हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी को हाल ही में (जनवरी 2026 की शुरुआत में) पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया गया था वहीं आज उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से पूरी तरह बाहर निकाल दिया गया है।
इस कार्रवाई के पीछे के मुख्य कारण विकास तिवारी द्वारा पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी की गई। विकास तिवारी ने झीरम घाटी जांच आयोग से मांग की थी कि कांग्रेस के ही कुछ बड़े नेताओं (जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मंत्री कवासी लखमा के नाम चर्चा में रहे) का नार्को टेस्ट कराया जाए। कांग्रेस पार्टी ने इस बयान को अनुशासनहीनता माना। पार्टी का स्टैंड यह रहा है कि झीरम कांड में कांग्रेस के बड़े नेताओं की शहादत हुई थी और विकास तिवारी का बयान भाजपा के उन आरोपों को बल देने वाला था जिसमें कांग्रेस के अंदरूनी लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।
अब तक उनपर हुई कार्यवाही
कुछ दिन पूर्व पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस कमेटी) अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर विकास तिवारी को प्रवक्ता पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिन के भीतर जवाब देने का नोटिस भी जारी किया गया था। नोटिस के जवाब में उनके द्वारा प्रस्तुत तर्क से संतुष्ट न होने के कारण अंततः अब उन्हें कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्षों के लिए निष्कासित किया गया हैं।
विकास तिवारी की प्रतिक्रिया
पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए संकेत दिया कि पार्टी के भीतर कुछ लोग नेताओं को उनके खिलाफ भड़का रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब विकास तिवारी चर्चा में रहे हैं। इससे पहले जुलाई 2024 में रायपुर के एक निजी स्कूल संचालक द्वारा उन पर ब्लैकमेलिंग और गुंडागर्दी के आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, ताजा कार्रवाई पूरी तरह से उनकी राजनीतिक बयानबाजी और पार्टी अनुशासन के उल्लंघन से जुड़ी हुई है।



