष्टि होने पर करंजी पुलिस ने आरोपित दादी मृताली पति पंकज विश्वास 47 वर्ष को धारा 302, 201 के तहत गिरफ्तार कर सूरजपुर न्यायालय में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में केंद्रीय जेल अंबिकापुर भेज दिया गया।

पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला, ASI, प्रधान आरक्षक और आरक्षक को भेजा गया इधर से उधर, देखिए पूरी लिस्ट …

जिले में बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए हैं…

हिंद स्वराष्ट्र बलौदाबाजार : जिले की पुलिसिंग व्यवस्था को सुधारने के मद्देनजर 42 पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए हैं जिसमे 1 ASI, 14 प्रधान आरक्षक एवम् शेष आरक्षकों के तबादले हुए हैं।

देखे आदेश :

डंडे से पीट-पीटकर युवक की हत्या करने मामले में भरतपुर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष का बेटा साथी के साथ गया जेल…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी : जनकपुर में डंडे से पीट-पीटकर युवक की हत्या करने वाले भरतपुर ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष व नेता रविप्रताप सिंह के बेटे शैलेन्द्र सिंह और उसके साथी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मृतक का मरणासन्न स्थिति में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष रविप्रताप सिंह के बेटे शैलेन्द्र सिंह पर डंडे से सिर पर वार करने का आरोप लगा था। वही इलाज के दौरान युवक की 2 अप्रैल को शहडोल अस्पताल में मौत हो गई थी। जिसके बात परिजनों ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ उचित कार्यवाही की मांग की थी। उसी क्रम में आज पुलिस ने मुख्य आरोपी शैलेन्द्र सिंह और उसके साथी कृष्ण कुमार मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।

होम थियेटर बलास्ट मामले में दुल्हन का प्रेमी गिरफ्तार…दूल्हा–दुल्हन को मारने रची थी खौफनाक साजिश….

हिंद स्वराष्ट्र कवर्धा : छत्तीसगढ़ के कवर्धा में हुये होम थिएटर ब्लास्ट मामले में पुलिस ने कई चौकाने वाले खुलासे किए है। दूल्हे से विवाद और दुल्हन से प्रेम प्रसंग के चलते आरोपी ने होम थिएटर ब्लास्ट की घटना को अंजाम दिया था। वारदात से पहले दूल्हे के घर आरोपी पहुंचा और चुपके से मंडप में होम थिएटर रखकर चला गया था।
दरअसल, बालाघाट जिला के ग्राम छपला निवासी आरोपी सरजू मरकाम का प्रेम प्रसंग कवर्धा के ग्राम अंजना निवासी ललिता मेरावी के साथ था। प्रेमिका की शादी कवर्धा के ग्राम चमारी निवासी हिमेंद्र मेरावी के साथ तय हो गई थी। इस बात से वो काफी नाराज था और बार बार प्रेमिका को काॅल करके शादी तोड़ने का दबाव बनाने लगा था। युवक की हरकतों से परेशान युवती ने घटना की जानकारी अपने होने वाले वाले पति को सुनाई। 30 मार्च को जब सरजू का फोन आया तो हिमेंद्र ने उससे बात की और इसी बात पर दोनों का फोन पर ही जमकर विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि सरजू ने प्रेमिका और उसके पति हिमेंद्र को मौत के घाट उतारने की प्लानिंग तैयार की। प्लांनिक के तहत उसी रात बालाघाट के ग्राम मंडई के अमर इलेक्ट्रानिक दुकान से सोनी कंपनी का होम थिएटर सरजू ने खरीदा। इसके बाद अपने घर ग्राम छपला आया और उसमें अमोनियम नाइट्रेट, फटाके का बारूद और पेट्रोल मिलाकर एक विस्फोटक तैयार कर होम थिएटर में फिट कर दिया।

इधर, 30 मार्च से कवर्धा में हिमेंद्र के घर शादी शुरू हुई थी। 31 मार्च को ग्राम अंजना में बारात गई और एक अप्रैल को दूल्हे के घर रिसेप्शन था। इस बीच आरोपी सरजू बालाघाट से कवर्धा चमारी गांव दूल्हे के घर पहुंचा।

