हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : जनपद पंचायत अंबिकापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) राजेश सिंह सेंगर और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच विवाद अब चरम पर पहुँच गया है। CEO को तत्काल पद से भारमुक्त करने की मांग को लेकर जिला सरपंच संघ ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जिलेभर के सरपंच एकजुट होकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुँचे और कलेक्टर अजीत बसंत को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच तथा स्थानांतरण आदेश के तत्काल पालन की मांग की।
सरपंच संघ ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले सात दिनों के भीतर CEO को अंबिकापुर जनपद पंचायत से भारमुक्त नहीं किया गया, तो पूरे जिले के सरपंच काम बंद कर धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
कार्यशैली पर गंभीर आरोप, अवैध मांग और दबाव का दावा
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में सरपंचों ने CEO की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। संघ का आरोप है कि विभिन्न ग्राम पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आए दिन अनावश्यक जांच, प्रशासनिक दबाव और कथित अवैध मांगों के कारण मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
सरपंचों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ इस तरह का पक्षपातपूर्ण और दबाव बनाने वाला रवैया बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संघ ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
सरईटिकरा सरपंच की गिरफ्तारी से भड़का आक्रोश
इस पूरे आंदोलन और आक्रोश के पीछे ग्राम पंचायत सरईटिकरा के सरपंच पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई को मुख्य वजह बताया जा रहा है। सरईटिकरा सरपंच पर गबन का आरोप लगाकर पुलिस और प्रशासन द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर एसडीएम न्यायालय में पेश किया गया था। इस कार्रवाई के बाद से ही जिलेभर के सरपंचों में गहरा असंतोष और आक्रोश व्याप्त था, जो सोमवार को कलेक्ट्रेट के घेराव के रूप में सामने आया।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन सरपंचों के इस 7 दिवसीय अल्टीमेटम पर क्या रुख अपनाता है और मामले को शांत कराने के लिए क्या कदम उठाता है।

