हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबियों और सहयोगियों के खिलाफ एक साथ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार को राज्य के कई हिस्सों में ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद अब इस आंच की तपन प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई है।
बलरामपुर सर्किट हाउस में कड़ी सुरक्षा के बीच पूछताछ
ईडी की एक विशेष टीम दो गाड़ियों में सवार होकर बलरामपुर पहुंची और पूर्व सीएम भूपेश बघेल के ओएसडी (OSD) रह चुके चेतन बरघारिया को तलब कर उनसे घंटों पूछताछ की। चेतन बरघारिया वर्तमान में बलरामपुर में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। ईडी अधिकारियों द्वारा उन्हें बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में रखकर सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सर्किट हाउस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। हालांकि, टीम किस विशिष्ट मामले या लेन-देन को लेकर सवाल-जवाब कर रही है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
भूपेश बघेल के पूर्व PA समेत कई ठिकानों पर दबिश
बलरामपुर से पहले ईडी की टीमों ने दुर्ग, भिलाई और रायपुर सहित आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापा मारा था। इनमें भूपेश बघेल के पूर्व निजी सहायक (PA) के. के. चंद्राकर का भिलाई स्थित आवास भी शामिल है।
CGPSC घोटाले से जुड़ रहे हैं तार?
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कवायद छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) परीक्षा (2020-2021) में हुई भारी गड़बड़ी, बैकड्रॉप सेटिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से जुड़ी मानी जा रही है। आरोप है कि तत्कालीन सरकार में रसूखदार नेताओं और वरिष्ठ अफसरों के रिश्तेदारों व करीबियों को नियमों को ताक पर रखकर डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे उच्च पदों पर चयनित कराया गया था।
सीबीआई (CBI) की प्राथमिक प्राथमिकी के आधार पर ईडी इस पूरे वित्तीय लेनदेन और पद के दुरुपयोग की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इस मामले में सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टॉमन सिंह सोनवानी सहित कई आरोपियों पर पहले ही शिकंजा कसा जा चुका है।
अपर कलेक्टर चेतन बोरघारिया से हो रही इस पूछताछ के बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।