1 अप्रैल को पहुंचा था दूल्हे के घर

इधर, 30 मार्च से कवर्धा में हिमेंद्र के घर शादी शुरू हुई थी। 31 मार्च को ग्राम अंजना में बारात गई और एक अप्रैल को दूल्हे के घर रिसेप्शन था। इस बीच आरोपी सरजू बालाघाट से कवर्धा चमारी गांव दूल्हे के घर पहुंचा पहुंचा। यहां पर मंडप के पास होम थिएटर रखकर चुपचाप वहां से चला गया। तीन अप्रैल को जब दूल्हा और उसका भाई होम थिएटर को बिजली में कनेक्ट कर चालू कर ही रहे थे कि जोरदार ब्लास्ट हो गया। धमका इतना जबरदस्त था कि घर का छत उड़ गया। घटना में घर में मौजूद 8 लोग घायल हो गये। इनमें से दूल्हे की मौके पर ही मौत हो गई और भाई की अस्पताल में उपचार के दौरान जान चल गई। अन्य का उपचार अस्पताल में जारी है।

दूल्हा-दुल्हन थे टारगेट में
आरोपी इलेक्ट्रीशियन का काम जानता था। इसलिए प्रेमिका और उसके पति को विस्फोट से उड़ाने की सजिश रचि थी। 30 मार्च को अपने परिचित के दुकान से साउंड सिस्टम खरीदा था, चुकि आरोपी को पता था कि होम थिएटर में किस तरह से विस्फोटक को फिट करना है। उसने अमोनियम नाइट्रेट, फटाके का बारूद और पेट्रोल के मिश्रण से विस्फोटक तैयार किया। विस्फोटक को होम थिएटर में ऐसे फिट किया कि चालू करते ही होम थिएटर ब्लास्ट हो जाए। प्लानिंग के तहत ठिक ऐसा ही हुआ। गनिमत ये रही कि दुल्हन अपने मायके चली गई थी इसलिए वो इस घटना का शिकार होने से बच गई।


 मृतकों का नाम –
1. हेमंद्र मेरावी पिता मेहर मेरावी उम्र 30 वर्ष ग्राम चमारी थाना रेंगाखार जिला कबीरधाम (दुल्हा)
2. राज कुमार पिता मेहर उम्र 32 ग्राम चमारी थाना रेगाखार (भाई)

घायलों का नाम:-
1. सौरभ पिता राज कुमार उम्र 03 वर्ष
2. सूरज मेरावी पिता ज्ञानसिंह उम्र 22 ग्राम रेलवाही थाना बिरसा म0प्र0
3. शिव मेरावी पिता मोहन सिंह उम्र 25 ग्राम मुंडाटोला थाना बिरसा म0प्र0
4. दीपक पिता अजीत सिंह उम्र 18 ग्राम जामूनपानी थाना झलमला जिला कबीरधाम
5. शेर सिंह ख़ुसरो पिता सुखलाल खुसरो उम्र 20 ग्राम बिठला थाना बिरसा म0प्र0

बिना फार्मासिस्टों के संचालित हो रहे मेडिकल स्टोर…मेडिकल स्टोर की आड़ में चल रहे क्लिनिक…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : शहरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह मेडिकल स्टोर्स बिना फार्मासिस्ट के ही संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी इसकी भनक है, लेकिन कार्रवाई नहीं कर रहा है। नगर सहित ग्रामीण इलाके में दर्जन भर से अधिक मेडिकल स्टोर्स हैं। कहने को तो मेडिकल स्टोर्स के संचालन के लिए डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट के आधार पर लाइसेंस जारी किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इससे परे है। शहर के कुछ मेडिकल व्यवसायी नियमों को ताक में रखते हुए मेडिकल का संचालन कर रहे हैं। बिना फार्मासिस्ट व जरूरी दस्तावेज के मेडिकल दुकान का व्यवसाय किया जा रहा है। कई मेडिकलों में अपात्र व्यक्तियों को जिम्मेदारी दे दी गई है, जिनको दवाइयों की जानकारी तक नहीं है। इन मेडिकल स्टोर्स के खिलाफ न तो ड्रग इंस्पेक्टर कोई कार्रवाई करते हैं और ना ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। गैर डिप्लोमा, डिग्रीधारी द्वारा मेडिकलों का संचालन करने से मरीजों की जान को खतरा रहता है।

दूसरे के नाम के सर्टिफिकेट का उपयोग

नगर के कुछ मेडिकल दूसरे के नाम के सर्टिफिकेट पर लाइसेंस का उपयोग कर रहे हैं। मासिक या सालाना के आधार पर लाइसेंस के लिए लेन-देन होता है। पांच से दस हजार रुपए महीने में लाइसेंस उपलब्ध हो जाता है। सूत्रों की माने तो नियमों को ताक पर रखकर मेडिकल स्टोर चल रहे हैं।

