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जनसंपर्क विभाग के 22 अधिकारियों के तबादले, देखें आदेश…

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग मंत्रालय द्वारा 22 अधिकारियों/कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं. जारी आदेश के अनुसार सूरजपुर जिले के सहायक संचालक प्रदीप सिंह को जिला बलरामपुर–रामानुजगंज की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वही बलरामपुर–रामानुजगंज की सहायक सूचना अधिकारी देविका मेरावी को सूरजपुर भेजा गया हैं।

देखें आदेश:

खुद की हत्या के लिए दी 2 लाख की सुपारी: अक्षत अग्रवाल हत्याकांड मामले में आरोपी संजीव मंडल को आजीवन उम्रकैद…

हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : शहर के बहुचर्चित अक्षत अग्रवाल हत्याकांड मामले में न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है। सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने हत्या के दोषी सुभाषनगर निवासी संजीव मंडल उर्फ भानु को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी का नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया था।
अतिरिक्त लोक अभियोजक विनोद कुमार दुबे और प्रकाशमणि त्रिपाठी के अनुसार, 20 अगस्त 2024 की शाम अक्षत अग्रवाल अपनी कार से निकला था। मोबाइल स्विच ऑफ होने पर परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी और अगले दिन, 21 अगस्त की सुबह मेंड्रा के जंगल में अक्षत की गोली लगी लाश मिली थी। पुलिस जांच के बाद आरोपी संजीव मंडल को गिरफ्तार किया गया था।
सुपारी देकर कराई खुद की हत्या
मामले की सुनवाई और साक्ष्यों (नार्को व पॉलीग्राफ टेस्ट और मेमोरेंडम कथन) के अवलोकन से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपी पूर्व में 15-20 दिनों तक अक्षत की दुकान पर काम कर चुका था। विवादित और आपराधिक छवि वाले संजीव को अक्षत ने खुद की हत्या करने के लिए 2 लाख रुपये की सुपारी दी थी। 20 अगस्त 2024 की शाम अक्षत आरोपी को कार में बैठाकर जंगल ले गया वहां उसने पिस्टल में गोली लोड कर आरोपी को दी और सीने पर गोली मारने को कहा। संजीव ने तीन गोलियां चलाकर अक्षत की हत्या कर दी थी।
हत्या के बाद आरोपी ने पिस्टल को इंजीनियरिंग कॉलेज के पास छिपा दिया था, जिसे पुलिस ने जब्त किया। इसके अलावा आरोपी के घर के बेडरूम से मृतक के सोने-हीरे के जेवर और सुपारी के पैसों में से बचे 48 हजार रुपये नकद बरामद किए गए थे।
अदालत ने आरोपी संजीव मंडल को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और आर्म्स एक्ट की धारा 25 व 27 के तहत दोषी पाया। BNS धारा 103(1) के तहत आजीवन सश्रम कारावास और ₹2,000 जुर्माना, आर्म्स एक्ट धारा 25 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹1,000 जुर्माना और आर्म्स एक्ट धारा 27 के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹1,000 जुर्माना लगाया।
अर्थदंड न देने पर आरोपी को प्रत्येक धारा में 1-1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

सीतापुर में 1 करोड़ की उठाईगिरी का खुलासा, ओडिशा से 46 लाख के जेवरात बरामद…

हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा पुलिस ने सीतापुर स्थित एक ज्वेलर्स दुकान के बाहर से हुई 1 करोड़ रुपये की सनसनीखेज उठाईगिरी का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस की संयुक्त टीम ने ओडिशा के गंजाम जिले में छापेमारी कर आरोपी के मकान से 46 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए हैं।
उल्लेखनीय हैं कि बीते 26 जुलाई 2026 को सीतापुर स्थित कांशी विश्वनाथ ज्वेलर्स के संचालक अरुणदेव सोनी सुबह करीब 11:30 बजे दुकान खोलने पहुंचे थे। उन्होंने आभूषणों से भरा बैग अपनी स्कूटी पर रखा और शटर खोलने लगे। इसी दौरान अज्ञात शातिर बदमाशों ने मौका पाकर स्कूटी से बैग पार कर दिया। प्रार्थी की रिपोर्ट पर सीतापुर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
500 CCTV कैमरों से ट्रेस हुआ रूट
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में साइबर सेल अम्बिकापुर और थाना सीतापुर की संयुक्त टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने छत्तीसगढ़ (जशपुर, कुनकुरी), झारखंड (सिमडेगा, कुरडेग) और ओडिशा (सुंदरगढ़) तक के करीब 500 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और तकनीकी विश्लेषण खंगाले। कड़ी मशक्कत के बाद संदिग्धों की पहचान चांटी दास (निवासी ग्राम सोर्डा, गंजाम, ओडिशा) और नागेश्वर राव (निवासी नारायणपुर, गंजाम, ओडिशा) के रूप में हुई।
ओडिशा में 10 दिनों तक चला सर्च ऑपरेशन
आरोपियों का सुराग मिलते ही सरगुजा पुलिस की टीम को तुरंत ओडिशा रवाना किया गया। स्थानीय पुलिस के सहयोग से लगातार 10 दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया। 16 अगस्त की रात आरोपी चांटी दास के घर आने की मुखबिर सूचना पर पुलिस ने जब उसके घर पर छापा मारा, तो मकान में ताला बंद मिला।
विधिवत तलाशी लेने पर आरोपी के घर में छिपाकर रखे गए चोरी के जेवरात बरामद हुए जिसमें 300.92 ग्राम (अनुमानित कीमत: ₹43 लाख), चांदी के आभूषण  1 किलो 168 ग्राम (अनुमानित कीमत: ₹3 लाख) कुल ₹46 लाख।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस ने गवाहों के समक्ष कुल 46 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात जब्त कर लिए हैं। फिलहाल मुख्य आरोपी चांटी दास और नागेश्वर राव समेत अन्य संलिप्त आरोपी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। इस अंतर्राज्यीय कार्रवाई में साइबर सेल अम्बिकापुर, सीतापुर थाना पुलिस और ओडिशा की आश्का/शोर्डा पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका रही।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल कर पर्दापोशी में जुटीं सूरजपुर SDM: फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में RTI दबाने का आरोप, जांच अटकाने में रही हैं ‘माहिर’….

हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सूरजपुर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं जन सूचना अधिकारी कार्यालय एक बार फिर गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं और कानून की मनमानी व्याख्या को लेकर सवालों के घेरे में है। मामला नवनिर्वाचित नगर पंचायत अध्यक्ष रितेश जायसवाल के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा है। आरोप है कि राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह प्रमाण पत्र जारी किया गया, और अब जब इसकी जांच से जुड़ी जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई, तो कानून के प्रावधानों को मरोड़कर जानकारी दबाने की कोशिश की जा रही है।

आखिर क्या था ‘गिरीश देशपांडे’ मामला और क्यों यहाँ लागू नहीं होता?

