हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर/लटोरी : गांव की चौपाल, जहाँ से विकास की इबारत लिखी जानी चाहिए थी, वहां सरपंच के अहंकार ने खून की होली खेली। सूरजपुर के ग्राम हरिपुर में अपनी सत्ता के नशे में चूर सरपंच ओम प्रसाद और उसके गुर्गों ने मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघते हुए एक सेवानिवृत्त शिक्षक और उनके दो बेटों पर जानलेवा हमला कर दिया। लेकिन कानून के लंबे हाथों ने यह साफ कर दिया है कि वर्दी के आगे न कोई ‘बाहुबली’ है और न ही कोई ‘सरपंच’।
बर्बरता की हदें पार: किया प्राणघातक हमला
मिली जानकारी के अनुसार, सरपंच ओम प्रसाद, उसके दो बेटों (मनोज और रौशन) और अन्य सहयोगियों ने मिलकर एक निर्दोष रिटायर शिक्षक के परिवार को अपना निशाना बनाया। आरोपियों ने शिक्षक और उनके दोनों बेटों पर इतनी बेरहमी से हमला किया कि वे लहूलुहान हो गए। घायलों की स्थिति गंभीर बन गई। इस हमले ने न केवल एक परिवार को जख्मी किया, बल्कि पूरे गांव में दहशत फैला दी थी।
सिंघम अवतार: चौकी प्रभारी और प्रधान आरक्षक की जांबाजी
इस खौफनाक वारदात के बाद पुलिस ने जो तत्परता दिखाई, उसकी चर्चा पूरे जिले में है। चौकी प्रभारी रघुवंश सिंह और प्रधान आरक्षक रजनीश त्रिपाठी ने मामले की नजाकत को देखते हुए बिजली की तेजी से कार्रवाई की। बिना किसी राजनीतिक दबाव में आए, पुलिस टीम ने आरोपियों की घेराबंदी की और सरपंच समेत उसके बेटों को दबोच लिया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर ये अधिकारी मुस्तैद न होते, तो रसूखदार आरोपी फरार हो सकते थे।
हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत कार्रवाई: ये 9 आरोपी सलाखों के पीछे
पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। जेल की हवा खाने वाले आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:
* ओम प्रसाद (सरपंच)
* मनोज (पुत्र सरपंच)
* रौशन (पुत्र सरपंच)
* गौरव
* नवल साय
* सागर सिंह
* गोविंद
* सुन्दर
* प्रीतम
ग्रामीणों में राहत, अपराधियों में दहशत
स्थानीय निवासियों के मुताबिक सरपंच ओम प्रसाद का इतिहास शुरू से ही विवादित रहा है। विकास के बजाय विनाश की राजनीति करने वाले इस सरपंच की गिरफ्तारी से गांव ने राहत की सांस ली है। पुलिस अब बाकी बचे फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
संपादकीय दृष्टिकोण:
सूरजपुर पुलिस के खड़गवां चौकी प्रभारी रघुवंश सिंह और रजनीश त्रिपाठी जैसे जांबाज अधिकारियों ने साबित कर दिया है कि जनता का रक्षक अगर ठान ले, तो कोई भी अपराधी कानून से बच नहीं सकता। शिक्षा और संस्कार को लहूलुहान करने वालों का असली ठिकाना जेल की कालकोठरी ही है।