मेडिकल की आड़ में चल रहे फर्जी क्लिनिक
गांवों व छोटे कस्बों में जगह जगह मेडिकल स्टोर की आड़ में अवैध क्लिनिक चलाए जा रहे है। चिकित्सा विभाग को इसकी जानकारी होने के बावजूद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन मेडिकल संचालकों द्वारा मरीजों से मन माफिक फीस वसूली जाती है। ऐसे में अगर गलत दवा देने से तबीयत खराब हो जाती है, तब उन्हें बड़े अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है। ये लोग न तो कोई पर्ची पर दवाई लिखते है और न ही इलाज के लिए कोई प्रमाण छोड़ते हैं। ऐसे में अगर मरीज की सेहत पर कोई असर पड़ता है तो बिना सबूत के इन पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती है।

विधायक बृहस्पद सिंह का एक और कारनामा सहकारी बैंक के कर्मचारियों से की थप्परबाजी….

हिंद स्वराष्ट्र रामानुजगंज : छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधायक द्वारा सहकारी बैंक के कर्मचारी को थप्पड़ मारने का एक वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो में रामानुजगंज के विधायक बृहस्पत सिंह सहकारी बैंक के दो कर्मचारियों को थप्पड़ मार रहे हैं। यह वीडियो वायरल होने के बाद कर्मचारियों ने विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और मामले की शिकायत की है। कर्मचारियों द्वारा विधायक के खिलाफ FIR दर्ज करने तथा उन्हें सुरक्षा दिए जाने की मांग की है।

दरअसल मामला जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक रामानुजगंज शाखा का है जहां पदस्थ लिपिक राजेश पाल एवं भृत्य अरविंद सिंह के साथ रामानुजगंज विधायक बृहस्पति सिंह द्वारा मारपीट की गई जिसके बाद मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया। साथ ही जैसे ही इसकी जानकारी अन्य सहकारी बैंक के कर्मचारियों को लगी तो उन्होंने पत्र लिखकर विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है तथा 5 तथा 6 अप्रैल को सामूहिक रूप से पूरे संभाग के सरकारी बैंकों को बंद रखने की बात कही है। पत्र में लिखा गया है कि अगर विधायक के खिलाफ कार्यवाही नहीं किया जाता है तो 2 दिन के बाद वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए विवश होंगे।

भरतपुर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष के बेटे शैलेंद्र सिंह द्वारा युवक से की गई मारपीट, इलाज के दौरान मौत…

हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी : मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के भरतपुर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रविप्रताप सिंह के बेटे शैलेंद्र सिंह द्वारा विगत 26 मार्च को एक युवक के साथ मारपीट की गई और युवक पर जानलेवा हमला करते हुए उसके सिर पर रॉड से जानलेवा हमला किया गया इस हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और इलाज के दौरान 2 अप्रैल को युवक की शहडोल अस्पताल में मौत हो गई है। अब तक इस मामले में पुलिस द्वारा आरोपी के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई है। मृतक का घायल अवस्था में एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष रविप्रताप सिंह के बेटे शैलेन्द्र सिंह पर डंडे से सिर पर कई वार करने का आरोप लगा रहा है। मृतक के मुताबिक उसका किसी से बहस हो रहा था, तभी ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष के बेटे शैलेन्द्र सिंह, उर्फ छोटू वहां पहुंचता है और रंगदारी दिखाते हुए सुमित पर डंडे से वार कर देता है, जिससे वह लहूलुहान हो जाता है।

मृतक का नाम सुमित शर्मा हैं। सुमित को 26 मार्च को परिजनों द्वारा इलाज के लिए जनकपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था इस बीच रविवार को मृतक की तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उसे शहडोल के जिला अस्पताल रेफर किया गया और इलाज के दौरान मृतक की 2 अप्रैल की रात मौत हो गई। हालांकि पुलिस ने अभी तक आरोपी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया है।

सावधान! एक ही जगह घंटो बैठकर काम करना आपके सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक

हिंद स्वराष्ट्र : आज के दौर में हर कोई अपनी-अपनी लाइफ में बिजी है जिसकी वजह से अपनी हेल्थ पर लोग बिलकुल भी ध्यान नहीं दे पाते है. चाहे ऑफिस हो या घर हर कोई देर तक कुर्सी पर बैठकर काम करते है. लेकिन इस बीच वे ये नहीं जानते कि ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठकर काम करना उनके स्वास्थ्य के लिए परेशानियों का कारण बन सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, लंबे समय तक बैठकर काम करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है.

