दुर्गम रास्ता और घनघोर अंधेरा, महिला को खाट में ढोकर मशाल की रोशनी के सहारे पहुंचे अस्पताल

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देवशरण चौहान
जशपुर छत्तीसगढ के जशपुर जिले में एक बार फिर विकास के बड़े-बड़े दावे फेल होते नजर आए। लाचार सिस्टम की लचर व्यवस्था उजागर हुई जहां एक गंभीर रूप से बीमार महिला को खाट में ढोकर मशाल की रोशनी के सहारे लगभग 4 किलोमीटर चल निजी वाहन तक लाया गया। यहां से महिला को अस्पताल पहुंचाया गया, तब जाकर उसकी जान बची।

घटना जिले के बगीचा विकासखंड के ग्राम जबला, तांबा कछार है जहां एक गंभीर बीमार महिला को खाट में ढोकर मशाल की रोशनी के सहारे लगभग 4 किलोमीटर का सफर पैदल मुख्य मार्ग तक लाया गया। जिसके बाद निजी वाहन से उसे इलाज के लिए बगीचा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जब परिजन बगीचा अस्पताल पंहुचे तो यहां भी बीमार महिला का इलाज नहीं हुआ।

यहां डाक्टर ने उसकी गंभीर स्थिति को देखने के बाद भी उसकी प्राथमिक चिकित्सा भी नहीं की और उसे बाहर जाने की सलाह दी। परिजन तड़के उसे लेकर होलीक्रॉस अस्पताल पहुंचे जहां उसका इलाज शुरु किया गया। जानकारी के अनुसार ग्राम तांबा कछार निवासी यह महिला कई दिनों से मासिक धर्म से जुड़ी बीमारी से पीड़ित है।

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