खुद की हत्या के लिए दी 2 लाख की सुपारी: अक्षत अग्रवाल हत्याकांड मामले में आरोपी संजीव मंडल को आजीवन उम्रकैद…

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हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : शहर के बहुचर्चित अक्षत अग्रवाल हत्याकांड मामले में न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है। सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने हत्या के दोषी सुभाषनगर निवासी संजीव मंडल उर्फ भानु को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी का नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया था।
अतिरिक्त लोक अभियोजक विनोद कुमार दुबे और प्रकाशमणि त्रिपाठी के अनुसार, 20 अगस्त 2024 की शाम अक्षत अग्रवाल अपनी कार से निकला था। मोबाइल स्विच ऑफ होने पर परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी और अगले दिन, 21 अगस्त की सुबह मेंड्रा के जंगल में अक्षत की गोली लगी लाश मिली थी। पुलिस जांच के बाद आरोपी संजीव मंडल को गिरफ्तार किया गया था।
सुपारी देकर कराई खुद की हत्या
मामले की सुनवाई और साक्ष्यों (नार्को व पॉलीग्राफ टेस्ट और मेमोरेंडम कथन) के अवलोकन से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपी पूर्व में 15-20 दिनों तक अक्षत की दुकान पर काम कर चुका था। विवादित और आपराधिक छवि वाले संजीव को अक्षत ने खुद की हत्या करने के लिए 2 लाख रुपये की सुपारी दी थी। 20 अगस्त 2024 की शाम अक्षत आरोपी को कार में बैठाकर जंगल ले गया वहां उसने पिस्टल में गोली लोड कर आरोपी को दी और सीने पर गोली मारने को कहा। संजीव ने तीन गोलियां चलाकर अक्षत की हत्या कर दी थी।
हत्या के बाद आरोपी ने पिस्टल को इंजीनियरिंग कॉलेज के पास छिपा दिया था, जिसे पुलिस ने जब्त किया। इसके अलावा आरोपी के घर के बेडरूम से मृतक के सोने-हीरे के जेवर और सुपारी के पैसों में से बचे 48 हजार रुपये नकद बरामद किए गए थे।
अदालत ने आरोपी संजीव मंडल को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और आर्म्स एक्ट की धारा 25 व 27 के तहत दोषी पाया। BNS धारा 103(1) के तहत आजीवन सश्रम कारावास और ₹2,000 जुर्माना, आर्म्स एक्ट धारा 25 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹1,000 जुर्माना और आर्म्स एक्ट धारा 27 के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹1,000 जुर्माना लगाया।
अर्थदंड न देने पर आरोपी को प्रत्येक धारा में 1-1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

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