जानें ज्यादा देर बैठकर काम करने से किन तरह की परेशानियों हो सकती है

कमर-पीठ दर्द होना- काफी देर तक बैठने के कारण हमारी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं. इसलिए सिटिंग जॉब के दौरान आपको बीच-बीच में उठकर जरूर घूमना चाहिए और कई बार गलत पोस्चर में बैठने की वजह से भी कमर-पीठ दर्द की समस्या हो जाती है.

इम्यून सिस्टम होता है कमजोर- अगर आप बैठकर लम्बे समय तक काम करते है तो इससे बॉडी की कोशिकाएं कमजोर हो सकती हैं, जिसके चलते आपका इम्यून सिस्टम भी प्रभावित हो सकता है.

वजन का बढ़ना- लगातार एक ही जगह पर बैठकर काम करने और बैठे रहने से शरीर फैलने लगता है जो हमारी सेहत के लिए ठीक नही. दरअसल कई घंटों तक बैठे रहने से कैलोरी बर्न नहीं होती है, ऐसे में वजन बढ़ सकता है. साथ ही आपको कई तरह की बीमारियों का भी सामना करना पड़ सकता हैं.

दिमाग पर असर होपीना- लंबे समय तक काम करने से और लंबी सिटिंग जॉब के कारण दिमाग भी कमजोर होने लगता है. जिसके कारण आप कई जरुरी बात भूल सकते है.

एड़ी में सूजन- लगातार बैठकर काम करने की वजह से शरीर में ब्लड फ्लो भी धीमा पड़ जाता है. जिसके कारण आपके फ्लूइड की मात्रा कम हो सकती है. ऐसे में एड़ी में सूजन या पैरों में दर्द हो सकता है.

गर्मियों में इन चीजों का सेवन करने से गल जाएगा यूरिक एसिड, घुटनों का दर्द होगा गायब…

हिंद स्वराष्ट्र : शरीर में जब यूरिक एसिड ज्यादा बनने लगती है तो किडनी के लिए इसे फिल्टर कर पाना मुश्किल हो जाता है। धीरे-धीरे ये यूरिक एसिड क्रिस्टलाइज होने लगता है और छोटे-छोटे कणों के रूप में नसों में बैठने लगता है। जिससे जॉइंट पेन, शरीर में सूजन और दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। हाई यूरिक एसिड लेवल वाले लोगों में आगे चलकर गठिया रोग की समस्या भी हो सकती है। इसीलिए, शरीर में यूरिक एसिड को बढ़ने से रोकना बहुत जरूरी है। गर्मियों में यूरिक एसिड को कंट्रोल रखने के लिए आप डायट में बदलाव कर सकते हैं। साथ ही लाइफस्टाइल में बदलाव लाकर और कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से भी इस समस्या को कंट्रोल कर सकते हैं। यहां पढ़ें कुछ ऐसे ही नेचुरल उपाय और घरेलू नुस्खे जो हाई यूरिक एसिड के मरीजों के लिए काफी कारगर हैं।
खीरा
गर्मी के मौसम में खीरा खाने से शरीर को ठंडक मिलती है क्योंकि इसमें पानी की मात्रा भरपूर होती है। ऐसे में इसके सेवन से डिहाईड्रेसन की समस्या नहीं होती है। इतना ही नहीं, खीरे में एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में जाकर यूरिक एसिड बढ़ने के कारण होने वाली दिक्कतों को कम करते हैं। खीरे का सेवन आप कच्चा, सलाद या फिर रायते के रूप में कर सकते हैं।
बेरीज
बेरीज में एंटी-इंफ्लेमेट्री तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। साथ ही, इसके सेवन से जोड़ों में जल्दी यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स नहीं बनते हैं। ऐसे में खून में यूरिक एसिड का लेवल कंट्रोल में रहता है। इस बीमारी से जूझ रहे मरीजों को जामुन, स्ट्रॉबेरीज, चेरी और ब्लूबेरीज को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।
गाजर
ये एक मौसमी सब्जी है जो सर्दियों के दिनों में ज्यादा खाया जाता है। हालांकि, गर्मियों में भी गाजर का सेवन फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, ये शरीर के फ्री रेडिकल्स को कंट्रोल करने में भी मददगार होते हैं। साथ ही जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने के लिए भी गाजर का सेवन फायदेमंद होता है। आप इसका सेवन सलाद, सब्जी या जूस के रूप में कर सकते हैं।

एसिडिटी की समस्या है तो सुबह उठकर न करें ये काम, एक गलती शरीर को बना देगी बीमारी का घर…

