हिंद स्वराष्ट्र लटोरी/सूरजपुर : सूरजपुर जिले के लटोरी तहसील में पटवारी द्वारा 5 बच्चों के पिता को कागजों में ‘निसंतान’ बताए जाने के सनसनीखेज खुलासे के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ‘हिंद स्वराष्ट्र’ द्वारा इस फर्जीवाड़े को उजागर किए जाने के बाद इलाके में हड़कंप तो मचा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब भी गहरी नींद में सोए हुए हैं।
दस्तावेज चिल्ला रहे, पर जिम्मेदार क्यों हैं बहरे?
खसरा क्रमांक 200, 205 और 217 के राजस्व रिकॉर्ड में जिस तरह का ‘कागजी कत्ल’ किया गया है, उसके प्रमाण सार्वजनिक हो चुके हैं। इसके बावजूद हल्का पटवारी नंबर 11 पर अब तक गाज नहीं गिरी है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को स्व. सोहन की जीवित पत्नी और उनके 5 बच्चों का अस्तित्व नजर नहीं आ रहा?
दूसरे अंक के बड़े सवाल:
1.दोषी पटवारी संतोष भनिया पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं? क्या राजस्व विभाग के उच्च अधिकारी इस खेल से अनभिज्ञ हैं या जानबूझकर पर्देदारी की जा रही है?
2.फर्जी इस्तेहार रद्द क्यों नहीं हुआ? जब यह स्पष्ट है कि सोहन के वारिस जीवित हैं, तो उस फर्जी इस्तेहार को अब तक निरस्त कर नामांतरण प्रक्रिया पर रोक क्यों नहीं लगाई गई?
3. बेटियों के हक पर चुप्पी क्यों? स्व. कृपाराम की तीन बेटियों के नाम रिकॉर्ड से गायब हैं, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।
भू-माफियाओं के हौसले बुलंद
कार्रवाई में हो रही देरी का सीधा फायदा भू-माफिया और षड्यंत्रकारी उठा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो विवादित भूमि को खुर्द-बुर्द करने के लिए सौदेबाजी का दौर और तेज हो गया है। आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि यदि जल्द ही रिकॉर्ड में सुधार कर सभी वारिसों के नाम नहीं जोड़े गए, तो जमीन माफियाओं द्वारा जल्द ही जमीन की बिक्री कर दी जाएगी।
“न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर है। प्रशासन की यह सुस्ती भू-माफियाओं को संरक्षण देने जैसा प्रतीत हो रही है।”
क्या सूरजपुर प्रशासन भी बिक गया है?
लटोरी के पटवारी ने जिस परिवार को कागजों में मार डाला, वह तो आज भी जीवित है।
❌ कोई सस्पेंशन नहीं!
❌ कोई जांच कमेटी नहीं!
❌ कोई नाम सुधार नहीं!
आखिर कब जागेगा सूरजपुर का राजस्व अमला? क्या गरीबों की जमीन बिक जाने के बाद ही अधिकारी अपनी फाइलें खोलेंगे?
कलेक्टर महोदय, संज्ञान लें!



