8 मई को राजमोहनी भवन में मंत्री राजेश अग्रवाल की मौजूदगी में हुआ था भव्य आयोजन….
43 नवविवाहित जोड़ों के खाते अब भी खाली, ‘सम्मान और सामाजिक सुरक्षा’ के दावों पर उठे सवाल…
हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : राज्य सरकार द्वारा गरीब परिवारों की बेटियों की सम्मानजनक विदाई और महिला सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ अम्बिकापुर में प्रशासनिक लेटलतीफी का शिकार होती नजर आ रही है। स्थानीय स्तर पर भव्य शासकीय आयोजन संपन्न हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि अब तक कई नवविवाहित जोड़ों के बैंक खातों में नहीं पहुंच सकी है। इसके चलते नवदंपति और उनके परिजन सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
8 मई को हुआ था भव्य आयोजन, पर खाते अब भी खाली
गौरतलब है कि बीते 8 मई 2026 को अम्बिकापुर के राजमोहनी भवन में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत एक गरिमामय सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल शामिल हुए थे। शासकीय दावों के अनुसार, इस भव्य आयोजन में शहनाइयों की गूंज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 43 नवविवाहित जोड़ों ने नए जीवन की शुरुआत की थी। इस दौरान मंत्री अग्रवाल ने साय सरकार को बेटियों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बताते हुए जोड़ों को सुखद जीवन का आशीर्वाद दिया था।
परंतु, इस भावुक विदाई और बड़े-बड़े वादों के हफ्तों बाद भी जमीनी हकीकत यह है कि हितग्राहियों के खाते खाली हैं। नियमानुसार विवाह संपन्न होने के तत्काल बाद यह राशि वधू के बैंक खाते में अंतरित कर दी जानी चाहिए थी, जो अब तक नहीं हुई।
₹35,000 की आर्थिक सहायता का नियम, पर धरातल पर इंतजार
योजना के आधिकारिक प्रावधानों के तहत, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को नए जीवन की शुरुआत आत्मसम्मान और मजबूती से करने के लिए ₹35,000 की सीधी आर्थिक सहायता (बैंक ड्राफ्ट/DBT) प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त नवदम्पत्तियों को आवश्यक घरेलू उपहार सामग्री और कपड़े-बर्तन भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
8 मई को पूरे छत्तीसगढ़ में विभिन्न जिलों को मिलाकर कुल 2,188 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे, जिसे सरकार अपनी ‘जनकल्याणकारी सोच और सामाजिक प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण’ बता रही है। लेकिन अम्बिकापुर के 43 जोड़ों के मामले में यही प्रतिबद्धता फाइलों में दबी नजर आ रही है।
परिजनों में आक्रोश, उठ रहे हैं गंभीर सवाल
आर्थिक रूप से कमजोर (BPL) परिवारों के लिए यह ₹35,000 की राशि बेहद महत्वपूर्ण होती है। कई परिजनों का कहना है कि विवाह के बाद के खर्चों और गृहस्थी जमाने के लिए वे इस राशि पर आश्रित थे। अधिकारियों द्वारा बार-बार केवल “प्रक्रिया चल रही है” का रटा-रटाया आश्वासन दिया जा रहा है, जिससे हितग्राहियों में भारी आक्रोश है।
मुख्य सवाल जो स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़े करते हैं
जब राजमोहनी भवन के मंच से सरकार की संवेदनशीलता के बड़े-बड़े दावे किए गए, तो 8 मई को हुए विवाह की राशि जून के मध्य तक वधुओं के खातों में क्यों नहीं पहुंची?
क्या बजट की कमी है, तकनीकी खामी है या फिर महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की लापरवाही, जिसके कारण इन 43 गरीब परिवारों को परेशान होना पड़ रहा है?
विभागीय उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, ताकि राजमोहनी भवन में लिए गए सात फेरों और सरकार के ‘महिला सशक्तिकरण’ के दावों का वास्तविक लाभ इन बेटियों को मिल सके।



