हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने न्याय की मिसाल पेश करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की भयावहता और नृशंसता को देखते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) करार दिया है। कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू सहित तीन दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है, जबकि चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास (मरते दम तक जेल) की सजा से दंडित किया है।
इस फैसले के बाद कोर्ट परिसर के बाहर पीड़िता के परिजनों और स्थानीय लोगों में संतोष देखा गया, वहीं पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
इस मामले में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।
1. कुलदीप साहू (मुख्य साजिशकर्ता एवं हत्यारा)
2. चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके
3. फूल सिंह उर्फ रिंकू
इन तीनों को फांसी की सजा सुनाई गई हैं वहीं आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को अंतिम सांस तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई हैं।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी थी कि जिस प्रकार प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ बर्बरता, दुष्कर्म और हत्या की घटना को अंजाम दिया गया, वह समाज और इंसानियत के मुंह पर तमाचा है। इसमें दोषियों के लिए अधिकतम यानी फांसी की सजा से कम कुछ भी न्यायसंगत नहीं होगा।
क्या था पूरा मामला?
यह खौफनाक वारदात 13-14 अक्टूबर 2024 की रात घटी थी। सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) से मुख्य आरोपी कुलदीप साहू की पुरानी रंजिश थी। घटना वाली रात पुलिस बल कुलदीप की तलाश में था, क्योंकि उसने एक आरक्षक पर खौलता तेल फेंकने और गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया था। रंजिश में अंधे होकर कुलदीप साहू अपने साथियों के साथ प्रधान आरक्षक के शासकीय मकान में घुस गया। घर में प्रधान आरक्षक मौजूद नहीं थे। आरोपियों ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 साल की मासूम बेटी पर तलवार और धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जांच के दौरान उनके साथ दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) से जुड़े जघन्य अपराधों की भी पुष्टि हुई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी दोनों के शवों को कार में लादकर ले गए और शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर पीढ़ा गांव के पास खेतों में अर्धनग्न अवस्था में फेंककर फरार हो गए थे।
जनाक्रोश और आगजनी से दहला था सूरजपुर
वारदात का पता चलते ही पूरे सूरजपुर में हाहाकार मच गया था। उग्र भीड़ ने आरोपी कुलदीप साहू के घर और कबाड़ गोदाम को आग के हवाले कर दिया था। पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल उठे थे।
घटना के बाद पुलिस की कई टीमों ने घेराबंदी कर मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को बस से झारखंड भागते समय बलरामपुर जिले से दबोचा था। जांच और साक्ष्यों को तेजी से पूरा करते हुए मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट के सुपुर्द किया गया, जहां आखिरकार न्याय की जीत हुई।



