पटवारी पर रिश्वतखोरी का गंभीर आरोप, वृद्ध ग्रामीण सेवक से लिए 4 हजार, फिर भी नहीं किया अभिलेख सुधार…

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हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर भूषण बघेल : प्रेमनगर तहसील अंतर्गत राजस्व व्यवस्था में मनमानी और भ्रष्टाचार का एक और गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम बकिरमा निवासी वृद्ध ग्रामीण सेवक राम ने पटवारी पवन साय पर रिश्वत मांगने और राशि लेने के बावजूद कार्य नहीं करने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपी है।

शिकायत के अनुसार सेवक राम के नाम कुल 14 भू-खंड दर्ज हैं, लेकिन कम्प्यूटरीकृत अभिलेख में गंभीर लापरवाही करते हुए ऑनलाइन बी-1 में केवल 11 भू-खंड ही प्रदर्शित हो रहे हैं। जब उन्होंने तहसील कार्यालय प्रेमनगर में वर्ष 2013-14 का हस्तलिखित बी-1 अभिलेख देखा, तो सभी छूटे हुए भू-खंड उसमें स्पष्ट रूप से दर्ज पाए गए। इसके पश्चात अभिलेख सुधार के लिए उन्होंने पटवारी पवन साय से संपर्क किया।

सेवक राम का आरोप है कि अभिलेख सुधार के बदले पटवारी ने उनसे 5,000 रुपए की मांग की। मजबूरीवश उन्होंने 4,000 रुपए दे दिए, लेकिन इसके बावजूद आज तक अभिलेख में सुधार नहीं किया गया। उनका कहना है कि वे पिछले कई महीनों से तहसील और पटवारी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, किंतु हर बार “कल आना”, “प्रणाली बंद है”, “आज कार्यभार अधिक है” जैसे बहानों से उन्हें टाल दिया जाता रहा।

अभिलेख अद्यतन नहीं होने के कारण सेवक राम को ऋण पुस्तिका नवीनीकरण, कृषि कार्य तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद समस्या यथावत बनी हुई है।

ग्राम बकिरमा एवं कोट्या हल्का के ग्रामीणों ने भी पटवारी पवन साय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों के कार्य जानबूझकर लंबित रखना, अनावश्यक बहाने बनाना और अवैध वसूली की मांग करना आम बात हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई किसान पहले भी इसी प्रकार की परेशानी झेल चुके हैं।

पीड़ित सेवक राम ने कलेक्टर से मांग की है कि उनके सभी छूटे हुए भू-खंड तत्काल बी-1 अभिलेख में दर्ज कर सुधार किया जाए तथा इस प्रकार की अवैध वसूली और लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि वृद्ध एवं छोटे किसानों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार अपमान और परेशानियों का सामना न करना पड़े।

प्रेमनगर क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस गंभीर शिकायत पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होती है अथवा मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

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