हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : पत्रकार की हत्या की सुपारी मामले में लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा समेत उनके चहेते भूमाफियाओं पर अंततः सूरजपुर पुलिस द्वारा अपराध दर्ज कर लिया गया है। उल्लेखनीय हैं कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कथित भांजे सुरेंद्र पैंकरा द्वारा लटोरी तहसीलदार के पद पर रहते हुए अपने पद का काफी दुरुपयोग किया गया है और उनके द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से किए गए जमीन की अफरा तफरी के कार्यों का खुलासा पत्रकार दंपत्ति द्वारा किया जा रहा था जो कि तहसीलदार और उनके कुछ सहयोगियों को नागवार गुजरा और उन्होंने आपस में सांठगांठ कर पत्रकार को रास्ते से हटाने के योजना बना ली। पत्रकार को रास्ते से हटाने के लिए उसकी सुपारी दे दी गई। पत्रकार की हत्या के लिए इनके द्वारा तीन प्रयास भी किए गए थे लेकिन पत्रकार की किस्मत अच्छी होने के कारण तीनों योजनाओं में वे असफल रहे थे।
क्या है मामला??
हिंद स्वराष्ट्र और सिंधु स्वाभिमान के संपादकों द्वारा लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा के विरुद्ध कुछ खबरें पूरे सबूत के साथ प्रकाशित की गई थी जिसमें तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा द्वारा लापरवाहीपूर्वक या यूं कहे मिलीभगत के साथ फर्जी तरीके से बिना कलेक्टर परमिशन के और पटवारी प्रतिवेदन के बगैर ही जमीन की रजिस्ट्री कर दी थी। जिसके बाद सूरजपुर जिले की SDM शिवानी जायसवाल द्वारा तहसीलदार को 3 कारण बताओं नोटिस जारी की गई थी। जिसकी जांच रिपोर्ट आज भी लंबित हैं। इस मामले में लगातार धमकियां मिलने का सिलसिला जारी था। इस मामले का सीधा संबंध लटोरी तहसील के ग्राम हरिपुर निवासी संजय गुप्ता और हरिओम गुप्ता से था। ये दोनों पिता पुत्र जमीन दलाली का कार्य करते हैं और इनके द्वारा ही तहसीलदार से सांठगांठ कर फर्जी तरीके से जमीन रजिस्ट्री का कार्य करवाया गया था। इनके द्वारा तहसीलदार के नाम से लगातार हमें धमकियां दी जा रही थी और तहसीलदार से संबंध होने की बात कहते हुए हमें तहसीलदार से दूर रहने की बात कही गई थी।
वहीं कुछ दिन पूर्व इनके द्वारा सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सिरसी में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में हुए आवास योजना में घोटाले की खबर का प्रकाशन किया गया था जिसके बाद जिला प्रशासन द्वारा मामले की जांच करवाई गई और जांच के आधार पर रोजगार सहायक नईम अंसारी को बर्खास्त कर दिया और कुछ अन्य के विरुद्ध भी कार्यवाही की। वहीं सिरसी पंचायत के ही एक अन्य मामले में देवानंद कुशवाहा नामक एक व्यक्ति की 2 एकड़ जमीन उसके भाई बैजनाथ कुशवाहा द्वारा अपने नाम करवा ली गई हैं। इस मामले में पीड़िता द्वारा तहसीलदार संजय राठौर पर 5 लाख रुपए की रिश्वत लेकर उसके पिता देवानंद की जमीन उसके चाचा बैजनाथ के नाम पर किए जाने का आरोप लगाया था। इस मामले में तहसीलदार द्वारा बैक डेट में जाकर नामांतरण का कार्य किया गया था इस मामले की जांच अब तक लंबित है।
प्रशान्त पाण्डेय की हत्या की साजिश में लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा, संजय गुप्ता, हरिओम गुप्ता, प्रेमचंद ठाकुर, अविनाश ठाकुर और संदीप कुशवाहा, फिरोज अंसारी और उसके साले असलम का नाम निकलकर सामने आया हैं। फिरोज अंसारी बर्खास्त रोजगार सहायक नईम अंसारी का रिश्तेदार हैं वहीं संदीप कुशवाहा, बैजनाथ कुशवाहा का पुत्र हैं। इस साजिश में शामिल सिरसी निवासी प्रेमचंद ठाकुर का संबंध भी प्रधानमंत्री आवास योजना, जमीन फर्जीवाड़े और नशे के कारोबार से हैं और उसकी और उसके मामा के बेटे अविनाश ठाकुर उर्फ गोलू ठाकुर की दोस्ती हरिओम गुप्ता से हैं। इसी दौरान हिंद स्वराष्ट्र और सिंधु स्वाभिमान में लगातार जारी इनके विरुद्ध खबरों से इन भ्रष्टाचारियों की रातों की नींद हराम हो गई थी और उन्हें संपादक को रास्ते से हटाने के अलावा अपने बचाव का कोई और रास्ता नजर नहीं आ रहा था। जिसके मद्देनजर इन भ्रष्टाचारियों द्वारा आपस में सांठगांठ की गई और मिलीभगत कर हत्या की साजिश रची गई। इसी दौरान इनके द्वारा जूर निवासी फिरोज अंसारी और उसके साले असलम को डेढ़ लाख रुपयों में प्रशांत पाण्डेय की हत्या की सुपारी दे दी गई और इन सभी के द्वारा एक राय होकर हत्या के 3 नाकाम कोशिशें भी की गई।
