इलाज में भारी लापरवाही आशुतोष की मौत के बाद श्री महावीर अस्पताल पर उठे गंभीर सवाल, देखें सबूत कैसे झूठ बोल लोगो को गुमराह कर रहा महावीर हॉस्पिटल…Part 1

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हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : दिनांक 30 अगस्त 2026 को उम्मीद और सांसों की आस में अस्पताल दाखिल हुए 23 वर्षीय युवक आशुतोष दास की 04 सितंबर 2026 की सुबह हुई दर्दनाक मौत ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र और अस्पताल की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। परिजनों का सीधा आरोप है कि यह मौत किसी स्वाभाविक बीमारी से नहीं, बल्कि डॉक्टरों की घोर लापरवाही, आईसीयू में निगरानी की कमी और समय पर सही निर्णय न लेने के कारण हुई है।

डॉ सुधांशु किरण द्वारा मरीज आशुतोष दास के इलाज की पर्ची


क्या है पूरा मामला?
आशुतोष को 30 अगस्त को ट्रेकियोस्टमी की जांच के लिए श्री महावीर हॉस्पिटल ले जाया गया था, जहां हॉस्पिटल द्वारा मरीज को 4 घंटे स्ट्रेचर पर ही डॉक्टर का इंतजार करवाया गया। 4 घंटे बाद हॉस्पिटल के डॉक्टर सुधांशु किरण द्वारा मरीज को हल्के इन्फेक्शन की आशंका जताते हुए आईसीयू (ICU) में भर्ती कर लिया गया था। उल्लेखनीय हैं कि मरीज की श्री महावीर हॉस्पिटल में 13 जून को ब्रेन सर्जरी हुई थी और हॉस्पिटल की लापरवाही से उसे फंगल निमोनिया हो चुका था जिसके बाद लंबे इलाज के बाद उसे 11 अगस्त को डिस्चार्ज कर घर भेजा गया था।

लापरवाही का घटनाक्रम: जहां से बिगड़ी बात
1. बिना तैयारी के निकाली गई सांस की नली (02 सितंबर)
मरीज के फेफड़ों में फंगल निमोनिया का गंभीर संक्रमण था। इसके बावजूद 02 सितंबर को उसकी ट्रैकियोस्टॉमी ट्यूब (Tracheostomy Tube – सांस की नली) निकाल दी गई और स्टोमा बंद कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि मरीज का कफ रिफ्लेक्स (बलगम बाहर फेंकने की क्षमता) जांचे बिना यह कदम जल्दबाजी में उठाया गया।
2. आईसीयू में सक्शनिंग की कमी और फेफड़ों में जमा बलगम
नली निकालने के बाद मरीज के सांस की नली में गाढ़ा बलगम (Thick Secretions) जमा होने लगा। आईसीयू स्टाफ द्वारा नियमित चेस्ट फिजियोथेरेपी और सक्शनिंग में बरती गई लापरवाही के कारण मरीज का दम घुटने लगा।

अस्पताल के डॉक्टर की नोट से समझिए मरीज की स्थिति क्या थी


3. आपातकालीन स्थिति में 7 घंटे का जानलेवा विलंब (03 सितंबर)
3 सितंबर को दोपहर 04:00 बजे आई एबीजी (ABG) जांच रिपोर्ट में मरीज के शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड (Hypercapnia) का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ पाया गया था। शाम 06:00 बजे मरीज का ब्लड प्रेशर गिरकर शॉक की स्थिति (90/60 mmHg) में पहुंच गया और सांस की गति 42 तक पहुंच गई। इसके बावजूद डॉक्टरों ने मरीज को दोबारा वेंटिलेटर नली (Re-intubation) डालने में 7 घंटे का जानलेवा विलंब किया गया। रात 11:00 बजे जब मरीज ‘रेस्पिरेटरी फेलियर’ (Respiratory Failure) में चला गया, तब हड़बड़ी में नली डाली गई, उस समय सांस की नली में भारी बलगम फंसा हुआ मिला।
4. सुविधाओं का अभाव और देर से रेफर करना
अस्पताल में पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों के विशेषज्ञ) की अनुपस्थिति के बावजूद मरीज को सही समय पर उच्च केंद्र (Higher Center) स्थानांतरित नहीं किया गया। जब मरीज की स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई, तब 04 सितंबर को 6:00 बजे उसे अत्यंत गंभीर स्थिति में रेफर किया गया, जहां रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों की मांग: सख्त कार्रवाई और लाइसेंस रद्द हो
मृतक आशुतोष के परिजनों का कहना है कि 23 साल के युवा की जान अस्पताल के कुप्रबंधन और लापरवाह रवैये की वजह से गई है। परिजनों ने राज्य मेडिकल काउंसिल (State Medical Council) से मांग की है कि:
1. मामले की जांच के लिए निष्पक्ष मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए।
2. आईसीयू के सीसीटीवी फुटेज और सक्शनिंग चार्ट्स की गहन जांच हो।
3. दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उनके मेडिकल लाइसेंस रद्द किए जाएं।

श्री महावीर हॉस्पिटल द्वारा कैसे झूठ का सहारा लेकर लोगों को किया जा रहा गुमराह

कल महावीर हॉस्पिटल द्वारा एक वीडियो जारी कर मरीज के परिजनों पर आरोप लगाए गए थे कि अस्पताल द्वारा मरीज को रेफर कर दिया गया था इसके बावजूद परिजनों की लेटलतीफी थी के कारण मरीज की मौत हुई जबकि मरीज को सुबह 5 से 6 बजे के बीच रेफर किया गया था जबकि रात 10:45 बजे डॉक्टर के नोट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया था कि मरीज का रेस्पिरेट्री फैलियर हो चुका हैं। दूसरी और वीडियो में यह भी कहा गया था कि मरीज का इलाज डॉ सुधांशु किरण द्वारा नहीं किया गया जबकि मरीज को अस्पताल में भर्ती डॉ सुधांशु किरण द्वारा ही किया गया था जिसका प्रमाण भी हमारे द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। जब मरीज के फेफड़ों में फंगल निमोनिया का गंभीर संक्रमण था तो फिर ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब क्यों निकाली गई और परिजनों से ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब खरीदवाने के बाद भी उस ट्यूब को स्थिति बिगड़ने से पूर्व फिर से लगा क्यों नहीं दिया गया??

फिलहाल इस मामले में स्वास्थ्य विभाग को शिकायत दे दी गई है मिली जानकारी के अनुसार इस मामले की जांच के लिए जांच टीम का गठन भी हो गया है, जल्द ही  इस मामले में जांच टीम द्वारा अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और मामले की सच्चाई सबके सामने होगी।

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