हिंद स्वराष्ट्र : आचार कुचर खाने से एसिडिटी की बीमारी हो जाती है. इस बात का ध्यान रखें कि आप सुबह उठते ही कहीं ये गलती न कर दें। भारत में कुछ लोग एसिडिटी और गैस की समस्या से परेशान रहते हैं। जिससे सामान्य दैनिक गतिविधियों में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह आज की जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खान-पान के कारण आम है। जिसके लिए हमें उन आदतों को बदलना होगा जो हमारे स्वास्थ्य को खराब करती हैं और एसिडिटी का कारण बनती हैं।

शाम और सुबह के समय यह गलती न करें

अगर आप चाय के शौकीन हैं और सुबह खाली पेट चाय पीना पसंद करते हैं तो इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है। आप शायद नहीं जानते होंगे कि खाली पेट चाय पीने से पित्त रस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जिससे एसिडिटी के अलावा घबराहट जैसी स्थिति भी पैदा हो जाती है।इन चीजों से दूर रहें
केवल चाय ही नहीं बल्कि ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन सुबह खाली पेट नहीं करना चाहिए। इसमें मसालेदार भोजन, गर्म कॉफी, तैलीय भोजन, चॉकलेट आदि शामिल हैं। इन वस्तुओं से बचना चाहिए।

एसिडिटी से बचने के लिए सुबह क्या करें

– अगर आप सुबह चाय के बिना नहीं रह सकते हैं तो आप चाय में अदरक डालकर पी सकते हैं. इससे एसिडिटी की संभावना कम हो जाएगी।

– सुबह-शाम नाश्ते में दलिया शामिल करें, इससे पेट में गैस नहीं बनेगी और पाचन तंत्र भी ठीक रहेगा.

– सुबह उबले हुए अंडे खाने से भी पेट की समस्या दूर होगी.

– हरी सब्जियां भी आपकी सेहत के लिए अच्छी होती हैं। इसलिए आप सुबह भी हरी सब्जियां खा सकते हैं।

एक स्वस्थ जीवन शैली अच्छे ग्रेड को कैसे प्रभावित कर सकती है?