पत्रकार की हत्या के लिए पत्रकारिता को ही बनाया ढाल
इस दौरान प्लानिंग के तहत इन सभी आरोपियों द्वारा मिलीभगत कर संपादक की हत्या के लिए पत्रकारिता को ही ढाल बनाया गया और इस साजिश में शामिल प्रेमचंद ठाकुर द्वारा एक मामले में खबर प्रशासन के लिए संपादक को सिरसी बुलाया गया और इसी दौरान हत्या के लिए इन आरोपियों द्वारा ट्रक का जुगाड़ किया गया और स्वयं हरिओम गुप्ता द्वारा दो बोलेरो और एक स्कॉर्पियो वाहन लेकर संपादक और उसके परिवार का पीछा किया गया लेकिन संपादक को उसके परिवार और छोटे बच्चे के साथ देखते हुए उन्होंने उस दिन हत्या की इस योजना को स्थगित कर दिया।
हत्या की दूसरी योजना के तहत बुलाया गया शूटर
ट्रक द्वारा कुचलने की योजना असफल होने के बाद इन आरोपियों द्वारा हत्या के लिए दूसरी योजना बनाई गई और योजना के तहत फिरोज अंसारी के साले असलम (शूटर) को बुलाया गया। सब कुछ सही रहता ये सब अपनी योजना में सफल हो पाते, इससे पहले ही संपादक अपने परिजनों के साथ उज्जैन महाकाल के दर्शन को चले गए जिससे संपादक उनकी रडार में नहीं आए और उनकी जान बच गई।
हत्या का तीसरा प्रयास
हत्या के दो असफल प्रयासों के बाद भी यह आरोपी अपनी हरकतों से बात नहीं है और उनके द्वारा संपादक और उसके परिवार को कार्ड से कुचलना का प्रयास किया गया दरअसल 20 सितंबर की रात को संपादक अपने गृह ग्राम से अंबिकापुर आने अपनी बाइक बुलेट में सवार थे। इन आरोपियों द्वारा बनारस मार्ग में संपादक और उनके परिवार को कुचलने का प्रयास किया गया लेकिन मौके पर अचानक से बहुत सारी गाड़ियों और भीड़ इकट्ठी हो जाने के कारण यह योजना भी विफल हो गई।
सच का हुआ खुलासा
दरअसल हत्या की प्लानिंग करने वाले और सुपारी देने वाले संजय गुप्ता और हरिओम गुप्ता द्वारा हरिपुर ग्राम में ग्रामसभा आयोजित की गई थी और इस ग्रामसभा के दौरान कई ऐसी बातें हुई जिससे इन सभी आरोपियों की एकता में दरार आ गई और इनके द्वारा ही पूरे मामले का खुलासा भरी पंचायत के सामने कर दिया गया।
बहरहाल मामले के खुलासे के बाद संजय गुप्ता द्वारा पंचायत के सामने संपादक और उनके परिजनों से धमकी दिए जाने से लेकर सुपाड़ी दिए जाने तक की बात को स्वीकारा गया और माफी भी मांगी गई लेकिन हरिओम गुप्ता द्वारा माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया गया और अपना निर्णय पंचायत के बाहर करने की बात कही।
इन पर हुआ अपराध दर्ज
इस मामले में लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा, संजय गुप्ता, हरिओम गुप्ता पिता संजय गुप्ता, अविनाश ठाकुर, प्रेम चंद ठाकुर, संदीप कुशवाहा समेत एक तथाकथित पत्रकार फिरोज अंसारी और उसके साले असलम पर प्रतापपुर थाने में अपराध दर्ज किया गया हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जल्द ही मामले की जांच कर मामले का खुलासा कर जल्द ही अपराधियों पर उचित कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
चार महीनो से सूरजपुर SDM कर रही जांच लेकिन जांच रिपोर्ट आना अब भी बाकी….
विभागीय लापरवाही या विभागीय समर्थन किसे कहते हैं, इसका जीता जाता उदाहरण सूरजपुर जिले का यह प्रकरण हैं। इस मामले में लगातार खबरों के प्रकाशन के बाद सूरजपुर एसडीएम द्वारा तहसीलदार को नोटिस तो जारी कर दिया गया था लेकिन इस मामले की जांच आज भी 4 महीने बाद लंबित है… इससे विभागीय समर्थन कहे या विभागीय लापरवाही या अड़ियलपन…?
इतने लंबे समय बीत जाने के बावजूद अगर इस मामले में सूरजपुर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं तो इस मामले में अगला कदम कोर्ट ही नजर आ रहा है क्योंकि पद की गर्मी कोर्ट के सामने नहीं चलती। अपने आप को राजा समझने वाला अधिकारी भी वहां सावधान की मुद्रा में ही खड़ा नजर आता है।

