हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : सूरजपुर जिले के लटोरी तहसील कार्यालय में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। आरोप है कि नायब तहसीलदार न्यायालय में चल रहे एक नामांतरण मामले में, अगली सुनवाई की तारीख आने से पहले ही नियमों को ताक पर रखकर चोरी-छिपे अंतिम आदेश पारित कर दिया गया। पीड़ितों ने इसे “सोची-समझी साजिश और धोखाधड़ी” करार देते हुए लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा, नायब तहसीलदार शैलेन्द्र दिवाकर, पटवारी संतोष भनिया और रितेश नागवंशी के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
सुनवाई के बीच ‘गुप्त’ आदेश का खेल
शिकायतकर्ता गणेश राम और उमेश कुमार के अनुसार, राजस्व प्रकरण क्रमांक 202512263100005/ब-121/2025-26 में सुनवाई चल रही थी।
1. 7 जनवरी 2026 को विपक्षी दल (अनावेदक) ने ‘आदेश 7 नियम 11 CPC’ के तहत एक आपत्ति दर्ज की थी।
2. कोर्ट ने आवेदकों को इस आपत्ति का जवाब देने के लिए 21 जनवरी 2026 की अगली तारीख मुकर्रर की थी।
3. चौंकाने वाली बात यह है कि 21 जनवरी आने से पहले ही, 9 जनवरी 2026 की बैक-डेट में अंतिम आदेश पारित कर दिया गया।
4. आवेदकों को इसकी भनक तब लगी जब उन्होंने 13 जनवरी को प्रमाणित प्रतिलिपि निकाली, जिसमें उन्हें इस “गुपचुप” फैसले की जानकारी हुई।
क्षेत्राधिकार के उल्लंघन का बड़ा आरोप
शिकायत पत्र में तहसील कार्यालय के भीतर चल रहे क्षेत्राधिकार के विवाद को भी उजागर किया गया है। आवेदकों का दावा है कि:
1. ग्राम-लटोरी की भूमि से जुड़े मामलों की सुनवाई का कानूनी अधिकार तहसीलदार लटोरी सुरेंद्र पैंकरा के पास है।
2. ग्राम-द्वारिकानगर के मामलों के लिए नायब तहसीलदार लटोरी शैलेन्द्र दिवाकर अधिकृत हैं।
3. आरोप है कि लटोरी की जमीन के लिए कोई आवेदन ही नहीं दिया गया था, फिर भी तहसीलदार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए हल्का पटवारियों को नाम दर्ज करने का “ज्ञापन” जारी कर दिया।
4. हल्का पटवारी संतोष भनिया और रितेश नागवंशी (उत्तरदाता क्रमांक 3 व 4) पर भी बिना किसी वैध आदेश के, आपसी सांठ-गांठ कर राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने के आरोप लगे हैं।
भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की मांग
आवेदकों ने इस पूरे प्रकरण को एक गंभीर आपराधिक कृत्य बताया है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की निम्नलिखित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है:
धारा 257: इसके तहत न्यायिक कार्यवाही में किसी लोक सेवक द्वारा जानबूझकर कानून के विपरीत भ्रष्ट आदेश पारित करना दंडनीय अपराध है।
धारा 318: यह धारा धोखाधड़ी और संपत्ति के हस्तांतरण के लिए छल करने से संबंधित है।
कलेक्टर और एसपी, आईजी तक पहुँचा मामला
पीड़ित पक्ष ने 14 जनवरी 2026 को कलेक्टर सूरजपुर, पुलिस अधीक्षक सूरजपुर और पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज से मामले की शिकायत की है। उन्होंने मांग की है कि तहसील न्यायालय से मूल फाइल तत्काल जब्त की जाए और दोषी राजस्व अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच शुरू की जाए।