एसडीएम कार्यालय ने आरटीआई आवेदन खारिज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘गिरीश रामचंद्र देशपांडे बनाम केंद्रीय सूचना आयोग (2012)’ मामले का हवाला दिया है। लेकिन कानूनी जानकारों के मुताबिक, यह संदर्भ इस मामले पर बिल्कुल भी लागू नहीं होता। गिरीश देशपांडे मामले में एक नागरिक ने एक सरकारी कर्मचारी के निजी सर्विस रिकॉर्ड, मेमो, शो-कॉज नोटिस, इंकम टैक्स रिटर्न और निजी संपत्ति/देनदारियों का ब्योरा मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि किसी कर्मचारी का अपने विभाग के साथ निजी सर्विस रिकॉर्ड या इंकम टैक्स रिटर्न उसकी ‘व्यक्तिगत जानकारी’ (Personal Information) है और धारा 8(1)(j) के तहत सुरक्षित है।

यहाँ यह फैसला क्यों लागू नहीं होता?:

यहाँ मामला किसी सरकारी कर्मचारी की सैलरी या इंकम टैक्स का नहीं, बल्कि एक नवनिर्वाचित नगर पंचायत अध्यक्ष (जनप्रतिनिधि) की संवैधानिक/कानूनी पात्रता और उसके सरकारी जाति प्रमाण पत्र का है। यदि किसी व्यक्ति ने गलत/फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षित/निर्दिष्ट सीट से चुनाव लड़ा है, तो यह सीधे तौर पर व्यापक लोकहित (Larger Public Interest) से जुड़ा हुआ मुद्दा है।आवेदक (पत्रकार मृण्मयी पाण्डेय) ने पटवारी/RI की जांच रिपोर्ट, इनवर्ड तिथि और फाइल की मूवमेंट शीट मांगी थी, जो शुद्ध रूप से प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, न कि किसी की व्यक्तिगत निजता। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकारी अपनी प्रशासनिक नाकामी और फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की आधी-अधूरी व्याख्या कर आवेदकों को गुमराह कर रहे हैं।

      पुराना ढर्रा: पहले तहसीलदार को बचाने में लगी थीं, CS के आदेश के 4 महीने बाद भी रिपोर्ट गोल!

      यह पहला मौका नहीं है जब सूरजपुर SDM शिवानी जायसवाल की कार्यशैली पर उंगलियां उठी हों। इससे पहले भी एक विवादित मामले में एक तहसीलदार सुरेन्द्र पैंकरा को बचाने के लिए गलत और भ्रामक जांच रिपोर्ट तैयार करने के गंभीर आरोप इन पर लग चुके हैं।
      उस मामले की गंभीरता को देखते हुए जब राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) द्वारा उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए, तब भी SDM कार्यालय की टालमटोल नीति जारी रही। आलम यह है कि मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देश के 4 महीने बीत जाने के बाद भी जांच प्रतिवेदन (Inquiry Report) जमा नहीं किया गया है। यह सीधे तौर पर शीर्ष प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना और अपने पद के अहंकार को दर्शाता है।

      निष्पक्ष जांच की उठी मांग, प्रथम अपील और उच्च स्तरीय समिति का रुख करेंगे आवेदक

      प्रशासनिक स्तर पर हो रही इस लीपापोती के खिलाफ अब आरपार की लड़ाई की तैयारी है। एसडीएम कार्यालय के इस मनमाने आदेश के खिलाफ अपर कलेक्टर, सूरजपुर के समक्ष प्रथम अपील दायर की जा चुकी है, जिसमें जनप्रतिनिधि की पात्रता से जुड़े मामले को ‘लोकहित’ साबित करते हुए पूरी फाइल नोटिंग और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई हैं।

      फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने के इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत राज्य स्तरीय हाई पावर कास्ट स्क्रूटनी कमेटी से की जाएगी।जनता के अधिकारों और पारदर्शिता के लिए बने RTI कानून को ढाल बनाकर अपने ही गलत फैसलों को छिपाना किसी भी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की गरिमा के खिलाफ है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शासन के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम पर क्या कड़ा संज्ञान लेते हैं या फिर जिम्मेदार अधिकारी इसी तरह जांचों को ठंडे बस्ते में डालते रहेंगे।

      छात्राओं से अभद्रता मामले में सोनहत CHC के नेत्र सहायक अधिकारी निलंबित, सूरजपुर तय किया गया मुख्यालय…

      हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत स्कूल में नेत्र परीक्षण के दौरान छात्राओं से अभद्र व्यवहार करने के आरोपी नेत्र सहायक अधिकारी (Eye Assistant Officer) आर.बी. दिवाकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं सरगुजा संभाग, डॉ. अनिल कुमार शुक्ला द्वारा की गई है। निलंबन के साथ ही मामले की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
      स्कूल में जांच के दौरान हुई थी घटना
      मिली जानकारी के अनुसार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घुघरा (विकासखंड सोनहत, जिला कोरिया) में RBSK के तहत छात्राओं की आंखों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान सोनहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में पदस्थ नेत्र सहायक अधिकारी आर.बी. दिवाकर पर छात्राओं ने अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए RBSK के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद यादव ने तत्काल सोनहत के खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही BMO ने विद्यालय पहुंचकर छात्राओं और उनके परिजनों की मौजूदगी में बयान दर्ज किए। छात्राओं के लिखित और मौखिक बयानों में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद BMO की रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कोरिया के माध्यम से संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय भेजी गई।
      सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई
      संयुक्त संचालक कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, आर.बी. दिवाकर का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन है। इस आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
      सूरजपुर में रहेगा निलंबन कालीन मुख्यालय
      निलंबन अवधि के दौरान आर.बी. दिवाकर का मुख्यालय कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला-सूरजपुर (छ.ग.) नियत किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन काल के दौरान वे संस्था प्रमुख की लिखित अनुमति के बिना अपना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। नियमों के अनुसार इस अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) देय होगा।

      छत्तीसगढ़ में IFS अधिकारियों का बड़ा तबादला: 24 अफसरों की नवीन पदस्थापना, देखें किसे कहां मिली जिम्मेदारी…

      हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों के स्थानांतरण एवं नवीन पदस्थापना का आदेश जारी किया गया है। राज्यपाल के नाम से विशेष सचिव जे.पी. पाठक द्वारा जारी इस आदेश के तहत कुल 24 प्रशासनिक एवं प्रादेशिक वन अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया गया है।
      प्रमुख अधिकारियों की नवीन पदस्थापनाएं:
      1. गणवीर धम्मशील (2013): विशेष सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, मंत्रालय नवा रायपुर (प्रतिनियुक्ति पर)
      2. उत्तम कुमार गुप्ता (2013): प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) एवं क्षेत्र निदेशक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व, जगदलपुर
      3. दुलेश्वर प्रसाद साहू (2013): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), मनेन्द्रगढ़
      4. पंकज राजपूत (2014): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), रायपुर
      5. प्रभाकर खलखो (2014): प्रभारी वन संरक्षक, कार्य आयोजना वनमंडल, सरगुजा अम्बिकापुर
      6. संदीप बलगा (2015): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), पूर्व भानुप्रतापपुर
      7. मयंक पांडे (2015): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), गरियाबंद
      8. सत्यदेव शर्मा (2015): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), धरमजयगढ़
      9. श्रीनिवास तन्नेटी (2015): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), महासमुंद
      10. जितेन्द्र कुमार उपाध्याय (2015): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), कटघोरा
      11. संजय यादव (2015): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), खैरागढ़
      12. कुमार निशांत (2016): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), मरवाही
      13. पंकज कुमार कमल (2016): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), बलौदाबाजार
      14. पुष्पलता टंडन (2016): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), सारंगढ़-बिलाईगढ़
      15. लोकनाथ पटेल (2016): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), सरगुजा अम्बिकापुर
      16. शशिगानंदन के. (2017): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), कांकेर
      17. अभिषेक जोगावत (2017): उप महाप्रबंधक, छ.ग. राज्य लघु वनोपज संघ नवा रायपुर (प्रतिनियुक्ति पर)
      18. रौनक गोयल (2020): वन उप संरक्षक, कार्यालय प्र.मु.व.सं. एवं वन बल प्रमुख, नवा रायपुर
      19. ग्रीष्मी चांद (2020): छ.ग. राज्य वन विकास निगम (प्रतिनियुक्ति पर)
      20. चंद्रशेखर शंकरसिंग परदेशी (2020): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), कोरिया
      21. दिपेश कपिल (2022): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), बस्तर जगदलपुर
      22. चंद्र कुमार अग्रवाल (2022): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), दुर्ग
      23. ऋषभ जैन (2022): छ.ग. राज्य वन विकास निगम (प्रतिनियुक्ति पर)
      24. विपुल अग्रवाल (2022): वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), सूरजपुर
      यह आदेश प्रशासनिक दृष्टिकोण से तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

