प्राथमिक शाला पिपरिया में तीन दिनों से मध्यान्ह भोजन बंद, बच्चों के चेहरे पर दिखी उदासी…

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हिंद स्वराष्ट्र एमसीबी/ मनेंद्रगढ़ किशन शाह : छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी मध्यान्ह भोजन योजना की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले की प्राथमिक शाला पिपरिया में बीते तीन दिनों से बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं मिल पाया, जिससे नन्हे बच्चों के चेहरों पर उदासी साफ दिखाई दे रही है।
विद्यालय में अध्ययनरत छोटे-छोटे बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन न केवल पोषण का साधन है, बल्कि उनकी स्कूल में उपस्थिति और सीखने की रुचि से भी जुड़ा हुआ है। लेकिन लगातार तीन दिन भोजन न मिलने से बच्चे भूखे पेट ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
जब इस संबंध में विद्यालय के संचालक/शिक्षकों से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि
“मध्यान्ह भोजन बनाने वाले समूह के लोग पिछले कुछ दिनों से नहीं आ रहे हैं, जिसके कारण भोजन नहीं बन पाया।”
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रत्येक स्कूल एवं गांव में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मध्यान्ह भोजन संचालित किया जाता है, ताकि बच्चों को समय पर पौष्टिक आहार मिल सके। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भोजन समूह नहीं आ रहा, तो इसकी निगरानी और वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
छोटे-छोटे नन्हे बच्चे जब भूखे रहते हैं, तो उनके मन और स्वास्थ्य पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आखिर मासूम बच्चों को क्यों भुगतना पड़ रहा है?


अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और बच्चों को कब तक नियमित मध्यान्ह भोजन मिल पाता है या नहीं।

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