हिंद स्वराष्ट्र : सभी जीवित प्राणी इस धरती का हिस्सा हैं और इस ब्रह्मांड से संबंधित हैं। हमें यह समझना चाहिए कि हम सभी इस ब्रह्मांड के घटकों से बने हैं। इसे बेहतर ढंग से रखने के लिए, हम कह सकते हैं कि हमारा शरीर इस पृथ्वी का एक सूक्ष्म जगत है, और हमारी पृथ्वी इस ब्रह्मांड का एक सूक्ष्म जगत है। हमारा शरीर इस पृथ्वी के चक्र का अनुसरण करता है और पृथ्वी में होने वाले सभी परिवर्तनों के अधीन है। हम अपने ऊर्जा चैनलों के साथ खाते हैं, आराम करते हैं और काम करते हैं जो एक नियमित पैटर्न के अनुसार बदलते हैं।
हमारा शरीर परिवर्तनों के अनुकूल होना सीखता है और हमारे जीवन को संतुलित करता है। जब भी हम अपने शरीर के इस संतुलन और दिनचर्या को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं, तो हम अपने सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं, जो कि अपूरणीय हो सकता है। वास्तव में, यह अनुशंसा की जाती है कि हम अपने पाचन तंत्र को डिटॉक्स करने के लिए कभी-कभार उपवास करें।
सभी जीव अपने निवास स्थान और उस पारिस्थितिकी तंत्र के अनुसार खाते हैं जिसमें वे रहते हैं। दूसरे शब्दों में, वे स्वदेशी भोजन का सेवन करते हैं, जो ताज़ा भी होता है और कभी भी पैक या संग्रहीत या डिब्बाबंद नहीं होता है। केवल इंसानों ने ही डिब्बाबंद या संरक्षित भोजन खाना पसंद किया है जो पोषक तत्वों में कम, कैलोरी में उच्च और हमारे पाचन तंत्र के लिए हानिकारक है। ये हाई-शेल्फ-लाइफ भोजन रक्तचाप को बदलने में सक्षम हैं, हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं, स्मृति हानि का कारण बन सकते हैं, खतरनाक बीमारियां ला सकते हैं और हमारे दैनिक दिनचर्या में हमारे शरीर के तंत्र में हस्तक्षेप कर सकते हैं। वे हमारी नींद के पैटर्न को भी बिगाड़ सकते हैं और हमारी सोचने की प्रक्रिया में बदलाव ला सकते हैं, जिससे हमारे शरीर और दिमाग पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। परिरक्षकों से युक्त रेडीमेड खाद्य पदार्थों में से कई स्वभाव से नशे की लत के लिए जाने जाते हैं और हमारे मिजाज का कारण बनते हैं। किसी व्यक्ति का शारीरिक संतुलन काफी हद तक प्रभावित हो सकता है जब हमारा शरीर धीरे-धीरे और अनजाने में इतने सारे बदलावों से गुजरता है।
दूसरी ओर, भोजनालयों से मंगाया गया भोजन सामान्य तापमान पर रखने पर आसानी से खराब हो सकता है। वे तीव्र पेट में संक्रमण और आंतों के ब्लॉक का कारण बन सकते हैं, जिसे ठीक होने में कम से कम 4-5 दिन लगेंगे। इससे परीक्षा में अनुपस्थिति भी रहती है।
एक छात्र को अपने शरीर, आत्मा और मन को शिक्षा के प्रति समर्पित करने की आवश्यकता होती है, जब वह ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी कर रहा होता है। खान-पान की गलत आदतें, गलत समय पर खाना और बाहर का खाना ऐसे प्रमुख कारक हैं जो छात्र के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। या तो छात्र पूरी तरह से परीक्षा से अनुपस्थित रहेगा या परीक्षा की तैयारी और परीक्षा ठीक से करने की स्थिति में नहीं होगा। दोनों ही मामले छात्रों के लिए आफत साबित होंगे। परीक्षा के दौरान एक-एक पल कीमती है, और समय की बर्बादी शून्य होनी चाहिए। छात्र को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक सही समय सारिणी का पालन करना होगा। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि वह अपने शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिरता और मन के संतुलन को न खोए। उसकी तैयारी में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।
छात्रों के माध्यम से गुजर रहे हैं, जबकि आइए कुछ युक्तियों का योग करते हैं
परीक्षा चरण
• बिना चूके प्रतिदिन एक कटोरी फल और एक प्लेट सलाद का सेवन करें।
• प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में पानी और घर पर बना ताजा जूस पिएं।
• कच्चा नारियल, छाछ और गन्ने का ताज़ा रस अच्छे पूरक हैं।
• रात 10 बजे के बाद कोई भी ठोस भोजन न करें।
• परीक्षा समाप्त होने तक सभी डिब्बाबंद भोजन, बोतलबंद पेय और ऑर्डर किए गए भोजन से बचें।
• अगर आपको पेट में हल्का सा भी दर्द महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इसे बिगड़ने न दें।
• डॉक्टर के पूर्व परामर्श से अपने साथ कुछ एंटासिड की गोलियां रखें, जो बेचैनी से राहत दिला सकती हैं।
एक स्वस्थ शरीर स्वस्थ मन के साथ तालमेल से काम करता है। दोनों ही स्वस्थ भोजन की आदतों से प्राप्त किए जा सकते हैं, जो केवल घर से ही उपलब्ध हो सकते हैं। स्वास्थ्य गया तो सब कुछ गया। एक मानक और संतुलित आहार आपके मन, शरीर और आत्मा का पोषण करता है। आइए अच्छा खाना खाएं और हमेशा अच्छे रहें। सफलता की कुंजी है “स्वस्थ खाओ, स्वस्थ रहो”।

सेहत ही नहीं त्वचा के लिए भी गुणकारी हैं तरबूज के बीज, फायदे जान रह जाएंगे हैरान…

हिंद स्वराष्ट्र : गर्मियों के मौसम में ऐसे कई सारे फल मिलते हैं, जिन्हें अपनी डाइट में शामिल करने से हम इस मौसम में सेहतमंद रहते हैं। गर्मियों में मिलने वाले इन फलों की लिस्ट में तरबूज का नाम सबसे ऊपर आता है। कई गुणों से भरपूर तरबूज इस मौसम में न सिर्फ शरीर में पानी की पूर्ति करता है, बल्कि कई तरह की समस्याओं से भी हमें दूर रखता है। शारीरिक रूप से फायदा पहुंचाने के साथ ही तरबूज मानसिक स्वास्य्थ के लिए भी काफी गुणकारी है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि तरबूज के साथ ही उसके बीज भी हमारे लिए कई तरह से फायदेमंद होता है। अक्सर लोग तरबूज खाते समय इसके बीजों को फालतू समझकर फेंक देते हैं। हालांकि, सच्चाई इससे बिल्कुल विपरीत है। दरअसल, तरबूज की ही तरह इसके बीज के भी कई सारे फायदे होते हैं। अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो तरबूज के बीजों को फालतू समझकर फेंक देते हैं, तो एक बार इसके फायदों के बारे में जरूर जान लें।

