हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : लटोरी तहसील में पद के दुरुपयोग और नियमों को ताक पर रखने का यह मामला अब सीधे तौर पर प्रशासनिक अवहेलना और बड़ी लीपापोती की ओर इशारा कर रहा है। नए सनसनीखेज दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि छत्तीसगढ़ शासन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग मंत्रालय (नवा रायपुर) और कलेक्टर कार्यालय सूरजपुर के सख्त निर्देशों के बावजूद, सूरजपुर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी एसडीएम महोदया महीनों से कुंडली मारकर बैठी हैं। आरोपी तहसीलदार को अभयदान देने के लिए जांच प्रतिवेदन (Report) को दबाकर रखना अब उजागर हो चुका है।
मंत्रालय से आया था आदेश, SDM ने नहीं दिया भाव
आधिकारिक दस्तावेज़ के मुताबिक, आवेदिका मृण्मयी पाण्डेय द्वारा लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा के विरुद्ध पद के दुरुपयोग और सिविल सेवा आचरण नियमावली, 1964 के नियम 3(1), 3(2)(i) एवं 3(2)(iii) के उल्लंघन की गंभीर शिकायत की गई थी।
इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए दिनांक 09 मार्च 2026 को कलेक्टर कार्यालय सूरजपुर (शिकायत शाखा) ने पत्र क्रमांक 1428 जारी कर एसडीएम सूरजपुर को तत्काल नियमानुसार जांच कर कृत कार्यवाही से अवगत कराने का आदेश दिया था।
महीनों बीते… पर साहब का प्रतिवेदन अब भी ‘वांछित’ है!
इस बात को बीते तीन महीने से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन मजाल है कि अनुविभागीय अधिकारी (रा.) सूरजपुर के कानों पर जूं तक रेंगी हो।

दूसरा दस्तावेज़ दिनांक 09 जून 2026 इस प्रशासनिक नाकामी और जानबूझकर की जा रही देरी पर मुहर लगाता है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जब इस जांच की संपूर्ण दस्तावेज और सत्यापित छायाप्रति मांगी गई, तो जिला जनसूचना अधिकारी (कलेक्टर कार्यालय) को लिखित में यह जवाब देना पड़ा कि:
“उक्त के संबंध में चाही गई जानकारी अनुविभागीय अधिकारी (रा०) सूरजपुर जिला सूरजपुर को पत्र प्रारूप आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई है, प्रतिवेदन वांछित है।”

राजस्व विभाग में ‘वांछित है’ का सीधा मतलब यह होता है कि उच्च अधिकारियों के आदेश के बावजूद एसडीएम कार्यालय ने तीन महीने में जांच पूरी करने या उसका जवाब भेजने की जहमत नहीं उठाई।
जनता पूछ रही है तीखे सवाल:
यह सुस्ती है या सोची-समझी रणनीति?: जब मामला सीधे तौर पर मंत्रालय (नवा रायपुर) के संदर्भ से जुड़ा हो, तो आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि एसडीएम सूरजपुर तीन महीने बाद भी प्रतिवेदन जमा नहीं कर पाईं?
किसे बचाने का हो रहा प्रयास?: क्या जांच रिपोर्ट को इसलिए लटकाया जा रहा है ताकि समय बीतने के साथ मामला ठंडा पड़ जाए और आरोपी तहसीलदार सुरेंद्र साय पैंकरा के खिलाफ कोई बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई न हो सके?
कलेक्टर के आदेश की कीमत क्या?: जब डिप्टी कलेक्टर और कलेक्टर कार्यालय के पत्रों को अनुविभाग स्तर पर इस तरह नजरअंदाज किया जाएगा, तो जिले में न्याय और सुशासन की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
दस्तावेजों की जुबानी यह साफ है कि लटोरी तहसीलदार मामले में केवल नियम ही नहीं तोड़े गए, बल्कि जांच प्रक्रिया को भी कछुए की गति से चलाकर न्याय का गला घोंटा जा रहा है। अब देखना यह है कि जून महीने में ‘प्रतिवेदन वांछित’ होने की बात सामने आने के बाद, क्या कलेक्टर सूरजपुर इस बेहद सुस्त और संदेहास्पद प्रशासनिक रवैये पर कड़ा रुख अख्तियार करेंगे?