      देखें आदेश :

      घुटरापारा व सिंचाई कॉलोनी सहित अंबिकापुर शहर के छः स्थान पर जल्द बनेंगे 33/11 के. वी. के विद्युत उपकेंद्र…..

      हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : अंबिकापुर शहर में विद्युत कटौती एवं विद्युत फाल्ट से शहरवासियों को विगत माहों में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिस कारण जल सप्लाई भी प्रभावित रही। जनता की आक्रोश को देखते हुए महापौर मंजूषा भगत ने पार्षदों व विद्युत विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई। जिसमें विद्युत विभाग द्वारा शहर में विद्युत भार अत्यधिक बढ़ने के कारण विद्युत कटौती व फाल्ट आ रहे हैं। जिसका एक मात्र उपाय शहर के अलग–अलग स्थानों पर विद्युत उपकेंद्र स्थापित करना बताया गया। जिसमें सबसे बड़ी समस्या भूमि उपलब्धता एवं उसका आवंटन है।

      महापौर ने इस कार्य को गंभीरता से लेते हुए विद्युत विभाग व नगर निगम की टीम द्वारा पार्षदों की मांग व उनके सहयोग से (1) गंगापुर वार्ड (2) पुराना बस स्टैंड (राज्य परिवहन डिपो), (3) गहीरा गुरु वार्ड (मठपारा), (4) महामाया पहाड़ (घुटरापारा), (5) डिगमा (शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के पास),  (6) सिंचाई कॉलोनी बंगाली चौक। शहर की कुल छः स्थान पर भूमि चयन किया गया एवं निगम स्वामित्व की भूमि पर तत्काल अनापत्ति प्रदान किया गया।  कलेक्टर महोदय से भूमि आबंटन हेतु आदेश प्रदान हेतु महापौर मंजूषा भगत, सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी जी सहित एमआईसी सदस्य, पार्षद की पूरी टीम ने कलेक्टर महोदय को विद्युत की भीषण समस्या से अवगत कराया। जिसपर कलेक्टर महोदय ने तत्काल उक्त भूमियों पर विद्युत उपकेंद्र स्थापित करने हेतु भूमि आवंटन का आदेश प्रदान कर दिया है।

      जल्द ही अंबिकापुर शहर के छः स्थान पर 33/11 के. वी. के उपकेंद्र निर्माण कार्य “कार्यालय यंत्री (शहर) संभाग छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड अंबिकापुर, जिला- सरगुजा (छत्तीसगढ़)”  द्वारा प्रारंभ किया जाएगा। एवं शहर वासियों को विद्युत से संबंधित गंभीर समस्या से आने वाले कुछ महीनो में राहत मिलेगी।

      उक्त कार्य को गंभीरता से लेने एवं जटिल प्रक्रिया को तत्काल समाधान करने हेतु अंबिकापुर नगर निगम के पार्षदों ने महापौर मंजूषा भगत का आभार व्यक्त किया हैं।

      सरगुजा में 14 वर्षीय आदिवासी छात्रा से दुष्कर्म का फरार आरोपी तरुण जायसवाल पटना से गिरफ्तार, पुलिस टीम अंबिकापुर लाने रवाना…

      हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में 14 वर्षीय आदिवासी नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के मामले में फरार आरोपी तरुण कुमार जायसवाल को आखिरकार बिहार की राजधानी पटना से हिरासत में ले लिया गया है। आरोपी स्थानीय उप सरपंच का पति है और घटना के बाद से अपनी एक महिला मित्र के साथ पटना में छिपा हुआ था। सरगुजा पुलिस की टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर अंबिकापुर लाने के लिए पटना रवाना हो चुकी है।

      दरअसल कक्षा 7वीं में पढ़ने वाली पीड़ित छात्रा 20 जुलाई को उप सरपंच के घर घरेलू कामकाज और खाना बनाने गई थी। इसी दौरान आरोपी तरुण जायसवाल ने उसे मोबाइल पर अश्लील वीडियो दिखाया और दो बार दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। छात्रा द्वारा विरोध करने पर आरोपी ने उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि शोर न मच सके। वारदात के अगले दिन (21 जुलाई) आरोपी ने मामले को दबाने की नीयत से पीड़िता के पिता को 8 लाख रुपये देने का लालच दिया और एक पंचनामा भी तैयार करवाया। आरोपी ने घटना की जानकारी किसी को देने पर पीड़िता और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी थी।

      100 से अधिक ग्रामीणों ने थाने पहुंचकर कराई FIR
      घटना की जानकारी मिलते ही 22 जुलाई को लगभग 100 ग्रामीणों ने कोतवाली थाने पहुंचकर आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस दबिश से ठीक पहले आरोपी अंबिकापुर के चोपड़ापारा स्थित अपने फ्लैट से फरार हो गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा एसएसपी राजेश अग्रवाल ने आरोपी पर 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया था और उसकी 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक जब्त कर ली थी।
      उग्र प्रदर्शन और पुलिस पर लगे थे गंभीर आरोप
      आरोपी की गिरफ्तारी न होने से क्षेत्र में आक्रोश बढ़ गया था। आरोपी के एक एसडीओपी (SDOP) और थाना प्रभारी (TI) का करीबी रिश्तेदार होने के चलते पुलिस पर उसे संरक्षण देने के आरोप लग रहे थे। बुधवार को सर्व आदिवासी समाज, भाजपा, कांग्रेस और स्थानीय ग्रामीणों ने एसपी कार्यालय का उग्र घेराव किया। सर्व आदिवासी समाज ने आरोपी की जानकारी देने वाले को 1 लाख रुपये का इनाम देने और उसे भगाने में मदद करने वालों पर भी मामला दर्ज करने की मांग की थी।
      सर्विलांस की मदद से पटना में पुलिस को मिली सफलता
      बुधवार देर रात बिहार पुलिस ने सर्विलांस की मदद से पटना में छापेमारी कर आरोपी को धर दबोचा। पुलिस आरोपी की महिला मित्र के मोबाइल पर लगातार नजर रख रही थी। जैसे ही महिला मित्र का फोन चालू हुआ, पुलिस को सटीक लोकेशन मिल गई। सरगुजा पुलिस अब आरोपी को अंबिकापुर लाकर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।

      सूरजपुर में तहसीलदार की कार ने मारी खड़ी SUV को टक्कर, थाने के सामने कांग्रेसियों और ग्रामीणों का चक्काजाम…


      हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/ओडगी: सूरजपुर जिले के बिहारपुर में मंगलवार को उस वक्त भारी बवाल हो गया, जब बिहारपुर में पदस्थ तहसीलदार करमचंद जटवार पर शराब के नशे में अपनी कार से सड़क किनारे खड़ी एक एसयूवी को जोरदार टक्कर मारने और मालिक से गाली-गलौज करने का गंभीर आरोप लगा। घटना से उग्र कांग्रेस कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने बिहारपुर थाने के सामने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
      कार को पहुंचा भारी नुकसान, अभद्रता का आरोप
      मिली जानकारी के अनुसार, बिहारपुर थाने के सामने कांग्रेस नेता गोरखनाथ पाठक की एसयूवी खड़ी थी। इसी दौरान तहसीलदार करमचंद जटवार अपनी ब्रेजा कार (क्रमांक CG 16 CR 8055) से वहां पहुंचे और उनकी अनियंत्रित कार ने खड़ी एसयूवी को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि वाहन को काफी नुकसान पहुंचा।
      पीड़ित कांग्रेस नेता गोरखनाथ पाठक का आरोप है कि जब उन्होंने तहसीलदार से क्षतिग्रस्त वाहन की मरम्मत कराने की बात कही, तो उन्होंने बात सुनने के बजाय गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा, “मेरा वाहन भी बनवा दो, फिर तुम्हारा भी बनवा देंगे।” आरोप है कि इस दौरान अधिकारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज भी की।
      मेडिकल जांच और एफआईआर की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग
      घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीण मौके पर जुट गए। उन्होंने थाने के ठीक सामने चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि तहसीलदार का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया जाए ताकि शराब सेवन की पुष्टि हो सके, तथा उनके खिलाफ लिखित आवेदन के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
      पुलिस के आश्वासन पर खुला जाम
      थाने के सामने चक्काजाम होने से इलाके में आवागमन पूरी तरह ठप्प हो गया। सूचना मिलते ही चांदनी थाना प्रभारी रामप्रताप साहू पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाया। पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच और उचित वैधानिक कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिए जाने के बाद ही ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त किया।
      पीड़ित गोरखनाथ पाठक ने बिहारपुर थाने में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराकर नुकसान की भरपाई और दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

      हिंद स्वराष्ट्र का ‘महाइम्पैक्ट’: जिस मामले में समाचार पत्र को भेजा गया था मानहानि का नोटिस, उसमें दर्ज हुई तहसीलदार, पटवारी और भू-माफिया पर FIR…

      हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सच्चाई की आवाज को दबाने की चाहे कितनी भी कोशिश कर ली जाए, लेकिन आखिरकार जीत सत्य और निष्पक्ष पत्रकारिता की ही होती है। करीब एक वर्ष पूर्व ‘हिंद स्वराष्ट्र’ ने सूरजपुर जिले के भैयाथान क्षेत्र में 75 वर्षीया जीवित वृद्धा को कागजों में “मृत” बताकर करोड़ों की जमीन हड़पने के जिस संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया था, उस पर अब कानून का सबसे बड़ा शिकंजा कस गया है।
      जिस खबर को उजागर करने पर ‘हिंद स्वराष्ट्र’ समाचार पत्र को दबाने के लिए मानहानि (Defamation) का कानूनी नोटिस थमाया गया था और जिस मामले में तत्कालीन तहसीलदार पर गाज गिरने के बाद उन्हें निलंबित कर अन्य जिले में बहाल किया गया था, उस पूरे मामले में पुलिस ने बीएनएस (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR No. 0185/2026) दर्ज कर ली है।
      क्या था पूरा मामला और ‘हिंद स्वराष्ट्र’ का खुलासा?
      करीब एक साल पहले ‘हिंद स्वराष्ट्र’ की विशेष पड़ताल में यह सनसनीखेज सच सामने आया था कि ग्राम कोयलारी निवासी वृद्धा शैलकुमारी देवी (75 वर्ष) की स्व-अर्जित भूमि (ग्राम करकोटी खसरा नं. 45/3, रकबा 0.405 हे.) को हड़पने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची गई। 1967 में ‘मौत’, 1976 में ‘खरीदी’भू-माफिया सौतेले बेटे विरेन्द्र नाथ दुबे ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर दावा किया कि शैलकुमारी की मृत्यु 09 फरवरी 1967 को हो चुकी है। जबकि हकीकत यह थी कि वृद्धा ने यह जमीन 1976 में खरीदी थी और वे आज भी जीवित हैं। तत्कालीन तहसीलदार संजय कुमार राठौर  और हलका पटवारी एंजलिना भगत ने बिना किसी भौतिक सत्यापन या जांच के, महज एक महीने के भीतर 27/12/2024 को जीवित वृद्धा का नाम विलोपित कर सौतेले बेटे का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया। नामांतरण के तुरंत बाद इस विवादित जमीन का एक बड़ा टुकड़ा तहसीलदार संजय कुमार राठौर की पत्नी शारदा राठौर के नाम पर भी नामांतरित करा लिया गया।
      जब खबर छापने पर भेजा गया मानहानि का नोटिस
      जब ‘हिंद स्वराष्ट्र’ ने इस पूरे प्रशासनिक-भू माफिया गठजोड़ की परतें उघेड़ी थीं, तब बौखलाए आरोपियों और प्रशासनिक दबाव तंत्र ने समाचार पत्र की आवाज दबाने के लिए मानहानि का नोटिस भेजा था।
      तत्कालीन तहसीलदार को शासन स्तर पर निलंबित किया गया और बाद में बहाली देकर दूसरे जिले में स्थानांतरित कर दिया गया। लेकिन ‘हिंद स्वराष्ट्र’ अपनी खबर और तथ्यों पर पूरी मजबूती से डटा रहा।
      उच्च स्तरीय जांच में मुहर, अब FIR दर्ज
      कलेक्टर सूरजपुर और संभागायुक्त सरगुजा द्वारा गठित संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट में ‘हिंद स्वराष्ट्र’ के खुलासे के एक-एक शब्द सत्य साबित हुए। जांच रिपोर्ट के आधार पर थाना झिलमिली में तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी और मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है:
      धारा 318(4):धोखाधड़ी एवं छल
      धारा 338: कूटचरित (फर्जी) दस्तावेज तैयार करना
      धारा 336(3) व 340(2): जाली दस्तावेजों का असली रूप में उपयोग
      धारा 61(2): आपराधिक षड्यंत्र
      नामजद आरोपी
      1. विरेन्द्र नाथ दुबे (सौतेला बेटा)
      2. संजय कुमार राठौर (तत्कालीन तहसीलदार, भैयाथान)
      3. एंजलिना भगत (पटवारी)
      4. कमलेश दुबे
      पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर फिर लगी मुहर
      मानहानि का नोटिस, प्रशासनिक दबाव और तबादलों के फेरबदल के बावजूद ‘हिंद स्वराष्ट्र’ की इस पड़ताल ने साबित कर दिया कि निडर और निष्पक्ष पत्रकारिता के सामने भ्रष्टाचारियों के हौसले पस्त होकर रहते हैं।
      पीड़ित 75 वर्षीया वृद्धा शैलकुमारी देवी को न्याय दिलाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक मोड़ है। अब देखना यह है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस प्रशासन इन रसूखदार आरोपियों की गिरफ्तारी कब तक करता है

      जिले के दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्रों में मानव संसाधन की कमी होगी दूर, डीएमएफ मद से 26 पैरामेडिकल पदों की स्वीकृति…

      हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। कलेक्टर अजीत वसंत ने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से विभिन्न पैरामेडिकल पदों पर एकमुश्त मानदेय के आधार पर नियुक्ति किए जाने हेतु 26 पदों की स्वीकृति प्रदान की है।

      डीएमएफ निधि के माध्यम से दूरस्थ स्वास्थ्य संस्थाओं एवं एकल स्वास्थ्य संस्थाओं में मरीजों को बेहतर उपचार, जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा यह निर्णय लिया गया है। पैरामेडिकल पदों की रिक्त पदों के विरूद्ध मानव संसाधनों में होने वाले कमी को दूर करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। इस पहल से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके निकट ही बेहतर एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।


      स्वीकृत पदों की जानकारी–

      प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला खनिज संस्थान न्यास मद से स्वीकृत पदों में फार्मासिस्ट के 6 पद, स्टाफ नर्स के 3 पद, एएनएम के 6 पद, आरएचओ (पुरुष) के 2 पद, ओटी टेक्निशियन का 1 पद तथा ड्रेसर के 8 पद सहित कुल 26 पैरामेडिकल पदों पर नियुक्ति की जाएगी।
      स्वीकृत पदों में विकासखंण्ड अम्बिकापुर अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र नवानगर ड्रेसर 01 पद, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र दरिमा ड्रेसर 01 पद, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रामपुर फार्मासिस्ट 01 पद एवं स्टाफ नर्स 01 पद हैं। विकासखण्ड बतौली अंतर्गत उप स्वास्थ्य केन्द्र पोकसरी ए.एन.एम के 01 पद हैं तथा विकासखण्ड लखनपुर अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लहपटरा में फार्मासिस्ट 01 पद, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कुन्नी में ड्रेसर के 01 पद है। विकास खण्ड धौरपुर अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बरगीडीह में फार्मासिस्ट 01 पद, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रघुनाथपुर में ड्रेसर के 01 पद, उप स्वास्थ्य केंद्र नागम ए.एन.एम के 01 पद, उप स्वास्थ्य केन्द्र चितरपुर में ए.एन.एम के 01 पद हैं।  विकासखण्ड मैनपाट अंतर्गत उप स्वास्थ्य केन्द्र चैनपुर में आर.एच.ओ. पुरूष 01 पद, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कमलेश्वरपुर में ड्रेसर 01 पद हैं। विकासखंण्ड सीतापुर अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सीतापुर में फार्मासिस्ट 01 पद एवं ड्रेसर 01 पद, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भूसू में फार्मासिस्ट 01 पद एवं स्टाफ नर्स 01 पद है। विकास खण्ड उदयपुर अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र केदमा में फार्मासिस्ट 01 पद एवं ड्रेसर 01 पद, उप स्वास्थ्य केन्द्र पेन्डरखी में ए.एन.एम के 01 पद, उप स्वास्थ्य केन्द्र करौन्धी में ए.एन.एम के 01 पद, उप स्वास्थ्य केन्द्र सलका में ए.एन.एम के 01 पद, उप स्वास्थ्य केन्द्र मरेया में आर.एच.ओ. पुरूष 01 पद है। वहीं शहरी अम्बिकापुर अंतर्गत शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नवापारा में ओटी टेक्निशियन के 01 पद, ड्रेसर 01 पद एवं स्टाॅफ नर्स 01 पद हैं। इन नियुक्तियों से दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को उपचार एवं जांच की बेहतर सुविधा मिलेगी।

      डीईओ कार्यालय में वित्तीय गड़बड़ी की शिकायत पर हड़कंप: अपर कलेक्टर ने मारा छापा, कर्मचारी के छुट्टी पर जाने से स्टोर रूम सील, जांच अधूरी…

      हिंद स्वराष्ट्र रामानुजगंज: जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में कथित वित्तीय अनियमितता के बड़े मामले ने तूल पकड़ लिया है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। मंगलवार को अपर कलेक्टर प्रमोद गुप्ता अचानक डीईओ कार्यालय पहुंचे और अभिलेखों व भंडार गृह (स्टोर रूम) के सत्यापन की कार्रवाई शुरू की। हालांकि, एन वक्त पर संबंधित स्टोर प्रभारी कर्मचारी के अवकाश पर चले जाने के कारण भौतिक सत्यापन नहीं हो सका, जिससे जांच प्रक्रिया अटक गई है।
      अपर कलेक्टर पहुंचे जांच करने, खुलासे से मचा हड़कंप
      मीडिया से चर्चा करते हुए अपर कलेक्टर प्रमोद गुप्ता ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी और अनियमितताओं की लिखित शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया और जांच के निर्देश दिए। जांच के क्रम में टीम सीधे डीईओ कार्यालय पहुंची और प्रारंभिक दस्तावेजों को खंगाला।
      स्टोर रूम का भौतिक सत्यापन अटका
      जांच टीम की मुख्य कार्यसूची में भंडार गृह का भौतिक सत्यापन शामिल था। इसके तहत रजिस्टरों और कागजातों में दर्ज सामान का स्टोर में रखे असल सामान से मिलान किया जाना था। लेकिन संबंधित स्टोर प्रभारी कर्मचारी के अचानक छुट्टी पर चले जाने के कारण ताला नहीं खुल सका। जब डीईओ मनीराम यादव से इस संबंध में पूछताछ की गई, तो उन्होंने बताया कि प्रभारी कर्मचारी अवकाश पर है, जिस वजह से सत्यापन प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित करना पड़ा है।
      प्रारंभिक जांच में अनियमितता के संकेत
      अपर कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच और दस्तावेजों के अवलोकन में वित्तीय अनियमितता के ठोस संकेत मिले हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि बिना पूरे रिकॉर्ड की पड़ताल और स्टोर रूम के भौतिक सत्यापन के किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
      फिलहाल, प्रशासन प्रभारी कर्मचारी के लौटते ही भंडार गृह की सीलबंद जांच की तैयारी में है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से शिक्षा विभाग में हड़कंप का माहौल व्याप्त है।

      वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: अंतरराज्यीय हाथी दांत तस्कर गिरोह का भंडाफोड़, हाथी दांत (जबड़े) के साथ 3 आरोपी गिरफ्तार…

      हिंद स्वराष्ट्र रामानुजगंज (बलरामपुर)। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में वन विभाग और वाइल्ड लाइफ क्राइम ब्यूरो की संयुक्त टीम ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। अंतरराज्यीय स्तर पर हाथी के दांत (जबड़े) की तस्करी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए टीम ने 3 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
      मुखबिर की सूचना पर धर्मशाला में दबिश
      मिली जानकारी के अनुसार, वन मंत्री केदार कश्यप और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में संगठित वन अपराध की रोकथाम के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में ‘वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो’ (मध्य क्षेत्र भोपाल), ‘राज्य उड़न दस्ता दल’ (रायपुर) और ‘वनमंडल बलरामपुर’ की संयुक्त टीम को 3 अगस्त 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी।
      सूचना के मुताबिक, रामानुजगंज में कन्हर नदी किनारे स्थित आमंत्रण धर्मशाला के रूम नंबर 205 में एक संदिग्ध व्यक्ति हाथी के दांत की तस्करी के उद्देश्य से ठहरा हुआ था। वन विभाग की टीम ने तत्काल धर्मशाला के कमरे में छापेमारी की। जांच के दौरान एक बैग से 3 नग हाथी दांत (जबड़ा) बरामद हुआ और मौके पर 3 संदिग्धों को पकड़ा गया।
      पकड़े गए आरोपी छत्तीसगढ़ और झारखंड राज्य से संबंध रखते हैं:
      1. संतोष कुमार विश्वकर्मा (उम्र 42 वर्ष) – निवासी तुकबेरा, थाना नवाबजार, जिला पलामू (झारखंड)
      2.अजय कुमार गुप्ता (उम्र 49 वर्ष) – निवासी वार्ड क्र. 11, रामानुजगंज, जिला बलरामपुर (छत्तीसगढ़)
      3.सतेन्द्र कुमार रजक (उम्र 50 वर्ष) – निवासी वार्ड क्र. 05, रामानुजगंज, जिला बलरामपुर (छत्तीसगढ़)


