आंगनबाड़ी केन्द्रों के ‘रेडी टू ईट’ घोटाले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी पूरी… आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओं पर भी होगी कार्यवाही ..

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रायपुर :- महिला एवं बाल विकास विभाग में रेडी टू ईट (पूरक पोषण आहार) और सामानों की खरीदी में काफी घपला किया गया है। इसकी शिकायत भी बेहद विस्तार और सूक्ष्मता से की गई है। जांच का दायरा ऐसा है कि अब आंगनबाड़ी केन्द्र से लेकर राजधानी तक तैनात भ्रष्ट कर्मचारियों पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है।
जानकारी मिली है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों से हितग्राहियों को रेडी टू ईट जितनी मात्रा में बांटी जाती है, उससे कहीं ज्यादा की रिपोर्ट ऊपर भेजी जाती है। आंगनबाड़ी केन्द्रों में मौजूद रिकॉर्ड कुछ अलग होते हैं, लेकिन कंप्यूटर में जो जानकारी और आंकड़े फीड किए जाते हैं, वे अलग (बढ़ाकर) होते हैं। परियोजना मुख्यालय से जो जानकारी ऊपर भेजी जाती है, उसी के मुताबिक राशि का आवंटन होता है। यानी, अतिरिक्त रूप से जोड़ी गई संख्या के एवज में मिलने वाली लाखों रुपए की सरकारी राशि दफ्तरों से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक बंट जाती है। इस तरह का खेल कई जिलों में बेखौफ तरीके से जारी है, जिसमें न केवल आंगनबाड़ी कर्मी शामिल हैं, बल्कि उन्हें भ्रष्टाचार करने के तरीके बताने वाले विभाग के सरकारी नुमाइंदे और कर्मचारी नेता भी शामिल हैं। अभी हाल ही में महासमुंद में सामने आई गड़बड़ी के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने लगभग सभी जिलों से प्राप्त शिकायतों की जांच कर अब कार्रवाई की तैयारी कर ली है। आपको बता दें कि इस बार विभाग ने जो सूची कार्रवाई के लिए बनाई है, उसमें सिर्फ विभाग के ही लोग शामिल नहीं हैं, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बचा लेने का झांसा देते हुए अपना स्वार्थ सिद्ध करने वाले कर्मचारी नेताओं के नाम भी उल्लेखित हैं।
विभाग को मिली जानकारी पर यदि यकीन करें तो कुछ कर्मचारी नेता आंगनबाड़ी कर्मियों को भ्रष्ट आचरण और अनैतिक कार्यों के लिए प्रेरित करते हुए अपराध के गड्ढे में बड़े प्रेम से धकेल ही रहे हैं, लेकिन वे भी अब इस कार्रवाई की जद में है। विभाग के जानकारों का अनुमान है कि राज्य सरकार पहले तो इन भ्रष्ट आचरण वालों को बाहर का रास्ता दिखाएगी, उसके बाद बचे कर्मचारियों के नियमितीकरण के बारे में विचार किया जाएगा।

बेहद बारीक और गोपनीय जांच

इससे पहले जब भी ऐसी शिकायतें हुई हैं, तो बड़े कार्यालयों में पदस्थ कुछ कर्मचारियों और कर्मचारी नेताओं ने लीपापोती करके बचा लिया, लेकिन इस बार आंगनबाड़ी केन्द्र से लेकर डायरेक्टोरेट तक की जानकारी को ऐसे सहेजकर जांच में लिया गया कि अब हॉर्डकॉपी या सॉफ्टकॉपी में चेंज करके भी भ्रष्टाचारियों को बचा पाना मुश्किल है। इन भ्रष्टाचारियों में आम कर्मचारियों के अलावा संगठनों में पदधारी भी कुछ लोग शामिल है। विभाग ने गोपनीय तरीके से कराई गई इस जांच में एंटी करप्शन ब्यूरो के विशेषज्ञों के अलावा सायबर एक्सपर्ट की भी मदद ली है, ताकि कॉल और मैसेज के जरिए जो संवाद हुए हैं, उन्हें साबित किया जा सके। जानकारी मिली है कि फोन कॉल्स, व्हाट्सप कॉल्स, व्हाट्सअप मैसेज और एसएमएस ने इस पूरी गड़बड़ी की तह तक पहुंचने और आरोपियों को सप्रमाण पकड़ने में काफी मदद की है। जांच की पूरी प्रक्रिया को इस गोपनीयता और तेजी के साथ की गई है कि दफ्तर के भी सारे लोगों को इसकी भनक नहीं है। इससे पहले जब भी ऐसी जांच या कार्रवाई की तैयारी की जाती थी, विभीषण लोग सतर्क कर देते थे, लेकिन इस बार की कार्रवाई में न विभीषण बचेंगे, न जमीनी कर्मचारी। आपको बता दें, कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भ्रष्टाचार का पाठ पढ़ाकर उन्हें बचा लेने का दावा करने वाले कुछ कथित पत्रकारों के भी नाम कार्रवाई वाली सूची में शामिल है। डायरेक्टोरेट और जिला मुख्यालयों के जिन अफसर और कर्मचारियों को इस जांच और कार्रवाई की तैयारी की भनक लग चुकी है, वे अब भी किसी तरह बच जाने या बचा लेने की जुगत में लगे हैं, लेकिन चूंकि विभाग ने अब मान लिया कि पानी सिर से उपर जा चुका है, इसलिए अब एक्शन लेने की ही तैयारी है। सूत्रों ने जानकारी दी है कि विभाग के आला अधिकारियों से अप्रुवल मिल जाने के बाद न केवल कार्रवाई होगी, बल्कि रेडी टू ईट से लेकर सामान खरीदी तक के कई भ्रष्टाचार की परतें एक साथ खुल जाएंगीं।

एक वजह यह भी

महिला एवं बाल विकास विभाग में पदस्थ सूत्रों का कहना है, कि दरअसल यह कई कर्मचारी संगठनों और कर्मचारी नेताओं के बीच उपजे कई विवाद और विद्वेष का नतीजा है। कई नेता और कुछ संगठन अपना अस्तित्व बचाने और प्रतिद्वंदी को मात देने के लिए कई तरह के तिकड़म अपना रहे हैं। नीचा दिखाने के लिए खूबी, खामी निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यूं तो ऐसी शिकायतें पहले भी आती रही हैं, लेकिन कर्मचारी नेताओं के बीच विवाद और आपसी विद्वेष के कारण अब कुछ लोग इस मामले को तूल देना चाह रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी और आंगनबाड़ीकर्मी भी हैं, जो इन सभी करतूतों में शामिल नहीं हैं, वे भी चाहते हैं कि ऐसी कार्रवाई हो और दोषी लोग बेनकाब हों, ताकि सही काम करने वालों की छवि धूमिल न हो। इधर राज्य सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनबाड़ीकर्मियों की मांगों को पूरा तो करना चाहते हैं, लेकिन इस शिकायत ने बड़ी संख्या में लोगों को निकालने का भी अवसर दे दिया है।

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