हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर :अंबिकापुर के श्री महावीर हॉस्पिटल से जुड़े स्वर्गीय आशुतोष दास के उपचार का मामला एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अतिरिक्त राशि वसूली और इलाज में लापरवाही का मामला स्वास्थ्य विभाग की जांच से स्पष्ट हो चुका हैं।
अब इसी मामले से जुड़ा एक नया मुद्दा सामने आया है। अस्पताल परिसर में संचालित सान्वी मेडिकल स्टोर से जारी एक इंजेक्शन के बिलों में दर्ज कीमत और सरकारी ऐप पर प्रदर्शित कीमत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीज के परिजनों के साथ-साथ शासन को भी चूना लगाने का काम किया है? आयुष्मान योजना के तहत मरीज का इलाज हो रहा था और मेडिकल के सभी बिलों का भुगतान शासन द्वारा किया जाना था। आयुष्मान योजना के तहत मरीज का इलाज करते हुए अस्पताल प्रबंधन द्वारा शासन द्वारा तय दवा की कीमत से अधिक (ओवरचार्जिंग) कीमत की बिल लगाई गई।
पहले जांच में ₹87,300 की अतिरिक्त राशि का उल्लेख, फिर हाई कोर्ट पहुँचा मामला
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सरगुजा द्वारा जारी 15 अक्टूबर 2026 के पत्र में स्वर्गीय आशुतोष दास के उपचार से संबंधित शिकायत और जांच का विवरण दर्ज है। पत्र के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध श्री महावीर हॉस्पिटल के विरुद्ध अतिरिक्त राशि वसूले जाने की शिकायत पर जांच की गई थी। पत्र में लाभार्थी से ₹87,300 की अतिरिक्त राशि लिए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा, अस्पताल द्वारा निर्धारित पैकेज के अतिरिक्त ₹23,141 लेने का एक अन्य मामला भी दर्ज किया गया है। जारी पत्र के अनुसार, उस मामले में परिजनों को अतिरिक्त राशि वापस करने और योजना के नियमों के अनुरूप उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा दोबारा पैकेज से अतिरिक्त राशि लिए जाने की बात सामने आई।
कलेक्टर सरगुजा अजीत वसंत द्वारा नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन के चलते 13 अक्टूबर 2026 को एक आदेश जारी कर श्री महावीर हॉस्पिटल का लाइसेंस 17 अक्टूबर 2026 से 16 नवंबर 2026 तक (एक माह के लिए) निलंबित कर दिया। आयुष्मान योजना के तहत की गई अनियमितता को देखते हुए अस्पताल को अवैध रूप से वसूली गई ₹87,300 की राशि तुरंत वापस करने के निर्देश दिए। साथ ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों के परिपालन में आगामी 3 महीने के लिए खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना / आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल का पंजीयन स्थायी रूप से निलंबित करने हेतु शासन को प्रतिवेदन प्रेषित करने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को आदेशित किया गया।
कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट पहुँचा अस्पताल, मिली अंतरिम राहत
विभागीय कार्रवाई को चुनौती देते हुए श्री महावीर हॉस्पिटल ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर में याचिका दायर की। 16 अक्टूबर 2026 के अंतरिम आदेश में अदालत ने 13 अक्टूबर 2026 के विभागीय आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई। अस्पताल की ओर से दलील दी गई कि संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक 30 दिन का नोटिस नहीं दिया गया था। यह अस्पताल की ओर से प्रस्तुत दलील है, जिस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा और संबंधित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए है।
लेकिन इस अंतरिम राहत के साथ अदालत ने स्पष्ट शर्त भी रखी है कि अस्पताल इस अवधि में मरीजों का कोई बड़ा चिकित्सकीय उपचार नहीं करेगा। इसलिए स्टे को पूरी कार्रवाई से स्थायी राहत या आरोपों से बरी होने के रूप में देखना सही नहीं होगा।
अब नई सुर्खी: सरकारी ऐप पर ₹5,223, मेडिकल स्टोर के बिल में ₹7,299!