      न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी
      परिसर रक्षक रामानुजगंज द्वारा आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 21972/11 दर्ज कर जब्ती की कार्रवाई की गई। पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।
      इसके बाद वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं (9, 39, 48(क), 50, 51, 52) के तहत कानूनी कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामानुजगंज के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में अग्रिम विवेचना जारी है।

      छत्तीसगढ़ के 1.60 लाख LB संवर्ग शिक्षकों को झटका: 2018 के संविलियन से ही गिना जाएगा सेवाकाल, पहली नियुक्ति से पेंशन-ग्रेच्युटी का दावा खारिज…

      हिंद स्वराष्ट्र रायपुर : छत्तीसगढ़ के लगभग 1.60 लाख शिक्षक (एलबी) संवर्ग की वर्षों पुरानी मांग पर राज्य सरकार ने पूर्ण विराम लगाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है कि शिक्षकों को पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना शिक्षाकर्मी के रूप में हुई पहली नियुक्ति की तारीख से नहीं, बल्कि 1 जुलाई 2018 (संविलियन की तिथि) से की जाएगी। सरकार का यह फैसला प्रदेशभर के शिक्षकों के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
      2018 से पहले की 10–15 साल की सेवा शून्य
      सरकार के इस निर्णय का सीधा असर उन शिक्षकों पर पड़ेगा जिन्होंने 10 से 15 वर्षों तक पंचायत और नगरीय निकायों के तहत शिक्षाकर्मी के रूप में सेवाएं दी थीं।
      शासकीय दर्जा 2018 से : सरकार का तर्क है कि संविलियन से पूर्व शिक्षक निकाय/पंचायत के कर्मचारी थे, न कि राज्य शासन के नियमित कर्मचारी। अतः उस अवधि को शासकीय सेवा में नहीं जोड़ा जा सकता।
      समान मानी जाएगी सेवा: यदि किसी शिक्षक की नियुक्ति 2005 में हुई हो और किसी की 2012 में, लेकिन दोनों का संविलियन 1 जुलाई 2018 को हुआ है, तो दोनों की शासकीय सेवा अवधि की गणना एक ही तारीख से होगी।
      उदाहरण से समझें नुकसान
      यदि कोई शिक्षक 2008 में शिक्षाकर्मी बना और 1 जुलाई 2018 को उसका संविलियन हुआ। वह वर्ष 2038 में सेवानिवृत्त होता है, तो उसकी कुल सेवा 30 वर्ष न मानकर केवल 20 वर्ष (2018 से 2038) ही मानी जाएगी। शुरुआती 10 वर्षों का कार्यकाल पेंशन व वित्तीय लाभों से पूरी तरह बाहर रहेगा।
      हाई कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार का अंतिम निर्णय
      शिक्षकों ने पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 23 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को संवैधानिक व मानवीय पहलुओं के आधार पर विचार करने का निर्देश दिया था। सरकार ने मामले का विस्तृत परीक्षण करने के बाद याचिकाकर्ताओं की मांग को खारिज करते हुए अपना अंतिम आदेश जारी किया।
      शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश
      सरकार के इस फैसले से प्रदेशभर के शिक्षक संगठनों में तीव्र असंतोष व्याप्त है। संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों तक सरकारी स्कूलों में सेवाएं देने के बावजूद शुरुआती कार्यकाल को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस फैसले से शिक्षकों को सेवानिवृत्ति के समय भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, जिसको लेकर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है।

      अंबिकापुर जनपद CEO राजेश सिंह सेंगर को हटाने की मांग, सरपंच संघ का फूटा गुस्सा: कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 7 दिन का अल्टीमेटम…

      हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : जनपद पंचायत अंबिकापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) राजेश सिंह सेंगर और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच विवाद अब चरम पर पहुँच गया है। CEO को तत्काल पद से भारमुक्त करने की मांग को लेकर जिला सरपंच संघ ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जिलेभर के सरपंच एकजुट होकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुँचे और कलेक्टर अजीत बसंत को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच तथा स्थानांतरण आदेश के तत्काल पालन की मांग की।
      सरपंच संघ ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले सात दिनों के भीतर CEO को अंबिकापुर जनपद पंचायत से भारमुक्त नहीं किया गया, तो पूरे जिले के सरपंच काम बंद कर धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
      कार्यशैली पर गंभीर आरोप, अवैध मांग और दबाव का दावा
      कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में सरपंचों ने CEO की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। संघ का आरोप है कि विभिन्न ग्राम पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आए दिन अनावश्यक जांच, प्रशासनिक दबाव और कथित अवैध मांगों के कारण मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
      सरपंचों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ इस तरह का पक्षपातपूर्ण और दबाव बनाने वाला रवैया बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संघ ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
      सरईटिकरा सरपंच की गिरफ्तारी से भड़का आक्रोश
      इस पूरे आंदोलन और आक्रोश के पीछे ग्राम पंचायत सरईटिकरा के सरपंच पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई को मुख्य वजह बताया जा रहा है। सरईटिकरा सरपंच पर गबन का आरोप लगाकर पुलिस और प्रशासन द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर एसडीएम न्यायालय में पेश किया गया था। इस कार्रवाई के बाद से ही जिलेभर के सरपंचों में गहरा असंतोष और आक्रोश व्याप्त था, जो सोमवार को कलेक्ट्रेट के घेराव के रूप में सामने आया।
      अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन सरपंचों के इस 7 दिवसीय अल्टीमेटम पर क्या रुख अपनाता है और मामले को शांत कराने के लिए क्या कदम उठाता है।

      राजहंस ट्रेवल्स की बस से प्रतिबंधित एनालॉग पनीर जब्त, अवैध परिवहन पर प्रकरण दर्ज…

      हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : राज्य शासन द्वारा जनस्वास्थ्य एवं उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अमानकीकृत डेयरी एनालॉग (एनालॉग पनीर) एवं अन्य गैर-दुग्ध किन्तु दुग्ध उत्पाद सदृश खाद्य पदार्थों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण एवं विक्रय पर लगाए गए प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन, सरगुजा द्वारा विशेष प्रवर्तन अभियान प्रारंभ कर दिया गया है। अभियान के प्रथम ही दिन विभाग ने कार्रवाई करते हुए राजहंस ट्रेवल्स की एक यात्री बस से प्रतिबंधित श्रेणी का पनीर जब्त किया तथा अवैध परिवहन के संबंध में प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।

      उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(क) के अंतर्गत राज्य की संपूर्ण भौगोलिक सीमा में अमानकीकृत डेयरी एनालॉग (एनालॉग पनीर) तथा अन्य गैर-दुग्ध किन्तु दुग्ध उत्पाद सदृश खाद्य पदार्थों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण एवं विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया है। यह आदेश 31 जुलाई 2026 को राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही प्रभावी हो गया है।

