हिंद स्वराष्ट्र की खबर का असर: सिरसी का रोजगार सहायक सेवा से बर्खास्त, अन्य पर भी हुई कार्यवाही…लेकिन सवाल यह कि छोटे-मोटे कर्मचारियों पर तो हो गई कार्रवाई पर बड़े अधिकारियों पर क्यों नहीं पड़ी जांच की आंच….??

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हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सिरसी में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में हुए भ्रष्टाचार की खबर हिंद स्वराष्ट्र में प्रकाशन के बाद अंततः जिला प्रशासन ने कार्यवाही की है और छोटे-मोटे कुछ कर्मचारियों पर तो कार्यवाही की गाज गिराई हैं लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि इस मामले में संलिप्त बड़े अधिकारियों पर इस जांच की आज तक क्यों नहीं पहुंची है..?? आखिर किसे बचाने की कोशिश में छोटी–मोटी कार्रवाई कर जिला प्रशासन वाहवाही लूटने में लगा हुआ है…?

पीएम आवास ग्रामीण के निर्माण एवं क्रियान्वयन में गड़बड़ी पर जिला प्रशासन की कार्यवाही

जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही करते हुए आवास का दोहरा लाभ लेने अर्थात् स्वयं एवं पत्नी के नाम से आवास स्वीकृत कराने तथा आवास की गलत टैगिंग व मनरेगा का मजदूरी राशि में गड़बड़ी के लिए सम्बन्धित रोजगार सहायक मोहम्मद नईम अहमद की सेवा समाप्त कर दी गई है और एक आवास के लिए प्राप्त राशि की वसूली कर राज्य नोडल खाते में हस्तांतरित करने के लिए सम्बन्धित मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत को निर्देशित किया गया है। सचिव आनंद सिंह की एक वेतनवृद्धि रोकते हुए अंतिम चेतावनी पत्र जारी की गई है। गड़बड़ी में लिप्त तकनीकी सहायक नवीन जायसवाल को अंतिम चेतावनी पत्र जारी करते हुए, जनपद पंचायत ओड़गी में संलग्न किया गया है। प्रकरण संज्ञान में आने पर कार्यरत आवास मित्र कुमारी अंकिता चौबे द्वारा त्यागपत्र दे दिया गया है इनके द्वारा किए गए कार्य के विरुद्ध इन्हें जारी होने वाला प्रोत्साहन राशि राजसात करने एवं भविष्य में अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने पर प्रतिकूल टीप करने की कार्यवाही संबंधी निर्देश सीईओ जनपद पंचायत को जारी किया गया है। मामले में विकासखंड समन्वयक अमित खैरवार, कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा ओम तिवारी एवं सरपंच सुमित्रा अगरिया को अंतिम चेतावनी पत्र जारी की गई है।

आपको बता दे कि पीएम आवास योजना में सरकार द्वारा 1 लाख 20 हजार की राशि हितग्राही के खाते में डाली जाती है, जबकि मनरेगा मजदूरी के लिए 261 रुपए के हिसाब से 90 दिन का भुगतान 23 हजार 490 रुपए का कार्य मनरेगा के तहत कराया जाता हैं। जिसका भुगतान भी कर दिया गया था। दूसरी और रोजगार सहायक नईम अंसारी द्वारा बयान में साफ-साफ कहा गया था इसमें सभी उच्च अधिकारियों की संलिप्तता है और सभी अधिकारियों को इस बात की जानकारी है कि निर्माण हुआ है या नहीं। इसके बावजूद केवल रोजगार सहायक पर कार्यवाही होना और कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा ओम तिवारी और विकासखंड समन्वयक अमित खैरवार पर कोई कार्रवाई न होना काफी आश्चर्य का विषय है।

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