इस मामले में अब XAVITAZ 2000/500 MG इंजेक्शन की कीमत ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। शिकायतकर्ता मृण्मयी पाण्डेय द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, सान्वी मेडिकल स्टोर के बिलों में प्रत्येक इंजेक्शन की कीमत ₹7,299.60 दर्ज है। दूसरी ओर, सरकारी ऐप के जुलाई 2026 में इसी नाम, संरचना और कंपनी के साथ इंजेक्शन की MRP ₹5,223.21 प्रति इंजेक्शन थी।
दोनों कीमतों के बीच प्रति इंजेक्शन ₹2,076.39 का अंतर है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 29 जून से 3 जुलाई 2026 के बीच पांच बिलों में कुल नौ इंजेक्शन जारी किए गए। यदि सरकारी ऐप पर प्रदर्शित कीमत उस अवधि और संबंधित उत्पाद पर लागू वैधानिक कीमत थी, तो नौ इंजेक्शनों पर दोनों दरों का अंतर ₹18,687.51 बनता है।
यही वह नया पहलू है, जिसकी अब स्वतंत्र जांच जरूरी है। क्या सरकारी ऐप पर दर्ज कीमत संबंधित बैच और अवधि के लिए लागू थी? और क्या मेडिकल स्टोर ने नियमानुसार बिलिंग की? इन सवालों का उत्तर आधिकारिक मूल्य रिकॉर्ड और संबंधित बिलों की जांच से ही मिल सकता है।
दवा के पैक और बिलों में एक ही कीमत, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दूसरी दर
दवा के पैक पर XAVITAZ के साथ Ceftazidime 2 gm और Avibactam 0.5 gm की संरचना तथा ₹7,299.60 की MRP दिखाई देती है। उपलब्ध पैक की तस्वीर में बैच नंबर CCDAX0126 दर्ज है। मेडिकल स्टोर के बिलों में भी यही कीमत दर्शाई गई है।
वहीं, सरकारी ऐप में जुलाई 2026 के लिए ₹5,223.21 प्रति इंजेक्शन दर्ज है। लेकिन जब दोनों दस्तावेजों में इतना बड़ा अंतर सामने है, तो संबंधित औषधि नियंत्रण विभाग और NPPA से आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग करना पूरी तरह उचित है। शिकायतकर्ता मृण्मयी पाण्डेय ने इन मामलों में दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई और जवाबदेही की मांग की है। अब संबंधित विभागों की जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि कीमत का अंतर किस कारण से है और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ है।
क्या कहते हैं नियम
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा किसी दवा की कीमत तय या कम किए जाने के बाद, दुकानदार या कंपनी उससे अधिक कीमत बिल्कुल नहीं वसूल सकते। भले ही उस दवा की मैन्युफैक्चरिंग डेट NPPA के आदेश से पहले की हो और उस पर पुरानी (ज्यादा) MRP छपी हो, तब भी नया नियम लागू होगा।
NPPA (Drugs Prices Control Order – DPCO) के नियमों के अनुसार दवा की कीमतों को लेकर निम्नलिखित प्रावधान हैं:
1. पुराने स्टॉक पर भी लागू होगी नई कीमत
जब भी NPPA किसी आवश्यक दवा की अधिकतम कीमत घटाता है, तो वह कीमत अधिसूचना जारी होने की तारीख से तुरंत प्रभावी हो जाती है। बाजार में मौजूद पुराना स्टॉक (जो पहले का बना हुआ है) भी नई कम कीमतों पर ही बेचा जाना अनिवार्य है। मेडिकल स्टोर संचालक यह बहाना नहीं बना सकते कि “स्ट्रिप पर पुरानी MRP छपी है, इसलिए हम ज्यादा पैसे लेंगे”।
2. री-लेबलिंग (Re-labelling) अनिवार्य नहीं, लेकिन कीमत कम करना जरूरी है
अदालतों और NPPA के स्पष्टीकरण के अनुसार, दवा कंपनियों के लिए बाजार से पुराने स्टॉक को वापस मंगाकर उस पर नई कीमत का नया स्टिकर या लेबल लगाना अनिवार्य नहीं है। लेकिन, कंपनियों को तुरंत अपने डीलरों और रिटेलर्स को संशोधित मूल्य सूची भेजनी होती है। रिटेलर्स को उसी संशोधित (कम) मूल्य सूची के हिसाब से ग्राहकों से पैसे लेने होते हैं।
3. नियम तोड़ने पर कार्रवाई और जुर्माना
यदि कोई मेडिकल स्टोर या कंपनी नई तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलती पाई जाती है, तो उसे ‘ओवरचार्जिंग’ (Overcharging) माना जाता है। ऐसी स्थिति में सरकार दवा कंपनी/दुकानदार से ओवरचार्ज की गई पूरी रकम ब्याज सहित वसूल करती है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अब प्रशासन और NPPA से जवाब की अपेक्षा
एक तरफ आयुष्मान योजना के अंतर्गत अतिरिक्त राशि वसूली को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही, दूसरी तरफ हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश और अब दवा की कीमत में अंतर दर्शाने वाले दस्तावेज हैं।
मामले की निष्पक्षता इसी में है कि विभागीय कार्रवाई और न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान करते हुए दवा की कीमत संबंधी नए सवालों की भी स्वतंत्र जांच हो। यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य सेवा में मरीज की मजबूरी को कीमतों की अस्पष्टता के पीछे नहीं छिपाया जा सकता। अब देखना यह है कि सरकारी ऐप और दवा के बिलों में दिखाई दे रहे अंतर पर संबंधित अधिकारी क्या स्पष्टीकरण देते हैं और जांच में क्या निष्कर्ष सामने आता है।