      इसी आदेश के अनुपालन में खाद्य एवं औषधि प्रशासन, सरगुजा की प्रवर्तन टीम रविवार प्रातः लगभग 5 बजे नए बस स्टैंड, अंबिकापुर पहुंची, जहां बसों एवं अन्य वाहनों की सघन जांच की गई। जांच के दौरान राजहंस ट्रेवल्स की बस क्रमांक CG 15 EC 0828 से प्रतिबंधित श्रेणी के पनीर का परिवहन किया जाना पाया गया। टीम ने तत्काल उक्त सामग्री को जब्त करते हुए अवैध परिवहन के संबंध में प्रकरण दर्ज किया तथा नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी।

      विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष जांच अभियान केवल अंबिकापुर के नए बस स्टैंड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिले में प्रवेश करने वाले सभी प्रमुख मार्गों एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी रखी जाएगी। बस, जीप, मालवाहक वाहन सहित अन्य परिवहन साधनों की नियमित एवं आकस्मिक जांच की जाएगी, ताकि प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों का किसी भी माध्यम से परिवहन रोका जा सके।

      खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम द्वारा जिले के सभी डेयरी उत्पादों के थोक एवं खुदरा विक्रेताओं तथा अन्य खाद्य कारोबार संचालकों को नोटिस वितरित कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जा रहे हैं। व्यापारियों को स्पष्ट रूप से समझाइश दी गई है कि किसी भी प्रकार का पनीर अथवा अन्य दुग्ध उत्पाद बिना वैध स्रोत, क्रय बिल एवं आपूर्तिकर्ता की जानकारी के क्रय तथा विक्रय न करें। यदि कोई खाद्य कारोबार संचालन स्रोत की जानकारी उपलब्ध कराए बिना ऐसे उत्पादों का कारोबार करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

      विभाग ने जिले के सभी बस संचालकों, ट्रांसपोर्टरों एवं परिवहन एजेंसियों से भी अपील की है कि वे प्रतिबंधित एनालॉग पनीर अथवा अन्य प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के परिवहन में किसी भी प्रकार का सहयोग न करें। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित परिवहनकर्ता सहित अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भी विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

      आज की प्रवर्तन कार्रवाई में खाद्य एवं औषधि प्रशासन, सरगुजा के खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री लक्ष्मीकांत यादव एवं श्री तुलेश्वर सिंह तथा पुलिस विभाग से श्री राजेंद्र बाखला उपस्थित रहे।

      खाद्य एवं औषधि प्रशासन, सरगुजा ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं प्रतिबंधित अथवा संदिग्ध एनालॉग पनीर या अन्य प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों का निर्माण, भंडारण, परिवहन अथवा विक्रय होता हुआ दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को दें। जनसहयोग से ही उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी नियमों का प्रभावी पालन कराया जा सकता है।

      प्रशासनिक लापरवाही या सोची-समझी साजिश? अंबिकापुर में बिना गबन किए सरपंच गिरफ्तार, कांग्रेस ने खोला मोर्चा…

      हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर (सरगुजा): अंबिकापुर जनपद पंचायत का एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पुलिस की जल्दबाजी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला गबन का था किसी और गांव के सरपंच का, लेकिन पुलिस ने किसी दूसरे ही गांव के बेकसूर सरपंच को सुबह-सुबह खेत से उठा लिया। जब पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलीं, तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और अब अपनी नाकामी छुपाने के लिए अजीबो-गरीब तर्क दिए जा रहे हैं।
      खेत में कर रहे थे काम, न कपड़े बदलने दिए न मूंह धोने दिया
      मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सरईटिकरा के सरपंच और अंबिकापुर सरपंच संघ के अध्यक्ष रामसाय मिंज अपने खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान दरिमा थाने की पुलिस पहुंची और उन्हें किसी खूंखार अपराधी की तरह उठा लिया। परिजनों और सरपंच का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें न तो कपड़े बदलने का मौका दिया और न ही मुंह-हाथ धोने दिया।
      जब उन्हें अंबिकापुर एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया, तब जाकर खुलासा हुआ कि उन्हें किस मामले में पकड़ा गया है।
      यह है पूरा मामला: गबन कहीं और, कार्रवाई कहीं और
      वर्ष 2020-21 के दौरान ग्राम चीताबहार में सामुदायिक शौचालय निर्माण में ₹1,75,093 की अंतर राशि के गबन का मामला सामने आया था। उस समय चीताबहार के तात्कालिक सरपंच शिवनाथ भगत और सचिव देवेंद्र सिंह थे।
      चौंकाने वाली बात यह है कि 23 जुलाई 2024 को चीताबहार के नए सचिव ललित ने लिखित रूप में जनपद सीईओ को सूचित कर दिया था कि गबन के समय वहां के सरपंच शिवनाथ भगत थे। इसके अलावा, रामसाय मिंज ने भी पहले ही स्पष्टीकरण दे दिया था कि वे ग्राम सरईटिकरा के सरपंच हैं, चीताबहार के नहीं।
      इसके बावजूद, जनपद पंचायत के अधिकारियों की लापरवाही कहें या दुर्भावना, उन्होंने वसूली और गिरफ्तारी का वारंट सरईटिकरा के सरपंच रामसाय मिंज के नाम पर जारी करवा दिया।
      बेकसूर सरपंच का कड़ा रुख “मुझे जमानत नहीं, जेल भेजो”
      अपनी बेगुनाही और प्रशासनिक दुर्व्यवहार से आहत रामसाय मिंज ने एसडीएम कोर्ट में दस्तावेजों का सबूत देते हुए जमानत लेने से साफ़ इनकार कर दिया। उन्होंने एसडीएम से स्पष्ट कहा “जब मैंने कोई अपराध किया ही नहीं, तो जमानत कैसी? मुझे सीधे जेल भेज दिया जाए।”
      सरपंच के इस कड़े रुख और स्वाभिमानी फैसले के बाद एसडीएम कार्यालय और जनपद प्रशासन में हड़कंप मच गया।
      कांग्रेसियों ने घेरा एसडीएम दफ्तर, सीईओ को हटाने की मांग
      घटना की खबर फैलते ही पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता, ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष विनय शर्मा, दरिमा ब्लॉक अध्यक्ष नारद गुप्ता, जनपद अध्यक्ष विक्रम सोनपाकर और उपाध्यक्ष सतीश यादव सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता एसडीएम कार्यालय पहुंच गए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने जनपद सीईओ को फोन कर अपनी गलती तुरंत सुधारने की हिदायत दी। पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता ने इसे महज़ ‘तकनीकी त्रुटि’ मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह कांग्रेस समर्थित जनप्रतिनिधि को नीचा दिखाने और अपमानित करने की एक सोची-समझी साजिश है।
      कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि जनपद पंचायत के सीईओ इस कृत्य के लिए लिखित में माफी मांगें और शासन उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर कड़ा एक्शन ले।
      गलती मानकर भी पल्ला झाड़ रहा प्रशासन
      बवाल बढ़ता देख जनपद पंचायत अंबिकापुर ने आनन-फानन में राजस्व अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को पत्र लिखकर सफाई दी कि “रिकॉर्ड में चीताबहार के सरपंच के रूप में रामसाय का नाम दर्ज होने के कारण यह चूक हुई।” हालांकि, अपनी इतनी बड़ी प्रशासनिक नाकामी पर माफी मांगने के बजाय अधिकारी यह बेतुका तर्क दे रहे हैं कि रामसाय मिंज ने खुद रिकॉर्ड दुरुस्त क्यों नहीं कराया।
      यह घटना यह साबित करने के लिए काफी है कि अंबिकापुर जनपद पंचायत के अधिकारियों को यह तक नहीं पता कि उनके क्षेत्र की पंचायतों का असली जनप्रतिनिधि कौन है। अब देखना यह होगा कि इस घोर लापरवाही पर जिला प्रशासन दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है।