प्रजनन संबंधित समस्याओं में कारगर
तरबूज के बीज पुरुषों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके सेवन से प्रजनन संबंधित समस्याओं में काफी राहत मिलती हैं। तरबूज के बीज खाने से न सिर्फ स्पर्म काउंट में बढ़ोतरी होती है, बल्कि इससे प्रजनना क्षमता में भी सुधार होता है। इसके अलावा इसमें मौजूद जिंक शुक्राणु की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक है।
दिल को रखे सेहतमंद
तरबूज के बीज दिल के लिए भी काफी फायदमंद होते हैं। इसमें भारी मात्रा में मौजूद मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड दिल के दौरे के खतरे को कम करने में मददगार होते हैं।
पाचन तंत्र करे दुरुस्त
अगर आप तरबूज के बीजों का सेवन करते हैं, तो इससे आपके पाचन तंत्र को भी काफी फायदा मिलता है। अगर आप पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, तो इसके लिए तरबूज के बीजों का सेवन आपके लिए बेहद गुणकारी होगा।
वजन घटाने में कारगर
अगर आप कम समय में आसानी से अपना वजन घटाना चाहते हैं, तो इसके लिए भी तरबूज के बीज आपके काम आ सकते हैं। दरअसल, इसमें कैलोरी की मात्रा बेहद कम होती है, जो वजन घटाने में काफी सहायक होते हैं।
हड्डियों बनाए मजबूत
अगर आप अपनी हड्डियों को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए भी तरबूज के बीज काफी फायदेमंद साबित होंगे। इसमें मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड्स, प्रोटीन, जिंक, फोलेट, पोटेशियम, कॉपर नैचुरल मल्टीविटामिन की तरह काम करते हैं और हड्डियों को मजबूती देते हैं।
त्वचा के लिए गुणकारी
तरबूज के बीज सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि आपकी त्वचा के लिए भी काफी लाभकारी होते हैं। इन बीजों को पीसकर चेहरे पर लगाने से न सिर्फ आपकी त्वचा चमकदार बनती है,बल्कि इससे ब्लैकहेड्स भी दूर होते हैं। साथ ही चेहरे पर निखार भी आता है।

अब अधिकारी देंगे अपने निवेश का ब्यौरा,लेकिन विदेश में पड़ रहे बच्चों के खर्च का क्या..?

हिंद स्वराष्ट्र : सरकार को न केवल शक है बल्कि उसके पास पक्का सुराग होगा कि देश के आईएएस, आईसीएस तथा आईएफएस के अफसर शेयर बाजार में मोटी रकम का निवेश कर रहे हैं. यही वजह है कि सरकार ने अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को पहली बार एक बड़ा आदेश जारी किया है. इसमें कहा गया है कि यदि किसी कैलेंडर वर्ष में उनका शेयर बाजार अन्य निवेश में कुल लेनदेन 6 महीने के मूल वेतन से अधिक है तो वे इसकी जानकारी मुहैया कराएं. कार्मिक मंत्रालय ने इस बारे में हाल ही में आदेश जारी किया जो भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों पर लागू होगा।
यह आदेश केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों के सचिवों को भी जारी किया गया. इसमें कहा गया है कि शेयर, प्रतिभूति, डिबेंचर आदि का अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली 1968 के नियम 16 (4) के तहत चल संपत्ति माना जाता है. ऐसे में यदि लेन-देन अधिकारी के 2 महीने के मूल वेतन से अधिक होता है तो इस बारे में प्राधिकार को सूचित करना आवश्यक होगा।
सरकारी अधिकारियों के लिए कड़ी सेवा शर्ते हैं. आदेश में आचरण नियमों के रूल 14 (1) का उल्लेख भी किया गया है जो कहता है कि अखिल भारतीय सेवाओं का कोई भी सदस्य किसी स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश में सट्टा नहीं लगाएगा लेकिन यह प्रावधान स्टाक-दलालों या अन्य अधिकृत व्यक्तियों के माध्यम से किए गए सामयिक निवेश पर लागू नहीं होगा।
यह तथ्य है कि शेयर बाजार में मुनाफा कमाने के लिए सामान्य जन मार्केट में निवेश करते हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या देश में नीतियों को बनाने और क्रियान्वित करनेवाले सरकारी अधिकारी भी क्या अपना पैसार शेयर बाजार में लगाकर मुनाफा कमा रहे हैं? यदि सही तरीके से जांच की जाएं तो पता चलेगा कि कितने ही अधिकारियों की ऊपरी कमाई भी भरपूर है।
वे इसका बेनामी निवेश अपने रिश्तेदारों के नाम पर अलग-अलग ठिकानों में प्लाट, फार्म, मकान आदि के रूप में करते हैं। इन अधिकारियों के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं जिसपर बहुत मोटी रकम खर्च होती है क्योंकि रुपए के मुकाबले डॉलर और पाउंड के दाम काफी अधिक हैं इसलिए ऐसे अधिकारियों से उनके विदेश में शिक्षा ग्रहण करनेवाले बच्चों की पढ़ाई, निवास, खानपान व इलाज के खर्च के बारे में भी पूरा हिसाब लिया जाए. इससे पता चलेगा कि क्या अधिकारी आय से अधिक ऊपरी कमाई कर रहा है. अधिकारियों की इस मामले में जवाबदेही बनती है।

