प्रशासनिक लापरवाही या सोची-समझी साजिश? अंबिकापुर में बिना गबन किए सरपंच गिरफ्तार, कांग्रेस ने खोला मोर्चा…

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हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर (सरगुजा): अंबिकापुर जनपद पंचायत का एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पुलिस की जल्दबाजी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला गबन का था किसी और गांव के सरपंच का, लेकिन पुलिस ने किसी दूसरे ही गांव के बेकसूर सरपंच को सुबह-सुबह खेत से उठा लिया। जब पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलीं, तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और अब अपनी नाकामी छुपाने के लिए अजीबो-गरीब तर्क दिए जा रहे हैं।
खेत में कर रहे थे काम, न कपड़े बदलने दिए न मूंह धोने दिया
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सरईटिकरा के सरपंच और अंबिकापुर सरपंच संघ के अध्यक्ष रामसाय मिंज अपने खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान दरिमा थाने की पुलिस पहुंची और उन्हें किसी खूंखार अपराधी की तरह उठा लिया। परिजनों और सरपंच का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें न तो कपड़े बदलने का मौका दिया और न ही मुंह-हाथ धोने दिया।
जब उन्हें अंबिकापुर एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया, तब जाकर खुलासा हुआ कि उन्हें किस मामले में पकड़ा गया है।
यह है पूरा मामला: गबन कहीं और, कार्रवाई कहीं और
वर्ष 2020-21 के दौरान ग्राम चीताबहार में सामुदायिक शौचालय निर्माण में ₹1,75,093 की अंतर राशि के गबन का मामला सामने आया था। उस समय चीताबहार के तात्कालिक सरपंच शिवनाथ भगत और सचिव देवेंद्र सिंह थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि 23 जुलाई 2024 को चीताबहार के नए सचिव ललित ने लिखित रूप में जनपद सीईओ को सूचित कर दिया था कि गबन के समय वहां के सरपंच शिवनाथ भगत थे। इसके अलावा, रामसाय मिंज ने भी पहले ही स्पष्टीकरण दे दिया था कि वे ग्राम सरईटिकरा के सरपंच हैं, चीताबहार के नहीं।
इसके बावजूद, जनपद पंचायत के अधिकारियों की लापरवाही कहें या दुर्भावना, उन्होंने वसूली और गिरफ्तारी का वारंट सरईटिकरा के सरपंच रामसाय मिंज के नाम पर जारी करवा दिया।
बेकसूर सरपंच का कड़ा रुख “मुझे जमानत नहीं, जेल भेजो”
अपनी बेगुनाही और प्रशासनिक दुर्व्यवहार से आहत रामसाय मिंज ने एसडीएम कोर्ट में दस्तावेजों का सबूत देते हुए जमानत लेने से साफ़ इनकार कर दिया। उन्होंने एसडीएम से स्पष्ट कहा “जब मैंने कोई अपराध किया ही नहीं, तो जमानत कैसी? मुझे सीधे जेल भेज दिया जाए।”
सरपंच के इस कड़े रुख और स्वाभिमानी फैसले के बाद एसडीएम कार्यालय और जनपद प्रशासन में हड़कंप मच गया।
कांग्रेसियों ने घेरा एसडीएम दफ्तर, सीईओ को हटाने की मांग
घटना की खबर फैलते ही पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता, ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष विनय शर्मा, दरिमा ब्लॉक अध्यक्ष नारद गुप्ता, जनपद अध्यक्ष विक्रम सोनपाकर और उपाध्यक्ष सतीश यादव सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता एसडीएम कार्यालय पहुंच गए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने जनपद सीईओ को फोन कर अपनी गलती तुरंत सुधारने की हिदायत दी। पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता ने इसे महज़ ‘तकनीकी त्रुटि’ मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह कांग्रेस समर्थित जनप्रतिनिधि को नीचा दिखाने और अपमानित करने की एक सोची-समझी साजिश है।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि जनपद पंचायत के सीईओ इस कृत्य के लिए लिखित में माफी मांगें और शासन उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर कड़ा एक्शन ले।
गलती मानकर भी पल्ला झाड़ रहा प्रशासन
बवाल बढ़ता देख जनपद पंचायत अंबिकापुर ने आनन-फानन में राजस्व अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को पत्र लिखकर सफाई दी कि “रिकॉर्ड में चीताबहार के सरपंच के रूप में रामसाय का नाम दर्ज होने के कारण यह चूक हुई।” हालांकि, अपनी इतनी बड़ी प्रशासनिक नाकामी पर माफी मांगने के बजाय अधिकारी यह बेतुका तर्क दे रहे हैं कि रामसाय मिंज ने खुद रिकॉर्ड दुरुस्त क्यों नहीं कराया।
यह घटना यह साबित करने के लिए काफी है कि अंबिकापुर जनपद पंचायत के अधिकारियों को यह तक नहीं पता कि उनके क्षेत्र की पंचायतों का असली जनप्रतिनिधि कौन है। अब देखना यह होगा कि इस घोर लापरवाही पर जिला प्रशासन दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है।

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