      सूरजपुर पुलिस विभाग में तबादले कई थाना/चौकियों के प्रभारियों के हुए तबादले, देखें आदेश…

      हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सूरजपुर जिले के नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने आज दो अलग–अलग आदेश जारी कर 15 थाना/चौकियों के प्रभारियों और 18 आरक्षक और प्रधान आरक्षकों के तबादले किए हैं।

      देखें आदेश :

      वीएसके ऐप में तकनीकी त्रुटियों का होगा शीघ्र समाधान, तकनीकी समस्या के कारण किसी शिक्षक का वेतन नहीं कटेगा : शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव

      हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा है कि शिक्षक संगठनों एवं शिक्षकों द्वारा VSK ऐप में आ रही तकनीकी त्रुटियों एवं एरर संबंधी शिकायतों को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि VSK ऐप में आने वाली तकनीकी समस्याओं के कारण किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं काटा जाएगा। शिक्षकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यादव ने बताया कि संबंधित अधिकारियों एवं तकनीकी टीम को VSK ऐप में आ रही सभी समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि 15 अगस्त तक ऐप में आ रही तकनीकी खामियों का समाधान कर इसे पूरी तरह सुचारु बनाया जाए, ताकि शिक्षकों को बिना किसी परेशानी के अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की सुविधा मिल सके। शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के लगभग 1 लाख 75 हजार शिक्षकों में से लगभग डेढ़ लाख शिक्षक लगभग 85 प्रतिशत शिक्षक प्रतिदिन VSK ऐप के माध्यम से अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि प्रदेश के शिक्षक नई तकनीक को अपनाते हुए शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं आधुनिक बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शिक्षक केवल शिक्षण कार्य ही नहीं, बल्कि डिजिटल व्यवस्था को सफल बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। सरकार उनके इस सहयोग, अनुशासन और समर्पण का सम्मान करती है। शिक्षकों के सुझावों और अनुभवों के आधार पर VSK ऐप को और अधिक सरल, उपयोगी एवं प्रभावी बनाया जाएगा। गजेंद्र यादव ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों के सम्मान, सुविधा और हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यदि किसी शिक्षक को तकनीकी कारणों से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में कठिनाई आती है, तो उसके हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी। किसी भी शिक्षक को तकनीकी खामी का खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा। उन्होंने सभी शिक्षकों से अपील की कि वे पूर्व की भांति VSK ऐप का उपयोग करते रहें तथा यदि किसी प्रकार की तकनीकी समस्या या सुझाव हो तो उसे संबंधित अधिकारियों तक अवश्य पहुँचाएँ। सरकार प्रत्येक सुझाव का सकारात्मक परीक्षण कर आवश्यक सुधार करेगी, ताकि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी एवं तकनीक-सक्षम बन सके।

      E20 पेट्रोल से इंजन बदलने की जरूरत नहीं, बदलने पड़ सकते हैं कुछ मामूली पार्ट्स: संसद में नितिन गडकरी का बड़ा बयान…

      हिंद स्वराष्ट्र नई दिल्ली: संसद के सत्र के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल मिश्रित ई-20 (E-20) पेट्रोल को लेकर देश भर के वाहन चालकों की सबसे बड़ी चिंता को दूर किया है। गडकरी ने स्पष्ट किया है कि ई-20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से गाड़ियों के पूरे इंजन को बदलने (Engine replacement) की कोई आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि पुरानी गाड़ियों में इस फ्यूल के हिसाब से कुछ छोटे-मोटी स्पेयर पार्ट्स बदलने पड़ सकते हैं।
      सदन में क्या बोले नितिन गडकरी?
      संसद में ई-20 ईंधन की अनुकूलता और पुरानी गाड़ियों पर इसके असर को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल और इथेनॉल ब्लेंडिंग भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए बेहद जरूरी है।
      उन्होंने बताया, “जनता के बीच यह गलतफहमी फैलाई जा रही है कि ई-20 ईंधन से गाड़ियों के इंजन खराब हो जाएंगे और पूरे इंजन को बदलना पड़ेगा। यह बिल्कुल निराधार है। गाड़ियों में किसी भी प्रकार का बड़ा बदलाव या इंजन रिप्लेसमेंट की जरूरत नहीं है। ई-20 पेट्रोल का इस्तेमाल सुरक्षित है, केवल कुछ रबर या प्लास्टिक के पार्ट्स जो पेट्रोल के संपर्क में आते हैं, उन्हें आवश्यकता पड़ने पर बदला जा सकता है।”
      क्यों महसूस हो रही है पार्ट्स बदलने की जरूरत?
      विशेषज्ञों और केंद्रीय मंत्री के अनुसार, ई-20 ईंधन में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। इथेनॉल में हल्की संक्षारक (corrosive) विशेषताएं होती हैं, जो पारंपरिक पेट्रोल के मुकाबले थोड़ी अलग होती हैं वर्ष 2023 से पहले बने वाहनों के रबर होज पाइप, गैस्केट और कुछ फ्यूल लाइन्स साधारण पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन किए गए थे। इथेनॉल के लंबे समय तक संपर्क में रहने से इन रबर या प्लास्टिक कंपोनेंट्स में घिसावट हो सकती है। इसलिए नियमित सर्विसिंग के दौरान केवल इन सस्ते और छोटे पार्ट्स (Rubber & Plastic components) को अपग्रेड करने की सलाह दी जाती है।


      नए वाहन पूरी तरह तैयार

      अप्रैल 2023 के बाद बाजार में आए लगभग सभी नए वाहन (BS6 Phase-2) पहले से ही ई-20 कॉम्प्लाइंट हैं और उनमें किसी भी पार्ट को बदलने की आवश्यकता नहीं है।
      ई-20 पेट्रोल क्यों है भारत के लिए जरूरी?
      सरकार का लक्ष्य देश में प्रदूषण कम करना और कच्चे तेल के आयात पर होने वाले भारी-भरकम खर्च को घटाना है। नितिन गडकरी ने ई-20 पेट्रोल के मुख्य फायदे भी गिनाए:
      1. पर्यावरण संरक्षण: इथेनॉल के मिश्रण से वाहनों से निकलने वाले कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आती है।
      2. किसानों को लाभ: इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और कृषि अवशेषों से होता है, जिससे देश के किसानों की आय में इजाफा हो रहा है।
      3. विदेशी मुद्रा की बचत: भारत को अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करना पड़ता है। ब्लेंडिंग से देश का अरबों रुपये का विदेशी मुद्रा भंडार बचता है।
      वाहन चालकों के लिए राहत की खबर
      नितिन गडकरी के इस बयान ने उन लाखों वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है जो अपनी पुरानी गाड़ियों में ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर असमंजस में थे। सरकार ने साफ कर दिया है कि ऑटोमोबाइल कंपनियां ई-20 फ्रेंडली किट और कंपोनेंट्स आसानी से उपलब्ध करा रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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