लाइसेंस लेकर नकली दवाओं का नेटवर्क कर रहा विदेशों में भारत की छवि को धूमिल…

हिंद स्वराष्ट्र : उज्बेकिस्तान, गाम्बिया, अमेरिका समेत कई देशों के आरोप लगाने के बाद भारत सरकार जागी है. कई देशों में भारतीय दवाओं और खास तौर पर कफ सिरप से बच्चों के बीमार होने व मौत की बात सामने आई. इससे पूरे विश्व में भारतीय दवा उद्योग का नाम खराब हुआ। गंभीर आरोप लगने के बाद केंद्र सरकार की एजेंसियों की नींद खुली है और देशभर में नकली दवा बनाने वालों पर कार्रवाई शुरू की गई. सरकार के आदेश पर देशभर के विभिन्न राज्यों में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने 203 दवा कंपनियों की पहचान कर 76 की जांच की गई है।
18 कंपनियों को दोषी पाया गया और लाइसेंस रद्द किए गए. 3 कंपनियों का प्रोडक्ट लाइसेंस रद्द किया गया है और 26 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। केंद्र ने नकली दवाएं बनाने के आरोप में हिमाचल प्रदेश की 70, उत्तराखंड की 45 और मध्य प्रदेश की 23 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की।सवाल यही उठता है कि लाइसेंस लेने वाली कंपनियां आखिर कैसे जान से खिलवाड़ करने वाली नकली दवाओं का निर्माण धड़ल्ले से कर रही हैं।
सिर्फ निर्माण ही नहीं कर रही हैं, बल्कि कई देशों तक दवाओं को सरलता और सहजता से पहुंचा भी रही हैं। जब तक आरोप नहीं लगे थे, तब तक सब कुछ ठीक था, लेकिन अब सवाल उठने लगे हैं और यह पूछा जाने लगा है कि आखिर नकली दवाओं का तंत्र इतना मजबूत कैसे हो गया कि देश-विदेश में इसकी सीधी बेरोकटोक पहुंच बन गई? जाहिर है केंद्रीय एजेंसियां कुंभकर्णी नींद में थीं और लोगों की जान हलक में डाले हुए थीं. कदम उठाना सही बात है, जांच गंभीरता से भी होनी चाहिए. जहां कहीं भी त्रुटियां मिलें, उनके लाइसेंस रद्द होने चाहिए।
केवल कंपनियों का लाइसेंस रद्द करने से कुछ भी होने वाला नहीं है, जान को जोखिम में डालने के जिम्मेदार वो अधिकारी और विभाग भी हैं, जिन्होंने लाइसेंस देकर अपनी जिम्मेदारी झाड़ ली है. ऐसे लोगों को भी कटघरे में खड़ा करने की जरूरत है. इन अधिकारियों पर सरकार ने टैक्स से वसूले गए पैसे वेतन के रूप में लुटाए हैं, इसलिए मोटा वेतन लेकर देश और विभाग पर कलंक लगाने वाले अधिकारियों की भी निष्पक्ष व सख्ती से जांच हो, तभी इस रैकेट को तोड़ा जा सकेगा, अन्यथा एक अभियान चलेगा, कुछ कंपनियों का दम घुटेगा और फिर कुछ वर्षों बाद वही सिलसिला जारी हो जाएगा।
आज के दौर में लाइसेंस लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लाइसेंस के अनुरूप काम हो रहा है या नहीं, इन पर निगरानी रखना और लोगों की जान से खिलवाड़ न हो, इसका ख्याल रखना बड़ी बात है। भारतीय दवाओं पर भरोसा कायम रहे, यह केंद्र की जिम्मेदारी है।उम्मीद की जा सकती है कि केंद्र सरकार भविष्य में देश के ऊपर दाग नहीं लगने देगी और लाइसेंस प्रथा को केवल प्रथा के रूप में न रख, जिम्मेदारी का एहसास भी कराएगी।

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