हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर (सरगुजा) : युवाओं के भविष्य और मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने का एक बड़ा खेल सरगुजा संभाग के मुख्यालय अम्बिकापुर में धड़ल्ले से जारी है। शहर और आसपास के इलाकों में वर्तमान में 20 से अधिक ऐसे पैरामेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ शासन और पैरामेडिकल काउंसिल के कड़े नियमों को पूरी तरह ठेंगा दिखा रहे हैं। इन संस्थानों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर प्रशासन से लेकर विभाग तक कई लिखित शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन रसूख और सांठगांठ के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
नियमों की उड़ रही धज्जियां: सिर्फ कागजों पर हैं अस्पताल और लैब्स
‘छत्तीसगढ़ सह चिकित्सा परिषद अधिनियम, 2001’ और चिकित्सा शिक्षा विभाग (DME) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी पैरामेडिकल संस्थान को मान्यता तभी मिल सकती है जब वे तय मापदंडों को पूरा करें। लेकिन अम्बिकापुर में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है:
बिना वैध अस्पताल संबद्धता (MOU) के संचालन: नियमतः हर कॉलेज के पास स्वयं का या किसी मान्यता प्राप्त 100 बेड के अस्पताल के साथ 30 वर्षों का क्लीनिकल अनुबंध होना अनिवार्य है, ताकि छात्र व्यावहारिक प्रशिक्षण (Practical Training) ले सकें। लेकिन यहाँ अधिकांश संस्थान सिर्फ 10-20 कमरों के भवनों में बिना किसी चालू अस्पताल के चल रहे हैं।
लापता हैं सुसज्जित प्रयोगशालाएं (Labs): पैथोलॉजी (DMLT/BMLT), एक्स-रे और ओटी तकनीशियन जैसे कोर्सेज के लिए आधुनिक माइक्रोस्कोप, सेंट्रीफ्यूज और बायोकेमिस्ट्री लैब्स अनिवार्य हैं। शहर के कई कॉलेजों में छात्रों को बिना प्रैक्टिकल के सिर्फ थ्योरी पढ़ाकर डिग्री-डिप्लोमा थमाया जा रहा है।
फर्जी और अयोग्य फैकल्टी का सहारा: नियमों के मुताबिक कोर्सेज के संचालन के लिए एम.डी. (पैथोलॉजी/रेडियोलॉजी) या योग्य स्नातकोत्तर शिक्षक होने चाहिए। यहाँ एक ही शिक्षक के नाम पर कई कॉलेजों की संबद्धता कागजों पर दिखा दी जाती है, जबकि असल में योग्य स्टाफ गायब है।
शिकायतों का अंबार, लेकिन प्रशासन की ‘रहस्यमयी’ चुप्पी
स्थानीय जागरूक नागरिकों और छात्र संगठनों द्वारा इस फर्जीवाड़े के खिलाफ जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और आयुष विश्वविद्यालय को साक्ष्यों के साथ कई बार लिखित शिकायतें सौंपी जा चुकी हैं। इन शिकायतों में साफ तौर पर उन कॉलेजों की सूची और उनकी कमियों का ब्योरा दिया गया है जो नियमों को पूरा नहीं करते।
बावजूद इसके, अब तक स्थानीय प्रशासन या संयुक्त निरीक्षण टीम (Inspection Team) द्वारा इन संदिग्ध संस्थानों पर कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई या उन्हें सील करने की जहमत नहीं उठाई गई है। प्रशासन की यह सुस्ती और उदासीनता सीधे तौर पर इन शिक्षा माफियाओं को संरक्षण देने जैसी प्रतीत होती है।
छात्रों के भविष्य और जनता के स्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़
पैरामेडिकल स्टाफ (जैसे लैब तकनीशियन, एक्स-रे तकनीशियन) स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ होते हैं। डॉक्टरों का इलाज इन्हीं की रिपोर्ट्स पर निर्भर करता है।
जब इन कॉलेजों से बिना किसी प्रैक्टिकल ज्ञान और ट्रेनिंग के छात्र डिग्रियां लेकर निकलेंगे, तो वे मरीजों की जांच रिपोर्ट सही कैसे बनाएंगे? यह न केवल छात्रों के करियर के साथ धोखा है, बल्कि भविष्य में मरीजों की जान को सीधे जोखिम में डालने जैसा है।
स्थानीय स्तर पर उठ रही मांगों के अनुसार, अब समय आ गया है कि उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर अम्बिकापुर के इन सभी 20 से अधिक पैरामेडिकल कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पताल अनुबंध और काउंसिल की एनओसी की भौतिक जांच (Physical Verification) की जाए और नियम विरुद्ध पाए जाने वाले संस्थानों को तत्काल बंद कर उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।



