छत्तीसगढ़ में मिली नई ग्रीन केव/ गुफा,, पर्यटन के क्षेत्र में नई उपलब्धि…

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हिंद स्वराष्ट्र बस्तर : छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और भूगर्भीय रहस्यों के लिए जाना जाता है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग (विशेषकर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के आसपास) में ‘ग्रीन केव’ या ‘हरित गुफा’ की चर्चा काफी बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Kanger Valley National Park) गुफाओं का गढ़ माना जाता है। यहाँ हाल ही में खोजी गई या चर्चा में आई गुफाओं में ‘ग्रीन गुफा’ अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण विशेषज्ञों और पर्यटकों का ध्यान खींच रही है।
भौगोलिक स्थिति
  स्थान: यह गुफा बस्तर जिले के जगदलपुर के समीप, कांगेर घाटी के घने जंगलों के बीच स्थित है।
प्रवेश: गुफा का प्रवेश द्वार संकरा है, लेकिन अंदर जाने पर यह काफी विशाल और विस्मयकारी दृश्य प्रस्तुत करती है।

इसे ‘ग्रीन गुफा’ क्यों कहा जाता है?
इस गुफा का नाम इसकी दीवारों और संरचनाओं के रंग के कारण पड़ा है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
काई और शैवाल (Algae): गुफा के कुछ हिस्सों में नमी और प्रकाश के विशिष्ट कोण के कारण दीवारों पर हरे रंग की काई और फंगस जम जाती है, जो टॉर्च की रोशनी में चमकीली हरी दिखाई देती है।
खनिज संरचना: विशेषज्ञों का मानना है कि गुफा की चट्टानों में तांबे (Copper) या अन्य खनिजों की मौजूदगी हो सकती है, जो ऑक्सीकरण के कारण हरा रंग छोड़ते हैं।
मुख्य विशेषताएँ: स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट
दुनिया भर की अन्य प्रसिद्ध गुफाओं की तरह यहाँ भी चूना पत्थर की अद्भुत आकृतियाँ मिलती हैं:
स्टैलेक्टाइट (Stalagtitie): छत से लटकती हुई नुकीली संरचनाएं।
स्टैलेग्माइट (Stalagmitie): जमीन से ऊपर की ओर उठती हुई स्तंभ जैसी आकृतियाँ।
पारभासी पत्थर: इस गुफा की एक खासियत यह है कि यहाँ के कुछ पत्थर इतने शुद्ध और पारभासी हैं कि रोशनी पड़ने पर वे हरे और सफेद रंग में चमकते हैं।


पारिस्थितिक महत्व
यह गुफा केवल पर्यटन ही नहीं बल्कि विज्ञान के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है:
अंधी मछलियाँ और झींगे: कांगेर घाटी की अन्य गुफाओं (जैसे कोटमसर) की तरह यहाँ भी दुर्लभ प्रजाति के जीव पाए जा सकते हैं।
  माइक्रो-क्लाइमेट: गुफा के भीतर का तापमान बाहरी वातावरण से काफी अलग और ठंडा रहता है।

पर्यटन और संरक्षण
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड और वन विभाग इस गुफा को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं:
सीमित प्रवेश: गुफा की प्राकृतिक संरचना और पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुंचे, इसलिए पर्यटकों की संख्या को नियंत्रित रखा जाता है।
सावधानी: गुफा के अंदर ऑक्सीजन की कमी और फिसलन भरी दीवारों के कारण गाइड के बिना जाना वर्जित है।

छत्तीसगढ़ की यह ग्रीन गुफा प्रकृति का एक अनमोल उपहार है। यह न केवल रोमांचक पर्यटन को बढ़ावा देती है, बल्कि भू-गर्भ शास्त्रियों (Geologists) के लिए शोध का एक नया केंद्र भी बन रही है।

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