हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा अपनी एक कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में हैं। राजस्व के एक मामले में कमिश्नर साहब ने ऐसा ‘रिवर्स गियर’ मारा है कि न्याय की उम्मीद लगाए बैठे पक्षकार सन्न हैं। मामला एक राजस्व प्रकरण का है, जिसमें आदेश जारी होने के बाद, बिना किसी सूचना या नोटिस के ‘पुनरावलोकन’ (Review) कर पूरे आदेश को ही पलट दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
राजस्व न्यायालयों में नियम है कि एक बार आदेश पारित होने के बाद उसमें बदलाव के लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है। लेकिन यहाँ कहानी कुछ और ही निकली:
पहले आदेश, फिर पलटी: कमिश्नर ने पहले एक विस्तृत आदेश जारी किया।
बिना नोटिस ‘रिव्यू’: नियमानुसार, अगर आदेश में बदलाव करना हो तो अनावेदकों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुनना अनिवार्य है। लेकिन इस मामले में बिना किसी को बताए चुपके से पुनरावलोकन आदेश जारी कर दिया गया।
* ‘टाइपिंग मिस्टेक’ का बहाना: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस बदलाव को महज एक ‘टंकण त्रुटि’ (Typing Error) का नाम दिया गया है।
सवाल जो खड़े हो रहे हैं…
क्या कोई टाइपिंग मिस्टेक इतनी बड़ी हो सकती है कि पूरे के पूरे आदेश का निष्कर्ष ही बदल जाए? कानूनी जानकारों की मानें तो टंकण त्रुटि के नाम पर आदेश की मूल भावना को बदलना नियम विरुद्ध है।
“न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए।” लेकिन यहाँ बिना पक्ष सुने आदेश का पलटा जाना प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवालिया निशान लगा रहा है।
चर्चाओं का बाजार गर्म
प्रशासनिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज है कि आखिर किसके दबाव में या किस ‘खास’ वजह से कमिश्नर साहब को अपने ही हस्ताक्षर किए हुए आदेश को बदलने की जरूरत आन पड़ी? विपक्षी पक्ष अब इस मामले को उच्च स्तर पर ले जाने की तैयारी में है।



